उपस्थित सभी महानुभाव 

श्रमेव जयते, हम सत्‍यमेव जयते से परिचित हैं। जितनी ताकत सत्‍यमेव जयते की है, उतनी ही ताकत राष्‍ट्र के विकास के लिए श्रमेव जयते की है। और इसलिए श्रम की प्रतिष्‍ठा कैसे बढ़े? दुर्भाग्‍य से हमारे देश में white collar job, उसका बड़ा गौरव माना गया। कोई कोट-पैंट टाई पहना हुआ व्‍यक्ति घर में दरवाजे पर आकर के बेल बजाता है, पूछने के लिए कि फलाने भाई हैं क्‍या, तो हम दरवाजा खोल कर कहते हैं, आइए-आइए, बैठिए-बैठिए। क्‍या काम था? लेकिन एक फटे कपड़े वाला, गरीब इंसान घंटी बजाए और पूछता है, फलाने हैं तो कहते हैं इस समय आने का समय है क्‍या? दोपहर को घंटी बजाते हो क्‍या? जाओ बाद में आना।

हमारा देखने का तरीका, सामान्‍य व्‍यक्ति की तरफ देखने का तरीका, क्‍यों, कि हमने श्रम को प्रतिष्ठित नहीं माना है। कुछ न कुछ कारणों से हमें उसे नीचे दर्जे का माना है। एक मनोवैज्ञानिक रूप से राष्‍ट्र को इस बात के लिए गंभीरता से सोचना भी होता है और स्थितियों को संभालने के लिए, सुधारने के लिए अविरत प्रयास करना भी आवश्‍यक होता है। उन्‍हीं प्रयासों की कड़ी में यह एक प्रयास है श्रमेव जयते।

श्रमयोगी, हमारा श्रमिक एक श्रमयोगी है। हमारी कितनी समस्‍याओं का समाधान, हमारी कितनी सारी आवश्‍यकताओं की पूर्ति एक श्रमयोगी के द्वारा होती है। इसलिए जब तक हम उसकी तरफ देखने का अपना दृष्टिकोण नहीं बदलते हैं, उसके प्रति हमारा भाव नहीं बदलता है, समाज में हम उसको प्रतिष्‍ठा नहीं दे सकते हैं। इसलिए शासन की व्‍यवस्‍थाओं में जिस तरह से समयानुकूल परिवर्तन की आवश्‍यकता है, काल बाह्य चीजों से मुक्ति की आवश्‍यकता होती है, नित्‍य नूतन प्राण के साथ प्रगति की राह निर्धारित करने की आवश्‍यकता होती है। उसी प्रकार से समाज जीवन में भी श्रम की प्रतिष्‍ठा, श्रमिक की प्रतिष्‍ठा, श्रमयोगी का गौरव, ये हम सब की सामूहिक जिम्‍मेवारी भी है और व्‍यवस्‍थाओं में परिवर्तन करने की आवश्‍यकता भी है। यह उस दिशा में एक प्रयास है।

हम जानते है एक बेरोजगार ग्रेजुएट हो या एक बेरोजगार पोस्ट ग्रेजुएट हो, तो ज्‍यादा से ज्‍यादा हम इस भाव से देखते हैं अच्‍छा, बेचारे को नौकरी नहीं मिल रही है। बेचारे को काम नहीं मिल रहा है। लेकिन गर्व करता है, नहीं ग्रेजुएट है, पोस्‍ट ग्रेजुएट है, डबल ग्रेजुएट है। काफी अच्‍छा पढ़ता था। लेकिन कोई ITI वाला मिले तो नहीं यार, ITI है। चलो यार, तुम ITI वाले हो, चलो। यानी, हमारी Technical Education का सबसे एक प्रकार का शिशु मंदिर है। सबसे छोटी ईकाई है। लेकिन हमने पता नहीं क्‍यों उसके प्रति इतना हीन भाव पैदा किया है। जो बच्‍चा ITI में, वह भी रेल में, बस में कहीं मिल जाता है, तो परिचय नहीं देता है कि कहां पढ़ता है। उसको संकोच होता है। ITI बोलना बुरा लगता है। आज हमने एक नया Initiative लिया है। और मैं इन सबको बधाई देता हूं, जो आज हमारे इस क्षेत्र के ambassador बने हैं।

अब इस क्षेत्र में ambassador के लिए किसी बहुत पढ़े-लिखे व्‍यक्ति को ला सकते थे, किसी नट-नटी को ला सकते थे, किसी नेता को रख सकते थे। लेकिन हमने ऐसा नहीं किया। जो स्‍वयं निर्धन अवस्‍था में बड़े हुए हैं, ITI से ज्‍यादा जिनको शिक्षा प्राप्‍त करने का सौभाग्‍य नहीं मिला, लेकिन उसी ITI की शिक्षा के बलबूते पर आज वो इतनी ऊंचाईयों को पार कर गए कि खुद भी हजारों लोगों को रोजगार देने लगे हैं। ये वो लोग हैं, जिन्‍होने ITI में प्रशिक्षण पाया, लेकिन उसी बदौलत अपनी जिंदगी को बना दिया। हर ITI में पढ़ने वाला, हर श्रमिक, भले ही आज उसकी जिंदगी की शुरूआत किसी न किसी सामाजिक आर्थिक कारणों से अति सामान्‍य अवस्‍था से हुई हो, लेकिन उसका भी हौसला बुलंद होना चाहिए कि भाई ठीक है। यह कोई end of the journey नहीं है। It’s a beginning. 

देखिए कितने लोग हैं, बहुत आगे निकले हैं। जब तक हमारे सामान्‍य से सामान्‍य नागरिक के अंदर भीतर विश्‍वास नहीं पैदा होता है, वो अपने आप को कोसता रहता है तो उसकी जिंदगी खुद के लिए बोझ बनती है, परिवार के लिए बोझ बनती है। देश के लिए भी बोझ बनती है। लेकिन उसके पास जो कुछ भी उपलब्‍ध है, उसमें भी गौरव के साथ अगर जीता है, तो वह औरों को भी प्रेरणा देता है। इसलिए, एक युवा पीढ़ी में विश्‍वास और भरोसा पैदा करने के लिए, self confidence को create करने के लिए एक ऐसे प्रयास को हमने प्रारंभ किया है। और बाहर का कोई व्‍यक्ति उपदेश दे तो ठीक है साहब, आप तो बहुत बड़े व्‍यक्ति बन गए। और मेरा हौसला बुलंद कर रहे थे। लेकिन उसी में से कोई बड़ा बनता है, तब जाकर कहता है कि अच्‍छा भाई वह भी बना था। वह आईटीआई में टर्नर था। और वह भी लाखों लोगों को रोजगार देता है। ठीक है, मैं भी कोशिश करूंगा।

आखिरकर यही सबसे बड़ी ताकत होती है। और उस ताकत को जगाने के लिए ये ambassadors, मैं तो चाहूंगा कि ऐसे सफल लोग, हर राज्‍य में होंगे, हर राज्‍य में ऐसे सफल लोगों के गाथाओं की किताब निकले। Portal पर उनके जीवन रखा जाए कि कभी ITI में पढ़े थे, लेकिन आज जीवन में इतने सफल रहे है। इस क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों लोग हैं गरीब, उनका विश्‍वास पैदा होता है। और हर बार ऐसे लोगों को सम्‍मानित करना।

