Students-Parents thank the Prime Minister for cancelling class 12 exams in an impromptu session

प्रधानाध्यापक : नमस्‍ते सर!

मोदीजी : नमस्‍ते!

मोदीजी : मैंने आप सबको disturb नहीं किया ना? आप सब लोग बड़े मज़े की बाते कर रहे थे? Online calorie burn कर रहे थे आप लोग।

प्रधानाध्यापक : नमस्‍कार सर! और आप आ गए सर, आपने हमको join किया उसके लिए बहुत-बहुत शुक्रिया सर। मैंने अभी इनको बताया कि एक special guest आने वाले हैं सर, इन्‍होंने सोचा भी नहीं होगा और सर ये लोग आपके आने से पहले आपकी बहुत बात कर रहे थे। आपके बहुत सारे fan हैं यहां पर।

मोदीजी : अच्‍छा मैं तो अचानक आपके यहां आ गया हूं लेकिन मैं आपको disturb नहीं करना चाहता हूं क्‍योंकि आप बड़े ही हंसी-खुशी के माहौल में थे और मुझे लग रहा था कि अब exam का tension आपको बिल्‍कुल नहीं है। उसके कारण आपकी खुशियों का कोई पार नहीं है, ऐसा दिख रहा था। और आप कमरे में बंद होने के कारण Online calorie कैसे burn करना, वो भी सीख लिये हो।

मोदीजी : अच्‍छा कैसे हैं आप सब लोग?
छात्र : ठीक हैं सर! बहुत अच्‍छे हैं सर!
मोदीजी : आप सब स्‍वस्‍थ हैं?
छात्र : हां सर, स्‍वस्‍थ हैं!
मोदीजी : आपके परिवार के सब सदस्‍य स्‍वस्‍थ हैं?
छात्र : Yes sir!
मोदीजी : अच्‍छा ये परसों जब आपने सुना, उसके पहले tension थी और अब tension गयी, ऐसा है क्‍या?
छात्र : हां सर! बिल्‍कुल सर!
मोदीजी : मतलब आपको exam का tension होता है?
छात्र : जी सर! बहुत होता है!
मोदीजी : फिर तो मेरी किताब लिखना बेकार है, मैंने exam warrior में कहा है कि कभी tension मत रखो, फिर आप tension क्‍यों पालते थे?
छात्र : सर हम रोज़ preparation करते थे, तब tension का बात ही नहीं होता है सर।
मोदीजी : कब tension होता है?
छात्र : सर tension कुछ नहीं लगा सर और युवा की सेहत सबसे ज्‍यादा जरूरी है, इसलिए इतना बेहतरीन निर्णय लिया गया, जिसके लिए हम आपके आभारी रहेंगे आजीवन।
मोदीजी : लेकिन आप बताइये, आपका शुभ नाम क्‍या है?
छात्र : सर हितेश्‍वर शर्मा पंचकुला से।
मोदीजी : हितेश्‍वर शर्माजी! पंचकुला में रहते हैं?
छात्र : जी सर!
मोदीजी : किस सेक्‍टर में?
छात्र : सेक्‍टर दस में सर!
मोदीजी : मैं सात में रहता था, बहुत साल तक रहा हूं वहां।
छात्र : आज ही पता लगा सर मुझे।
मोदीजी : हां, मैं वहां रहता था।
छात्र : जी सर, सर बहुत आपको support करने वाले लोग यहां पर आपको देखना चाहते हैं दुबारा से।
मोदीजी : अच्‍छा ये बताओ भई, आप तो दसवी में topper थे, तो पक्‍का घर में तैयारी होगी कि बारहवी में भी top करेंगे। अब exam ही चले गए तो आपका तो सारा रूक गया?

छात्र : सर मैं वही बता रहा था, अपेक्षाएं होंगी पर मुझे अच्‍छा लगा सर क्‍योंकि मतलब अगर मैं परीक्षा देता तो वो pressure बढ़ता जा रहा था, एक saturation point reach हो चुका था और हम देख रहे थे कि इतना safe भी नहीं है और आपने बिल्‍कुल से इतना बेहतरीन निर्णय ले लिया। और मैं मानता हूं सर जो topper हैं या जो मेहनत करता है, मेहनत कभी बेकार नहीं जाती, वो ज्ञान हमेशा ही हमारे साथ रहता है सर। और जो निंतर पढ़ाई करता आ रहा है, जो consistent है, सर जो भी criteria आएगा, जो भी आप निर्णय लेंगे, तो उसमें वो फिर भी अव्‍वल ही रहेंगे। तो उसमें उन्‍हें इतनी चिंता की जरूरत नहीं है, कुछ लोग कह रहे हैं topper निराश हैं या ऐसे हैं। मैं मानता हूं कि हमने provision तो रखा ही है कि आप दुबारा पेपर दे सकते हैं। तो एक बहुत ही समझा हुआ निर्णय मैं इसको मानता हूं और इसके हम जीवन भर आपके आभारी रहेंगे।

मोदीजी : अच्‍छा बच्‍चों आप जब ये कुछ लोग रहते हैं, बड़े अपने-आप को बड़ा बहादुर मानते हैं। बड़े पहलवान मानते हैं और कहते हैं मैं मास्‍क नहीं पहनूंगा, मैं ये नियम पालन नहीं करूंगा, मैं ये नहीं करूंगा। तब आप लोगों को कैसा लगता है?

छात्र : सर इस नियम को तो मानना ही पड़ेगा सर... तो जैसे अभी आप ने बोला कि जब लोग मास्‍क नहीं डालते हैं या covid guidelines को follow नहीं करते, तो बहुत उस time पर disappointing लगता है क्‍योंकि जो हमारी सरकार है उसने इतनी awareness create की है इस pandemic को लेकर, international organisations वो बहुत awareness create कर रही हैं। जब लोग नहीं समझते इस बात को तब बहुत बुरा लगता है। और मैं आपके साथ share करना चाहूंगी कि हमने और हमारे मतलब locality में कुछ बच्‍चों ने, तो हमने एक awareness drive कुछ महीने पहले चलाई थी जब unlock हुआ था यहां पर। और हमने जैसे नुक्‍कड़ नाटक किये, हमने proper covid guidelines से लेकर लोगों में जगह-जगह जाकर उन्‍हें बताया था कि आपके लिए covid guidelines को follow करना, social distancing रखना, मास्‍क पहनना और उसके wash करना, it is very important और आप लोग इसको follow कीजिए। तो I think कि ऐसे अगर हम अपने level पर भी कुछ initiative लें और खुद responsible बनें तो बहुत बड़ा change आ सकता है।

मोदीजी : अच्‍छा मैं ये जानना चाहूंगा कि आप लोगों ने, आपका जो क्‍योंकि मैं जानता हूं कि जब 12th में बच्‍चे होते हैं तो उनके दिमाग में, परिवार में आगे क्‍या-आगे क्‍या यही चलता रहता है। आप परसों तक तो यानि एक तारीख सुबह तक तो इस mood में थे कि आज ये पढ़ूंगी, कल ये पढ़ेंगे, सुबह पांच बजे उठेंगे, चार बजे उठेंगे, ये करेंगे, वो करेंगे, सब सोचा होगा, सब time table बनाया होगा। अचानक सब चला गया, एक vacuum आ गया, उस vacuum को कैसे भरेंगे आप लोग?

