महान आध्यात्मिक गुरु के सम्मान में स्मारक टिकट और सिक्का जारी किया
“चैतन्य महाप्रभु कृष्ण प्रेम के प्रतिमान थे; उन्होंने अध्यात्म और साधना को जन-साधरण के लिए सुलभ बना दिया”
“भक्ति हमारे ऋषियों द्वारा दिया गया एक भव्य दर्शन है; यह हताशा नहीं, बल्कि आशा और आत्मविश्वास है; भक्ति भय नहीं, उत्साह है”
"हमारे भक्ति मार्गी संतों ने न केवल स्वतंत्रता आंदोलन में, बल्कि हर चुनौतीपूर्ण घड़ी में देश का मार्गदर्शन करने में भी अमूल्य भूमिका निभाई है"
हम देश को 'देव' मानते हैं और 'देव से देश' की दृष्टि से आगे बढ़ते हैं।''
"भारत के विविधता में एकता के मंत्र में विघटन के लिए कोई स्‍थान नहीं"
"'एक भारत श्रेष्ठ भारत' भारत की आध्यात्मिक आस्था है"
"बंगाल आध्यात्मिकता और बौद्धिकता का अविरल ऊर्जा-स्रोत है"

इस पवित्र आयोजन में उपस्थित सभी पूज्य संतगण, आचार्य गौडीय मिशन के श्रद्धेय भक्ति सुंदर सन्यासी जी, कैबिनेट में मेरे सहयोगी अर्जुनराम मेघवाल जी, मीनाक्षी लेखी जी, देश और दुनिया से जुड़े सभी कृष्ण भक्त, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों,

हरे कृष्ण! हरे कृष्ण! हरे कृष्ण! आज आप सबके यहां पधारने से भारत मंडपम् की भव्यता और बढ़ गई है। इस भवन का विचार भगवान् बसवेश्वर के अनुभव मंडपम् से जुड़ा हुआ है। अनुभव मंडपम् प्राचीन भारत में आध्यात्मिक विमर्शों का केंद्र था। अनुभव मंडपम् जन कल्याण की भावनाओं और संकल्पों का ऊर्जा केंद्र था। आज श्रील भक्तिसिद्धान्त सरस्वती गोस्वामी प्रभुपाद जी की 150वीं जयंती के अवसर पर, भारत मंडपम् में वैसी ही ऊर्जा दिखाई दे रही है। हमारी सोच भी थी, कि ये भवन, भारत के आधुनिक सामर्थ्य और प्राचीन मूल्यों, दोनों का केंद्र बनना चाहिए। अभी कुछ ही महीने पहले G-20 समिट के जरिए यहाँ से नए भारत के सामर्थ्य के दर्शन हुए थे। और आज,इसे ‘वर्ल्ड वैष्णव कॉन्वेंशन’ को आयोजित करने इसका इतना पवित्र सौभाग्य मिल रहा है। और यही तो नए भारत की वो तस्वीर है...जहां विकास भी है, और विरासत भी दोनों का संगम है। जहां आधुनिकता का स्वागत भी है, और अपनी पहचान पर गर्व भी है।

ये मेरा सौभाग्य है कि इस पुण्य आयोजन में आप सब संतों के बीच यहाँ उपस्थित हूँ। और मैं अपना सौभाग्य मानता हूं कि आपमें से बहुत कई संतों के साथ मेरा निकट संपर्क रहा है। मुझे अनेक बार आप सबका सानिध्य मिला है। मैं ‘कृष्णम् वंदे जगद्गुरुम्’ की भावना से भगवान के श्री चरणों में प्रणाम करता हूँ। मैं श्रील भक्तिसिद्धान्त प्रभुपाद जी को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुये उन्हें आदरंजलि देता हूं, उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करता हूँ। मैं प्रभुपाद के सभी के अनुयायियों को उनकी 150वीं जन्मजयंती की हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएँ देता हूँ। आज इस अवसर पर मुझे श्रील प्रभुपाद जी की स्मृति में पोस्टल स्टैम्प और स्मारक सिक्का जारी करने का सौभाग्य भी मिला, और मैं इसके लिए भी आप सभी को बधाई देता हूँ।

पूज्य संतगण,

प्रभुपाद गोस्वामी जी की 150वीं जयंती हम ऐसे समय में मना रहे हैं, जब कुछ ही दिन पहले भव्य राममंदिर का सैकड़ों साल पुराना सपना पूरा हुआ है। आज आपके चेहरों पर जो उल्लास, जो उत्साह दिखाई दे रहा है, मुझे विश्वास है, इसमें रामलला के विराजमान होने की खुशी भी शामिल है। ये इतना बड़ा महायज्ञ, संतों की साधना से, उनके आशीर्वाद से ही पूरा हुआ है।

