भारत ने लोकतांत्रिक भावना को अपने शासन का एक मजबूत स्तंभ बनाया : प्रधानमंत्री
पिछले एक दशक में, भारत ने प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण किया , आज का भारत विश्व में प्रौद्योगिकीय रूप से सबसे समावेशी समाजों में से एक: प्रधानमंत्री
हमने डिजिटल प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण किया है, जिससे यह देश के प्रत्येक नागरिक और प्रत्येक क्षेत्र के लिए सुलभ हो गई : प्रधानमंत्री
भारत ने प्रदर्शित किया कि प्रौद्योगिकी केवल सुविधा का साधन नहीं, बल्कि समानता सुनिश्चित करने का भी एक माध्यम है: प्रधानमंत्री
इंडिया स्टैक विश्व के लिए, विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए आशा की किरण : प्रधानमंत्री
हम न केवल अन्य देशों के साथ प्रौद्योगिकी साझा कर रहे हैं, बल्कि उन्हें इसे विकसित करने में भी मदद कर रहे हैं और यह डिजिटल सहायता नहीं बल्कि डिजिटल सशक्तिकरण है: प्रधानमंत्री
भारत के फिनटेक समुदाय के प्रयासों की बदौलत, हमारे स्वदेशी समाधान वैश्विक प्रासंगिकता प्राप्त कर रहे हैं: प्रधानमंत्री
एआई के क्षेत्र में, भारत का दृष्टिकोण तीन प्रमुख सिद्धांतों– न्यायसंगत पहुंच, जनसंख्या-स्तरीय कौशल निर्माण और उत्तरदायी तैनाती पर आधारित है: प्रधानमंत्री
भारत ने हमेशा नैतिक एआई के लिए एक वैश्विक संरचना का समर्थन किया है: प्रधानमंत्री
हमारे लिए, एआई का अर्थ है सर्वसमावेशी: प्रधानमंत्री
हमारा लक्ष्य एक ऐसे फिनटेक विश्व का सृजन करना है जहां प्रौद्योगिकी लोगों और पूरी दुनिया को समृद्ध बनाती है: प्रधानमंत्री

His excellency, प्राइम मिनिस्टर कीर स्टार्मर, आरबीआई गवर्नर, फिनटेक दुनिया के इनोवेटर्स, लीडर्स और इनवेस्टर्स, देवियों और सज्जनो! मुंबई में आप सभी का बहुत-बहुत स्वागत है।

साथियों,

मैं जब इसके पहले इस कार्यक्रम में आया था, तब 2024 के चुनाव बाकी थे। लेकिन उस दिन मैंने कहा था कि मैं अगले कार्यक्रम में आऊंगा और उस समय आपने सबसे ज्यादा ताली बजाई थी, और उस समय जो राजनीति शास्त्र के जानकार लोग यहां बैठे थे, उन्होंने मान लिया था कि मोदी आ रहा है।

साथियों,

मुंबई यानी The City of Energy, मुंबई यानी The City of Enterprise, मुंबई यानी The City of endless possibility. उस मुंबई में अपने मित्र प्राइम मिनिस्टर स्टार्मर का विशेष अभिनंदन करता हूं! उन्होंने ग्लोबल Fintech फेस्टिवल के लिए समय निकाला, मैं उनका आभारी हूं।

Friends,

आज से 5 साल पहले जब ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल शुरू हुआ था, तब दुनिया ग्लोबल pandemic से लड़ रही थी। आज यह फेस्टिवल फाइनेंशियल इनोवेशन और फाइनेंशियल कॉरपोरेशन का ग्लोबल प्लेटफॉर्म बन चुका है। इस बार इस फेस्टिवल में United Kingdom एक पार्टनर कंट्री के रूप में शामिल है। दुनिया की दो बड़ी डेमोक्रेसीस के बीच यह पार्टनरशिप ग्लोबल फाइनेंशियल लेंड स्केप को और बेहतर बनाएगी। मैं यहां जो माहौल देख रहा हूं, जो एनर्जी है, जो dynamism है, वो वाकई बहुत अद्भुत है। यह भारत की इकोनॉमी के प्रति, भारत के ग्रोथ के प्रति, ग्लोबल ट्रस्ट का प्रतीक है। मैं क्रिस गोपालाकृष्णन जी को, आरबीआई गवर्नर को श्री संजय मल्होत्रा जी, सभी आयोजकों और पार्टिसिपेंट्स को, इस शानदार आयोजन के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

