होर्मुज स्ट्रेट में दुनिया के अनेक जहाज फंसे हैं, उनमें बहुत बड़ी संख्या में भारतीय क्रू मेंबर्स हैं। यह भी भारत के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है: प्रधानमंत्री
ऐसी चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील घड़ी में, यह अत्यंत आवश्यक है कि भारत की संसद के इस उच्च सदन से संपूर्ण विश्व के लिए शांति और संवाद का एक साझा एवं एकजुट स्वर गूँजे: प्रधानमंत्री
एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में निवास करते हैं और वहाँ कार्यरत हैं, उनके जीवन और जीविका की सुरक्षा भारत के लिए एक अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है : प्रधानमंत्री
पश्चिम एशिया में छिड़े इस युद्ध को तीन सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है और इस संघर्ष ने संपूर्ण विश्व के समक्ष एक गंभीर ऊर्जा संकट उत्पन्न कर दिया है: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और होर्मुज़ स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में व्यवधान पूरी तरह से अस्वीकार्य है: प्रधानमंत्री
भारत ने नागरिकों, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर तथा ऊर्जा और परिवहन से संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले हमलों की निंदा की है : प्रधानमंत्री
युद्ध की शुरुआत के बाद से अब तक, मैंने पश्चिम एशिया के अधिकांश देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो दौर की टेलीफोन वार्ता की है : प्रधानमंत्री
हम सभी खाड़ी देशों के साथ निरंतर संपर्क में हैं, साथ ही, हम ईरान, इजराइल और अमेरिका के साथ भी लगातार संवाद बनाए हुए हैं: प्रधानमंत्री
हमारा लक्ष्य संवाद और कूटनीति के माध्यम से इस क्षेत्र में शांति बहाल करना है: प्रधानमंत्री
हमने संबंधित पक्षों के साथ क्षेत्रीय तनाव को कम करने और होर्मुज़ स्ट्रेट में आवाजाही पुनः बहाल करने पर भी चर्चा की है: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने आश्वस्त करते हुए कहा कि युद्ध के इस कठिन वातावरण में भी भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भारत कूटनीतिक माध्यमों से निरंतर प्रयास कर रहा है
युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज स्ट्रेट मैं जहाजों का आना-जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है, लेकिन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हमारी सरकार ने संवाद और कूटनीति के माध्यम से रास्ता बनाने का प्रयास किया है: प्रधानमंत्री
हमारा निरंतर प्रयास है कि जहाँ से भी संभव हो, भारत को तेल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके और देश ऐसे प्रत्येक प्रयास के सकारात्मक परिणामों का साक्षी बन रहा है: प्रधानमंत्री
पिछले कुछ दिनों में विश्व के कई देशों से कच्चे तेल और एलपीजी लेकर जहाज भारत पहुँचे हैं और इस दिशा में हमारे प्रयास आने वाले दिनों में भी निरंतर जारी रहेंगे : प्रधानमंत्री
हमारी अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है और सरकार तेजी से बदलती परिस्थितियों पर पैनी नजर रख रही है : प्रधानमंत्री
सरकार वर्तमान परिस्थितियों के अल्पकालिक, मध्यम और दीर्घकालिक प्रभावों के समाधान हेतु एक सुनियोजित रणनीति के साथ काम कर रही है: प्रधानमंत्री
सरकार ने उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियाँ कर ली हैं : प्रधानमंत्री
सरकार निरंतर यह प्रयास कर रही है कि किसी भी संकट का बोझ हमारे किसानों पर न पड़े : प्रधानमंत्री
मैं देश के किसानों को एक बार फिर आश्वस्त करना चाहता हूँ कि हर चुनौती के समाधान के लिए सरकार पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़ी है : प्रधानमंत्री

माननीय सभापति जी,

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और उससे बनी परिस्थितियों से हम सभी परिचित हैं। मैं आज संसद के उच्च सदन के सामने और देशवासियों के सामने इन विकट परिस्थितियों पर सरकार का पक्ष साझा करने के लिए उपस्थित हुआ हूं। पश्चिम एशिया में चल रहे इस युद्ध को तीन सप्ताह से अधिक का समय हो चुका है। इस युद्ध ने पूरे विश्व में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। भारत के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है। इस युद्ध से हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं। इससे पेट्रोल, डीजल, गैस और फर्टिलाइजर जैसे जरूरी सामान के रूटीन सप्लाई प्रभावित हो रही है। गल्फ देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं, वहां काम करते हैं। उनके जीवन और आजीविका की सुरक्षा भी भारत के लिए बहुत बड़ी चिंता है। होर्मुज स्ट्रेट में दुनिया के अनेक जहाज फंसे हैं, उनमें बहुत बड़ी संख्या में भारतीय क्रू मेंबर्स हैं। यह भी भारत के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। ऐसी विकट परिस्थिति में आवश्यक है कि भारत की संसद के इस उच्च सदन से शांति और संवाद की एकजुट आवाज पूरे विश्व में जाए।

