Our presidents change, but our ideals do not. The leadership changes, but the direction remains the same: PM Modi at BJP HQ
Nitin Nabin ji has youthful energy and long experience of working in organisation, this will be useful for every party karyakarta, says PM Modi
PM Modi says the party will be in the hands of Nitin Nabin ji, who is part of the generation which has seen India transform, economically and technologically
BJP has focused on social justice and last-mile delivery of welfare schemes, ensuring benefits reach the poorest and most marginalised sections of society: PM
In Thiruvananthapuram, the capital of Kerala, the people snatched power from the Left after 45 years in the mayoral elections and placed their trust in BJP: PM

भारत माता की... भारत माता की.. भारत माता की...

भारतीय जनता पार्टी के नवीन अध्यक्ष माननीय नितिन नबीन जी,
पूर्व अध्यक्ष जे पी नड्डा जी, भाजपा परिवार के अन्य सभी वरिष्ठजन, देशभर से आए कार्यकर्ता साथी, देवियों और सज्जनों...
सर्वप्रथम माननीय नितिन नबीन जी को दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल का अध्यक्ष चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई देता हूं। बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

बीते कई महीनों से संगठन पर्व यानि कि पार्टी की छोटी सी इकाई से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने की एक व्यापक प्रक्रिया शतप्रतिशत लोकतांत्रिक तरीके से भारतीय जनता पार्टी के संविधान के स्पिरिट को और उसमें बताई गई हर बात को ध्यान में ऱखकर के लगातार चल रही थी। आज उसका विधि-पूर्वक समापन हुआ है। संगठन पर्व का ये विशाल आयोजन, भारतीय जनता पार्टी की लोकतांत्रिक आस्था, संगठनात्मक अनुशासन और कार्यकर्ता-केन्द्रित सोच का प्रतीक है। मैं देशभर के कार्यकर्ताओं का इस प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

बीते एक-डेढ़ वर्षों में डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की एक सौ पच्चीसवीं जयंती का पर्व, अटल जी की सौवीं जन्म-जयंती, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष… ऐसे महापर्व हम मनाते रहे है...ये वो प्रेरणाएं हैं, जो देश के लिए जीने के हमारे संकल्प को और मजबूत करती हैं। हमारा नेतृत्व परंपरा से चलता है...अनुभव से समृद्ध होता है...और जनसेवा, राष्ट्र-सेवा के भाव से संगठन को आगे बढ़ाता है।

साथियों,

अटल जी, आडवाणी जी और मुरली मनोहर जोशी जी के नेतृत्व में बीजेपी ने शून्य से लेकर शिखर तक का सफर देखा है। इस सदी में वेंकैया नायडू जी और नितिन गडकरी जी सहित, हमारे कई वरिष्ठ साथियों ने संगठन को विस्तार दिया है। राजनाथ जी के नेतृत्व में पहली बार...बीजेपी ने अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल किया है। फिर अमित भाई के नेतृत्व में...देश के अनेक राज्यों में भाजपा की सरकारें बनीं, लगातार दूसरी बार केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी। फिर जेपी नड्डा जी के नेतृत्व में भाजपा पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक और सशक्त हुई है। केंद्र में लगातार तीसरी बार, भाजपा-NDA की सरकार बनी। मैं पूर्व के सभी अध्यक्षों का उनके अमूल्य योगदान के लिए देश के कोटि-कोटि कार्यकर्ताओं की तरफ से और मेरी तरफ से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

