कोरोना महामारी ने 130 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं और महत्वाकांक्षाओं को प्रभावित नहीं किया: प्रधानमंत्री मोदी
हाल के महीनों में भारत में बहुत रिफार्म हए हैं, ये व्यापार को आसान और लालफीताशाही से दूर रखने वाले हैं: पीएम मोदी
लोकल को ग्लोबल से जोड़ता है आत्मनिर्भर भारत: प्रधानमंत्री

भारत और अमेरिका में विशिष्ट अतिथिगण,

नमस्ते,

‘यूएस-इंडिया स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप फोरम (आईएसपीएफ)’ द्वारा अमेरिका भारत शिखर सम्मेलन 2020 के लिए विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों को एक मंच पर लाना निश्चित तौर पर अद्भुत है। भारत एवं अमेरिका को एक-दूसरे के और करीब लाने में ‘यूएस-आईएसपीएफ’ द्वारा किए गए अथक प्रयास अत्यंत सराहनीय हैं।

मैं पिछले कई वर्षों से जॉन चैंबर्स को भली-भांति जानता हूं। भारत से उनका अत्यंत मजबूत जुड़ाव रहा है। कुछ वर्ष पहले उन्हें ‘पद्मश्री’ से नवाजा गया था।

मित्रों,

इस वर्ष की थीम निश्चित तौर पर अत्यंत प्रासंगिक है - नई चुनौतियों का सामना करना। जब वर्ष 2020 की शुरुआत हुई थी, तब क्या किसी ने कल्पना भी की थी कि आखिरकार यह कैसा साल साबित होगा? एक वैश्विक महामारी ने हर किसी को बुरी तरह प्रभावित किया है। यह हमारी सुदृढ़ता, हमारी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों, हमारी आर्थिक प्रणालि‍यों सभी की कड़ी परीक्षा ले रही हैं।

वर्तमान परिस्थिति में नए नजरिये की सख्त जरूरत है। एक ऐसा नजरिया जिसमें विकास के प्रति दृष्टिकोण मानव केंद्रित हो, जिसमें सभी के बीच सहयोग की प्रबल भावना हो।

मित्रों,

भावी योजना बनाते समय हमें अपनी क्षमताओं को बढ़ाने, गरीबों को सुरक्षित करने और भविष्य में हमारे नागरिकों की बीमारी से रक्षा सुनिश्चित करने पर फोकस करना चाहिए। भारत इसी मार्ग पर चल रहा है। लॉकडाउन की कारगर व्यवस्था को सबसे पहले अपनाने वाले देशों में भारत भी शामिल है। भारत भी उन देशों में से एक है जिन्होंने सबसे पहले सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय के रूप में मास्क और फेस कवरिंग का उपयोग करने की वकालत की थी। यही नहीं, भारत जैसे कुछ देशों ने ही सबसे पहले ‘सामाजिक दूरी बनाए रखने’ के बारे में जन जागरूकता अभियान चलाया है। भारत में रिकॉर्ड समय में चिकित्सा संबंधी बुनियादी अवसंरचना को काफी तेजी से बढ़ा दिया गया है – चाहे वे कोविड अस्पताल हों, आईसीयू की व्यापक क्षमता हो, इत्यादि। जनवरी में सिर्फ एक टेस्टिंग लैब थी, जबकि अब हमारे पास देश भर में लगभग सोलह सौ लैब हैं।

इन सब ठोस प्रयासों का ही यह उल्लेखनीय परिणाम है कि 1.3 अरब लोगों और सीमित संसाधनों वाले भारत सहित सिर्फ कुछ देशों में ही प्रति मिलियन मृत्यु दर पूरी दुनिया में सबसे कम है। देश में मरीजों के स्वस्थ होने यानी रिकवरी दर भी निरंतर बढ़ रही है। मुझे इस बात की बड़ी खुशी है कि हमारा कारोबारी समुदाय, विशेषकर छोटे कारोबारी इस दिशा में अत्यंत सक्रिय रहे हैं। लगभग नगण्य से शुरुआत करने वाले हमारे कारोबारियों ने हमें दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा पीपीई किट निर्माता बना दिया है।