छात्र : नमस्‍कार सर, विधि चौधरी Guwahati Royal Noble School से!
मोदीजी : Guwahati से हैं?
छात्र : हां सर!
मोदीजी : Guwahati से हैं?
छात्र : सर मैं बस यही कहना चाहूंगी आपने जिस तरीके से कहा अभी कि एकाएक सुबह तक सबके मन में इतनी सारी चीजे थी। सर आपने जैसे ही start किया था आपने अपना exam warriors के बारे में आपने बताया था, तो मैं बस एक चीज कहना चाहूंगी इधर सभी से कि मैं दसवी कक्षा में थी जब मतलब जब मेरी दसवी की परीक्षा होने वाली थी और मैं travel कर रही थी, कलकत्ते से यहां आ रही थी और airport में मेरे को आपकी book दिखी। सर मैंने तुरंत ही उसे खरीद लिया था और मेरी दसवी की परीक्षा होने वाली थी। मेरा ये खुद का experience था, सर मैंने एक महीने तक रोज उस book को पढ़ा था और सर इस बार मेरे को मतलब आपने book की शुरूआत ही इस चीज से की थी कि exam को त्‍यौहार की तरह मनाओ। तो सर त्‍यौहार के लिए डरने की क्‍या आवश्‍यकता? मतलब त्‍यौहार के लिए तो हम तैयारी करते हैं कि वो successful हो और आपने सबसे बड़ा मंत्र जो योगा का दिया था आखिर में मतलब आपने जो book में योगा के मंत्र से end की थी। तो सर ये दो चीजें जो हैं वो मन में लगातार थी कि माना परिस्‍थतियां अच्‍छी नहीं थी, सब कुछ था पर ये जो भावना से हमने exams की जो preparation की, मैंने बारहवीं में जिस तरीके से की, सर आप ही को धन्‍यवाद है उस book के लिए कि बिल्‍कुल भी ऐसा नहीं हुआ।

मोदीजी : अच्‍छा मेरे सवाल का जवाब रह गया और एक नौजवान लगातार हाथ ऊपर कर रहे हैं, उनको मौका नहीं मिला है। क्‍या है आपका शुभ नाम?
छात्र : सर मेरा नाम नंदन हेगड़े है।
मोदीजी : नंद हेगड़े कर्नाटक से हैं?
छात्र : हां सर कर्नाटक से, बेंगलुरु से सर!
मोदीजी : हां बताइये!
छात्र : सर मैंने सोचा ये परीक्षा मेरा जिंदगी का अंतिम परीक्षा नहीं है सर, आगे तो बहुत परीक्षा आने वाला है सर। अब हमारे आरोग्‍य को बचा के रखना है और आगे आने वाली परीक्षाओं का सामना करना है।

मोदीजी : अच्‍छा अभी exams से free हो गये, तब मन में क्‍या आईपीएल देखने में time लगायेंगे या champions league final को देखेंगे या French open देखने के लिए दिमाग खपाओगे या जुलाई में Olympic शुरू होने वाला है, उस Olympic के लिए मन लगेगा, भारत से Olympic के लिए कौन लोग जा रहे हैं? उनका background क्‍या है? उसमें मन लगेगा कि फिर 21 तारीख को योगा दिवस है, तो उसमें मन लगेगा, क्‍या लगेगा?
छात्र : सब चीजों में मन लगेगा सर!
मोदीजी : ये चश्‍मे वाली बेटी कुछ कहना चाहती है, कबसे उसे मौका नहीं मिल रहा है उसको।
छात्र : नमस्‍कार सर! सर जैसे ही पता चला आपने हमारे exam सब cancel कर दिये तो पहले तो बहुत ज्‍यादा खुशी हुई कि finally अब एक stress कम हुआ कि अब हमें पता है कि अब हमें सिर्फ हमारे competitive exam के लिए पढ़ना है। पहले होता था कि boards की तैयारी करते फिर हम competitive exam की तैयारी करते। अब ऐसा हो गया कि हमारे पास इतना ज्‍यादा time हो गया कि बहुत अच्‍छे से हमारे competitive exam की तैयारी कर सकते हैं। तो सर मतलब मैं बहुत आभार प्रकट करती हूं।
मोदीजी : तो दिमाग से exam जाता नहीं है?
छात्र : हां सर, बिलकुल नहीं जाता।
मोदीजी : आप घर में हैं तो आपके मम्‍मी-पापा सुनते होंगे सारा अभी?
छात्र : येस सर!
मोदीजी : कहां हैं दिखाओ?
छात्र : सर मैं बुलाती हूं सर!
मोदीजी : कहां हैं दिखाओ?
मोदीजी : नमस्‍तेजी!
अभिभावक : नमस्‍कार सर!
मोदीजी : तो आपको क्‍या लगा, बेटी अब मुक्‍त हो गई तो?
अभिभावक : सर अच्‍छा decision है क्‍योंकि पूरे देश में बहुत ज्‍यादा स्‍थिति खराब है और इन बच्‍चों के ऊपर सर तनाव खत्‍म हो गया और आगे के लिए ये अपने career के लिए तैयारी कर सकते हैं, हमें अच्‍छा लगा।
मोदीजी : चलिए मुझे अच्‍छा लगा आपने बहुत उसको positive लिया है। हां और कोई बच्‍चे कुछ कहना चाहते हैं?
छात्र : नमस्‍कार सर! केन्‍द्रीय विद्यालय बेंगलुरु से हूं सर। सर मैं आपका बहुत बड़ा fan हूं सर।
मोदीजी : Thankyou
छात्र : सर आपका decision बहुत अच्‍छा था सर क्‍योंकि सर सलामत तो पगड़ी हजार, तो सर सलामत तो रखना पड़ेगा।
मोदीजी : Health is wealth, हमारे यहां कहते हैं ना?
छात्र : हां सर, सर आप ही हमारे लिए inspiration हैं।
मोदीजी : अच्‍छा सर सलामत तो पगड़ी हजार तो बराबर है लेकिन सर का मतलब आप ये तो नहीं कर रहे कि दिमाग ही सलामत कि पूरा physical body सोचते हैं?
छात्र : Physical way sir
मोदीजी : अच्‍छा क्‍या करते हैं physical fitness के लिए कितना समय देते हैं और क्‍या करते हैं?
छात्र : मैं हर दिन सुबह उठके तीस मिनट योगा करता हूं सर, योगा और exercise करता हूं सर, मैं और मेरा भाई दोनों साथ में करते हैं सर, मेरा छोटा भाई।
मोदीजी : आपके घरवाले सुन रहे हैं देखिए, फिर वरना पकड़े जाओगे, मैं पूछूंगा।
छात्र : नहीं सर! तीस मिनट हर दिन करता हूं सर, मैं और मेरा भाई दोनों साथ में मिलकर करते हैं सर, हर दिन योगा करते हैं और मैं हर दिन अपने mind को fresh करने के लिए मैं तबला बजाता हूं सर। मैं एक साल से तबला ट्रेनिंग कर रहा हूं, तो हर दिन मैं तबला बजाता हूं तो उससे मेरा mind fresh रहता है सर।
मोदीजी : तो music आपके परिवार के स्‍वाभाग में है सबके?
छात्र : हां-हां, मेरी मम्‍मी भी सितार बजाती थी सर और तानपूरा बजाती थी।
मोदीजी : इसलिए घर में संगीत का वातावरण है।
मोदीजी : अच्‍छा और जिससे अभी तक मुझे बात करने का मौका नहीं मिला है उनको अब मौका दूंगा। अभी एक बच्‍ची जिसने white earphone लगाया है वो मेरे सामने हैं, वो कुछ बताना चाहती हैं।
छात्र : नमस्‍ते सर! मेरा नाम कशिश नेगी है, मैं MRADAV Public School, Solan, Himachal Pradesh से हूं। सर आपसे सिर्फ ये कहना चाहूंगी कि it’s like dream come true, मैंने कभी सोचा नहीं था कि मतलब आपसे ऐसे मुलाकात होगी। और सर आपको thanks बोलना चाहूंगी कि आपने जो भी decision लिया है वो एकदम सही लिया है क्‍योंकि ढेड़ साल हो गया था हमें +2 के बच्‍चों को कि वो सिर्फ +2 में ही थे मतलब उनकी जिंदगी कुछ रूक सी गई थी। कुछ development भी नहीं हो रही थी और कुछ retardation भी नहीं हो रही थी तो सर आपने जो decision लिया उससे मैं बहुत खुश हूं और सर आपको thanks बोलना चाहूंगी सर thankyou.