आप जानते हैं...आज भाजपा का जितना फोकस संगठन के विस्तार पर है उतनी ही बड़ी प्राथमिकता कार्यकर्ता के निर्माण की भी है। भाजपा एक ऐसी पार्टी है, जहां लोगों को लगता होगा की नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं, तीसरी बार प्रधानमंत्री बने, पचास साल की छोटी आयु में मुख्यमंत्री बन गए, 25 साल से लगातार हेड ऑफ द गवर्नमेंट रहे हैं.. ये सब अपनी जगह पर है, लेकिन इन सबसे भी बड़ी चीज मेरे जीवन में है मैं भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता हूं ये सबसे बड़ा गर्व है। और जब बात पार्टी के विषयों की आती है...तब माननीय नितिन नबीन जी, मैं एक कार्यकर्ता हूं और वे मेरे बॉस हैं। अब माननीय नितिन नबीन जी, हम सभी के अध्यक्ष हैं। और उनका दायित्व सिर्फ भाजपा को ही संभालना, इतना नहीं है, एनडीए के सभी साथियों के बीच भी उन्हें तालमेल का बहुत बड़ा दायित्व को भी देखना होता है।

साथियों,

माननीय नितिन जी के संपर्क में जो भी आया है, वो उनकी सरलता और सहजता की चर्चा ज़रूर करता है। बीजेपी युवा मोर्चा का दायित्व हो, अलग-अलग राज्यों में प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी हो या फिर बिहार सरकार में काम करने का अनुभव हो नितिन जी ने हमेशा जब-जब, जो-जो, जहां-जहां जो-जो जिम्मेवारी मिली, अपनेआप को उन्होंने साबित किया है। जिम्मेवारी देने वालों को भी उनके कार्य ने गर्व से भर दिया है।

साथियों,

ये इक्कीसवीं सदी है और देखते ही देखते इक्कीसवीं सदी के पहले 25 वर्ष पूरे भी हो चुके हैं। आने वाले 25 वर्ष बहुत महत्वपूर्ण हैं। ये वो कालखंड है, जब विकसित भारत का निर्माण होना है, और होना तय है। इस महत्वपूर्ण कालखंड की शुरुआत में...हमारे माननीय नितिन नबीन जी...बीजेपी की विरासत को आगे बढ़ाएंगे। मैं आजकल के युवाओं की भाषा में कहूं...तो नितिन जी खुद भी एक प्रकार से मिलेनियल हैं...वो उस जेनरेशन से हैं,...जिसने भारत में बड़े आर्थिक, सामाजिक और टेक्नोलॉजिकल परिवर्तन होते देखे हैं। वो उस जनरेशन से हैं...जिसने बचपन में रेडियो से सूचनाएं पाईं...और आज AI के भी एक्टिव यूज़र हैं। नितिन जी के पास युवा ऊर्जा भी है...और संगठन में कार्य का लंबा अनुभव भी है। ये हमारे दल के हर कार्यकर्ता के लिए बहुत उपयोगी होगा।

साथियों,

इस वर्ष जनसंघ की स्थापना को 75 वर्ष हो रहे हैं। और मैं आज इन 75 वर्ष लगातार लक्ष्यावधि कार्यकर्ताओं ने अनेक परिवारों ने, अनेक पीढ़ियों ने जो त्याग, तपस्या और बलिदान दिए हैं मैं उनको आदरपूर्वक नमन करता हूं। जनसंघ रूपी वटवृक्ष से ही भाजपा का जन्म हुआ...और भाजपा दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बन चुकी है। और यह सिर्फ भाजपा के कार्यकर्ताओं के लिए गर्व का विषय है, इतना नहीं है, एक-एक राजनीतिक समीक्षकों को दुनिया को ये बात बतानी चाहिए कि भारत एक ऐसा देश है जिसकी रगों में इतनी मजबूती से लोकतंत्र चल रहा है कि जहां दुनिया की सबसे बड़ी पोलिटिकल पार्टी है। साथियों, बीजेपी एक संस्कार है। बीजेपी एक परिवार है, हमारे यहां मेंबरशिप से भी ज्यादा रिलेशनशिप होती है। बीजेपी एक ऐसी परंपरा है...जो पद से नहीं, प्रक्रिया से चलती है।
हमारे यहां पदभार एक व्यवस्था है...और कार्यभार एक जीवन भर की ज़िम्मेदारी है। हमारे यहां अध्यक्ष बदलते हैं... लेकिन आदर्श नहीं बदलते। नेतृत्व बदलता है...लेकिन दिशा नहीं बदलती।