सभापति जी,

युद्ध की शुरुआत के बाद से मैंने पश्चिम एशिया के ज्यादातर देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो राउंड फोन पर बात की है। हम गल्फ के सभी देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं। हम ईरान, इजरायल और अमेरिका के साथ भी संपर्क में हैं। हमारा लक्ष्य डायलॉग और डिप्लोमेसी के माध्‍यम से क्षेत्र में शांति की बहाली का है। हमने डि एस्केलेशन और होर्मुज स्ट्रेट खोले जाने पर भी उनसे बात की है। कमर्शियल जहाजों पर हमला और होर्मुज स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय जल मार्ग में रुकावट अस्वीकार्य है। भारत ने नागरिकों पर, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर पर, एनर्जी और ट्रांसपोर्ट से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का विरोध किया है। भारत डिप्लोमेसी के जरिए युद्ध के इस माहौल में भी भारतीय जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए सतत प्रयास कर रहा है। भारत ने इस समस्या के समाधान के लिए संवाद का ही रास्ता सुझाया है। इस युद्ध में किसी के भी जीवन पर संकट मानवता के हित में नहीं है। इसलिए भारत का सतत प्रयास सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रोत्साहित करने का है।

सभापति जी,

संकट की स्थिति में देश-विदेश में भारतीयों की सुरक्षा हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता है। युद्ध शुरू होने के बाद से लेकर अब तक 3 लाख 75 हज़ार से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान से ही अभी तक 1000 से अधिक भारतीय सुरक्षित वापस लौटे हैं। इनमें 700 से अधिक मेडिकल की पढ़ाई करने वाले युवा हैं। हमारी सरकार संकट के इस समय में पूरी संवेदनशीलता से कम कर रही है। सभी देशों ने वहां मौजूद भारतीयों की सुरक्षा का पूरा आश्वासन दिया है। हालांकि यह बहुत दुखद है कि हमलों के कारण कुछ भारतीयों की मृत्यु हुई है और कुछ घायल भी हुए हैं। ऐसे मुश्किल हालात में परिवारजनों को आवश्यक मदद दी जा रही है। जो घायल हैं, उनका बेहतर इलाज सुनिश्चित कराया जा रहा है।

सभापति जी,

होर्मुज स्ट्रेट विश्व व्यापार के सबसे बड़े रूट्स में से एक है। विशेष तौर पर कच्चे तेल, गैस और फर्टिलाइजर से जुड़ा परिवहन इस क्षेत्र से बहुत बड़ी मात्रा में होता है। युद्ध के बाद से ही होर्मुज स्ट्रेट मैं जहाजों का आना-जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है, लेकिन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हमारी सरकार ने संवाद से, कूटनीति के माध्यम से रास्ते बनाने का प्रयास किया है। प्रयास यह है कि जहां से भी संभव हो, वहां से तेल और गैस की सप्लाई भारत पहुंचे। ऐसी हर कोशिश के नतीजे भी देश देख रहा है। बीते कुछ दिनों में दुनिया के अनेक देशों से कच्‍चा तेल और एलपीजी से भरे जहाज भारत आए हैं। इस दिशा में हमारे प्रयास आने वाले दिनों में भी जारी रहेंगे।

सभापति जी,

भारत का प्रयास है कि तेल हो, गैस हो, फर्टिलाइजर हो, ऐसे हर जरूरी सामान से जुड़े जहाज भारत तक सुरक्षित पहुंचे। लेकिन इस युद्ध से बनी वैश्विक परिस्थितियों अगर लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो गंभीर दुष्परिणाम तय है। इसलिए भारत अपनी रेसिलियंस बढ़ाने के लिए जो भी प्रयास बीते वर्षों में किए हैं, उनको और गति दे रहा है।