मोदीजी : जिस बच्‍ची ने उंगली उठाई है, जरा बताइये बेटा।
छात्र : नमस्‍कार सर! मैं दिल्‍ली पब्‍लिक स्‍कूल, जयपुर, राजस्‍थान से बारहवी कक्षा की छात्रा हूं। मेरा नाम जन्‍नत साक्षी है। बारहवी बोर्ड की परीक्षा के लिए आपने जो निर्णय लिया है, मैं उसका स्‍वागत करती हूं। वर्तमान परिस्‍थतियों को देखते हुए यह निर्णय बिलकुल सही है क्‍योंकि बच्‍चों की सुरक्षा और सेहत सर्वोपरी है। हमें सीबीएसई पर अटूट विश्‍वास है कि वो मूल्‍यांकन हेतू जो भी मापदंड निर्धारित करेंगे, वह हमारे हित में ही होगा। मुझे पूरा विश्‍वास है कि हमें हमारी मेहनत का पूरा फल मिलेगा, धन्‍यवाद सर।
मोदीजी : अच्‍छा सब parents जितने भी हैं सारे, सब आ जाएं screen पर, बुला लिजिए अपने माता-पिता अगर हैं तो क्‍योंकि सबको इच्‍छा होगी कि चलिये ये और मेरे लिए भी अच्‍छा हो जाएगा कि आप लोगों को सबको सच बोलना पड़ेगा। नौजवान कोई मेरे सामने दिख रहे हैं, बताईये। सफेद shirt वाले सज्‍जन कुछ बोल रहे हैं।
छात्र 1 : सर मम्‍मी यहां पर हैं नहीं पर वो और मैं जब साथ में बैठते हैं तो वो बताते रहते हैं, मोदीजी कर देंगे, मोदी जी कर देंगे, चिंता मत कर और जैसे-जैसे लॉकडाउन में रहते थे तो दाढ़ी भी बढ़ती थी तो मम्‍मी कहती थी क्‍या करेगा ऐसे, मैंने कहा कि मम्‍मी ऐसे मोदीजी के fan हैं तो ऐसे ही बढ़ा के रखेंगे दाढ़ी।
छात्र 2 : सर मेरा नाम शिवांजलि अग्रवाल है, सर मैं केंद्रीय विद्यालय, जेएनयू, नई दिल्‍ली की छात्रा हूं। सर मैं ये कहना चाहूंगी exams जब cancel हो गये हैं, हमें जितना extra समय मिला है, मैं उसका अपने entrance exams की तैयारी में, अपने competitive exams की तैयारी में जो करूंगी और सर exams cancel करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद।
मोदीजी : अच्‍छा आप लोग ऐसा कीजिए एक कागज में नम्‍बर लिखकर के बैठीये, ताकि मैं बोलूंगा ये नम्‍बर तो वो नम्‍बर में तुरंत बुलाऊंगा। वरना क्‍या हो रहा है कि मुझे आपका नाम तो पता नहीं क्‍योंकि मैं अचानक आ गया हूं, तो मैं ऐसे ही आपको परेशान कर रहा हूं।
अभिभावक : नमस्‍ते सर! हम आपके बहुत बड़े fan हैं। आप जो भी decision लेंगे, बच्‍चों के हित में ही होगा। हम आपके साथ हैं सर, हमेशा आपके साथ रहेंगे।
मोदीजी : नम्‍बर वन?
अभिभावक : नमस्‍कार सर! Thankyou so so much sir, आपका decision बहुत ही बढ़िया था हमारे बच्‍चों के लिए, अभी उनके पास...
मोदीजी : मैंने अभी सबको कहा कि आप इस निर्णय से बाहर जाइए, exam से बाहर निकलिये। कुछ और बाते कर सकते हैं क्‍या?
अभिभावक : बिलकुल सर, बिलकुल! और अच्‍छी बाते करें तो शाहरूख खान को मिलने से इतना अच्‍छा नहीं लगा जितना आज आपको मिलने से लगा सर। It’s a dream come true और ये बहुत अच्‍छा था सर, you are the best और अभी जो हम अपने बच्‍चों के लिए आने वाला time देखेंगे तो उसमें यही चाहेंगे कि ये समय का सदुपयोग करें और अच्‍छे से आगे जाके अपना career बनाएं।
मोदीजी : 26
अभिभावक : Sir, as a dancer I think mental health और physical health के लिए मैं dance करती हूं। तो मैं कथक करती हूं, जब cycling जाने का मन होता है तो मैं cycling करती हूं और सबसे पहली चीज जो मैंने result आने के बाद आपके decision आने के बाद की थी वो मैं बारह बजे तक सोई थी क्‍योंकि exams की वजह से सुबह आठ बजे उठना पड़ता था तो उस दिन में बारह बजे तक सोई थी सर।
छात्र : सर मेरा नाम..... मैं तमिलनाडु से हूं सर! सर मुझे पता था कि ऐसा ही कुछ बोर्ड का cancel होने वाला था सर, तो मैं बहुत कम पढ़ता था। वैसे तो हम राजस्‍थान से हैं पर रहते हम तमिलनाडु में हैं।
मोदीजी : तो आप astrology भी पढ़ते हैं, astrology जानते हैं? तो ये कैसे पता चला कि ये होने वाला है?
छात्र : हां सर! वैसे ही अनुमान लगा लिया था और अच्‍छा decision था... फैमिली के साथ अच्‍छा time spent हो गया लॉकडाउन की वजह से।
मोदीजी : वो तो हफ्ते भर में सब घरवाले नाराज हो जाएंगे देखना। तुम ये नहीं करते हो, तुम जल्‍दी उठते नहीं हो, चलो नहा लो, तुम नहाते नहीं हो, चलिये तुम्‍हारे पापा को आने का time हो गया, अब देखिए डांट पड़ने वाली है।
छात्र : नमस्‍ते सर! मेरा नाम तमन्‍ना है, मैं डीएवी मॉडल स्‍कूल, West Bengal से हूं। जैसा कि आपने कहा हमारे पास बहुत सारा time है तो लॉकडाउन में मैंने और मेरे दोस्‍त ने एक youtube channel start किया था, तो उस पर भी फोकस कर सकते हैं। और उसके साथ-साथ मैंने...
मोदीजी : क्‍या नाम है? Youtube channel का क्‍या नाम है?
छात्र : tamannasharmilee… तो उस पर हम लोग अलग-अलग type के videos डालते हैं। एक हमने छोटी सी poetry करी थी, उस पर भी video डाला है। एक short film है, वो भी डाला है।
