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At an impressive inauguration ceremony of “Kankariya Carnival”, Chief Minister Shri Narendrabhai Modi dedicated a Mini-Train to the Children. He had made an announced,” Today is the birthday of our former Prime Minister Shri Atal Bihari Vajpayee, to mark his birth day, we would identify the Mini-Train as Atal-Express.”

Chief Minister flagged off the train, which also carried a group of mentally challenged children.

Chief Minister Inaugurates Kankariya Carnival

Kankariya Carnival to be held every year on 25th December

Adds soul to the Cultural Identity of Ahmedabad: Kankariya to become a Benchmark of Clean Ahmedabad

Dedication of Kankariya Lake Front Project marks the 1st Anniversary of present Government

Enthusiasm is palpable, jubilation is justified. Chief Minister inaugurated the Kankariya Carnival today. He said,” Kankariya Carnival would be celebrated every year on 25th December. It would infuse soul in to the cultural identity of Ahmedabad city.” The Kankariya Lake Front Project worth Rs.36 Crores, which was dedicated by the Chief Minister today.

In the history of last 550 years, during the 19th century, Kankariya was decorated twice only. Chief Minister stated that Kankariya is not only an ornament to Ahmedabad city but it is a jewel studded ornament for entire Gujarat. But, nobody ever spared a thought about its development.

Inspite of its innovative nature and the ever changing currents, Gujarat was ailing of stagnation. Visionary and welfare project remained oblivion. Ahmedabad was known world over for its textile industries. The textile industry lost its sheen, and gradually its glory was diminished. No one bothered about the devastating economy of Ahmedabad. “By implementing ambitious and public welfare oriented projects, we have made a history,” said the C.M.

Today is the birthday of our former Prime Minister Shri Atal Bihari Vajpayee, on the day the Carnival is organised and a Mini Train has been dedicated, naming it “Atal-Express.” On the one hand, we witness the narrow mindsets of Pradeshvad; against that, Gujarat has invited artists from all the states reflecting their cultures. Chief Minister described it as a “Unite India Festival.”

The vibrancy and throbbing culture of Gujarat is being experienced through the carnival. He expressed his confidence that, the carnival would definitely infuse new soul in the cultural life of Ahmedabad.

Mayor of Ahmedabad, Shri Kanaji Thakor said,” The vision of providing world class infrastructure facilities to the city is powered by Shri Narendrabhai's conviction and commitment. Under Kankariya Lake Front Development project, various amenities and facilities are created, which adds the glittering glory to the metro city. Special thrust is given to add recreational facilities. “He outlined the details of the project, which is immense and unique in its kind, the Kankariya Lake Front Development Project, which has been completed at the project cost of Rs.36 Crores.

Children and citizens greeted the Chief Minister when he arrived to flag off the decorated Mini-Train-“Atal-Express.” The Rushi-Kumars recited Taruvar-Stuti.

Speaker of the Assembly, Shri Ashokbhai Bhatt, BJP State Unit President Shri Purushottam Rupala, Revenue Minister Smt Anandiben Patel, State Ministers, M.P.s Shri Harin Pathak, Shri Ratilal Verma, MLAs, eminent leaders, Municipal Commissioner I.P Gautam were among the others who attended the function.

Information Bureau, Government of Gujarat, Date: 25/12/2008

 

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नमस्ते, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र भाई पटेल जी, केंद्रीय मंत्री परिषद के मेरे सहयोगी श्री अश्विनी वैष्णव जी, श्री राजीव चंद्रशेखर जी, अलग-अलग राज्यों से जुड़े सभी प्रतिनिधि, डिजिटल इंडिया के सभी लाभार्थी, स्टार्ट अप्स और इंडस्ट्री से जुड़े सभी साथी, एक्सपर्ट्स, अकदमीशियनस, researchers, देवियों और सज्जनों!

आज का ये कार्यक्रम, 21वीं सदी में निरंतर आधुनिक होते भारत की एक झलक लेकर आया है। टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल पूरी मानवता के लिए कितना क्रांतिकारी है, इसका उदाहरण भारत ने डिजिटल इंडिया अभियान के तौर पर पूरे विश्व के सामने रखा है।

मुझे खुशी है कि आठ वर्ष पहले शुरू हुआ ये अभियान, बदलते हुए समय के साथ खुद को विस्तार देता रहा है। हर साल डिजिटल इंडिया अभियान में नए आयाम जुड़े हैं, नई टेक्नोलॉजी का समावेश हुआ है। आज के इस कार्यक्रम में जो नए प्लेटफॉर्म, नए प्रोग्राम लॉन्च हुए हैं, वो इसी श्रंखला को आगे बढ़ा रहे हैं। अभी आपने छोटे-छोटे वीडियो में देखा, myScheme हो, भाषिणी-भाषादान हो, Digital India - जेनीसिस हो, Chips to startup program हो, या बाकी सारे प्रॉडक्ट्स, ये सारे Ease of living और Ease of doing business को मजबूती देने वाले हैं। विशेषतौर पर इनका बड़ा लाभ भारत के स्टार्ट अप इकोसिस्टम को होगा।

