Gujarat Chief Minister addressed a Asia BRTS Conference, Ahmedabad

Published By : Admin | September 6, 2012 | 15:05 IST

क छोटे से कमरे में, एशिया के भिन्न-भिन्न देशों के नीति निर्धारक बैठकर के मल्टीमोड ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम पर सोच रहे हैं। आम तौर पर इस प्रकार के सेमीनार सिंगापोर में होते हैं, टोक्यो में होते हैं, कभी-कभी बीजिंग में होते हैं। इस प्रकार के विषयों का नेतृत्व कभी भी हिंदुस्तान को नसीब नहीं होता है। लेकिन ये गुजरात का सौभाग्य और अहमदाबाद का कमाल है कि बी.आर.टी.एस. की सफलता ने एशिया के अनेक देशों को यहाँ खींच लाने के लिए सफलता प्राप्त की है। ऐेसे मैं इस शहर को हृदय से बहुत=बहुत अभिनंदन करता हूँ, बधाई देता हूँ..!

ज विश्व के सभी देशों के सामने ट्रांसपोर्टेशन के विषय को लेकर एक बहुत बडी चिंता का हम अनुभव कर रहें हैं। एक तो बढ़ती हुई जनसंख्या, मल्टीमोड ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम्स, बढ़ती हुई वेहिकलों की संख्या, इंसान का स्पीड की ओर अधिक लगाव और दूसरी तरफ एनर्जी क्राइसिस। इन सभी सवालों के जवाब हमें एक साथ ढूंढ़ने हैं, ताकि लोगों को बस की सुविधाएं मिलें, ट्रांसपोर्टेशन की सुविधाएं मिलें, एनर्जी कन्ज़रवेशन में हम कुछ कान्ट्रीब्यूट करें, लोगों के समय की बचत करें, हमारी व्यवस्थाएं ऐसी हों जिसमें सामान्य मानवी को सुरक्षा का अहसास हो, इन सभी पहलुओं पर अगर हमने सोचने में देरी की, तो कितना बड़ा सकंट पैदा हो सकता है इसका हम अंदाजा लगा सकते हैं। आज किसी व्यक्ति को मुंबई जाना है, मुंबई में बसना है तो सबसे पहले उसके दिमाग में समस्या यह आती है कि दिनभर मैं आऊंगा कैसे-जाऊंगा कैसे..? वह पचास बार सोचता है, सबसे पहले समस्या ये आती है। आज हिंदुस्तान के कई शहर ऐसे हैं कि जहाँ डेस्टिनैशन पर पहुँचने का एवरेज टाइम 55 से 60 मिनट है। अभी हम गुजरात में भागयवान हैं, अहमदाबाद-सूरत जैसे शहरों में अभी भी हमारा रिचिंग टाइम एवरेज 20 मिनट का है। लेकिन फिर भी, चाहे ये 20 हो, 55 हो या कहीं पर 60 हो, ये अपने आप में इसको कैसे कम किया जाए और फिर भी सुविधा बढ़ाई जाए, यह एक बहुत बड़ी चैलेंज है, और इस चैलेंज को हम कैसे पूरा कर पाएंगे..!

दूसरी बात है कि इन सारे विषयों को अगर हम टुकड़ों में सोचेंगे, कि चलिए भाई, आज लोगों को जाने-आने में दिक्कत हो रही है, तो ट्रांसपोर्ट के लिए सोचो..! फिर कभी बैठेंगे तो सोचेंगे कि बच्चों को स्कूल जाने की व्यवस्था के लिए सोचो..! तीसरे दिन सोचेंगे, कि चलिए भाई, वहाँ कोई फैस्टिवल हो रहा है, तो वहाँ का ही कुछ सोचो..! अगर टुकड़ों में चीजों को सोचा जाएगा तो इन समस्याओं का कभी समाधान नहीं होगा। और इसलिए हमारे देश ने और विशेष कर के एशिया के कुछ देशों ने इस क्षेत्र में काम किया है, उनसे सीखते हुए हमें पूरे गवर्नेंस के मॉडल को विकसित करना पड़ेगा, अर्बन डेवलपमेंट का साइंटिफिक एप्रोच क्या हो, इस पर हमें बल देना होगा। हम सिर्फ हाउसिंग इन्डस्ट्री को एड्रेस करें, हाउसिंग प्राब्लम को एड्रेस करें और रोड इंफ्रास्ट्रक्चर को ना करें, हम रोड इंफ्रास्ट्रक्चर को करें लेकिन ट्रांसपोर्टेशन को ना करें, हम ट्रांसपोर्टेशन को करें लेकिन पावर सप्लाई को ना करें, हम पावर सप्लाई को करें लेकिन गैस ग्रिड को ना करें, हम गैस ग्रिड को करें लेकिन ब्रॉड-बैंड कनेक्टिविटी ना दें... अगर हम ऐसे टुकड़ों में करेंगे, तो मैं नहीं मानता हूँ कि हम सुविधाओं को पहुँचा सकते हैं। और इसलिए एक इन्टीग्रेटेड हॉलिस्टिक एप्रोच, और उसके लिए सबसे पहली आवश्यकता जो मैं अपने देश में महसूस करता हूँ, कि जिस प्रकार से आई.आई.एम. के अंदर भिन्न-भिन्न प्रकार के कोर्सेज चलते हैं, एम.बी.ए. के भिन्न-भिन्न प्रकार के कोर्सेज चलते हैं, ये समय की मांग है कि हमारे देश में जितना हो सके उतना जल्दी अर्बन मैनेजमेंट,अर्बन इनिशियेटिव्स को लेकर के युनिवर्सिटीज में ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान दिया जाए। एक्सपर्ट टैलेंट हमको तैयार करनी होगी, जो इन बढ़ते हुए, क्योंकि गुजरात एक ऐसा स्टेट है जहाँ हमारा आज 42% अर्बन पॉप्यूलेशन है और 50% पॉप्यूलेशन अर्बन एरिया पर डिपेन्डन्ट है, अगर यह मेरी स्थिति है तो मेरे लिए आवश्यक बन जाता है। आज इस प्रकार का सांइटिफिक नॉलेज रखने वाले ह्यूमन रिसोर्स भी उपलब्ध नहीं है। अगर कहीं कोई विदेश पढ़ करके आया है, तो ऐसे दो चार लोग मिल जाएंगे कि जिन्होंने इसी विषय पर मास्टरी की है। आवश्यकता यह है कि हमारे देश की गिवन सिचूऐशन के संदर्भ में, एशियन कंट्रीज़ की गिवन सिचूएशन के संदर्भ में, हम किस प्रकार का अर्बन मैनेजमेंट खड़ा कर सकते हैं..! और जब अर्बन मैनेजमेंट का पूरा सोचते हैं, तब जा कर के उसमें ट्रासंपोर्टेशन का मुद्दा आता है।

ब जैसे गुजरात जैसा प्रदेश है, बी.आर.टी.एस. में हम सफल हुए, और कभी-कभी मुझे लगता है कि हम बी.आर.टी.एस. में सिर्फ सफल होते तो दुनिया का ध्यान नहीं जाता..! हमारा दुर्भाग्य यह है कि हम कितना ही पसीना बहाएं, कितना ही अच्छा करें, लेकिन शुरू में किसी का उस पर ध्यान नहीं जाता है। जब दिल्ली में बी.आर.टी.एस. फेल हुआ, तब गुजरात पर ध्यान गया। अगर दिल्ली फेल ना गया होता तो हमारी सक्सेस की तरफ किसी की नजर नहीं जाती..! हमारे यहाँ ‘ज्योती ग्राम योजना’, चौबीस घंटे, थ्री फेज़, अनइन्ट्रप्टेड पावर गुजरात के अंदर पिछले पांच-छह साल से हम सप्लाई कर रहे हैं, सक्सेसफुली कर रहे हैं, लेकिन देश का कभी ध्यान नहीं गया। लेकिन अभी थोड़े दिन पहले जब पूरा हिंदुस्तान अंधेरे में फंस गया, 19 राज्य अंधेरे में फंस गएं, तब लोगों को गुजरात का उजाला दिखाई दिया और वॉशिंगटन पोस्ट तक सबको लिखना पड़ा कि एक गुजरात है जहाँ एनर्जी की दिशा में ये सेल्फ सफिशियंट है। तो ये दिल्ली में जब बी.आर.टी.एस. फेल गया, तब जा करके गुजरात के अहमदाबाद के बी.आर.टी.एस. प्रोजेक्ट की सफलता की तरफ दुनिया का ध्यान गया..! मित्रों, ये बी.आर.टी.एस. की बात हो, कोई भी बात हो, एक बात लिख कर रखिए, जब भी दिल्ली विफल जाएगा,गुजरात सक्सेस करके दिखाएगा। व्हेनएवर दिल्ली फेल्स,गुजरात सक्सीड्स..! और हम सफलता कि दिशा में, सफलता की ओर लोगों को ले जाने के पक्ष में हैं।

ब हम बी.आर.टी.एस. पर रुकने के मूड में नहीं हैं, और ट्रांसपोर्टेशन के सिस्ट्म्स की ओर हम आगे बढऩा चाहते हैं। अभी आप लोगों को जिस दिन मैंने कांकरिया और रिवर फ्रंट का लोकार्पण किया था, उस दिन हमने कहा था कि हिंदुस्तान में पहली बार हम एम्फि सर्विस को शुरू करने जा रहे हैं। साबरमती रिवर फ्रंट के अंदर जो कि नर्मदा का पानी बहा है, अब उसमें हम उस ट्रांस्पोर्टेशन को ला रहे हैं कि जिस में बस पानी में चलेगीऔर जहाँ पानी पूरा हो जाएगा, फिर वो जमीन पर दौडऩे लगेगी..! हमें नई-नई व्यवस्थाओं का उपयोग करना होगा।

ब गुजरात के पास 1600 किलोमीटर कोस्टलाइन है। लेकिन अभी तक ट्रांसपोर्टेशन के लिए भी इस 1600 किलोमीटर कोस्टलाइन का उपयोग होना चाहिए, इस पर ध्यान नहीं दिया गया। हम आने वाले दिनों में, और हम बीते हुए कल के गाने गा करके दिन गुजारने वाले लोग नहीं हैं, रोज नए सपने देखते हैं और सपनों को साकार करने के लिए जी-जान से जुटते रहते हैं..! 1600 किलोमीटर कोस्टलाइन, विद इन स्टेट, हमारा पूरा ट्रांसपोर्टेशन मोड क्यों ना बने..? सारा हमारा जो बर्डन आज है उसको हम कितना परसेंट रिड्यूस कर सकते हैं..! आज हमारे जो नेशनल हाइवेज़ हैं, आज अगर मुबंई से कोई लगेज आता है और मुझे मुंद्रा तक ले जाना है, या मुझे कच्छ मांडवी तक ले जाना है, अगर वो ही लगेज को मैं समुद्री तट से ले आता हूँ, तो मैं पूरे ट्रांसपोर्टेशन का कितना प्रेशर कम कर देता हूँ..! और सेफ और सस्ता भी कर देता हूँ, एनर्जी सेविंग का भी काम कर सकता हूँ। और इसलिए हम अभी 1600 किलोमीटर कोस्टलाइन पर अभी इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर रहे हैं।