साथियों,

आज हम सब अपने जीवन में ईश्वर के प्रेम को, कृष्ण लीलाओं को, और भक्ति के तत्व को इतनी सहजता से समझते हैं। इस युग में इसके पीछे चैतन्य महाप्रभु की कृपा की बहुत बड़ी भूमिका है। चैतन्य महाप्रभु, कृष्ण प्रेम के प्रतिमान थे। उन्होंने आध्यात्म और साधना को जन साधारण के लिए सुलभ बना दिया, सरल बना दिया। उन्होंने हमें बताया कि ईश्वर की प्राप्ति केवल सन्यास से ही नहीं, उल्लास से भी की जा सकती है। और मैं अपना अनुभव बताता हूं। मैं इस परंपराओं में पला बढ़ा इंसान हूं। मेरे जीवन के जो अलग-अलग पड़ाव हैं उसमें एक पड़ाव कुछ और ही था। मैं उस माहौल में बैठता था, बीच में रहता था, भजन-कीर्तन चलते थे में कोने में बैठा रहता था, सुनता था, मन भर के जी भरकर के उस पल को जीता था लेकिन जुड़ता नहीं था, बैठा रहता था। पता नहीं एक बार मेरे मन को काफी विचार चले। मैंने सोचा ये दूरी किस चीज की है। वो क्या है जो मुझे रोक रहा है। जीता तो हूं जुड़ता नहीं हूं। और उसके बाद जब मैं भजन कीर्तन में बैठने लगा तो खुद भी ताली बजाना, जुड़ जाना और मैं देखता चला गया कि मैं उसमें रम गया था। मैंने चैतन्य प्रभु की इस परंपरा में जो सामर्थ्य है उसका साक्षात्कार किया हुआ है। और अभी जब आप कर रहे थे तो मैं ताली बजाना शुरू हो गया। तो वहां लोगों को लग रहा है पीएम ताली बजा रहा है। पीएम ताली नहीं बजा रहा था, प्रभु भक्त ताली बजा रहा था।

चैतन्य महाप्रभु ने हमें वो दिखाया कि श्रीकृष्ण की लीलाओं को, उनके जीवन को उत्सव के रूप में अपने जीवन में उतारकर कैसे सुखी हुआ जा सकता है। कैसे संकीर्तन, भजन, गीत और नृत्य से आध्यात्म के शीर्ष पर पहुंचा जा सकता है, आज कितने ही साधक ये प्रत्यक्ष अनुभव कर रहे हैं। और जिसको अनुभव का आनंद होता है मुझे उसका साक्षात्कार हुआ है। चैतन्य महाप्रभु ने हमें श्रीकृष्ण की लीलाओं का लालित्य भी समझाया, और जीवन के लक्ष्य को जानने के लिए उसका महत्व भी हमें बताया। इसीलिए, भक्तों में आज जैसी आस्था भागवत जैसे ग्रन्थों के प्रति है, वैसा ही प्रेम, चैतन्य चरितामृत और भक्तमाल के लिए भी है।

साथियों,

चैतन्य महाप्रभु जैसी दैवीय विभूतियाँ समय के अनुसार किसी न किसी रूप से अपने कार्यों को आगे बढ़ाती रहती हैं। श्रील भक्तिसिद्धान्त प्रभुपाद, उन्हीं के संकल्पों की प्रतिमूर्ति थे। साधना से सिद्धि तक कैसे पहुंचा जाता है, अर्थ से परमार्थ तक की यात्रा कैसे होती है, श्रील भक्तिसिद्धान्त जी के जीवन में हमें पग-पग पर ये देखने को मिलता है। 10 साल से कम उम्र में प्रभुपाद जी ने पूरी गीता कंठस्थ कर ली। किशोरावस्था में उन्होंने आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ संस्कृत, व्याकरण, वेद-वेदांगों में विद्वता हासिल कर ली। उन्होंने ज्योतिष गणित में सूर्य सिद्धान्त जैसे ग्रन्थों की व्याख्या की। सिद्धान्त सरस्वती की उपाधि हासिल की, 24 वर्ष की उम्र में उन्होंने संस्कृत स्कूल भी खोल दिया। अपने जीवन में स्वामी जी ने 100 से अधिक किताबें लिखीं, सैकड़ों लेख लिखे, लाखों लोगों को दिशा दिखाई। यानि एक प्रकार से ज्ञान मार्ग और भक्ति मार्ग दोनों का संतुलन जीवन व्यवस्था से जोड़ दिया। ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए, पीर पराई जाने रे’ इस भजन से गांधी जी जिस वैष्णव भाव का गान करते थे, श्रील प्रभुपाद स्वामी ने उस भाव को... अहिंसा और प्रेम के उस मानवीय संकल्प को...देश-विदेश में पहुंचाने का काम किया।

साथियों,

मेरा जन्म तो गुजरात में हुआ है। गुजरात की पहचान ही है कि वैष्णव भाव कहीं भी जगे, गुजरात उससे जरूर जुड़ जाता है। खुद भगवान कृष्ण मथुरा में अवतरित होते हैं, लेकिन, अपनी लीलाओं को विस्तार देने के लिए वो द्वारका आते हैं। मीराबाई जैसी महान कृष्णभक्त राजस्थान में जन्म लेती हैं। लेकिन, श्रीकृष्ण से एकाकार होने वो गुजरात चली आती हैं। ऐसे कितने ही वैष्णव संत हैं, जिनका गुजरात की धरती से, द्वारिका से विशेष नाता रहा है। गुजरात के संत कवि नरसी मेहता उनकी भी जन्मभूमि भी । इसलिए, श्रीकृष्ण से संबंध, चैतन्य महाप्रभु की परंपरा, ये मेरे लिए जीवन का सहज स्वाभाविक हिस्सा है।