मोदीजी : 21, हां बताओ बेटा!
छात्र : सर मेरे दादी जी और मेरे पापा के साथ हूं।
अभिभावक : Sir thankyou very much for everything you have done for our country sir. Thankyou very-very much. I don’t have any more words to say. आपने जो कुछ भी किया हर क्षेत्र में, Thankyou very-very much.
छात्र : सर मेरे से ज्‍यादा मेरी दादीजी updated हमेशा रहती हैं, आपकी हर news follow करती हैं और मुझे बताती रहती हैं कि आज ये announcement हुआ, आज ये हुआ। वो आपकी बहुत बड़ी fan हैं।
मोदीजी : अच्‍छा तो दादीजी को सारी राजनीति का पता है?
छात्र : हां सर! दादीजी को पूरी राजनीति का पता है। राजनीति news से सारी updated रहती हैं।
मोदीजी : अच्‍छा आजादी के इस बार पिच्‍छतर वर्ष हैं। आजादी के पिच्‍छतर साल हो रहे हैं। क्‍या आप लोग आजादी के जंग में आप जिस जिले में रह रहे हैं, वहां क्‍या घटना हुई थी? आजादी के समय क्‍या हुआ था? उस पर एक बड़ा अच्‍छा essay लिख सकते हैं क्‍या?
छात्र : हां सर! बिलकुल लिख सकते हैं।
मोदीजी : Research करेंगे?
छात्र : Yes sir!
मोदीजी : पक्‍का?
छात्र : Yes sir!
मोदीजी : चलिए बढ़िया!
अभिभावक : सर मैं आपकी बड़ी fan हूं सर। सर आपने जो decision लिया है वो बहुत अच्‍छा decision है सर हमे लगा। आपने मतलब सब बच्‍चों के बारे में सोचा, ये मुझे बहुत अच्‍छा लगा सर, मैं आपकी बड़ी fan हूं सर और जो आपने कश्‍मीर में जो धारा 370 हटाई थी, सर वो भी मुझे बहुत अच्‍छा लगा सर, बहुत अच्‍छा सर decision था वो।
मोदीजी : धन्‍यवादजी!
छात्र : सर ये मेरे मम्‍मी-पापा हैं!
मोदीजी : उनको सबको पता चल गया कि आपने मुझे क्‍या-क्‍या बताया है, अब आपको follow करना पड़ेगा।
अभिभावक : सर मैं कुछ कहना चाहता हूं सर! सर आपके सारे गुणों का बहुत सम्‍मान करता हूं पर आपकी इमानदारी का मैं कायल हूं सर। लेकिन सर एक गुजारिश है आपसे कि अभी भी हमारे भारत देश में जो इमानदारी से काम करना चाहते हैं उनका बहुत शोषण होता है सर। इसमें कृपया करके कुछ ऐसी नीति बनाएं कि उन लोगों को सम्‍मान मिले जिससे उनको उनकी इमानदारी को देखते हुए बच्‍चे अनुसरण करें, दूसरे अनुसरण करें।
मोदीजी : नीति तो बनती है लेकिन कुछ लोगों को नियत जो होती है वो रूकावट बनती है। हम सब मिलकर के वातावरण बनाएंगे तो जरूर बनेगा, सब अच्‍छा हो सकता है।
मोदीजी : 31?
छात्र : जय हिंद सर!
मोदीजी : जय हिंद! हां बताईये बेटा क्‍या कहना चाहती हो?
छात्र : सर मेरा नाम अरनी सामले हैं, मैं Annie Besant School, Indore से हूं। सर अभी जो आपने decision लिया वो तो अच्‍छा था ही उसके अलावा भी...
मोदीजी : आपका इंदौर किस बात के लिए मशहूर है?
छात्र : Cleanliness स्‍वच्‍छता!
मोदीजी : इंदौर ने जिस प्रकार से कमाल किया है स्‍वच्‍छता को लेकर के ये वकई सबमें चर्चा है इसकी। ये नम्‍बर पूरा दिखता नहीं बेटा, तुम्‍हारा नम्‍बर पांच है क्‍या?
छात्र : नमस्‍कार सर! सर मैं जवाहर नवोदय विद्यालय, मंडी, हिमाचल प्रदेश से हूं। सर मेरे बाबा आपके बहुत बड़े fan हैं।
मोदीजी : ये आपका गांव कहां पड़ता है जी?
अभिभावक : हिमाचल प्रदेश के पास जिला मंडी है। मंडी से नजदीक है आठ-नौ किलोमीटर... और ठीक हैं?
मोदीजी : मैं ठीक हूं! पहले तो मुझे आपके यहां से sevbadi . खाने को मिलती थी।
चलिये मुझे बहुत अच्‍छा लगा, आप सब लोगों से बात करने का मुझे मौका मिला और मेरा ये विश्‍वास और दृढ़ हुआ है कि भारत का युवा Positive भी है और Practical भी है। Negative thoughts की जगह आप लोग हर difficulty और challenge को भी अपनी ताकत बना लेते हैं। ये हमारे देश के युवाओं की एक विशेषता है। घर में रहकर आप सब युवाओं ने जितने innovations किये हैं, जितनी नयी-नयी चीजें सीखीं हैं उसने आप के अंदर के नया self confidence दिया है। और मैं देख रहा था आज मैं तो अचानक आ गया, आपको मालूम भी नहीं था फिर भी आप एक भी बातचीत करके ना आप लड़खडा़ए हैं, आप जैसे अपने teacher के साथ रोज बात करते हैं या अपने parents के साथ रोज बात करते हैं, वैसे ही मेरे से कर रहे हैं। ये जो अपनापन हैं ना, ये मेरे लिए बड़ी खुशी की बात है। मेरे लिए ये अनुभव बहुत आनंददायक है कि मैं मेरे देश के इतने कोने में बैठे हुए इन बच्‍चों के साथ इतनी सहजता से मैं बात कर पा रहा हूं। वरना तो कभी क्‍या होता है वो देखते ही चौंक जाता है अरे आप हैं, फिर वो बात ही नहीं करता है। लेकिन मैं देख रहा हूं कि आप लोग कुछ भी भुले बिना बड़ी विश्‍वास के साथ बात कर रहे हैं। ये मेरे लिए बहुत अच्‍छा अनुभव है।

