भारत हमेशा से ज्ञानयोग के मार्ग पर समर्पित रहा है, हजारों साल पुराने वेद आज भी प्रेरणा देते हैं: प्रधानमंत्री
भगवान स्वामीनारायण आध्यात्मिक साधना और सेवा दोनों के प्रतीक थे: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए ज्ञान भारतम मिशन में सभी के सहयोग का आग्रह किया

जय स्वामीनारायण !

आज हम सब एक विशेष अवसर के साक्षी बन रहे हैं। भगवान स्वामी नारायण की शिक्षापत्री के 200 साल, द्विशताब्दी समारोह का ये अवसर, हम सबका सौभाग्य है कि इस पावन पर्व के हम सब सहभागी बन रहे हैं। इस पुण्यकाल में, मैं आप सभी संतों को नमन करता हूं। मैं भगवान स्वामी नारायण के करोड़ों अनुयायियों को द्विशताब्दी महोत्सव की बधाई देता हूं।

साथियों,

भारत, ज्ञानयोग के लिए समर्पित रहा है। हजारों साल पुराने वेद, हमारे लिए आज भी प्रेरणा है। हमारे ऋषि-मुनियों ने तत्कालीन समय के अनुरूप, वेदों के प्रकाश में उस समय की व्यवस्थाओं को निरंतर विकसित किया। वेदों से उपनिषद, उपनिषदों से पुराण, श्रुति, स्मृति, कथावाचन, गायन, ऐसे विविध आयामों से हमारी परंपरा सामर्थ्यवान होती रही।

साथियों,

समय की आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग कालखंड में महात्मा, ऋषि, मनिषियों ने इस परंपरा में नए-नए अध्याय जोड़ें। हम सभी जानते हैं, भगवान स्वामी नारायण के जीवन के प्रसंग, लोकशिक्षा, लोकसेवा से जुड़े रहे हैं। इसी अनुभव को उन्होंने सरल शब्दों में समझाया। शिक्षापत्री के रूप में भगवान स्वामी नारायण ने हमें जीवन का अनमोल मार्गदर्शन दिया।

साथियों,

आज द्विशताब्दी समारोह का ये विशेष अवसर हमें ये आकलन करने का मौका देता है कि हम शिक्षापत्री से क्या-कुछ नया सीख रहे हैं, उसके आदर्शों को कितना अपने जीवन में जी रहे हैं?

साथियों,

भगवान स्वामी नारायण का जीवन, साधना के साथ-साथ सेवा की भी प्रतिमूर्ति था। आज उनके अनुयायियों द्वारा समाज, राष्ट्र और मानवता की सेवा के कितने ही अभियान चल रहे हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े प्रकल्प, किसान कल्याण के संकल्प, जल से जुड़े अभियान, ये वास्तव में सराहनीय हैं। आप सभी संतजनों को, हरि भक्तों को, समाज सेवा के प्रति अपने दायित्वों का निरंतर विस्तार करते देखना बहुत प्रेरणादायी होता है।

साथियों,

आज देश स्वदेशी और स्वच्छता जैसे जन-आंदोलनों को आगे बढ़ा रहा है। वोकल फॉर लोकल के मंत्र की गूंज घर-घर तक पहुंच रही है। इन अभियानों से आपके प्रयास जुड़ेंगे, तो शिक्षापत्री की द्विशताब्दी का ये पुण्य समारोह और भी अविस्मरणीय बन जाएगा। आप सभी जानते हैं, देश ने प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए ज्ञान भारतम मिशन लॉन्च किया है। मेरा ये आग्रह है कि आप जैसे सभी प्रबुद्ध संगठन इस काम में और ज्यादा सहयोग करें। हमें, हमारे भारत के प्राचीन ज्ञान को बचाना है, हमें उसकी पहचान को बचाना है, और इसमें आपका सहयोग, ज्ञान भारतम मिशन की सफलता को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

साथियों,

इस समय देश में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का विशाल सांस्कृतिक उत्सव चल रहा है। सोमनाथ मंदिर के प्रथम ध्वंस से लेकर अब तक एक हजार साल की यात्रा को देश सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के रूप में मना रहा है। मेरा आग्रह है, आप सब इस महोत्सव से भी जुड़ें, इसके उद्देश्यों को जन-जन तक ले जाने का कार्य करें। मुझे विश्वास है, आपके जरिए भारत की विकास यात्रा को भगवान स्वामी नारायण का आशीर्वाद ऐसे ही निरंतर मिलता रहेगा। मैं एक बार फिर सभी संतों, सभी हरि भक्तों और सभी श्रद्धालुओं को हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।

जय स्वामीनारायण !

बहुत-बहुत धन्यवाद!

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
‘Policy paralysis’ to ‘dynamism’: PM Modi returns to SRCC, maps India’s growth in 13 years

Media Coverage

‘Policy paralysis’ to ‘dynamism’: PM Modi returns to SRCC, maps India’s growth in 13 years
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
प्रधानमंत्री ने एसआरसीसी के कार्यक्रम में जाने और वापस आने के दौरान अपनी मेट्रो यात्रा के पल साझा किए
September 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एसआरसीसी के कार्यक्रम में जाने और वापस आने के दौरान अपनी मेट्रो यात्रा की झलकियां साझा कीं।

एक्स पर एक पोस्ट में, प्रधानमंत्री ने जानकारी दी:

“मेट्रो यात्रा के पल…

एसआरसीसी के कार्यक्रम में जाते और वापस आते समय।”