पुणे मेट्रो के पूर्ण खंडों के उद्घाटन के अवसर पर मेट्रो ट्रेनों को झंडी दिखाई
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित आवासों का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया
अपशिष्ट से ऊर्जा संयंत्र का उद्घाटन किया
"पुणे एक जीवंत महानगर है जो देश की अर्थव्यवस्था को गति देता है और पूरे देश के युवाओं के सपनों को पूरा करता है"
"हमारी सरकार नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है"
"मेट्रो आधुनिक भारत के शहरों के लिए एक नई जीवन रेखा बन रही है"
"आजादी के बाद से ही महाराष्ट्र के औद्योगिक विकास ने भारत के औद्योगिक विकास को निरंतर गति दी है"
"गरीब हो या मध्यम वर्ग, हर सपना पूरा करना मोदी की गारंटी"

महाराष्ट्र के राज्यपाल श्रीमान रमेश बैस जी, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी गण, महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी, अजीत पवार जी, भाई दिलीप जी अन्य मंत्रीगण, सांसद और विधायकगण, भाइयों और बहनों।

ऑगस्ट महिना, हा उत्सव व क्रांतीचा महिना आहे.

क्रांतीच्या या महिन्याच्या सुरुवातीलाच, मला पुणे येथे,

येण्याचे सौभाग्य मिळाले.

वाकई, पुणे का भारत की आज़ादी के आंदोलन में बहुत बड़ा योगदान रहा है। पुणे ने बालगंगाधर तिलक जी समेत अनेक क्रांतिवीर, स्वतंत्रता सेनानी देश को दिए हैं। आज ही लोकशाहिर अन्ना भाऊ साठे की जयंती भी है। ये हम सब के लिए बहुत ही खास दिन है। अन्ना भाऊ साठे, महान समाज सुधारक थे, बाबा साहेब अंबेडकर के विचारों से प्रभावित थे। आज भी बड़ी संख्या में छात्र और विद्वान उनके साहित्य पर शोध करते हैं। अन्ना भाऊ साठे के कार्य, उनका आह्वान आज भी हम सबको प्रेरित करता है।

साथियों,

पुणे, देश की अर्थव्यवस्था को गति देने, देश भर के युवाओं के सपनों को पूरा करने वाला एक जीवंत शहर है। आज जो प्रोजेक्ट पुणे और पिंपरी-चिंचवड को मिले हैं, उससे ये भूमिका और सशक्त होने वाली है। अभी यहां करीब 15 हज़ार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। हज़ारों परिवारों को पक्के घर मिले हैं, Waste से Wealth बनाने का, कचरे से कंचन बनाने का आधुनिक प्लांट मिला है। इन परियोजनाओं के लिए मैं सभी पुणे वासियों को, यहां के सभी नागरिकों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

हमारी सरकार, शहरों में रहने वाले विशेषकर के मध्यम वर्ग की, प्रोफेशनल्स की, उनकी Quality of Life को लेकर बहुत गंभीर है। जब Quality of Life सुधरती है, तो उस शहर का विकास भी और तेजी से होता है। पुणे जैसे हमारे शहरों में quality of life और बेहतर हो, इसके लिए हमारी सरकार लगातार काम कर रही है। यहां आने से पहले पुणे मेट्रो के एक और सेक्शन का लोकार्पण हुआ है। मुझे याद है, जब पुणे मेट्रो के लिए काम शुरू हुआ था, तो मुझे इसके शिलान्यास का अवसर मिला था और देवेन्द्र जी ने बड़े मजेदार ढंग से उसका वर्णन भी किया। इन 5 वर्षों में यहां लगभग 24 किलोमीटर मेट्रो नेटवर्क शुरू हो चुका है।

साथियों,

हमें भारत के शहरों में रहने वाले लोगों का जीवन स्तर अच्छा बने और उसे अगर हमें नई ऊंचाई देनी है तो हमें पब्लिक ट्रांसपोर्ट को आधुनिक बनाना ही होगा। और इसलिए ही आज भारत के शहरों में लगातार मेट्रो नेटवर्क का विस्तार हो रहा है, नए-नए फ्लाईओवर बनाए जा रहे हैं, रेड लाइट्स की संख्या कम करने पर बल दिया जा रहा है। साल 2014 तक भारत में 250 किलोमीटर से भी कम मेट्रो नेटवर्क था। इसमें से भी अधिकतर दिल्ली-NCR में था। अब देश में मेट्रो नेटवर्क बढ़कर 800 किलोमीटर से भी ज्यादा हो गया है। इसके अलावा एक हजार किलोमीटर की नई मेट्रो लाइन के लिए काम भी चल रहा है। 2014 में सिर्फ 5 शहरों में मेट्रो का नेटवर्क था। आज देश के 20 शहरों में मेट्रो नेटवर्क संचालित है। महाराष्ट्र में ही पुणे के अलावा मुंबई और नागपुर में भी मेट्रो का विस्तार हो रहा है। ये मेट्रो नेटवर्क, आधुनिक भारत के शहरों की नई लाइफलाइन बनती जा रही है। पुणे जैसे शहर में पर्यावरण की रक्षा के लिए, प्रदूषण कम करने के लिए मेट्रो का विस्तार, बहुत जरूरी है। इसलिए भी हमारी सरकार मेट्रो नेटवर्क बढ़ाने के लिए इतनी मेहनत कर रही है।