साथियों,

मैं 2016 में गौडीय मठ के शताब्दी समारोह में आप सबके बीच आया था। उस समय मैंने आपके बीच भारत की आध्यात्मिक चेतना पर विस्तार से बात की थी। कोई समाज जब अपनी जड़ों से दूर जाता है, तो वो सबसे पहले अपने सामर्थ्य को भूल जाता है। इसका सबसे बड़ा प्रभाव ये होता है कि, जो हमारी खूबी होती है, जो हमारी ताकत होती है, हम उसे ही लेकर हीनभावना का शिकार हो जाते हैं। भारत की परंपरा में, हमारे जीवन में भक्ति जैसा महत्वपूर्ण दर्शन भी इससे अछूता नहीं रहा। यहाँ बैठे युवा साथी मेरी बात से कनेक्ट कर पाएंगे, जब भक्ति की बात आती है, तो कुछ लोग सोचते हैं कि भक्ति, तर्क और आधुनिकता ये विरोधाभासी बातें हैं। लेकिन, असल में ईश्वर की भक्ति हमारे ऋषियों का दिया हुआ महान दर्शन है। भक्ति हताशा नहीं, आशा और आत्मविश्वास है। भक्ति भय नहीं, उत्साह है, उमंग है। राग और वैराग्य के बीच में जीवन में चैतन्य का भाव भरने का सामर्थ्य होता है भक्ति में। भक्ति वो है, जिसे युद्ध के मैदान में खड़े श्रीकृष्ण गीता के 12वें अध्याय में महान योग बताते हैं। जिसकी ताकत से निराश हो चुके अर्जुन अन्याय के खिलाफ अपना गाँडीव उठा लेते हैं। इसलिए, भक्ति पराभव नहीं, प्रभाव का संकल्प है।

लेकिन साथियों,

ये विजय हमें दूसरों पर नहीं, ये विजय हमें अपने ऊपर हासिल करनी है। हमें युद्ध भी अपने लिए नहीं, बल्कि ‘धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे’ की भावना से मानवता के लिए लड़ना है। और यही भावना हमारी संस्कृति में, हमारी रगों में रची-बसी हुई है। इसीलिए, भारत कभी सीमाओं के विस्तार के लिए दूसरे देशों पर हमला करने नहीं गया। जो लोग इतने महान दर्शन से अपरिचित थे, जो इसे समझे नहीं, उनके वैचारिक हमलों ने कहीं न कहीं हमारे मानस को भी प्रभावित किया। लेकिन, हम श्रील प्रभुपाद जैसे संतों के ऋणी हैं, जिन्होंने करोड़ों लोगों को पुनः सच के दर्शन कराए, उन्हें भक्ति की गौरव भावना से भर दिया। आज आज़ादी के अमृतकाल में ‘गुलामी की मानसिकता से मुक्ति’ का संकल्प लेकर देश संतों के उस संकल्प को आगे बढ़ा रहा है।

साथियों,

यहाँ भक्ति मार्ग के इतने विद्वान संतगण बैठे हैं। आप सभी भक्ति मार्ग से भली-भांति परिचित हैं। हमारे भक्ति मार्गी संतों का योगदान,आजादी के आंदोलन में भक्ति आंदोलन की भूमिका, अमूल्य रही है। भारत के हर चुनौतीपूर्ण कालखण्ड में कोई न कोई महान संत, आचार्य, किसी न किसी रूप में राष्ट्र को दिशा देने के लिए सामने आए हैं। आप देखिए, मध्यकाल के मुश्किल दौर में जब हार भारत को हताशा दे रही थी, तब, भक्ति आंदोलन के संतों ने हमें ‘हारे को हरिनाम’, ‘हारे को हरिनाम’ मंत्र दिया। इन संतों ने हमें सिखाया कि समर्पण केवल परम सत्ता के सामने करना है। सदियों की लूट से देश गरीबी की गहरी खाई में था। तब संतों ने हमें त्याग और तितिक्षा से जीवन जीकर अपने मूल्यों की रक्षा करना सिखाया। हमें फिर से ये आत्मविश्वास हुआ कि जब सत्य की रक्षा के लिए अपना सब कुछ बलिदान किया जाता है, तो असत्य का अंत होकर ही रहता है। सत्य की ही विजय होती है- ‘सत्यमेव जयते’। इसीलिए, आजादी के आंदोलन को भी स्वामी विवेकानंद और श्रील स्वामी प्रभुपाद जैसे संतों ने असीम ऊर्जा से भर दिया था। प्रभुपाद स्वामी के पास नेताजी सुभाषचंद्र बोस, और महामना मालवीय जी जैसी हस्तियां उनके आध्यात्मिक मार्गदर्शन लेने आती थीं।

साथियों,

बलिदान देकर भी अमर रहने का ये आत्मविश्वास हमें भक्ति योग से मिलता है। इसीलिए, हमारे ऋषियों ने कहा है- ‘अमृत-स्वरूपा च’ अर्थात्, वह भक्ति अमृत स्वरूपा है। आज इसी आत्मविश्वास के साथ करोड़ों देशवासी राष्ट्र भक्ति की ऊर्जा लेकर अमृतकाल में प्रवेश कर चुके हैं। इस अमृतकाल में हमने अपने भारत को विकसित बनाने का संकल्प लिया है। हम राष्ट्र को देव मानकर, ‘देव से देश’ का विज़न लेकर आगे बढ़ रहे हैं। हमने अपनी ताकत अपनी विविधता को बनाया है, देश के कोने-कोने के सामर्थ्य, यही हमारी ऊर्जा, हमारी ताकत, हमारी चेतना है।

साथियों,

यहाँ इतनी बड़ी संख्या में आप सब लोग एकत्रित हैं। कोई किसी राज्य से है, कोई किसी इलाके से है। भाषा, बोली, रहन-सहन भी अलग-अलग हैं। लेकिन, एक साझा चिंतन सबको कितनी सहजता से जोड़ता है। भगवान् श्रीकृष्ण हमें सिखाते हैं- ‘अहम् आत्मा गुडाकेश सर्व भूताशय स्थितः’। अर्थात्, सभी प्राणियों के भीतर, उनकी आत्मा के रूप में एक ही ईश्वर रहते हैं। यही विश्वास भारत के अन्तर्मन में ‘नर से नारायण’ और ‘जीव से शिव’ की अवधारणा के रूप में रचा-बसा है। इसलिए, अनेकता में एकता का भारत का मंत्र इतना सहज है, इतना व्यापक है कि उसमें विभाजन की गुंजाइश ही नहीं है। हम एक बार ‘हरे कृष्ण’ बोलते हैं, और एक दूसरे के दिलों से जुड़ जाते हैं। इसीलिए, दुनिया के लिए राष्ट्र एक राजनैतिक अवधारणा हो सकती है... लेकिन भारत के लिए तो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’, ये एक आध्यात्मिक आस्था है।