भारत मदर ऑफ डेमोक्रेसी है। जब हम डेमोक्रेसी की चर्चा करते हैं, तो यह सिर्फ इलेक्शंस या पॉलिसी मेकिंग तक ही सीमित नहीं है। भारत ने इस डेमोक्रेटिक स्पिरिट को गवर्नेंस का एक मजबूत पिलर भी बनाया है और इसका बेहतरीन उदाहरण है टेक्नोलॉजी। दुनिया में लंबे समय तक यह चर्चा काफी रही है और हम आज उस चर्चा को नकार नहीं सकते हैं, उसमें काफी सच्चाई थी और वो चर्चा थी टेक्नोलॉजिकल डिवाइड की। भारत भी उस समय इससे अछूता नहीं था। लेकिन बीते एक दशक में भारत ने टेक्नोलॉजी का भी डेमोक्रेटाइजेशन किया है। आज का भारत सबसे अधिक technologically inclusive society में से एक है!

साथियों,

डिजिटल टेक्नोलॉजी का भी हमने democratisation किया है, इसको देश के हर सिटीजन, हर रीजन के लिए accessible बनाया है। आज यह भारत का गुड गवर्नेंस मॉडल बन चुका है। ये एक ऐसा मॉडल है, जिसमें सरकार जनहित में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप करती है और फिर उस प्लेटफार्म पर प्राइवेट सेक्टर अपने इनोवेशन से नए-नए प्रोडक्ट तैयार करता है। भारत ने दिखाया है कि टेक्नोलॉजी केवल सुविधा नहीं, समानता का साधन भी बन सकती है।

साथियों,

इस इंक्लूसिव अप्रोच ने हमारे बैंकिंग सिस्टम को भी ट्रांसफॉर्म किया है। पहले बैंकिंग एक प्रिविलेज थी, लेकिन डिजिटल टेक्नोलॉजी ने इसको empowerment का माध्यम बना दिया। आज भारत में डिजिटल पेमेंट्स एक रूटीन बन चुका है और इसका सबसे बड़ा क्रेडिट जैम ट्रिनिटी, यानी जनधन आधार और मोबाइल को जाता है। आप यूपीआई के ट्रांजैक्शन ही देखिए, आज हर महीने 20 बिलियन ट्रांजैक्शंस हो रहे हैं, इनकी वैल्यू 25 ट्रिलियन rupees, यानी 25 लाख करोड़ रुपए से अधिक है। आज दुनिया के हर 100 real time digital transaction में से 50 अकेले भारत में होते हैं।

Friends,

इस बार ग्लोबल फिनटेक फेस्ट की जो थीम है, वो भी भारत की इसी डेमोक्रेटिक स्पिरिट को आगे बढ़ाती है, मजबूत करती है।

साथियों,

आज भारत के डिजिटल Stack की चर्चा पूरी दुनिया में है। भारत का Unified Payments Interface- UPI Aadhaar Enabled Payment System, Bharat Bill Payment System, Bharat-QR, DigiLocker, DigiYatra, Government e-Marketplace यानी GeM, ये सब भारत की डिजिटल इकॉनॉमी की रीढ़ हैं। और मुझे खुशी है कि India Stack अब नए Open Ecosystems को जन्म दे रहा है। आपमें से बहुत लोग परिचित नहीं होंगे शायद, ONDC यानी Open Network For Digital Commerce, छोटे दुकानदारों और MSMEs के लिए वरदान बन रहा है। अब ये पूरे देश के मार्केट तक पहुँच पा रहे हैं, OCEN (Open Credit Enablement Network), छोटे आंत्रप्रन्योर्स के लिए Access to Credit को आसान बना रहा है। ये सिस्टम, MSMEs के लिए Credit Shortage की समस्या का समाधान कर रही है। मुझे विश्वास है कि RBI जिस Currency की तरफ आगे बढ़ रहा है, Digital Currency के लिए, उससे भी चीज़ें बहुत बेहतर होंगी। ये सारे प्रयास, भारत के Untapped Potential को हमारी ग्रोथ स्टोरी की पावर बनाएंगे।