भाइयों और बहनों,

Quality of Life को सुधारने का एक अहम फैक्टर, शहरों में साफ-सफाई की व्यवस्था भी है। एक समय था, जब विकसित देशों के शहरों को देखकर कहा जाता था- वाह कितना साफ शहर है। अब हम भारत के शहरों को भी उसी तरह से समाधान दे रहे हैं। स्वच्छ भारत अभियान, सिर्फ टॉयलेट्स के निर्माण तक सीमित नहीं है। इस अभियान में वेस्ट मैनेजमेंट पर भी बहुत अधिक फोकस किया जा रहा है। हमारे शहरों में बड़े-बड़े कचरे के पहाड़ बहुत बड़ी समस्या बन गए हैं। आप भी जानते हैं कि पुणे में जहां मेट्रो का डिपो बना है, वो पहले कोथरुड कचरा डंपिंगयार्ड से जाना जाता था। अब ऐसे कूड़े के पहाड़ों को हटाने के लिए भी मिशन मोड पर काम चल रहा है। औऱ हम कचरे से कंचन- यानि वेस्ट टू वेल्थ के मंत्र पर काम कर रहे हैं। पिंपरी-चिंचवड़ का वेस्ट टू एनर्जी प्लांट, बहुत ही बेहतरीन प्रोजेक्ट है। इसमें कचरे से बिजली बन रही है। यहां जो बिजली पैदा होगी, उससे निगम अपनी जरूरत भी पूरी कर पाएगा। यानी प्रदूषण की समस्या भी नहीं रहेगी और नगर-निगम को बचत भी होगी।

साथियों,

आजादी के बाद से ही महाराष्ट्र के औद्योगिक विकास ने भारत के औद्योगिक विकास को निरंतर गति दी है। महाराष्ट्र में औद्योगिक विकास को और बढ़ाने के लिए, यहां आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण उतना ही जरूरी है। इसलिए आज हमारी सरकार महाराष्ट्र में इंफ्रास्ट्रक्चर पर जितना निवेश कर रही है, वो अभूतपूर्व है। आज यहां बड़े-बड़े एक्सप्रेस वे, नए-नए रेलवे रूट, नए-नए एयरपोर्ट्स का निर्माण किया जा रहा है। रेलवे के विकास के लिए यहां 2014 से पहले की तुलना में 12 गुना अधिक खर्च किया जा रहा है। महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों को आस-पास के राज्यों के इकॉनॉमिक हब से भी जोड़ा जा रहा है। मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल से गुजरात और महाराष्ट्र, दोनों को फायदा होगा। दिल्ली-मुंबई इकॉनॉमिक कॉरिडोर, महाराष्ट्र को मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य राज्यों से जोड़ेगा। Western Dedicated Freight Corridor से महाराष्ट्र और उत्तर भारत के बीच रेल कनेक्टिविटी भी बिल्कुल बदल जाएगी। महाराष्ट्र को तेलंगाना, छत्तीसगढ़, और अन्य पड़ोसी राज्यों से जोड़ने के लिये जो Transmission Line Network बिछाया गया है, उससे भी महाराष्ट्र के उद्योगों को नई गति मिलने वाली है I ऑयल और गैस पाइपलाइन हो, औरंगाबाद इंडस्ट्रियल सिटी हो, नवी मुंबई एयरपोर्ट हो, शेंद्र-बिड़किन इंडस्ट्रियल पार्क हो, ये महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को नई गति देने का सामर्थ्य रखते हैं।

साथियों,

हमारी सरकार, राज्य के विकास से, देश के विकास के मंत्र को लेकर चल रही है। जब महाराष्ट्र का विकास होगा, तो भारत का विकास होगा। और जब भारत का विकास होगा, तो उसका उतना ही लाभ महाराष्ट्र को भी मिलेगा। आज-काल, जगभरात लोक, भारताच्या विकासाची, चर्चा करीत आहेत. इस विकास का लाभ, महाराष्ट्र को भी हो रहा है, पुणे को भी हो रहा है। आप देख रहे हैं, बीते 9 वर्षों में भारत ने इनोवेशन और स्टार्ट अप्स के मामले में दुनिया में नई पहचान बनाई है। 9 वर्ष पहले तक भारत में सिर्फ कुछ सौ स्टार्ट अप्स होते थे। आज हम 1 लाख स्टार्ट अप्स को पार कर गए हैं। ये स्टार्ट अप, ये इकोसिस्टम इसलिए इतना फल-फूल रहा है, क्योंकि हमने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया है। और भारत में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव बनाने में पुणे की बहुत ही ऐतिहासिक भूमिका रही है। सस्ते डेटा, सस्ते फोन और गांव-गांव पहुंची इंटरनेट सुविधा ने इस सेक्टर को मजबूती दी है। आज भारत, दुनिया में सबसे तेज़ गति से 5G सर्विस रोलआउट करने वाले देशों में से एक है। आज देश में फिनटेक हो, बायोटेक हो, एग्रीटेक हो, हर सेक्टर में हमारे युवा कमाल कर रहे हैं। इसका बहुत बड़ा लाभ पुणे को हो रहा है।