साथियों,

भाजपा का स्वरूप नेशनल है, भाजपा का स्पिरिट नेशनल है। क्योंकि हमारा जुड़ाव लोकल है, हमारी जड़ें ज़मीन के नीचे गहरी हैं। इसलिए, भाजपा रीजनल एस्पिरेशन्स को प्लेटफॉर्म देती है, उन्हें नेशनल एंबिशन्स का आधार बनाती है। और इसलिए आज देश के कोने-कोने के लोग भाजपा के साथ हैं। भाजपा के साथ जुड़ रहे हैं। और इतना ही नहीं और जो भी अपनी राजनीति का प्रारंभ करना चाहते है उसको भी भाजपा का प्रवेश द्वार सबसे उत्तम और सबसे सुरक्षित लगता है।

साथियों,

जनता-जनार्दन की सेवा... हमारे लिए हमेशा सर्वोपरि रही है। हमने सत्ता को सुख का नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम बनाया है। इसलिए, भाजपा पर जनता का विश्वास निरंतर मज़बूत होता गया है। अगर बीते 11 वर्षों की ही बात करें...तो भाजपा की यात्रा जन विश्वास अर्जित करने की अद्भुत यात्रा रही है। बीते 11 वर्षों में बीजेपी ने...हरियाणा, असम, त्रिपुरा और ओडिशा में...पहली बार अपने सामर्थ्य से सरकारें बनाईं। पश्चिम बंगाल और तेलंगाना में भाजपा...जनता की एक बड़ी आवाज बनकर उभरी है। अक्सर होता ये है...कि लंबे कार्यकाल के बाद सरकारों के लिए टिके रहना मुश्किल होता है। लेकिन बीजेपी ने इस ट्रेंड को भी तोड़ दिया है। गुजरात हो, मध्य प्रदेश हो, महाराष्ट्र हो, बिहार हो...इन सभी राज्यों में, कई-कई कार्यकाल के बावजूद बीजेपी पहले से भी बड़े जनादेश के साथ सरकार में लौटी है।

साथियों,

बीते डेढ़-दो वर्षों में तो, भाजपा पर जनता का भरोसा और मज़बूत हुआ है। विधानसभा हो या स्थानीय निकाय...बीजेपी की स्ट्राइक रेट अभूतपूर्व रही है। इस दौरान, देश में 6 राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं। इनमें से चार चुनाव बीजेपी-NDA ने जीते हैं।

साथियों,

आज भाजपा, सिर्फ संसद और विधानसभा की ही नहीं...बल्कि नगर-पालिकाओं और नगर-निगमों में भी पहली पसंद है। और इसका ताज़ा उदाहरण महाराष्ट्र है। हाल में जो मेयर और पार्षदों के चुनाव परिणाम सामने आए हैं...वो अभूतपूर्व हैं। बीजेपी, महाराष्ट्र के स्थानीय निकायों में नंबर वन पार्टी बनी है। कुल 29 में से 25 बड़े शहरों की जनता ने बीजेपी-एनडीए को चुना है। कुल जितने पार्षद जीते हैं, उनमें से 50 परसेंट बीजेपी के हैं। ऐसे ही केरला में भी आज बीजेपी के करीब सौ पार्षद हैं। केरला की राजधानी तिरुवनंतपुरम की जनता ने मेयर चुनाव में 45 साल बाद लेफ्ट से सत्ता छीनी और भाजपा पर भरोसा किया। मुझे पूरा विश्वास है... कि आने वाले विधानसभा चुनावों में भी लोग, केरला में बीजेपी को अवसर ज़रूर देंगे।