साथियों,

समय के साथ जो देश आधुनिक टेक्नोलॉजी को नहीं अपनाता, समय उसे पीछे छोड़कर आगे निकल जाता है और वो वहीं का वहीं रह जाता है। तीसरी औद्योगिक क्रांति के समय भारत इसका भुक्तभोगी रहा है। लेकिन आज हम ये गर्व से कह सकते हैं कि भारत चौथी औदयोगिक क्रांति, इंडस्ट्री 4.0, आज भारत गर्व से कह सकता है कि हिन्‍दुस्‍तान दुनिया को दिशा दे रहा है। और मुझे इस बात की दोहरी खुशी है कि गुजरात ने इसमें भी एक तरह से पथ-प्रदर्शक की भूमिका निभाई है।

थोड़ी देर पहले यहां डिजिटल गवर्नेंस को लेकर गुजरात के बीते 2 दशकों के अनुभवों को दिखाया गया है। गुजरात देश का पहला राज्य था जहां Gujarat State Data Centre (GSDC), Gujarat Statewide Area Network (GSWAN), e-Gram centers, और ATVT / Jan Seva Kendra जैसे pillars खड़े किए गए।

सुरत, बारडोली के पास जब सुभाष बाबु कोंग्रेस के अध्यक्ष बने थे, वहां सुभाष बाबु कि याद में कार्यक्रम किया और ई विश्वग्राम का उस समय लोन्चिंग किया था।

गुजरात के अनुभवों ने 2014 के बाद राष्ट्रीय स्तर पर टेक्नॉलॉजी को गवर्नेंस का व्यापक हिस्सा बनाने में बहुत मदद की है, धन्‍यवाद गुजरात। यही अनुभव डिजिटल इंडिया मिशन का आधार बने। आज जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं तो आपको महसूस होता है कि इन 7-8 सालों में डिजिटल इंडिया ने हमारा जीवन कितना आसान बना दिया है। 21वीं सदी में जिनका जन्म हुआ है, जो हमारी युवा पीढ़ी है, जिसका जन्‍म 21वीं सदी में हुआ है, उनके लिए तो आज डिजिटल लाइफ बहुत Cool लगती है, फैशन स्‍टेटमेंट लगता है उनको।

लेकिन सिर्फ 8-10 साल पहले की स्थितियों को याद कीजिए। Birth certificate लेने के लिए लाइन, बिल जमा करना है तो लाइन, राशन के लिए लाइन, एडमिशन के लिए लाइन, रिजल्ट और सर्टिफिकेट के लिए लाइन, बैंकों में लाइन, इतनी सारी लाइनों का समाधान भारत ने Online होकर कर दिया। आज जन्म प्रमाण पत्र से लेकर वरिष्ठ नागरिक की पहचान देने वाले जीवन प्रमाण पत्र तक, सरकार की अधिकतर सेवाएं डिजिटल हैं वरना पहले सीनियर सिटिजन को खास करके पेंशनर्स को जा करके कहना पड़ता था कि मैं जिंदा हूं। जिन कामों के लिए कभी कई-कई दिन लग जाते थे वो आज कुछ पलों में हो जाते हैं।

साथियों,

आज डिजिटल गवर्नेंस का एक बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर भारत में है। जनधन-मोबाइल और आधार, GEM, इसकी जो त्रिशक्ति का देश के गरीब और मिडिल क्लास को सबसे अधिक लाभ हुआ है। इससे जो सुविधा मिली है और जो पारदर्शिता आई है, उससे देश के करोड़ों परिवारों का पैसा बच रहा है। 8 साल पहले इंटरनेट डेटा के लिए जितना पैसा खर्च करना पड़ता था, उससे कई गुना कम यानी एक प्रकार से नगण्‍य, उस कीमत में आज उससे भी बेहतर डेटा सुविधा मिल रही है। पहले बिल भरने के लिए, कहीं एप्लीकेशन देने के लिए, रिज़र्वेशन के लिए, बैंक से जुड़े काम हों, ऐसी हर सेवा के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। रेलवे का आरक्षण करवाना हो और गांव में रहता हो तो बेचारा पूरा दिन खपा करके शहर जाता था, 100-150 रुपया बस का किराया खर्च करताथा, और फिर लाइन में लगता था रेलवे आरक्षण के लिए। आज वो कॉमन सर्विस सेंटर पर जाता है और वहीं से उसको, यह मेरी कॉमर्स सर्विस वाली फ़ौज देखती है। और वहीं से उसका काम हो जाता है, गांव में ही हो जाता है। और गांव वालों को भी पता है कहां ये व्‍यवस्‍था है। इसमें भी किराए-भाड़े, आना-जाना, दिन लगाना, सभी खर्चों में कटौती आई है। गरीब, मेहनत-मज़दूरी करने वालों के लिए तो ये बचत और भी बड़ी है क्योंकि उनका पूरा दिन बच जाता है।