हमारे सामने खुद श्रील भक्ति सिद्धान्त गोस्वामी का जीवन भी एक उदाहरण है! प्रभुपाद जी पुरी में जन्मे, उन्होंने दक्षिण के रामानुजाचार्य जी की परंपरा में दीक्षा ली और चैतन्य महाप्रभु की परंपरा को आगे बढ़ाया। और अपनी इस आध्यात्मिक यात्रा का केंद्र बनाया बंगाल में स्थापित अपने मठ को। बंगाल की धरती में बात ही कुछ ऐसी है कि वहां से अध्यात्म और बौद्धिकता निरंतर ऊर्जा पाती है। ये बंगाल की ही धरती है, जिसने हमें रामकृष्ण परमहंस जैसे संत दिये, स्वामी विवेकानंद जैसे राष्ट्र ऋषि दिये। इस धरती ने श्री अरबिंदो और गुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर जैसे महापुरुष भी दिये, जिन्होंने संत भाव से राष्ट्रीय आंदोलनों को आगे बढ़ाया। यही से राजा राममोहन रॉय जैसे समाजसुधारक भी मिले। बंगाल चैतन्य महाप्रभु और प्रभुपाद जैसे उनके अनुयायियों की तो कर्मभूमि रही ही है। उनके प्रभाव से आज प्रेम और भक्ति एक वैश्विक मूवमेंट बन गए हैं।

साथियों,

आज भारत की गति-प्रगति की हर तरफ चर्चा हो रही है। आधुनिक इनफ्रास्ट्रक्चर में, हाइटेक सेवाओं में भारत विकसित देशों की बराबरी कर रहा है। कितनी ही फील्ड्स में हम बड़े-बड़े देशों से आगे भी निकल रहे हैं। हमें लीडरशिप के रोल में देखा जा रहा है। लेकिन साथ ही, आज भारत का योग भी पूरी दुनिया में घर-घर पहुँच रहा है। हमारे आयुर्वेद और naturopathy की तरफ विश्व का विश्वास और बढ़ता चला जा रहा है। तमाम देशों के प्रेसिडेंट और प्राइम मिनिस्टर आते हैं, delegates आते हैं, तो वो हमारे प्राचीन मंदिरों को देखने जाते हैं। इतनी जल्दी ये बदलाव आया कैसे? ये बदलाव आया कैसे? ये बदलाव आया है, युवा ऊर्जा से! आज भारत का युवा बोध और शोध, दोनों को साथ में लेकर के चलता है। हमारी नई पीढ़ी अब अपनी संस्कृति को पूरे गर्व से अपने माथे पर धारण करती है। आज का युवा Spirituality और Start-ups दोनों की अहमियत समझता है, दोनों की काबिलियत रखता है। इसलिए, हम देख रहे हैं, आज काशी हो या अयोध्या, तीर्थस्थलों में जाने वालों में बहुत बड़ी संख्या हमारे युवाओं की होती है।

भाइयों और बहनों,

जब देश की नई पीढ़ी इतनी जागरूक हो, तो ये स्वाभाविक है कि देश चंद्रयान भी बनाएगा, और ‘चन्द्रशेखर महादेव का धाम भी सजाएगा। जब नेतृत्व युवा करेगा तो देश चंद्रमा पर रोवर भी उतारेगा, और उस स्थान को ‘शिवशक्ति’ नाम देकर अपनी परंपरा को पोषित भी करेगा। अब देश में वंदेभारत ट्रेन भी दौड़ेंगी, और वृन्दावन, मथुरा, अयोध्या का कायाकल्प भी होगा। मुझे ये बताते हुये भी खुशी हो रही है कि हमने नमामि गंगे योजना के तहत बंगाल के मायापुर में सुंदर गंगाघाट का निर्माण भी शुरू किया है।

साथियों,

विकास और विरासत की ये, ये हमारा कदमताल 25 वर्षों के अमृतकाल में ऐसे ही अनवरत चलने वाला है, संतों के आशीर्वाद से चलने वाला है। संतों के आशीर्वाद से हम विकसित भारत का निर्माण करेंगे, और हमारा आध्यात्म पूरी मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगा। इसी कामना के साथ, आप सभी को हरे कृष्ण! हरे कृष्ण! हरे कृष्ण! बहुत बहुत धन्यवाद!