साथियों,

बीजेपी निरंतर जीत रही है...उसका विस्तार हो रहा है...ये निश्चित तौर पर हम सभी के लिए गर्व का विषय है। लेकिन ये हम सभी के लिए बहुत बड़े दायित्व बोध भी है और दायित्व बोध का समय भी है। कभी भाजपा ने पार्टी विद ए डिफरेंस के रूप में अपनी यात्रा शुरु की थी...आज बीजेपी, पार्टी ऑफ गवर्नेंस भी है। देश की आजादी के बाद शासन के अलग-अलग मॉडल देखे हैं। कांग्रेस के परिवारवाद का मॉडल...लेफ्ट का मॉडल... क्षेत्रीय दलों का मॉडल...अस्थिर सरकारों का दौर...ये सब मॉडल देश देख चुका है.. लेकिन आज देश, स्थिरता, सुशासन और संवेदनशीलता वाला भाजपा का विकास मॉडल देख रहा है।

साथियों,

ये भाजपा ही है जिसने सामाजिक न्याय के नारे को...सच्चे स्वरूप में ज़मीन पर उतारा है। हमने गरीब कल्याण की योजनाओं को सरकारी फाइलों से निकालकर...गरीब के घर तक पहुंचाया है। साथियो., मैं आपको कुछ उदाहरण देता हूं... आज़ादी के 70 वर्ष बाद, सिर्फ तीन करोड़ ग्रामीण परिवारों तक ही पाइप से पानी पहुंच पाया था। माताओं-बहनों की पीड़ा, पानी के लिए उनके संघर्ष की सुध लेने वाला कोई नहीं था। और मुझे याद है जब मैं गुजरात में राजनीतिक क्षेत्र में नहीं आया था, सामाजिक जीवन में काम करता था। हमारे यहां एक धंधुका करके स्थान है वहां मैं जाता था तो वहां के लोग मुझे कहते थे कि आप यहां रात को मत रुकिए और जब भी आपका दौरा हो तो सुबह 10:00 बजे के बाद आइए, नॉर्मली मेरा नेचर रहता था कि हर नए स्थान पर जाकर रात में रुकूं कार्यकर्ताओं से मिलूं लेकिन धंधुका वाले मना करते थे, क्यों… वह कहते थे पानी नहीं है शुवह आपको स्नान करने के लिए पानी नहीं दे पाएंगे, वहां तो कहावत चलती थी कि बेटी को बंदूकें दो लेकिन धंधुके मत दो यानी उसको बंदूक से मार दो लेकिन उसकी धंधुके में शादी मत करो पानी नहीं था। यह दर्द मैंने देखा है। मैं धरती की सच्चाई से जुड़ा था, माताओं- बहनों के पीड़ा अपनी आंखों के सामने देखी थी, और तब हम जल जीवन मिशन लेकर आए...और सिर्फ 5-6 साल में 12 करोड़ से ज्यादा परिवारों को नल से जल की सुविधा से जोड़ा।

साथियों,

ये हमारी सरकार है...जिसने धुएं से बीमार होती, बहनों की पीड़ा समझी। वरना पहले तो एलपीजी गैस को भी अमीरों का ही सौभाग्य मान लिया गया था। भाजपा ने पूरी संवेदनशीलता के साथ हर घर को एलपीजी गैस कनेक्शन से जोड़ने का अभियान चलाया। और वर्ष 2014 तक जहां सिर्फ 14 करोड़ एलपीजी कनेक्शन थे...आज देश में तैंतीस करोड़ से अधिक गैस कनेक्शन हैं। ऐसे ही, गांव की बहनों को लखपति दीदी बनाने का अभियान है। ये भी इसलिए संभव हो पाया...क्योंकि भाजपा बहनों-बेटियों के सपनों के प्रति संवेदनशील है।

साथियों,

एक जमाना था जब हम भी सुनते थे कि फलाना परिवार तो लखपति परिवार है ढिकना परिवार तो लखपति परिवार है। यानी लखपति होना बहुत बड़ी बात मानी जाती थी.. ये मोदी है जो सपने देखता है कि मेरे गांव की गरीब मां भी लखपति दीदी बनेगी।