साथियों,

India Stack केवल भारत की सफलता की कहानी नहीं है। यह दुनिया के लिए, और मैं ये बात जब लास्ट टाइम आया था ना कहा था ना, कि अगली बार आऊंगा, ये भी उतना ही पक्का है। भारत जो कर रहा है वो विशेष रूप से Global South के देशों के लिए, आशा की एक किरण है। भारत, अपने डिजिटल इनोवेशन्स से दुनिया में Digital Cooperation और Digital Partnership बढ़ाना चाहता है। और इसीलिए हम अपने experience और open-source platform, दोनों को global public good के लिए शेयर कर रहे हैं। भारत में विकसित हुआ MOSIP (Modular Open-Source Identity Platform) इसका बहुत बड़ा उदाहरण है। आज Twenty Five से ज्यादा countries इसे अपने Sovereign Digital Identity System बनाने के लिए अपना रहे हैं। हम दूसरे देशों को टेक्नॉलॉजी शेयर करने के साथ ही टेक्नॉलॉजी डेवलप करने में भी मदद कर रहे हैं। और ये digital aid नहीं है, वरना दुनिया में कई लोगों को शौक है, हम एड दे रहे हैं, समझदार को इशारा काफी है। ये एड नहीं है, बल्कि digital empowerment है।

साथियों,

भारत की Fintech community के प्रयासों से हमारे स्वदेशी solutions को global relevance मिल रही है, इंटर-ऑपरेबल QR networks हों, open commerce हो, या open finance frameworks हों, इनमें हमारे स्टार्ट अप्स की ग्रोथ दुनिया नोटिस कर रही है। इस साल के पहले 6 महीनों में ही, भारत top three most-funded Fin-Tech ecosystems में शामिल हुआ है। ये मैं आपकी बात बता रहा हूं।

साथियों,

भारत की विशेषता सिर्फ स्केल नहीं है, हम Scale को इंक्लूजन, रज़ीलियन्स और सस्टेनबिलिटी के साथ जोड़ रहे हैं और यहीं पर AI का रोल शुरू होता है। Under-writing बायस को कम कर सकता है, fraud को real time detect कर सकता है। इसके अलावा, अन्य services को बेहतर बनाने में भी AI की बड़ी भूमिका हो सकती है। इस potential को unlock करने के लिए हमें एक साथ मिलकर डेटा, skills और governance में invest करना ही होगा।

साथियों,

AI के क्षेत्र में, भारत की approach तीन प्रमुख principles पर आधारित है- Equitable Access, Population-scale Skilling और Responsible Deployment. India-AI Mission के तहत हम high-performance computing capacity बना रहे हैं, ताकि हर innovator और start-up को सस्ती और आसान सुविधा मिले। हमारा प्रयास है कि AI के बेनिफिट, हर district तक, हर language तक पहुंचना चाहिए। हमारे Centers of Excellence, skilling hubs और indigenous AI models, ये सुनिश्चित कर रहे हैं।

Friends,

भारत हमेशा से global framework for ethical AI के पक्ष में रहा है। हमारे digital public infrastructure का experience और हमारी लर्निंग रिपॉजिटरी, दुनिया के लिए useful हो सकती है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जिस स्तर पर हम चल रहे हैं, उसी को हम AI में भी आगे बढ़ाना चाहते हैं। हमारे लिए AI का मतलब है, और वो दुनिया से बहुत अलग है, हमारे लिए AI का मतलब है All Inclusive.