मुझे याद है, मैं जब छोटा था, स्कूल में पढ़ता था, अखबार पढऩे की आदत थी, तो हर मुख्यमंत्री या मंत्री के मुंह से एक बात हम बचपन में पढ़ा करते थे, सुना करते थे कि घोघा-दहेज फेरी सर्विस..! मैं मुख्यमंत्री बना तो मैंने लोगों से सवाल पूछा कि भाई, मैं ये बचपन से सुनता-पढ़ता आया हूँ, इसका हुआ क्या..? मित्रों, अखबार में तो हम चीज देखते थे लेकिन कागज पर, फाइल में कहीं नजर नहीं आती थी..! और मैंने वो बीड़ा उठाया है और मैं उस घोघा-दहेज फेरी सर्विस को शुरू करने जा रहा हूँ। अभी इसका इन्फ्रास्ट्रक्चर का काम चल रहा है, दोनो तरफ चल रहा है। अब ये एक नया ट्रांसपोर्टेशन का मोड होगा, सौ से अधिक व्हीकल उसके अंदर आ जाएंगे, एक हजार से अधिक पैसेंजर आ जाएंगे... कितना एनर्जी सेविंग होगा, कितना समय का बचाव होगा, और कितना एग्ज़िस्टिंग ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम के प्रेशर को वो कम करेगा..! हम उस दिशा में जा रहे हैं।

मित्रों, मेरे गुजरात की लाइफ लाइन है नर्मदा,लेकिन सिर्फ पानी बहता रहे तो वो लाइफ लाइन रहेगी ऐसा मैं नहीं मानता..! मैंने कुछ लोगों को अभ्यास करने में लगाया है कि गुजरात के हार्ट में से निकलने वाली 500 किलोमीटर की कैनाल है, मेन कैनाल, क्या उसके अंदर हम ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्थाओं को विकसित कर सकते हैं..? लोगों को फन भी मिल जाएगा, प्रेशर भी कम होगा और कम से कम लगेज तो ले जा सकते हैं..! छोटे से, पानी से एक फुट ऊंचे ऐसा एक बने तो कहीं पर भी ब्रिज आता होगा, नाले के नीचे से निकलना होगा, तो भी वो 500 किलोमीटर लॉंग..., यानि जो काम करने के लिए अरबों-खरबों रूपये 500 किलोमीटर रोड बनाने के लिए लग जाएगा, वो आज वॉटर वे ट्रांसपोर्ट सिस्टम से हो सकता है क्या..? हम इसको कैसे आगे बढ़ाएं..!

मेट्रो ट्रेन..! अहमदाबाद में,सूरत में,बड़ौदा में, मेट्रो ट्रेन कि दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन अगर सूरत के मेट्रो ट्रेन का मॉडल एक होगा, बड़ौदा की मेट्रो ट्रेन का मॉडल एक होगा, अहमदाबाद का मेट्रो ट्रेन का एक मॉडल होगा, तो ये बिखरी हुई अवस्था हमें मंजूर नहीं है। इसलिए हिंदुस्तान में, गुजरात विल बी द फर्स्ट स्टेट, जो हम आने वाले दिनों में मल्टीमोडएफॉर्डेबल ट्रांसपोर्ट अथोरिटी का निर्माण करने वाले हैं। एक अम्ब्रेला के नीचे गुजरात के सभी शहरों में इंटरसिटी के लिए, इवन हमारे जो नए स्पेशल इनवेस्टमेंट रिजन बन रहे हैं वहाँ पर,ये मल्टीमोडएफॉर्डेबल, इस काम को करने के लिए एक सेपरैट ट्रांसपोर्ट अथोरिटी बनाएंगे और शॉर्टफॉर्म होगा उसका, ‘एम. ए. टी. ए. - माता’..! और माता शब्द आते ही सुविधाएं ही सुविधाएं मिलती हैं, जहाँ माता शब्द होता है..! तो ये ‘माता’ शब्द के साथ मल्टीमोड एफॉर्डेबल ट्रांसपोर्ट अथोरिटी का निर्माण गुजरात के अंदर किया जाएगा और जितने भी प्रकार के आवागमन के संसाधनों की व्यवस्थाएं हैं, आज एग्ज़िस्टिंग हैं, नई आने की संभावनाएं हैं, एक होलिस्टिक एप्रोच और एक दूसरे के साथ कॉन्ट्रडिक्टरी ना हो, एक-दूसरे के साथ नए कॉन्ट्रास्ट पैदा करें ऐसे ना हों, एक दूसरे के पूरक हों और व्यवस्था ऐसी कॉमन हो, ताकि काफी खर्च नीचे लाया जा सके। अगर सूरत का एक बोर्ड है, अहमदाबाद का दूसरा बोर्ड है, तो दोनों का सप्लाई करने वाली टीमें अलग बन जाएगी, खर्चा बढ़ जाएगा। लेकिन अगर मार्केट कॉमन पैदा किया जाए, तो मैन्युफैक्चरिंग भी कॉमन होगा, तो उसके कारण उसकी कॉस्ट नीचे लाने में भी बहुत सुविधा होगी, और उस दिशा में काम करने का हम प्रयास कर रहे हैं।

मित्रों, जो लोग गुजरात की विकास यात्रा को देखते हैं, मैं जानता हूँ कि स्वस्थता पूर्वक, बारीकियों से चीजों को एनालिसिस करने का स्वभाव समाज में कम होता जा रहा है। अध्ययन करके चीजों का मूल्यकांन करने की आदत कम होती जा रही है। ऐसे बहुत से अच्छे इनिशियेटिव होते हैं, जिस पर किसी का ध्यान जाता नहीं है। क्या कारण होगा कि बी.आर.टी.एस. का नाम हमने ‘जन मार्ग’ रखा हुआ है, क्या कारण है कि हजारों करोड़ रूपयों की गोल्डन वैल्यू की जमीन हमने इस प्रकार से इस काम के लिए लगा दी होगी..! वरना इसकी कीमत की जाए तो हजारों करोड़ रूपये की कीमत की जमीन है जिस पर आज बी.आर.टी.एस. दौड़ रही है, लेकिन स्टडी करके इतने अरबों-खरबों रूपया खपाना..! कुछ लोग कहते हैं कि इतने बढिय़ा... मेरी आलोचना क्या हुई है..? मेरी आलोचना ये हुई है कि इतने बढिय़ा बस स्टेशन की क्या जरूरत थी..? मुझे कभी-कभी ये गरीब सोच वाले लोग होते हैं, उन पर बड़ी दया आती है। सामान्य मानवी के लिए अगर अच्छी सुविधा होती है तो लोगों की आंख में चुभने लगती है, लेकिन अरबों-खरबों का एयरपोर्ट बन जाता है,तो लोगों के आंख में नहीं चुभता..! एयरपोर्ट अच्छा क्यों बना ऐसा कोई सवाल नहीं पूछता है, लेकिन बस स्टेशन अच्छा क्यों बना, हमें सवाल पूछा जा रहा है..? क्या सामान्य मानवी के लिए अच्छी सुविधा नहीं होनी चाहिए, हमें इसके लिए क्वेश्चन किया जाता है..? और ये कुछ लोगों की मानसिक दरिद्रता होती है। और मुझे एक कथा बराबर याद है, बहुत सालों पहले की घटना है और सत्य घटना है। मैं मेहसाणा के प्लेटफार्म पर खड़ा था और वहाँ पर भीख मांगने वाला एक इंसान, किसी ने ब्रेड दिया होगा, तो ब्रेड अपने हाथ के अंदर ऐसे डूबो-डूबो कर खा रहा था और बड़े चाव से खा रहा था। मेरी यूँ ही नजर गई, मैंने देखा कि उसके हाथ में तो कुछ है नहीं, तो ये ब्रेड जो है उसे ऐसे डूबो-डूबो कर कैसे खा रहा है..? तो मेरा मन कर गया और उस गरीब आदमी के पास जाकर मैंने पूछा। मैंने कहा भइया, तुम ब्रेड खा रहे हो, तेरे हाथ में तो कुछ है नहीं, ये ऐसे बराबर डूबो-डूबो कर क्यों खा रहे हो..? तो उसने मुझे जवाब दिया, उसने कहा साहब, ऐसा है कि अकेली ब्रेड टेस्टी नहीं लगती, तो मैं मन से सोचता हूँ कि मेरे हाथ में नमक है और नमक में डूबो के मैं उसे खा रहा हूँ..! मैंने कहा यार, कल्पना ही करनी है तो श्रीखंड की कर, नमक की क्यों कर रहा है..? लेकिन वो गरीब आदमी की कल्पना की दरिद्रता इतनी थी कि वो उससे बाहर नहीं जा सका था..! मित्रों, आप गुजरात का अध्ययन करेंगे तो देखेंगे कि जो गरीबों की भलाई के काम हैं उसको ऊचांई पर ले जाने की हमारी सोच है। हमने ‘ज्योतिग्राम योजना’ क्यों की..? सामान्य मानवी को 24 घंटे बिजली क्यों नहीं मिलनी चाहिए..! अमीर तो अपने घर में जनरेटर लगा सकता है, गरीब के घर में स्वीच ऑन करने से बिजली मिलनी चाहिए। उन गरीबों के प्रति लगाव का परिणाम है कि ‘ज्योतिग्राम योजना’ ने जन्म लिया..! ‘108’ क्यों आई..? किसी अमीर को अस्पताल जाना है तो उसके लिए पचास एम्बूलेंस घर के सामने खड़ी हो जाएंगी, हैल्थ केयर करने वाला एक पूरा कोन्वॉय उसके घर आ जाएगा। सामान्य आदमी बीमार हो तो कहाँ जाएगा और उस पीड़ा में से, उस दर्द में से ‘108’ सेवा का जन्म हुआ और आज गरीब से गरीब व्यक्ति एक रूपया खर्च किये बिना ‘108’ अपने घर पर बुला सकता है और उसको आगे ले जा सकता है। अभी परसों हमने एक कार्यक्रम किया, हिंदुस्तान में पहली बार ऐसा कार्यक्रम हमने दिया है। ‘खिलखिलाट’, ये ‘खिलखिलाट’ योजना..! अस्पताल तक तो ले जाती है ‘108’, लेकिन वो ठीक होने के बाद, बच्चा जन्म लेता है और बच्चे को लेकर वो घर जाता है और उसको अगर सही व्यवस्था नहीं मिली, और 48 अवर्स में बच्चा जब घर जा रहा है और उसको कोई इनफ़ेक्शन लग गया, तो हमें उस बच्चे की जान गंवा देनी पड़ती है। उस बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए, उस मां और उस नवजात शिशु को उसके घर तकछोडऩे के लिए मुफ्त में ट्रांसपोर्टेशन देने का काम, ये ‘खिलखिलाट’ योजना हमने दो दिन पूर्व समर्पित की।