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आने वाले पांच सालों में विकास की नई ऊंचाई पर होगा जम्मू-कश्मीर: उधमपुर में पीएम मोदी
April 12, 2024
कई दशकों के बाद, यह पहली बार है कि जम्मू-कश्मीर में आगामी लोकसभा चुनाव के लिए आतंकवाद, बंद, पथराव, सीमा पर झड़पें इत्यादि मुद्दे नहीं हैं।
विकसित भारत के लिए, विकसित जम्मू-कश्मीर बेहद जरूरी है। कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी जैसी परिवारवादी पार्टियां जम्मू-कश्मीर को फिर से अस्थिरता के दौर में ले जाना चाहती हैं।
आर्टिकल-370 की समाप्ति ने जम्मू-कश्मीर में सभी के लिए समान संवैधानिक अधिकारों को सुनिश्चित किया है, पर्यटन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है तथा गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक अवसरों के लिए IIM और IIT जैसे संस्थान स्थापित हुए हैं।
इंडी गठबंधन ने भारत की संस्कृति के साथ-साथ विकास की भी अवहेलना की और इसका प्रत्यक्ष उदाहरण श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा का विरोध और बहिष्कार है।
अपनी तुष्टिकरण की राजनीति जारी रखने के लिए, इंडी गठबंधन के नेता बड़े बंगलों में रहते थे लेकिन रामलला को एक टेंट में रहने के लिए विवश किया।

भारत माता की जय...भारत माता की जय...भारत माता की जय...सारे डुग्गरदेस दे लोकें गी मेरा नमस्कार! ज़ोर कन्ने बोलो...जय माता दी! जोर से बोलो...जय माता दी ! सारे बोलो…जय माता दी !

मैं उधमपुर, पिछले कई दशकों से आ रहा हूं। जम्मू कश्मीर की धरती पर आना-जाना पीछले पांच दशक से चल रहा है। मुझे याद है 1992 में एकता यात्रा के दौरान यहां जो आपने भव्य स्वागत किया था। जो सम्मान किया था। एक प्रकार से पूरा क्षेत्र रोड पर आ गया था। और आप भी जानते हैं। तब हमारा मिशन, कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने का था। तब यहां माताओं-बहनों ने बहुत आशीर्वाद दिया था।

2014 में माता वैष्णों देवी के दर्शन करके आया था। इसी मैदान पर मैंने आपको गारंटी दी थी कि जम्मू कश्मीर की अनेक पीढ़ियों ने जो कुछ सहा है, उससे मुक्ति दिलाऊंगा। आज आपके आशीर्वाद से मोदी ने वो गारंटी पूरी की है। दशकों बाद ये पहला चुनाव है, जब आतंकवाद, अलगाववाद, पत्थरबाज़ी, बंद-हड़ताल, सीमापार से गोलीबारी, ये चुनाव के मुद्दे ही नहीं हैं। तब माता वैष्णो देवी यात्रा हो या अमरनाथ यात्रा, ये सुरक्षित तरीके से कैसे हों, इसको लेकर ही चिंताएं होती थीं। अगर एक दिन शांति से गया तो अखबार में बड़ी खबर बन जाती थी। आज स्थिति एकदम बदल गई है। आज जम्मू- कश्मीर में विकास भी हो रहा है और विश्वास भी बढ़ रहा है। इसलिए, आज जम्मू-कश्मीर के चप्पे-चप्पे में भी एक ही गूंज सुनाई दे रही है-फिर एक बार...मोदी सरकार ! फिर एक बार...मोदी सरकार ! फिर एक बार...मोदी सरकार !

भाइयों और बहनों,

ये चुनाव सिर्फ सांसद चुनने भर का नहीं है, बल्कि ये देश में एक मजबूत सरकार बनाने का चुनाव है। सरकार मजबूत होती है तो जमीन पर चुनौतियों के बीच भी चुनौतियों को चुनौती देते हुए काम करके दिखाती है। दिखता है कि नहीं दिखता है...दिखता है कि नहीं दिखता है। यहां जो पुराने लोग हैं, उनको 10 साल पहले का मेरा भाषण याद होगा। यहीं मैंने आपसे कहा था कि आप मुझपर भरोसा कीजिए, याद है ना मैंने कहा था कि मुझ पर भरोसा कीजिए। मैं 60 वर्षों की समस्याओं का समाधान करके दिखाउंगा। तब मैंने यहां माताओं-बहनों के सम्मान देने की गारंटी दी थी। गरीब को 2 वक्त के खाने की चिंता न करनी पड़े, इसकी गारंटी दी थी। आज जम्मू-कश्मीर के लाखों परिवारों के पास अगले 5 साल तक मुफ्त राशन की गारंटी है। आज जम्मू कश्मीर के लाखों परिवारों के पास 5 लाख रुपए के मुफ्त इलाज की गारंटी है। 10 वर्ष पहले तक जम्मू कश्मीर के कितने ही गांव थे, जहां बिजली-पानी और सड़क तक नहीं थी। आज गांव-गांव तक बिजली पहुंच चुकी है। आज जम्मू-कश्मीर के 75 प्रतिशत से ज्यादा घरों को पाइप से पानी की सुविधा मिल रही है। इतना ही नहीं ये डिजिटल का जमाना है, डिजिटल कनेक्टिविटी चाहिए, मोबाइल टावर दूर-सुदूर पहाड़ों में लगाने का अभियान चलाया है। 

भाइयों और बहनों,

मोदी की गारंटी यानि गारंटी पूरा होने की गारंटी। आप याद कीजिए, कांग्रेस की कमज़ोर सरकारों ने शाहपुर कंडी डैम को कैसे दशकों तक लटकाए रखा था। जम्मू के किसानों के खेत सूखे थे, गांव अंधेरे में थे, लेकिन हमारे हक का रावी का पानी पाकिस्तान जा रहा था। मोदी ने किसानों को गारंटी दी थी और इसे पूरा भी कर दिखाया है। इससे कठुआ और सांबा के हजारों किसानों को फायदा हुआ है। यही नहीं, इस डैम से जो बिजली पैदा होगी, वो जम्मू कश्मीर के घरों को रोशन करेगी।