यह दरअसल अत्यंत मजबूती से उभरने के लिए ‘चुनौती को भी चुनौती देने’ की भारत की अंतर्निहित भावना के ठीक अनुरूप है। पिछले कुछ महीनों में राष्ट्र ने कोविड के साथ-साथ बाढ़, दो बार चक्रवाती तूफान, टिड्डियों के हमले जैसे कई अन्य संकटों का भी सामना किया है। हालांकि, इन संकटों ने लोगों के संकल्प को और मजबूत कर दिया है।

मित्रों,

कोविड-19 और लॉकडाउन की पूरी अवधि के दौरान भारत सरकार ने यह बात ठान रखी थी- हर हालत में गरीबों की रक्षा करनी होगी। भारत के गरीबों के लिए चलाई जा रही ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना’ विश्व भर में कहीं भी शुरू की गई सबसे बड़ी सहायता प्रणालि‍यों में से एक है। 800 मिलियन लोगों को मुफ्त अनाज दिया जा रहा है। यह योजना 8 माह से निरंतर चलाई जा रही है। 800 मिलियन लोगों का मतलब है: संयुक्त राज्य अमेरिका की कुल आबादी से दोगुनी से भी अधिक। लगभग 80 मिलियन परिवारों को मुफ्त रसोई गैस मुहैया कराई जा रही है। लगभग 345 मिलियन किसानों और जरूरतमंद लोगों को नकद सहायता दी गई है। इस योजना ने लगभग 200 मिलियन कार्य दिवस सृजित कर प्रवासी श्रमिकों को अत्यंत जरूरी रोजगार प्रदान किए हैं।

मित्रों,

महामारी ने कई क्षेत्रों को प्रभावित किया हैं। लेकिन इससे 1.3 अरब भारतीयों की आकांक्षाएं और महत्वाकांक्षाएं बेअसर रही हैं। हाल के महीनों में, कई दूरगामी सुधार हुए हैं। इनमें कारोबार को आसान बनाना और लालफीताशाही में कमी लाना शामिल है। दुनिया के सबसे बड़े आवासीय कार्यक्रम पर सक्रियता से काम हो रहा है। अक्षय ऊर्जा के विस्तार पर काम हो रहा है। रेल, सड़क और वायु संपर्क-मार्ग बढ़ाया जा रहा है। हमारा देश एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की स्थापना के लिए एक विशेष डिजिटल मॉडल तैयार कर रहा है। हम करोड़ों लोगों को बैंकिंग, कर्ज, डिजिटल भुगतान और बीमा उपलब्ध कराने के लिए सर्वश्रेष्ठ फिन-टेक (वित्तीय तकनीक) का उपयोग कर रहे हैं। ये सभी पहल विश्व स्तरीय तकनीक और सर्वश्रेष्ठ वैश्विक प्रक्रियाओं का उपयोग करके की जा रही हैं।

मित्रों,

इस महामारी ने दुनिया को यह भी दिखाया है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के विकास से जुड़े फैसले सिर्फ लागत पर आधारित नहीं होने चाहिए। उन्हें भरोसे के आधार पर भी आगे बढ़ाना चाहिए। भौगोलिक क्षेत्र की सामर्थ्य के साथ, कंपनियां अब विश्वसनीयता और नीतिगत स्थायित्व पर भी विचार कर रही हैं। भारत ऐसी जगह है, जहां ये सभी विशेषताएं हैं।

परिणामस्वरूप, भारत विदेशी निवेश के लिए अग्रणी स्थलों में से एक के रूप में उभर रहा है। चाहे यह अमेरिका हो या खाड़ी देश, चाहे यूरोप हो या आस्ट्रेलिया- दुनिया हम पर विश्वास करती है। इस साल हमें 20 अरब डॉलर का विदेशी निवेश प्रवाह हासिल हुआ है। गूगल, अमेजन और मुबाडाला इन्वेस्टमेंट्स ने भारत के लिए दीर्घकालिक योजनाओं का ऐलान किया हैं।

मित्रों,

भारत एक पारदर्शी और पूर्व अनुमानित कर व्यवस्था की पेशकश करता है। हमारी व्यवस्था ईमानदार करदाताओं को प्रोत्साहित करती है और समर्थन देती है। हमारा जीएसटी एक एकीकृत, पूर्ण रूप से आईटी समर्थ अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था है। दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता से पूरी वित्तीय व्यवस्था के लिए जोखिम कम हुआ है। हमारे व्यापक श्रम सुधारों से नियोक्ताओं के लिए अनुपालन का बोझ कम होगा। इससे कामगारों को सामाजिक सुरक्षा भी मिलेगी।

