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भारत देश के हर गाँव तक कनेक्टिविटी पहुँचाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है: प्रधानमंत्री मोदी
21वीं सदी का भारत 21वीं सदी का बिहार, अब सभी पुरानी कमियों को पीछे छोड़ते हुए आगे बढ़ रहा है: पीएम मोदी
देश में आगे बढ़ने के लिए पारित किया गया कृषि बिल ऐतिहासिक और आवश्यक है: प्रधानमंत्री

बिहार के गवर्नर श्री फागू चौहान जी, बिहार के मुख्यमंत्री श्रीमान नीतीश कुमार जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्री रविशंकर प्रसाद जी, श्री वी.के. सिंह जी, श्री आर.के. सिंह जी, बिहार के डिप्टी सीएम भाई सुशील जी, अन्य मंत्रीगण, सांसद और विधायकगण और मेरे प्यारे भाइयों और बहनों!

आज बिहार की विकास यात्रा का एक और अहम दिन है। अब से कुछ देर पहले बिहार में कनेक्टिविटी को बढ़ाने वाली नौ परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया है। इन परियोजनाओं में हाइवे को 4 लेन और 6 लेन का बनाने और नदियों पर 3 बड़े पुलों के निर्माण का काम शामिल है। इन परियोजनाओं के लिए बिहार के लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों, आज का दिन बिहार के लिए तो अहम है ही, ये पूरे देश के लिए भी बहुत बड़ा दिन है। युवा भारत के लिए भी बहुत बड़ा दिन है। आज भारत, अपने गांवों को आत्मनिर्भर भारत का मुख्य आधार बनाने के लिए भी एक बड़ा कदम उठा रहा है। और खुशी ये है कि कार्यक्रम पूरे देश में है लेकिन इसकी शुरुआत आज बिहार से ही हो रही है। इस योजना के तहत 1000 दिनों में देश के 6 लाख गांवों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा जाएगा। मुझे विश्वास है कि नीतीश जी के सुशासन में, दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ते बिहार में इस योजना पर भी तेजी से काम होगा।

साथियों, भारत के गांवों में इंटरनेट का उपयोग करने वालों की संख्या कभी शहरी लोगों से ज्यादा हो जाएगी, ये कुछ साल पहले तक सोचना भी मुश्किल था। गांव की महिलाएं, किसान और गांव के युवा भी इतनी आसानी से इंटरनेट का इस्तेमाल करेंगे, इस पर भी बहुत लोग सवाल उठाते थे। लेकिन अब ये सारी स्थितियां बदल चुकी हैं। आज भारत डिजिटल ट्रांजेक्शन करने वाले दुनिया के सबसे अग्रणी देशों की कतार में है। अगस्त के ही आंकड़ों को देखें तो इस दौरान लगभग 3 लाख करोड़ रुपए का लेन-देन UPI के माध्यम से हुआ है मोबाइल फोन के माध्‍यम से हुआ है। कोरोना के इस समय में डिजिटल भारत अभियान ने देश के सामान्य जन की बहुत मदद की है।

साथियों, इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ने के साथ-साथ अब ये भी जरूरी है कि देश के गांवों में अच्छी क्वालिटी, तेज रफ्तार वाला इंटरनेट भी हो। सरकार के प्रयासों की वजह से देश की करीब डेढ़ लाख पंचायतों तक ऑप्टिकल फाइबर पहले ही पहुंच चुका है। यही नहीं बीते 6 साल में देशभर में 3 लाख से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर भी ऑनलाइन जोड़े गए हैं। अब यही कनेक्टिविटी देश के हर गांव तक पहुंचाने के लक्ष्य साथ देश आगे बढ़ रहा है। जब गांव-गांव में तेज़ इंटरनेट पहुंचेगा तो गांव में पढ़ाई आसान होगी। गांव के बच्चे, हमारे ग्रामीण युवा भी एक क्लिक पर दुनिया की किताबों तक, तकनीक तक आसानी से पहुंच पाएंगे। यही नहीं, Tele-medicine के माध्यम से अब दूर-सुदूर के गांवों में भी सस्ता और प्रभावी इलाज गरीब को घर बैठे ही दिलाना संभव हो पाएगा।