साथियों,
आपके अनुभव जीवन में हर पड़ाव पर आपके बहुत काम आने वाले हैं। अगल कठिन से कठिन समय है उसको बार-बार याद करके रोने-चिल्‍लाने में समय बर्बाद मत कीजिए, कठिन समय से भी कुछ सीखा होगा, वो सीख को लेकर के आगे बढ़ेंगे आपको बहुत ताकत मिलेगी। आप जिस भी field में जाएंगे वहां काफी कुछ नया कर पाएंगे। आपने देखा होगा schools में, college में हमें team spirit के बारे में बार-बार कहा जाता है, सिखाया जाता है। United strength के relations हमें दिये जाते हैं। लेकिन कोरोना की मुश्किलों की बीच हमें ये relations करीब से देखने का, समझने का, जीने का एक प्रकार से नये तरीके से अवसर मिला है। कैसे हमारे समाज में हर किसी ने एक-दूसरे का हाथ थामा, कैसे देश ने team spirit से इतने बड़े challenge का सामना किया है। ये सब हमने experience किया है। Public participation और team work ये experience मुझे पक्‍का विश्‍वास है आपको भी एक नयी ताकत देंगे।

साथियों,
कठिन से कठिन समय में भी जितना हमारे देश का, हम लोग इतिहास देखेंगे तो पता चलेगा इस बार भी मैं जब भी किसी से बात करता हूं, जैसे मैं अभी एक बेटी बता रही थी, उसके परिवार के दो लोग उसने खो दिये। ये छोटी चीज नहीं होती जिंदगी में लेकिन फिर भी उसके आंखों में एक विश्‍वास झलख रहा है। सबको लग रहा है ठीक है आफत आई है लेकिन हम विजयी होकर निकलेंगे। हर हिन्‍दुस्‍तान के मुंह से, हर भारतीय के मुंह से यही आवाज निकल रही है, पूरी वैश्‍विक महामारी है, पूरी शताब्‍दी में कभी ऐसा संकट नहीं आया है, पिछली चार-पांच पीढ़ी में किसी ने सुना नहीं, किसी ने देखा नहीं, ऐसा हम लोगों के काल खंड में आ गया है। लेकिन फिर भी हर हिन्‍दुस्‍तानी का एक ही आवाज निकलती है, नहीं हम इसको भी मात करेंगे, हम इससे भी निकलेंगे और नई ऊर्जा के साथ देश को आगे ले जाएंगे। और मिलकर के आगे बढ़ना, यही तो हमारा संकल्‍प है और मुझे पूरा भरोसा है आप आगे जहां भी जाएंगे इसी तरह एक-साथ मिलकर के आगे बढ़ते रहेंगे और देश को नई ऊचाईयों तक ले जाएंगे।

और जैसा मैंने कहा पांच जून पर्यावरण दिवस है, कुछ ना कुछ कीजिए environment के लिए क्‍योंकि ये पृथ्‍वी को प्रकृति को बचाना हम सबको दायित्‍व बनता है। उसी प्रकार से इक्‍कीस जून, याद है ना अंतरराष्‍ट्रीय योगा दिवस है और UN में ये निर्णय जितने हुए हैं ना, ये योगा दिवस ऐसा है कि दुनिया के सबसे अधिक देशों ने इसका समर्थन किया। UN में करीब-करीब सब देशों ने इसका समर्थन किया, पहले कभी ऐसा हुआ नहीं था। तो ये योगा दिवस में आप भी अपने परिवार में रहकर के योगा को जरूर अपनाइए, योगा कीजिए और मैंने कहा बहुत सारे मैचेज हैं, ओलम्‍पिक हैं, जानना चाहिए हमारे देश के कौन होनहार खिलाड़ी इस बार ओलम्‍पिक में जा रहे हैं। ओलम्‍पिक में जाने वाले खिलाड़ियों ने कितनी मेहनत की है, कैसी कठिन परिस्‍थतियों में वो आगे आए हैं, ये जानने से हमें एक नई प्रेरणा मिलती है, हमें एक नई ताकत मिलती है। और इसलिए मुझे विश्‍वास है कि हम सब नौजवान इस समय का maximum सदुपयोग करेंगे।

इस कोरोना काल खंड में जैसे वैक्‍सिनेशन करना है, आपके परिवार में भी कुछ लोग होंगे, जिसकी रजिस्‍ट्री वगरह करने का काम आप कर सकते हैं। अगल-बगल के लोगों की रजिस्‍ट्री करवाकर के काम करोगे और जब भी जैसे-जैसे वैक्‍सीन आती जाएगी, वैक्‍सीन लोगों को मिलती जाएगी। तो सेवा के भाव से भी जरूर किसी ना किसी काम से जोड़िए। मेरी आप सबको बहुत शुभाकामनाएं हैं। आपके माता-पिताजी का आप पर आशीर्वाद बना रहे। आपके आपने सपने लेकर के आप जियें और आपके सपनों के लिए आपके मां-बाप को गर्व होगा, ऐसा मुझे पूरा विश्‍वास है। मुझे बहुत अच्‍छा लगा, मैं अचानक आपके बीच में घुस गया। आप हंसी-मजाक की बाते कर रहे थे, चुटकुले सुना रहे थे लेकिन मैंने आकर के थोड़ा disturb कर दिया आपको। लेकिन मुझे बहुत अच्‍छा लगा। मैं आपका बहुत आभारी हूं।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद!

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प्रधानमंत्री मोदी का ‘IANS’ के साथ इंटरव्यू
May 27, 2024

पहले तो मैं आपकी टीम को बधाई देता हूं भाई, कि इतने कम समय में आपलोगों ने अच्छी जगह बनाई है और एक प्रकार से ग्रासरूट लेवल की जो बारीक-बारीक जानकारियां हैं। वह शायद आपके माध्यम से जल्दी पहुंचती है। तो आपकी पूरी टीम बधाई की पात्र है।

Q1 - आजकल राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल को पाकिस्तान से इतना endorsement क्यों मिल रहा है ? 370 ख़त्म करने के समय से लेकर आज तक हर मौक़े पर पाकिस्तान से उनके पक्ष में आवाज़ें आती हैं ?

जवाब – देखिए, चुनाव भारत का है और भारत का लोकतंत्र बहुत ही मैच्योर है, तंदरुस्त परंपराएं हैं और भारत के मतदाता भी बाहर की किसी भी हरकतों से प्रभावित होने वाले मतदाता नहीं हैं। मैं नहीं जानता हूं कि कुछ ही लोग हैं जिनको हमारे साथ दुश्मनी रखने वाले लोग क्यों पसंद करते हैं, कुछ ही लोग हैं जिनके समर्थन में आवाज वहां से क्यों उठती है। अब ये बहुत बड़ी जांच पड़ताल का यह गंभीर विषय है। मुझे नहीं लगता है कि मुझे जिस पद पर मैं बैठा हूं वहां से ऐसे विषयों पर कोई कमेंट करना चाहिए लेकिन आपकी चिंता मैं समझ सकता हूं।

 

Q 2 - आप ने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ मुहिम तेज करने की बात कही है अगली सरकार जब आएगी तो आप क्या करने जा रहे हैं ? क्या जनता से लूटा हुआ पैसा जनता तक किसी योजना या विशेष नीति के जरिए वापस पहुंचेगा ?