और कभी-कभी हम सुनते थे ना Time is money. सुनने और कहने में तो अच्‍छा लगता है लेकिन जब उसका अनुभव सुनते हैं तो दिल को छू जाता है। मैं अभी काशी गया था, तो काशी में रात को…दिन में तो इधर-उधर जाता हूं तो ट्रैफिक और लोगों को परेशानी तो फिर मैं रात को एक-डेढ़ बजे रेलवे प्‍लेटफॉर्म पर चला गया देखने के लिए कि भई कहां क्‍या हाल है। क्‍योंकि वहां का एमपी हूं तो काम तो करना है। तो मैं वहां पैसेंजरों से बात कर रहा था, स्‍टेशन मास्‍टर से बात कर रहा था। क्‍योंकि मेरा सरप्राइज विजिट था, किसी को बताकर तो गया नहीं था। तो मैंने कहा भई ये जो वंदे भारत ट्रेन चल रही है क्‍या अनुभव है और occupancy कैसी लगी...अरे बोले साहब इतनी उसकी मांग है कि हमें कम पड़ रही हैं। मैंने कहा वो तो ट्रेन थोड़ी महंगी है, इसकी टिकट ज्‍यादा लगती है, इसमें लोग क्‍यों जाते हैं। बोले साहब, इसमें मजदूर लोग सबसे ज्‍यादा जाते हैं, गरीब लोग सबसे ज्‍यादा जाते हैं। मैंने कहा कैसे भई! मेरे लिए सरप्राइज था। बोले वो दो कारणों से जाते हैं। एक- बोले वंदे भारत ट्रेन में स्‍पेस इतनी है‍ कि सामान उठाकर लेकर जाते हैं तो रखने की जगह मिल जाती है। गरीब का अपना एक हिसाब है। और दूसरा- समय जाने में चार घंटे बच जाता है तो वहां तुरंत काम पर लगा जाता हूं तो छह-आठ घंटे में जो कमाई होती है टिकट तो उससे भी कम में पड़ जाती है। Time is money, कैसे गरीब हिसाब लगाता है, बहुत पढ़े-लिखे लोगों को इसकी समझ कम होती है।

साथियों,

ई-संजीवनी जैसी टेलिकंसल्टेशन की जो सेवा शुरू हुई है। मोबाइल फोन से बड़े-बड़े अस्‍पताल, बड़े-बड़े डॉक्‍टरों के साथ प्राइमरी सारी चीजें पूरी हो जाती हैं। और इसके माध्यम से अब तक 3 करोड़ से अधिक लोगों ने घर बैठे ही अपने मोबाइल से अच्‍छे से अच्‍छे अस्‍पताल में, अच्‍छे से अच्‍छे डॉक्टर से कंसल्ट किया है। अगर उनको डॉक्टर के पास जाना पड़ता तो आप कल्‍पना कर सकते हैं कितनी कठिनाइयां होती, कितना खर्चा होता। ये सारी चीजें डिजिटल इंडिया सेवा के कारण जरूरत नहीं पड़ेंगी।

साथियों,

सबसे बड़ी बात, जो पारदर्शिता इससे आई है, उसने गरीब और मध्यम वर्ग को अनेक स्तरों पर चलने वाले भ्रष्टाचार से मुक्ति दी है। हमने वो समय देखा है जब बिना घूस दिए कोई भी सुविधा लेना मुश्किल था। डिजिटल इंडिया ने सामान्य परिवार का ये पैसा भी बचाया है। डिजिटल इंडिया, बिचौलियों के नेटवर्क को भी समाप्त कर रहा है।

और मुझे याद है एकबार विधान सभा में चर्चा हुई थी, आज इस चर्चा को याद करुं तो मुझे लगता है कि विधानसभा में ऐसी चर्चा होती थी। कुछ पत्रकार सब ढूंढ लेंगे। विषय ऐसा था की जो विधवा पेन्शन मिलता है तो उस समय मैंने कहा कि एक काम करो भाई, पोस्ट ओफिस में खातें खुलवा दिजिए और वहां उनकी फोटो हो और यह सब व्यवस्था हो और पोस्ट ओफिस में जाकर जो विधवा बहन हो उसे पेन्शन मिल जाए। हंगामा हो गया, तुफान हो गया, मोदी साहब आप क्या लाए हो विधवा बहन घर के बाहर कैसे निकले? वह बेंक या पोस्ट ओफिस में कैसे जाएं, उसे पैसे मिले कैसे, सब अलग अलग प्रकार से भाषण में आप देखों तो मजा आएं ऐसा बोले थे। मैंने तो कहा कि मुझे तो इस रास्ते पर जाना है आप मदद करें तो अच्छा है। ना की मदद लेकिन पर हम तो गए क्योंकि जनताने मदद की है ना? लेकिन ये हंगाम क्यों कर रहे थे साहब, उन्हें विधवा की चिंता नहीं थी, जब मैं पोस्ट ओफिस में फोटो, पहचान ऐसी सब व्यवस्थाएं की तब डिजिटल कि दुनिया तो इतने आगे बढी नही थी। आपको आश्चर्य होगा की अनेक विधवाएं ऐसी मिली कि जो बेटी का जन्म ही नहीं हुआ था और विधवा हो गई थी और पेन्शन जा रहा था। ये किसके खाते में जाता होगा ये आपको समज आया होगा। तो फिर कोलाहल होगा कि नहीं होगा। ऐसे सब बूच बंद कर दें तो तकलीफ तो होगी ही। आज टेकनोलोजी का उपयोग करके डायरेक्‍ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से बीते 8 साल में 23 लाख करोड़ रुपए से अधिक सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजे गए हैं। इस टेक्नोलॉजी की वजह से देश के 2 लाख 23 हजार करोड़ रुपए यानी करीब-करीब सवा दो लाख करोड़ रुपये जो किसी और के हाथ में, गलत हाथ में जाते थे, वो बच गए हैं, दोस्‍तों।