साथियों,

एक तरफ महाराष्ट्र में हम चौतरफा विकास होते देख रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ पड़ोसी राज्य कर्नाटक में जो हो रहा है, वो भी हमारे सामने है। बेंगलुरु इतना बड़ा आईटी हब है, ग्लोबल इन्वेस्टर्स का सेंटर है। ये ज़रूरी था कि इस समय बेंगलुरु का, कर्नाटक का तेज़ी से विकास हो। लेकिन वहां जिस प्रकार की घोषणाएं करके सरकार बनाई गई, उसके दुष्परिणाम इतने कम समय में आज पूरा देश देख रहा है और चिंता का अनुभव कर रहा है। जब कोई पार्टी अपने निहित स्वार्थों के लिए सरकार की तिजोरी खाली करती है, तो इसका नुकसान सबसे ज्यादा राज्य के लोगों को होता है, हमारी युवा पीढ़ी के भविष्य पर सवालिया निशान लग जाता है। इससे उस पार्टी की सरकार तो बन जाती है, लेकिन लोगों का भविष्य खतरे में पड़ जाता है। हाल ये है कि कर्नाटक सरकार खुद मान रही है कि उसके पास बेंगलुरु के विकास के लिए, कर्नाटक के विकास के लिए, तिजोरी खाली है, पैसे ही नहीं हैं। भाइयों, ये देश के लिए बहुत चिंताजनक है। यही स्थिति राजस्थान में भी हम देख रहे हैं, वहां भी कर्ज का बोझ बढ़ रहा है, विकास के काम ठप पड़े हैं।

साथियों,

देश को आगे बढ़ाने के लिए, विकसित बनाने के लिए नीति, नीयत और निष्ठा, उतनी ही जरूरी है। सरकार को, सिस्टम को चलाने वालों की नीति, नीयत और निष्ठा ही तय करती है कि विकास होगा या नहीं होगा। अब जैसे गरीबों को पक्का घर देने की योजना है। 2014 से पहले जो सरकार थी, उसने शहरों में गरीबों को घर देने के लिए 10 सालों में दो योजनाएं चलाईं। इन दो योजनाओं के तहत 10 साल में देशभर के शहरी गरीबों के लिए सिर्फ 8 लाख घर बने। लेकिन इन घर की हालत इतनी बुरी थी कि ज्यादातर गरीबों ने इन घरों को लेने से ही इनकार कर दिया। अब आप कल्पना करिए, झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाला व्यक्ति भी उस घर को लेने से इनकार कर देगा तो वो घर कितना बुरा होगा। आप कल्पना कर सकते हैं देश में यूपीए के समय बन हुए 2 लाख से अधिक घर ऐसे थे, जिनको लेने के लिए कोई तैयार ही नहीं हुआ। हमारे यहां महाराष्ट्र में भी उस समय बने हुए 50 हज़ार से अधिक घर ऐसे ही खाली पड़े थे। रूपया की बर्बादी है, लोगों की मुसीबतों की चिंता नहीं।

भाइयों और बहनों,

2014 में आप सबने हमें सेवा करने का मौका दिया। सरकार में आने के बाद हमने सही नीयत से काम शुरू किया और नीति भी बदली। पिछले 9 वर्षों में हमारी सरकार ने गांव और शहरों में गरीबों के लिए, 4 करोड़ से अधिक पक्के घर बनाए। इसमें भी शहरी गरीबों के लिए 75 लाख से अधिक घर बनाए गए हैं। हम इन नए घरों के निर्माण में पारदर्शिता भी लाए हैं और इनकी क्वालिटी भी सुधारी है। हमारी सरकार ने एक और बड़ा काम किया है, जो घर सरकार गरीबों को बनाकर दे रही है, उसमें से ज्यादातर घर महिलाओं के नाम रजिस्टर किए जा रहे हैं। इन घरों की कीमत कई-कई लाख रुपए है। यानि बीते 9 वर्षों में देश में करोड़ों बहनें ऐसी हैं, जो लखपति बनी हैं, मेरी लखपति दीदी बन गई हैं। उनके नाम पर पहली बार कोई संपत्ति रजिस्टर हुई है। आज भी जिन भाइयों और बहनों को अपने घर मिले हैं, उन्हें मैं विशेष तौर पर बधाई देता हूं, मेरी तरफ से अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं। और इस बार का गणेश उत्सव तो उनके लिए बड़ा शानदार होने वाला है।