भाइयों और बहनों,

मोदी विकसित भारत के लिए विकसित जम्मू-कश्मीर के निर्माण की गारंटी दे रहा है। लेकिन कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी और बाकी सारे दल जम्मू-कश्मीर को फिर उन पुराने दिनों की तरफ ले जाना चाहते हैं। इन ‘परिवार-चलित’ पार्टियों ने, परिवार के द्वारा ही चलने वाली पार्टियों ने जम्मू कश्मीर का जितना नुकसान किया, उतना किसी ने नहीं किया है। यहां तो पॉलिटिकल पार्टी मतलब ऑफ द फैमिली, बाई द फैमिली, फॉर द फैमिली। सत्ता के लिए इन्होंने जम्मू कश्मीर में 370 की दीवार बना दी थी। जम्मू-कश्मीर के लोग बाहर नहीं झांक सकते थे और बाहर वाले जम्मू-कश्मीर की तरफ नहीं झांक सकते थे। ऐसा भ्रम बनाकर रखा था कि उनकी जिंदगी 370 है तभी बचेगी। ऐसा झूठ चलाया। ऐसा झूठ चलाया। आपके आशीर्वाद से मोदी ने 370 की दीवार गिरा दी। दीवार गिरा दी इतना ही नहीं, उसके मलबे को भी जमीन में गाड़ दिया है मैंने। 

मैं चुनौती देता हूं हिंदुस्तान की कोई पॉलीटिकल पार्टी हिम्मत करके आ जाए। विशेष कर मैं कांग्रेस को चुनौती देता हूं। वह घोषणा करें कि 370 को वापस लाएंगे। यह देश उनका मुंह तक देखने को तैयार नहीं होगा। यह कैसे-कैसे भ्रम फैलाते हैँ। कैसे-कैसे लोगों को डरा कर रखते हैं। यह कहते थे, 370 हटी तो आग लग जाएगी। जम्मू-कश्मीर हमें छोड़ कर चला जाएगा। लेकिन जम्मू कश्मीर के नौजवानों ने इनको आइना दिखा दिया। अब देखिए, जब यहां उनकी नहीं चली जम्मू-कश्मीर को लोग उनकी असलीयत को जान गए। अब जम्मू-कश्मीर में उनके झूठे वादे भ्रम का मायाजाल नहीं चल पा रही है। तो ये लोग जम्मू-कश्मीर के बाहर देश के लोगों के बीच भ्रम फैलाने का खेल-खेल रहे हैं। यह कहते हैं कि 370 हटने से देश का कोई लाभ नहीं हुआ। जिस राज्य में जाते हैं, वहां भी बोलते हैं। तुम्हारे राज्य को क्या लाभ हुआ, तुम्हारे राज्य को क्या लाभ हुआ? 

370 के हटने से क्या लाभ हुआ है, वो जम्मू-कश्मीर की मेरी बहनों-बेटियों से पूछो, जो अपने हकों के लिए तरस रही थी। यह उनका भाई, यह उनका बेटा, उन्होंने उनके हक वापस दिए हैं। जरा कांग्रेस के लोगों जरा देश भर के दलित नेताओं से मैं कहना चाहता हूं। यहां के हमारे दलित भाई-बहन हमारे बाल्मीकि भाई-बहन देश आजाद हुआ, तब से परेशानी झेल रहे थे। जरा जाकर उन बाल्मीकि भाई-बहनों से पूछो और गड्डा ब्राह्मण, कोहली से पूछो और पहाड़ी परिवार हों, मचैल माता की भूमि में रहने वाले मेरे पाड्डरी साथी हों, अब हर किसी को संविधान में मिले अधिकार मिलने लगे हैं।

अब हमारे फौजियों की वीर माताओं को चिंता नहीं करनी पड़ती, क्योंकि पत्थरबाज़ी नहीं होती। इतना ही नहीं घाटी की माताएं मुझे आशीर्वाद देती हैं, उनको चिंता रहती थी कि बेटा अगर दो चार दिन दिखाई ना दे। तो उनको लगता था कि कहीं गलत हाथों में तो नहीं फंस गया है। आज कश्मीर घाटी की हर माता चैन की नींद सोती है क्योंकि अब उनका बच्चा बर्बाद होने से बच रहा है। 

साथियो, 

अब स्कूल नहीं जलाए जाते, बल्कि स्कूल सजाए जाते हैं। अब यहां एम्स बन रहे हैं, IIT बन रहे हैं, IIM बन रहे हैं। अब आधुनिक टनल, आधुनिक और चौड़ी सड़कें, शानदार रेल का सफर जम्मू-कश्मीर की तकदीर बन रही है। जम्मू हो या कश्मीर, अब रिकॉर्ड संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु आने लगे हैं। ये सपना यहां की अनेक पीढ़ियों ने देखा है और मैं आपको गारंटी देता हूं कि आपका सपना, मोदी का संकल्प है। आपके सपनों को पूरा करने के लिए हर पल आपके नाम, आपके सपनों को पूरा करने के लिए हर पल देश के नाम, विकसित भारत का सपना पूरा करने के लिए 24/7, 24/74 फॉर 2047, यह मोदी के गारंटी है। 10 सालों में हमने आतंकवादियों और भ्रष्टाचारियों पर घेरा बहुत ही कसा है। अब आने वाले 5 सालों में इस क्षेत्र को विकास की नई ऊंचाई पर ले जाना है।