साथियों,

डिजिटल इंडिया अभियान ने जो एक बहुत बड़ा काम किया है, वो है शहर और गांवों को बीच की खाई को कम करना। हमें याद होगा, शहरों में तो फिर भी कुछ सुविधा थी, गांवों के लोगों के लिए तो हालात और भी मुश्किल भरे थे। गांव और शहर की खाई भरेगी, इसकी भी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था। गांव में छोटी सी छोटी सुविधा के लिए भी आपको ब्लॉक, तहसील या जिला हैडक्वार्टर के दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। ऐसी सारी मुश्किलों को भी डिजिटल इंडिया अभियान ने आसान बनाया है और सरकार को नागरिक के द्वार पर, उसके गांव, घर और उसकी हथेली में फोन पर लाकर खड़ा कर दिया है।

गांव में सैकड़ों सरकारी सेवाएं डिजिटली देने के लिए पिछले 8 वर्ष में 4 लाख से अधिक नए कॉमन सर्विस सेंटर जोड़े जा चुके हैं। आज गांव के लोग, इन केंद्रों से डिजिटल इंडिया का लाभ ले रहे हैं।

मैं वहां दाहोद आया था तो दाहोद में मेरे आदिवासी भाईओ-बहनों से मिलना हुआ। वहां एक दिव्यांग कपल था। 30-32 साल कि आयु होगी, उन्होंने मुद्रा योजना में से पैसे लिए, कम्प्युटर का थोडा बहुत सिखे, और पति पत्नीने कोमन सर्विस सेन्टर शुरु किया, दाहोद के आदिवासी जिले के एक छोटे से गांव में। वह भाई और उनके पत्नी मुझे मिले तो उन्होंने मुझे कहा की साहब, एवरेज मेरी प्रति मास 28000 रुपए की आय है, गांव में लोग अब मेरे यहां ही सेवा ले रहे है। डिजिटल ईन्डिया की ताकत देखों भाई

सवा लाख से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर ग्रामीण स्टोर, अब e-commerce को भी ग्रामीण भारत तक ले जा रहे हैं।

एक दुसरा अनुभव, व्यवस्थाओँ का किस तरह लाभ लिया जा सकता है। मुझे याद है जब मैं यहां गुजरात में था तो किसानों को बीजली का बिल चूकाने के लिए समस्या होती थी, पैसे लेने के स्थान 800-900 थे। देरी हो तो नियम के अनुसार बीजली का कनेक्शन कट जाता था, कट जाएं तो फिर से नया कनेक्शन लेना पडे तो फिर से पैसे देने पडते थे। हमने भारत सरकार को उस समय बिनती की, अटलजी की सरकार थी, अनुरोध किया कि ये पोस्ट ओफिस में चालु कर दिजिएना, बीजली का बिल हमारे पोस्ट ओफिस वालें लेना शुरु करे ऐसा कर दिजिए, अटलजीने मेरीबात मानी और गुजरात में किसानों को समस्या से मुक्ति मिल गई, व्यवस्थाओं का उपयोग किस तरह किया जा सकता है ऐसा एक प्रयोग मैंने दिल्ही में जाकर किया, आदत जाएगी नहीं, क्योंकी हम लोग अहमदाबादी, सिंगल फेर डबल जर्नी की आदत पडी है, इसलिए रेलवे को खुद का वाईफाई, बहुत स्ट्रोंग नेटवर्क है, तो उस समय हमारे रेलवे के मित्रो को मैंने कहा , ये 2019 के चुनाव से पहले कि बात है। मैंने उनसे कहा कि रेलवे के जो प्लेटफोर्म है उनके उपर वाईफाई मुफ्त कर दिजिए। और आसपास के गांवों के बच्चों को वहां आकर पढना हो तो आएं और उन्हें कनेक्टिविटी मिल जाएं और उन्हें जो पढना लिखना हो करें, आपको आश्चर्य होगा कि मैं एकबार वर्च्युअली कुछ विद्यार्थीओ के साथ बात कर रहा था। बहुत सारे लोग रेलवे प्लेटफोर्म पर मुफ्त वाईफाई कि मदद से कोम्पिटिटिव परीक्षा की तैयारी करते थे और पास होते थे, कोचिंग क्लास में जाना नहीं, खर्च करना नहीं, घर छोडना नहीं, बस हमें बा के हाथ का रोटला मिले और पढने का, रेलवे के प्लेटफोर्म का उपयोग डिजिटल ईन्डिया की ताकत देखें दोस्तो