आपको मालूम है, पहले अगर रेलवे में आरक्षण करना होता था तो गांव से शहर जाना पड़ता था, कतार में खड़ा रहना होता था और रेलवे की आरक्षण के लिए हमें जाना पड़ता था। आज कॉमन सर्विस में जाकर अपने ही गांव में आप रेलवे का रिजर्वेशन करा सकते हैं। कहीं और जाना है तो उसका रिजर्वेशन आसानी से करा सकते हैं, क्‍योंकि इंटरनेट की सुविधा है। हमारे किसानों को तो इससे बहुत अधिक लाभ होगा। इससे किसानों को खेती से जुड़ी हर आधुनिक तकनीक, नई फसलों, नए बीजों, नए तौर-तरीकों और बदलते मौसम की जानकारी रियल टाइम में मिलनी संभव हो पाएगी। यही नहीं, अपनी उपज के व्यापार-कारोबार को पूरे देश और दुनिया में पहुंचाने में भी उनको ज्यादा सुविधा होगी। एक प्रकार से गांव को अब शहरों की ही तरह हर सुविधा घर बैठे मिले, इसके लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है।

साथियों, इतिहास साक्षी है कि दुनियाभर में उसी देश ने सबसे तेज़ तरक्की की है, जिसने अपने इंफ्रास्ट्रक्चर पर गंभीरता से निवेश किया है। लेकिन भारत में दशकों तक ऐसा रहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े और व्यापक बदलाव लाने वाले प्रोजेक्ट्स पर उतना ध्यान नहीं दिया गया। बिहार तो इसका बहुत बड़ा भुक्तभोगी रहा है। साथियों, ये अटल जी की सरकार थी सबसे पहले जिसने इंफ्रास्ट्रक्चर को राजनीति का, विकास की योजनाओं का प्रमुख आधार बनाया था। नीतीश जी तो तब उनकी ही सरकार में रेल मंत्री थे। उन्हें इसका और ज्यादा अनुभव है, उन्होंने गवर्नेंस में उस बदलाव को और करीब से देखा है।

साथियों, इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर अब जिस स्केल पर काम हो रहा है, जिस स्पीड पर काम हो रहा है, वो अभूतपूर्व है। 2014 से पहले की तुलना में आज हर रोज़ दोगुनी से भी तेज़ गति से हाइवे बनाए जा रहे हैं। हाइवे निर्माण पर होने वाले खर्च में भी 2014 से पहले की तुलना में लगभग 5 गुणा बढ़ोतरी की गई है। आने वाले 4-5 सालों में इंफ्रास्ट्रक्चर पर 110 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें से भी 19 लाख करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट्स सिर्फ हाइवे से जुड़े हैं।

साथियों, रोड और कनेक्टिविटी से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को विस्तार देने के इन प्रयासों का बिहार को भी भरपूर लाभ हो रहा है, पूर्वी भारत पर मेरा विशेष ध्‍यान है। 2015 में घोषित पीएम पैकेज के तहत 3 हज़ार किलोमीटर से अधिक के नेशनल हाइवे प्रोजेक्ट्स की घोषणा की गई थी। इसके अलावा, भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत भी लगभग साढ़े 6 सौ किलोमीटर नेशनल हाइवे का निर्माण किया जा रहा है। आज बिहार में नेशनल हाइवे ग्रिड को गति दी जा रही है। पूर्वी और पश्चिमी बिहार को जोड़ने के लिए Four लेनिंग के 5 प्रोजेक्ट्स, उत्तरी भारत को दक्षिण भारत से जोड़ने के लिए 6 प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। आज भी जिन हाइवे चौड़ीकरण के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास किया गया है, उनसे, बिहार के तमाम बड़े शहरों का सड़क-संपर्क और मज़बूत होगा।

साथियों, बिहार की कनेक्टिविटी में सबसे बड़ी बाधा बड़ी नदियों के चलते रही है। यही कारण है कि जब पीएम पैकेज की घोषणा हो रही थी तो पुलों के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया था। पीएम पैकेज के तहत गंगाजी के ऊपर कुल 17 पुल बनाए जा रहे हैं, और अभी सुशील जी ने बड़े विस्‍तार से उसका बड़ा खाका आपके सामने रखा और जिसमें से अधिकतर पूरे हो चुके हैं। इसी तरह गंडक और कोसी नदियों पर भी पुलों का निर्माण किया जा रहा है। इसी कड़ी में आज

4 लेन के 3 नए पुलों का शिलान्यास हुआ है। इसमें से दो पुल गंगा जी पर और एक पुल कोसी नदी पर बनने वाला है। इनके बनने पर गंगा जी और कोसी नदी पर फोर लेन के पुलों की क्षमता और बढ़ जाएगी।