साथियो,

दशकों तक आदिवासी समाज को सिर्फ वोट बैंक से जोड़कर देखा गया। लेकिन संवेदनशील भाजपा ने...भाजपा के हमारे संस्कारों ने समाज के प्रति समान भाव की हमारी परंपरा के कारण भाजपा ने आदिवासियों में भी सबसे पिछड़ी जनजातियों की पीड़ा को समझा। उनके विकास के लिए पीएम जन-मन योजना बनाई। और पीएम जन-मन योजना के लाभार्थी इतने बिखरे हुए हैं, और एक दो एक दो दूर के जंगलों में पड़े हैं। उनसे म्युनिसिपलटी की सीट भी जीती नहीं जा सकती है। वोट के हिसाब से कोई उनकी तरफ देखेगा नहीं। लेकिन जब बोट से उठकर संवेदनाएं होती हैं, समाज का कल्याण हमारे संस्कार होते हैं तो पीएम जनमन योजना जन्म लेती है। आदिवासियों में भी अति पिछड़े...संख्या में भले ही कम है...लेकिन उनके प्रति हमारी संवेदना में कोई कमी नहीं है।

साथियों,

हमारा नॉर्थ ईस्ट...वहां वोटर उतने नहीं है, सीटें भी उतनी नहीं हैं... इसलिए कांग्रेस की सरकारों में उन्हें बरसों तक उपेक्षित रखा गया। लेकिन संवेदनशील भाजपा ने, नॉर्थ ईस्ट को दिल से भी जोड़ा और दिल्ली से भी जोड़ा। एक और उदाहरण आकांक्षी जिलों का है। हमारे देश में सौ से अधिक जिले ऐसे थे..जिनको कांग्रेस सरकारें पिछड़ा घोषित करके भूल गई थीं। इन जिलों को पनिशमेंट पोस्टिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था। यानि जिन अधिकारियों को सज़ा देनी होती थी, तो उन्हें वहां भेजा जाता था। हमारी भाजपा सरकार ने इन जिलों को आकांक्षी जिले घोषित किया। और प्राथमिकता के आधार पर इनके विकास के लिए काम किया। आज ये आकांक्षी जिले, विकास के कई पैरामीटर्स पर अन्य जिलों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। राज्य के एवरेज के बराबर आकर खड़े हो गए हैं।

साथियों,

भाजपा का मंत्र है- पिछड़ों को प्राथमिकता...पिछड़ों को प्राथमिकता, जिनकी किसी ने सुध नहीं ली, हमने उनकी साधना की है। जिनको किसी ने पूछा नहीं...मोदी ने उन्हें पूजा है। हमारी कार्य-संस्कृति...सर्व-समावेशी है...सर्वांगीण है...सर्व-स्पर्शी है...सर्व-हितकारी है...सर्व-कल्याणकारी है। और ये कार्य-संस्कृति गरीब को समान अवसर देने वाली है, गरीब को सशक्त करने वाली है। इसी वजह से सिर्फ एक दशक में 25 करोड़ लोगों ने गरीबी को पराजित किया है। और ये 25 करोड़ लोग कौन हैं? इनमें सबसे अधिक दलित, पिछड़े और आदिवासी परिवार हैं।

साथियों,

बीते वर्षों में जन-विश्वास की जो पूंजी हमने अर्जित की है. उस भरोसे को कायम रखना बहुत बड़ी ज़रूरत है। देश की जनता...2047 तक विकिसत भारत बनाने के लिए संकल्पित है। इसलिए, बीते 11 वर्षों में रिफॉर्म्स की जो यात्रा हमने शुरू की है...वो अब रिफॉर्म एक्सप्रेस बन चुकी है। हमें राज्यों के स्तर पर, शहरों के स्तर पर...जहां भी भाजपा-NDA सरकारें हैं, वहां रिफॉर्म्स की गति तेज़ करनी है। भाजपा, सिटी गवर्नेंस का भी एक नया मॉडल देश के सामने प्रस्तुत करे, इस लक्ष्य के साथ हमें आगे बढ़ना चाहते हैं।