पीएम स्वामित्व योजना, शायद शहर के लोगों का बहुत कम इस पर ध्‍यान गया है। पहली बार शहरों की तरह ही गांव के घरों की मैपिंग और डिजिटल लीगल डॉक्यूमेंट ग्रामीणों को देने का काम चल रहा है। ड्रोन गांव के अंदर जा करके हर घर की ऊपर से मैपिंग कर रहा है, मैप बनाता है, वो convince होता है, उसको सर्टिफिकेट मिलता है, अब उसके कोर्ट-कचहरी के सारे झंझट बंद, ये है डिजिटल इंडिया के कारण। डिजिटल इंडिया अभियान ने देश में बड़ी संख्या में रोज़गार और स्वरोज़गार के अवसर भी बनाए हैं।

साथियों,

डिजिटल इंडिया का एक बहुत ही संवेदनशील पहलू भी है, जिसकी उतनी चर्चा शायद बहुत ज्‍यादा होती नहीं। डिजिटल इंडिया ने खोए हुए अनेक बच्चों को कैसे अपने परिवार तक वापस पहुंचाया ये जान करके आपके हृदय को छू जाएगा। अभी मैं, और मेरा तो आपसे आग्रह है जो यहां digital का exhibition लगा है आप जरूर देखिए। आप तो देखिए, अपने बच्‍चों को ले करके दोबारा आइए। कैसे दुनिया बदल रही है, वहां जा करके देखोगे तो पता चलेगा। मुझे वहां अभी एक बिटिया से मिलना हुआ। वो बेटी 6 साल की थी, तो अपने परिवार से बिछुड़ गई थी। रेलवे प्‍लेटफार्म पर मां का हाथ छूट गया, वो किसी और ट्रेन में बैठ गई।, माता-पिता के बारे में बहुत कुछ बता नहीं पा रही थी। उसके परिवार को खोजने की बहुत कोशिश हुई लेकिन किसी को सफलता नहीं मिली। फिर आधार डेटा की मदद से उसके परिवार को खोजने का प्रयास हुआ। उस बच्ची का आधार बायोमीट्रिक लिया तो वो रिजेक्ट हो गया। पता चला कि बच्ची का पहले ही आधार कार्ड बन चुका है। उस आधार डिटेल के आधार पर उस बिटिया का परिवार खोज निकाला गया।

आपको जानकर अच्छा लगेगा कि आज वो बच्‍ची अपने परिवार के साथ अपनी जिंदगी जी रही है। अपने सपनों को साकार करने के लिए अपने गांव में कोशिश कर रही है। आपको भी ये जान करके अच्‍छा लगेगा और मेरी जानकारी है ऐसे अनेक सालों से 500 से अधिक बच्‍चों को इस टेक्‍नोलॉजी की मदद अपने परिवार से मिलाया जा चुका है।

साथियों,

बीते आठ वर्षों में डिजिटल इंडिया ने देश में जो सामर्थ्य पैदा किया है, उसने कोरोना वैश्विक महामारी से मुकाबला करने में भारत की बहुत मदद की है। आप कल्पना कर सकते हैं कि अगर डिजिटल इंडिया अभियान नहीं होता तो 100 साल आए से सबसे बड़े संकट में देश में हम क्‍या कर पाते? हमने देश की करोड़ों महिलाओं, किसानों, मज़दूरों, के बैंक अकाउंट में एक क्लिक पर हज़ारों करोड़ रुपए उनको पहुंचा दिए, पहुंचाए। वन नेशन-वन राशन कार्ड की मदद से हमने 80 करोड़ से अधिक देशवासियों को मुफ्त राशन सुनिश्चित किया है, ये टेक्‍नोलॉजी का कमाल है।