मारी हर योजना के केन्द्र में गरीब हैबी.आर.टी.एस.,गरीब सामान्य मानवी को समय पर पहुँचाने के लिए और सम्मान पूर्वक बैठने के लिए हमने व्यवस्था की। हमने स्मार्ट कार्ड बनाया तो किसका पास बनाया? स्मार्ट कार्ड योजना से एक सामान्य मानवी के लिए टिकट की व्यवस्था की। हमने बिलो पॉवर्टी लाइन के लोगों को, जो सस्ता अनाज की दुकान से पी.डी.एस. सिस्टम का लाभ लेने के लिए दुकान पर जाते हैं, तो गुजरात इज़ द ओन्ली स्टेट, जिसने बार कोड सिस्टम बनाई है ताकि उसको किस तारिख को माल मिला वहाँ तक का पूरा रिकार्ड होगा और कोई दुकानदार उसको डिनाई नहीं कर सकता है। इस प्रकार की व्यवस्था क्यों की..? हमारे दिलो-दिमाग के अंदर हर पल एक गरीब आदमी की सुख-सुविधा रहती है। जितनी भी योजनाएं हैं, उसका कोई अध्ययन करेगा तो उसको ध्यान आएगा। गुजरात एक ऐसा प्रदेश है, 2001 में जब मैंने कार्यभार संभाला था तब मेरे राज्य के अंदर मुश्किल से 32% माताएं ऐसी थीं,जिन्हें इंस्टीट्यूशनल डिलीवरी का लाभ मिलता था, अस्पताल में उनकी डिलीवरी होती थी, ओन्ली 32%..! भाइयों-बहनों, गरीबों के लिए योजनाएं बनाईं, ‘चिरंजीवी स्कीम’ लाए, सरकार ने हिस्सा लिया, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप का मॉडल लाए, नई व्यवस्थाएं खड़ी कीं... और आज मैं गर्व से कहता हूँ कि मेरे राज्य के अंदर करीब 96% इंस्टीट्यूशनल डिलीवरी होती हैं, गरीब माताओं की प्रसूती अस्पतालों में होने लगी हैं या डॉक्टरों की मदद से होने लगी हैं..! ये स्थिति हम लाए क्यों..? मुझे गरीब मां को बचाना है, गरीब बच्चों को बचाना है और इसलिए की है। जितनी भी योजनाओं का अध्ययन करोगे, वो बी.आर.टी.एस. का होगा तो भी, उस योजना के केन्द्र में सामान्य मानवी की सुविधा है, गरीब मानवी की सुविधा है। उस प्रेरणा से काम हो रहा है और तब जाकर के बी.आर.टी.एस. सफल होती है, तब जाकर के योजनाएं सफल होती हैं और उस योजनाओं को सफल करने की दिशा में प्रयास करते हैं।

आने वाले दिनों में हमारे यहाँ जापान के साथ मिल कर के एक डेडिकैटेड इंडस्ट्रियलकॉरिडोर खड़ा हो रहा है। वो भी ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम के अगल-बगल में डेवलपमेंट का पूरा मॉडल है, वो भी होने वाला है। हम कैनाल नेटवर्क का उपयोग करना चाहते हैं, हम कोस्टल नेटवर्क का उपयोग करना चाहते हैं, हम इंटर डिस्ट्रीक्ट का, तीन सिटी का प्लान तैयार करने जा रहे हैं जिसको ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम की प्राथमिकता से जोडऩा चाहते हैं। यानि, इतने विषयों के इनिशियेटिव दिमाग में भरे पड़े हैं जिसको धरती पर उतारने के सपने लेकर के काम कर रहे हैं, उसमें ये जो एशिया की कान्फ्रेंस हो रही है, यह एशिया की कान्फ्रेंस हमें भी नई दिशा और दर्शन देंगे, नई शक्ति देंगे, नए विचार देंगे, और उसको लेकर के हम इस शहर के सामान्य मानवी की सुख सुविधाओं में और अधिक बढ़ोतरी कर पाएंगे।

मुझे आप सब के बीच आने का अवसर मिला, आप सब से बात करने का सौभाग्य मिला, मैं अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का बहुत आभारी हूँ और इस इनिशियेटिव के लिए उनका अभिनदंन करता हूँ..!

य जय गरवी गुजरात...!!

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ದಮನ್‌ನಲ್ಲಿ ವಿವಿಧ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಕಾರ್ಯಗಳ ಶಿಲಾನ್ಯಾಸ/ರಾಷ್ಟ್ರಕ್ಕೆ ಸಮರ್ಪಣೆ ಸಮಾರಂಭದಲ್ಲಿ ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಅವರು ಮಾಡಿದ ಭಾಷಣದ ಕನ್ನಡ ಅವತರಣಿಕೆ
June 05, 2026
ಆರೋಗ್ಯ ರಕ್ಷಣೆ, ವಾಯುಯಾನ, ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮ ಮತ್ತು ಮೂಲಸೌಕರ್ಯದಲ್ಲಿ ಯೋಜನೆಗಳನ್ನು ಪ್ರಾರಂಭಿಸುವುದರೊಂದಿಗೆ ದಾಮನ್‌ಗೆ ಹೊಸ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಶಕೆ; ಈ ಉಪಕ್ರಮಗಳು ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶದಾದ್ಯಂತ ಜೀವನವನ್ನು ಪರಿವರ್ತಿಸುತ್ತವೆ: ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ
ಇಂದು ಬಿಡುಗಡೆಯಾದ ದತ್ತಾಂಶವು ಭಾರತದ ಆರ್ಥಿಕತೆಯ ಅಡಿಪಾಯ ಎಷ್ಟು ಪ್ರಬಲವಾಗಿದೆ ಎಂಬುದನ್ನು ಸ್ಪಷ್ಟವಾಗಿ ತೋರಿಸುತ್ತದೆ; 2025–26ರಲ್ಲಿ ಭಾರತವು 7.7% ಬೆಳವಣಿಗೆ ದರವನ್ನು ಸಾಧಿಸಿತು, ಮತ್ತು ಮಾರ್ಚ್ 31 ರಂದು ಕೊನೆಗೊಂಡ ಹಿಂದಿನ ತ್ರೈಮಾಸಿಕದಲ್ಲಿ ಭಾರತದ ಬೆಳವಣಿಗೆಯು 7.8% ರಷ್ಟಿತ್ತು: ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ
ಈ ತೀವ್ರ ಜಾಗತಿಕ ಬಿಕ್ಕಟ್ಟಿನ ನಡುವೆಯೂ, 1.4 ಶತಕೋಟಿ ನಾಗರಿಕರ ಸಾಮೂಹಿಕ ಪ್ರಯತ್ನಗಳು ಭಾರತವು ತನ್ನನ್ನು ತಾನು ಉಳಿಸಿಕೊಳ್ಳುವುದಲ್ಲದೆ, ವಕ್ರರೇಖೆಗಿಂತ ಮುಂದೆ ಉಳಿಯುವ ಪ್ರಯತ್ನಗಳಲ್ಲಿ ಯಶಸ್ವಿಯಾಗುತ್ತಿದೆ ಎಂಬುದು ಖಚಿತಪಡಿಸಿಕೊಂಡಿದೆ: ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ
ನಮ್ಮ ಸರ್ಕಾರವು ಆರೋಗ್ಯಕ್ಕೆ ಹೇಗೆ ಆದ್ಯತೆ ನೀಡುತ್ತದೆ ಎಂಬುದು ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಕುಟುಂಬ ಆರೋಗ್ಯ ಸಮೀಕ್ಷೆಯ ಸಂಶೋಧನೆಗಳಿಂದ ಸ್ಪಷ್ಟವಾಗಿ ಸಾಬೀತಾಗಿದೆ; ಹಿಂದೆ, ಭಾರತದಲ್ಲಿ ಹೆಚ್ಚಿನ ಮಕ್ಕಳ ಹೆರಿಗೆಗಳು ಆಸ್ಪತ್ರೆಗಳಲ್ಲಿ ನಡೆಯುತ್ತಿರಲಿಲ್ಲ; ಇಂದು, ದೇಶದಲ್ಲಿನ ಎಲ್ಲಾ ಹೆರಿಗೆಗಳಲ್ಲಿ 90 ಪ್ರತಿಶತಕ್ಕೂ ಹೆಚ್ಚು ಆಸ್ಪತ್ರೆಗಳಲ್ಲಿ ನಡೆಯುತ್ತವೆ: ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ
ಮಿಷನ್ ಇಂದ್ರಧನುಷ್ ಕಾರಣದಿಂದಾಗಿ, ಭಾರತವು ಮಕ್ಕಳ ರೋಗನಿರೋಧಕ ಶಕ್ತಿಯಲ್ಲಿ ಬಲವಾದ ಪ್ರಗತಿಯನ್ನು ಕಂಡಿದೆ; 2014 ಕ್ಕಿಂತ ಮೊದಲು, ಕೇವಲ 60 ಪ್ರತಿಶತ ಮಕ್ಕಳಿಗೆ ಮಾತ್ರ ಸಂಪೂರ್ಣವಾಗಿ ಲಸಿಕೆ ನೀಡಲಾಗಿತ್ತು; ಇಂದು, ಈ ಅಂಕಿಅಂಶವು ಸುಮಾರು 90 ಪ್ರತಿಶತಕ್ಕೆ ಏರಿದೆ: ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ

ಭಾರತ್ ಮಾತಾ ಕಿ ಜೈ!

ಭಾರತ್ ಮಾತಾ ಕಿ ಜೈ!

ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯು ಆಡಳಿತಾಧಿಕಾರಿ ಪ್ರಫುಲ್ ಭಾಯಿ ಪಟೇಲ್, ಸಂಸತ್ತಿನಲ್ಲಿ ನನ್ನ ಸಹೋದ್ಯೋಗಿ ಕಲಾಬೆನ್ ದೇಲ್ಕರ್, ದಮನ್ ಪುರಸಭೆಯ ಅಧ್ಯಕ್ಷೆ ದೀಪಿಕಾ ತಂಡೇಲ್ ಜೀ, ದಮನ್ ಜಿಲ್ಲಾ ಪಂಚಾಯತ್ ಅಧ್ಯಕ್ಷರಾದ ಧರ್ಮ ಬಾಬು ಪಟೇಲ್, ಸಿಲ್ವಾಸ್ಸಾ ಪುರಸಭೆಯ ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಸೋಮನಾಥ್ ದೇವ್ರೆ ಜೀ, ದಾದ್ರಾ ನಗರ ಹವೇಲಿ ಜಿಲ್ಲಾ ಪಂಚಾಯತ್ ಅಧ್ಯಕ್ಷೆ ನಿಶಾ ಭಾವ್ಸರ್ ಜೀ, ದಿಯು ಪುರಸಭೆಯ ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಹರೀಶ್ ಕಪಾಡಿಯಾ ಜೀ, ದಿಯು ಜಿಲ್ಲಾ ಪಂಚಾಯತ್ ಅಧ್ಯಕ್ಷೆ ಕೋಟಿಯಾ ರಂಜಿತಾಬೆನ್ ಮತ್ತು ಇಲ್ಲಿ ಇಷ್ಟೊಂದು ಬೃಹತ್ ಸಂಖ್ಯೆಯಲ್ಲಿ ನೆರೆದಿರುವ ನನ್ನ ಪ್ರೀತಿಯ ಸಹೋದರರೇ ಮತ್ತು  ಸಹೋದರಿಯರೇ,

ನೀವು ಇಲ್ಲಿ ನೆರೆದಿರುವಂತೆಯೇ, ಲಕ್ಷದ್ವೀಪದಲ್ಲಿಯೂ ಸಹ ಹೆಚ್ಚಿನ ಸಂಖ್ಯೆಯ ಜನರು ವೀಡಿಯೊ ಮೂಲಕ ನಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕ ಹೊಂದಿದ್ದಾರೆ, ಏಕೆಂದರೆ ಇಂದು ಲಕ್ಷದ್ವೀಪದಲ್ಲಿ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ಹೊಸ ಆರಂಭ, ಲಕ್ಷದ್ವೀಪದ ಜನರ ಜೀವನದಲ್ಲಿ ಕ್ರಾಂತಿಕಾರಿ ಬದಲಾವಣೆಯನ್ನು ತರುವ ಹೊಸ ಯೋಜನೆ, ಉದ್ಘಾಟನೆಗೊಂಡಿದೆ ಮತ್ತು ಕೆಲವು ಯೋಜನೆಗಳಿಗೆ ಅಡಿಪಾಯ ಹಾಕಲಾಗಿದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಕೆಲವು ವರ್ಷಗಳ ಹಿಂದೆ, ನಾನು ನಿಮ್ಮ ಬಳಿಗೆ ಬಂದಾಗ, ನಮ್ಮ ದಮನ್ ವೇಗವಾಗಿ ಮಿನಿ ಇಂಡಿಯಾ ಆಗುತ್ತಿದೆ ಎಂದು ಹೇಳಿದ್ದೆ, ಮತ್ತು ಇಂದು ನಾನು ನೋಡುತ್ತಿದ್ದೇನೆ, ಎಡಭಾಗದಲ್ಲಿ ಇಡೀ ಬಂಗಾಳ ಮತ್ತು ಬಲಭಾಗದಲ್ಲಿ ಇಡೀ ಅಸ್ಸಾಂ ಇದೆ. ದಮನ್ ಮಿನಿ ಭಾರತದ ಜೀವಂತ ಉದಾಹರಣೆಯಾಗಿದೆ. ಇಲ್ಲಿ ವಾಸಿಸುವ ವಿವಿಧ ಪ್ರದೇಶಗಳ ಜನರು, ನಿಮ್ಮಲ್ಲಿರುವ ವೈವಿಧ್ಯತೆಯು ಇಡೀ ಭಾರತದ ಸುಂದರ ನೋಟವನ್ನು ನೀಡುತ್ತದೆ. ನೀವೆಲ್ಲರೂ ನಮ್ಮನ್ನು ಆಶೀರ್ವದಿಸಲು ಇಷ್ಟು ದೊಡ್ಡ ಸಂಖ್ಯೆಯಲ್ಲಿ ಬಂದಿದ್ದೀರಿ, ಇದಕ್ಕಾಗಿ ನಾನು ನಿಮ್ಮೆಲ್ಲರಿಗೂ ತುಂಬಾ ಆಭಾರಿ.