साथियों,

आज दुनिया में AI के लिए 'Trust और Safety rules को लेकर डिबेट चल रही है। लेकिन भारत इसके लिए पहले ही 'ट्रस्ट लेयर' का निर्माण कर चुका है। भारत का AI मिशन, डेटा और Privacy दोनों विषयों को हैंडल करने का सामर्थ्य रखता है। हम AI में भी ऐसे प्लेटफॉर्म विकसित करना चाहते हैं, जिस पर इनोवेटर्स इंक्लूसिव ऐप्लीकेशन्स डेवलप कर सकें। Payments में हमारी प्रियॉरिटी speed और assurance है। Credit में हमारा लक्ष्य approvals, और affordability हैं। Insurance में हमारे टारगेट policies और timely claims हैं। और Investments में हमें access और transparency में सक्सेसफुल होना है। AI इस Transformation की शक्ति बन सकता है। इसके लिए AI एप्लीकेशन्स का डिज़ायन लोगों को ध्यान में रखकर करना होगा, people centric होना चाहिए। जो व्यक्ति पहली बार digital finance इस्तेमाल कर रहा है, उसे यह भरोसा होना चाहिए कि errors swiftly resolved होंगे। यही confidence, फाइनेंशियल सर्विसिज़ में Digital Inclusion को, Trust को और मजबूत करेगा।

Friends,

कुछ साल पहले UK से AI Safety Summit शुरु हुई थी। अगले वर्ष, AI Impact Summit भारत में होगी। यानी सेफ्टी पर चर्चा UK से शुरु हुई थी, अब इंपैक्ट पर संवाद भारत में होगा। भारत और UK ने ग्लोबल ट्रेड को और उस ट्रेड को लेकर win-win पार्टनरशिप का रास्ता दुनिया को दिखाया है। AI और फिनटेक में भी हमारी साझेदारी, इसी भाव को सशक्त करती है। UK की Research और Global Finance Expertise, और भारत की Scale और Talent, ये Combination पूरी दुनिया के लिए Opportunities के नए गेट खोल सकता है। हमने आज Start-Ups, Institutions और Innovation Hubs के बीच Connect को और मज़बूत करने का संकल्प लिया है। UK-India Fintech Corridor, नए startups को पायलट करने और आगे बढ़ाने के लिए अवसर बनाएगा। और साथ ही, इससे London Stock Exchange और GIFT City के बीच नए cooperation के रास्ते भी खुल सकते हैं। दोनों देशों के बीच ये financial integration, हमारी कंपनियों को फ्री ट्रेड अग्रीमेंट का ज्यादा से ज्यादा लाभ लेने में उपयोगी होगा, मदद करेगा।

साथियों,

हम सभी पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। मैं आज इस प्लेटफॉर्म से UK समेत दुनिया के हर पार्टनर को भारत के साथ Partnership के लिए Invite करता हूं। हर इन्वेस्टर को भारत की ग्रोथ के साथ ग्रो करने के लिए आमंत्रित करता हूं। हमें ऐसा Fintech World बनाना है, जहाँ Technology, People और Planet, दोनों को समृद्ध करे। जहाँ Innovation का लक्ष्य केवल Growth नहीं, बल्कि Goodness भी हो। जहाँ Finance का अर्थ केवल Numbers नहीं, बल्कि Human Progress हो। इसी आह्वान के साथ, आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। आरबीआई को बहुत-बहुत अभिनंदन। धन्यवाद!