हमने दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे efficient covid vaccination और covid relief program चलाया। Arogya setu और Co-win, ये ऐसे प्‍लेटफॉर्म हैं कि उसके माध्यम से अब तक करीब-करीब 200 करोड़ वैक्सीन डोज़...उसका पूरा रिकॉर्ड उपलब्‍ध है, कौन रह गया, कहां रह गया, उसकी जानकारी उसके माध्‍यम से प्राप्‍त होती है, और हम टारगेटेड व्‍यक्ति को वैक्‍सीनेशन का काम कर पा रहे हैं। दुनिया मेंमें आज भी चर्चा है कि वैक्‍सीन सर्टिफिकेट कैसे लेना है, कई दिन निकल जाते हैं। हिन्‍दुस्‍तान में वो वैक्‍सीन लगा करके बाहर निकलता है, उसके मोबाइल साइट पर सर्टिफिकेट मौजूद होता है। दुनिया कोविन के द्वारा वैक्‍सीनेशन के डिटेल सर्टिफिकेट की जानकारी की चर्चा कर रही है, हिन्‍दुस्‍तान में कुछ लोग उनका कांटा इसी बात पर अटक गया, इस पर मोदी की फोटो क्‍यों है। इतना बड़ा काम, उनका दिमाग वहीं अटक गया था।

साथियों,

भारत का Digital fintech solution, और आज U-fintech का है, इसके विषय में भी मैं कहूंगा। कभी पार्लियामेंट के अंदर एक बार चर्चा हुई है उसमें देख लेना। जिसमें देश के भूतपूर्व वित्‍त मंत्रीजी भाषण कर रहे हैं कि उन लोगों के पास मोबाइल फोन नहीं हैं, लोग डिजिटल कैसे करेंगे। पता नहीं क्‍या-क्‍या वो बोले हैं, आप सुनोगे तो आपको आश्‍चर्य होगा। बहुत पढ़े-लिखे लोगों का यही तो हाल होता है जी। Fintech UPI यानि Unified Payment Interface, आज पूरी दुनिया इस पर आकर्षित हो रही है। वर्ल्‍ड बैंक समेत सबने ये उत्‍तम से उत्‍तम प्‍लेटफार्म के रूप में उसकी सराहना की है। और मैं आपसे कहूंगा कि यहां प्रदर्शन में पूरा फिनटेक डिविजन है। ये कैसे काम करते हैं उसका वहां देखने को मिलेगा। किस प्रकार से मोबाइल फोन पर पेमेंट होते हैं, कैसे पैसे आते हैं, जाते हैं, सारा वैसे आपको यहां देखने को मिलेगा। और मैं कहता हूं ये फिनटेक का जो प्रयास हुआ है, ये सही मायने में by the people, of the people, for the people इसका उत्‍तम से उत्‍तम समाधान है। इसमें जो टेक्नॉलॉजी है वो भारत की अपनी है, यानि by the people. देशवासियों ने इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाया यानि of the people. इसने देशवासियों के लेनदेन को आसान बनाया यानि for the people.

इसी वर्ष मई के महीने में भारत में हर मिनट...गर्व करेंगे दोस्‍तों आप, भारत में हर मिनट में 1 लाख 30 हज़ार से अधिक UPI transactions हुए हैं। हर सेकंड औसतन 2200 ट्रांजेक्शन कंप्लीट हुए हैं। यानि अभी जो मैं आपसे भाषण कर रहा हूं जब तक मैं Unified Payment interface इतने शब्‍द बोलता हूं, इतने समय में UPI से 7000 ट्रांजेक्शन कंप्लीट हो चुके हैं...मैं जो दो शब्‍द बोल रहा हूं, उतने समय में। ये काम आज डिजिटल इंडिया के माध्‍यम से हो रहा है।

और साथियो, आपको गर्व होगा भारत में कोई कहता है अनपढ़ है, ढिकना है, फलाना है, ये है, वो है, वो देश की ताकत देखिए, मेरे देशवासियों की ताकत देखिए, दुनिया के समृद्ध देश, उनके सामने मेरा देश, जो डेव‍लपिंग कंट्री की दुनिया में है, दुनिया का 40 प्रतिशत डिजिटल लेनदेन हमारे हिन्‍दुस्‍तान में होता है, दोस्‍तों।

इसमें भी BHIM-UPI आज सरल डिजिटल ट्रांजेक्शन का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। और सबसे बड़ी बात, आज किसी मॉल के भीतर बड़े-बड़े ब्रांड्स बेचने वाले के पास ट्रांजेक्शन की जो टेक्नॉलॉजी है, वही टेक्नॉलॉजी आज उसके सामने रेहड़ी- पटरी और ठेला वाले बैठे हुए हैं ना फुटपाथ पर, 700-800 रुपए कमाते हैं, ऐसे मजदूर के पास भी वो ही व्‍यवस्‍था है, जो बड़े-बड़े मॉल में अमीरों के पास है। वरना वो दिन भी हमने देखे हैं जब बड़ी-बड़ी दुकानों में क्रेडिट और डेबिट कार्ड चलते थे, और रेहड़ी-ठेले वाला साथी, ग्राहक के लिए छुट्टे पैसे की तलाश में ही रहता था। और अभी तो मैं देख रहा था एक दिन, बिहार का कोई, प्‍लेटफार्म पर कोई भिक्षा मांग रहा था तो वो डिजिटल पैसे लेता था। अब देखिए न अब दोनों के पास समान शक्ति है, डिजिटल इंडिया की ताकत है।