ಸಹೋದರರೇ ಮತ್ತು  ಸಹೋದರಿಯರೇ,

ದಮನ್ ಮತ್ತು ದಿಯುಗೆ ಹಲವು ಬಾರಿ ಬರುವ ಅವಕಾಶ ನನಗೆ ಸಿಕ್ಕಿದೆ. ನಾನು ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿಗೆ ಕೂಡಾ ಭೇಟಿ ನೀಡುತ್ತಲೇ ಇರುತ್ತೇನೆ, ಮತ್ತು ನಾನು ಮುಖ್ಯಮಂತ್ರಿ ಅಥವಾ ಪ್ರಧಾನಿಯಾಗಿಲ್ಲದಿದ್ದಾಗ, ನಾನು ಇಲ್ಲಿಗೆ ಹಲವು ಬಾರಿ ಬರುತ್ತಿದ್ದೆ. ಆದರೆ ಈಗ ನಾನು ಇಲ್ಲಿಗೆ ಬಂದು ಉತ್ತಮ ಆಡಳಿತ, ಆಡಳಿತ ಮಾದರಿಯನ್ನು ನೋಡಿದಾಗ, ಅದು ತುಂಬಾ ಚೆನ್ನಾಗಿದೆ ಎಂಬ ಭಾವನೆ ತರುತ್ತದೆ. ಕಳೆದ ಬಾರಿಗೆ ಹೋಲಿಸಿದಾಗ  ಈ ಬಾರಿ ಈ ಪ್ರದೇಶವು ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ಹಾದಿಯಲ್ಲಿ ಮೈಲುಗಳಷ್ಟು ಮುಂದೆ ಸಾಗಿದೆ ಎಂದು ನನಗೆ ಅನಿಸುತ್ತದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯು ದಶಕಗಳಿಂದ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ಕನಸು ಕಂಡಿದ್ದವು. ಹಿಂದೆ ಕನಸು ಕಂಡಿದ್ದ ತಲೆಮಾರುಗಳ ಜನರು ನಿಧನರಾದರು. ಆದರೆ ಇಂದು ಇಂದಿನ ಪೀಳಿಗೆ ತಮ್ಮ ಹೆತ್ತವರು ಮತ್ತು ಅಜ್ಜಿಯರು ಕಂಡ ಕನಸುಗಳು ಈಗ ತಮ್ಮ ಕಣ್ಣ ಮುಂದೆಯೇ ನನಸಾಗುತ್ತಿರುವುದನ್ನು ನೋಡುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಇಂದು, ಸಂಪರ್ಕ, ಆರೋಗ್ಯ, ಶಿಕ್ಷಣ, ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮ ಮತ್ತು ನಗರ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯಕ್ಕೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ಅನೇಕ ಯೋಜನೆಗಳನ್ನು ಇಲ್ಲಿ ಉದ್ಘಾಟಿಸಲಾಗಿದೆ ಮತ್ತು ಅಡಿಪಾಯ ಹಾಕಲಾಗಿದೆ. ಈ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಕಾರ್ಯಗಳು ದಮನ್ ಮತ್ತು ಇಡೀ ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶದ ಜನರಿಗೆ ಜೀವನವನ್ನು ಸುಲಭಗೊಳಿಸುತ್ತದೆ. ಅವು ಯುವಜನರಿಗೆ ಹೊಸ ಅವಕಾಶಗಳನ್ನು ಸೃಷ್ಟಿಸುತ್ತವೆ. ಈ ಕೆಲಸಗಳ ಹಿಂದೆ, ಪ್ರಫುಲ್ ಭಾಯಿ ಪಟೇಲ್ ಅವರ ಮತ್ತು ಅವರ ತಂಡದ ಕಠಿಣ ಪರಿಶ್ರಮದ ದೃಷ್ಟಿಕೋನವು ಸ್ಪಷ್ಟವಾಗಿ ಗೋಚರಿಸುತ್ತದೆ. ಇದಕ್ಕಾಗಿ, ನಾನು ಪ್ರಫುಲ್ ಭಾಯಿ ಮತ್ತು ಅವರ ಇಡೀ ತಂಡವನ್ನು ಸಹ ಶ್ಲಾಘಿಸುತ್ತೇನೆ. ಲಕ್ಷದ್ವೀಪ ಮತ್ತು ದಾದ್ರಾ-ನಗರ ಹವೇಲಿಯ ಜನರಿಗೆ ನಾನು ಅನೇಕ ಅಭಿನಂದನೆಗಳು ಮತ್ತು ಶುಭಾಶಯಗಳನ್ನು ಸಲ್ಲಿಸುತ್ತೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಂದು ನಾನು ನಿಮ್ಮ ನಡುವೆ ಬಂದಿರುವಂತೆಯೇ, ಒಂದು ಒಳ್ಳೆಯ ಸುದ್ದಿ ಬಂದಿದೆ. ನಾನು ಇಂದು ಬೆಳಿಗ್ಗೆ ದೆಹಲಿಯಿಂದ ಹೊರಟಿದ್ದೆ, ಆದರೆ ಇದೀಗ ಬಂದಿರುವ ಅಂಕಿಅಂಶಗಳು, ಬಂದಿರುವ ಸುದ್ದಿಗಳು ನಿಜಕ್ಕೂ ಸಂತೋಷಕರವಾಗಿವೆ ಮತ್ತು ನಾನು ಈ ಸಂತೋಷವನ್ನು ನಿಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಹಂಚಿಕೊಳ್ಳಲು ಬಯಸುತ್ತೇನೆ. ಇಂದು ಬಂದಿರುವ ಅಂಕಿಅಂಶಗಳು ಭಾರತದ ಆರ್ಥಿಕತೆಯ ಅಡಿಪಾಯ ಎಷ್ಟು ಪ್ರಬಲವಾಗಿದೆ ಎಂಬುದನ್ನು ಸ್ಪಷ್ಟವಾಗಿ ತೋರಿಸುತ್ತವೆ. 2025-26ನೇ ವರ್ಷದಲ್ಲಿ, ಅಂದರೆ, ಇದೀಗ ಕೊನೆಗೊಂಡಿರುವ ಹಣಕಾಸು ವರ್ಷದಲ್ಲಿ, ಭಾರತವು ಶೇಕಡಾ 7.7, 7.7 ರ ಬೆಳವಣಿಗೆಯ ದರವನ್ನು ಸಾಧಿಸಿದೆ ಮತ್ತು ಮಾರ್ಚ್ 31 ರಂದು ಕೊನೆಗೊಂಡ ಕೊನೆಯ ತ್ರೈಮಾಸಿಕವು ಭಾರತದ ಬೆಳವಣಿಗೆಯನ್ನು ಶೇಕಡಾ 7.8, 7.8 ರಷ್ಟು ಎಂದು ದಾಖಲಿಸಿದೆ. ಮತ್ತು ಇದು ವಿಶ್ವದಲ್ಲೇ ವೇಗವಾಗಿ ಬೆಳೆಯುತ್ತಿರುವ ದೊಡ್ಡ ಆರ್ಥಿಕತೆಯಾಗಿದೆ. ಪ್ರತಿಯೊಬ್ಬ ಭಾರತೀಯನೂ ಹೆಮ್ಮೆಪಡಬೇಕು, ಇದು ಅದರ ವೇಗ. ಇಂದು ದೇಶವು ಸುಧಾರಣಾ ಎಕ್ಸ್‌ಪ್ರೆಸ್‌ನಲ್ಲಿ ಓಡುತ್ತಿದೆ, ಇಂದು ದೇಶವು ಅಂತಹ ಬೃಹತ್ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯನ್ನು ವೀಕ್ಷಿಸುತ್ತಿದೆ, ಬಡವರ ಕಲ್ಯಾಣಕ್ಕಾಗಿ ಅಂತಹ ದೊಡ್ಡ ಪ್ರಮಾಣದ ಕೆಲಸವನ್ನು ಮಾಡಲಾಗುತ್ತಿದೆ ಮತ್ತು ಈ ಎಲ್ಲಾ ಪ್ರಯತ್ನಗಳ ಫಲಿತಾಂಶವೆಂದರೆ ಇಂದು ದೇಶವು ವೇಗವಾಗಿ ಬೆಳೆಯುತ್ತಿರುವ ದೊಡ್ಡ ಆರ್ಥಿಕತೆಯಾಗಿ ಮುಂದುವರಿಯುತ್ತಿದೆ. ಮತ್ತು ನಮಗೆಲ್ಲರಿಗೂ ತಿಳಿದಿದೆ, ಜಗತ್ತು ಬಿಕ್ಕಟ್ಟುಗಳಲ್ಲಿ ಮುಳುಗಿದೆ, ಇಡೀ ಪ್ರಪಂಚದ ಆರ್ಥಿಕತೆಗಳು ಪ್ರಶ್ನಾರ್ಥಕ ಚಿಹ್ನೆಗಳ ಅಡಿಯಲ್ಲಿ ಹೂತುಹೋಗಿವೆ, ಆದರೆ ಜಾಗತಿಕ ಬಿಕ್ಕಟ್ಟಿನ ಈ ಕೆಟ್ಟ ಸಮಯದಲ್ಲಿಯೂ ಸಹ, 1.4 ಶತಕೋಟಿ ದೇಶವಾಸಿಗಳ ಸಾಮೂಹಿಕ ಪ್ರಯತ್ನಗಳಿಂದ, ಭಾರತವು ತನ್ನನ್ನು ತಾನು ಉಳಿಸಿಕೊಳ್ಳಲು ಮಾತ್ರವಲ್ಲದೆ ಮುಂದೆ ಬರುವಲ್ಲಿಯೂ ಯಶಸ್ವಿಯಾಗಿದೆ. ಆರ್ಥಿಕ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ಈ ಹೊಸ ಎತ್ತರವನ್ನು ಸಾಧಿಸಿದ್ದಕ್ಕಾಗಿ ನಾನು ದೇಶವಾಸಿಗಳಿಗೆ ಅನೇಕ ಅಭಿನಂದನೆಗಳನ್ನು ಸಲ್ಲಿಸುತ್ತೇನೆ ಮತ್ತು ಪ್ರಪಂಚದಾದ್ಯಂತ ಚಾಲ್ತಿಯಲ್ಲಿರುವ ಈ ಬಿಕ್ಕಟ್ಟುಗಳನ್ನು ಎದುರಿಸುವಾಗ, ದೇಶವು ದೃಢ ಸಂಕಲ್ಪದೊಂದಿಗೆ, ಸುಧಾರಣೆ, ಕಾರ್ಯಕ್ಷಮತೆ ಮತ್ತು ಪರಿವರ್ತನೆಯ ಹಾದಿಯಲ್ಲಿ ವೇಗವಾಗಿ ಮುಂದುವರಿಯುತ್ತದೆ ಎಂದು ನಾನು ಮತ್ತೊಮ್ಮೆ ರಾಷ್ಟ್ರಕ್ಕೆ ಭರವಸೆ ನೀಡುತ್ತೇನೆ. ಇದು ದೇಶವಾಸಿಗಳಿಗೆ ನನ್ನ ಭರವಸೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಂದು ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯು ಬಹಳ ಮುಖ್ಯ ಮತ್ತು  ನಮ್ಮ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಮಾದರಿ ಸುಸ್ಥಿರವಾಗಿರುವುದನ್ನು ಖಚಿತಪಡಿಸಿಕೊಳ್ಳುವುದೂ ಅಷ್ಟೇ ಮುಖ್ಯವಾಗಿದೆ. ಇಂದು, ವಿಶ್ವ ಪರಿಸರ ದಿನದಂದು, ನಮ್ಮ ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶವು ಈ ನಿರ್ಣಯವನ್ನು ಸಾಕಾರಗೊಳಿಸುತ್ತಿದೆ. ಇಂದು, ಒಂದೆಡೆ, ಸಾವಿರಾರು ಕೋಟಿ ಮೌಲ್ಯದ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಯೋಜನೆಗಳನ್ನು ಇಲ್ಲಿ ಉದ್ಘಾಟಿಸಲಾಗಿದೆ ಮತ್ತು ಶಂಕುಸ್ಥಾಪನೆ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ. ಅದೇ ಸಮಯದಲ್ಲಿ, ತಾಯಿಯ ಹೆಸರಿನಲ್ಲಿ ಸುಮಾರು ಒಂದು ಲಕ್ಷ ಒಂದು ಗಿಡಗಳು, ಒಂದು ಲಕ್ಷ ಸಸಿಗಳನ್ನು ಸಹ ಇಲ್ಲಿ ನೆಡಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಸರಕಾರಿ ಕಟ್ಟಡಗಳಲ್ಲಿ ಸೌರಶಕ್ತಿಯ 100 ಪ್ರತಿಶತ ಬಳಕೆಯ ಸಾಧನೆಯನ್ನು ಸಾಧಿಸಿರುವ ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶ ಇದಾಗಿದೆ ಎಂದು ನನಗೆ ಹೆಮ್ಮೆ ಇದೆ. ಇಂದು, ದಿಯುನಲ್ಲಿ, ಸಂಪೂರ್ಣ ಹಗಲಿನ ವಿದ್ಯುತ್ ಬೇಡಿಕೆಯನ್ನು ಸೌರಶಕ್ತಿಯಿಂದಲೇ ಪೂರೈಸಲಾಗುತ್ತಿದೆ ಮತ್ತು ನಾವು ಇದನ್ನು ಮತ್ತಷ್ಟು ಮುಂದುವರಿಸಬೇಕಾಗಿದೆ. ಸೌರಶಕ್ತಿಯ ಮೂಲಕ ಮನೆಗಳಲ್ಲಿಯೂ ವಿದ್ಯುತ್ ಲಭ್ಯವಿರಬೇಕು ಮತ್ತು ಅಷ್ಟೇ ಅಲ್ಲ, ಕುಟುಂಬಗಳು ಹೆಚ್ಚುವರಿ ವಿದ್ಯುತ್‌ನಿಂದ ಆದಾಯವನ್ನು ಗಳಿಸಬೇಕು. ಇದಕ್ಕಾಗಿ, ಮೇಲ್ಛಾವಣಿಯ ಸೌರ ಸ್ಥಾವರಗಳನ್ನು ಸ್ಥಾಪಿಸುವ ಉಪಕ್ರಮವು ಪ್ರಾರಂಭವಾಗಿದೆ. ಈ ಸಾಧನೆಗಳಿಗಾಗಿ ನಾನು ನಿಮ್ಮೆಲ್ಲರನ್ನು ಅಭಿನಂದಿಸುತ್ತೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇದರೊಂದಿಗೆ, ದಮನ್‌ನ ಜನರು ಇತ್ತೀಚಿನ ದಿನಗಳಲ್ಲಿ ಸ್ವಚ್ಛತಾ ಅಭಿಯಾನವನ್ನು ನಡೆಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ ಎಂದು ನನಗೆ ತಿಳಿಸಲಾಗಿದೆ. ಇದು ಸ್ವಚ್ಛತೆ ಹೇಗೆ ದಮನ್‌ನ ಸಾರ್ವಜನಿಕ ಜೀವನದ ಸಂಸ್ಕೃತಿಯ ಭಾಗವಾಗಿ ಮಾರ್ಪಟ್ಟಿದೆ ಎಂಬುದನ್ನು ತೋರಿಸುತ್ತದೆ ಮತ್ತು ಈ ಸಂಸ್ಕೃತಿಯು ಸ್ವಚ್ಛತಾ ಪ್ರಯತ್ನಗಳಲ್ಲಿ ಗೋಚರಿಸುತ್ತದೆ. ಈ ಭಾಗವಹಿಸುವ ಪ್ರಯತ್ನಗಳಿಗಾಗಿ ನಾನು ದಮನ್ ಜನರನ್ನು ಅಭಿನಂದಿಸುತ್ತೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ದಾದ್ರಾ ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯು ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶವಾಗಿರುವುದರಿಂದ ಭಾರತದ ಗುರುತು ಮತ್ತು ಪರಂಪರೆಯೂ ಆಗಿದೆ. ಆದ್ದರಿಂದ, ಅದರ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಗಾಗಿ ನಮ್ಮ ಗುರಿಗಳು ಸಾಮಾನ್ಯವಲ್ಲ. ಕಳೆದ ವರ್ಷ ನಾನು ಸಿಲ್ವಾಸ್ಸಾಗೆ ಬಂದಾಗ, ನಾನು ನಿಮಗೆ ಸಿಂಗಾಪುರದ ಉದಾಹರಣೆಯನ್ನು ನೀಡಿದ್ದೇನೆ ಎಂದು ನನಗೆ ನೆನಪಿದೆ. ಒಂದು ಕಾಲದಲ್ಲಿ ಸಿಂಗಾಪುರವು ಒಂದು ಸಣ್ಣ ಮೀನುಗಾರಿಕಾ ಹಳ್ಳಿಯಾಗಿತ್ತು ಎಂದು ನಾನು ಹೇಳಿದ್ದೆ. ಆದರೆ ಸಿಂಗಾಪುರದ ಜನರು ಕನಸು ಕಂಡರು, ಅವರು ದೊಡ್ಡ ಗುರಿಗಳನ್ನು ಹೊಂದಿದ್ದರು ಮತ್ತು ಇಂದು ಅದೇ ಸಿಂಗಾಪುರವು ವಿಶ್ವದ ಅತಿದೊಡ್ಡ ವ್ಯಾಪಾರ ಕೇಂದ್ರವಾಗಿದೆ. ಇಂದು ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯು ಕೂಡ ಅದೇ ಕನಸನ್ನು ಕಾಣುತ್ತಿವೆ. ನಮೋ ವಿಮಾನ ನಿಲ್ದಾಣ, ದಮನಗಂಗಾ ನದಿಗೆ ಕಟ್ಟಲಿರುವ ಐಕಾನಿಕ್ ಸೇತುವೆ, 'ಬೀಚ್ ಫ್ರಂಟ್' ನಲ್ಲಿ ಕಟ್ಟಲಾಗುವ ಸಮಾವೇಶ ಕೇಂದ್ರದಂತಹ ಯೋಜನೆಗಳು, ಇಂತಹ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯಗಳ ಮೂಲಕ ನಾವು ಭವಿಷ್ಯಕ್ಕಾಗಿ ದೊಡ್ಡ ನಿರ್ಣಯಗಳಿಗೆ ಅಡಿಪಾಯ ಹಾಕುತ್ತಿದ್ದೇವೆ. ಈ ಯೋಜನೆಗಳ ಮೂಲಕ, ನಿಮ್ಮ ಚಲನೆ ಸುಲಭವಾಗುತ್ತದೆ. ಇಲ್ಲಿ ವ್ಯವಹಾರಕ್ಕೆ ಹೊಸ ಸಾಧ್ಯತೆಗಳು ಸೃಷ್ಟಿಯಾಗುತ್ತವೆ. ದಮನ್ ನ ಎರಡೂ ಬದಿಗಳಲ್ಲಿ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ವೇಗವು ಹೆಚ್ಚುತ್ತದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಲ್ಲಿ ಆತಿಥ್ಯ ಆರ್ಥಿಕತೆಗೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ಅವಕಾಶಗಳು ಹೆಚ್ಚಾಗುತ್ತವೆ ಮತ್ತು ಅದರೊಂದಿಗೆ, ಸಾರಿಗೆ ನಗರದಂತಹ ಸೌಲಭ್ಯಗಳು ವ್ಯಾಪಾರ ಮತ್ತು ಲಾಜಿಸ್ಟಿಕ್ಸ್‌ಗೆ ಹೊಸ ವೇಗವನ್ನು ನೀಡುತ್ತವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಈ ಪ್ರದೇಶದಲ್ಲಿ ನೀಲಿ ಆರ್ಥಿಕತೆಗಾಗಿ ನಾವು ಸಿದ್ಧಪಡಿಸಿರುವ ದೃಷ್ಟಿಕೋನವು ಹೈಟೆಕ್ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯದ ಬಲದ ಮೂಲಕ ಮಾತ್ರ ಸಾಕಾರಗೊಳ್ಳುತ್ತದೆ. ಅದಕ್ಕಾಗಿಯೇ ಇಂದು ಲಕ್ಷದ್ವೀಪದ ಕಲ್ಪೇನಿ ಮತ್ತು ಕಡ್ಮತ್ ದ್ವೀಪಗಳಲ್ಲಿ ಆಧುನಿಕ ಬಂದರುಗಳ ಅಡಿಪಾಯ ಹಾಕಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಈ ಎಲ್ಲಾ ಪ್ರಯತ್ನಗಳು ನೀಲಿ ಆರ್ಥಿಕತೆಯಲ್ಲಿ ದೇಶದ ಬಲವನ್ನು ಹೆಚ್ಚಿಸುತ್ತವೆ ಮತ್ತು ನಾನು ಹೇಳಿದಂತೆ, ಇವು ಲಕ್ಷದ್ವೀಪದ ಭವಿಷ್ಯವನ್ನು ಬದಲಾಯಿಸುವ ಉಪಕ್ರಮಗಳಾಗಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಬಿಜೆಪಿ ಸರ್ಕಾರದಲ್ಲಿ, ನಮ್ಮ ಎನ್‌ಡಿಎ ಸರ್ಕಾರದಲ್ಲಿ, ನಮಗೆ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ಮೊದಲ ಮಾನದಂಡವೆಂದರೆ - ಬಡವರು, ವಂಚಿತರು, ಬುಡಕಟ್ಟು ಜನಾಂಗದವರು ಮತ್ತು ಮಧ್ಯಮ ವರ್ಗದವರ ಜೀವನದಲ್ಲಿ ಬದಲಾವಣೆ! ಇದಕ್ಕಾಗಿ, ಆರೋಗ್ಯ ಕ್ಷೇತ್ರವು ನಮ್ಮ ದೊಡ್ಡ ಆದ್ಯತೆಯಾಗಿದೆ. ಕಳೆದ ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ, ದೇಶವು ಆರೋಗ್ಯ ರಕ್ಷಣೆಗಾಗಿ ಸಮಗ್ರ ದೃಷ್ಟಿಕೋನದೊಂದಿಗೆ ಮುಂದುವರೆದಿದೆ. ಚಿಕಿತ್ಸೆಗೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ಪ್ರತಿಯೊಂದು ಕಳವಳವನ್ನು ನಾವು ಪರಿಹರಿಸಿದ್ದೇವೆ. ಇಂದು ಬಡವರಿಗೂ ಸಹ ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಕಾರ್ಡ್ ಸೌಲಭ್ಯವಿದೆ. ಅವರಿಗೆ 5 ಲಕ್ಷ ರೂಪಾಯಿಗಳವರೆಗೆ ಉಚಿತ ಚಿಕಿತ್ಸೆಯ ಭರವಸೆ ಇದೆ. ರೋಗಗಳ ಸಕಾಲಿಕ ರೋಗನಿರ್ಣಯವನ್ನು ಖಚಿತಪಡಿಸಿಕೊಳ್ಳಲು, ಪ್ರಧಾನ ಮಂತ್ರಿ ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಆರೋಗ್ಯ ಮಂದಿರಗಳ ವ್ಯವಸ್ಥೆ ಇದೆ. ಜನೌಷಧಿ ಕೇಂದ್ರಗಳ ಮೂಲಕವೂ ಕೈಗೆಟುಕುವ ಔಷಧಿಗಳು ಲಭ್ಯವಿವೆ. ಈ ಸೌಲಭ್ಯಗಳನ್ನು ಇನ್ನಷ್ಟು ಉತ್ತಮ ಮತ್ತು ಆಧುನಿಕವಾಗಿಸಲು, ಇಂದು ಆರೋಗ್ಯ ಸೇವೆಗಳನ್ನು ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಭಾರತ್ ಡಿಜಿಟಲ್ ಮಿಷನ್ ಮೂಲಕ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನದೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕಿಸಲಾಗುತ್ತಿದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಕಾರ್ಡ್‌ಗಳು ಮತ್ತು ಜನೌಷಧಿ ಕೇಂದ್ರಗಳಿಂದಾಗಿ, ಬಡವರು ಮತ್ತು ಮಧ್ಯಮ ವರ್ಗದವರು ಸುಮಾರು 2.25 ಲಕ್ಷ ಕೋಟಿ ರೂಪಾಯಿಗಳನ್ನು ಖರ್ಚು ಮಾಡದಂತೆ ಉಳಿಸಿದ್ದಾರೆ.