भाइयों और बहनों,

गरीब हो या मिडिल क्लास परिवार, हर सपने को पूरा करना ही मोदी की गारंटी है। एक सपना जब पूरा होता है, तो उस सफलता की कोख से सैकड़ों नए संकल्प जन्म लेते हैं। यही संकल्प उस व्यक्ति के जीवन की सबसे बड़ी ताकत बन जाते हैं। हमें आपके बच्चों, आपके वर्तमान और आपकी भावी पीढ़ियों की चिंता है।

साथियों,

सत्ता येते आणि जाते। समाज आणि देश तेथेच राहतो. इसलिए हमारा प्रयास, आपके आज के साथ-साथ आपके कल को बेहतर बनाने का भी है। विकसित भारत के निर्माण का संकल्प इसी भावना का प्रकटीकरण है। इसके लिए हम सभी को मिलकर, एक साथ काम करना होगा। यहां महाराष्ट्र में, इतने अलग-अलग दल एक साथ इसी ध्येय के साथ आए हैं। लक्ष्य यही है कि सबकी भागीदारी से महाराष्ट्र के लिए और बेहतर काम हो सके, महाराष्ट्र तेज गति से विकास करे। महाराष्ट्र ने हम सभी को हमेशा बहुत प्यार दिया है, बहुत आशीर्वाद दिया है। ये आशीर्वाद यूं ही बना रहेगा, इसी कामना के साथ, फिर से विकास परियोजनाओं की आप सबको बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

मेरे साथ बोलिए भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

धन्यवाद।

 

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आज सिक्किम ने “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को खूबसूरती से दिखाया: गंगटोक में पीएम मोदी
April 28, 2026
Known for Serenity and Enterprise, Sikkim Sees Rapid Progress :PM
One of the best things I noticed all along the way, was the cleanliness of Sikkim's roads: PM
No garbage as far as the eye can see,cleanliness in the air too, cleanliness on the roads as well, the people of Sikkim, are true protectors of nature, its brand ambassadors: PM
We are placing maximum focus on connectivity and infrastructure in Sikkim; In recent years, hundreds of kilometers of highways have been constructed here, Work is progressing rapidly to connect every village with roads: PM
Another vast horizon of possibilities for Sikkim lies in sports;The youth here have showcased their capability and talent on grand stages: PM
Our government is committed to ensuring that alongside robust health infrastructure, people also receive affordable medical treatment: PM
Previously, we provided Ayushman cards to ensure free healthcare for the poor; Now, this facility is being extended to all senior citizens aged 70 years and above, medicines are available at highly affordable prices at Jan Aushadhi Kendras: PM
Sikkim's model of organic and natural farming serves as an inspiration for the entire nation : PM
The lifestyle of Sikkim and Sikkim’s resolve have today become an integral part of the nation's vision: PM

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

सिक्किम के राज्यपाल श्री ओम माथुर जी, यहां के लोकप्रिय, ऊर्जावान युवा और मेरे परम मित्र श्री प्रेम सिंह तमांग जी, संसद में मेरे साथी श्री दोरजी शेरिंग लेपचा जी, डॉ. इन्द्र हांग सुब्बा जी, श्री दिली राम थापा जी और सिक्किम के मेरे प्यारे भाइयों और बहनों।

समग्र सिक्किम वासी लाई स्वर्ण जयंती को धेरै धेरै बधाई तथा शुभकामना, नमस्ते, टाशी डिले!

खाम-रि-मो! तपाईंहरू कॉस्तो हुनु-हुन्छ ?

साथियों,

मैं कल दोपहर बाद गंगटोक पहुंचा था, और यहां मेरे आने से पहले, मैं बंगाल चुनावों की गहमा-गहमी में जरा व्यस्त था। यहां आते ही एक नई अनुभूति, एक नया आनंद, चारों तरफ उत्सव का माहौल, मन खुशियों से भर गया। रात में हुई बारिश, फिर सुबह की ठंडक और ये खिली हुई धूप, सिक्किम के रंग ही निराले हैं।

साथियों,

पूरब का स्वर्ग सिक्किम, ऑर्किड्स का गार्डन सिक्किम, इसका अप्रतिम सौंदर्य, यहां की शांति, यहां का आध्यात्मिक आनंद, ये अनुभूति बड़े सौभाग्य से मिलती है। आज मैं यहां के ऑर्किड्स को भी देखने गया था। मेरे लिए जितना समय तय हुआ था, मैं ज्यादा ही समय वहां बिता रहा था। और मैं देशभर के टूरिस्टों को, प्रकृति प्रेमी टूरिस्टों को, अगर उन्होंने सिक्किम का ये ऑर्किड नहीं देखा है, तो कुछ भी नहीं देखा है। और मुझे विश्वास है कि इस बार टूरिस्ट, सिक्किम के टूरिज्म के सारे आंकड़े इस बार पार कर देंगे। ऑर्किड में मैंने देखा प्रकृति के वो रंग, उनका उल्लास, मेरा मन अभी भी उसी में डूबा हुआ है।