कोई ताल्‍लुका का brand ambassador हो सकता है, कोई जिले का brand ambassador हो सकता है, कोई राज्‍य का brand ambassador हो सकता है, कोई राष्‍ट्र का। धीरे-धीरे इस परंपरा को विकसित करना है मुझे। नीचे तक उसको percolate करना है, उसको expand करना है। एकदम से horizontal इसको spread करना है। मैं चाहूंगा सब राज्‍य से, हमारे मंत्री महोदय आए हैं, वो इस दिशा में उनकी प्रतिष्‍ठा के लिए कुछ न कुछ करेंगे।

उसी प्रकार से ITI एक ऐसी व्‍यवस्‍था नहीं हैं, जो कि प्राणहीन हो। कभी-कभार कागजी लिखा-पट्टी में जो विफल रहते हैं, उनको एक ऐसा software परमात्‍मा ने दिया होता है, कि mechanical work में, Technical work में वो बहुत innovative होते हैं। हमारी ITIs में ऐसे जो होनहार लोग होते हैं, उनको अवसर मिलना चाहिए। अगर 2 घंटे बाद में उसको मशीन पे बैठ के काम करना है तो उनको अवसर मिलना चाहिए। यहां कुछ लोगों को इसके लिए award दिया गया है कि अपना Temperament होने के कारण इस व्‍यवस्‍था का उपयोग करते हुए उन्‍होंने कोई न कोई चीज innovation के लिए कोशिश की। कुछ नया प्रयास किया। एक disciple में गया लेकिन multiple disciple को grasp करने की ताकत थी। ये जो किताबी दुनिया से बाहर, इंसान की अपनी बहुत बड़ी शक्ति होती है। हमारे ITIs इसको पहचाने। उस दिशा में प्रयास करने का एक प्रयास हुआ है, और उस प्रयास का लाभ मिलेगा।

उसी प्रकार से जब हम पढ़ते हैं, 27,000 करोड़ रुपये ऐसे ही पड़े हैं, तब ज्‍यादा से ज्‍यादा अख़बार में दो-चार दिन अखबार में आ जाता है, सरकार सोई पड़ी है, नेता क्‍या कर रहे हैं। सिर्फ भाषण दे रहे हैं। वगैरह-वगैरह। लेकिन उसका 27,000 करोड़ रुपये का कोई उपाय नहीं निकलता है। पड़ा है, क्‍या करें साहब, लेने वाला कोई नहीं है।

मैं हैरान हूं, हमारे देश में मोबाईल फोन, आप स्‍टेट बदलो तो नंबर चल जाता है, आप दूसरे देश चले जाओ तो नंबर बदल जाता है। service provider, इस राज्‍य में है, दूसरे राज्‍य में नया service provider है तो वो provider आपको connectivity दे देता है। मोबाईल फोन वाले के लिए सबसे सब सुविधाएं हो सकती हैं, एक गरीब इंसान नौकरी छोड़ करके दूसरी नौकरी पर जाएं, उसको वो लिंक क्‍यों नहीं मिलना चाहिए ? इसी सवाल ने मुझे झकझोरा और उसी में से रास्‍ता निकला है कि अगर उसके साथ एक Permanent नंबर लग जाएगा, वो कहीं पर भी जाएं, account उसके साथ चलता चला जाएगा। फिर उसका पैसा कभी कहीं नहीं जाएगा। इस प्रयत्‍न के कारण, ये 27 हजार करोड़ रूपये जो पड़े हैं न, ये किसी न किसी गरीब के पसीने के पैसे हैं, वो सरकार के मालिकी के पैसे नहीं हैं। मुझे उन गरीबों को पैसा वापस देना है और इसलिए मैंने खोज शुरू की है इस account नंबर से।

वैसे कोई सरकार 27 हजार करोड़ की scheme लगा दे तो सालों भर चलता है, वाह कैसी योजना लाए ! कैसी योजना लाए ! लेकिन योजना का क्‍या हुआ कोई पूछता नहीं है। ये ऐसा काम है.. जो दुनिया कहती है न, मोदी का क्‍या विजन है? उनको दिखेगा नहीं इसमें। क्‍योंकि विजन देखते-देखते उनके चश्‍मे के नंबर आ गए हैं, इसलिए उनको नहीं दिखाई देगा। लेकिन इससे बड़ा कोई विजन नहीं हो सकता है कि 27 हजार करोड़ रुपए गरीब का पड़ा है, गरीब की जेब में वापस जाए। इसके लिए कहीं तो शुरू करें। हो सकता है कुछ लोग नहीं होंगे जिनका .. रहे नहीं होंगे। एक सही दिशा में प्रयास है जिसमें बैंकिंग को जोड़ा है, industrial houses को जोड़ा है और उस व्‍यक्ति को भी उसका मिल रहा है।

देखा होगा आपने, योजना दिया जला करके launch नहीं की गई है। योजना किसी किताब का Folder खोलकर नहीं की गई है। actually योजना में उन सबको SMS चला गया है, लाखों लोगों को और योजना लागू हो गई है। यानी मेहनत पहले पूरी कर दी गई है, बाद में उसको लाया गया है। work culture कैसे बदला जाता है, उसका ये नमूना है वरना क्‍या होता, आज हम launch करते उसके फिर चार-छह महीने के बाद review करते, एकाध साल के बाद हम आते। अब हो गया है। तो योजना वहीं की वहीं रह जाती। तो पहले पूरा करो, लोगों के पास ले जाओ, ये प्रयास किया है। मैं इसके लिए मंत्रालय को और उसकी पूरी टीम को बहुत-बहुत बधाई देता हूं कि advance में उन्‍होंने काम किया है।

उसी प्रकार से हमारे देश की एक सबसे बड़ी समस्‍या यह है कि हम, जो सरकार में बैठे हैं, हम मानते हैं कि हम से ज्‍यादा कोई जानता ही नहीं है, हम से ज्‍यादा समझ किसी को नहीं है, हम से ज्‍यादा ईमानदार कोई नहीं है, हम से ज्‍यादा देश की परवाह किसी को नहीं है। ये गलत सोच है। सवा सौ करोड़ देशवासियों पर हम भरोसा करें। सरकार आशंकाओं से नहीं चलती है। सरकार प्रारंभ भरोसे से करती है और इसलिए आपने देखा होगा, अंग्रेजों के जमाने से एक व्‍यवस्‍था चलती थी कि आपको किसी certificate को Zerox करके कहीं भेजना है तो गजेटेड officer का साइन लेना पड़ता था। हमने कहा, मुझे यह समझ में नहीं आती है कि तुम तो बेईमान हो, गजेटेड officer ईमानदार है, किसने तय किया है ? ये किसने तय किया है ? और इसलिए मैंने कहा कि तुम खुद ही लिख के दे दो कि तुम्‍हारा certificate सही है और वो मान्‍य हो जाएगा। ये self certification! 