सभापति जी,

कोई भी संकट हो, वह हमारे हौसलों और हमारे प्रयास दोनों की परीक्षा लेता है। देश ऐसे संकटों का बेहतर तरीके से सामना कर सके, इसके लिए बीते 11 वर्षों में निरंतर निर्णय लिए गए हैं। एनर्जी इंपोर्ट का डायवर्सिफिकेशन ऐसे ही प्रयासों का हिस्सा है। पहले क्रूड ऑयल, एलएनजी, एलपीजी, ऐसी एनर्जी जरूरतों के लिए 27 देशों से इंपोर्ट किया जाता था। वहीं आज भारत 41 देशों से एनर्जी इंपोर्ट कर रहा है। बीते दशक में भारत ने संकट के ऐसे ही समय के लिए कच्चे तेल के भंडारों को भी प्राथमिकता दी है। हमारी तेल कंपनियां संकट के समय के लिए काफी मात्रा में पेट्रोल और डीजल का भंडार रखती हैं। बीते 11 वर्षों में 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक तक स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व भी डेवलप किया गया है और 65 लाख मीट्रिक टन से अधिक के रिजर्व की व्यवस्था पर देश काम कर रहा है। साथ ही, बीते दशक में भारत की रिफायनिंग कैपेसिटी भी अच्छी-खासी बढ़ाई गई है। मैं आपके माध्यम से सदन को और देश को या यह देना चाहता हूं कि भारत के पास क्रूड ऑयल के पर्याप्त स्टोरेज के और निरंतर सप्लाई की व्यवस्थाएं हैं।

सभापति जी,

हमारी सरकार की कोशिश है कि ईंधन के किसी एक ही स्रोत पर ज्यादा निर्भरता ना रहे। सरकार घरेलू गैस सप्लाई में एलपीजी के अलावा पीएनजी पर भी बल दे रही है। बीते दशक में देश में पीएनजी कनेक्शन पर अभूतपूर्व काम हुआ है। बीते दिनों में इस काम को और तेज किया गया है। साथ ही, एलजी के घरेलू उत्पादन को भी बड़े पैमाने पर बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

सभापति जी,

बीते वर्षों में सरकार का निरंतर प्रयास रहा है कि हर सेक्टर में दूसरे देशों पर निर्भरता कम से कम हो। हम ज्यादा से ज्यादा आत्मनिर्भर हों, यही एकमात्र विकल्प है। जैसे भारत का 90% से अधिक तेल विदेशी जहाजों पर होता है, यह स्थिति किसी भी वैश्विक संकट में भारत की स्थिति को और भी गंभीर बना देती है। इसलिए सरकार ने मेड इन इंडिया जहाज बनाने के लिए करीब 70000 करोड़ रुपए का अभियान शुरू किया है। भारत आज शिप बिल्डिंग, शिप ब्रेकिंग, मेंटेनेंस एंड ओवरहालिंग, ऐसी हर सुविधा का निर्माण पर तेज गति से कम कर रहा है। भारत अपने डिफेंस सेक्टर को भी अधिक रेसिलियंट बना रहा है। बीते दशक में किए गए प्रयासों से भारत आज अपनी जरूरत के अधिकांश हथियार भारत में ही बना रहा है। एक समय था, जब भारत अपने जीवन रक्षक दावों के कच्चे माल यानी API के लिए भी दूसरे देशों पर बहुत अधिक निर्भर था। बीते वर्षों में देश ने भारत में ही API इकोसिस्टम बनाने के लिए अनेक प्रयास किए हैंं। इसी प्रकार रेयर अर्थ मिनिरल्स में विदेशी निर्भरता को कम करने के लिए भी बड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

