The rich don't need the government. Government is for the poor, for their welfare as they have no support apart from the government: PM
Citizens of India have certain expectation from the Govt, we must fulfil their expectations: PM
Many polls were fought in the name of poor but nothing was done for the poor: PM Modi
JDU, RJD and congress alliance is a ‘Mahaswarthbandhan’: PM
'Sinhasan Khali Karo Ki Janata Aati Hai' -These powerful lines from the poem of Rashtrakavi Dinkar has given strength to the youth of Bihar: PM
This election is a war between Vikasraaj vs Junglraaj: PM
Great personalities like JP Narayan, Rashtrakavi Dinkar, Shree babu are source of Inspiration for the nation: PM
Begusarai has tremendous scope for growth in Industrial development: PM Modi
Caste politics and the politics of vote bank is the main reason behind the plight of Bihar: PM
The day Bihar becomes a developed state; India will be No. 1 country in the world: PM

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय,

मंच पर विराजमान केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे वरिष्ठ साथी श्रीमान राम विलास पासवान जी, भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री श्री रजनीश जी, बिहार विधानसभा पक्ष के नेता श्रीमान नंद किशोर यादव जी, हमारे वरिष्ठ नेता डॉ. सी पी ठाकुर जी, बेगूसराय के जनप्रिय सांसद डॉ. भोला सिंह जी, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के सांसद श्रीमान राम कुमार शर्मा जी, बेगूसराय भाजपा के जिलाध्यक्ष श्रीमान जयराम दास जी, लोजपा के बेगूसराय जिलाध्यक्ष संजय पासवान जी, हम पार्टी के जिलाध्यक्ष श्रीमान मोहम्मद हसन जी, रालोसपा के जिलाध्यक्ष श्रीमान राजीव कुमार जी, लोजपा के चेरिया बरियारपुर के उम्मीदवार श्री अनिल कुमार चौधरी जी, लोजपा के बछवाड़ा के उम्मीदवार श्री अरविंद कुमार सिंह, भाजपा से तेघड़ा विधानसभा के उम्मीदवार राम लखन सिंह, भाजपा से मटिहानी विधानसभा के उम्मीदवार सर्वेश कुमार, लोजपा के उम्मीदवार साहेबपुर कमाल से मोहम्मद असलम जी, बेगूसराय से भाजपा के उम्मीदवार सुरेन्द्र मेहता जी, भाजपा से बिकरी विधानसभा के उम्मीदवार श्री रामानंद राम जी, लोजपा के उम्मीदवार मिथलेश जी निशांत, इन सभी मेरे साथियों के साथ आप सभी जोर से बोलें - भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय!

भाईयों-बहनों, किसी प्रदेश में राज्य स्तर की रैली करनी हो, पूरे राज्य से लोगों को बुलाया गया हो, और अगर ऐसी रैली हो जाए तो लोग मानेंगे कि ऐतिहासिक रैली हुई है। एक जिले में इतना बड़ा जमघट, मैं जहाँ देख रहा हूँ माथे ही माथे नज़र आ रहे हैं; ये रैली नहीं, रैला है। 60 साल तक बिहार को तबाह करने वाले ये तीन लोग मिल गए हैं, ये इनको बहाकर फेंक देंगे। मैं लोकसभा के चुनाव में यहाँ आ नहीं पाया था और हमारे भोला बाबू ये शिकायत कर रहे थे, आज मैंने उनकी शिकायत दूर कर दी और ये हमारी ज़िम्मेवारी है कि हिन्दुस्तान का छोटे-से-छोटा नागरिक भी हमसे अपेक्षा कर सकता है और उन अपेक्षाओं को पूरा करने का हमें प्रयास करना चाहिए। चुनावी राजनीति हमने भी देखी है। चुनाव में जनता-जनार्दन के दिल में उठते सवालिया निशानों को भी देखा है लेकिन मैंने जब से चुनाव प्रचार के लिए बिहार आना शुरू किया है, मैंने ऐसा पहले कभी चुनाव नहीं देखा जैसा मैं आज बिहार में देख रहा हूँ। मैं अनुभव कर रहा हूँ कि आज बिहार के नागरिकों के मन में चुनाव के नतीजे क्या होंगे, कैसे होंगे, इस पर कोई सवालिया निशान ही नहीं है। बिहार की जनता ने मान लिया है और ठान लिया है कि भाजपा के नेतृत्व में राजग (एनडीए) की सरकार बन कर रहेगी और बिहार विकासवाद के रास्ते पर चल पड़ेगा, ये मैं साफ़-साफ़ देख रहा हूँ।

आप बताएं, आखिर सरकार किसके लिए होती है? अमीरों को कभी सरकार की जरुरत पड़ती है क्या? अमीरों को कभी सरकार की जरुरत नहीं पड़ती है। अगर अमीर बीमार हो जाए तो डॉक्टर उसके घर के बाहर कतार लगाकर खड़े हो जाएंगे लेकिन अगर एक गरीब बीमार हो जाए तो उस बीमार के लिए सरकार के अलावा कोई सहारा नहीं होता है। किसी अमीर का बेटा अगर पढ़ना चाहता है तो उसे दुनिया के अच्छे-से-अच्छे टीचर मिल जाएंगे, अच्छे-से-अच्छे स्कूल मिल जाएंगे लेकिन अगर किसी गरीब के बच्चे को पढ़ना हो तो सरकारी शिक्षक और सरकारी स्कूल पर ही भरोसा करना पड़ता है। किसी अमीर को कहीं जाना है तो हवाई जहाज उसका इंतज़ार करता है लेकिन किसी गरीब को अपनी सब्जी, दूध आदि भी बेचने दूसरे गाँव जाना है तो उसे सरकारी बस का ही इंतज़ार करना पड़ता है। अगर बस नहीं आई तो उसका जाना रूक जाएगा।

सरकार गरीब के लिए होती है, गरीबों का जीवन बदलने और उनके कल्याण के लिए होती है लेकिन हमारे देश में चुनाव तो गरीबों के नाम पर लड़े गए लेकिन सरकार गरीबों के लिए नहीं चलाई गई। हमारे देश में वोट तो गरीबों के नाम पर मांगे गए लेकिन सरकार गरीबों के कल्याण के लिए नहीं चलाई गई। अगर इस देश में गरीबों के लिए कुछ हुआ होता; आज़ादी के इतने सालों बाद तक जितनी सरकारें आईं, अगर वो सभी सरकारें गरीबों को ध्यान में रखकर कुछ काम करती तो न मेरे देश में गरीबों की संख्या बढ़ती, न देश में गरीबी एवं भुखमरी रहती और न मेरे देश में बीमारी एवं अशिक्षा बढ़ती।