ये वो बड़े विजन में नहीं आया होगा क्‍योंकि 60 साल में वो विजन किसी को दिखाई नहीं दिया है, लेकिन घटना भले ही छोटी हो, लेकिन उस इंसान को विश्‍वास पैदा होता है, हां! ये देश मुझ पर भरोसा करता है। मेरा certificate है और मैं कह रहा हूं, मेरा है तो मानो न। जब नौकरी देते हों, तब original certificate देख लेना। इसके कारण जो बेचारे नौजवानों को रोजगार लिया है, कुछ लेना है तो अपना copy certify कराने के लिए इतना दौड़ना पड़ता था, हमने निकाल दिया।

इसमें भी हमने उद्योगकारों को कहा है, जो employer हैं, बड़े-बड़े उद्योगकार नहीं, छोटे-छोटे लोग हैं, छोटे-छोटे उद्योग हैं, किसी के यहां तीन employee हैं, 5 हैं, 7 हैं, 11 हैं, 18 हैं, और पचासों प्रकार डिपार्टमेंट उसका गला पकड़ते हैं। पचासों प्रकार के उसको फार्म भरने पड़ते हैं। दुनिया बदल चुकी है। आखिरकर मैंने मंत्रालय को कहा कि भाई मुझे ये सब बदलना है। मैंने तो इतना ही कहा था, बदलना है। लेकिन क्‍या बदलना है, मंत्रालय ने मेहनत की, अफसरों ने लगातार काम किया। और आज 16 में से, 16 अलग-अलग प्रकार के फार्म है, एक एक फार्म शायद 4-4, 5-5 पेज का होगा, सबको हटाकर के एक बना दिया गया, वह भी online और अब किसी और जरूरत होगी, उस नंबर पर जांच करेगा तो सब वहां उपलब्‍ध होगा। अब वह बार-बार पूछने नहीं जाएगा क्‍या करोगे? 

ये जो सुविधाएं है, और यही तो maximum governance है। minimum government, maximum governance का मतलब क्‍या है? यही है कि आप, उनकी सारी झंझटें खत्‍म हो गई। उन्‍होंने कह, यह है हमारा, हो गया। एक बड़ी समस्‍या रहती है कि Inspector राज। ये ऐसा शब्‍द है जो, मैं जब छोटा था, तब से सुनते आया हूं। मुझे लगता था कि शायद पुलिस वालों के लिए यह कहते हैं। तब मुझे मालूम नहीं था, Inspector है ना, तो उसे पुलिस समझते थे। धीरे-धीरे बड़े होने लगे, समझने लगे, तब पता चला कि यह दुनिया तो बहुत है भई। हर गली-मोहल्‍ले में है। 

क्‍या इसका कोई समाधान हो सकता है और इसी में से Technology intervention हम लगाए। और मैं मानता हूं – e-governance, easy governance है, effective governance है। economical governance भी है, at the same time, e-governance transparency के लिए भी कुल मिलाकर के एक विश्‍वास पैदा करता है। अब computer draw तय करेगा कि कल तुम्‍हें Inspection कहाँ करना है और कंप्यूटर से ड्रा होगा कि इतने बजे ड्रा हुआ, इंस्पेक्शन कितने बजे किया, वहां से SMS जाएगा, पता चलेगा कि महाशय जी कब पहुंचे और 72 hours में उन्‍हें जो भी रिपोर्ट करना है, उसको online कर देना पड़ेगा।

मैं नहीं मानता हूं कि जो harassment वाला मामला है, वह भी रहेगा। कुछ लोग ऐसे होते हैं कि गलती खूब करते हैं, चोरी खूब करते हैं। फिर गाली Inspector को देते हैं कि वह आके हमें परेशान करते हैं। तो दोनों तरफ से गड़बड़ी होती है, ये दोनों तरफ की गड़बड़ी का निराकरण है इसमें। स्‍वाभाविक है, इसके कारण एक well spread activity होगी। मुझे अभी भी कोई समझ नहीं है।

मैं कभी सोचता हूं, हम कार खरीदते हैं। हमारी कार का ब्रेक ठीक है कि नहीं है, एक्‍सीलेटर ठीक है कि नहीं, गियर बराबर काम करता है कि नहीं है। वह कोई सरकारी अफसर आकर के Inspect करता है क्‍या? हमीं करते हैं न। मुझे मालूम है कि मुझे जीना, मरना है तो गाड़ी को मेरी ठीक रखूंगा। ऐसे factory वाले को भी मालूम है कि boiler, में ऐसे थोड़े ही रखूंगा कि मैं मर जाऊं तो हम उसमें भरोसा करें। तुम अपने boiler का certificate लेकर के सरकार के पास जमा करा दो। तुम्‍हारा boiler ठीक है, तुम आके बता दो बस।

मैं तो हैरान हूं। कभी किसी जमाने में एक बड़े शहर में एक या दो lift हुआ करते थे। बड़े शहरों में, जिस जमाने में lift शुरू हुआ था। अब सरकार ने, lift का inspection municipality ने अपने पास रखा। अब हर जगह पर lift होने लगी और inspector एक है। और lift का परीक्षण उसको करना पड़ता है। वह कहां से करेगा। society वाले को बोलो कि तुम छह महीने में एक बार lift को चेक कराओ और उसको चि‍ट्ठी लिख दो कि किससे चेक किया। और तुम्‍हारा satisfaction letter भेज दो। क्‍योंकि वो भी नहीं चाहता है, lift में मरना।

हम उसको जितना जोड़ेंगे, उस पर जितना भरोसा करेंगे, हमारी व्‍यवस्‍थाएं कम होती जाएंगी और लोग अपने आप Responsible बनते जाते हैं। उस दिशा में काम करने का एक महत्‍वपूर्ण प्रयास ये सुविधा पोर्टल के माध्‍यम से किया गया है। इंसपेक्‍टर के Inspection की नई Technology added व्‍यवस्‍था की गई है। उसके कारण मुझे विश्‍वास है कि हम जो Ease of Business की बात करते हैं, आखिर कर make in India को सफल करना है। Ease of Business, सबसे पहली requirement है । Ease of Business प्रमुखतया शासन की जिम्‍मेवारी होती है। उसकी कानूनी व्‍यवस्‍थाएं, उसका Infrastructure, उसकी speed ये सारी बातें उसके साथ जुड़ी हुई हैं। और इसलिए ease of Business Make In India की प्राथमिकता है। 

इसलिए Ease of business, make in India की priority है। उसी प्रकार से हम उद्योगकारों पर कहने पर, उनके आग्रह पर या उनकी सुविधा के लिए labour के लिए सोचते रहेंगे तो कभी labour को हम न्‍याय नहीं दे पाएंगे। हमने labour समस्‍या को labour की नजर से ही देखना है। श्रमिक की आंखों से ही श्रमिक समस्‍या देखनी चाहिए। उद्योगकार की आंखों से श्रमिक की समस्‍या नहीं देख सकते और इसलिए श्रमिक की आंखों से श्रमिक की समस्‍या देख करके, उसके जीवन में सुविधाएं कैसे बढ़े, वो अपने हकों की रक्षा कैसे कर पाएं.. अब देखिए परंपरागत रूप से हमारे यहां कुछ लोगों को बहुत काम आता है, लेकिन वो किसी व्‍यवस्‍था से नहीं निकला है इसलिए उसके पास कोई certificate नहीं है। क्‍यों न हम उसे अपने तरीके से, अपनी मर्जी से कुछ सिखाएं।