साथियों,

आज हमें सिक्किम की 50 वर्ष की यात्रा का उत्सव मनाने का अवसर मिला है। जब अवसर इतना ऐतिहासिक हो और इतने दिव्य माहौल में हो रहा हो, तो उसकी भव्यता कई गुना बढ़ जाती है। पालजोर का ये स्टेडियम आज उसी अद्भुत आभा से भरा हुआ है। यहां जो सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए, कलाकारों की मुग्ध कर देने वाली प्रस्तुतियां हुईं। सिक्किम के आप लोगों का जो उत्साह दिखा, सामने पहाड़ों और आसमान में प्रकृति की सुंदर छटा दिखी। ऐसा लग रहा था, जैसे प्रकृति और संस्कृति साथ मिलकर जीवंत हो उठी। वाकई ये स्मूर्तियां हमेशा मेरे दिल में बनी रहेगी। और मैं जो भी कोरियोग्राफी करने वाले लोग होंगे, जो भी गाने वाले लोग होंगे, सबको बधाई देता हूं। और आज का ये कार्यक्रम मैं चाहूंगा कि ये टीवी, मीडिया वाले, दूरदर्शन वाले देश को बार-बार दिखाएं। जब देश में राजनीतिक स्वार्थ के चलते भाषावाद, प्रांतवाद, ऊंच-नीच, देश में भेदभाव के लिए लगातार कोशिश हो रही है, आज सिक्किम ने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के दर्शन करा दिए। उन्होंने इस छोटे से कार्यक्रम में पूरा हिंदुस्तान आंखों के सामने खड़ा कर दिया। और अभी भी जो उन्होंने बैठने की रचना की है, मुझे ऊपर से दिखता है, पूरा हिंदुस्तान है, और जो जिस प्रदेश का है, वैसे ही परिवेश है, उधर गुजरात तो गुजराती कपड़ों में लोग बैठे हैं। वाकई-वाकई आपने दिल जीत लिया है। ये मोदी का नहीं, पूरे हिंदुस्तान का दिल जीत लिया है आज। यही तो भारत भक्ति होती है, यही तो देशभक्ति होती है। नई पीढ़ी में इसी से देशभक्ति के भाव जगते हैं। बहुत-बहुत बधाई आप लोगों को।

साथियों,

सिक्किम आने पर मुझे इसलिए भी बहुत खुशी है, क्योंकि पिछली बार मैं खराब मौसम के कारण यहां तक नहीं पहुंच पाया था। मुझे बागडोगरा से ऑनलाइन ही आपसे जुड़ना पड़ा था। आपसे यहां आकर ना मिल पाने की वो कसक मेरे मन में बनी हुई थी। और जब भी प्रेम सिंह जी मिलते थे ना, तो मेरी आंखें झुक जाती थी कि आपने इतनी मेहनत की, मैं आ नहीं पाया, और इसलिए मैं इंतजार में था, वो इंतजार भी आज इस अवसर के माध्यम से पूरा हुआ है।

साथियों,

सिक्किम के लोगों से मिलना मुझे हमेशा एक अलग सुकून देता है। आपकी ये सौम्यता, आपकी ये सादगी, आपके चेहरों की मुस्कान अद्भुत है। यहां आने से पहले भी मैं सिक्किम के कई प्रतिभाशाली लोगों से मिला। सिक्किम के प्रबुद्ध लोग, पद्म सम्मान विजेता, आर्टिस्ट और फुटबॉलर्स उनसे अलग-अलग विषयों पर मेरी बात हुई।

साथियों,

कल शाम को जो रोड शो हुआ, मैं उसे भी अब तक भूल नहीं पाया हूं, और शायद कभी नहीं भूल पाऊंगा। हाथों में हमारा ये प्यारा तिरंगा। लगातार भारत माता का जयकारा, और वंदे मातरम का उद्घोष, पूरा वातावरण ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की तस्वीरों से रंगा हुआ था। गंजू लामा द्वार से लोकभवन के रास्ते तक, जिस तरह सिक्किम के मेरे भाई-बहन अपना प्यार देने उमड़े, जिस तरह सभी जातीय समुदायों ने स्वागत किया, हर समुदाय की अपनी वेशभूषा, अपना-अपना संगीत, अपनी-अपनी परंपराएं, पूरा माहौल ही एक बड़े महोत्सव में बदल गया था। ये दृश्य ऐसा था, जैसे प्रकृति की गोद में अलग-अलग रंग खिले हों। बड़ी संख्या में मेरी माताएं-बहनें, बच्चे और बुजुर्ग भी अपना आशीर्वाद देने आए थे। और जो एक सबसे अच्छी बात मुझे पूरे रास्ते भर दिखी, वो थी सिक्किम की सड़कों की स्वच्छता, आप सबको सैल्यूट। दूर-दूर तक कोई गंदगी नहीं, वायु में भी स्वच्छता, सड़कों पर भी स्वच्छता, सिक्किम के आप लोग प्रकृति के पक्के वाले संरक्षक हैं, ब्रैंड एंबेसेडर हैं। मैं फिर देशवासियों को कहता हूं, सिक्किम आइए। कितना साफ-सुथरा, स्वच्छ बनाए रखा है सिक्किम को।