आदरणीय सभापति जी,

वर्तमान संकट ने पूरी दुनिया की इकोनॉमी को हिला दिया है। अभी तक पश्चिम एशिया में जो नुकसान हुआ है, उससे रिकवर होने में भी दुनिया को बहुत समय लगेगा। भारत में इसका कम से कम दुष्प्रभाव हो, इसके लिए निरंतर प्रयास किया जा रहे हैं। हमारे इकोनॉमी के फंडामेंटल्‍स मजबूत हैं और सरकार पल-पल बदलते हालात पर नजर रखे हुए हैं। सरकार इसके शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म ऐसे हर प्रभाव के लिए एक रणनीति के साथ काम कर रही है। भारत सरकार ने एक इंटर मिनिस्ट्रियल ग्रुप भी बनाया है, यह ग्रुप नियमित मिलता है और हमारे इंपोर्ट एक्सपोर्ट में आने वाली हर दिक्कत का आकलन करता है और यह ग्रुप आवश्यक समाधान पर भी निरंतर काम करता रहा है। जैसे कोरोना के समय में अलग-अलग सेक्टर्स की चुनौतियों से निपटने के लिए एक्सपोर्ट्स और ऑफिसर्स के empowered groups बने थे, वैसे ही कल ही ऐसे 7 नए empowered groups का भी गठन किया गया है। यह ग्रुप सप्लाई चैन, पेट्रोल-डीजल, फर्टिलाइजर, गैस, महंगाई, ऐसे विषयों पर त्वरित और दूरगामी रणनीति के तहत कार्यवाही करने का काम करेंगे। मुझे पूरा भरोसा है कि इस साझा प्रयासों से हम परिस्थितियों का बेहतर सामना कर पाएंगे।

आदरणीय सभापति जी,

सरकार यह भी प्रयास कर रही है कि आने वाले बुवाई के सीजन में किसानों को पर्याप्त खाद मिलती रहे। सरकार ने खाद की पर्याप्त सप्लाई के लिए आवश्यक तैयारियां की हैं। सरकार का निरंतर प्रयास है कि किसानों पर किसी भी संकट का बोझ ना पड़े। मैं देश के किसानों को फिर आश्वस्त करूंगा कि सरकार हर चुनौती के समाधान के लिए उनके साथ खड़ी है।

आदरणीय सभापति जी,

यह राज्यों का सदन है। आने वाले समय में यह संकट हमारे देश की बड़ी परीक्षा लेने वाला है और इस परीक्षा में सफलता के लिए राज्यों का सहयोग बहुत आवश्यक है। इसलिए इस सदन के माध्यम से मैं देश के सभी राज्यों की सरकारों से भी कुछ आग्रह करना चाहता हूं। संकट के समय गरीबों पर, श्रमिकों पर, प्रवासी साथियों पर बहुत बड़ा असर पड़ता है। इसलिए पीएम गरीब कल्याण अन्‍न योजना का लाभ समय पर मिलता रहे, यह सुनिश्चित करना होगा। जहां प्रवासी श्रमिक साथी काम करते हैं, उनकी परेशानियों को दूर करने के लिए प्रोएक्टिव कदम उठाए जाएं। ऐसी स्थितियों पर नजर रखने के लिए राज्य सरकारें विशेष व्यवस्थाएं करें, तो इससे काफी सुविधा होगी। राज्य सरकारों को एक और चुनौती पर भी बहुत अधिक ध्यान देना होगा, ऐसे समय में कालाबाजारी करने वाले, जमाखोरी करने वाले बहुत एक्टिव हो जाते हैं। जहां से भी ऐसी शिकायतें आती हैं, वहां पर त्वरित कार्यवाही होनी चाहिए। जरूरी चीजों की सप्लाई निर्बाध चलती रहे, यह सुनिश्चित करना हर राज्‍य की प्राथमिकता होनी चाहिए।

आदरणीय सभापति जी,

मैं सभी राज्य सरकारों से एक अनुरोध और करना चाहता हूं। संकट चाहे कितना भी बड़ा हो, भारत की तेज ग्रोथ बनाए रखना, हम सभी का दायित्व है। हमें इसके लिए हर जरूरी कदम, हर जरूरी रिफॉर्म्स तेजी से करते रहने होंगे। यह राज्य सरकारों के पास बहुत बड़ा अवसर भी है। यह टीम इंडिया की भी बहुत बड़ी परीक्षा है। कोरोना के महासंकट में केंद्र और राज्यों ने टीम इंडिया बनकर कोविड मैनेजमेंट का एक बेहतरीन मॉडल सामने रखा था। अलग-अलग पॉलिटिकल पार्टी की सरकारें होने के बावजूद टेस्टिंग, वैक्सीनेशन से लेकर जरूरी चीजों की आपूर्ति टीम इंडिया के प्रयासों से ही निश्चित हो पाई थी। हमें उसी भावना के साथ आगे भी काम करना है। सभी राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के प्रयासों से देश इस गंभीर वैश्विक संकट का प्रभावी रूप से सामना कर पाएगा।