मान लीजिए कोई किसी के यहां peon के नाते काम करता है, लेकिन peon का काम करते करते उसने driving सीख ली है। आ गई है ड्राइविंग, लेकिन चूंकि उसके पास certified व्‍यवस्‍था नहीं है, कहां सीखा क्‍या सीखा, proper license की व्‍यवस्‍था नहीं है इसलिए कोई उसको driver रखता नहीं है। सब पूछते हैं कि पहले कहीं ड्राइवरी की थी क्‍या ? तो, मिलता नहीं। क्‍यों न हम इस प्रकार के लोगों के लिए कोई व्‍यवस्‍था खड़ी करें कि जो अपनी ताकत से, अपने बल पर उन्‍होंने ज्ञान अर्जित किया है, परंपरा से किया है, उसके value addition के लिए काम किया है, हम उस दिशा में काम करें! ताकि वो फिर एक authority के रूप में जाएगा। हां भई! Construction में इन चार कामों में मास्‍टरी है मेरी, मेरा इतने साल का experience है, यहां यहां काम किया है और जो authority है, authority ने मुझे दिया हुआ है, वरना वो क्‍या होगा, unskilled labor में बेचारा जिंदगी काटता रहता है, जबकि है skilled labor! उसके पास किताबी ज्ञान से ज्‍यादा Skill है।

ये जो unskilled में से skilled में लाना, ये जो bridge है, वो इंसान खुद नहीं निकाल सकता। उसके लिए सरकार ने एक लंबी सोच के साथ.. चिंता करनी पड़ेगी। उस चिंता को पूरा करने का हमारा प्रयास, इन प्रयासों के साथ जुड़ा हुआ है और इसलिए .. अब आप मुझे बताइए.. हमारे देश के नौजवान को रोजगार चाहिए, उद्योगकारों को लोग चाहिए। हम चाहते हैं, नौजवान बेचारा जो फ्रैश निकला है, उसको कहीं न कहीं तो exposure मिलना चाहिए, practical होना चाहिए। उद्योगकार उसको घुसने नहीं देता है, क्‍यों ? labour inspector आ जाएगा। तुम बाहर रहो भई। तुम आओगे तो मेरी किताब में ऐसा भरा जाएगा, मैं कहीं का नहीं रहूंगा, मैं उसमें से बाहर ही नहीं निकलूंगा। वो सरकारी डर से आने नहीं देता। आने नहीं देता, करता है, तो कभी बेईमानी से करता है। क्‍यों न उसके लिए हम ऐसी व्‍यवस्‍था करें ताकि हमारे जो apprentice जो हैं, हमारे नौजवानों को अवसर मिले।

एक बार अवसर मिलेगा तो जो quality man power है, वो अपने आप ऊपर आएगा, उनको अच्‍छा स्‍कोप मिल जाएगा और देश की जो requirement है, वो requirement पूरी होगी और इसीलिए .. जैसा मंत्री जी ने बताया, Parliament में इस बात को कहा कि चार लाख apprentice हैं। अब आप बताइए कितने लोगों को ऐसे छोटे, छोटे, छोटे hurdles हैं, उनको भी अगर smoothen up कर दिया जाए तो हम किस प्रकार से गति दे सकते हैं, ये हम अनुभव कर रहे हैं। इसलिए सरकार ही देश चलाए, उस मिजाज से हमें बाहर आना है, देश के सब मिल करके देश चलाएं, उस दिशा में हमें जाना है और इसी के लिए सबकी भागीदारी के साथ, सबको साथ जोड़ करके काम करने की दिशा में हम आगे बढ़ना चाहते हैं।

skill development भारत के लिए बहुत बड़ी opportunity है। पूरे विश्‍व को Twenty Twenty तक करोड़ों करोड़ों लोगों की जरूरत है। दुनिया के work force को provide करने का सामर्थ्‍य हमारे पास है। हमारे पास नौजवान हैं, लेकिन अगर वो skilled man power नहीं होगा तो जगत में उसको कहीं स्‍थान नहीं मिलेगा और इसलिए हमें एक तो वो तैयार करना है, generation को, नई generation को, जो job creator हो, और दूसरी वो generation हो जो job creator नहीं बन सकती है लेकिन कम से कम लोग उसको job के लिए ढूंढते आ जाएं, इतनी capacity वाला वो नौजवान तैयार हों। उन बातों को ले करके अगर हम चलते हैं .. और इस प्रकार का एक skilled work force जो पूरे विश्‍व की requirement है, आने वाले दिनों में .. उसी को हम आज से ही तैयारी करते हैं। हम उस requirement को पूरा कर सकते हैं।

मैंने देखा है, मैं कई ITI के ऐसे students को जानता हूं जिनको विदेशों में, खास करके gulf countries में एक एक, दो दो लाख के पैकेज पर काम करते हैं। बड़ी बड़ी कंपनियों में, क्‍येांकि इस प्रकार के work Force की बहुत Requirement बढ़ती चली जा रही है। हम इन बातों पर ध्‍यान देंगे। हमारी कोशिश ये है कि हमने उस दिशा में प्रयास शुरू किया है। और आज एक साथ, ये एक-एक योजना ऐसी है कि हर महीने एक-एक लांच कर दें तो भी एक बड़ा काम दिखता। लेकिन 5 साल में काफी काम करने है। इसलिए मैं एक-एक दिन में 5-5 काम निबटा रहा हूं।

जिनको आज पुरस्‍कार मिला है, उनका मैं अभिनंदन करता हूं और मैं आशा करता हूं कि आप स्‍वयं में, ये ITI के नौजवानों में विश्‍वास करिये। आप बात कीजिए उनसे मिलिये। आप देखिए, क्‍या, कहां बुलंदी पर पहुंच सकते हैं। हम श्रमिक का सम्‍मान करना सीखेंगे। कभी-कभार मुझे विचार आ रहा है, कोई बढि़या सा शर्ट खरीदा, पहन करके दफ्तर आए या समारोह में गए। 5-10 दोस्‍त ने कहा, क्‍या बढि़या शर्ट है। कॉलेज में गए हैं, बहुत बढि़या T-shirt पहन कर गए हैं।, वाह सब लड़के देखते हैं,वाह क्‍या बढि़या T-shirt है तो सेल्‍फी भी निकाल देता है। circulate भी कर देता है। लेकिन क्‍या सोचा है, क्‍या मेरे जेब में पैसे थे, इसलिए शर्ट आया है। क्‍या मेरे पिताजी ने 2-4 हजार रुपये मेरे पॉकेट खर्च के लिए दिए थे, उसके लिए शर्ट आया है? नहीं मेरे पैसे के कारण मेरा शर्ट नहीं आया है।

मेरा शर्ट इसलिए आया है, कि किसी गरीब किसान ने मई-जून की भयंकर गर्मी में खेत जोता होगा। कपास बोया होगा। बारिश में भी रात-भर काम किया होगा। तब जाकर कपास हुआ। किसी गरीब मजदूर ने उसमें से धागा बनाया होगा। किसी बुनकर ने उसको कपड़े में परिवर्तित किया होगा। किसी रंगरेज ने अपनी जिंदगी के रंग की परवाह किए बिना अपने शरीर के रंग की परवाह किये बिना हाथ कितने ही रंग से रंग क्‍यों न जाएं, उस कपड़े को अच्‍छे से रंग से रंगा होगा। कोई दर्जी होगा, जिसने उसकी सिलाई की होगी। कोई गरीब विधवा होगी, जिसको अपनी बेटी की शादी करवानी है, इसलिए रात-रात भर बुढ़ापे में भी उन कपड़ों पर काज-बटन किया होगा। कोई धोबी होगा जो कपड़ों पर बढि़या सा प्रेस किया होगा। कोई पैकेजिंग करने वाला बच्‍चा मजदूर होगा जिसने कि जाके पैकेजिंग का काम किया होगा, तब जाकर के एक shirt बाजार में आके मेरे शरीर पर आया होगा। मेरे पैसों के कारण नहीं आया।