मित्रों,

विकास को गति देने में निवेश के महत्व को कम नहीं आंका जा सकता। हम मांग और आपूर्ति दोनों पक्ष पर नजर बनाए हुए हैं। भारत को दुनिया में सबसे कम कर वाला देश बनाने और नई विनिर्माण इकाइयों को प्रोत्साहन देने पर काम हो रहा है। नागरिकों की सहायता में अनिवार्य ई-प्लेटफॉर्म आधारित ‘फेसलेस एसेसमेंट’ एक दूरगामी कदम साबित होगा। करदाता चार्टर भी इसी दिशा में उठाया गया एक कदम है। बॉन्ड बाजार में जारी नियामकीय सुधारों से निवेशकों के लिए पहुंच में सुधार सुनिश्चित होंगे। बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश के लिए ‘सॉवरेन वेल्थ फंड्स’ और ‘पेंशन फंड्स’ को कर में छूट दी गई हैं। 2019 में भारत में एफडीआई में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़ोतरी इसलिए भी अहम है, क्योंकि वैश्विक एफडीआई प्रवाह में 1 प्रतिशत की गिरावट रही है। इससे हमारी एफडीआई व्यवस्था की सफलता का पता चलता है। उक्त सभी कदमों से एक उज्ज्वल और ज्यादा समृद्ध भविष्य सुनिश्चित होगा। ये मजबूत वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी योगदान करेंगे।

मित्रों,

1.3 अरब भारतीयों को ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाने के एक मिशन पर लगा दिया गया है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ स्थानीय (लोकल) को विश्व (ग्लोबल) के साथ मिला देता है। इससे एक ग्लोबल फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में भारत की ताकत सुनिश्चित होती है। वक्त के साथ भारत ने दिखाया है कि वैश्विक हित ही हमारा लक्ष्य है। हमारी व्यापक स्थानीय आवश्यकताओं के बावजूद, हमने अपने वैश्विक दायित्व को निभाने में संकोच नहीं किया है। हम दुनिया में जेनेरिक दवाओं के सबसे बड़े उत्पादक के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को निभाते रहे हैं। हमने दुनिया में लगातार इनकी आपूर्ति सुनिश्चित की है। हम कोविड-19 के लिए वैक्सीन पर शोध के मोर्चे पर भी अग्रणी रहे हैं। एक आत्मनिर्भर और शांतिपूर्ण भारत एक बेहतर विश्व सुनिश्चित करता है।

‘आत्मनिर्भर भारत’ का मतलब भारत को महज निष्क्रिय बाजार से ग्लोबल वैल्यू चेन के बीचोंबीच एक सक्रिय विनिर्माण हब में बदलना है।

मित्रों,

आगे का रास्ता अवसरों से भरा हुआ है। ये अवसर सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में मौजूद हैं। इसमें मुख्य आर्थिक क्षेत्रों के साथ ही सामाजिक क्षेत्र भी आते हैं। हाल में कोयला, खनन, रेलवे, रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा सहित कई क्षेत्रों को खोल दिया गया है।

मोबाइल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल डिवाइस, फार्मा क्षेत्रों के लिए उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की गई हैं, इनके प्रति खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। अन्य चैम्पियन क्षेत्रों के लिए भी ऐसी ही योजनाएं बनाई जा रही हैं। कृषि विपणन में सुधार किए गए हैं और 14 अरब डॉलर की कृषि वित्तपोषण सुविधाओं से बड़ी संख्या में अवसर सामने आए हैं।

मित्रों,

भारत में मौजूद चुनौतियों के लिए आपके पास एक ऐसी सरकार है, जो नतीजे देने में भरोसा करती है। इस सरकार के लिए ईज ऑफ लिविंग (सुगम जीवनशैली) उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितना ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (कारोबारी सुगमता)। आप एक युवा देश की ओर देख रहे हैं, जिसकी 65 प्रतिशत जनसंख्या की उम्र 35 वर्ष से कम है। आप एक आकांक्षी देश की ओर देख रहे हैं, जिसने खुद को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का फैसला किया है। यह वह समय है, जब हमने स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में प्रवेश किया है। आप ऐसे देश की ओर देख रहे हैं, जहां राजनीतिक स्थायित्व और नीतिगत निरंतरता है। आप ऐसे देश की ओर देख रहे हैं, जो लोकतंत्र और विविधता के लिए प्रतिबद्ध है।