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सरकार कृषि में 'टेक्नोलॉजी कल्चर' लाने पर विशेष जोर दे रही है: पीएम मोदी
March 06, 2026
इस वर्ष के केंद्रीय बजट ने कृषि और ग्रामीण परिवर्तन को नई दिशा प्रदान की है: प्रधानमंत्री
सरकार ने कृषि क्षेत्र को लगातार मजबूत किया है, प्रमुख प्रयासों से किसानों के जोखिम कम हुए हैं और उन्हें बुनियादी आर्थिक सुरक्षा मिली है: प्रधानमंत्री
यदि हम उच्च मूल्य वाली कृषि को बढ़ावा दें, तो यह कृषि को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में बदल देगा: प्रधानमंत्री
निर्यात-उन्मुख उत्पादन बढ़ने से प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजित होगा: प्रधानमंत्री
मत्स्य पालन ग्रामीण समृद्धि के लिए एक उच्च मूल्य और उच्च प्रभाव वाला क्षेत्र और निर्यात वृद्धि का एक प्रमुख आधार बन सकता है: प्रधानमंत्री
सरकार एग्रीस्टैक के माध्यम से कृषि के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना विकसित कर रही है: प्रधानमंत्री
प्रौद्योगिकी तभी परिणाम देती है जब सिस्टम इसे अपनाएं हैं, संस्थान इसे एकीकृत करें हैं और उद्यमी इस पर नवाचार करें: प्रधानमंत्री

नमस्कार !

बजट वेबिनार सीरीज के तीसरे वेबिनार में, मैं आप सभी का अभिनंदन करता हूं। इससे पहले, टेक्नोलॉजी, रिफॉर्म्स और इकोनॉमिक ग्रोथ जैसे अहम विषयों पर दो वेबिनार हो चुके हैं। आज, Rural Economy और Agriculture जैसे अहम सेक्टर पर चर्चा हो रही है। आप सभी ने बजट निर्माण में अपने मूल्यवान सुझावों से बहुत सहयोग दिया, और आपने देखा होगा बजट में आप सबके सुझाव रिफ्लेक्ट हो रहे हैं, बहुत काम आए हैं। लेकिन अब बजट आ चुका है, अब बजट के बाद उसके full potential का लाभ देश को मिले, इस दिशा में भी आपका अनुभव, आपके सुझाव और सरल तरीके से बजट का सर्वाधिक लोगों को लाभ हो। बजट का पाई-पाई पैसा जिस हेतु से दिया गया है, उसको परिपूर्ण कैसे करें? जल्द से जल्द कैसे करें? आपके सुझाव ये वेबिनार के लिए बहुत अहम है।

साथियों,

आप सभी जानते हैं, कृषि, एग्रीकल्चर, विश्वकर्मा, ये सब हमारी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। एग्रीकल्चर, भारत की लॉन्ग टर्म डेवलपमेंट जर्नी का Strategic Pillar भी है, और इसी सोच के साथ हमारी सरकार ने कृषि सेक्टर को लगातार मजबूत किया है। करीब 10 करोड़ किसानों को 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पीएम किसान सम्मान निधि मिली है। MSP में हुए Reforms से अब किसानों को डेढ़ गुना तक रिटर्न मिल रहा है। इंस्टिट्यूशनल क्रेडिट कवरेज 75 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। पीएम फसल बीमा योजना के तहत लगभग 2 लाख करोड़ रुपए के क्लेम सेटल किए गए हैं। ऐसे अनेक प्रयासों से किसानों का रिस्क बहुत कम हुआ है, और उन्हें एक बेसिक इकोनॉमिक सिक्योरिटी मिली है। इससे कृषि क्षेत्र का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। आज खाद्यान्न और दालों से लेकर तिलहन तक देश रिकॉर्ड उत्पादन कर रहा है। लेकिन अब, जब 21वीं सदी का दूसरा क्वार्टर शुरू हो चुका है, 25 साल बीत चुके हैं, तब कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा से भरना भी उतना ही आवश्यक है। इस साल के बजट में इस दिशा में नए प्रयास हुए हैं। मुझे विश्वास है, इस वेबिनार में आप सभी के बीच हुई चर्चा, इससे निकले सुझाव, बजट प्रावधानों को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने में मदद करेंगे।