जवाब – आपका सवाल बहुत ही रिलिवेंट है क्योंकि आप देखिए हिंदुस्तान का मानस क्या है, भारत के लोग भ्रष्टाचार से तंग आ चुके हैं। दीमक की तरह भ्रष्टाचार देश की सारी व्यवस्थाओं को खोखला कर रहा है। भ्रष्टाचार के लिए आवाज भी बहुत उठती है। जब मैं 2013-14 में चुनाव के समय भाषण करता था और मैं भ्रष्टाचार की बातें बताता था तो लोग अपना रोष व्यक्त करते थे। लोग चाहते थे कि हां कुछ होना चाहिए। अब हमने आकर सिस्टमैटिकली उन चीजों को करने पर बल दिया कि सिस्टम में ऐसे कौन से दोष हैं अगर देश पॉलिसी ड्रिवन है ब्लैक एंड व्हाइट में चीजें उपलब्ध हैं कि भई ये कर सकते हो ये नहीं कर सकते हो। ये आपकी लिमिट है इस लिमिट के बाहर जाना है तो आप नहीं कर सकते हो कोई और करेगा मैंने उस पर बल दिया। ये बात सही है..लेकिन ग्रे एरिया मिनिमल हो जाता है जब ब्लैक एंड व्हाइट में पॉलिसी होती है और उसके कारण डिसक्रिमिनेशन के लिए कोई संभावना नहीं होती है, तो हमने एक तो पॉलिसी ड्रिवन गवर्नेंस पर बल दिया। दूसरा हमने स्कीम्स के सैचुरेशन पर बल दिया कि भई 100% जो स्कीम जिसके लिए है उन लाभार्थियों को 100% ...जब 100% है तो लोगों को पता है मुझे मिलने ही वाला है तो वो करप्शन के लिए कोई जगह ढूंढेगा नहीं। करप्शन करने वाले भी कर नहीं सकते क्योंकि वो कैसे-कैसे कहेंगे, हां हो सकता है कि किसी को जनवरी में मिलने वाला मार्च में मिले या अप्रैल में मिले ये हो सकता है लेकिन उसको पता है कि मिलेगा और मेरे हिसाब से सैचुरेशन करप्शन फ्री गवर्नेंस की गारंटी देता है। सैचुरेशन सोशल जस्टिस की गारंटी देता है। सैचुरेशन सेकुलरिज्म की गारंटी देता है। ऐसे त्रिविध फायदे वाली हमारी दूसरी स्कीम, तीसरा मेरा प्रयास रहा कि मैक्सिमम टेक्नोलॉजी का उपयोग करना। टेक्नोलॉजी में भी..क्योंकि रिकॉर्ड मेंटेन होते हैं, ट्रांसपेरेंसी रहती है। अब डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर में 38 लाख करोड़ रुपए ट्रांसफर किए हमने। अगर राजीव गांधी के जमाने की बात करें कि एक रुपया जाता है 15 पैसा पहुंचता है तो 38 लाख करोड़ तो हो सकता है 25-30 लाख करोड़ रुपया ऐसे ही गबन हो जाते तो हमने टेक्नोलॉजी का भरपूर उपयोग किया है। जहां तक करप्शन का सवाल है देश में पहले क्या आवाज उठती थी कि भई करप्शन तो हुआ लेकिन उन्होंने किसी छोटे आदमी को सूली पर चढ़ा दिया। सामान्य रूप से मीडिया में भी चर्चा होती थी कि बड़े-बड़े मगरमच्छ तो छूट जाते हैं, छोटे-छोटे लोगों को पकड़कर आप चीजें निपटा देते हो। फिर एक कालखंड ऐसा आया कि हमें पूछा जाता था 19 के पहले कि आप तो बड़ी-बड़ी बातें करते थे क्यों कदम नहीं उठाते हो, क्यों अरेस्ट नहीं करते हो, क्यों लोगों को ये नहीं करते हो। हम कहते थे भई ये हमारा काम नहीं है, ये स्वतंत्र एजेंसी कर रही है और हम बदइरादे से कुछ नहीं करेंगे। जो भी होगा हमारी सूचना यही है जीरो टोलरेंस दूसरा तथ्यों के आधार पर ये एक्शन होना चाहिए, परसेप्शन के आधार पर नहीं होना चाहिए। तथ्य जुटाने में मेहनत करनी पड़ती है। अब अफसरों ने मेहनत भी की अब मगरमच्छ पकड़े जाने लगे हैं तो हमें सवाल पूछा जा रहा है कि मगरमच्छों को क्यों पकड़ते हो। ये समझ में नहीं आता है कि ये कौन सा गैंग है, खान मार्केट गैंग जो कुछ लोगों को बचाने के लिए इस प्रकार के नैरेटिव गढ़ती है। पहले आप ही कहते थे छोटों को पकड़ते हो बड़े छूट जाते हैं। जब सिस्टम ईमानदारी से काम करने लगा, बड़े लोग पकड़े जाने लगे तब आप चिल्लाने लगे हो। दूसरा पकड़ने का काम एक इंडिपेंडेंट एजेंसी करती है। उसको जेल में रखना कि बाहर रखना, उसके ऊपर केस ठीक है या नहीं है ये न्यायालय तय करता है उसमें मोदी का कोई रोल नहीं है, इलेक्टेड बॉडी का कोई रोल नहीं है लेकिन आजकल मैं हैरान हूं। दूसरा जो देश के लिए चिंता का विषय है वो भ्रष्ट लोगों का महिमामंडन है। हमारे देश में कभी भी भ्रष्टाचार में पकड़े गए लोग या किसी को आरोप भी लगा तो लोग 100 कदम दूर रहते थे। आजकल तो भ्रष्ट लोगों को कंधे पर बिठाकर नाचने की फैशन हो गई है। तीसरा प्रॉब्लम है जो लोग कल तक जिन बातों की वकालत करते थे आज अगर वही चीजें हो रही हैं तो वो उसका विरोध कर रहे हैं। पहले तो वही लोग कहते थे सोनिया जी को जेल में बंद कर दो, फलाने को जेल में बंद कर दो और अब वही लोग चिल्लाते हैं। इसलिए मैं मानता हूं आप जैसे मीडिया का काम है कि लोगों से पूछे कि बताइए छोटे लोग जेल जाने चाहिए या मगरमच्छ जेल जाने चाहिए। पूछो जरा पब्लिक को क्या ओपिनियन है, ओपिनियन बनाइए आप लोग।

 

Q3- नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक सबने गरीबी हटाने की बात तो की लेकिन आपने आत्मनिर्भर भारत पर जोर दिया, इसे लेकर कैसे रणनीति तैयार करते हैं चाहे वो पीएम स्वनिधि योजना हो, पीएम मुद्रा योजना बनाना हो या विश्वकर्मा योजना हो मतलब एकदम ग्रासरूट लेवल से काम किया ?