शर्ट मेरे पैसों से नहीं निकलता है अच्‍छी साड़ी हो, शर्ट हो, कपड़े हो, किसी न किसी गरीब के परिश्रम का प्रयास है और इसलिए समाज के इन श्रमिक वर्ग के प्रति उस संवेदना के साथ, उस गौरव के साथ अगर देखना हमारा स्‍वभाव बनता है, तो मुझे विश्‍वास है कि सच्‍चे अर्थ में ये श्रमयोगी राष्‍ट्रयोगी बनेगा। ये श्रमयोगी राष्‍ट्र निर्माता बनेगा। और उसी दिशा में एक बहुत बड़ी जिम्‍मेवारी के साथ आज एक अहम कदम की और आगे बढ़ रहे हैं जो Make in India के सपने को पूरा करेगा। विश्‍व वो भारत में लाने का निमंत्रण देने के लिए मेरा श्रमिक खुद भी एक शक्ति बन जाएगा।

इसी विश्‍वास के साथ सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं। 

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The days of TMC’s hooliganism are coming to an end: PM Modi in Kolkata, West Bengal
March 14, 2026
The days of TMC’s hooliganism are coming to an end. The countdown for the departure of the TMC government has begun: PM Modi in Kolkata rally
Due to infiltration, Bengal’s ‘roti, beti and mati’ are under threat. Jobs of local people are being snatched away, security of our daughters is at risk and illegal encroachments are taking place: PM Modi
I assure the mothers and sisters of Bengal that under a BJP government, women will be safe and criminals will be behind bars: PM Modi’s promise to West Bengal
First the Congress, then the Communists and now the TMC - they kept coming one after another, filling their pockets while development work in Bengal remained stalled: PM’s concern in West Bengal

भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की...

ये बेटी कब से चित्र लेकर खड़ी है कोई कलेक्ट कर लीजिए ताकि वो बेटी आराम से बैठ सके। जरा एसपीजी के लोग इसे कलेक्ट कर लीजिए। धन्यवाद बेटा... बहुत बढ़िया चित्र बनाया आपने...

भारत माता की... भारत माता की...

आमार प्रियो पोश्चिम बोंगोबाशी, भाई ओ बोनेरा, आमार अंतोरेर अंतोस्थल थेके… आपनादेर शोबाइके सश्रोद्धो प्रोणाम।

बंगाल की ये ऐतिहासिक धरती....ये ब्रिगेड परेड ग्राउंड का ऐतिहासिक मैदान.....और, बांग्ला मानुष का ये ऐतिहासिक जन-सैलाब... जहां जहां मेरी नजर पहुंच रही हो लोग ही लोग नजर आ रहे हैं। ये अद्भुत दृश्य है। ये.आपका उत्साह...ये आपका जोश...बंगाल क्या सोच रहा है....बंगाल के मन में क्या चल रहा है....अगर किसी को ये देखना है, तो जरा ये तस्वीरें देख ले!

ब्रिगेड परेड ग्राउंड का इतिहास साक्षी है....जब-जब बंगाल देश को दिशा देता है...ये ब्रिगेड मैदान बंगाल की आवाज़ बनता है। इस मैदान से अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उठी आवाज. और वो आवाज हिंदुस्तान में एक क्रांति बन गई थी। और उसका नतीजा क्या हुआ...अंग्रेजों के अत्याचार और लूट का खात्मा हुआ! आज एक बार फिर...ब्रिगेड ग्राउंड से नए बंगाल की क्रांति का बिगुल बज गया है। बंगाल में बदलाव अब दीवारों पर भी लिख चुका है... और बंगाल के लोगों के दिलों में भी छप चुका है। अब बंगाल से निर्मम सरकार का अंत होकर रहेगा... अब बंगाल से महाजंगलराज का खात्मा होगा। इसीलिए, बंगाल के हर कोने से आवाज उठ रही है... चाइ बीजेपी शॉरकार चाइ बीजेपी शॉरकार पाल्टानो दोरकार, चाइ बीजेपी शॉरकार

साथियों,

कल TMC ने इस रैली में आने वाले आप सभी लोगों को चोर कहकर गाली दी है। असली चोर कौन है, ये बंगाल की प्रबुद्ध जनता जानती है। अपनी कुर्सी जाते हुए देखकर... यहां की निर्मम सरकार बौखला गई है।

साथियों,

आज भी इस विशाल सभा को रोकने के लिए निर्मम सरकार ने सारे हथियार निकाल लिए आपलोगों को आने से रोकने के लिए ब्रिज बंद करवा दिए, गाड़ियां रुकवा दी, ट्रैफिक जाम करवाया, भाजपा के झंडे उखड़वा दिए, पोस्टर फड़वा दिए। लेकिन निर्मम सरकार साफ-साफ देख लो आज के जनसैलाब को रोक नहीं पाई हो। बंगाल में महाजंगलराज लाने वालों का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। वो दिन दूर नहीं जब बंगाल में फिर से कानून का राज होगा...जो कानून तोड़ेगा... जो अत्याचार करेगा...TMC के किसी अत्याचारी को छोड़ा नहीं जाएगा। चुन-चुन के हिसाब लिया जाएगा।

भाइयों बहनों,

यहां की निर्मम सरकार चाहे अब जितना जोर लगा ले...परिवर्तन की इस आंधी को अब निर्मम सरकार रोक नहीं पाएगी... भाजपा के साथ...एनडीए के साथ...महिषासुरमर्दिनी का आशीर्वाद है। श्री रामकृष्ण परमहंस...स्वामी विवेकानंद....नेताजी सुभाष चंद्र बोस....ऋषि बंकिम चंद्र, गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर....ईश्वर चंद विद्यासागर...बाघा जतिन और खुदीराम बोस...डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी.....लोकमाता रानी रॉशमोनी...ऐसी सभी महान विभूतियों ने जिस बंगाल की परिकल्पना की थी....भारतीय जनता पार्टी की सरकार...उस बंगाल का निर्माण करेगी, नवनिर्माण करेगी।

साथियों,

बंगाल का विकास नेक नीयत से होगा, सही नीतियों से होगा। बंगाल में अभी हमारी सरकार नहीं है। लेकिन फिर भी, केंद्र सरकार के जरिए बीजेपी दिन-रात बंगाल के विकास में लगी हुई है। आज भी, मैंने 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया है। अभी-अभी 18 हजार करोड़.. कितना... कितना.. 18 हजार करोड़... कितना... कितना... कितना... चार दिन पहले ही, कैबिनेट ने पश्चिम बंगाल के लिए मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। ये सभी प्रोजेक्ट पश्चिम बंगाल में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएंगे। इसका फायदा यहां के सामान्य मानवी, किसान, व्यापारी और स्टूडेंट्स को मिलेगा।

भाइयो और बहनों,

यहां की निर्मम सरकार ने बंगाल के युवाओं को पलायन का अभिशाप दिया है। आप सब जानते हैं.... बंगाल के युवा प्रतिभा और हुनर में सबसे आगे हैं। बंगाल के युवा मेहनत करने में सबसे आगे हैं। बंगाल एक समय पर पूरे भारत के विकास को गति देता था... बंगाल व्यापार और उद्योगों में सबसे आगे था। लेकिन, आज हालात क्या हैं? यहाँ का युवा ना डिग्री ले पा रहा है... और ना ही उसे रोजगार मिल रहा है! आपके बेटे-बेटियों को काम की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ता है।

साथियों,

पहले कांग्रेस, फिर कम्युनिस्ट और अब TMC…. ये लोग एक के बाद एक आते रहे.... अपनी जेबें भरते रहे.... और बंगाल में विकास के काम ठप्प पड़े रहे। इनफ्रास्ट्रक्चर के मामले में हमारा बंगाल पीछे होता चला गया। उद्योग धंधे बंद होते चले गए। यहाँ टीएमसी सरकार में नौकरियां खुलेआम बेची जा रही हैं। भर्तियों में घोटाले हो रहे हैं। अब समय आ गया है.... अब समय आ गया है.... ये हालात बदलें, बंगाल के युवाओं को बंगाल में काम मिले! ये नौजवान बंगाल के विकास का नेतृत्व करें! एई शोप्नो आपनार, आर एई शोप्नो पूरोन कोरा.... मोदीर गारंटी! मोदीर गारंटी!