इस चुनाव में उन सभी लोगों से आग्रह करता हूँ कि आप सब वोट देने से पहले अपने दिल पर हाथ रखकर एक बार पूछ लीजिए कि ये जो ‘महास्वार्थबंधन’ बना हुआ है; ये महागठबंधन नहीं, ‘महास्वार्थबंधन’ है। इस ‘महास्वार्थबंधन’ के तीन पार्टनर हैं जो मिलकर के बिहार को फिर से एक बार हड़प करना चाहते हैं। ये तीन कौन लोग हैं, ये तीन कौन दल हैं, बिहार की जनता याद रखे।

एक कांग्रेस पार्टी है जिसने 35 साल तक बिहार में राज किया है। मुझे बताईये, जिस कांग्रेस ने 35 साल राज किया, उसने इतने वर्षों में कुछ भला किया है? बिहार का विकास किया है क्या? बिहार का नौजवान का भला किया है? उन्हें रोजगार दिलाया है? बिहार से गुंडागर्दी समाप्त की है? जो 35 साल में कुछ नहीं कर पाए, वो आज कुछ कर पाएंगे क्या? उनपर भरोसा कर सकते हैं क्या? उनसे कोई आशा कर सकते हैं क्या? दूसरे हैं – जंगलराज के प्रतीक। लोकनायक जयप्रकाश नारायण और राम मनोहर लोहिया के नाम से गरीबों के गीत गाते-गाते वो 15 साल तक बिहार के सिंहासन पर बैठे। 15 साल में क्या-क्या खाया, बिहार की जनता भली-भांति जानती है। कोई मुझे बताये कि 15 साल में कहीं सड़क का नामो-निशान रहने दिया? स्कूलें चलने दीं? शिक्षकों की भर्ती की? डॉक्टर बिहार छोड़कर भागे कि नहीं? नौजवानों को पलायन करना पड़ा कि नहीं? मां-बेटियों का सम्मान बचा था? क्या जिन्होंने 15 साल तक आपको ऐसी सरकार दी आप क्या उनपर फिर से भरोसा कर सकते हो? वो आपका भला कर सकते हैं? इसके बाद अगले 10 साल जो जंगलराज को हटाने का नाम लेकर के आये थे, वो फिर से जंगलराज लाने के लिए आपके सामने बातें कर रहे हैं, उनकी बातों पर भरोसा किया जा सकता है क्या? 35 साल कांग्रेस और 25 साल ये बड़ा भाई और छोटा भाई अपना कारोबार चलाते रहे।

इन बड़ा भाई - छोटा भाई का रिश्ता तो देखो; बड़ा भाई छोटे भाई को कभी हत्यारा कहता है तो कभी तोता कहता है। 60 साल तक जिन्होंने बिहार में सरकारें चलाई हैं, गरीबों के नाम पर राजनीति की है लेकिन इन्होंने बिहार को दिन-रात बर्बाद करने का ही काम किया है। भाईयों-बहनों, ऐसी सरकारों को फिर से कभी आने देना चाहिए क्या?

आज 8 अक्टूबर है और आज लोकनायक जयप्रकाश नारायण का स्वर्गवास हुआ था। आज उनकी पुण्यतिथि पर आप सबसे आग्रह करता हूँ कि पल भर के लिए उस महापुरुष, बिहार के सपूत और हिन्दुस्तान के गौरव को याद कीजिये और दिनकर जी के उस बात को हिन्दुस्तान के कोने-कोने में पहुंचा दीजिए। “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है” – इसी धरती के संतान और राष्ट्रकवि दिनकर के इस मंत्र ने हिन्दुस्तान के नौजवान को खड़ा कर दिया। आजादी के आंदोलन में वंदे मातरम् की गूँज जैसे एक देश को नई ताकत देती थी, वैसे देश में भ्रष्टाचार की मुक्ति के लिए, कुशासन से मुक्ति के लिए राष्ट्रकवि दिनकर की यह कविता, ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’ अनेकों नौजवानों को प्रेरणा देती है।

ये भूमि उन महापुरुषों की है जिन्होंने आजादी के आंदोलन में एक नई ताकत दी। 1930 में गांधीजी की दांडी यात्रा हिन्दुस्तान की आजादी के आंदोलन महत्वपूर्ण मानी जाती है लेकिन जब नमक सत्याग्रह की बात आती है तो इसी धरती के महापुरुष श्री बाबू की याद आती है। उस महापुरुष ने कितना कष्ट झेला था। आईए, आज हम बेगूसराय में लोकनायक जयप्रकाश नारायण, राष्ट्रकवि दिनकर जैसे सभी महापुरुषों को याद करें हम लोगों के लिए जीने-मरने वाले श्री बाबू को याद करें और बिहार में विकासराज लाने का संकल्प करें।

एक तरफ़ जंगलराज लाने की कोशिश और दूसरी तरफ़ विकासराज लाने की कोशिश; ये चुनाव जंगलराज और विकासराज के बीच की लड़ाई है। आप मुझे बताईये कि बिहार को विकासराज चाहिए कि नहीं? बिहार को सड़क, रेल, उद्योग चाहिए कि नहीं? नौजवानों को रोजगार चाहिए कि नहीं? उनका पलायन रूकना चाहिए कि नहीं? अगर ये करना है तो बिहार में अब जंगलराज को मौका नहीं देना है। अब बिहार में सिर्फ़ विकासराज चाहिए। विकास का रास्ता ही हमारी समस्याओं का समाधान करेगा इसलिए आज मैं आपके पास विकास का संदेश लेकर आया हूँ।

मैं हैरान हूँ। आप लालू जी 1990 के डायलॉग निकाल लीजिए और 2015 के डायलॉग निकाल लीजिए; वही बात, न नया विचार है, न नई सोच है इतना जरुर है कि अब ख़ुद के बजाय बेटों को लेकर आये हैं, बाकि कोई फ़र्क नहीं आया है। मैं गुजरात की धरती से आता हूँ। मेरा जन्म वहां हुआ है और वो द्वारकाधीश की धरती है। श्री कृष्ण की द्वारका नगरी... उन्होंने गौ-प्रेम सिखाया था और आज भी गुजरात के लोग गौ-भक्ति में इतने लीन हैं कि वहां श्वेत क्रांति हुई, दूध का कारोबार इतना बढ़ा कि आज अमूल पूरी दुनिया में पहचाना जा रहा है। सच्चा यदुवंशी श्री कृष्ण की परंपरा का निर्वाह करने का संकल्प लेता है और यहाँ नेता यदुवंशियों का कितना अपमान कर रहे हैं।