साथियों,

सड़क, बिजली, पानी, यात्रा, प्रवास वो तो है। सबसे बड़ी बात है कि जम्मू-कश्मीर का मन बदला है। निराशा में से आशा की और बढ़े हैं। जीवन पूरी तरीके से विश्वास से भरा हुआ है, इतना विकास यहां हुआ है। चारों तरफ विकास हो रहा। लोग कहेंगे, मोदी जी अभी इतना कर लिया। चिंता मत कीजिए, हम आपके साथ हैं। आपका साथ उसके प्रति तो मेरा अपार विश्वास है। मैं यहां ना आता तो भी मुझे पता था कि जम्मू कश्मीर का मेरा नाता इतना गहरा है कि आप मेरे लिए मुझे भी ज्यादा करेंगे। लेकिन मैं तो आया हूं। मां वैष्णो देवी के चरणों में बैठे हुए आप लोगों के बीच दर्शन करने के लिए। मां वैष्णो देवी की छत्रछाया में जीने वाले भी मेरे लिए दर्शन की योग्य होते हैं और जब लोग कहते हैं, कितना कर लिया, इतना हो गया, इतना हो गया और इससे ज्यादा क्या कर सकते हैं। मेरे जम्मू कश्मीर के भाई-बहन अपने पहले इतने बुरे दिन देखे हैं कि आपको यह सब बहुत लग रहा है। बहुत अच्छा लग रहा है लेकिन जो विकास जैसा लग रहा है लेकिन मोदी है ना वह तो बहुत बड़ा सोचता है। यह मोदी दूर का सोचता है। और इसलिए अब तक जो हुआ है वह तो ट्रेलर है ट्रेलर। मुझे तो नए जम्मू कश्मीर की नई और शानदार तस्वीर बनाने के लिए जुट जाना है। 

वो समय दूर नहीं जब जम्मू-कश्मीर में भी विधानसभा के चुनाव होंगे। जम्मू कश्मीर को वापस राज्य का दर्जा मिलेगा। आप अपने विधायक, अपने मंत्रियों से अपने सपने साझा कर पाएंगे। हर वर्ग की समस्याओं का तेज़ी से समाधान होगा। यहां जो सड़कों और रेल का काम चल रहा है, वो तेज़ी से पूरा होगा। देश-विदेश से बड़ी-बड़ी कंपनियां, बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां औऱ ज्यादा संख्या में आएंगी। जम्मू कश्मीर, टूरिज्म के साथ ही sports और start-ups के लिए जाना जाएगा, इस संकल्प को लेकर मुझे जम्मू कश्मीर को आगे बढ़ाना है। 

भाइयों और बहनों,

ये ‘परिवार-चलित’ परिवारवादी , परिवार के लिए जीने मरने वाली पार्टियां, विकास की भी विरोधी है और विरासत की भी विरोधी है। आपने देखा होगा कि कांग्रेस राम मंदिर से कितनी नफरत करती है। कांग्रेस और उनकी पूरा इको सिस्टम अगर मुंह से कहीं राम मंदिर निकल गया। तो चिल्लाने लग जाती है, रात-दिन चिल्लाती है कि राम मंदिर बीजेपी के लिए चुनावी मुद्दा है। राम मंदिर ना चुनाव का मुद्दा था, ना चुनाव का मुद्दा है और ना कभी चुनाव का मुद्दा बनेगा। अरे राम मंदिर का संघर्ष तो तब से हो रहा था, जब कि भाजपा का जन्म भी नहीं हुआ था। राम मंदिर का संघर्ष तो तब से हो रहा था जब यहां अंग्रेजी सल्तनत भी नहीं आई थी। राम मंदिर का संघर्ष 500 साल पुराना है। जब कोई चुनाव का नामोनिशान नहीं था। जब विदेशी आक्रांताओं ने हमारे मंदिर तोड़े, तो भारत के लोगों ने अपने धर्मस्थलों को बचाने की लड़ाई लड़ी थी। वर्षों तक, लोगों ने अपनी ही आस्था के लिए क्या-क्या नहीं झेला। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के नेता बड़े-बड़े बंगलों में रहते थे, लेकिन जब रामलला के टेंट बदलने की बात आती थी तो ये लोग मुंह फेर लेते थे, अदालतों की धमकियां देते थे। बारिश में रामलला का टेंट टपकता रहता था और रामलला के भक्त टेंट बदलवाने के लिए अदालतों के चक्कर काटते रहते थे। ये उन करोड़ों-अरबों लोगों की आस्था पर आघात था, जो राम को अपना आराध्य कहते हैं। हमने इन्हीं लोगों से कहा कि एक दिन आएगा, जब रामलला भव्य मंदिर में विराजेंगे। और तीन बातें कभी भूल नहीं सकते। एक 500 साल के अविरत संघर्ष के बाद ये हुआ। आप सहमत हैं। 500 साल के अविरत संघर्ष के बाद हुआ है, आप सहमत हैं। दूसरा, पूरी न्यायिक प्रक्रिया की कसौटी से कस करके, न्याय के तराजू से तौल करके अदालत के निर्णय से ये काम हुआ है, सहमत हैं। तीसरा, ये भव्य राम मंदिर सरकारी खजाने से नहीं, देश के कोटि-कोटि नागरिकों ने पाई-पाई दान देकर बनाया है। सहमत हैं। 

जब उस मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा हुई तो पिछले 70 साल में कांग्रेस ने जो भी पाप किए थे, उनके साथियों ने जो रुकावटें डाली थी, सबको माफ करके, राम मंदिर के जो ट्रस्टी हैं, वो खुद कांग्रेस वालों के घर गए, इंडी गठबंधन वालों के घर गए, उनके पुराने पापों को माफ कर दिया। उन्होंने कहा राम आपके भी हैं, आप प्राण-प्रतिष्ठा में जरूर पधारिये। सम्मान के साथ बुलाया। लेकिन उन्होंने इस निमंत्रण को भी ठुकरा दिया। कोई बताए, वो कौन सा चुनावी कारनामा था, जिसके दबाव में आपने राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा के निमंत्रण को ठुकरा दिया। वो कौन सा चुनावी खेल था कि आपने प्राण-प्रतिष्ठा के पवित्र कार्य को ठुकरा दिया। और ये कांग्रेस वाले, इंडी गठबंधन वाले इसे चुनाव का मुद्दा कहते हैं। उनके लिए ये चुनावी मुद्दा था, देश के लिए ये श्रद्धा का मुद्दा था। ये धैर्य की विजय का मुद्दा था। ये आस्था और विश्वास का मु्द्दा था। ये 500 वर्षों की तपस्या का मुद्दा था।