साथियों,

जब हम सत्ता में नहीं भी थे...तब भी हम अपने मूल आदर्शों से कभी नहीं भटके। हम राष्ट्र प्रथम के भाव से...नेशन फर्स्ट के भाव से डटे रहे। जूझते रहे, संकटों को झेलते रहे, जज्बा बढ़ाते रहे और जीतते भी रहे। हम वो लोग हैं, हमारा वो चरित्र है, हमारे वो संस्कार है खुद से बड़ा दल और दल से बड़ा देश...ये भाजपा के हर कार्यकर्ता का संस्कार है …भाजपा के हर कार्यकर्ता का जीवन मंत्र है। इसी भाव के साथ...बीते 11 वर्षों में हमने अनेक चुनौतियों पर विजय पाई है। जम्मू कश्मीर से आर्टिकल-370 की दीवार गिराना हो...तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाना हो...इनको कभी असंभव माना जाता था। आज ये हकीकत बन चुके हैं। आज देश में माओवादी आतंक भी अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।

साथियों,

आगे भी हमें...हर चुनौती का पूरे सामर्थ्य से सामना करना है। आज देश के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती...घुसपैठियों की है, आबादी के असंतुलन की है। दुनिया के धनवान देश, समर्थ देश वे भी अपने देश में जो घुसपैठियों हैं उनकी जांच पड़ताल कर रहे हैं, और उनको पकड़-पकड़ कर निकाल रहे हैं, और दुनिया उनको पूछती नहीं है कि तुम घुसपैठियों को क्यों निकाल रहे हो तुम तो लोकतंत्र का झंडा लेकर घूम रहे थे। तुम तो पूरी दुनिया के नवाब बनके बैठे थे क्यों निकाल रहे हो। दुनिया में कोई अपने देश में घुसपैठियों को स्वीकार नहीं करता।

भारत भी घुसपैठियों को अपने गरीबों, हमारे नौजवानों के हक कभी भी लूटने नहीं दे सकता। घुसपैठिए, देश की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं। उनकी पहचान करके, उन्हें वापस उनके देश भेजना बहुत आवश्यक है। इसके अलावा...ऐसे राजनीतिक दल, जो वोट बैंक की राजनीति में घुसपैठियों को बचा रहे हैं...या उन्हें कवर दे रहे हैं...उन्हें हमें पूरी शक्ति से जनता के सामने बेनकाब करना ही होगा उनको एक्सपोज़ करना ही होगा।

साथियों,

एक और बड़ी चुनौती अर्बन नक्सल की भी है। अर्बन नक्सल का दायरा, इंटरनेशनल हो रहा है। और यहां अर्बन नक्सल की बहुत चतुराई होती है ये मीडिया वाले इतने बैठे हैं ना अगर साल में एक-आध बार भी एक-आध बार भी अगर मोदी की किसी अच्छी चीज को ट्वीट कर दिया क्या टीवी पर बोल दिया या अखबार में लिख दिया तो उस पत्रकार की तो ऐसी फजीहत कर देते है उसके पीछे ऐसे पड़ जाते हैं, उसे अछूत बना देते हैं। भविष्य में वो कभी बोल ना सके ऐसा कर देते हैं। ये अर्बन-नक्सल की स्टाइल है। हमको भी सालों तक ऐसा अछूत बनाकर रख दिया पूरे देश में भाजपा को, अब देश समझ गया है अर्बन-नक्सल के कारनामे… भारत को नुकसान पहुंचाने के लिए अर्बन नक्सली लगातार कोशिशें कर रहे हैं...साजिशें कर रहे हैं। अर्बन नक्सलियों के इस गठजोड़ को हमें संगठन की ताकत से, वैचारिक ताकत से और हमारी परिणामकारी इतिहास को बुलंदी देकर के उनको परास्त करना है, उनको तोड़ना है।