मैं तो हैरान हूँ। आपको कैसी-कैसी गालियां दी जा रही हैं। लालू जी, आप जो कुछ भी बने, इन्हीं यदुवंशियों के आशीर्वाद से बने थे और आज आप उनको इतनी भयंकर गाली दे रहे हो; वो क्या खाते हैं, ऐसे गंभीर आरोप लगा रहे हो। मुझे शर्म आती है कभी मेरे देशवासियों, मेरे यदुवंशियों का ऐसा अपमान मत करो। मैं कृष्ण की धरती से आया हूँ, आपकी इन बातों से मुझे पीड़ा जरा ज्यादा हो रही है। और बोलते क्या हैं, जब मीडिया वालों ने पकड़ लिया, यदुवंशी समाज के लोग आगे आ गए तो क्या कहने लगे; वो कहते हैं – मेरे अन्दर शैतान प्रवेश कर गया। मैं बहुत हैरान हूँ कि क्या शैतान को भी यही ठिकाना मिला क्या, उसे क्या इसी शरीर में प्रवेश करने का मन कर गया क्या, बिहार में उनको और कोई नहीं मिला, हिन्दुस्तान में उनको और कोई नहीं मिला, पूरे विश्व में कोई और नहीं मिला, मिला तो सिर्फ़ लालू जी का शरीर मिला। देखिये, वो शैतान की मेहमाननवाजी भी कैसी कर रहे हैं, जैसे उनका कोई पुराना साथी आया हो, वैसी खातिरदारी कर रहे हैं वो।

भाईयों-बहनों, हमें तो जंगलराज से इस बिहार को बचाना है, रोजगार के लिए बल देना है और इसलिए मैं आज आपके पास आया हूँ। ये इलाक़ा औद्योगिक विकास के लिए एक बहुत बड़ा केंद्र बन सकता है। यहाँ के नौजवानों को रोजगार मिलेगा, सिर्फ़ ऐसा नहीं है बल्कि ये बेगूसराय की ताकत इतनी है कि ये बिहार के और नौजवानों को भी रोजगार देने वाला केंद्र बन सकता है लेकिन कोई यहाँ यहाँ आने की हिम्मत नहीं करता है क्योंकि वो कहता है कि जितना पैसा वो लगाएगा, उससे ज्यादा पैसा तो फ़िरौती में देना पड़ेगा। यहाँ तो एक ही उद्योग लगाया जंगलराज ने – अपहरण का उद्योग। किडनैप करो, फ़िरौती लो और अपना मौज-मस्ती करो, यही कारोबार चलता रहा तो कौन बेगूसराय आएगा।

आप देखिये, बरौनी का फ़र्टिलाइज़र का कारखाना, वो चालू होना चाहिए कि नहीं? उसका विकास होना चाहिए कि नहीं? यह आपका हक़ है कि नहीं? अगर आपका हक़ है तो मुझे वो हक़ पूरा करना चाहिए कि नहीं? इसलिए मेरी सरकार ने निर्णय किया कि उस फ़र्टिलाइज़र के लिए 1500 करोड़ लगाकर के फिर से यहाँ के नौजवानों को रोजगार दें और उनका विकास करें।

गंगा तट पर जो लोग रहते हैं, वो परेशान हैं कि बालू चोरों ने उनका जीना हराम करके रखा है, उनकी जमीन नहीं बच पा रही है, उनकी खेती नहीं बच पा रही है। जो लोग इस प्रकार के खेल खेलते हैं, उसका कारण ये है कि बिहार की सरकारों ने बिहार की दो ताक़तों को नज़रअंदाज़ किया है; एक ताक़त है, पानी और दूसरी यहाँ की जवानी। बिहार के कुछ इलाक़ों में इतना पानी है लेकिन उस पानी के कारण यहाँ तबाही हो रही है और बिहार में इतनी जवानी है कि उन्हें रोजी-रोटी के लिए बाहर जाना पड़ता है। ये दोनों बिहार का भाग्य बदल देंगे, ये हमारा विश्वास है इसलिए मेरे नौजवानों, हमें विकास के रास्ते पर चलना है।

अहंकार कहाँ से कहाँ पहुंचा देता है, ये आपने देखा है कांग्रेस पार्टी का अहंकार सातवें आसमान पर रहा और उसका परिणाम ये रहा कि कभी 440 सांसदों के साथ बैठते थे, पर आज 40 पर सिमट गए। जनता-जनार्दन गलतियों को माफ़ कर सकती है, अहंकार को नहीं। यहाँ के एक अहंकारी नेता अपने अहंकार के लिए उन्होंने बिहार के भाग्य को दांव पर लगा दिया है। इस चुनाव में ऐसे अहंकार को चकनाचूर करना हर बिहार प्रेमी का दायित्व है।

ये इलाक़ा है जहाँ परंपरागत रूप से किसान दलहन की खेती करते हैं। पहली बार दिल्ली में बैठी सरकार ने दलहन के न्यूनतम समर्थन मूल्य में इज़ाफ़ा किया और उसका नतीज़ा ये हुआ कि देश में दलहन की खेती करने वालों को प्रोत्साहन मिला। इस बार पहले से अधिक संख्या में दलहन की खेती के लिए हमारे किसान भाई आगे आये। भारत को दलहन की ज़रुरत है। मैं यहाँ दलहन की खेती करने वाले किसानों को और अधिक प्रोत्साहन देने का पक्षधर हूँ ताकि देश को विदेशों से दलहन न खरीदना न पड़े, हमारे किसानों द्वारा पैदा की गई दलहन से इस देश का पेट भरे और इसके लिए भारत सरकार आगे बढ़ रही है।