साथियों,

आज दुनिया के बाजार खुल रहे हैं, ग्लोबल डिमांड बदल रही है। इस वेबिनार में अपनी खेती को एक्सपोर्ट ओरिएंटेड बनाने पर भी ज्यादा से ज्यादा चर्चा आवश्य़क है। हमारे पास Diverse Climate है, हमें इसका पूरा फायदा उठाना है। एग्रो क्लाइमेटिक जोन, उस विषय में हम बहुत समृद्ध है। इस साल का बजट इन सब बातों के लिए अनगिनत नए अवसर देने वाला बजट है। प्रोडक्टिविटी बढ़ाने की दिशा तय करता है, और एक्सपोर्ट स्ट्रेंथ को बढ़ावा देता है। बजट में हमने high value agriculture पर फोकस किया है। नारियल, काजू, कोको, चंदन, ऐसे उत्पादों के regional-specific promotion की बात कही है, और आपको मालूम है, दक्षिण के हमारे जो राज्य हैं खासकर केरल है, तमिलनाडु है, नारियल की पैदावार बहुत करते हैं। लेकिन अब वो क्रॉप, वो सारे पेड़ इतने पुराने हो चुके हैं कि उसकी वो क्षमता नहीं रही है। केरल के किसानों को अतिरिक्त लाभ हो, तमिलनाडु के किसानों को अतिरिक्त लाभ हो। इसलिए इस बार कोकोनट पर एक विशेष बल दिया गया है, जिसका फायदा आने वाले दिनों में हमारे इन किसानों को मिलेगा।

साथियों,

नॉर्थ ईस्ट की तरफ देखें, अगरवुड बहुत कम लोगों को मालूम है, जो ये अगरबत्ती शब्द है ना, वो अगरवुड से आया हुआ है। अब हिमालयन राज्यों में टेम्परेट नट क्रॉप्स, और इन्हें बढ़ावा देने का प्रस्ताव बजट में रखा गया है। जब एक्सपोर्ट ओरिएंटेड प्रोडक्शन बढ़ेगा, तो ग्रामीण क्षेत्रों में प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के जरिए रोजगार सृजन होगा। इस दिशा में एक coordinated action कैसे हो, आप सभी स्टेकहोल्डर्स मिलकर जरूर मंथन करें। अगर हम मिलकर High Value Agriculture को स्केल करते हैं, तो ये एग्रीकल्चर को ग्लोबली कंपेटिटिव सेक्टर में बदल सकता है। एग्री experts, इंडस्ट्री और किसान एक साथ कैसे आएं, किसानों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने के लिए किस तरह से गोल्स सेट किए जाएं, क्वालिटी, ब्रांडिंग और स्टैंडर्ड्स, ऐसे हर पहलू, इन सबको कैसे प्रमोट किया जाए, इन सारे विषयों पर चर्चा, इस वेबिनार को, इसके महत्व को बढ़ाएंगे। मैं एक और बात आपसे कहना चाहूंगा। आज दुनिया हेल्थ के संबंध में ज्यादा कॉनशियस है। होलिस्टिक हेल्थ केयर और उसमें ऑर्गेनिक डाइट, ऑर्गेनिक फूड, इस पर बहुत रुचि है। भारत में हमें केमिकल फ्री खेती पर बल देना ही होगा, हमें नेचुरल फार्मिंग पर बल देना होगा। नेचुरल फार्मिंग से, केमिकल फ्री प्रोडक्ट से दुनिया के बाजार तक पहुंचने में हमारे लिए एक राजमार्ग बन जाता है। उसके लिए सर्टिफिकेशन, लेबोरेटरी ये सारी व्यवस्थाएं सरकार सोच रही है। लेकिन आप लोग इसमें भी जरूर अपने विचार रखिए।