साथियों,

TMC सरकार का एक ही एजेंडा है.... ये टीएमसी वाले न खुद काम करेंगे, न करने देंगे! जब तक इनको अपना कटमनी नहीं मिल जाता.... ये किसी भी योजना को गाँव-गरीब तक नहीं पहुँचने देते! इसीलिए, TMC सरकार केंद्र की योजनाओं को रोककर रखती है। आप देखिए.... हम कारीगरों और कामगारों को आगे बढ़ाने के लिए पीएम-विश्वकर्मा योजना चला रहे हैं। हमारे कुम्हार, लोहार, बढ़ई... ऐसे हुनरमंद लोगों को इसका लाभ मिल रहा है। लेकिन, निर्मम सरकार ने बंगाल में योजना पर ब्रेक लगा रखा है। मुझे बताइए भाइयों, मेरे इन विश्वकर्मा भाइयों को भारत सरकार के पैसे पहुंचने चाहिए कि नहीं पहुंचने चाहिए, उनको मदद मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए , उनका भविष्य उज्ज्वल होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए.. केंद्र सरकार पैसे दे रही है, बंगाल को कुछ नहीं करना है लेकिन उसके बावजूद भी ये विश्वकर्मा समाज के छोटे-छोटे भाई-बहनों को उससे वंचित रखा जाता है।

साथियों,

देशवासियों को मुफ्त बिजली देने के लिए हमने पीएम-सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना शुरू की है। केंद्र की भाजपा सरकार इसके लिए हर लाभार्थी को 75 से 80 हजार रुपए देती है। आपको, बंगाल के मेरे भाई-बहनों को, हर परिवार को मोदी सरकार 75 से 80 हजार रुपए रुपये देती है। जो लाभार्थी पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से जुड़ता है, उसके घर का बिजली बिल जीरो हो जाता है...लेकिन बंगाल सरकार इसे भी लागू नहीं होने दे रही। आप मुझे बताइए आपका बिजली बिल जीरो होना चाहिए कि नहीं। बिजली बिल जीरो करने के लिए मोदी की मदद मिलनी चाहिए कि नहीं चाहिए। जो इसे रोकते हैं वो आपके दुश्मन हैं कि नहीं हैं… बंगाल के दुश्मन हैं कि नहीं हैं… हर परिवार के दुश्मन हैं कि नहीं है।

साथियों,

बंगाल के विकास में चाय बागानों और उनमें काम करने वाले श्रमिकों की बड़ी भूमिका है। लेकिन चाय बागानों के श्रमिकों को PM चाह श्रमिक प्रोत्साहन योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। मुझे बताइए.. चाय बागान के मेरे श्रमिकों को ये लाभ मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए… उनको मदद मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए। केंद्र सरकार की इस योजना में बंगाल सरकार रोड़े अटका रही है।

साथियों,

आप सबने देश भर में पीएम-आवास योजना की सफलता के बारे में सुना है! दुनिया के लोग भी जब सुनते हैं ना तो अचरज करते हैं। जो लोग बंगाल से बाहर रह रहे हैं… ऐसे हर गरीब परिवार को पक्का घर मिल रहा है। लेकिन यहां क्या हुआ? योजना का नाम बदल दिया गया। लाभार्थियों की सूची में गड़बड़ की। और जिन गरीबों को घर मिलना चाहिए था, वे आज भी इंतजार कर रहे हैं। ईमानदारी से, ट्रांसपैरेंसी से बंगाल के गरीबों को पक्का घर मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए….ये टीएमसी सरकार मिलने देगी क्या… ये निर्मम सरकार मिलने देगी क्या… ये सरकार जानी चाहिए कि नहीं जानी चाहिए… गरीबों को घर मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए

साथियों,

इतना ही नहीं, यही हाल जल जीवन मिशन का भी है। बंगाल में लोग पूछ रहे हैं...जब देश के बाकी हिस्सों में हर घर जल पहुंच सकता है, तो बंगाल में क्यों नहीं? भाइयों बहनों, केवल बिजली, पानी, सड़क और घर इसकी ही बात नहीं है....ये टीएमसी की सरकार...अपनी स्वार्थी राजनीति की वजह से आयुष्मान योजना को लागू नहीं कर रही है। देश के करोड़ों लोग इस योजना के तहत पाँच लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज का लाभ उठा रहे हैं। मुझे बताइए, गरीबों को बीमारी में पांच लाख रुपये तक की मदद पहुंचनी चाहिए कि नहीं पहुंचनी चाहिए.. मोदी दे रहा है मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए… ये टीएमसी सरकार बीमार लोगों का दुश्मन है कि नहीं है.. अत्याचारी है कि नहीं है… लेकिन बंगाल के गरीब परिवारों को पांच लाख रुपये वाली आयुष्मान योजना से भी, उस अधिकार से वंचित रखा गया है।

साथियों,

आज बंगाल के किसान की हालत भी किसी से छिपी नहीं है. मुझे बताया गया है कि दो-तीन दिन पहले ही चंद्रकोना में हमारे एक आलू किसान ने खुदकुशी कर ली है। आत्महत्या कर ली है। पश्चिमी मिदनापुर से हुगली और बर्धवान तक....किसानों से झूठ वायदे और सरकारी खरीद में घोटाला ही ये टीएमसी सरकार की पहचान बन गया है। TMC के कट, कमीशन और करप्शन के कारण.... गंदी राजनीति के लिए किसानों की जिंदगी से, गरीबों और मध्यम वर्ग की जिंदगी से माताओं और बहनों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है। इसीलिए....TMC जाएगी.... तो हर गरीब को पक्का घर मिलेगा। गरीब को पक्का घर मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए… मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए.. ये मोदी की गारंटी है। हर गरीब परिवार को बता देना कि जैसे ही टीएमसी की सरकार जाएगी गरीबों का पक्का घर बनना शुरू हो जाएगा। TMC जाएगी.... तो हर घर साफ जल पहुंचेगा। TMC जाएगी.... तो हर गरीब को मुफ्त इलाज मिलेगा। TMC जाएगी.... तो कारीगरों को नए अवसर मिलेंगे। TMC जाएगी.... तभी बंगाल में सुशासन आएगा।