हमने 1 लाख 25 हज़ार करोड़ रुपये का पैकेज दिया एवं 40 हज़ार करोड़ और, कुल मिलाकर 1.65 लाख करोड़ रुपये का पैकेज बिहार के कल्याण के लिए है। अब आप मुझे बताईये कि ये पैकेज गाँव-गाँव पहुंचना चाहिए कि नहीं? नए रास्ते बनने चाहिए कि नहीं? बिजली आनी चाहिए कि नहीं? दावाखाने बनने चाहिए कि नहीं? गरीब के लिए स्कूल बनना चाहिए कि नहीं? लेकिन जो लोग ये कहते हैं कि ये 1.65 लाख करोड़ रुपये आने ही नहीं देंगे, ऐसे लोगों की सरकार बनेगी तो आएगा क्या? बिहार का भला होगा क्या? इस रास्ते में रोड़े अटकने वाले जो लोग हैं, उन्हें हटाना चाहिए कि नहीं? ये चुनाव विकास के रास्ते रोकने वाले लोगों को रोकने का चुनाव है।

ये जो ‘महास्वार्थबंधन’ है... इस चुनाव में इन तीनों ने अपने काम का हिसाब देना चाहिए कि नहीं? चाहे नीतीश जी हों, लालू जी हों, सोनिया जी हों, उन्होंने अपने 60 साल की सरकार का हिसाब देना चाहिए कि नहीं? वो दे रहे हैं हिसाब क्या? बिहार बर्बाद क्यों हुआ, विकास क्यों नहीं हुआ, जवाब दे रहे हैं क्या? जो काम उनको करना चाहिए, वो कर रहे हैं क्या? मैं बिहार की जनता से आग्रह करता हूँ कि ये जो ‘महास्वार्थबंधन’ बना है, उनके नेताओं से हिसाब मांगो। हर गाँव, गली, घर से जवाब मांगो आप उनसे जवाब मांगिये, आपको खुद पता लग जाएगा कि कौन सा बटन दबाना है, मुझे कुछ कहने की ज़रूरत नहीं।

ये जो 1.65 लाख करोड़ रुपये का पैकेज हमने दिया है और पूरा बारीकी से हिसाब दिया है। मैं उसमें बेगूसराय इलाक़े का बताना चाहता हूँ- एनएच – 82 पर 55 किमी, बिहारशरीफ, बरबीघा, मोकामा सेक्शन, एनएचबी फेज़ – 4 के निर्माण के लिए करीब-करीब 400 करोड़ रुपये का पैकेज; एनएच – 31 के बख्तियार-मोकामा सेक्शन को चार लेन का बनाने के लिए करीब-करीब 1000 करोड़ रुपये का पैकेज; एनएच – 31 पर पटना में गंगा नदी पर नया चार लेन के पुल का प्रावधान है जिसके लिए करीब-करीब 520 करोड़ रुपये; एनएच – 31 एनएचबी फेज़ – 3 सिमरिया-खगड़िया को चार लेन करने के लिए 1062 करोड़ रुपये; उसी प्रकार एनएच – 31 मोकामा-खगड़िया सेक्शन को को चार लेन करने के लिए 810 करोड़ रुपये राशि का प्रावधान है। बरौनी रिफाइनरी, उसमें 6 मिलियन क्षमता वाली 6 टंकियों को 9 मिलियन क्षमता वाली बनाने के लिए करीब 12,000 करोड़ रुपये लगाने का निर्णय किया गया है। बरौनी रिफाइनरी में बीएस4 फ्यूल के उत्पादन के कार्यान्वयन के लिए, मैंने 1500 करोड़ रुपये लगाना तय किया।

बिहार की किसी सरकार ने 60 साल में कभी सोचा नहीं कि बिहार को कैसे बदला जा सकता है। किन बातों पर बल दिया जाना चाहिए, वो नहीं किया। जातिवाद, संप्रदायवाद, यही राजनीति करते रहे यही बिहार की बर्बादी का कारण रहा है। ये ‘महास्वार्थबंधन’ बिग बॉस का घर है जिसमें एक बिग बॉस है जो कहता है कि मैं जैसे कहूँगा, लोग वैसे नाचेंगे; मैं जो कहूँगा, वैसा ये लोग करेंगे। इस बिग बॉस के घर में जितने भी लोग हैं, वे एक-दूसरे के साये से भी डरते हैं, कतराते हैं; एक-दूसरे का खात्मा करने के लिए खेल खेलते रहते हैं और बिग बॉस रिंग लीडर की तरह उन्हें नचाने में लगे हुए हैं।

भाईयों-बहनों, क्या बिहार में ये खेल चलने देना है क्या? बिहार को इस बिग बॉस से बचाना है कि नहीं? और इसलिए आज मैं बेगूसराय की धरती पर आपसे आशीर्वाद लेने आया हूँ। भाजपा हो, राम विलास जी की पार्टी हो, कुशवाहा जी की पार्टी हो, मांझी जी की पार्टी हो, हम सब मिलकर बिहार का भाग्य बदलना चाहते हैं, आपका जीवन बदलना चाहते हैं। मुझे आपका आशीर्वाद चाहिए। मेरे साथ बोलिये और पूरी ताकत से बताईये, सारे हिन्दुस्तान को पता चले कि बेगूसराय से कैसी आवाज उठती है। ऐसी भयंकर धूप में कोई कल्पना नहीं कर सकता है कि कितना बड़ा जन-सैलाब आया है।

भाईयों-बहनों, मैं आपका ये प्रेम और विश्वास आपको ब्याज समेत लौटाउंगा। इस भयंकर ताप में आप जो तपस्या कर रहे हो, मैं उसे कभी बेकार नहीं जाने दूंगा। आपको एक अपना साथी मिला है जो कंधे से कंधा मिलाकर के आपके सुख-दुःख बांटना चाहता है। बिहार को बदलना मेरा स्वार्थ है, राजनीतिक स्वार्थ नहीं बल्कि मेरा स्वार्थ है कि जिस दिन बिहार बदलेगा, हिन्दुस्तान दुनिया में नंबर एक पर पहुँच जाएगा; ये ताकत है बिहार की। पूरा हिन्दुस्तान स्वार्थ से चाहता है कि मेरा बिहार आगे बढ़े; बिहार विकास की ऊंचाईयों पर पहुंचे; बिहार का नौजवान, उसकी ताकत देश का भाग्य बदलने के काम आए, इसलिए मैं आपसे वोट मांगने आया हूँ। मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिये -  

भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद।

 

                   