आदरणीय सभापति जी,

यह संकट अलग प्रकार का है और इसके समाधान भी अलग प्रकार से ही तय किया जा रहे हैं। हमें धीरज के साथ, संयम के साथ, शांत मन से हर चुनौती का मुकाबला करना है।

आदरणीय सभापति जी,

जैसा कि हम देख रहे हैं कि इस युद्ध को लेकर पल-पल में हालात बदल रहे हैं। इसलिए मैं देशवासियों से भी कहूंगा कि हमें हर चुनौती के लिए तैयार रहना ही होगा। इस युद्ध के दुष्प्रभाव लंबे समय तक रहने की प्रबल आशंका है। लेकिन मैं देशवासियों को भरोसा देता हूं, सरकार सतर्क है, तत्पर है और पूरी गंभीरता से रणनीति बना रही है, हर निर्णय ले रही है। देश की जनता का हित हमारे लिए सर्वोपरि है। यही हमारी पहचान है, यही हमारी ताकत है। इसी भावना के साथ मैं अपना वक्तव्य समाप्त करता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!

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August 10, 2026

प्रधानमंत्री – मेरे यहां, मुझे यहां लगभग 12-13 साल हो गए इसी मकान में, अगर मैंने regularly और हर बार किसी को रिसिव किया है, किसी को मैं मिला हूं, तो खिलाड़ी हैं। पिछले 10-12 साल हो गए, आप लोगों के पुरुषार्थ के कारण, भारत को लगातार विजय दिलाने के आपके प्रयासों के कारण और उत्तरोत्तर सफलता में नई ऊंचाईयां पार करने की परंपरा के कारण, जो काम शायद हम स्कूलों में जाकर कहें कि नहीं नहीं भई खेलना चाहिए, ये करना चाहिए, वो काम स्कूलों में जाकर के हम कर सकते थे, उससे ज्यादा आपका मेडल उनको inspire करता है।

प्रधानमंत्री – तुमने मुझे वादा किया था पिछली बार कि तुम्हारी दोनों बेटियां खिलाड़ी बन जाएंगी?

खिलाड़ी - हाँ जी अभी वे उमर की छोटी हैं, अगले कॉमनवेल्थ में एक घर में तीन मेडल लाकर दिखाएंगी।

प्रधानमंत्री – पक्का।

खिलाड़ी – हाँ जी।

खिलाड़ी – जब मैं दौड़ रहा था, जब मेरा इवेंट था 29 को, तो उस दिन गुरुपूर्णिमा थी, तो उस दिन मेरे गुरू को मैंने एक गिफ्ट दे दिया।

प्रधानमंत्री – बड़ी शान बढ़ाई आपने। इतनी आंसू टपक रहे थे, मुझे लगता है कि आंसू के हर बूंद से जैसे गोल्ड मेडल टपक रहा है।

खिलाड़ी – मैं बहुत ज्यादा खुशी थी, इमोशनल भी थे उसी दिन, खुशी ज्यादा था और मैं इसलिए रोई थी कि मेरा पेरिस आलंपिक में मेरा 1 Kg में मेडल रह गई थी और एक प्लेयर्स की लाइफ में क्या क्या हमको फेस करना पड़ता है। तो ये 4 साल के अंदर में कितना क्या क्या कुछ मैंने फेस किया था, हर टाइम injury ही चल रहे थे और family problem, वो सब हो रहा था। तो बहुत मुश्किल से मैं ये 4 साल फेस किया था। तो वो सब जब पोडियम में जब मैं खड़ी थी सर और हमारी जो फ्लैग ऊपर जाते हैं और हमारे नेशनल एंथम जब बजते हैं तो सर हम रुक नहीं सकते सर, अपना आप आंसू निकलते हैं।

प्रधानमंत्री – बहुत बहुत बढ़िया

प्रधानमंत्री – आपके इस अचीवमेंट को सिर्फ आपका अचीवमेंट मानता हूं, ऐसा नहीं है, ये आपका विजय आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बन जाता है।

खिलाड़ी – सब डर रहे थे हमसे कि इंडिया के साथ फाइट आ गई, अब तो हम पहली फाइट ही हार जायेंगे, हमारा मेडल भी नहीं आयेगा।

प्रधानमंत्री – यानी मान के चलते हैं।

खिलाड़ी – हाँ सर।

प्रधानमंत्री – क्या हुआ, वो restaurant वालों से झगड़ा कर रही थी?