इसलिए आज दुनिया के विकसित देश हों, या फिर वो देश जो इस प्रकार की टेक्नॉलॉजी में इन्वेस्टमेंट नहीं कर सकते, उनके लिए UPI जैसे भारत के डिजिटल प्रोडक्ट आज आकर्षण का केंद्र हैं। हमारे digital solutions में scale भी है, ये secure भी हैं और democratic values भी हैं। हमारा ये जो गिफ्ट सिटी का काम है ना, मेरे शब्‍द लिखकर रखिएगा उसको, और मेरा 2005 या 2006 का भाषण है वो भी सुन लीजिएगा। उस समय जो मैंने कहा था, कि गिफ्ट सिटी में क्‍या–क्‍या होने वाला है, आज वो धरती पर उतर होता हुआ दिखाई दे रहा है। और आने वाले दिनों में फिनटेक की दुनिया में डेटा सिक्‍योरिटी के विषय में, फाइनेंस की दुनिया में गिफ्ट सिटी बहुत बड़ी ताकत बन करके उभर रहा है। ये सिर्फ गुजरात नहीं, पूरे हिन्‍दुस्‍तान की आन-बान-शान बन रहा है।

साथियों,

डिजिटिल इंडिया भविष्य में भी भारत की नई अर्थव्यवस्था का ठोस आधार बने, इंडस्ट्री 4.0 में भारत को अग्रणी रखे, इसके लिए भी आज अनेक प्रकार के initiative लिए जा रहे हैं, प्रयास किए जा रहे हैं। आज AI, block-chain, AR-VR, 3D printing, Drones, robotics, green energy ऐसी अनेक New Age industries के लिए 100 से अधिक स्किल डेवलपमेंट के कोर्सेज चलाए जा रहे हैं देशभर में। हमारा प्रयास है कि विभिन्न संस्थाओं के साथ मिलकर, आने वाले 4-5 सालों में 14-15 लाख युवाओं को future skills के लिए reskill और upskill किया जाए, उस दिशा में हमारा प्रयास है।

इंडस्ट्री 4.0 के लिए ज़रूरी स्किल्स तैयार करने के लिए आज स्कूल के स्तर पर भी फोकस है। करीब 10 हज़ार अटल टिंकरिंग लैब्स में आज 75 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं Innovative Ideas पर काम कर रहे हैं, आधुनिक टेक्नॉलॉजी से रूबरू हो रहे हैं। अभी मैं यहां प्रदर्शनी देखने गया था। मेरे मन को इतना आनंद हुआ कि दूर-सुदूर उड़ीसा की बेटी है, कोई त्रिपुरा की बेटी है, कोई उत्‍तर प्रदेश के किसी गांव की बेटी है, वो अपने प्रॉडक्‍ट ले करके आई है। 15 साल, 16 साल, 18 साल की बच्चियां दुनिया की समस्‍याओं का समाधान ले करके आई हैं। आप जब उन बच्चियों से बात करोगे तो आपको लगेगा ये मेरे देश की ताकत है दोस्‍तो। अटल टिंकरिंग लैब्स के कारण स्‍कूल के अंदर ही जो वातावरण बना है उसी का ये नतीजा है कि बच्‍चे बड़ी बात ले करके, बड़ी समस्‍याओं के समाधान ले करके आते हैं। वो 17 साल का होगा, मैंने उसको अपना परिचय पूछा, वो कहता है मैं तो ब्रांड एम्‍बेसेडर हूं। यानी डिजिटल इंडिया के क्षेत्र में हम जो equipment को लेकर काम कर रहे हैं, मैं उसका ब्रांड एमबेसेडर हूं। इतने confidence से वो बात कर रहा था। यानी ये सामर्थ्‍य जब देखते हैं तो विश्‍वास और मजबूत हो जाता है। ये देश सपने साकार करके रहेगा, संकल्‍प पूरे करके रहेगा।

साथियो,

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी टेक्नॉलॉजी के लिए ज़रूरी माइंडसेट तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है। अटल इंक्यूबेशन सेंटर्स का एक बहुत बड़ा नेटवर्क देश में तैयार किया जा रहा है। इसी प्रकार, पीएम ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान यानि PM-दिशा देश में डिजिटल सशक्तिकरण को प्रोत्साहित करने का एक अभियान चला रहा है। अभी तक इसके 40 हज़ार से अधिक सेंटर देशभर में बन चुके हैं और 5 करोड़ से अधिक लोगों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है।