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It is the need of the hour that we transform 'Vocal for Local' into a mass movement: PM Modi in Vadodara
May 11, 2026
For changes to be sweeping and outcomes to be enduring, it is imperative that society and the government work in tandem: PM
Today, initiatives in the education sector are being driven by ground realities and the National Education Policy is a prime example of this: PM
Startups are growing rapidly in small towns, with women’s participation increasing and sectors once considered risky now attracting more youth: PM
If the Covid-19 pandemic was the greatest crisis of this century, then the situation arising from the war in West Asia is one of the major crises of this decade: PM
Just as we collectively tackled the pandemic, we will undoubtedly overcome the West Asia crisis too: PM
The government is making relentless efforts to ensure that impact of West Asia war crisis on our citizens is kept to an absolute minimum: PM
Earlier, whenever the nation faced a major crisis, every citizen stepped forward to fulfill their responsibilities at the government’s call: PM
Today, there is once again a need for all of us to collectively discharge our duties and ease the burden on the nation's resources: PM
We must reduce the use of imported products and avoid activities that lead to foreign exchange spending: PM
It is the need of the hour that we transform 'Vocal for Local' into a mass movement: PM
We must adopt local products and empower the entrepreneurs of our villages, our cities and our nation: PM

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्रीमान भूपेंद्र भाई पटेल, उप मुख्यमंत्री हर्ष सांघवी जी, केंद्रीय मंत्री और संस्थापक ट्रस्टी मनसुख भाई मांडविया, सरदार धाम के अध्यक्ष गागजी भाई सुतारिया जी, दुष्यंत भाई पटेल, पंकज भाई पटेल, राज्य भाजपा अध्यक्ष भाई जगदीश विश्वकर्मा, मंच पर उपस्थित गजुरात सरकार के सभी मंत्री, सभी दाता श्री, ट्रस्टी श्री, अन्य महानुभाव और गुजरात के कोने-कोने से आए हुए मेरे प्यारे भाईयों और बहनों।

आज का ये दिन किसी पुण्य पर्व से कम नहीं है। यहां आने से पहले मैं सोमनाथ मंदिर में था। सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूर्ण हुए हैं। सोमनाथ मंदिर की पुनर्स्थापना, ये सपना सरदार पटेल के संकल्प से ही पूरा हुआ था। इस अवसर पर, प्रभास पाटन में सोमनाथ अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। और उसी दिन, यहाँ वडोदरा में सरदार धाम से जुड़े एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और शिलान्यास भी हो रहा है। डॉ. दुष्यंत और दक्षा पटेल कॉम्पलेक्स का लोकार्पण, शिक्षण सहाय योजना का शुभारंभ, नई परियोजनाओं का भूमिपूजन, ये सभी कार्य, भविष्य में राष्ट्र निर्माण के प्रभावी प्रकल्प साबित होंगे। एक तरह से, ये संस्थान युवाओं के लिए भविष्य के करियर के launching pad का काम करेंगे। मैं आप सभी को, समाज के सभी लोगों को इस पुण्य कार्य के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।

साथियों,

आज आपके बीच आया हूं, तो एक औऱ बात की खुशी है। बंगाल, असम और पुडुचेरी के नतीजों ने पूरे देश में ही उत्साह का माहौल बना दिया है। और उसके साथ-साथ आप सबने भी मिलकर एक इतिहास बनाया है, गुजरात निकाय और पंचायत चुनावों के परिणाम भी बहुत शानदार रहे, और इसकी भी चर्चा पूरे देश में हो रही है।

साथियों,

गुजरात के लोगों ने हमेशा राजनीतिक स्थिरता को महत्व दिया है। ये यहां के लोगों की राजनीतिक दूरदर्शिता है, वो जानते हैं कि राजनीतिक स्थिरता का माहात्म्य क्या होता है, और जहां राजनीतिक स्थिरता होती है, वहाँ अर्थव्यवस्था की गति और तेज हो जाती है। गुजरात ने ये बात बहुत पहले समझ ली थी। उसके परिणाम आज हमें गुजरात की ग्रोथ में भी दिख रहे हैं, और, एक के बाद एक चुनावी नतीजों में भी दिख रहे हैं।

साथियों,

आप सभी के बीच आना, आपके कार्यक्रमों का हिस्सा बनना, मेरे लिए हमेशा ही बहुत सुखद होता है और लगता है घर में आया हूं। क्योंकि आपके बीच आकर समाज की शक्ति का ऐहसास होता है। हम सभी जानते हैं कि जब भी कहीं पर वास्तविक बदलाव होता है, वो समाज की सामूहिक ताकत से ही होता है। खासकर, जिन-जिन समाजों ने शिक्षा को प्राथमिकता दी है, शिक्षा में समान भागीदारी को अपना लक्ष्य बनाया है, वो समाज हमेशा आगे बढ़े हैं, उन्होंने नई ऊंचाइयों को छुआ है।

इसीलिए भाइयों बहनों,

सरदारधाम के हर प्रयास में, जब भी मुझे मौका मिलता है, मैं हमेशा आपके साथ खड़े होने का प्रयास करता हूँ। अभी गगजी भाई बड़े विस्तार से बता रहे थे, साल 2021 में, मैं सरदारधाम अहमदाबाद के कार्यक्रम में आया था। तब गर्ल्स हॉस्टल का भूमिपूजन हुआ था। पिछले वर्ष उसका लोकार्पण भी हो गया। आज वहां हजारों बेटियां शिक्षा प्राप्त कर रही हैं, अपने सपनों को नई दिशा दे रही हैं। सूरत, राजकोट, भुज, मेहसाणा और दिल्ली, सरदारधाम के ऐसे कई संस्थान युवाओं का भविष्य गढ़ने में जुटे हैं। आज भी अमदाबाद के निकोल में 1 हजार बेटियों के लिए नए छात्रावास का भूमिपूजन हुआ है।

साथियों,

बदलाव व्यापक हो, और परिणाम स्थायी हों, इसके लिए समाज और सरकार को मिलकर काम करना आवश्यक होता है। इसीलिए, आज शिक्षा के क्षेत्र में जमीनी हकीकतों के आधार पर काम हो रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसका बहुत बड़ा उदाहरण है। आज युवाओं की राह से रोड़े हटाए जा रहे हैं। भाषा के आधार पर होने वाला भेदभाव खत्म हो रहा है। आज ज़ोर केवल किताबों और डिग्रीयों पर ही नहीं है। स्किल डवलपमेंट और इनोवेशन को पढ़ाई का हिस्सा बनाया गया है। रिसर्च में रुचि रखने वाले युवाओं को उसके लिए माहौल मिल रहा है। हमारे युवा डिग्री पूरी करके अनुभव न होने के कारण भटकें ना, इसके लिए अप्रेंटिसशिप के मौके उन्हें दिये जा रहे हैं। आप सोच सकते हैं, आने वाले समय में देश को इतना बड़ा skilled वर्कफोर्स मिलेगा। इसका सबसे बड़ा लाभ देश के manufacturing सेक्टर को होगा।

साथियों,

हमारे गुजरात के युवाओं में उद्यम की स्वाभाविक शक्ति होती है। आज Startup India मिशन इन युवाओं के सपने साकार कर रहा है। छोटे शहरों के युवा भी उद्यमी बन रहे हैं। छोटे शहरों से बड़े-बड़े स्टार्टअप्स सामने आ रहे हैं। स्टार्टअप्स में महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। पहले जिन सेक्टर्स को रिस्की माना जाता था, वो अब युवाओं की पहली पसंद बन रहे हैं। पिछले 10-12 वर्षों में स्पोर्ट्स से लेकर स्पेस टेक्नालजी तक देश की कामयाबी इसका सबसे बड़ा सबूत है। और इसका बहुत बड़ा लाभ गुजरात के हमारे बेटे-बेटियों को भी हो रहा है।

साथियों,

समाज में प्रगति का सबसे बड़ा आधार होता है- उसकी आधी आबादी की भागीदारी! गुजरात ने इसे 2 दशक पहले ही समझ भी लिया था, और, इस दिशा में मजबूती से कदम भी उठाए थे।

साथियों,

आज गुजरात मॉडल की वही सफलता देश में दोहराई जा रही है। देश में करोड़ों महिलाओं के बैंक खाते खोले गए। शौचालय, नल से जल, गैस कनेक्शन की सुविधाएं दी गईं। आज मुद्रा योजना के जरिए महिलाएं आत्मनिर्भर भी बन रही हैं। परिवार में महिलाएं स्वस्थ रहें, इसके लिए आयुष्मान भारत और मातृ वंदना जैसी योजनाएं कवच बनकर काम कर रहीं हैं।

साथियों,

पहले कितने ही क्षेत्रों में बेटियों के लिए दरवाजे ही बंद होते थे। आज उन्हीं सेक्टर्स में बेटियां लीडरशिप रोल में सामने आ रही हैं। आज National Defence Academy में महिला कैडेट्स, training ले रही हैं। हमारी बेटियां फाइटर पायलट बन रही हैं। राजनीति में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास हो रहा है। नारीशक्ति वंदन संशोधन के जरिए हमने इसके लिए एक और प्रयास किया था। राजनीतिक कारणों से वो पास नहीं हो पाया, लेकिन मैं आपको आश्वस्त करूंगा, देशभर की महिलाओं को आश्वस्त करूंगा, हम इस दिशा में लगातार प्रयास करते रहेंगे।

साथियों,

महिलाओं के लिए सभी क्षेत्रों में संभावनाओं के द्वार खुलें, ये केवल सरकार ही नहीं, बल्कि समाज की भी ज़िम्मेदारी है। और मुझे खुशी है, सरदारधाम ये दायित्व पूरी निष्ठा से उठा रहा है। मैं इन प्रयासों के लिए विशेष रूप से आप सबका बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं, आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूँ।

साथियों,

गुजरात की एक बहुत बड़ी विशेषता रही है। यहां समाज हमेशा समय की दिशा को जल्दी पहचानता है। परिवर्तन को अवसर में बदलना, नई संभावनाओं को अपनाना, और भविष्य की तैयारी समय रहते शुरू करना, ये गुजरात की कार्य संस्कृति का हिस्सा रहा है। आज जब दुनिया future technologies की ओर बढ़ रही है, तब गुजरात भी नई गति के साथ आगे बढ़ रहा है। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, एयरोस्पेस, एडवांस्ड इंजीनियरिंग, ग्रीन एनर्जी, फाइनेंशियल सर्विसेज, हर क्षेत्र में गुजरात अपनी नई पहचान बना रहा है। साणंद में made-in-India सेमीकंडक्टर्स बन रहे हैं। केन्स सेमीकंडक्टर प्लांट में भी प्रोडक्शन शुरू हो चुका है। धोलेरा और सूरत में भी नए सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट आगे बढ़ रहे हैं।

साथियों,

हमारा भारत, हमारा गुजरात ग्लोबल सप्लाइ चेन का बड़ा केंद्र बने, हम इस दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। आने वाले समय में वडोदरा की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होगी। आज यहां बने metro coaches दूसरे देशों तक एक्सपोर्ट हो रहे हैं। सावली में आधुनिक रेल सिस्टम का, कोचेस का निर्माण हो रहा है। Engineering, heavy machinery, Chemicals और Pharma, Power equipment और MSMEs, ऐसे कई सेक्टर्स में आज वडोदरा manufacturing का मजबूत केंद्र बन चुका है। यहां की गतिशक्ति यूनिवर्सिटी ट्रांसपोर्ट और logistics की फील्ड में professionals तैयार कर रही है। अब एयरोस्पेस सेक्टर में भी वडोदरा नई पहचान बनाने जा रहा है। यहां एयरक्राफ्ट manufacturing project तेजी से आगे बढ़ रहा है।

साथियों,

गुजरात और देश में विकास के प्रयासों के बीच, एक और विषय संवेदनशील होता जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में दुनिया लगातार अस्थिर परिस्थितियों से गुजर रही है। पहले कोरोना का संकट, फिर वैश्विक आर्थिक चुनौतियां, और अब पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, इन सारी परिस्थितियों का असर लगातार पूरी दुनिया पर पड़ रहा है, और भारत भी इससे अछूता नहीं है। अगर कोरोना महामारी इस सदी का सबसे बड़ा संकट थी, तो पश्चिम एशिया में युद्ध से बनी परिस्थितियां, इस दशक के बड़े संकटों में से एक है। जब हमने मिलकर कोरोना का मुकाबला कर लिया तो इस संकट से भी अवश्य पार पा जाएंगे।