खिलाड़ी – हम लोगों का जो इतना अच्छा परफॉर्मेंस था, लास्ट डे था और सब जीत के गए थे और पूरा इंडिया के लोग थे। तो थोड़ा सा मुझे बुरा लग रहा। तो मैंने उनको अच्छे से बोला रिक्वेस्ट किया था सर, फिर उन्होंने मान भी लिया, अभी चेंज भी हो गया सर।

प्रधानमंत्री – इस विजय की परिस्थिति खुशी, आनंद, अपने साथियों के साथ और गेम पूरे हो चुके हैं। तो हसी मजाक मस्ती का मूड ऐसे समय उस मैप पर नजर जाना और उसको रजिस्टर करना और तुरंत सिर्फ मेडल लेते समय देश खड़ा हो जाता है ऐसा नहीं, भीतर से देश का भाव मैं सच बताता हूँ ये वीडियो सामान्य नहीं है आपका, लंबे समय तक लोगों को याद रहेगा। ये बॉक्सिंग वालों से भी दुनिया के खिलाड़ी अब डरने लगे हैं।

खिलाड़ी – जरूर सर, पुरे सभी डरे हुए थे। एक के बाद एक गोल्ड मेडल गोल्ड मेडल आ रहे थे और मतलब पूरा लास्ट में ऐसे धमाका जैसा हो गया बिल्कुल। जिस तरीके से हम लोगों को सपोर्ट मिल रहा है, हमें बैक टू बैक कंपटीशन मिल रहा है वो एक बहुत बड़ी बात है और हमारे जितने भी यंग एथलीट है वो लोग सभी जैसे खेलो इंडिया स्कीम से आए हुए हैं और ये एक बहुत बड़ा changes ला रहा है पूरे स्पोर्ट्स में ही।

प्रधानमंत्री – अगर आप लोग खेलो इंडिया की प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं और प्रतिष्ठा सिर्फ वहां जाकर के रिबिन काटने से नहीं होगी। आप वैसे ही खेलेंगे जैसे एक छोटा विद्यार्थी, एक छोटा नौजवान, छोटा खिलाड़ी खेलता है। यह बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन करेगा। क्योंकि अभी तो हमें बहुत आगे जाना है, बहुत मेडल लाना है। कारगिल विजय दिवस पर किसकी विजय हुई थी?

खिलाड़ी – उस दिन कारगिल डे था वैसे और जिस दिन मैंने पाकिस्तान के साथ फाइट किया था सर, वो उसी दिन का था। तो मैं एक इंडियन आर्मी से हूं, तो मैंने उस दिन मैं पहले से बहुत वो था कि सर पाकिस्तान को हराना है। तो मैंने वो पाकिस्तान एक तरफ मैंने 5-0 से हराया, तो मैंने हमारा इंडियन आर्मी का कारगिल हीरोज़ को मैंने डेडिकेट किया किया था सर।

प्रधानमंत्री – आपको यह याद रहना और आप स्वयं फौज से हैं तो, मैं जरूर मानता हूं कि देश के वीर जवानों को आपने जो भाव प्रकट किया ना कि, मैं कारगिल के विजेताओं को मेरा मेडल समर्पित करता हूं। उसने उस विजय पर चार चांद लगा दिए और जिसको पराजित करना था उसी को किया आपने।

खिलाड़ी – वो पाकिस्तान की बात चल रही है, मुझे किस्सा याद आ गया सर। 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे और मेरी पाकिस्तान के साथ पहली फाइट आ गई थी और वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे तो मिलिट्री वाले के फोन आए कि भई पाकिस्तान से नहीं हारना है। तो फिर मैं फर्स्ट राउंड 4-1 से जीत गया। सेकंड राउंड 3-2 से जीत गया, पर दोनों के सर लग गए आपस में, तो दोनों के लग गए कट और फाइट तो मैं जीत गया।

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – उसके बाद फिर दोनों चले गए हॉस्पिटल में टांके लगवाने के लिए। फिर 2014 में आप फर्स्ट टाइम प्रधानमंत्री जी बने थे और जो हमारे साथ आर्मी का कोच गया हुआ था उसका नाम नरेंद्र राणा था और फिर वो कई देर तक सोच के मेरे को बोला कि भाईजान एक बात बोलूं, मैं हां बोलो, बोला भाईजान आपका नाम नरेंद्र है। आपके कोच का नाम नरेंद्र है, आपके प्रधानमंत्री का नाम नरेंद्र है, तो मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई है।

प्रधानमंत्री – सिर्फ आपने मेडल की संख्या बढ़ाई ऐसा नहीं है। आपने एक पीढ़ी को तैयार किया।

खिलाड़ी – मेरे मन में भी धक-धक धक-धक हो रहा है सर।

प्रधानमंत्री – आप चिंता मत कीजिए।

खिलाड़ी – पर..