साथियों,

हमारे बंगाल ने आज़ादी के बाद विभाजन सहा! विभाजन की आग देखी.... मजहबी दंगे देखे.... बाद के दशकों में अस्थिरता देखी.... घुसपैठ का दौर देखा... रक्तपात सहा! इस सबकी सबसे बड़ी भुक्तभोगी अगर कोई थीं, तो बंगाल की माताएं, बहनें, बेटियां, बंगाल की महिलाएं थीं। लेफ्ट की सरकार में अपहरण, हत्या, बलात्कार का वो दौर कोई नहीं भूल सकता। इसलिए बंगाल के आप लोग... लेफ्ट को हटाकर बढ़ी आशा के साथ TMC को लेकर आए! आपने TMC पर भरोसा किया! लेकिन, TMC ने लेफ्ट के गुंडों और माफियाओं को ही अपनी पार्टी में भर्ती कर लिया। आज बंगाल में अपराधियों को खुली छूट है। आए दिन बहन-बेटियों के खिलाफ दिल दहलाने वाले अपराध होते हैं। बंगाल का कोई इलाका ऐसी घटनाओं से अछूता नहीं है। आप याद करिए.... कॉलेज परिसर में दुष्कर्म की घटना.... नाबालिग बेटियों से दुष्कर्म के मामले.... TMC कार्यालय में महिला से बलात्कार.... 7-8 साल की बच्चियों से बलात्कार के खौफनाक कुकृत्य.... कहीं आदिवासी बेटी के साथ दुष्कर्म.... ऐसे ज़्यादातर मामलों में अपराधी कोई न कोई कोई न कोई TMC का नेता होता है... या TMC से जुड़ा होता है!

साथियों,

यहां निर्मम सरकार खुलेआम बलात्कारियों को संरक्षण देती है। अपराधियों को बचाने की पूरी कोशिश की जाती है। आप मुझे बताइए.. अपराधियों को बचाया जाता कि नहीं बचाया जाता… बलात्कारियों को बचाया जाता कि नहीं बचाया जाता.. संदेशखाली की वो तस्वीरें, और TMC सरकार का रवैया...आर.जी. कर अस्पताल की उस बेटी के साथ हुई दरिंदगी...बंगाल के लोग भूले नहीं हैं....TMC कैसे खुलेआम अपराधियों के साथ खड़ी नज़र आती थी।

साथियों,

इसी मानसिकता का परिणाम है... आज महिलाओं के खिलाफ एसिड अटैक… एसिड अटैक जैसे घिनौने अपराध इतने ज्यादा पश्चिम बंगाल में हो रहे हैं। जो बंगाल एक समय देश का सबसे प्रगतिशील राज्य होता था...आज वहाँ शाम होते ही माएं बेटियों को फोन करके कहती हैं....बाड़ी फिरे ऐशो शोन्धे नामार आगे। शक्ति की पूजा करने वाले बंगाल को ऐसे हालात मंजूर नहीं होंगे। मैं बंगाल की मेरी माताओं बहनों को भरोसा दिलाता हूँ....आप भाजपा को बीजेपी को अपना आशीर्वाद दीजिये। बीजेपी सरकार में महिलाएं सुरक्षित होंगी...और अपराधी जेल में होंगे। और ये मोदी की गारंटी है।

साथियों,

TMC सरकार गुंडों और अपराधियों की बैसाखी पर चलती है। रंगबाजी और कटमनी... ये TMC की कमाई का जरिया है। ये लोग जानते हैं.... जिस दिन बंगाल के लोग खुलकर सामने आ गए...TMC की विदाई पक्की है। और मैं ये दृश्य देखकर कह सकता हूं कि अब टीएमसी को बचाने वाला कोई नहीं बचा है इसीलिए, ये बंगाल के आप लोगों को डरा-धमकाकर रखना चाहते हैं। इसके लिए TMC वाले माफिया गिरोहों को पालते हैं। ये कट्टरपंथियों को संरक्षण देते हैं। और ऐसे गिरोहों की ताकत बढ़ाने के लिए घुसपैठियों को बुलाते हैं.... घुसपैठियों को

साथियों,

ये TMC 'माँ, माटी, मानुष' के नारे पे सत्ता में आई थी..... आज वही माँ रो रही है… माटी को लूटा जा रहा है.... और, बंगाली मानुष बंगाल छोड़ने पर मजबूर हो रहा है। घुसपैठियों की वजह से आज बंगाल की ‘रोटी, बेटी, माटी’ उस पर सबसे बड़ा खतरा आ गया है। ये लोग बंगाल के लोगों का रोजगार छीन रहे हैं। हमारी बहन बेटियों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। और, बंगाल के लोगों की ज़मीनों पर, बंगाल की माटी पर इन घुसपैठियों को कब्जा दिलवाया जा रहा है। इसका परिणाम आज सबके सामने है। बीते दशकों में बंगाल के ज़्यादातर इलाकों में डेमोग्राफी बदल गई है। बंगाली हिंदुओं को जानबूझकर अल्पसंख्यक बनाया जा रहा है। तुष्टीकरण का ऐसा खुला खेल.... जब शरणार्थी हिंदुओं को नागरिकता देने की बात होती है, तो पूरी TMC उसका विरोध करती है। वो हिन्दू... जिन्होंने कभी विभाजन का समर्थन नहीं किया था! जिन्होंने हमेशा अविभाजित बंगाल को, भारत को अपनी मातृभूमि माना! TMC वाले उन्हें नागरिकता देने का विरोध करते हैं। क्योंकि, उनके लिए उनका वोट बैंक ही सबसे प्रमुख है। वो हिंदुओं को वो अपना वोटबैंक नहीं समझते! उनसे उनके आपराधिक गिरोह नहीं बढ़ते! इसीलिए, ये लोग SIR का भी विरोध करते हैं। ताकि, घुसपैठियों के नाम वोटर लिस्ट से हट ना जाएं...वोटर लिस्ट शुद्ध ना हो जाए! ये तो ऐसे लोग है … जिनकी मृत्यु हो जाए उनके नाम तक निकालने को तैयार नहीं हैं ।

भाइयों बहनों,

डेमोग्राफी के इस खतरनाक बदलाव ने आज बंगाल को असुरक्षित बना दिया है। और अब तो, यहां खुलेआम धमकी दी जा रही है! कहा जा रहा है कि एक खास कम्यूनिटी वाले मिलकर आप लोगों को खत्म कर देंगे! संवैधानिक कुर्सी पर बैठकर ऐसी धमकी !!! करोड़ों बंगाली लोगों को खत्म करने की बात !!!....आपके मुंह में शोभा नहीं देती है मैं पूछना चाहता हूँ…वो कौन लोग हैं, जो TMC सरकार के इशारों पर करोड़ों लोगों को खत्म कर देंगे?