साथियों, बिहार की लाइफलाइन के रूप में मशहूर महात्मा गांधी सेतु, उसके हाल भी हमने देखे हैं, दुर्दशा भी देखी है, मुसीबत भी देखी है, आज नए रंगरूप में सेवाएं दे रहा है। लेकिन बढ़ती आबादी और भविष्य की ज़रूरतों को देखते हुए, अब महात्मा गांधी सेतु के समानांतर चार लेन का एक नया पुल बनाया जा रहा है। नए पुल के साथ 8-लेन का 'पहुंच पथ' भी होगा। इसी तरह गंगा नदी पर ही विक्रमशिला सेतु के समानांतर बनने वाले नए पुल और कोसी नदी पर बनने वाले पुल से बिहार की कनेक्टिविटी और सुधरेगी।

साथियों, कनेक्टिविटी एक ऐसा विषय है, जिसे टुकड़ों में सोचने के बजाय, संपूर्णता में सोचना होता है। एक पुल यहां बन गया, एक सड़क वहां बन गई, एक रेल रूट उधर बना दिया, एक रेलवे स्टेशन इधर बना दिया, इस तरह की अप्रोच ने देश का बहुत नुकसान किया है। पहले सड़कों का, हाईवे का रेल नेटवर्क से कोई वास्ता नहीं रहता था, रेल का पोर्ट से और पोर्ट का एयरपोर्ट से भी कम ही नाता रहता था। 21वीं सदी का भारत, 21वीं सदी का बिहार, अब इन सारी पुरानी कमियों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ रहा है। आज देश में Multi-modal Connectivity पर बल दिया जा रहा है। अब हाईवे इस तरह बन रहे हैं कि वो रेल रूट को, एयर रूट को सपोर्ट करें। रेल रूट इस तरह बन रहे हैं कि वो पोर्ट से इंटर-कनेक्टेड हों। यानि सोच ये है कि यातायात का एक साधन, दूसरे साधन को सपोर्ट करे। इससे Logistics को लेकर भारत में जो समस्याएं रही हैं, वो भी बहुत हद तक दूर हो जाएंगी।

साथियों, इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से सबसे ज्यादा लाभ समाज के सबसे कमज़ोर वर्ग को होता है,

गरीब को होता है। इससे हमारे किसानों को भी बहुत अधिक लाभ होता है। किसानों को अच्छी सड़कें मिलने से, नदियों पर पुल बनने से खेत और शहरों के मार्केट की दूरी कम हो जाती है। साथियों, कल देश की संसद ने, देश के किसानों को नए अधिकार देने वाले बहुत ही ऐतिहासिक कानूनों को पारित किया है। मैं आज जब बिहार के लोगों से बात कर रहा हूं, इस समय पूरे हिन्‍दुस्‍तान के किसानों को भी और भारत के उज्‍ज्‍वल भविष्‍य के लिए जो आशावान लोग हैं, उन सब के लिए भी देश के किसानों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। ये सुधार 21वीं सदी के भारत की जरूरत हैं।

साथियों, हमारे देश में अब तक उपज और बिक्री की जो व्यवस्था चली आ रही थी, जो कानून थे, उसने किसानों के हाथ-पांव बांधे हुए थे। इन कानूनों की आड़ में देश में ऐसे ताकतवर गिरोह पैदा हो गए थे, जो किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे थे। आखिर ये कब तक चलता रहता? इसलिए, इस व्यवस्था में बदलाव करना आवश्यक था और ये बदलाव हमारी सरकार ने करके दिखाया है। नए कृषि सुधारों ने देश के हर किसान को ये आजादी दे दी है कि वो किसी को भी, कहीं पर भी अपनी फसल, अपने फल-सब्जियां अपनी शर्तों पर बेच सकता है। अब उसे अपने क्षेत्र की मंडी के अलावा भी कई और विकल्प मिल गए हैं। अब उसे अगर मंडी में ज्यादा लाभ मिलेगा, तो वहां मंडी में जाकर अपनी फसल बेचेगा। मंडी के अलावा कहीं और से ज्यादा पैसा मिलता है, लाभ मिलता है तो वहां जाकर बेचगा, उसके सारे बंधनों से मुक्ति दिलाने के कारण संभव होगा। अब सवाल ये कि आखिर इससे फर्क क्या पड़ेगा? आखिर इससे किसान को क्या फायदा होगा? आखिर ये फैसला, किस तरह किसानों की आर्थिक स्थिति को बदलने में बहुत मददगार साबित होगा? इन सवालों का जवाब भी अब ग्राउंड रिपोर्ट्स से ही मिल रहा है।