ಸಹೋದರರೇ ಮತ್ತು  ಸಹೋದರಿಯರೇ,

ಕೇಂದ್ರ ಸರ್ಕಾರದ ನೀತಿಗಳು ಈ ಪ್ರದೇಶದ ಜನರಿಗೆ ಸಹ ಹೆಚ್ಚಿನ ಪ್ರಯೋಜನವನ್ನು ನೀಡಿವೆ. ಒಂದು ಕಾಲದಲ್ಲಿ, ಇಲ್ಲಿ ಉತ್ತಮ ಚಿಕಿತ್ಸಾ ಸೌಲಭ್ಯಗಳ ಕೊರತೆ ಇತ್ತು. ಇಲ್ಲಿ ವೈದ್ಯಕೀಯ ಕಾಲೇಜು ಕೂಡ ಇರಲಿಲ್ಲ. ಆದರೆ ಈಗ ವೈದ್ಯಕೀಯ ಕಾಲೇಜು ಇದೆ, ಮತ್ತು ಸ್ನಾತಕೋತ್ತರ ಅಧ್ಯಯನಗಳು ಸಹ ಪ್ರಾರಂಭವಾಗಿವೆ. ಸಿಲ್ವಾಸಾದ ನಮೋ ಆಸ್ಪತ್ರೆ ಕಳೆದ ವರ್ಷದಿಂದ ಸಾವಿರಾರು ಜನರಿಗೆ ಸೇವೆ ಸಲ್ಲಿಸುತ್ತಿದೆ. ಇಂದು, ದಮನ್‌ನಲ್ಲಿ ನಮೋ ಆಸ್ಪತ್ರೆಯನ್ನು ಸಹ ಉದ್ಘಾಟಿಸಲಾಗಿದೆ. ಈ ಪ್ರದೇಶದ ಜನರು ಈಗ ಇನ್ನೂ ಉತ್ತಮ ಆರೋಗ್ಯ ಸೇವೆಯ ಪ್ರಯೋಜನವನ್ನು ಪಡೆಯಲಿದ್ದಾರೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ನಮ್ಮ ಸರ್ಕಾರ ಆರೋಗ್ಯಕ್ಕೆ ಹೇಗೆ ಆದ್ಯತೆ ನೀಡುತ್ತಿದೆ ಎಂಬುದು ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಕುಟುಂಬ ಆರೋಗ್ಯ ಸಮೀಕ್ಷೆಯ ಫಲಿತಾಂಶಗಳಲ್ಲಿಯೂ ಸ್ಪಷ್ಟವಾಗಿದೆ. ಒಂದು ಕಾಲದಲ್ಲಿ, ಭಾರತದಲ್ಲಿ ಹೆಚ್ಚಿನ ಹೆರಿಗೆಗಳು ಆಸ್ಪತ್ರೆಗಳಲ್ಲಿ ನಡೆಯುತ್ತಿರಲಿಲ್ಲ. ಇಂದು, ದೇಶದಲ್ಲಿ ಶೇ. 90 ಕ್ಕಿಂತ ಹೆಚ್ಚು ಹೆರಿಗೆಗಳು ಆಸ್ಪತ್ರೆಗಳಲ್ಲಿ ನಡೆಯುತ್ತಿವೆ, ಇದು ತಾಯಂದಿರ ಮರಣ ಮತ್ತು ಶಿಶು ಮರಣವನ್ನು ಬಹಳ ಕಡಿಮೆ ಮಾಡಿದೆ. ಮಿಷನ್ ಇಂದ್ರಧನುಷ್ ಕಾರಣದಿಂದಾಗಿ, ಭಾರತವು ಮಕ್ಕಳ ಲಸಿಕೆ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿಯೂ ಉತ್ತಮ ಪ್ರಗತಿಯನ್ನು ಸಾಧಿಸಿದೆ. 2014 ಕ್ಕಿಂತ ಮೊದಲು, ಕೇವಲ ಶೇ. 60 ರಷ್ಟು ಮಕ್ಕಳಿಗೆ ಮಾತ್ರ ಸಂಪೂರ್ಣವಾಗಿ ಲಸಿಕೆ ನೀಡಲಾಗುತ್ತಿತ್ತು. ಇಂದು ಈ ಅಂಕಿ ಅಂಶವು ಸುಮಾರು ಶೇ. 90 ಕ್ಕೆ ಏರಿದೆ. ಆರೋಗ್ಯ ಭದ್ರತಾ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿಯೂ ದೊಡ್ಡ ಬದಲಾವಣೆಯಾಗಿದೆ. 2014 ಕ್ಕಿಂತ ಮೊದಲು, ಶೇ. 30 ಕ್ಕಿಂತ ಕಡಿಮೆ ಕುಟುಂಬಗಳು ಆರೋಗ್ಯ ವಿಮಾ ಯೋಜನೆಗಳೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕ ಹೊಂದಿದ್ದವು. ಇಂದು ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಭಾರತ್ ಆ ಅಂಕಿಅಂಶಗಳನ್ನು ಸಹ ಬದಲಾಯಿಸಿದೆ. ಈಗ ಶೇ. 60 ಕ್ಕೂ ಹೆಚ್ಚು ಕುಟುಂಬಗಳು ಈ ರಕ್ಷಣೆಯನ್ನು ಪಡೆಯುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಆರೋಗ್ಯ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ಸರ್ಕಾರದ ಈ ಪ್ರಯತ್ನಗಳಿಂದ ಯಾರಾದರೂ ಹೆಚ್ಚು ಪ್ರಯೋಜನ ಪಡೆದಿದ್ದರೆ, ಅದು ನನ್ನ ದೇಶದ ಮಹಿಳಾ ಶಕ್ತಿ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಹಿಂದೆ ಈ ಪ್ರದೇಶದ ಯುವಜನರು ಉನ್ನತ ಶಿಕ್ಷಣಕ್ಕಾಗಿ ಹೊರಗೆ ಹೋಗಬೇಕಾಗಿತ್ತು. ಆದರೆ ಇಂದು, ಒಂದಲ್ಲ, ಹಲವು ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಮಟ್ಟದ ಸಂಸ್ಥೆಗಳು ಇಲ್ಲಿ ಸ್ಥಾಪನೆಯಾಗಿವೆ. ಇತ್ತೀಚಿನ ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ, ಇಲ್ಲಿ ಹೊಸ ಶಾಲಾ ಕಟ್ಟಡಗಳನ್ನು ನಿರ್ಮಿಸಲಾಗಿದೆ, ಶಾಲೆಗಳಲ್ಲಿ ಸ್ಮಾರ್ಟ್ ತರಗತಿ ಕೊಠಡಿಗಳನ್ನು ಸಹ ನಿರ್ಮಿಸಲಾಗಿದೆ. 40 ಸಾವಿರಕ್ಕೂ ಹೆಚ್ಚು ವಿದ್ಯಾರ್ಥಿಗಳು ಅವುಗಳ ಪ್ರಯೋಜನ ಪಡೆಯುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶವು ಶಿಕ್ಷಣ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ಕ್ರಮೇಣ ಮುಂದುವರಿಯುತ್ತಿದೆ ಎಂದು ನನಗೆ ಸಂತೋಷವಾಗಿದೆ. ಸ್ವಾಮಿ ವಿವೇಕಾನಂದ ಶಿಕ್ಷಣ ಕೇಂದ್ರದಂತಹ ಅನೇಕ ನಿರ್ಮಾಣಗಳು ಇಲ್ಲಿ ನಡೆಯುತ್ತಿವೆ.