साथियों,

एक्सपोर्ट बढ़ाने में एक बहुत बड़ा फैक्टर फिशरीज सेक्टर का पोटेंशियल भी है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश भी है। आज हमारे अलग-अलग तरह के जलाशय, तालाब, ये सब मिलाकर लगभग 4 लाख टन मछली उत्पादन होता है। जबकि इसमें 20 लाख टन अतिरिक्त उत्पादन की संभावना मौजूद है। अब विचार कीजिए आप, 4 लाख टन से हम अतिरिक्त 20 लाख टन जोड़ दें, तो हमारे गरीब मछुआरे भाई-बहन हैं, उनकी जिंदगी कैसी बदल जाएगी। हमारे पास Rural Income को डायवर्सिफाई करने का अवसर है। फिशरीज एक्सपोर्ट ग्रोथ का बड़ा प्लेटफॉर्म बन सकता है, दुनिया में इसकी मांग है। इस वेबिनार से अगर बहुत ही प्रैक्टिकल सुझाव निकलते हैं, तो कैसे रिज़रवॉयर, उसकी पोटेंशियल की सटीक मैपिंग की जाए, कैसे क्लस्टर प्लानिंग की जाए, कैसे फिशरीज डिपार्टमेंट और लोकल कम्युनिटी के बीच मजबूत कोऑर्डिनेशन हो, तो बहुत ही उत्तम होगा। हैचरी, फीड, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, एक्सपोर्ट, उसके लिए आवश्यक लॉजिस्टिक्स, हर स्तर पर हमें नए बिजनेस मॉडल विकसित करने ही होंगे। ये Rural Prosperity, ग्रामीण समृद्धि के लिए, वहां की हाई वैल्यू, हाई इम्पैक्ट सेक्टर के रूप में परिवर्तित करने का एक अवसर है हमारे लिए, और इस दिशा में भी हम सबको मिलकर काम करना है, और आप आज जो मंथन करेंगे, उसके लिए, उस कार्य के लिए रास्ता बनेगा।

साथियों,

पशुपालन सेक्टर, ग्रामीण इकोनॉमी का हाई ग्रोथ पिलर है। भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा मिल्क प्रोड्यूसर है, Egg प्रोडक्शन में हम दूसरे स्थान पर है। हमें इसे और आगे ले जाने के लिए ब्रीडिंग क्वालिटी, डिजीज प्रिवेंशन और साइंटिफिक मैनेजमेंट पर फोकस करना होगा। एक और अहम विषय पशुधन के स्वास्थ्य का भी है। मैं जब One Earth One Health की बात करता हूं, तो उसमें पौधा हो या पशु, सबके स्वास्थ्य की बात शामिल है। भारत अब वैक्सीन उत्पादन में आत्मनिर्भर है। फुट एंड माउथ डिजीज, उससे पशुओं को बचाने के लिए सवा सौ करोड़ से अधिक डोज पशुओं को लगाई जा चुकी है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत टेक्नोलॉजी का विस्तार किया जा रहा है। हमारी सरकार में अब पशुपालन क्षेत्र के किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड का भी लाभ मिल रहा है। निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एनिमल हसबेंड्री इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड की शुरुआत भी की गई है, और आपको ये पता है हम लोगों ने गोबरधन योजना लागू की है। गांव के पशुओं के निकलने वाला मलमूत्र है, गांव का जो वेस्ट है, कूड़ा-कचरा है। हम गोबरधन योजना में इसका उपयोग करके गांव भी स्वच्छ रख सकते हैं, दूध से आय होती है, तो गोबर से भी आय हो सकती है, और एनर्जी सिक्योरिटी की दिशा में गैस सप्लाई में भी ये गोबरधन बहुत बड़ा योगदान दे सकता है। ये मल्टीपर्पज बेनिफिट वाला काम है, और गांव के लिए बहुत उपयोगी है। मैं चाहूंगा कि सभी राज्य सरकारें इसको प्राथमिकता दें, इसको आगे बढ़ाएं।

साथियों,

हमने पिछले अनुभवों से समझा है कि केवल एक ही फसल पर टिके रहना किसान के लिए जोखिम भरा है। इससे आय के विकल्प भी सीमित हो जाते हैं। इसलिए, हम crop diversification पर फोकस कर रहे हैं। इसके अलावा, National Mission on Edible Oils And Pulses, National Mission on Natural Farming, ये सभी एग्रीकल्चर सेक्टर की ताकत बढ़ा रहे हैं।

साथियों,

आप भी जानते हैं एग्रीकल्चर स्टेट सब्जेक्ट है, राज्यों का भी एक बड़ा एग्रीकल्चर बजट होता है, हमें राज्यों को भी निरंतर प्रेरित करना है कि वो अपना दायित्व निभाने में, हम उनको कैसे मदद दें, हमारे सुझाव उनको कैसे काम आएं। राज्य का भी एक-एक पैसा जो गांव के लिए, किसान के लिए तय हुआ है, वो सही उपयोग हो। हमें बजट प्रावधानों को जिला स्तर तक मजबूत करना होगा। तभी नई पॉलिसीज का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाया जा सकता है।

साथियों,

ये टेक्नोलॉजी की सदी है और सरकार का बहुत जोर एग्रीकल्चर में टेक्नोलॉजी कल्चर लाने पर भी है। आज e-NAM के माध्यम से मार्केट एक्सेस का डेमोक्रेटाइजेशन हुआ है। सरकार एग्रीस्टैक के जरिए, एग्रीकल्चर के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रही है। इसके तहत डिजिटल पहचान, यानी किसान आईडी बनाई जा रही है। अब तक लगभग 9 करोड़ किसानों की किसान आईडी बन चुकी है, और लगभग 30 करोड़ भूमि पार्सलों का डिजिटल सर्वे किया गया है। भारत-विस्तार जैसे AI आधारित प्लेटफॉर्म, रिसर्च इंस्टीट्यूशंस और किसानों के बीच की दूरी कम कर रहे हैं।

लेकिन साथियों,

टेक्नोलॉजी तभी परिणाम देती है, जब सिस्टम उसे अपनाएं, संस्थाएं उसे इंटीग्रेट करें और एंटरप्रेन्योर्स उस पर इनोवेशन खड़ा करें। इस वेबिनार में आपको इससे जुड़े सुझावों को मजबूती से सामने लाना होगा। हम टेक्नोलॉजी को कैसे सही तरीके से इंटीग्रेट करें, इस दिशा में इस वेबिनार से निकले सुझावों की बहुत बड़ी भूमिका होगी।

साथियों,

हमारी सरकार ग्रामीण समृद्धि के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वामित्व योजना, पीएम ग्रामीण सड़क योजना, स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक मदद, इसने रूरल इकोनॉमी को निरंतर मजबूत किया है। लखपति दीदी अभियान की सफलता को भी हमें नई ऊंचाई देनी है। अभी तक गांव की 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने में हम सफल हो चुके हैं। अब 2029 तक, 2029 तक 3 करोड़ में और 3 करोड़ जोड़ना है, और 3 करोड़ और लखपति दीदियां बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। ये लक्ष्य और तेजी से कैसे प्राप्त किया जाए, इसे लेकर भी आपके सुझाव महत्वपूर्ण होंगे।

साथियों,

देश में स्टोरेज का बहुत बड़ा अभियान चल रहा है। लाखों गोदाम बनाए जा रहे हैं। स्टोरेज के अलावा एग्री एंटरप्रेन्योर्स प्रोसेसिंग, सप्लाई चैन, एग्री-टेक, एग्री-फिनटेक, एक्सपोर्ट, इन सब में इनोवेशन और निवेश बढ़ाना आज समय की मांग है। मुझे विश्वास है आज जो आप मंथन करेंगे, उससे निकले अमृत से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी। आप सबको इस वेबिनार के लिए मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं, और मुझे पूरा विश्वास है कि जमीन से जुड़े हुए विचार, जड़ों से जुड़े हुए विचार, इस बजट को सफल बनाने के लिए, गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए बहुत काम आएंगे। आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।