आइए, हमारे साथ इस यात्रा का हिस्सा बनिए।

आपका धन्यवाद।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
Jo khelega woh khilega, always cheer for Bharat: PM Modi meets India's CWG medallists

Media Coverage

Jo khelega woh khilega, always cheer for Bharat: PM Modi meets India's CWG medallists
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
आपने सिर्फ पदकों की संख्या ही नहीं बढ़ाई, बल्कि पूरी पीढ़ी को तैयार किया: CWG चैंपियंस से पीएम मोदी
August 10, 2026

प्रधानमंत्री – मेरे यहां, मुझे यहां लगभग 12-13 साल हो गए इसी मकान में, अगर मैंने regularly और हर बार किसी को रिसिव किया है, किसी को मैं मिला हूं, तो खिलाड़ी हैं। पिछले 10-12 साल हो गए, आप लोगों के पुरुषार्थ के कारण, भारत को लगातार विजय दिलाने के आपके प्रयासों के कारण और उत्तरोत्तर सफलता में नई ऊंचाईयां पार करने की परंपरा के कारण, जो काम शायद हम स्कूलों में जाकर कहें कि नहीं नहीं भई खेलना चाहिए, ये करना चाहिए, वो काम स्कूलों में जाकर के हम कर सकते थे, उससे ज्यादा आपका मेडल उनको inspire करता है।

प्रधानमंत्री – तुमने मुझे वादा किया था पिछली बार कि तुम्हारी दोनों बेटियां खिलाड़ी बन जाएंगी?

खिलाड़ी - हाँ जी अभी वे उमर की छोटी हैं, अगले कॉमनवेल्थ में एक घर में तीन मेडल लाकर दिखाएंगी।

प्रधानमंत्री – पक्का।

खिलाड़ी – हाँ जी।

खिलाड़ी – जब मैं दौड़ रहा था, जब मेरा इवेंट था 29 को, तो उस दिन गुरुपूर्णिमा थी, तो उस दिन मेरे गुरू को मैंने एक गिफ्ट दे दिया।

प्रधानमंत्री – बड़ी शान बढ़ाई आपने। इतनी आंसू टपक रहे थे, मुझे लगता है कि आंसू के हर बूंद से जैसे गोल्ड मेडल टपक रहा है।

खिलाड़ी – मैं बहुत ज्यादा खुशी थी, इमोशनल भी थे उसी दिन, खुशी ज्यादा था और मैं इसलिए रोई थी कि मेरा पेरिस आलंपिक में मेरा 1 Kg में मेडल रह गई थी और एक प्लेयर्स की लाइफ में क्या क्या हमको फेस करना पड़ता है। तो ये 4 साल के अंदर में कितना क्या क्या कुछ मैंने फेस किया था, हर टाइम injury ही चल रहे थे और family problem, वो सब हो रहा था। तो बहुत मुश्किल से मैं ये 4 साल फेस किया था। तो वो सब जब पोडियम में जब मैं खड़ी थी सर और हमारी जो फ्लैग ऊपर जाते हैं और हमारे नेशनल एंथम जब बजते हैं तो सर हम रुक नहीं सकते सर, अपना आप आंसू निकलते हैं।

प्रधानमंत्री – बहुत बहुत बढ़िया

प्रधानमंत्री – आपके इस अचीवमेंट को सिर्फ आपका अचीवमेंट मानता हूं, ऐसा नहीं है, ये आपका विजय आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बन जाता है।

खिलाड़ी – सब डर रहे थे हमसे कि इंडिया के साथ फाइट आ गई, अब तो हम पहली फाइट ही हार जायेंगे, हमारा मेडल भी नहीं आयेगा।

प्रधानमंत्री – यानी मान के चलते हैं।

खिलाड़ी – हाँ सर।

प्रधानमंत्री – क्या हुआ, वो restaurant वालों से झगड़ा कर रही थी?