मैं कांग्रेस से पूछता हूं...आप ने अपनी सरकार के समय दिन-रात इसका विरोध किया, तब ये किस चुनाव का मुद्दा था? लेकिन आप राम भक्तों की आस्था देखिए। मंदिर बना तो ये लोग इंडी गठबंधन वालें के घर प्राण प्रतिष्ठा का आमंत्रण देने खुद गए। जिस क्षण के लिए करोड़ों लोगों ने इंतजार किया, आप बुलाने पर भी उसे देखने नहीं गए। पूरी दुनिया के रामभक्तों ने आपके इस अहंकार को देखा है। ये किस चुनावी मंशा को देखा है। ये चुनावी मंशा थी कि आपने प्राण प्रतिष्ठा का आमंत्रण ठुकरा दिया। आपके लिए चुनाव का खेल है। ये किस तरह की तुष्टिकरण की राजनीति थी। भगवान राम को काल्पनिक कहकर कांग्रेस किसे खुश करना चाहती थी?

साथियों, 

कांग्रेस और इंडी गठबंधन के लोगों को देश के ज्यादातर लोगों की भावनाओं की कोई परवाह नहीं है। इन्हें लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करने में मजा आता है। ये लोग सावन में एक सजायाफ्ता, कोर्ट ने जिसे सजा की है, जो जमानत पर है, ऐसे मुजरिम के घर जाकर के सावन के महीने में मटन बनाने का मौज ले रहे हैं इतना ही नहीं उसका वीडियो बनाकर के देश के लोगों को चिढ़ाने का काम करते हैं। कानून किसी को कुछ खाने से नहीं रोकता। ना ही मोदी रोकता है। सभी को स्वतंत्रता है की जब मन करें वेज खायें या नॉन-वेज खाएं। लेकिन इन लोगों की मंशा दूसरी होती है। जब मुगल यहां आक्रमण करते थे ना तो उनको सत्ता यानि राजा को पराजित करने से संतोष नहीं होता था, जब तक मंदिर तोड़ते नहीं थे, जब तक श्रद्धास्थलों का कत्ल नहीं करते थे, उसको संतोष नहीं होता था, उनको उसी में मजा आता था वैसे ही सावन के महीने में वीडियो दिखाकर वो मुगल के लोगों के जमाने की जो मानसिकता है ना उसके द्वारा वो देश के लोगों को चिढ़ाना चाहते हैं, और अपनी वोट बैंक पक्की करना चाहते हैं। ये वोट बैंक के लिए चिढ़ाना चाहते हैं । आप किसे चिढ़ाना चाहते हैंनवरात्र के दिनों में आपका नॉनवेज खाना,  आप किस मंशा से वीडियो दिखा-दिखा कर के लोगों की भावनाओं को चोट पहुंचा करके, किसको खुश करने का खेल कर रहे हो।  

मैं जानता हूं मैं  जब आज ये  बोल रहा हूं, उसके बाद ये लोग पूरा गोला-बारूद लेकर गालियों की बौछार मुझ पर चलाएंगे, मेरे पीछे पड़ जाएंगे। लेकिन जब बात  बर्दाश्त के बाहर हो जाती है, तो लोकतंत्र में मेरा दायित्व बनता है कि सही चीजों का सही पहलू बताऊं। और मैं वो अपना कर्तव्य पूरा कर रहा हूं। ये लोग ऐसा जानबूझकर इसलिए करते हैं ताकि इस देश की मान्यताओं पर हमला हो। ये इसलिए होता है, ताकि एक बड़ा वर्ग इनके वीडियो को देखकर चिढ़ता रहे, असहज होता रहे। समस्या इस अंदाज से है। तुष्टिकरण से आगे बढ़कर ये इनकी मुगलिया सोच है। लेकिन ये लोग नहीं जानते, जनता जब जवाब देती है तो बड़े-बड़े शाही खानदान के युवराजों को बेदखल होना पड़ता है।

साथियों, 

ये जो परिवार-चलित पार्टियां हैं, ये जो भ्रष्टाचारी हैं, अब इनको फिर मौका नहीं देना है। उधमपुर से डॉ. जितेंद्र सिंह और जम्मू से जुगल किशोर जी को नया रिकॉर्ड बनाकर सांसद भेजना है। जीत के बाद दोबारा जब उधमपुर आऊं तो, स्वादिष्ट कलाड़ी का आनंद ज़रूर लूंगा। आपको मेरा एक काम और करना है। इतना निकट आकर मैं माता वैष्णों देवी जा नहीं पा रहा हूं। तो माता वैष्णों देवी को क्षमा मांगिए और मेरी तरफ से मत्था टेकिए। दूसरा एक काम करोगे। एक और काम करोगे, मेरा एक और काम करोगे, पक्का करोगे। देखिए आपको घर-घर जाना है। कहना मोदी जी उधमपुर आए थे, मोदी जी ने आपको प्रणाम कहा है, राम-राम कहा है। जय माता दी कहा है, कहोगे। मेरे साथ बोलिए

भारत माता की जय !

भारत माता की जय !

भारत माता की जय ! 

बहुत-बहुत धन्यवाद