जवाब – देखिए हमारे देश में जो नैरेटिव गढ़ने वाले लोग हैं उन्होंने देश का इतना नुकसान किया। पहले चीजें बाहर से आती थी तो कहते थे देखिए देश को बेच रहे हैं सब बाहर से लाते हैं। आज जब देश में बन रहा है तो कहते हैं देखिए ग्लोबलाइजेशन का जमाना है और आप लोग अपने ही देश की बातें करते हैं। मैं समझ नहीं पाता हूं कि देश को इस प्रकार से गुमराह करने वाले इन ऐलिमेंट्स से देश को कैसे बचाया जाए। दूसरी बात है अगर अमेरिका में कोई कहता है Be American By American उसपर तो हम सीना तानकर गर्व करते हैं लेकिन मोदी कहता है वोकल फॉर लोकल तो लोगों को लगता है कि ये ग्लोबलाइजेशन के खिलाफ है। तो इस प्रकार से लोगों को गुमराह करने वाली ये प्रवृत्ति चलती है। जहां तक भारत जैसा देश जिसके पास मैनपावर है, स्किल्ड मैनपावर है। अब मैं ऐसी तो गलती नहीं कर सकता कि गेहूं एक्सपोर्ट करूं और ब्रेड इम्पोर्ट करूं..मैं तो चाहूंगा मेरे देश में ही गेहूं का आटा निकले, मेरे देश में ही गेहूं का ब्रेड बने। मेरे देश के लोगों को रोजगार मिले तो मेरा आत्मनिर्भर भारत का जो मिशन है उसके पीछे मेरी पहली जो प्राथमिकता है कि मेरे देश के टैलेंट को अवसर मिले। मेरे देश के युवाओं को रोजगार मिले, मेरे देश का धन बाहर न जाए, मेरे देश में जो प्राकृतिक संसाधन हैं उनका वैल्यू एडिशन हो, मेरे देश के अंदर किसान जो काम करता है उसकी जो प्रोडक्ट है उसका वैल्यू एडिशन हो वो ग्लोबल मार्केट को कैप्चर करे और इसलिए मैंने विदेश विभाग को भी कहा है कि भई आपकी सफलता को मैं तीन आधारों से देखूंगा एक भारत से कितना सामान आप..जिस देश में हैं वहां पर खरीदा जाता है, दूसरा उस देश में बेस्ट टेक्नोलॉजी कौन सी है जो अभीतक भारत में नहीं है। वो टेक्नोलॉजी भारत में कैसे आ सकती है और तीसरा उस देश में से कितने टूरिस्ट भारत भेजते हो आप, ये मेरा क्राइटेरिया रहेगा...तो मेरे हर चीज में सेंटर में मेरा नेशन, सेंटर में मेरा भारत और नेशन फर्स्ट इस मिजाज से हम काम करते हैं।

 

Q 4 - एक तरफ आप विश्वकर्माओं के बारे में सोचते हैं, नाई, लोहार, सुनार, मोची की जरूरतों को समझते हैं उनसे मिलते हैं तो वहीं दूसरी तरफ गेमर्स से मिलते हैं, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की बात करते हैं, इन्फ्लुएंसर्स से आप मिलते हैं इनकी अहमियत को भी सबके सामने रखते हैं, इतना डाइवर्सीफाई तरीके से कैसे सोच पाते हैं?

जवाब- आप देखिए, भारत विविधताओं से भरा हुआ है और कोई देश एक पिलर पर बड़ा नहीं हो सकता है। मैंने एक मिशन लिया। हर डिस्ट्रिक्ट का वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट पर बल दिया, क्यों? भारत इतना विविधता भरा देश है, हर डिस्ट्रिक्ट के पास अपनी अलग ताकत है। मैं चाहता हूं कि इसको हम लोगों के सामने लाएं और आज मैं कभी विदेश जाता हूं तो मुझे चीजें कौन सी ले जाऊंगा। वो उलझन नहीं होती है। मैं सिर्फ वन डिस्ट्रिक, वन प्रोडक्ट का कैटलॉग देखता हूं। तो मुझे लगता है यूरोप जाऊंगा तो यह लेकर जाऊंगा। अफ्रीका जाऊंगा तो यह लेकर जाऊंगा। और हर एक को लगता है एक देश में। यह एक पहलू है दूसरा हमने जी 20 समिट हिंदुस्तान के अलग-अलग हिस्से में की है। क्यों? दुनिया को पता चले कि दिल्ली, यही हिंदुस्तान नहीं है। अब आप ताजमहल देखें तो टूरिज्म पूरा नहीं होता जी मेरे देश का। मेरे देश में इतना पोटेंशियल है, मेरे देश को जानिए और समझिए और इस बार हमने जी-20 का उपयोग भारत को विश्व के अंदर भारत की पहचान बनाने के लिए किया। दुनिया की भारत के प्रति क्यूरियोसिटी बढ़े, इसमें हमने बड़ी सफलता पाई है, क्योंकि दुनिया के करीब एक लाख नीति निर्धारक ऐसे लोग जी-20 समूह की 200 से ज्यादा मीटिंग में आए। वह अलग-अलग जगह पर गए। उन्होंने इन जगहों को देखा, सुना भी नहीं था, देखा वो अपने देश के साथ कोरिलिरेट करने लगे। वो वहां जाकर बातें करने लगे। मैं देख रहा हूं जी20 के कारण लोग आजकल काफी टूरिस्टों को यहां भेज रहे हैं। जिसके कारण हमारे देश का टूरिज्म को बढ़ावा मिला।

इसी तरह आपने देखा होगा कि मैंने स्टार्टअप वालों के साथ मीटिंग की थी, मैं वार्कशॉप करता था। आज से मैं 7-8 साल पहले, 10 साल पहले शुरू- शुरू में यानी मैं 14 में आया। उसके 15-16 के भीतर-भीतर मैंने जो नए स्टार्टअप की दुनिया शुरू हुई, उनकी मैंने ऐसे वर्कशॉप की है तो मैं अलग-अलग कभी मैंने स्पोर्ट्स पर्सन्स के की, कभी मैंने कोचों के साथ की कि इतना ही नहीं मैंने फिल्म दुनिया वालों के साथ भी ऐसी मीटिंग की।

मैं जानता हूं कि वह बिरादरी हमारे विचारों से काफी दूर है। मेरी सरकार से भी दूर है, लेकिन मेरा काम था उनकी समस्याओं को समझो क्योंकि बॉलीवुड अगर ग्लोबल मार्केट में मुझे उपयोगी होता है, अगर मेरी तेलुगू फिल्में दुनिया में पॉपुलर हो सकती है, मेरी तमिल फिल्म दुनिया पॉपुलर हो सकती है। मुझे तो ग्लोबल मार्केट लेना था मेरे देश की हर चीज का। आज यूट्यूब की दुनिया पैदा हुई तो मैंने उनको बुलाया। आप देश की क्या मदद कर सकते हैं। इंफ्लुएंसर को बुलाया, क्रिएटिव वर्ल्ड, गेमिंम अब देखिए दुनिया का इतना बड़ा गेमिंग मार्केट। भारत के लोग इन्वेस्ट कर रहे हैं, पैसा लगा रहे हैं और गेमिंग की दुनिया में कमाई कोई और करता है तो मैंने सारे गेमिंग के एक्सपर्ट को बुलाया। पहले उनकी समस्याएं समझी। मैंने देश को कहा, मेरी सरकार को मुझे गेमिंग में भारतीय लीडरशिप पक्की करनी है।