ಸಹೋದರರೇ ಮತ್ತು  ಸಹೋದರಿಯರೇ,

ಈ ಶಿಕ್ಷಣ ಕ್ರಾಂತಿಯಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಹೆಣ್ಣುಮಕ್ಕಳು ಹಿಂದುಳಿಯಬಾರದು ಎಂಬುದು ನಮ್ಮ ಸಂಕಲ್ಪ. ಇದಕ್ಕಾಗಿ ಅನೇಕ ದೊಡ್ಡ ಪ್ರಯತ್ನಗಳನ್ನು ಮಾಡಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಸರಸ್ವತಿ ಸೈಕಲ್ ಯೋಜನೆ ಮತ್ತು ಸರಸ್ವತಿ ವಿದ್ಯಾ ಯೋಜನೆಯಂತಹ ಯೋಜನೆಗಳು ಇಲ್ಲಿನ ಹೆಣ್ಣುಮಕ್ಕಳಿಗೆ ಸಾಕಷ್ಟು ಸಹಾಯ ಮಾಡುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಂದು ಭಾರತವು ದೇಶದ ಯುವಜನರು ಪದವಿಯ ಜೊತೆಗೆ ಸರಿಯಾದ ಸ್ಥಾನಮಾನಗಳನ್ನು ಪಡೆಯಬೇಕೆಂದು ಪ್ರಯತ್ನಿಸುತ್ತಿದೆ. ಸ್ಥಳೀಯ ಪ್ರತಿಭೆಗಳನ್ನು ಜಾಗತಿಕ ಅವಕಾಶಗಳೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕಿಸುವಂತಹ ಮಾನ್ಯತೆಯನ್ನು ಅವರು ಪಡೆಯಬೇಕು. ವಿನ್ಯಾಸ, ಕಾನೂನು, ಎಂಜಿನಿಯರಿಂಗ್, ವೈದ್ಯಕೀಯ ಶಿಕ್ಷಣ, ಐಟಿ, ಡ್ರೋನ್ ಮತ್ತು ನವೀಕರಿಸಬಹುದಾದ ಇಂಧನದಂತಹ ಕ್ಷೇತ್ರಗಳಲ್ಲಿ, ನಮ್ಮ ಪ್ರಸ್ತುತ ಸಿದ್ಧತೆಯು ಭಾರತದ ಕಾರ್ಯಪಡೆಯನ್ನು ಬಲಪಡಿಸುತ್ತದೆ. ಆದ್ದರಿಂದ, ವೃತ್ತಿಪರ ಸಂಸ್ಥೆಗಳ ವಿಸ್ತರಣೆ ಬಹಳ ಮುಖ್ಯವಾಗಿದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಂದು ಎನ್.ಐ.ಎಫ್.ಟಿ. (NIFT)  ಯ ಹದಿನೆಂಟನೇ ಕ್ಯಾಂಪಸ್‌ಗೆ ಅಡಿಪಾಯ ಹಾಕಲಾಗಿದೆ. ಈ ಸಂಸ್ಥೆಯು ಇಲ್ಲಿನ ಯುವಜನರನ್ನು ಜಾಗತಿಕ ಮಾನ್ಯತೆಯೊಂದಿಗೆ ಜೋಡಿಸುತ್ತದೆ. ಐಟಿಐ ದಮನ್‌ನಲ್ಲಿ ಡ್ರೋನ್ ತಂತ್ರಜ್ಞರಂತಹ ಹೊಸ ಕೋರ್ಸ್‌ಗಳು ಸಹ ಪ್ರಾರಂಭವಾಗಿವೆ. ಪಿಎಂ ವಿಶ್ವಕರ್ಮ ಮತ್ತು ಪಿಎಂ ಸೂರ್ಯ ಘರ್ ಉಚಿತ ವಿದ್ಯುತ್ ಯೋಜನೆಗೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ತರಬೇತಿ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮಗಳು ಸಹ ಯುವಜನರಿಗೆ ಪ್ರಯೋಜನವನ್ನು ನೀಡುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ದೇಶದಲ್ಲಿ ಕ್ರೀಡೆಗಳು ಹೊಸ ಚಿಂತನೆಯೊಂದಿಗೆ ಮುಂದುವರೆದಿವೆ. ನಮ್ಮ ಕ್ರೀಡೆಗಳು ಇನ್ನು ಮುಂದೆ ದೊಡ್ಡ ನಗರಗಳು ಅಥವಾ ದೊಡ್ಡ ಕ್ರೀಡಾಂಗಣಗಳಿಗೆ ಸೀಮಿತವಾಗಿರಲಾರವು. ಖೇಲೋ ಇಂಡಿಯಾದಂತಹ ಪ್ರಯತ್ನಗಳು ಯುವಜನರಿಗೆ ತಮ್ಮ ಪ್ರತಿಭೆಯನ್ನು ಪ್ರದರ್ಶಿಸಲು ಹೊಸ ವೇದಿಕೆಯನ್ನು ನೀಡಿವೆ. ಈ ಕಾರಣದಿಂದಾಗಿ ಕ್ರೀಡಾ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ, ಸಣ್ಣ ಪ್ರದೇಶಗಳ ಮಕ್ಕಳು ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಮಟ್ಟದಲ್ಲಿ ಮುಂದೆ ಬರುತ್ತಿದ್ದಾರೆ ಮತ್ತು ಈ ಪ್ರದೇಶವು ಸಹ ಅದರಿಂದ ಪ್ರಯೋಜನ ಪಡೆದಿದೆ. ಡಿಯು ಇಂದು ಬೀಚ್ ಕ್ರೀಡೆಗಳ ದೊಡ್ಡ ಕೇಂದ್ರವಾಗಿ ಹೊರಹೊಮ್ಮಿದೆ. ಘೋಘ್ಲಾ ಬೀಚ್‌ನಲ್ಲಿ ನಡೆದ ಬೀಚ್ ಕ್ರೀಡಾಕೂಟವು ಈ ಪ್ರದೇಶದತ್ತ ದೇಶದ ಗಮನವನ್ನು ಸೆಳೆದಿದೆ. ಇಂದು ಇಲ್ಲಿ ಆಧುನಿಕ ಕ್ರೀಡಾ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯವನ್ನು ನಿರಂತರವಾಗಿ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಪಡಿಸಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಖಾನ್ವೆಲ್‌ನಲ್ಲಿರುವ ಫುಟ್‌ಬಾಲ್ ಕೇಂದ್ರ ಮತ್ತು ದಮನ್‌ನಲ್ಲಿರುವ ವಾಲಿಬಾಲ್ ತರಬೇತಿ ಕೇಂದ್ರವು ಇಲ್ಲಿನ ಕ್ರೀಡಾ ಸಂಸ್ಕೃತಿಯನ್ನು ಬಲಪಡಿಸುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಂದು ದೇಶದ ಆದ್ಯ ಗಮನ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮದ ಮೇಲೂ ಇದೆ. ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮವು ಸ್ಥಳೀಯ ಕಲೆ ಮತ್ತು ಸಂಸ್ಕೃತಿಯನ್ನು ಉತ್ತೇಜಿಸಬೇಕು ಎಂಬುದು ನಮ್ಮ ಪ್ರಯತ್ನ. ಸಣ್ಣ ಸ್ಥಳಗಳನ್ನು ಸಹ ದೊಡ್ಡ ಅವಕಾಶಗಳೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕಿಸಬೇಕು. 'ದೇಖೋ ಅಪ್ನಾ ದೇಶ್' ನಂತಹ ಪ್ರಯತ್ನಗಳು ದೇಶದ ವೈವಿಧ್ಯತೆಯ ಬಗ್ಗೆ ತಿಳಿದುಕೊಳ್ಳಲು ಜನರನ್ನು ಪ್ರೇರೇಪಿಸಿವೆ. ಇಂದು ಭಾರತದಲ್ಲಿ ಪರಂಪರೆ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮ, ಬೀಚ್ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮ, ಪರಿಸರ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮ, ಸಾಹಸ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮಗಳು ಹೊಸ ಶಕ್ತಿಯನ್ನು ಪಡೆಯುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯುಗಳಲ್ಲಿ, ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮವು ಅಪಾರ ಸಾಧ್ಯತೆಗಳನ್ನು ಹೊಂದಿರುವ ವಲಯವಾಗಿದೆ. ಈ ಪ್ರದೇಶವು ನೈಸರ್ಗಿಕ ಸೌಂದರ್ಯದಿಂದ ಆಶೀರ್ವದಿಸಲ್ಪಟ್ಟಿದೆ. ಅದಕ್ಕಾಗಿಯೇ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮಕ್ಕೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದಂತೆ ದೇಶವು ಕೆಲಸ ಮಾಡಿದ ನೀತಿಗಳು ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯುಗೆ ಹೆಚ್ಚಿನ ಪ್ರಯೋಜನವನ್ನು ನೀಡಿವೆ. 2021 ರಲ್ಲಿ, ಸುಮಾರು 6 ಲಕ್ಷ ಪ್ರವಾಸಿಗರು ಇಲ್ಲಿಗೆ ಬಂದರು. 2025 ರಲ್ಲಿ, ಈ ಸಂಖ್ಯೆ ಸುಮಾರು 50 ಲಕ್ಷಕ್ಕೆ ಏರಿತು. ಅಂದರೆ ಕೆಲವೇ ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ, ಪ್ರವಾಸಿಗಳ  ಸಂಖ್ಯೆ ಸುಮಾರು ಹತ್ತು ಪಟ್ಟು ಹೆಚ್ಚಾಗಿದೆ. ಉತ್ತಮ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯ, ಉತ್ತಮ ಸೌಲಭ್ಯಗಳು ಮತ್ತು ಸ್ವಚ್ಛ ಕಡಲತೀರಗಳಿಂದಾಗಿ ಇದು ಸಾಧ್ಯವಾಗಿದೆ. ದಮನ್ ರಾತ್ರಿ ಮಾರುಕಟ್ಟೆ, ರಾಮಸೇತು ಸಮುದ್ರ ಮುಂಭಾಗ, ನಮೋಪಥ ಸಮುದ್ರ ಮುಂಭಾಗ, ನಾನಿ ದಮನ್ ಕೋಟೆ, ಗಂಗೇಶ್ವರ ದೇವಾಲಯ ಸಂಕೀರ್ಣ, ಇಂತಹ ಹಲವಾರು ಸ್ಥಳಗಳು ಇಂದು ಈ ಇಡೀ ಪ್ರದೇಶದ ಹೊಸ ಗುರುತಾಗುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯುಗಳ ಕನಸುಗಳನ್ನು ನನಸಾಗಿಸಲು, ನಾವು ಇಲ್ಲಿ ಕೈಗಾರಿಕಾ ಬಲವನ್ನು ಹೆಚ್ಚಿಸಬೇಕಾಗಿದೆ. ಈ ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶವು ಮಾನವ ನಿರ್ಮಿತ ಫೈಬರ್ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ತನ್ನ ವಿಶಿಷ್ಟ ಗುರುತನ್ನು ಸಾಧಿಸಿದೆ ಎಂಬುದು ಹೆಮ್ಮೆಯ ವಿಷಯ. ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿಯನ್ನು ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಮಾನವ ನಿರ್ಮಿತ ಫೈಬರ್ ರಾಜಧಾನಿ ಎಂದು ಗುರುತಿಸಲಾಗಿದೆ. ಈ ಪ್ರದೇಶವು ಪ್ಲಾಸ್ಟಿಕ್ ರಫ್ತಿನಲ್ಲಿ ನಿರಂತರವಾಗಿ ಪ್ರಗತಿ ಸಾಧಿಸುತ್ತಿದೆ. ಇಲ್ಲಿನ ಕೈಗಾರಿಕೆಗಳು ಮತ್ತು ಎಂ.ಎಸ್.ಎಂ.ಇ. ( MSME)  ಗಳನ್ನು ಬೆಂಬಲಿಸಲು ಸರ್ಕಾರ ನಿರಂತರ ಪ್ರಯತ್ನಗಳನ್ನು ಮಾಡಿದೆ. ಇಲ್ಲಿನ ಎಂ.ಎಸ್.ಎಂ.ಇ. ಗಳು ಮತ್ತು ಇತರ ಕೈಗಾರಿಕೆಗಳಿಗೆ ಕೋಟ್ಯಂತರ ರೂಪಾಯಿಗಳಿಗಿಂತ ಹೆಚ್ಚಿನ ಆರ್ಥಿಕ ನೆರವು ನೀಡಲಾಗಿದೆ. ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶದ ಸಣ್ಣ ಮತ್ತು ಗುಡಿ ಕೈಗಾರಿಕೆಗಳಿಗೆ ಹೊಸ ಅವಕಾಶಗಳು ತೆರೆದುಕೊಳ್ಳುತ್ತಿವೆ. ಮುಂಬರುವ ದಿನಗಳಲ್ಲಿ ಈ ಪ್ರದೇಶವು ಉತ್ಪಾದನಾ ಕೇಂದ್ರವಾಗಲಿದೆ ಎಂದು ನನಗೆ ವಿಶ್ವಾಸವಿದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಸೂಕ್ಷ್ಮ ಆಡಳಿತವು ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ದೃಷ್ಟಿಕೋನದೊಂದಿಗೆ ಸಂಯೋಜಿಸಲ್ಪಟ್ಟಾಗ, ರೂಪಾಂತರವು ವೇಗವಾಗಿ ವಾಸ್ತವವಾಗಿ ರೂಪುಗೊಳ್ಳುತ್ತದೆ. ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯುಗಳಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಪ್ರಯತ್ನಗಳ ಪರಿಣಾಮವನ್ನು ನೋಡಿದಾಗ ತೃಪ್ತಿ ಸಿಗುತ್ತದೆ. ಈ ನೆಲದ ಜನರ ಮೇಲೆ ನನಗೆ ಸಂಪೂರ್ಣ ನಂಬಿಕೆ ಇದೆ. ಇಲ್ಲಿನ ಯುವಜನರು, ಇಲ್ಲಿನ ತಾಯಂದಿರು ಮತ್ತು ಸಹೋದರಿಯರು, ರೈತರು, ಕುಶಲಕರ್ಮಿಗಳು, ಕಾರ್ಮಿಕರು ಮತ್ತು ಉದ್ಯಮಿಗಳು ಮುಂಬರುವ ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ ಈ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಪ್ರಯಾಣವನ್ನು ಮತ್ತಷ್ಟು ಮುಂದೆ ಕೊಂಡೊಯ್ಯುತ್ತಾರೆ. ನಿಮ್ಮ ಕನಸುಗಳನ್ನು ನನಸಾಗಿಸಲು ಕೇಂದ್ರ ಸರ್ಕಾರವು ನಿಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಹೆಗಲಿಗೆ ಹೆಗಲು ಕೊಟ್ಟು ನಿಲ್ಲುತ್ತದೆ ಎಂದು ನಾನು ನಿಮಗೆ ಭರವಸೆ ನೀಡುತ್ತೇನೆ. ಈ ನಂಬಿಕೆಯೊಂದಿಗೆ, ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಯೋಜನೆಗಳಿಗಾಗಿ ನಾನು ಮತ್ತೊಮ್ಮೆ ನಿಮಗೆ ಅನೇಕ ಅಭಿನಂದನೆಗಳನ್ನು ಸಲ್ಲಿಸುತ್ತೇನೆ. ನನ್ನೊಂದಿಗೆ ಹೇಳಿ, ಭಾರತ್ ಮಾತಾ ಕಿ ಜೈ! ಭಾರತ್ ಮಾತಾ ಕಿ ಜೈ! ಭಾರತ್ ಮಾತಾ ಕಿ ಜೈ!

ತುಂಬಾ ಧನ್ಯವಾದಗಳು.