भाइयों-बहनों,

कल रोड शो जो हुआ, और अभी इस आयोजन के लिए मैं आप सभी का और सभी कलाकारों का हृदय से बहुत-बहुत आभार प्रकट करता हूं, आपका अभिनंदन करता हूं। मैं सिक्किम के लोगों को, और सभी देशवासियों को 50 वर्ष की इस महत्वपूर्ण यात्रा के इस उत्सव की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं, आपके प्यार, आपका स्नेह, आपके आशीर्वाद का ये कर्ज, इसे चुकाने के लिए मैं कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोडूंगा।

साथियों,

सिक्किम की यात्रा मानवीय मूल्यों की यात्रा है। ये विकास और विरासत को साथ लेकर चलने की यात्रा है। सिक्किम की अनेक पीढ़ियों ने इस यात्रा को आगे बढ़ाया है। गत् 50 वर्ष में जिन-जिन लोगों ने सिक्किम को आगे बढ़ाया है, यहां तक पहुंचाया है, उन सबको मैं आज हृदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं, उनका अभिनंदन करता हूं। जिस समय, जिसको जो करना था, उसने किया, उसने सिक्किम को दिया। अब, इसकी ज़िम्मेदारी हमारे पर है, हमारे ऊपर है। सिक्किम की सरकार, मेरे मित्र प्रेम सिंह जी के नेतृत्व में पूरी ईमानदारी से सिक्किम की विरासत को संजोने और विकास को गति देने का काम कर रही है। हमारे लिए सिक्किम, नॉर्थ ईस्ट केवल देश का एक अहम हिस्सा ही नहीं है, बल्कि ये भारत की ‘अष्ट लक्ष्मी’ हैं। नॉर्थ ईस्ट ये हिंदुस्तान की ‘अष्ट लक्ष्मी’ हैं। इसलिए, हम ‘एक्ट ईस्ट’ की पॉलिसी पर तो काम कर ही रहे हैं, हमने नॉर्थ ईस्ट के लिए ‘एक्ट फास्ट’ का संकल्प भी लिया है। और इसलिए ‘एक्ट ईस्ट’, ‘एक्ट फास्ट’। आज भी यहाँ हजारों करोड़ रुपए की 30 से ज्यादा परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है। इनमें रोड, पावर, टूरिज्म, हेल्थ, एजुकेशन, हर तरह के प्रोजेक्ट शामिल हैं। नॉर्थ सिक्किम के क्षेत्रों में 2023 के बाद जो चुनौतियां आईं, उन्हें भी ध्यान में रखा गया है। जहां-जहां कनेक्टिविटी प्रभावित हुई, वहां उसे फिर से मजबूत करने पर फोकस किया गया है। मैं इनके लिए सिक्किम के आप सभी लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

हमारे सिक्किम की बहुत बड़ी ताकत उसकी टूरिज़्म इकोनॉमी है। सिक्किम का क्षेत्रफल देश के कुल क्षेत्रफल का एक परसेंट से भी कम है, लेकिन देश की 25 परसेंट से ज्यादा फ्लोरल diversity हमारे सिक्किम में मिलती है। यहाँ पक्षियों की करीब 500 प्रजातियाँ, बटरफ़्लाइज़ की करीब 700 प्रजातियाँ, खूबसूरत फॉरेस्ट कवर, कंचनजंगा का अद्भुत आकर्षण, कितना कुछ है। इसलिए हर कोई बार-बार सिक्किम आना चाहता है।

साथियों,

सिक्किम के टूरिज्म से यहां बहुत बड़ी संख्या में लोगों की आय जुड़ी हुई है। और टूरिज्म तभी बढ़ता है, उस राज्य का इंफ्रास्ट्रक्चर जब बढ़िया हो, तब बढ़ता है। इसीलिए हम सिक्किम की कनेक्टिविटी और यहां इंफ्रास्ट्रक्चर पर सबसे ज्यादा फोकस कर रहे हैं। बीते वर्षों में यहाँ सैकड़ों किलोमीटर हाइवेज का निर्माण हुआ है। गाँव-गाँव तक सड़कों को पहुंचाने के लिए तेजी से काम चल रहा है। ऐसे आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पहले जिनकी कल्पना भी नहीं होती थी, आज वो हकीकत बन रहे हैं। बागडोगरा से गंगटोक तक एक्सप्रेसवे का निर्माण हो, सेवोक-रंगपो रेल लाइन हो, ये प्रोजेक्ट सिक्किम को पूरे देश से जोड़ने का जरिया बन रहे हैं। यहां नए नेशनल हाईवेज, उसका निर्माण भी कराया जा रहा है। गंगटोक जैसे शहरों में रिंग रोड जैसी परियोजनाएं भविष्य के लिए जरूरी हैं। इस दिशा में भी काम आगे बढ़ रहा है।

भाइयों-बहनों,

बीजेपी सरकार जो काम आज कर रही है, वो पहले भी हो सकते थे, लेकिन काँग्रेस की सरकारों ने हमेशा सिक्किम के विकास को पीछे धकेला। सेवोक-रंगपो रेल लाइन का ही उदाहरण लीजिए, इस प्रोजेक्ट को 2008-2009 में मंजूरी मिली थी, लेकिन जमीन पर काम नहीं हुआ, कागज पर लटका रहा। परियोजना फाइलों में ही पड़ी रही। केंद्र में बीजेपी सरकार आने के बाद विकास को फिर से गति मिली है। पहली बार सिक्किम तक रेल पहुँचने जा रही है।