प्रधानमंत्री – आप चाहें तो आपको बोलने में भी मेडल मिलने वाला है।

खिलाड़ी – मेरे फ्रेंड सर्कल में किसी ने बोला था कि मैं उनको कुछ बोलती थी भई तुम्हारे अच्छे के लिए तुम करो। तो अक्सर मुझे वो बोलते थे कि तू के मोदी ते मिल रही है?

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – हरियाणवी में बोल देते हैं सर कि क्या तू मोदी से मिली हुई है, कि तेरी बात माने। तो आज मैं आपसे मिली हूं सर। मैं उनको बोल पाऊंगी कि हां मैं मोदी जी से मिली हूं।

खिलाड़ी – कॉमनवेंल्थ गेम्स में मैंने सिल्वर मेडल जीता, फिर मैंने क्रेडिट साहब को दिया, सपना तो था एक बार मेडल जीत के लेके आने के लिए, बट ट्रेनिंग का सेंटर नहीं था, मैंने SAI आने के बाद मैं बहुत ट्रेनिंग करके मेडल जीत पा रहा, इसलिए बहुत खुशी से मैंने सर को क्रेडिट दिया था क्योंकि बहुत इंप्रूव हुआ।

प्रधानमंत्री – मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान का विषय है, मेहनत आपने की और मुझे याद किया, मैं आपका बहुत आभारी हूं दोस्त।

प्रधानमंत्री – वाराणसी में खेल तुम प्रैक्टिस कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – कैसा बना है स्टेडियम?

खिलाड़ी – सर अच्छा बना है, वहां पर मैं 10-12 दिन के लिए ट्रेनिंग करने गई थी, क्योंकि मैं मंदिर गई थी तो वहां पर ही ट्रेनिंग करके आई थी। और मैं वहां पे मतलब सेटल भी होना चाहती हूं क्योंकि मुझे काशी विश्वनाथ बहुत अच्छा लगता है सर।

प्रधानमंत्री – भोपाल में ट्रेनिंग कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – तो उज्जैन जाते थे कि नहीं?

खिलाड़ी – जी सर उज्जैन भी गई थी सर।

प्रधानमंत्री – अच्छा महाकाल के पास भी गई।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – काशी विश्वनाथ के पास हो आई एक बार।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – सावन महीना तो अभी है।

खिलाड़ी – वहां घर जाके फिर उसके बाद जाऊंगी सर।

प्रधानमंत्री – ठीक है।

खिलाड़ी – साई ने भी सर बहुत सपोर्ट किया है मुझे। इसके कारण ही मैं यहां तक पहुंची हूं सर। और मैं खेलो इंडिया स्कीम में भी थी 2018 में जो फर्स्ट खेलो इंडिया हुआ था, उसमें मेरा सिल्वर मेडल था, वहां पे भी मैंने आपको देखा था ओपनिंग सेरेमनी में, तो उसमें मेरा मेडल था, तो मेरे को स्कीम भी मिल गया और मैं यहां तक पहुंची हूं सर।

प्रधानमंत्री – स्पोर्ट्स व्यवस्था एक बात है, लेकिन देश मेडल तब प्राप्त करता है जब देश में स्पोर्ट्स कल्चर बनता है। दोस्तों आपने बहुत बड़ा काम किया है। देश का नाम रोशन किया है। आपको मैं बहुत बधाई देता हूं और आप विश्वास कीजिए आगे भी आप विजयी होंगे और फिर से एक बार यहीं पर हम मिलेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

प्रधानमंत्री – ये लगातार तीसरी बार देश को मेडल दिलवाया है।

खिलाड़ी – थैंक यू सर।

प्रधानमंत्री – बहुत आशीर्वाद बेटा।

खिलाड़ी – और थैंक यू सो मच मैं सर के हाथ से लड्डू खा रही मेरा कल बर्थडे था तो आज सर के हाथ से…

प्रधानमंत्री – बहुत बधाई वाह।

प्रधानमंत्री – मुस्कुराओ यार ।

प्रधानमंत्री – जो खेलेगा वो खिलेगा।