खिलाड़ी – हम लोगों का जो इतना अच्छा परफॉर्मेंस था, लास्ट डे था और सब जीत के गए थे और पूरा इंडिया के लोग थे। तो थोड़ा सा मुझे बुरा लग रहा। तो मैंने उनको अच्छे से बोला रिक्वेस्ट किया था सर, फिर उन्होंने मान भी लिया, अभी चेंज भी हो गया सर।

प्रधानमंत्री – इस विजय की परिस्थिति खुशी, आनंद, अपने साथियों के साथ और गेम पूरे हो चुके हैं। तो हसी मजाक मस्ती का मूड ऐसे समय उस मैप पर नजर जाना और उसको रजिस्टर करना और तुरंत सिर्फ मेडल लेते समय देश खड़ा हो जाता है ऐसा नहीं, भीतर से देश का भाव मैं सच बताता हूँ ये वीडियो सामान्य नहीं है आपका, लंबे समय तक लोगों को याद रहेगा। ये बॉक्सिंग वालों से भी दुनिया के खिलाड़ी अब डरने लगे हैं।

खिलाड़ी – जरूर सर, पुरे सभी डरे हुए थे। एक के बाद एक गोल्ड मेडल गोल्ड मेडल आ रहे थे और मतलब पूरा लास्ट में ऐसे धमाका जैसा हो गया बिल्कुल। जिस तरीके से हम लोगों को सपोर्ट मिल रहा है, हमें बैक टू बैक कंपटीशन मिल रहा है वो एक बहुत बड़ी बात है और हमारे जितने भी यंग एथलीट है वो लोग सभी जैसे खेलो इंडिया स्कीम से आए हुए हैं और ये एक बहुत बड़ा changes ला रहा है पूरे स्पोर्ट्स में ही।

प्रधानमंत्री – अगर आप लोग खेलो इंडिया की प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं और प्रतिष्ठा सिर्फ वहां जाकर के रिबिन काटने से नहीं होगी। आप वैसे ही खेलेंगे जैसे एक छोटा विद्यार्थी, एक छोटा नौजवान, छोटा खिलाड़ी खेलता है। यह बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन करेगा। क्योंकि अभी तो हमें बहुत आगे जाना है, बहुत मेडल लाना है। कारगिल विजय दिवस पर किसकी विजय हुई थी?

खिलाड़ी – उस दिन कारगिल डे था वैसे और जिस दिन मैंने पाकिस्तान के साथ फाइट किया था सर, वो उसी दिन का था। तो मैं एक इंडियन आर्मी से हूं, तो मैंने उस दिन मैं पहले से बहुत वो था कि सर पाकिस्तान को हराना है। तो मैंने वो पाकिस्तान एक तरफ मैंने 5-0 से हराया, तो मैंने हमारा इंडियन आर्मी का कारगिल हीरोज़ को मैंने डेडिकेट किया किया था सर।

प्रधानमंत्री – आपको यह याद रहना और आप स्वयं फौज से हैं तो, मैं जरूर मानता हूं कि देश के वीर जवानों को आपने जो भाव प्रकट किया ना कि, मैं कारगिल के विजेताओं को मेरा मेडल समर्पित करता हूं। उसने उस विजय पर चार चांद लगा दिए और जिसको पराजित करना था उसी को किया आपने।

खिलाड़ी – वो पाकिस्तान की बात चल रही है, मुझे किस्सा याद आ गया सर। 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे और मेरी पाकिस्तान के साथ पहली फाइट आ गई थी और वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे तो मिलिट्री वाले के फोन आए कि भई पाकिस्तान से नहीं हारना है। तो फिर मैं फर्स्ट राउंड 4-1 से जीत गया। सेकंड राउंड 3-2 से जीत गया, पर दोनों के सर लग गए आपस में, तो दोनों के लग गए कट और फाइट तो मैं जीत गया।

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – उसके बाद फिर दोनों चले गए हॉस्पिटल में टांके लगवाने के लिए। फिर 2014 में आप फर्स्ट टाइम प्रधानमंत्री जी बने थे और जो हमारे साथ आर्मी का कोच गया हुआ था उसका नाम नरेंद्र राणा था और फिर वो कई देर तक सोच के मेरे को बोला कि भाईजान एक बात बोलूं, मैं हां बोलो, बोला भाईजान आपका नाम नरेंद्र है। आपके कोच का नाम नरेंद्र है, आपके प्रधानमंत्री का नाम नरेंद्र है, तो मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई है।

प्रधानमंत्री – सिर्फ आपने मेडल की संख्या बढ़ाई ऐसा नहीं है। आपने एक पीढ़ी को तैयार किया।

खिलाड़ी – मेरे मन में भी धक-धक धक-धक हो रहा है सर।

प्रधानमंत्री – आप चिंता मत कीजिए।

खिलाड़ी – पर..