साथियों,

देश के लिए परिवारवाद बहुत बड़ा अभिशाप है। और जब मैं परिवारवाद की बात करता हूं तो अर्बन नक्सल मैदान में आ जाते हैं, वो मुझे कहते हैं कि फलाने का बेटा ढिकना का बेटा। वो बात को डायवर्ट करते हैं। किसी के बेटे की प्रतिभा का हम विरोधी नहीं है. किसी की बेटी की प्रतिभा का हम विरोध नहीं है, लेकिन दुर्भाग्य से...कांग्रेस और देश के अनेक क्षेत्रीय राजनीतिक दलों पर...आज अलग-अलग परिवारों का कब्जा हो गया है। पार्टी का जन्म किसी और ने किया, पार्टी मेंं लगातार एक के बाद एक उनके परिवार के लोग ही अध्यक्ष होते हैं, पार्टी की पूरी निर्णय प्रक्रिया उन परिवार के हाथ में होती है। पार्टी का कोई भी कार्यकर्ता हो उसे विचार से कोई लेना-देना नहीं उनको उस परिवार के प्रति समर्पित रहना पड़ता है। ये परिवारवाद खतरनाक है। ये लोकतंत्र का दुश्मन है। और इस परिवारवादी राजनीति ने देश के नौजवानों के लिए दरवाजे बंद कर दिए हैं। उनके आगे आने के सारे मौके खत्म कर दिए हैं। और इसलिए देश के उन युवाओं को अवसर मिलने ही चाहिए...जो राजनीति के माध्यम से नए समाधान देने के लिए आगे आना चाहते हैं। और इसलिए मैंने कहा है कि मैं एक लाख ऐसे नौजवानों को राजनीति में लाना चाहता हूं जिनके परिवार में वे पहली बार वो राजनीति में आए हैं।

साथियों,

अपने इन प्रयासों के बीच, हमें हर उस बुराई से दूर रहना है…और ये बात जरा मैं गंभीरता से बताना चाहता हूं। जनता हमें आशीर्वाद दे रही है और निरंतर आशीर्वाद दे रही है। हम जो कुछ भी हैं जनता-जनार्दन के आशीर्वाद के कारण हैं। जो कुछ भी है मेहनतकश, समर्पित कार्यकर्ताओं के परिश्रम के कारण हैं। और इसलिए जब इतने बढ़ रहे हैं। इतना सम्मान मिल रहा है, इतनी स्वीकृति मिल रही है तब हमारा दायित्व अनेक गुना बढ़ जता है। और पल-पल हमें सोचना चाहिए कि वो कौन से कारण हैं जिसने कांग्रेस पार्टी को बर्बाद कर दिया। वो कौन सी बुराइयां कांग्रेस में घुस गई जो आज कांग्रेस को तबाही के कगार पर लाकर के खड़ा कर दिया। हमें उन सारी बुराइयों से बचना है। ये बुराइयां किसी भी सूरत में हमारे भीतर नहीं आनी चाहिए। हमें इससे बच के रहना है। और जहां-जहां हम बच के रहते हैं, हमें कोई मुकाबला नहीं कर पाता है।

साथियों

आज देश को याद भी नहीं होगा...कि 1984 में कांग्रेस को चार सौ से अधिक सीटें मिली थीं…नेहरू जी के जमाने से भी ज्यादा... और देश ने करीब-करीब 50 प्रतिशत वोट दिया था कांग्रेस को। लेकिन आज कांग्रेस सौ सीटों के लिए तरस गई है। कांग्रेस अपने इस घनघोर पतन की कभी समीक्षा नहीं करती...क्योंकि अगर समीक्षा करेंगे, ये पतन के कारणों की ओर जाएंगे तो फिर उसी परिवार पर सवाल उठेंगे, जिस परिवार ने कांग्रेस पर कब्जा करके रखा है। और इसलिए बहाने ढूंढ़ते रहते हैं। पतन की तरफ सही कारण ढूंढ़ने की हिम्मत तक खो चुके हैं वो लोग