साथियों,

धमकाने-डराने की इस राजनीति को...TMC ने इसे अपना हथियार बना लिया है। चुनाव में वोटरों को धमकी... सरकार के नीतियों के आलोचकों को धमकी... मीडिया को धमकी... विपक्ष को धमकी... ये बंगाल में खौफ का कैसा माहौल बनाकर रखना चाहते हैं... ये पूरे देश को जानना चाहिए... ये लोग कहते हैं... तृणमूल को जिसका वोट नहीं, TMC को जिसका वोट नहीं, तो वो बंगाली नहीं! तृणमूल को वोट नहीं, तो सरकार योजना का लाभ नहीं! तृणमूल को वोट नहीं, तो घरों में बिजली पानी नहीं! TMC सिंडीकेट के जरिए नहीं जाओगे, तो कोई सप्लाइ नहीं! लेकिन साथियों, मैं TMC को याद दिलाना चाहता हूँ... TMC की गुंडागर्दी के दिन अब खत्म होने जा रहे हैं। TMC सरकार के जाने का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। यहां बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद एक तरफ हम, सबका साथ, सबका विकास ये मंत्र लेकर चलेंगे, दूसरी तरफ सबका हिसाब लिया जाएगा। टीएमसी के वे गुंडे, TMC के ये गुंडे जो आपको डराते हैं...बीजेपी सरकार में उनके डर भरे दिन शुरू होना तय है। बीजेपी सरकार में खौफ हर अपराधी को होगा... खौफ हर घुसपैठिए को होगा...खौफ तुष्टीकरण की राजनीति करने वालों को होगा...क्योंकि, कानून अपना काम करेगा! कानून का राज आएगा ऐसे लोगों को मुंह छिपाने की जगह नहीं मिलेगी। ऐसे अपराधियों की सिर्फ एक ही जगह होगी- एक ही जगह होगी जेल। जेल। जेल।

साथियों,

बंगाल की निर्मम सरकार में आज सबसे ज्यादा प्रताड़ित यहाँ का दलित, आदिवासी और हमारे गरीब भाई-बहन हैं। आदिवासी समाज के साथ कैसा अन्याय होता है... ये किसी से छिपा नहीं है। लेकिन, अब तो TMC सरकार ने सभी सीमाएं लांघ दी हैं। आप देखिए...अभी कुछ दिन पहले हमारे देश की महामहिम राष्ट्रपति... आदिवासी समाज की बेटी… आदरणीय द्रौपदी मुर्मू जी बंगाल आईं थीं। उन्हें संथाल आदिवासी परंपरा के पावन उत्सव में शामिल होना था। लेकिन अहंकार में डूबी इस निर्मम सरकार ने न केवल उस कार्यक्रम का बहिष्कार किया, बल्कि उसे पूरी तरह बदइंतजामी के हवाले कर दिया। क्योंकि, एक आदिवासी बेटी इतने बड़े पद पर है.... TMC वालों को उनका सम्मान मंजूर नहीं हुआ! द्रौपदी मुर्मू जी, जो हमेशा अपनी सरलता के लिए जानी जाती हैं.... उन्हें खुद बड़े दुखी मन से खेद व्यक्त करना पड़ा! भारत के राष्ट्रपति को अपनी तकलीफ बतानी पड़ी! TMC वालों को ये याद रखना पड़ेगा...उन्होंने केवल द्रौपदी मुर्मू जी का अपमान नहीं किया है। उन्होंने करोड़ों आदिवासियों का अपमान किया है। उन्होंने करोड़ों महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने देश के सर्वोच्च पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। इन्होंने भारत के संविधान का अपमान किया है। इन्होंने बाबा साहेब आंबेडकर का अपमान किया है और इसका जवाब बंगाल के लोगों से टीएमसी को मिलने वाला है। निर्मम सरकार को मिलने वाला है।

साथियों,

TMC सरकार ने बंगाल को पूरी तरह से अराजकता के हवाले कर दिया है। संवैधानिक व्यवस्था पर आए हर दिन हमले करने के वो रास्ते खोजते रहते हैं, हमले करते रहते हैं। पिछले कुछ महीनों में आपने देखा है....जब भी चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाता है, मतदाता सूची की शुद्धि की कोशिश करता है, तब टीएमसी उसके खिलाफ हमला करने लगती है। जो संस्था स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार है, उसी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए जाते हैं। ऐसा ही व्यवहार देश की सेना को लेकर दिखाई देता है। जब 2019 में भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में आतंकवादी ठिकानों पर निर्णायक कार्रवाई की, तब TMC ने देश की वायुसेना से कार्रवाई का सबूत मांगा।

साथियों,

यहां राज्य सरकार...पुलिस को स्वतंत्र रूप से जांच करने नहीं देती। जब राष्ट्रीय एजेंसियां TMC सरकार के भ्रष्टाचार या गंभीर अपराधों की जांच करना चाहती हैं, तो उन्हें भी रोकने की कोशिश होती है। अब जरा सोचिए, न्याय के लिए लोग आखिर कहां जाएंगे? साथियों, तृणमूल वाले यही अराजकता दिल्ली तक फैलाने की कोशिश करते हैं। आपने संसद में भी देखा है… सदन के भीतर कैसे कागज फाड़े जाते हैं, कैसे बहस को रोका जाता है, कैसे सदन की कार्यवाही को बाधित किया जाता है। देश...TMC की शर्मनाक हरकतें देखकर हैरान होता है। साथियों,बंगाल के प्रबुद्ध लोग अब इस अराजकतावादी सरकार के खिलाफ संकल्प ले चुके हैं। इस अराजक सरकार को उखाड़ फेंकने का काम इसी धरती के लोग करने वाले हैं।

साथियों,

आज यहां जो जनसैलाब उमड़ा है...ये पश्चिम बंगाल की जागती हुई चेतना है। यह उस बदलाव की आहट है, जिसका इंतजार वर्षों से किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग की पहाड़ियों से लेकर सुंदरबन के द्वीपों तक, उत्तर बंगाल के चाय बागानों से लेकर कोलकाता की गलियों तक, आज हर जगह पर एक ही चर्चा है। बदलाव चाहिए... और ये बदलाव अब होकर रहेगा। साथियों, बंगाल की आत्मा कभी हार मानने वाली नहीं है। बंगाल… का नौजवान कभी हार मानने वाला नहीं है। बंगाल की बेटियां कभी हार मानने वाली नहीं है। बंगाल का किसान कभी हार मानने वाला नहीं है। जब-जब इस भूमि के सामने चुनौतियाँ आई हैं, तब-तब यहाँ की जनता ने साहस के साथ उनका सामना किया है। गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर ने भी हमें यही संदेश दिया है। उन्होंने कहा था...

“बिपोदे मोरे रोक्खा करो ए नोहे मोर प्रार्थना,
बिपोदे आमि ना जेनो कोरि भॉय।”

आज भी वही समय है। कुछ लोग आपको डराने की कोशिश करेंगे। कुछ लोग कहेंगे कि बदलाव संभव नहीं है। लेकिन याद रखिए, और याद जरूर रखें.. जब जनता ठान लेती है, तो कोई भी ताकत उसे रोक नहीं सकती। और बंगाल की जनता ने जब भी ठाना है, इतिहास बदल कर दिखाया है। आज मुझे इस ऐतिहासिक ब्रिगेड मैदान में वही आत्मविश्वास, मेरी आंखों के सामने दिखाई दे रहा है। याद रखिए...इस बार चुनाव सिर्फ सरकार बदलने का नहीं... इस बार चुनाव बंगाल की आत्मा को बचाने का है। इस बार चुनाव व्यवस्था बदलने का है। इस बार चुनाव कट-मनी से छुटकारे का है। इस बार चुनाव डर से मुक्ति का है। मैं आने वाले परिवर्तन के लिए मेरे बंगाल के भाइयों बहनों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

मेरे साथ बोलिए, मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिए..

पाल्टानो दोरकार, चाइ बीजेपी शॉरकार!

पाल्टानो दोरकार, चाइ बीजेपी शॉरकार!

पश्चिम बोंगेर जॉनोगोनेर जॉय होक!

जय हिंद।

भारत माता की...जय

भारत माता की...जय

भारत माता की...जय

वंदे.. वंदे... वंदे... वंदे.. मातरम्!