प्रधानमंत्री – आप चाहें तो आपको बोलने में भी मेडल मिलने वाला है।

खिलाड़ी – मेरे फ्रेंड सर्कल में किसी ने बोला था कि मैं उनको कुछ बोलती थी भई तुम्हारे अच्छे के लिए तुम करो। तो अक्सर मुझे वो बोलते थे कि तू के मोदी ते मिल रही है?

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – हरियाणवी में बोल देते हैं सर कि क्या तू मोदी से मिली हुई है, कि तेरी बात माने। तो आज मैं आपसे मिली हूं सर। मैं उनको बोल पाऊंगी कि हां मैं मोदी जी से मिली हूं।

खिलाड़ी – कॉमनवेंल्थ गेम्स में मैंने सिल्वर मेडल जीता, फिर मैंने क्रेडिट साहब को दिया, सपना तो था एक बार मेडल जीत के लेके आने के लिए, बट ट्रेनिंग का सेंटर नहीं था, मैंने SAI आने के बाद मैं बहुत ट्रेनिंग करके मेडल जीत पा रहा, इसलिए बहुत खुशी से मैंने सर को क्रेडिट दिया था क्योंकि बहुत इंप्रूव हुआ।

प्रधानमंत्री – मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान का विषय है, मेहनत आपने की और मुझे याद किया, मैं आपका बहुत आभारी हूं दोस्त।

प्रधानमंत्री – वाराणसी में खेल तुम प्रैक्टिस कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – कैसा बना है स्टेडियम?

खिलाड़ी – सर अच्छा बना है, वहां पर मैं 10-12 दिन के लिए ट्रेनिंग करने गई थी, क्योंकि मैं मंदिर गई थी तो वहां पर ही ट्रेनिंग करके आई थी। और मैं वहां पे मतलब सेटल भी होना चाहती हूं क्योंकि मुझे काशी विश्वनाथ बहुत अच्छा लगता है सर।

प्रधानमंत्री – भोपाल में ट्रेनिंग कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – तो उज्जैन जाते थे कि नहीं?

खिलाड़ी – जी सर उज्जैन भी गई थी सर।

प्रधानमंत्री – अच्छा महाकाल के पास भी गई।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – काशी विश्वनाथ के पास हो आई एक बार।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – सावन महीना तो अभी है।

खिलाड़ी – वहां घर जाके फिर उसके बाद जाऊंगी सर।

प्रधानमंत्री – ठीक है।

खिलाड़ी – साई ने भी सर बहुत सपोर्ट किया है मुझे। इसके कारण ही मैं यहां तक पहुंची हूं सर। और मैं खेलो इंडिया स्कीम में भी थी 2018 में जो फर्स्ट खेलो इंडिया हुआ था, उसमें मेरा सिल्वर मेडल था, वहां पे भी मैंने आपको देखा था ओपनिंग सेरेमनी में, तो उसमें मेरा मेडल था, तो मेरे को स्कीम भी मिल गया और मैं यहां तक पहुंची हूं सर।

प्रधानमंत्री – स्पोर्ट्स व्यवस्था एक बात है, लेकिन देश मेडल तब प्राप्त करता है जब देश में स्पोर्ट्स कल्चर बनता है। दोस्तों आपने बहुत बड़ा काम किया है। देश का नाम रोशन किया है। आपको मैं बहुत बधाई देता हूं और आप विश्वास कीजिए आगे भी आप विजयी होंगे और फिर से एक बार यहीं पर हम मिलेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

प्रधानमंत्री – ये लगातार तीसरी बार देश को मेडल दिलवाया है।

खिलाड़ी – थैंक यू सर।

प्रधानमंत्री – बहुत आशीर्वाद बेटा।

खिलाड़ी – और थैंक यू सो मच मैं सर के हाथ से लड्डू खा रही मेरा कल बर्थडे था तो आज सर के हाथ से…

प्रधानमंत्री – बहुत बधाई वाह।

प्रधानमंत्री – मुस्कुराओ यार ।

प्रधानमंत्री – जो खेलेगा वो खिलेगा।