साथियों,

वहीं दूसरी तरफ भाजपा है। हम हार और जीत के बाद समीक्षा करते हैं। मैं आपको फिर महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों का उदाहरण दूंगा। महाराष्ट्र में हम निकाय चुनाव जीतने के बाद जश्न में डूबे नहीं... बल्कि मैं तो अभी पढ़ रहा था...कि उसी दिन से, हमारे माहराष्ट्र के कार्यकर्ता आने वाले पंचायत के चुनावों की तैयारियों के लिए बैठक शुरू कर दी थी। मुझे याद है 2002 हमने भव्य विजय प्राप्त की थी गुजरात में। चारों तरफ आनंद-उत्सव का माहौल था, देश भर का मीडिया भी वहां मौजूद था, अर्बन-नक्सल तो बड़ी संख्या में आए थे। वो बेचारे हमारी पराजय का जश्न मनाना चाहते थे। तो वे ढूंढ रहे थे सारी चीजें। और मैं एक मीटिंग में बैठा था, तो उनको बड़ा आश्चर्य हुआ कि यहां पर इतना जलसा चल रहा है और ये कैसा मुख्यमंत्री है कि आज ही चुनाव नतीजा आया है और ये बैठा है। और मैं क्या कर रहा था... मैं कार्यालय में मीटिंग ले रहा था। और मैंने पूछा कि अच्छा बताओ भाई कि इतने हार क्यों गए... ये भाजपा है... जो जीत का जश्न मनाते समय भी अपनी कमियों की लगातार समीक्षा करता है। और कमियों से ऊपर उठने के लिए हर समय का उपयोग करता है। लोकतंत्र में इसी स्वस्थ परंपरा को, इसी डेडिकेशन को हम सब कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है हमें आगे बढ़ाना है। हमें ध्यान रखना है, कि जो कांग्रेस की बुराइयों से बचेगा, वही देश में आगे बढ़ेगा।

साथियों,

आज भाजपा परिवार को अपना नया मुखिया मिला है। ऊर्जावान मुखिया मिला है। अनुभवी मुखिया मिला है। औऱ भाजपा परिवार की हमारी ताकत...हर कार्यकर्ता का परिश्रम है...उसकी सामूहिक चेतना है। बूथ पर जो हमारा कार्यकर्ता पूरे सालभर जुटा रहता है...वही हमारी सच्ची ताकत है। हमें याद रखना है...हम सबसे जुड़ें, हम सबको जोड़ें...कल्याणकारी योजनाओं से हर लाभार्थी को लाभ पहुंचाएं। ये हमारा ध्येय होना चाहिए। इसी आग्रह के साथ, माननीय नितिन नबीन जी को...बीजेपी के कोटि-कोटि कार्यकर्ताओं की तरफ से पुन: बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। और साथियों आज का पल हम सबके लिए बहुत विशेष पल है। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष जी अब हमारा मार्गदर्शन करने वाले हैं। उनका एक-एक शब्द हमारे लिए आगे की दिशा होगी, हमारे आगे की कार्यरचना के लिए उनका मार्गदर्शन हमारी अमूल्य पूंजी होगी। मैं भी एक कार्यकर्ता के तौर पर, मैं पहले नए अध्यक्ष जी को मेरे काम का हिसाब दे रहा था, मैंने हिसाब दिया, अब वो मेरा सीआर लिखेंगे, लेकिन अब मेरे आगे के कार्य के लिए मैं उनके मार्गदर्शन की प्रतीक्षा कर रहा हूं, मैं उनको सुनने के लिए बहुत ही उत्सुक हूं, आतुर हूं। फिर एक बार बहुत-बहुत धन्यवाद।

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