साथियों,

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हमें नए ideas की भी जरूरत होती है। आज हम इसी सोच के साथ काम कर रहे हैं। भालेढूंगा, येन-येंग और पेलिंग में रोपवे का निर्माण इसी का उदाहरण है। भालेढूंगा में स्काइवॉक का भी निर्माण कराया जा रहा है। और अब सिंहशोर Bridge पर ग्लास डेक स्काइवॉक भी बनाने की तैयारी है। नाथूला और नामली जैसी जगहों पर बार्डर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने का काम भी हो रहा है।

साथियों,

हमारी सरकार के इन प्रयासों से आपका जीवन आसान होगा, सिक्किम आने वाले पर्यटकों की संख्या और बढ़ेगी, और आपकी आमदनी में भी वृद्धि होगी। और मैं देशभर के टूरिस्टों को हमेशा आग्रह करता हूं। आप यात्रा के लिए जाएं, आप एडवेंचर टूरिज्म के लिए जाएं, आप एनवायरमेंट टूरिज्म के लिए जाएं, लेकिन जहां जाए, वहां जो लोकल उत्पाद होते हैं, आपकी यात्रा के बजट का 5% वहां से कुछ ना कुछ खरीदना कंपलसरी होना चाहिए। लोकल को वोकल बनाने का रास्ता यहीं से शुरू होता है। आप जहां जाए, वहीं का खाना खाएं, जहां जाए वहीं की चीजें खरीदें, Souvenir के तौर पर ले जाएं। ताकि यहां के लोगों को दूर-दूर पहाड़ों में रहने वाले छोटे-छोटे समूहों को ये जो इतनी बड़ी मात्रा में मेरी बहनें आई हैं, ये इतनी बढ़िया-बढ़िया चीजें बनाती हैं सेल्फ हेल्प ग्रुप में, वो खरीदने वाले लोग देश भर से आने चाहिए और इससे यहां रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

साथियों,

सिक्किम में इको-वेलनेस टूरिज़्म का भी बहुत स्कोप है, हम इसे भी प्रमोट कर रहे हैं। स्थानीय लोगों को टूरिज़्म से ज्यादा से ज्यादा आय हो, इसके लिए 1 हजार होमस्टे भी बिल्ड किए जा रहे हैं। Adventure टूरिज़्म के लिए भी इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट किया जा रहा है।

साथियों,

सिक्किम के लिए संभावनाओं का एक और आसमान स्पोर्ट्स में भी है, खेलकूद में भी है। यहाँ के युवाओं ने स्पोर्ट्स में अपनी क्षमता और प्रतिभा को बड़े-बड़े मंचों पर साबित किया है। फुटबाल, बॉक्सिंग, आर्चरी, इन खेलों में यहाँ से निकले खिलाड़ियों ने सिक्किम और देश का नाम रोशन किया है।

साथियों,

इन प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए हम ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ जैसे मूवमेंट चला रहे हैं। यहाँ की State Sports Academy को भी पुनर्जीवित किया गया है। सिक्किम प्रिमियर लीग जैसी sports events को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा संख्या में खिलाड़ियों को खेलने का मौका मिले, उनके खेलने में सुधार आए।

साथियों,

यहाँ जसलाल प्रधान जी के नाम पर state-of-the-art boxing academy का भी प्रस्ताव है। इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स और कल्चरल विलेज जैसे प्रोजेक्ट भी आगे बढ़ रहे हैं। इससे सिक्किम के युवाओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, और वे अपने खेल को और चमका भी पाएंगे।

साथियों,

आज जिन प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है, उनमें हेल्थ सेक्टर से जुड़े कई बड़े काम भी शामिल हैं। एक समय था, जब सिक्किम और नॉर्थ ईस्ट को कांग्रेस की सरकारों ने पूरी तरह नजर अंदाज कर रखा था। यहाँ स्वास्थ्य सेवाएं बहुत सीमित होती थीं। इस कारण से टूरिस्ट भी यहाँ आने में संकोच करते थे, लेकिन आज वो चुनौती भी खत्म हो रही है। आज सिक्किम में करीब 200 आयुष्मान आरोग्य मंदिर काम कर रहे हैं। आज यहाँ 4 डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल्स हैं, Tertiary care हॉस्पिटल है, वेलनेस सेंटर्स हैं, यहाँ आयुष सुविधाओं का भी हजारों लोग लाभ ले रहे हैं। ड्रेजॉन्ग नामग्यल सोवा रिग्पा हॉस्पिटल के लोकार्पण के बाद सिक्किम के हेल्थकेयर सिस्टम को और बूस्ट मिलेगा।