इतना बड़ा फ्यूचर मार्केट है, अब तो ओलंपिक में गेमिंग आया है तो मैं उसमें जोड़ना चाहता हूं। ऐसे सभी विषयों में एक साथ काम करने के पक्ष में मैं हूं। उसी प्रकार से देश की जो मूलभूत व्यवस्थाएं हैं, आप उसको नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। हमें गांव का एक मोची होगा, सोनार होगा, कपड़े सिलने वाला होगा। वो भी मेरे देश की बहुत बड़ी शक्ति है। मुझे उसको भी उतना ही तवज्जो देना होगा। और इसलिए मेरी सरकार का इंटीग्रेटेड अप्रोच होता है। कॉम्प्रिहेंसिव अप्रोच होता है, होलिस्टिक अप्रोच होता है।

 

Q 5 - डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया उसका विपक्ष ने मजाक भी उड़ाया था, आज ये आपकी सरकार की खास पहचान बन गए हैं और दुनिया भी इस बात का संज्ञान ले रही है, इसका एक उदहारण यूपीआई भी है।

जवाब – यह बात सही है कि हमारे देश में जो डिजिटल इंडिया मूवमेंट मैंने शुरू किया तो शुरू में आरोप क्या लगाए इन्होंने? उन्होंने लगाई कि ये जो सर्विस प्रोवाइडर हैं, उनकी भलाई के लिए हो रहा है। इनको समझ नहीं आया कि यह क्षेत्र कितना बड़ा है और 21वीं सदी एक टेक्नॉलॉजी ड्रिवन सेंचुरी है। टेक्नोलॉजी आईटी ड्रिवन है। आईटी इन्फोर्स बाय एआई। बहुत बड़े प्रभावी क्षेत्र बदलते जा रहे हैं। हमें फ्यूचरस्टीक चीजों को देखना चाहिए। आज अगर यूपीआई न होता तो कोई मुझे बताए कोविड की लड़ाई हम कैसे लड़ते? दुनिया के समृद्ध देश भी अपने लोगों को पैसे होने के बावजूद भी नहीं दे पाए। हम आराम से दे सकते हैं। आज हम 11 करोड़ किसानों को 30 सेकंड के अंदर पैसा भेज सकते हैं। अब यूपीआई अब इतनी यूजर फ्रेंडली है तो क्योंकि यह टैलेंट हमारे देश के नौजवानों में है। वो ऐसे प्रोडक्ट बना करके देते हैं कि कोई भी कॉमन मैन इसका उपयोग कर सकता है। आज मैंने ऐसे कितने लोग देखे हैं जो अपना सोशल मीडिया अनुभव कर रहे हैं। हमने छह मित्रों ने तय किया कि छह महीने तक जेब में 1 पैसा नहीं रखेंगे। अब देखते हैं क्या होता है। छह महीने पहले बिना पैसे पूरी दुनिया में हम अपना काम, कारोबार करके आ गए। हमें कोई तकलीफ नहीं हुई तो हर कसौटी पर खरा उतर रहा है। तो यूपीआई ने एक प्रकार से फिनटेक की दुनिया में बहुत बड़ा रोल प्ले किया है और इसके कारण इन दिनों भारत के साथ जुड़े हुए कई देश यूपीआई से जुड़ने को तैयार हैं क्योंकि अब फिनटेक का युग है। फिनटेक में भारत अब लीड कर रहा है और इसलिए दुर्भाग्य तो इस बात का है कि जब मैं इस विषय को चर्चा कर रहा था तब देश के बड़े-बड़े विद्वान जो पार्लियामेंट में बैठे हैं वह इसका मखौल उड़ाते थे, मजाक उड़ाते थे, उनको भारत के पोटेंशियल का अंदाजा नहीं था और टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य का भी अंदाज नहीं था।

 

Q 6 - देश के युवा भारत का इतिहास लिखेंगे ऐसा आप कई बार बोल चुके हैं, फर्स्ट टाइम वोटर्स का पीएम मोदी से कनेक्ट के पीछे का क्या कारण है?

एक मैं उनके एस्पिरेशन को समझ पाता हूं। जो पुरानी सोच है कि वह घर में अपने पहले पांच थे तो अब 7 में जाएगा सात से नौ, ऐसा नहीं है। वह पांच से भी सीधा 100 पर जाना चाहता है। आज का यूथ हर, क्षेत्र में वह बड़ा जंप लगाना चाहता है। हमें वह लॉन्चिंग पैड क्रिएट करना चाहिए, ताकि हमारे यूथ के एस्पिरेशन को हम फुलफिल कर सकें। इसलिए यूथ को समझना चाहिए। मैं परीक्षा पर चर्चा करता हूं और मैंने देखा है कि मुझे लाखों युवकों से ऐसी बात करने का मौका मिलता है जो परीक्षा पर चर्चा की चर्चा चल रही है। लेकिन वह मेरे साथ 10 साल के बाद की बात करता है। मतलब वह एक नई जनरेशन है। अगर सरकार और सरकार की लीडरशिप इस नई जनरेशन के एस्पिरेशन को समझने में विफल हो गई तो बहुत बड़ी गैप हो जाएगी। आपने देखा होगा कोविड में मैं बार-बार चिंतित था कि मेरे यह फर्स्ट टाइम वोटर जो अभी हैं, वह कोविड के समय में 14-15 साल के थे अगर यह चार दीवारों में फंसे रहेंगे तो इनका बचपन मर जाएगा। उनकी जवानी आएगी नहीं। वह बचपन से सीधे बुढ़ापे में चला जाएगा। यह गैप कौन भरेगा? तो मैं उसके लिए चिंतित था। मैं उनसे वीडियो कॉन्फ्रेंस से बात करता था। मैं उनको समझाता था का आप यह करिए। और इसलिए हमने डेटा एकदम सस्ता कर दिया। उस समय मेरा डेटा सस्ता करने के पीछे लॉजिक था। वह ईजिली इंटरनेट का उपयोग करते हुए नई दुनिया की तरफ मुड़े और वह हुआ। उसका हमें बेनिफिट हुआ है। भारत ने कोविड की मुसीबतों को अवसर में पलटने में बहुत बड़ा रोल किया है और आज जो डिजिटल रिवॉल्यूशन आया है, फिनटेक का जो रिवॉल्यूशन आया है, वह हमने आपत्ति को अवसर में पलटा उसके कारण आया है तो मैं टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य को समझता हूं। मैं टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देना चाहता हूं।

प्रधानमंत्री जी बहुत-बहुत धन्यवाद आपने हमें समय दिया।

नमस्कार भैया, मेरी भी आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं, आप भी बहुत प्रगति करें और देश को सही जानकारियां देते रहें।