सरकार भी लगातार ये प्रयास कर रही है, कि देश के लोगों, देश के सामान्य नागरिक पर इन सारी विपरीत परिस्थितियों का कम से कम असर हो। लेकिन ऐसे समय में, देश को जनभागीदारी की शक्ति की बहुत बड़ी आवश्यकता है। हमें भारत के नागरिक के तौर पर अपने कर्तव्य को प्राथमिकता देनी होगी। इससे पहले के दशकों में भी जब-जब देश युद्ध या किसी और अन्य बड़े संकट से गुजरा है, सरकार की अपील और उस अपील पर हर नागरिक ने ऐसे ही अपना दायित्व निभाया है। आज भी जरूरत है कि, हम सब मिलकर अपना दायित्व निभाएं, देश के संसाधनों पर पड़ने वाले बोझ को कम करें। आप भी जानते हैं कि भारत कितने ही उत्पादों को मंगाने के लिए लाखों करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा खर्च करता है। इसी समय विदेश से आने वाले उत्पादों की कीमतें भी आसमान छू रही हैं और सप्लाई चेन भी पूरी तरह तहस नहस हो चुकी है। और इसलिए देश पर ये दोहरा संकट है। जैसे बूंद-बूंद से घड़ा भरता है, वैसे ही हमें हर छोटे-बड़े प्रयास से ऐसे उत्पादों का उपयोग कम करना है जो विदेश से आते हैं, और ऐसे व्यक्तिगत कामों से भी बचना है जिसमें विदेशी मुद्रा खर्च होती हो।

साथियों,

भारत के इंपोर्ट का बहुत बड़ा हिस्सा, क्रूड ऑयल है। और दुर्भाग्य से, जिस क्षेत्र से दुनिया के बड़े हिस्से को तेल मिलता है, आज वही क्षेत्र संघर्ष और युद्ध की स्थिति में उलझा हुआ है। और इसलिए, जब तक हालात सामान्य नहीं होते, हम सबको मिलकर छोटे-छोटे संकल्प लेने होंगे। मैंने कल कर्नाटका और तेलंगाना में भी इस बारे में चर्चा की है, मैं आज गुजरात में भी अपने आग्रहों पर फिर जोर दे रहा हूं। और आप पर तो मेरा ज्यादा हक है, इसलिए जरा हक से कहने वाला हूं, मेरी देश के हर नागरिक से अपील है, जहां संभव हो, पेट्रोल-डीजल का उपयोग कम करें। मेट्रो का उपयोग करें, इलेक्ट्रिक बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक इस्तेमाल करें। कार-पूलिंग को बढ़ावा दें। जिनके पास कार है, वे एक गाड़ी में ज्यादा लोगों को साथ लेकर चलें। जिनके पास ईवी है, वे भी दूसरों की मदद के लिए आगे आएं।

साथियों,

डिजिटल टेक्नोलॉजी ने अब इतना कुछ आसान बना दिया है। टेक्नोलॉजी की मदद भी हमारे लिए बहुत फायदेमंद होगी। ये जरूरी है कि सरकारी और प्राइवेट, दोनों ही दफतरों में, वर्चुअल मीटिंग्स और वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता दी जाए। मैं कुछ स्कूलों से भी आग्रह करूंगा, कि कुछ समय के लिए ऑनलाइन क्लासेज की व्यवस्था पर काम करें।

साथियों,

सिर्फ ईंधन ही नहीं, खाने के तेल पर भी देश की बड़ी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। अगर हम थोड़ा संयम बरतें, तेल की खपत कम करें, खाने के तेल की, तो इससे देश और हमारी सेहत, दोनों को लाभ होगा। और सूरत वालों को मैं खास कहता हूं। इसी तरह मैं आज समाज के सभी भाई बहनों से, मैं आपके परिवार का सदस्य हूं, इसलिए आग्रह से कहता हूं, और इसमें तो आगे आकर आपको मेरी मदद करनी पड़ेगी। सोने के आयात पर भी देश का बहुत बड़ा पैसा विदेश जाता है। मैं आप सबसे, देशवासियों से आग्रह करूंगा, कि जब तक हालात सामान्य न हों, हम सोने की खरीद को टालें, गोल्ड की जरूरत नहीं है।

साथियों,

आज समय की मांग है, कि हम “वोकल फॉर लोकल” को एक जन आंदोलन बनाएं। विदेशी सामान की जगह, लोकल उत्पादों को अपनाएं। अपने गांव, अपने शहर, अपने देश के उद्यमियों को हम ताकत दें। यहां लोग बैठे हैं, बहुत अच्छी चीजें बनाते हैं, श्रेष्ठ चीजों का उत्पादन करते हैं।

साथियों,

हमारे में से ज्यादातर, खेती के कारोबार की दुनिया से पैदा होकर के यहां आए हैं। खेती में, स्वदेशी खाद को बढ़ावा मिले, नैचुरल फार्मिंग को बढ़ावा मिले। डीजल पंप की जगह सोलर पंप्स का उपयोग बढ़े, और हम तो किसान के बेठे हैं, किसान की बेटियां हैं, हमें अपना खेत सबसे पहले बचाना है, हमें अपनी धरती मां को बचाना है, हमें केमिकल फर्टिलाइजरों से अपनी धरती मां को मारना नहीं चाहिए। हमारे खेत को बचाना है, हमारी धरती मां को बचाना है। और इसलिए मैं आप सबसे आग्रह करूंगा, कि आप अपने गांव में हर किसान भाई-बहन को केमिकल फर्टिलाइजर से मुक्ति का रास्ता बताइये, नैचुरल फार्मिंग की तरफ ले जाइये।

साथियों,

एक और भी अहम विषय, और वो भी आप में से बहुतों को लागू होता है, बुरा मत मानना। फैशन हो गई है, जैसे ही वेकेशन हुआ, बच्चों के हाथ में विदेश की टिकट पकड़ा देते हैं। विदेश में जाकर वेकेशन करते है। गर्मी की छुट्टियां आ रही हैं, आजकल विदेश घूमने, वहां पर डेस्टिनेशन वेडिंग, ये मैं यहां से बहुत सारे लोग हैं, मुझे निमंत्रण नहीं भेजते हैं, पहले भेजते थे, क्योंकि विदेश में ही शादी करते थे, अब बंद कर रहे हैं। ये विदेश में वेडिंग इनका फैशन खूब बढ़ रहा है। लेकिन इस पर भी बहुत विदेशी मुद्रा खर्च होती है।

