താൻ പങ്കിട്ട പുതിയ പാര്ലമെന്റ് മന്ദിരത്തിന്റെ വീഡിയോയിൽ അവരവരുടെ വികാരങ്ങൾ വോയ്സ് ഓവറായി രേഖപ്പെടുത്താൻ പൗരന്മാരോട് ആവശ്യപ്പെട്ടു
പ്രധാനമന്ത്രി ശ്രീ നരേന്ദ്ര മോദി പുതിയ പാർലമെന്റ് മന്ദിരത്തിന്റെ ദൃശ്യങ്ങൾ പങ്കുവെച്ചു. വീഡിയോയിൽ വോയ്സ് ഓവറിന്റെ രൂപത്തിൽ ശ്രീ മോദി പൗരന്മാരുടെ ചിന്തകൾ ഉദ്ധരിച്ചു.
ഒരു ട്വീറ്റിൽ പ്രധാനമന്ത്രി പറഞ്ഞു:
"പുതിയ പാർലമെന്റ് മന്ദിരം ഓരോ ഇന്ത്യക്കാരനും അഭിമാനിക്കും. ഈ വീഡിയോ ഈ ഐതിഹാസിക കെട്ടിടത്തിന്റെ ഒരു കാഴ്ച നൽകുന്നു. എനിക്ക് ഒരു പ്രത്യേക അഭ്യർത്ഥനയുണ്ട്- നിങ്ങളുടെ ചിന്തകൾ നിങ്ങളുടെ സ്വന്തം വോയ്സ് ഓവറോടെ ഈ വീഡിയോ പങ്കിടുക. അവയിൽ ചിലത് ഞാൻ വീണ്ടും ട്വീറ്റ് ചെയ്യും. . പങ്കിടാൻ മറക്കല്ലേ ."
The new Parliament building will make every Indian proud. This video offers a glimpse of this iconic building. I have a special request- share this video with your own voice-over, which conveys your thoughts. I will re-Tweet some of them. Don’t forget to use #MyParliamentMyPride. pic.twitter.com/yEt4F38e8E
Text of PM’s message during the release of Shrimad Vijayaratna Sunder Surishwarji Maharaj’s 500th book
January 11, 2026
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जय-जिनेंद्र !
आज के इस पावन अवसर पर सर्वप्रथम मैं हम सभी के प्रेरणास्रोत पूज्य भुवनभानुसूरीश्वर जी महाराज साहब के चरणों में प्रणाम करता हूं। प्रसांतमूर्ति सुविशाल गच्छाधिपति पूज्य श्रीमद् विजय राजेंद्रसूरीश्वर जी महाराज साहब, पूज्य गच्छाधिपति श्री कल्पतरूसूरीश्वर जी महाराज साहब, सरस्वती कृपापात्र परम पूज्य आचार्य भगवंत श्रीमद् विजयरत्नसुंदरसूरीश्वर जी महाराज और इस समारोह में उपस्थित सभी साधु-साध्वी को मैं नमन करता हूं।
ऊर्जा महोत्सव इस समिति से जुड़े सभी सदस्यों भाई श्री कुमारपाल भाई, कल्पेश भाई, संजय भाई, कौशिक भाई, ऐसे सभी महानुभावों का भी मैं अभिनंदन करता हूं। पूज्य संतजन, आज हम सभी श्रीमद् विजयरत्न सुंदर सूरीश्वर जी महाराज साहब की 500वीं पुस्तक के विमोचन के पुण्य भागी बन रहे हैं। महाराज साहब ने ज्ञान को सिर्फ ग्रंथों तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि जीवन में उतारकर दिखाया है, औरों को भी जीवन में उतारने के लिए प्रेरित किया है। उनका व्यक्तित्व संयम, सरलता और स्पष्टता का अद्भुत संगम है। जब वे लिखते हैं, तो शब्दों में अनुभव की गहराई होती है। जब वे बोलते हैं, तो वाणी में करुणा की शक्ति होती है। और जब वह मौन होते हैं, तो भी मार्गदर्शन मिलता है। महाराज साहब की 500वीं पुस्तक का विषय, ''प्रेमनु विश्व, विश्वनो प्रेम'', यह शीर्षक अपने आप में कितना कुछ कह देता है! मुझे विश्वास है कि, हमारा समाज, हमारे युवा और पूरी मानवता उनकी इस रचना का लाभ उठाएगी। इस विशेष अवसर पर ऊर्जा महोत्सव का यह आयोजन जन-जन में एक नई विचार ऊर्जा का संचार करेगा। मैं आप सभी को इस अवसर की बधाई देता हूं।
साथियों,