भाइयों-बहनों,

हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ लोगों को सस्ता इलाज भी मिले, हमारी सरकार इसके लिए भी कमिटेड है। पहले हमने गरीबों को मुफ्त इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड दिये थे। अब ये सुविधा 70 वर्ष और उससे ऊपर वाले उम्र के सभी बुजुर्गों को भी दी जा रही है। साथ ही, जन औषधि केन्द्रों पर दवाएं भी बेहद सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं। इन प्रयासों से यहाँ के लोगों का जीवन तो आसान हुआ ही है, इलाज पर होने वाला आपका खर्च भी कम हो रहा है।

साथियों,

आज आर्थिक प्रगति और संसाधनों को लेकर विश्व का नज़रिया तेजी से बदल रहा है। आज दुनिया sustainable lifestyle की बात कर रही है। आज क्लीन एनर्जी पर दुनिया का फोकस है। आज organic फूड्स को प्राथमिकता दी जा रही है। मुझे खुशी है कि हमारा नॉर्थ ईस्ट और सिक्किम इस futuristic ग्रोथ का बड़ा केंद्र है। सिक्किम ने पूरे देश को दिशा दिखाई है। सिक्किम ने तो 10 साल पहले, 2016 में ही पूरे राज्य को organic state घोषित कर दिया था। हमारा डेमाजोंग अब केवल राइस उत्पादन के लिए नहीं जाना जाता, उसकी पहचान अब organic राइस के लिए होने लगी है। बड़ी इलायची, अदरक, हल्दी, एवोकाडो, कीवी, ऐसे कितने ही उत्पाद देश और दुनिया के बाजार तक पहुँच रहे हैं। सिक्किम में medicinal plants की भी सैकड़ों प्रजातियाँ पाई जाती हैं। ये भी स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने का जरिया बन रही है।

साथियों,

Organic और प्राकृतिक खेती का सिक्किम का मॉडल, ये पूरे देश के लिए एक प्रेरणा है। सिक्किम की लाइफस्टाइल, सिक्किम के संकल्प, आज ये देश के विज़न का हिस्सा बन चुके हैं। यहां प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने अब ऑर्गेनिक प्रोसेसिंग प्लांट भी शुरू किये गए हैं। इससे किसानों को बाजार से सीधा जुड़ने का मौका मिल रहा है।

साथियों,

सिक्किम की आर्थिक प्रगति में एक बहुत बड़ी भूमिका यहाँ के सेल्फ हेल्प ग्रुप्स और इन महिलाओं की भी है। इन सेल्फ हेल्प ग्रुप्स के प्रॉडक्ट्स बड़े बाज़ारों तक पहुंचे, डिजिटल इंडिया इसमें एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। “स्वयं सिक्किम” जैसे प्लेटफॉर्म आज इन महिलाओं को सशक्त बना रहे हैं।

साथियों,

क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में सिक्किम की व्यापक क्षमता मौजूद है। यहाँ के पर्यावरण को भी संरक्षित रखते हुए, हमें सिक्किम के इस potential का और इस्तेमाल करना है। मैं जानता हूं, पर्यावरण संरक्षण, ये सिक्किम के लोगों का स्वभाव है। जब देश ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ की पहल शुरू की थी, सिक्किम के लोगों ने कर्तव्य भाव से आगे बढ़ाया, और मुख्यमंत्री जी ने यहां के लोग को प्रेरणा देकर के “मेरो रुख मेरो संतति” पहल भी चला रहे हैं। इसके तहत हर शिशु के जन्म पर 108 पेड़ लगाए जाते हैं। मुझे लगता है ये पहल पूरी दुनिया के लिए एक प्रेरणा है। हमें पर्यावरण से जुड़े अपने प्रयासों को और निष्ठा से आगे बढ़ाना है। ये हमारी ऐसी विरासत है, जो हमें अगली पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखना है।

साथियों,

सिक्किम और तेज गति से आगे बढ़े, विकसित भारत के सपने को गति दे, हमें इसके लिए मिलकर मेहनत करनी है। हमें सिक्किम को नई ऊंचाइयों पर लेकर जाना है। इसी संकल्प के साथ एक बार फिर, आप सभी को इस अवसर पर शुभकामनाएं देता हूं। आप सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं। और आज 50 वर्ष की यात्रा अब हमें दो पड़ाव पूरे करने हैं। जब

सिक्किम की यात्रा के 100 साल होंगे तब क्या करेंगे? सिक्किम की यात्रा के 75 साल होंगे तब तक क्या करेंगे? और देश की आजादी के 100 साल होंगे, विकसित भारत का सपना जो है, 2047 उसके लिए आज से तैयारी शुरू कर करके संकल्प के साथ हम आगे बढ़े। इसी भावना के साथ फिर एक बार हृदय से मैं आप सबका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद। मेरे साथ बोलिए-

भारत माता की जय। भारत माता की जय। भारत माता की जय।

वंदे मातरम। वंदे मातरम। वंदे मातरम।

वंदे मातरम। वंदे मातरम। वंदे मातरम।

वंदे मातरम। वंदे मातरम। वंदे मातरम।

वंदे मातरम।