साथियों,

आप सोचिये, क्या भारत में ऐसी जगह नहीं है? जो हम अपनी वेकेशन वहां मनाए, हमारे बच्चों को हमारा इतिहास पढ़ाएं। हम अपने स्थानों पर गर्व करें। और जरूरी है कि भारत में ही अपनी वेकेशन मनाएं, और वेडिंग के लिए भी, मैं नहीं मानता हूं कि भारत से अधिक कोई अच्छी पवित्र जगह हो सकती है। जब यहां वेडिंग करते हैं ना, तो हमारे पूर्वजों की मिट्टी भी हमें आशीर्वाद देती है। और वेडिेंग के लिए भी, भारत के ही अनेक स्थान हैं, उसको हम चुनें। हमारे गुजरात में तो वैसे भी एक से बढ़कर एक स्थान हैं। और मैं तो आप सब पाटीदार भाईयों को तो कहूंगा, आपको तो अब शादी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी वहीं पर जाकर करनी चाहिए। आपकी हर शादी में सरदार साहब खुद आाशीर्वाद देने के लिए मौजूद रहेंगे। और वहीं पर आपने जैसे हरिद्वार, ऋषिकेश में आप शांति के लिए जगह बना रहे हैं ना, वैसे ही आप स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में शादी के लिए जगह बना दीजिए। मैं पंकज भाई को कहूंगा, उसके लिए भी कुछ करें। जैसे हाल के वर्षो में सरदार साहब की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, हमारा एकता नगर पर्यटन का इतना बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। क्या हम ये तय कर सकते हैं, हम ज्यादा से ज्यादा लोगों को स्टेचू ऑफ पर यूनिटी लेकर के जाएं। विदेशें में हमारे बहुत लोग रहते हैं, मैं उनको कहता हूं, कि आपका दायित्व है कम से कम विदेशी परिवारों को, भारत देखने के लिए लेकर के आइये आप। देश विदेश में हमारे संपर्क का कोई भी परिवार, जो स्टैच्यू ऑफ यूनिटी नहीं गया है ना, उसको वहां ले जाने के लिए प्रेरित करें। हम उसे कम से कम एक ट्रिप के लिए मोटिवेट करें। डेस्टिनेशन वेडिंग्स के लिए भी एकता नगर एक बहुत शानदार विकल्प हो सकता है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में इतनी शानदार व्यवस्थाएं हैं, और गर्व है, दुनिया का सबसे ऊंचा स्टैच्यू, वो भी सरदार वल्लभ भाई पटेल का। इस देश का कोई नागरिक ऐसा नहीं हो सकता है, कि जिसको इसके लिए गर्व न हो दोस्तों। और मैं आपसे आग्रह करता हूं, आप सभी इसका फायदा उठाइये, इसका लाभ उठाइए।

साथियों,

ये मैंने छोटे-छोटे प्रयास आपको, कोई मुश्किल काम नहीं बताए आपको। लेकिन आप मानकर चलिए, ये प्रयास छोटे भले लग सकते हों, लेकिन छोटे प्रयास भी, जब 140 करोड़ लोग, एक साथ संकल्प लेते हैं, 140 करोड़ लोग एक कदम आगे बढ़ते हैं इस दिशा में, 140 करोड़ कदम देश आगे बढ़ता है। तो वही छोटे प्रयास, राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत बन जाते हैं। और इसलिए फिर एक बार, हमें एकजुट होना होगा, ताकि ये संकट, किसी भी तरह हमारी प्रगति को, हमारे विकास को प्रभावित ना करे। मुझे विश्वास है, हम सब साथ मिलकर इन संकल्पों को पूरा करेंगे, और देश को मजबूती देंगे।

और दूसरी बात मुझे गजजी भाई से करनी है, आपने मुझे सरदार गौरव रत्न से सन्मानित किया। जिस पुरस्कार के साथ सरदार साहब का नाम जुड़ा हो न, तब जिम्मेदारी बहुत बढ़ जाती है। यानी एक प्रकार से गगजी भाई ने बहुत चतुराई से मुझे बाँध लिया है, कि आगे पीछे मत होना। और शायद मेरे नसीब में लिखा हुआ है, कि सरदार साहब के जो भी सपने थे, उन्होंने जो भी काम शुरु किए थे, वे सब पूरे करने का काम मेरे ही नसीब में आया है। और आज जब आपने यह सम्मान, यह पुरस्कार एवॉर्ड दिया है तो, मैं आपको विश्वास दिलाता हूं, कि सरदार साहब के सपने पूरे करने में आप सभी के आशीर्वाद से मुझे जो भी शक्ति मिली है, संस्कार मिले हैं, गुजरात की मिट्टी ने मुझे जो सिखाया है, उसके भरोसे पर मैं कहता हूं, कि वो सपने पूरे करने के लिए परिश्रम में मैं पीछे नहीं हटूंगा। और मेरे स्वभाव को गुजरात भलीभांति जानता है, कि पीछे हटना मुझे आता नहीं है। लेकिन आपने यह सम्मान किया है, यह मेरे लिए बहुत ही बड़ी बात है। एक बार मैंने एक किस्सा पढा था, कि जनरल करिअप्पा, उनके गाँव में उनके सम्मान का कार्यक्रम होने वाला था। वह अत्यंत आनंदित थे, तो लोगो ने पूछा तो उन्होंने कहाँ, कि मैं दुनियाभर में जाता हूं, पूरी दुनिया के सारे सैन्य के रीत-रिवाज के साथ मुझे सब सैल्यूट करते हैं, बहुत मान-सम्मान मिलता है। दुनिया में जो मिलता है वो मिले, पर जब घर में मिलता है न, तब उसका आनंद अलग होता है।

भारत के प्रधानमंत्री का दुनिया में सम्मान होता है, कारण भारत सामर्थ्यवान हो रहा है, और आज जब घर में, घर के बेटे को, घर के लोग जब आशीर्वाद देते हैं, तो काम करने की शक्ति बहुत बढ़ जाती है। मेरे लिए, मेरे परिवारजनो ने, आप सभी ने इस सरदार रत्न के रूप में जो आशीर्वाद दिये हैं, उसके बदले मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। और इस ऋण का स्वीकार करता हूं। फिर एक बार आप सभी को जो संकल्प लेकर आप चले हैं, जो सपने लेकर आप चले हैं, उसके लिए ईश्वर आपको बहुत शक्ति दे। सरदार साहब के आशीर्वाद निरंतर आपके उपर बने रहें, और पंकज भाई जैसे साथी आपको मिलते रहें। यहाँ हम तीन ऐसे लोग बैठे हैं कि जिनका विशेष नाता है, एक पंकज भाई, दूसरे नरहरि अमीन। हम सभी नवनिर्माण की औलादें है, तो मुझे खुशी हुई, कि आज पंकज भाई ने भी बडी जिम्मेदारी ली है। आप सभी का बहुत बहुत आभार।जय सरदार, जय सरदार, धन्यवाद। धन्यवाद।