महाराज साहब की 500 रचनाएं एक ऐसा विशाल सागर है, जिसमें भांति-भांति के विचार रत्न समाहित हैं। इन पुस्तकों में मानवता की तमाम समस्याओं के सहज और आध्यात्मिक समाधान उपलब्ध हैं। समय और परिस्थितियों के अनुसार जब जिसे जैसा मार्गदर्शन चाहिए, यह अलग-अलग ग्रंथ उसके लिए प्रकाश पुंज का काम करेंगे। अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांत, प्रेम, सहिष्णुता और सद्भाव हमारे तीर्थंकरों ने हमें जो शिक्षाएं दी हैं, हमारे पूर्व के आचार्यों ने हमें जो पाठ पढ़ाए हैं, उन सबको आधुनिक और सामयिक स्वरूप में हम इन रचनाओं में देख सकते हैं। खासकर, आज जब दुनिया विभाजन और टकराव से जूझ रही है, तब ''प्रेमनु विश्व, विश्वनो प्रेम'' यह एक ग्रंथ ही नहीं, यह एक मंत्र भी है। यह मंत्र हमें प्रेम की शक्ति का परिचय तो कराता ही है, जिस शांति और सद्भाव की तलाश में आज दुनिया परेशान है, यह मंत्र हमें उस तक पहुँचने का रास्ता दिखाता है।
साथियों,
हमारे जैन दर्शन का सूत्र है- ''परस्पर उपग्रहो जीवानाम्।'' यानी, हर जीवन, दूसरे जीवन से जुड़ा है। जब हम इस सूत्र को समझते हैं, तो हमारी दृष्टि व्यष्टि से हटकर समष्टि से जुड़ जाती है। हम व्यक्तिगत आकांक्षा से ऊपर उठकर समाज, राष्ट्र और मानवता के लक्ष्यों की ओर सोचने लगते हैं। इसी भावना के साथ मैं आपके बीच, आप सबको याद होगा नवकार महामंत्र दिवस पर भी आया था। उस आयोजन में चारों फिरके एक साथ जुटे थे। उस ऐतिहासिक अवसर पर मैंने नौ आग्रह किए थे, नौ संकल्पों की बात की थी। आज का ये अवसर उन्हें फिर से दोहराने का भी है। पहला संकल्प- पानी बचाने का संकल्प। दूसरा संकल्प- एक पेड़ माँ के नाम। तीसरा- स्वच्छता का मिशन। चौथा- वोकल फॉर लोकल। पांचवा- देश दर्शन। छठा- नेचुरल फार्मिंग को अपनाना। सातवां- हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाना। आठवां- योग और खेल को जीवन में लाना। नौवां - गरीबों की सहायता का संकल्प।
साथियों,
आज हमारा भारत, विश्व के सबसे युवा देशों में से एक है। हमारी युवा शक्ति विकसित भारत का भी निर्माण कर रही है और अपनी सांस्कृतिक जड़ों को भी मजबूत बना रही है। इस बदलाव में, महाराज साहब जैसे संतों का मार्गदर्शन, उनका साहित्य और उनके शब्द और जो हमेशा-हमेशा साधना से पुरस्कृत है, इनकी बहुत बड़ी भूमिका है। मैं एक बार फिर, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए, उनकी 500वीं पुस्तक के लिए शुभकामनाएं देता हूं। मुझे विश्वास है, भारत की बौद्धिक, नैतिक और मानवीय यात्रा में उनके विचार निरंतर प्रकाश देते रहेंगे। मुझे आप सबसे क्षमा भी मांगनी है। मैं खुद आना चाहता था और बहुत पहले से कार्यक्रम भी बना था, लेकिन आप जानते हैं जो परिस्थितियां पैदा हुई, उसके कारण मैं आप सबके दर्शन नहीं कर पा रहा हूं, आपके बीच नहीं आ पा रहा हूं। लेकिन यह महाराज साहब की कृपा है कि उन्होंने मेरी इस कठिनाई को समझा और वीडियो मैसेज के माध्यम से आपके दर्शन करने का, आपको मिलने का, आपसे बात करने का मुझे अवसर दिया। मैं इसके लिए भी महाराज साहब का बहुत आभारी हूं।