साथियों,

डिजिटल स्किल्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ टेक्नॉलॉजी के सेक्टर में युवाओं को ज्यादा से ज्यादा अवसर देने के लिए अनेक विविध दिशाओं में रिफॉर्म्स किए जा रहे हैं। स्पेस हो, मैपिंग हो, ड्रोन हो, गेमिंग और एनीमेशन हो, ऐसे अनेक सेक्टर जो future digital tech को विस्तार देने वाले हैं, उनको इनोवेशन के लिए खोल दिया गया है। In-space…अब In-space हेडक्‍वार्टर अहमदाबाद में बना है। In-space और नई ड्रोन पॉलिसी जैसे प्रावधान आने वाले वर्षों में भारत के tech potential को इस दशक में नई ऊर्जा देंगे। मैं जब यहां In-space के हेडक्‍वार्टर के उद्घाटन के लिए आया था पिछले महीने तो कुछ बच्‍चों से मेरी बातचीत हुई, स्‍कूल के बच्‍चे थे। वे सेटेलाइट छोड़ने की तैयारी कर रहे थे..अंतरिक्ष में सेटेलाइट छोड़ने की तैयारी कर रहे थे। तो मुझे वहां बताया गया कि हम आजादी के अमृत महोत्‍सव के निमित्‍त स्‍कूल के बच्‍चों द्वारा बनाए 75 सेटेलाइट आसमान में छोड़ने वाले हैं, अंतरिक्ष में छोड़ने वाले हैं। ये मेरे देश की स्‍कूल की शिक्षा में हो रहा है दोस्‍तो।

साथियों,

आज भारत, अगले तीन-चार साल में इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग को 300 बिलियन डॉलर से भी ऊपर ले जाने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। भारत Chip Taker से Chip Maker बनना चाहता है। सेमीकंडक्टर्स का उत्पादन बढ़ाने के लिए भारत में तेजी से निवेश बढ़ रहा है। PLI स्कीम से भी इसमें मदद मिल रही है। यानि मेक इन इंडिया की शक्ति और डिजिटल इंडिया की ताकत की डबल डोज, भारत में इंडस्ट्री 4.0 को नई ऊंचाई पर ले जाने वाली है।

आज का भारत उस दिशा की तरफ बढ़ रहा है जिसमें नागरिकों को, योजनाओं के लाभ के लिए, दस्तावेजों के लिए सरकार के पास Physical रूप में आने की जरूरत नहीं होगी। हर घर में पहुंचता इंटरनेट और भारत की क्षेत्रीय भाषाओं की विविधता, भारत के डिजिटल इंडिया अभियान को नई गति देगी। डिजिटल इंडिया अभियान, ऐसे ही नए-नए आयाम खुद में जोड़ता चलेगा, Digital space में global leadership को दिशा देगा। और मैं आज समय मेरे पास कम था, मैं हर चीज़ें को नहीं देख पाया। लेकिन शायद दो दिन भी कम पड़ जाएं इतनी सारी चीजें हैं वहां। और मैं गुजरात के लोगों से कहूंगा मौका मत छोडि़ए। आप जरूर अपने स्‍कूल-कॉलेज के बच्‍चों को वहां ले जाइए। आप भी समय निकाल कर जाइए। एक नया हिन्‍दुस्‍तान आपकी आंखों के सामने दिखाई देगा। और सामान्‍य मानवी के जीवन की जरूरतों से जुड़ा हुआ हिन्‍दुस्‍तान दिखेगा। एक नया विश्‍वास पैदा होगा, नए संकल्‍प भरे जाएंगे। और आशा-आकांक्षाओं की पूर्ति का विश्‍वास ले करके डिजिटल इंडिया के माध्‍यम से भी देश भविष्‍य का भारत, आधुनिक भारत, समृद्ध और सशक्‍त भारत, उस दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी की त‍रफ तेज गति से बढ़ रहा है। इतने कम समय में जो प्राप्‍त किया है, भारत के पास टेलेंट है, भारत नौजवानों का सामर्थ्‍य है, उन्‍हें अवसर चाहिए। और आज देश में एक ऐसी सरकार है जो देश की जनता पर भरोसा करती है, देश के नौजवान पर भरोसा करती है और उसको नए प्रयोग करने के लिए अवसर दे रही है और उसी का परिणाम है कि देश अनेक दिशाओं में अभूतपूर्व ताकत के साथ आगे बढ़ रहा है।

इस डिजिटल इंडिया वीक के लिए मैं आपको बहुत शुभकामनाएं देता हूं। आने वाले दो-तीन दिन तो ये शायद प्रदर्शनी चालू रहेगी। उसका लाभ आप लोग लेंगे। फिर से एक बार मैं भारत सरकार के विभाग का भी अभिनंदन करता हूं कि उन्‍होंने इतने बढ़िया कार्यक्रम की रचना की। मुझे, आज मैं सुबह तो तेलंगाना था, फिर आंध्र चला गया और फिर यहां आपके बीच आने का मुझे मौका मिला, और अच्‍छा लगता है। आप सबका उत्‍साह देखता हूं, उमंग देखता हूं तो और आनंद आता है। इस कार्यक्रम को गुजरात में करने के लिए मैं डिपार्टमेंट को बधाई देता हूं और इतना शानदार कार्यक्रम करने के लिए अभिनंदन करता हूं। और देशभर के नौजवानों के लिए ये प्रेरणा बनकर रहेगा, इसी विश्‍वास के साथ आप सब को बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद !