विशाल संख्या में आए हुए गोवाहाटी के प्यारे भाईयों और बहनों!

रेलवे के इतिहास में आज एक महत्वपूर्ण अवसर है। भारत का एक राज्य आज एक रेल connectivity से जुड़ रहा है। वो अपने आप में, मेघालय का आज Mendipathar से Guwahati तक का रेल रूट प्रारंभ हो रहा है। उसी के साथ-साथ आज रेलवे का एक और भी कार्यक्रम है - Bhairabi से लेकर Sairang - मिजोरम के लिए, रेल की नई योजना के लिए शिलान्यास का भी अवसर है। ये दोनों प्रोजेक्ट - एक रेल प्रारंभ हो रही है और दूसरा रेलवे के लिए शिलान्यास हो रहा है।

हम लोग, जो वास्तुशास्त्र में विश्वास करते हैं - मैं तो उसके विषय में कुछ ज्यादा जानता नहीं हूं - लेकिन मैंने ऐसा सुना है, कहते हैं कि वास्तुशास्त्र वाले, आपके घर में, कहते हैं कि घर का जो ईशान कोना होता है। ईशान कोने को ठीक ठाक रखो, साफ-सुथरा रखो। अगर एक बार ईशान कोना ठीक रखा, उसकी पवित्रता को संभाला तो घर के अंदर वास्तुशास्त्र की दृश्टि से हमेशा मंगलमय माहौल रहेगा। अब मैं नहीं जानता हूं कि ये सच कितना है, झूठ कितना है। लेकिन मैं इतना जानता हूं कि भारत के इस ईशान कोने को, हमारे North-East को

अगर हम अच्छी तरह से संभाल लें तो पूरा हिंदूस्तान आगे बढ़ जाएगा।

इसलिए, अगर भारत का मंगल करना है, तो हमारे इस ईशान इलाके का भी, North-East part का भी तेज़ गति से भला करना होगा, विकास करना होगा। विकास के अंदर सबसे पहली बात होती है- infrastructure. जो लंबी दूरी की सोच के साथ भव्य सपनों को लेकर जो चलता है, वो विकास की शुरूआत infrastructure से करता है। एक बार infrastructure बन गया तो बाकी चीज़ें जनता अपने आप कर लेती है।

आप में से कई लोग हैं जिन्होंने South Korea का नाम सुना होगा। वो बड़ा प्रदेश नहीं है। वो देश पांच-छः करोड़ की आबादी वाला है। समुद्र के किनारे पर है। बहुत गरीब देश था, बहुत गरीब! यानी हम हिंदुस्तान में जो गरीबी की चर्चा करते हैं, उस से भी ज्यादा गरीब देश था। लेकिन, वहां के एक शासक थे, उनके मन में विचार आया कि कोरिया के बीचोंबीच एक बहुत बड़ा - समृद्ध देशों में होता है - ऐसा हाईवे बना दें, बहुत बड़ा चौड़ा रोड बना दें। पूरे कोरिया में तूफान मच गया- “लोगों को खाना नहीं है, बच्चों को शिक्षा नहीं है, रहने को घर नहीं है और ये कैसा शासक है! इतना बड़ा रोड बनाने जा रहा है, अरबों, खरबों रूपया खर्च कर रहा है!”

लेकिन, वो अपने इरादों को पक्के थे। चारों तरफ उनकी आलोचना हो रही थी, लेकिन उन्होंने उस रोड को बनाया। आलोचना सहते हुए बनाया। लेकिन, उस एक रोड ने पूरे South Korea की ज़िदंगी को बदल दिया।

आज से कई वर्ष पहले, हम इतना बड़ा देश हैं, अभी तीन-चार साल पहले Commonwealth की games का कार्यक्रम हम करना चाहते थे। और दिल्ली का क्या हाल हुआ था, कितनी बदनामी मिली थी, ये सारा देश और दुनिया जानती है। लेकिन South Korea ने आज से करीब 12-15 साल पहले ओलंपिक को host किया था और पूरे विश्व के लोगों को निमंत्रित किया था। इतना वो देश आगे बढ़ गया। गरीबी का नामोनिशान मिटा दिया। एक रास्ता!

कभी-कभी अमेरिका के राष्ट्रपति केनेडी कहा करते थे कि “संपत्ति नहीं है, जिससे रास्ते बनते हैं, ये रास्ते हैं जिससे संपत्ति बनती है”। विकास की अवधारणा में infrastructure एक सबसे बडी प्राथमिकता होती है। अगर हमें North-East का विकास करना है, North-East को भारत की विकास यात्रा में भागीदार बनाना है तो ये हमारा जो अष्टलक्ष्मी का इलाका है, हमारे जो आठ राज्य, अष्टलक्ष्मी! ये सच्चे अर्थ में भारत की लक्ष्मी बनने की ताकत रखते हैं।

ये अष्टलक्ष्मी, इनको अगर भारत के infrastructure से जोड़ दिया जाए - जिसमें रोड हो, रेल हो, हर प्रकार की connectivity हो। अगर connectivity में हम सफल हुए - और मैं विश्वास करता हूं कि होने वाले हैं - पूरा हिंदुस्तान, आज जो टूरिज्म के लिए, इधर-उधर बेचारा जो जगह खोजता रहता है, जो upper middle class देश में पैदा हुई है, बहुत बड़ी तादात में है, उसको साल में एक बार, दो बार परिवार के साथ कहीं बाहर जाना होता है। अगर अच्छी connectivity North-East को मिल जाए, मैं विश्वास से कहता हूं- यहां का जो प्राकृतिक सौंदर्य है, हरे भरे जंगल हैं, प्यारे लोग हैं, सारा हिंदुस्तान उमड़ पड़ेगा, सारा हिंदुस्तान!

और इसी सोच के कारण जब हमारी सरकार बनी - अभी तो नई नई सरकार है - हमारी, बजट बनाना था, पहले ही बजट में, इस क्षेत्र में, हमारे North-East के राज्यों को रेलवे से जोड़ने के लिए 28 हजार करोड़ रूपया तय कर लिया। क्योंकि मुझे मालूम है कि एक बार अगर ये व्यवस्था बन गई, ये पूरा क्षेत्र विकास की नई ऊंचाईयों को अपने आप पार कर लेगा। उसी प्रकार, पूरे विश्व में जो विकास का चित्र बन रहा है, सारी दूनिया मानती है कि ये शताब्दी, एशिया की शताब्दी है। और अगर ये शताब्दी एशिया की शताब्दी है तो हमने कोई तैयारी की है क्या? हम Look East policy की बात करते रहे। अब हमने तय किय है अगर एशिया की शताब्दी है और हमें सचमुच में उस परिस्थिति का फायदा उठाना है, आगे बढ़ना है तो भारत ने look east policy को आगे बढ़ाना पड़ेगा, Look East नहीं, Look Act (Act East)! Act करना होगा हमने। Look East policy से Act East policy की ओर हम आगे बढ़ रहे हैं। और हमारी कोशिश ये है कि North-East, रेल से, रोड से म्यांमार से जुड़े, एशिया के और देशों से जुड़े। आप कल्पना कर सकते हैं कि ये भूभाग व्यापार का कितना बड़ा केंद्र बन जाएगा! विकास की कितनी बड़ी अवधारणा पैदा होगी! और फिर North-East के नौजवानों को रोजी रोटी के लिए North-East छोड़ करके - ऑक्सीजन से भरा हुआ इलाका, चारों तरफ हरियाली, पानी ही पानी - ये सब छोड़ करके शहरों में जा करके ज़िदंगी गुज़ारनी नहीं पड़ेगी।

अब वक्त बदल चुका है। अब infrastructure की भी next-generation की सोच को ले करके आगे बढ़ना पड़ेगा। पिछली शताब्दी में रेल, रोड, पोर्ट, एयर पोर्ट - ये काम हो जाता था तो लोग मानते थे कि बस बढ़िया हो गया। अब जगत बदल गया है। अब high ways भी चाहिए, i-ways भी चाहिए। Information ways, i-ways. Digital divide नहीं होना चाहिए।

Digital India का सपना North-East को भी जोड़ने वाला होना चाहिए। i-ways का नेटवर्क हो, connectivity हो। दिल्ली में बैठ करके, मोबाईल फोन पर बैठ करके जो कर सकता है, वो North-East की दुर्गम पहाड़ी पर रहने वाला भी कर पाए, इतनी व्यवस्था मिलनी चाहिए।

दूनिया बदल रही है। गैस ग्रीड क्यों न हो? पीने के पानी की लाइन क्यों न हो? बिजली चैबीस घंटे क्यों न मिले? Optical fiber network क्यों न हो? नए युग के जीवन को ध्यान में रखते हुए infrastructure की ओर आगे बढ़ना है। मेरा विश्वास है कि आधुनिक भारत बनाने के लिए infrastructure के next generation की जो कल्पना है, उसे हमें तेज गति से आगे बढ़ाना है, उसको साकार करना है। अगर एक बार, North-East में भी optical fiber network बराबर लग गया, connectivity बराबर हो गई - यहां के बच्चों की अंग्रेज़ी में पढ़ाई होती है, नोर्थ ईस्ट में - फिर ये जो दूनिया में, बैंगलोर में, हैदराबाद में कंप्यूटर पर बैठ करके job work करते हैं, उनको बैंगलोर, हैदराबाद नहीं जाना पड़ेगा, वो गांव में अपने घर में बैठ कर पाएगा। Call center के लिए दिल्ली, मुंबई में काम करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, वो North-East के कोने में भी हो सकता है। बदल सकती है दूनिया! बदली जा सकती है! इसलिए North-East के विकास की तरफ मैं ज़रा विशेष रूचि ले रहा हूं।

अभी कुछ दिन पहले मैं म्यांमार गया था। वहां के राष्ट्र के मुखियाओं के साथ भी, हमारी connectivity कैसे बढ़े, व्यापार कैसे बढ़े, इस क्षेत्र के हमारे नौजवानों की शक्ति कैसे काम आए, उस पर मैंने बल दिया है और इसलिए भाईयों बहनों! ये रेलवे का जुड़ना, ये केवल पैसेंजरों के आवागमन का विशय नहीं होता है। रेलवे हमें जोड़ती भी है, रेलवे हमें गति भी देती है, रेलवे हमें एक सामर्थ्य भी देती है। भारत के अंदर रेलवे जैसी व्यवस्था, वो हमारे हिंदुस्तान की आर्थिक गतिविधि की रीढ़ बनने की ताकत रखती है। लेकिन, दुर्भाग्य से आर्थिक विकास की एक उर्जा के रूप में रेलवे को देखने के बजाए हमने रेलवे को उस रूप में ला दिया - Parliament में भी जब रेलवे के बजट की चर्चा होती है, पूरे बजट की चर्चा पर किसी का ध्यान नहीं होता है, न देश में भी किसी का होता है।

लेकिन जैसे ही रेल मंत्री बोलना शुरू करते हैं कि फलानी ट्रेन में एक डिब्बा बढ़ा दिया जाएगा, चारों तरफ तालियों की गूंज शुरू हो जाती है। ‘वहां पर एक ट्रेन लंबी कर दी जाएगी’, तालियां बज जाती हैं। कहीं कह दिया जाता है कि इस स्टेशन को अपग्रेड कर दिया जाएगा, तालियां बज जाती हैं।

यानी रेलवे को ऐसे टुकड़ों में बांट दिया गया है। एक डिब्बा बढ़ जाए, बस काम हो गया। एक रूट चालू हो जाए, काम हो गया। हमने तय किया है कि इन छोटी, छोटी, छोटी चीज़ों से रेलवे की तालियां बज रही हैं, हम वहीं संतोष मानने वाले नहीं हैं। हम रेलवे का विस्तार भी बढ़ाना चाहते हैं और उसका आधुनिकरण भी करना चाहते हैं। रेलवे का horizontal विकास भी हो, vertical विकास भी हो। Horizontal विकास का मेरा मतलब है- हिंदुस्तान में कोने कोने जहां रेलवे पहुंचा सकते हैं, रेलवे पहुंचाए। और vertical का मेरा मतलब है- हमारी सेवाओं को अपग्रेड करें, technology को upgrade करें, स्पीड को बढ़ाएं, समय बचाएं, सुविधाएं बढ़ाएं और सच्चे अर्थ में राष्ट्र के अर्थतंत्र को गति देने वाला, सच्चे अर्थ में रेलवे एक इंजिन बन जाए, उस रूप में रेलवे को ले जाना है।

मुझे विश्वास है कि हमारे नए रेल मंत्री सुरेश प्रभु जी के नेतृत्व में हिंदुस्तान में पिछले सौ साल में जिस गति से रेल आगे बढ़ी है, उस से अनेक गुना ज्यादा गति से रेल का पूरा तंत्र आगे बढ़ेगा, ये मेरा विश्वास है। पहली बार भारत में हमने एक निर्णय किया है। 100 प्रतिशत फोरेन foreign direct investment. सौ प्रतिशत रेलवे के अंदर विदेशी पूंजी का निवेष। लोग आएंगे, धन लगाएंगे, आधुकनिक रेल बनेगी, आधुनिक पटरी बनेगी, आधुनिक सिग्नल सिस्टम आएगा, आधुनिक तरीके से टिकट दिया जाएगा। पूरी रेलवे की व्यवस्था को आधुनिक बयार बनाया जा सकता है।

सवा सौ करोड़ का देश, कभी न कभी तो हर व्यक्ति पैसेंजर हुआ करता है, हर यात्री नागरिक भी हुआ करता है। कोई साल में एक बार सफर करता है, तो कोई दिन में एक बार सफर करता होगा लेकिन सफर हर कोई करता है। इतना बड़ा मार्केट, Commercial Market जहां हो, और आज रेलवे environment friendly होती है, eco friendly होती है। Mass Transportation - Global Warming के खिलाफ जो लड़ाई चल रही है, उसमें हमारा एक contribution हो सकता है।

अनेक ऐसे पहलू हैं, जिन पहलुओं को ले करके, रेलवे के माध्यम से हम एक पूरी नई व्यवस्था विकसित करना चाहते हैं। उसी प्रकार से, रेलवे का पूरा काम, एक प्रकार से expertise चाहिए, dedicated technology चाहिए, Technology upgradation चाहिए। और उसके लिए लोग चाहिएं। आज रेलवे की हालत ऐसी है कि रेवले का advertisement आता है, तो लोग अर्जी करते हैं, हमें रेलवे में नौकरी चाहिए। लोग अर्जी करते हैं, फिर रेलवे वाले इंटरव्यू करते हैं और जिसका नंबर लग गया, लग गया। फिर रेलवे वाले उसको सिखाते हैं, कैसे काम करना है।

हमने नया रूप सोचा है और मेरे नौजवान मित्रों को बहुत पसंद आएगा। हमने कहा है पूरे देश में, चार अलग अलग कोने में, अलग रेलवे की universities बनेंगी। उसमें सारे विशय पढ़ाए जाएंगे, उसके साथ रेलवे संबंधी अध्ययन होगा उसमें ताकि वहां से पढ़कर जो नौजवान निकलेगा, वो तुरंत रेलवे में काम आएगा। रेलवे का भी लाभ होगा, उस नौजवान का भी लाभ होगा।

Human resource development के साथ technology upgradation, व्यवस्था के साथ गति में सुधार, सुविधा के साथ सेवा की गुणवत्ता में परिवर्तन। मुझे बताइए, आज हमारे जो रेलवे स्टेशन हैं, बड़े बड़े शहरों के बीचों बीच बड़े बड़े रेलवे स्टेशन हैं। मीलों तक बड़े शहर के अंदर रेलवे चल रही है और आज ज़मीन इतनी मंहगी हो गई है। और हमारे रेलवे स्टेषन सौ साल पहले जैसे थे, वैसे ही हैं। कुर्सी वैसी ही, बैठने बैंच ऐसी ही, पैसेंजर जाएगा तो स्थिति ऐसी ही। ये बदला जा सकता है कि नहीं बदला जा सकता? हमने कहा है कि रेलवे स्टेशनों को प्राइवेटाइज़ करो। नीचे ट्रेन चलती रहे, ऊपर फाइव स्टार, सेवन स्टार हॉटल बना दो। मोटल बना लो। मॉल बना दो। ट्रेन चलती रहेगी, ट्रेन के ऊपर आसमान पूरा खुला पड़ा है, उसमें से इनकम करो और रेलवे को अच्छी करो, ऐसा मैंने उनको समझाया है।

अभी रेलवे ने निर्णय भी कर लिया है - कुछ रेलवे स्टेशनों को आधुनिक बनाने वाले हैं। एयरपोर्ट से रेलवे स्टेशन अच्छा होना चाहिए मेरा मत है - क्योंकि रेलवे स्टेशन पर गरीब से गरीब इंसान जाता है। सामान्य मानव भी जाता है, मजदूर भी जाएगा तो बेचारा रेल से जाएगा। एयरपोर्ट पर अच्छी सुविधा हो, रेलवे पर क्यों न हो? इसलिए पूरे रेलवे स्टेशन की व्यवस्थाएं बदलनी हैं। देखते ही देखते आप देखिए, कुछ मॉडल रूप तो दस-बारह जगह पर मैं करवा दूंगा। और एक बार हो गया तो फिर तो सारे हिंदुस्तान में होने में देर नहीं लगेगी, फिर चल पड़ेगी गाड़ी।

भाईयों, बहनों! रेलवे में अमूल चूल परिवर्तन लाना है। विश्व का पूरा अच्छे से अच्छा काम है, उसमें से जो नईं चीज़ें ला सकते हैं हमें लानी हैं। और North-East को रेल connectivity से जोड़ करके। North-East! ये अष्टलक्ष्मी का प्रदेश! भारत की लक्ष्मी बन जाए, भारत का सबसे धनी प्रदेश बन जाए, उस दिशा में हम काम करना चाहते हैं। आप सबके बीच आने का मुझे अवसर मिला। मैं रेलवे के अधिकारियों को शुभकामनाएं देता हूं, बधाई देता हूं। रेवले विभाग को, मंत्री श्री को बधाई देता हूं कि वे इस काम को संपन्न कर रहे हैं आगे की योजनाओं को तेज़ गति से आगे बढ़ा रहे हैं। मैं मेघालय, मिजोरम की जनता को भी बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूं। उनके मुख्यमंत्री श्री और गर्वनर श्री का हृदय से अभिनंदन करता हूं कि हम सब मिल करके राष्ट्र को नई ऊंचाईयों पर ले जाने के प्रयास में हमारे देश का कोई कोना भी पीछे न रह जाए, उसके लिए विकास की वो अवधारणा को लेकर आगे चलें, विकास वो हो जो सर्वस्पर्शी हो, सार्वदेशिक हो, सर्वपोषक हो, सर्वपूरक हो। ऐसे विकास को आगे बढ़ाने में, सबके योगदान के लिए मैं आभार व्यक्त करता हूं। श्रीमान तरूण जी का आभार व्यक्त करता हूं। बहुत बहुत धन्यवाद।

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ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में युवाओं के साथ मजबूती से खड़ी है सरकार: पीएम मोदी
August 02, 2026
मैं प्रत्येक नागरिक, विशेषकर हमारे युवाओं से, इस आंदोलन में शामिल होने का आग्रह करता हूं: प्रधानमंत्री
आज जब देश ने 'विकसित भारत' का लक्ष्य तय किया है, तो यह बहुत जरूरी है कि देश के युवा फिट रहें, उनमें भरपूर आत्मविश्वास हो और वे नशीले पदार्थों से हमेशा दूर रहें: पीएम मोदी
हमें हर युवा को नशे के जाल में फंसने से बचाना होगा: प्रधानमंत्री
समाज का सहयोग, योग और ध्यान हमें नशे की लत से लड़ने के लिए अंदर से मजबूत बनाते हैं और आज नशा-मुक्ति केंद्र जैसी सुविधाएँ भी लत छोड़ने में मदद करती हैं: पीएम मोदी
यदि कोई युवा अनजाने में नशे के जाल में फंस भी गया है, तो इसका बिल्कुल भी यह अर्थ नहीं है कि उसके लिए सभी दरवाजे बंद हो गए हैं: प्रधानमंत्री
हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि अगर घर का कोई बच्चा नशे की लत का शिकार हो जाता है, तो हमें इसे छिपाना नहीं चाहिए, बल्कि उसे लत से मुक्त कराने के लिए डॉक्टरी मदद लेनी चाहिए: पीएम मोदी
हमें परिवार में बच्चों के साथ खुलकर संवाद करने की संस्कृति भी विकसित करनी चाहिए, ताकि आप उन्हें इस तरह के दुष्चक्र में फंसने से पहले ही सहारा दे सकें: प्रधानमंत्री
मैं अपने प्रोफेसरों से अपील करता हूँ कि वे अपने छात्रों के साथ नशीले पदार्थों के सेवन के खतरों पर चर्चा करें और अच्छे नतीजे पाने के लिए कैंपस में नशे के खिलाफ एक अभियान चलाएँ: पीएम मोदी


नमस्‍कार!

आज हम सभी देशवासी एक महान और महत्वपूर्ण संकल्प के लिए एकजुट हुए हैं। इस संकल्प को लेकर, इसक कार्यक्रम से जुड़े सभी पूज्य संतजन, अलग-अलग राज्यों का प्रतिनिधित्व कर रहे सभी राज्यपाल, सभी मुख्यमंत्री, अन्‍य सभी जनप्रतिनिधिगण, 28 हजार से अधिक स्थानों से जुड़े एक करोड़ से युवा साथी, मैं आज इस शुभ घड़ी पर, शुभ संकल्प के लिए करोड़ों-करोड़ों नौजवानों का विशेष रूप से अभिनंदन करता हूं। आज हम सभी जिस अभियान के साक्षी बन रहे हैं, वह अभियान व्यक्ति के लिए हैं, परिवार के लिए हैं, समाज के लिए भी है और सबसे बड़ी बात है, यह राष्‍ट्र के लिए है।

साथियों,

विकसित भारत संकल्प अभियान के लिए ‘नशा मुक्त युवा’ इस मूवमेंट का नाम ही इसके संकल्प को स्पष्ट करता है, क्योंकि आज जब देश ने विकसित भारत का लक्ष्य तय किया है, तो इसके लिए आवश्यक है, देश का युवा तन से स्वस्थ हो, मन से स्वस्थ हो, आत्‍मविश्‍वास से भरपूर हो और ड्रग्स जैसी घातक आदत से हमेशा-हमेशा दूर ही रहे, दूर हो। यही इस अभियान का उद्देश्य है। इसलिए हम सबको यह संकल्प लेना है, हमारे युवा नशे और ड्रग्स के खतरों को समझे, हर तरह से जागरूक रहे और उससे दूर रहें और इस संकल्प में अब ‘राष्‍ट्रीय नशा मुक्त युवा’ अभियान की बड़ी भूमिका है।

साथियों,

काशी का सांसद होने के नाते मुझे खुशी है कि यह अभियान का पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पिछले साल काशी की पवित्र धरती से शुरू हुआ था। इसलिए वैज्ञानिक स्‍पष्‍टता के साथ-साथ इसमें आध्यात्मिक ऊर्जा भी है, संतों के आशीर्वाद भी हैं और महान सांस्कृतिक विरासत भी हैं। इसमें वह सांस्कृतिक समर्पण भी है, जिसने सदियों से नशे को खारिज किया है। यही वजह है, देश के 125 से अधिक आध्यात्मिक संगठन करोड़ों-करोड़ों देशवासियों के हित के लिए आज हमारे साथ जुड़ चुके हैं। सामाजिक संगठनों ने, NGOs ने इस दिशा में संकल्प लिया है। सबने मिलकर ‘काशी डिक्लेरेशन’ के जरिए रोडमैप तैयार किया है और आज हम देख रहे हैं, काशी से उठा वो कल्याणकारी विचार अब यह एक नेशनल प्रोजेक्ट्स बन गया है। आज से देशभर में ‘नशा मुक्त युवा’ अभियान आरंभ हो रहा है।

साथियों,

कुछ काम ऐसे होते हैं, जो व्यक्तिगत रूप से कोई प्रयास करे, तो कभी-कभी निराश हो जाता है, थकान महसूस करता है, लंबी दूरी चलने में मन तैयार नहीं होता है, लेकिन जब सामूहिक अभियान बन जाता है, कंधे से कंधा मिलाकर करोड़ों लोग चल पड़ते हैं, तो ऐसे सभी जो व्यक्तिगत रूप से अपने आप कुछ नहीं कर पाते हैं, उनको भी एक नई ऊर्जा मिल जाती है। सामूहिकता की एक ताकत होती है और आज उस ताकत को लेकर के यह अभियान हर युवा मन को छूने वाला है। थोड़ी देर पहले देश के लाखों युवाओं ने नशा मुक्ति की शपथ ली है। आपने अपने जीवन को नशे से दूर रखने का संकल्प लिया है। आपने अपने स्कूल, अपने कॉलेज और अपने समाज में नशा मुक्ति का संदेश पहुंचाने का संकल्प लिया है।

साथियों,

आज लिया गया यह संकल्प आने वाले 100 सप्ताह तक लगातार ऐसे ही आगे बढ़ेगा। हर रविवार, कला, संस्‍कृति, स्पोर्ट्स, मेडिटेशन, आध्यात्म और सेवा से जुड़ी गतिविधियां होंगी। नशा मुक्ति का संदेश नए लोगों तक पहुंचेगा। आने वाले 100 रविवार नशा मुक्त भारत की दिशा में 100 मजबूत कदम होंगे, हंड्रेड मजबूत स्‍टेप्‍स।

साथियों,

आज हजारों स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज़ के लाखों विद्यार्थी इस कार्यक्रम से ऑनलाइन जुड़े हैं। माई भारत के वॉलंटियर्स भी लाखों की तादाद में आज इससे जुड़े हैं। मेरे एनएसएस के नौजवान भी आज हमारे साथ शामिल हैं। देश के अलग-अलग क्षेत्रों से, अलग-अलग संस्‍थानों से, अलग-अलग बैकग्राउंड के एक करोड़ से अधिक युवा आज एक साथ हैं। मेरा आप सभी से आग्रह है, आप सब इस बड़े मोवमेंट के लीडर हैं। आपने मेरे इस विश्वास को और मजबूत किया है कि भारत का युवा कितना जागरूक है, कितना समझदार है और अपने कर्तव्यों के प्रति कितना गंभीर है। मैं आप सभी को इस अभियान के लिए अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं।

मेरे युवा साथियों,

आप भारत की अमृत पीढ़ी हैं। आप अगले 20-25 वर्षों में अपने जीवन को भी दिशा देंगे और आप ही 2047 में देश को विकसित भारत की मंजिल तक लेकर जाएंगे और उसको शिखर पर आप ही बैठे होंगे, उसका सारा रसपान करने का अवसर आप ही को मिलने वाला है। देश को आपकी ऊर्जा, आपकी कल्पनाशक्ति और आपके टैलेंट की जरूरत है। इसलिए, देश के लिए और अपने जीवन के लिए, खुद को नशा मुक्त रखना बहुत जरूरी है। नशा फोकस को भटकाता है, और धीरे-धीरे युवा को उसके अपने सपनों से दूर ले जाता है। अभी जिन नौजवानों ने नाट्य मंचन किया, बहुत कम समय में, बहुत अच्छे तरीके से नाट्य मंचन में उन्होंने समस्या भी बताई, समस्या के कारण पैदा हुए संकट भी बताए और बाहर निकलने के सामूहिक प्रयत्न का रास्ता भी दिखाया। नाट्य मंचन छोटा था, लेकिन जैसा उन्होंने कहा, आओ हम नाटक देखें! यह नाटक नहीं था, यह हम लोगों के लिए एक बहुत बड़ा संदेश था। हमें जगा रहा था, हमें जूझने के लिए प्रेरित कर रहा था।

साथियों,

आजकल हम देखते हैं, आज के युवा स्‍टार्टअप्‍स की दुनिया में छाए हैं, AI को लीड कर रहे हैं, Sports में तिरंगा लहरा रहे हैं, स्‍पेस से लेकर Science तक नए कीर्तिमान बना रहे हैं। लेकिन साथियों, जब कोई युवा, अगर ड्रग्स के एडिक्‍शन में फंस जाए, तो केवल एक युवा नहीं हारता, एक सपना हार जाता है, एक सपने की बाल मृत्यु हो जाती है, एक परिवार हार जाता है, पूरा का पूरा परिवार टूट जाता है, समाज से भी नफरत का शिकार बन जाता है। नशा केवल शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाता, नशा एक माँ की मुस्कान छीन लेता है। नशा एक पिता के सपनों को चूर-चूर कर देता है। एक बहन की राखी की उम्मीद को कमजोर कर देता है। एक छोटे भाई का आदर्श छीन लेता है। घर के बुजुर्ग हर दिन इस दर्द को जीते हैं कि उनका अपना बच्चा धीरे-धीरे खुद को खो रहा है, खुद को गला रहा है, तिल-तिल गल रहा है, आंखों के सामने उसे बर्बाद होते देख रहे हैं और जब परिवार में, समाज में ऐसा होता है और कहीं न कहीं, राष्ट्र की शक्ति भी कमजोर पड़ जाती है और इसलिए दुश्मन देश भी षड्यंत्र करके हमारे देश के युवाओं को इस नशे की लत में खींचने के लिए कोई कोशिश बाकी नहीं रखते हैं। ड्रग्स सप्लाई कर-करके कमाई करना और हमारे जैसे देश को तबाह करना, यह भी उनकी आतंकी साजिश का हिस्सा होता है और इसलिए हमें हर एक युवा को नशे के चंगुल में फंसने से बचाना है।

साथियों,

नशा मुक्त रहकर आपको अपने पोटेंशियल को प्रोटेक्ट करना है! आपको ध्यान रखना है, ड्रग्स कुछ समय के लिए 'High' देता है। लेकिन आपके करियर और फैमिली लाइफ को 'Low' कर देता है। हमें नशे को किसी भी तरह की स्वीकार्यता नहीं देनी है।

साथियों,

हमारे समाज में भी हमेशा नशे को एक बुराई के रूप में देखा है। हमारे संतों ने, गुरुओं ने हमें इससे बचने के लिए चेताया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब में भी कहा गया है- "जितु पीतै मति दूरि होइ बरलु पवै विचि आइ। आपणा पराइआ न पछाणई खसमहु धके खाइ॥'' अर्थात, जिस पदार्थ के सेवन से बुद्धि और विवेक साथ छोड़ दें, इंसान अपने और पराए की पहचान भूल जाए, ऐसा नशा उसे पतन की ओर ले जाता है।

साथियों,

हमारी संस्कृति में बचाव के लिए चेतावनी भी दी गईं है और नशे की आदत लगने पर उससे निकलने के रास्ते भी बताए गए हैं। समाज का सहयोग, योग और ध्यान की ताकत, यह नशे के खिलाफ हमारे अंतर्मन को ताकत देते हैं। और आज तो हमारे पास नशा छोड़ने के लिए rehabilitation center जैसी सुविधाएं भी हैं। इसलिए, अगर कोई युवा गलती से नशे में फंस भी गया है, तो इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि उसके सारे रास्ते बंद हो गए हैं। हमें हमेशा इस बात का ध्यान रखना है, घर का कोई बच्चा अगर नशे का शिकार बन गया है, तो इसे सामाजिक प्रतिष्ठा की आड़ में छिपाएं नहीं। जिसकी जरूरत हो, उसका सहयोग मांगे, मन खोलकर के उससे बात करें, जो एक्सपर्ट्स हैं, उनका सहयोग लें। मेडिकल हेल्प से अपने बच्चे को नशे से मुक्त कराने का प्रयास करें। हमें परिवार में बच्चों से खुलकर संवाद की संस्कृति भी बनानी चाहिए, ताकि ऐसे भंवर में फंसने से पहले ही आप उसका हाथ थाम सके। आपको भनक आ जाएगी, थोड़ा ध्यान रखिए पता चलेगा, उसमें बदलाव आ रहा है, वो खोया-खोया लग रहा है, वो मुँह छुपा रहा है, कमरे में बंद हो जा रहा है, देर रात आ रहा है, पैसे अनाब-शनाब मांग रहा है, यह सारी चीजों से पता चल जाता है, भनक आ जाती है, कुछ मामला गड़बड़ है।

साथियों,

एक आवाहन मैं कॉलेज और यूनिवर्सिटीज़ के हमारे प्रोफेसर्स साथियों से भी करना चाहता हूँ, आप भी कोर्स की पढ़ाई के साथ-साथ स्टूडेंट्स के साथ ड्रग्स के खतरों पर बात करें। नशे के खिलाफ अपने कैम्पस में एक मूवमेंट चलाएं। आपके प्रयास बड़े-बड़े परिणाम ला सकते हैं। और साथियों, हमें एक और बात ध्यान रखनी है, जो युवा नशे से लड़कर बाहर निकलते हैं, वह कमजोर नहीं होते, जो नशे को परास्‍त करके निकला है न, वह असली योद्धा होता है, समाज को उनका सम्मान करना चाहिए, अपनापन देना चाहिए, उसे दूसरा अवसर देना चाहिए क्योंकि ड्रग्स से जुड़ा किसी का अतीत उसकी पहचान नहीं हो सकता, उसका साहस उसकी पहचान होता है।

साथियों,

ड्रग्स के खिलाफ अभियान में आज सरकार भी मजबूती से युवाओं के साथ खड़ी है। देश में नशे के कारोबारियों और तस्करों पर सख्ती के साथ कार्रवाई हो रही है। पहले की तुलना में कई गुना ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं। हजारों करोड़ रुपए की ड्रग्स भी जब्त की गई है। यह दिखाता है कि, ड्रग्स के खिलाफ हमारी सरकार कितनी सख्त है। मुझे विश्वास है, केन्‍द्र सरकार, राज्य सरकार, हर कोई इसे मिशन मोड में करेंगे। मुझे विश्वास है, हमारे देश का युवा नशे से मुक्त रहकर अपनी युवा ऊर्जा को न केवल संरक्षित करेगा, बल्कि विकसित भारत के संकल्पों को भी आगे बढ़ाएगा। और जब मैं आज अनेक महान संतों को मेरे सामने देख रहा हूं, दूर से मैं मन से उनको प्रणाम करता हूं। मैं इन सभी सामाजिक संस्‍थाएं, आध्यात्मिक संस्‍थाएं, आध्यात्मिक गुरुजन, आपका देश के कोने-कोने में संगठन है, आपके युवा साथी डिवोटीज हैं। आने वाले 100 दिन में हर एक संगठन, एक सप्ताह अपने जिम्मे ले सकता है, पूरा सप्ताह पूरे देश में वह संगठन नेतृत्व करे, बाकी सब शक्तियां उसके साथ जुड़े और रविवार को बहुत बड़ा कार्यक्रम करें। दूसरे सप्ताह, दूसरा संगठन, दूसरी शक्ति, सप्ताह भर प्रयोग करें, कार्यक्रम करे और रविवार को बड़ा कार्यक्रम करे। अगर 100 सप्ताह हमारे देश के ऐसे आध्यात्मिक, सामाजिक संगठन, युवा संगठन एक-एक सप्ताह अपने जिम्मे ले लें और बाकी सारी शक्तियां वह जुड़े और रविवार सब मिलकर के करें, आप कल्पना कर सकते हैं, देश में कितना बड़ा आंदोलन खड़ा हो जाएगा। मैं एक बार फिर आप सबने समय निकाला, इस पवित्र कार्य में हम सबको आशीर्वाद दिए, इसके लिए संतों का, आचार्यो का, संगठन के महारथियों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। मैं इन एक करोड़ से ज्यादा जुटे नौजवानों का विशेष रूप से अभिनंदन करता हूं, आपने यह बहुत बड़ा काम किया है। मैं माई भारत के वॉलंटियर्स की बधाई करता हूं, वो जो भी ठान लेते हैं, आजकल करके दिखाते हैं। अभी पिछले दिनों मुझे माई भारत के वॉलंटियर्स को मिलने का मौका मिला, वह हिन्‍दुस्‍तान के सीमावर्ती गांवों में जाकर के एक-एक सप्ताह रूक करके आए हैं। जिसे कभी देश का आखिरी गांव कहा जाता है, जाता था जिसको आज हम देश का पहला गांव कहते हैं, वहां जाकर के आए। उनके अनुभव बड़े प्रेरक थे और आज इतना बड़ा कार्यक्रम माई भारत के वॉलंटियर्स कर पाते हैं, यह अपने आप में उनकी राष्‍ट्र के प्रति जागरूक समर्पित भावना का प्रतीक है, मैं उनकी बधाई देता हूं, उनका भी अभिनंदन करता हूं। और मुझे पूरा विश्वास है कि आप सबके सामूहिक प्रयत्नों से यह हमारी मोवमेंट घर-घर पहुंचेगी, हर युवा के दिन में पहुंचेगी और यह ड्रग्स के कारोबारियों के लिए बहुत बड़ा खौफ भी बन जाएगी। आइए, हम सब मिलकर के आगे चलें, मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!