किसानों को मिली इस आजादी के कई लाभ दिखाई देने शुरू भी हो गए हैं। क्‍योंकि इसका अध्‍यादेश कुछ महीने पहले निकाला गया था। ऐसे प्रदेश जहां पर आलू बहुत होता है, वहां से रिपोर्ट्स हैं कि जून-जुलाई के दौरान थोक खरीदारों ने किसानों को अधिक भाव देकर सीधे कोल्ड स्टोरेज से ही आलू खरीद लिया है। बाहर किसानों को आलू के ज्यादा दाम मिले तो इसकी वजह से जो किसान मंडियों में आलू लेकर पहुंचे थे, आखिर दवाब में आने के कारण, बाहर बड़ा ऊंचा मार्केट होने के कारण मंडी के लोगों को भी किसानों को ज्‍यादा दाम देना पड़ा। उन्हें भी ज्यादा कीमत मिली। इसी तरह मध्य प्रदेश और राजस्थान से रिपोर्ट्स हैं कि वहां पर तेल मिलों ने किसानों को सीधे 20 से 30 प्रतिशत ज्यादा देकर सरसों की खरीद की है। मध्य प्रदेश, उत्‍तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में दालें बहुत होती हैं। इन राज्यों में पिछले साल की तुलना में 15 से 25 प्रतिशत तक ज्यादा दाम सीधे किसानों को मिले हैं। दाल मिलों ने वहां भी सीधे किसानों से खरीद की है, सीधे उन्हें ही भुगतान किया है।

अब देश अंदाजा लगा सकता है कि अचानक कुछ लोगों को जो दिक्कत होनी शुरू हुई है, वो क्यों हो रही है। कई जगह ये भी सवाल उठाया जा रहा है कि अब कृषि मंडियों का क्या होगा? क्या कृषि मंडियां बंद हो जाएंगी, क्या वहां पर खरीद बंद हो जाएगी? जी नहीं, ऐसा कतई नहीं होगा। और मैं यहां स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि ये कानून, ये बदलाव कृषि मंडियों के खिलाफ नहीं हैं। कृषि मंडियों में जैसे काम पहले होता था, वैसे ही अब भी होगा। बल्कि ये हमारी ही एनडीए सरकार है जिसने देश की कृषि मंडियों को आधुनिक बनाने के लिए निरंतर काम किया है। कृषि मंडियों के कार्यालयों को ठीक करने के लिए, वहां का कंप्यूटराइजेशन कराने के लिए, पिछले 5-6 साल से देश में बहुत बड़ा अभियान चल रहा है। इसलिए जो ये कहता है कि नए कृषि सुधारों के बाद कृषि मंडियां समाप्त हो जाएंगी, तो वो किसानों से सरासर झूठ बोल रहा है।

साथियों, बहुत पुरानी कहावत है कि संगठन में शक्ति होती है। कृषि सुधार से जुड़ा दूसरा कानून, इसी से प्रेरित है। आज हमारे यहां 85 प्रतिशत से ज्यादा किसान ऐसे हैं जो बहुत थोड़ी सी जमीन उनके पास है, किसी के पास एक एकड़, किसी के पास दो एकड़, किसी के पास एक हेक्‍टेयर, किसी के पास दो हेक्‍टेयर, सब छोटे किसान हैं। छोटी सी जमीन पर खेती कर अपना गुजारा करता है। इस वजह से इनका खर्च भी बढ़ जाता है और उन्हें अपनी थोड़ी सी उपज बेचने पर सही कीमत भी नहीं मिलती है। लेकिन जब किसी क्षेत्र के ऐसे किसान अगर एक संगठन बनाकर यही काम करते हैं, तो उनका खर्च भी कम होता है और सही कीमत भी सुनिश्चित होती है। बाहर से आए खरीदार इन संगठनों से बाकायदा समझौता करके सीधे उनकी उपज खरीद सकते हैं। ऐसे में किसानों के हितों की रक्षा के लिए ही दूसरा कानून बनाया गया है। ये एक ऐसा अनोखा कानून है जहां किसान के ऊपर कोई बंधन नहीं होगा। किसान के खेत की सुरक्षा, उसके जमीन की मालिकी की सुरक्षा, किसान को अच्‍छे बीज, किसानों को अच्छी खाद, सभी की जिम्मेदारी जा किसान के साथ कांट्रेक्‍ट करेगा उस खरीदार की होगी, किसान से जो समझौता करेगा, उस समझौता करने वाले की होगी।

साथियों, इन सुधारों से कृषि में निवेश बढ़ेगा, किसानों को आधुनिक टेक्नोलॉजी मिलेगी, किसानों के उत्पाद और आसानी से अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचेंगे। मुझे बताया गया है कि यहां बिहार में हाल ही में 5 कृषि उत्पादक संघों ने मिलकर, चावल बेचने वाली एक बहुत मशहूर कंपनी के साथ एक समझौता किया है। इस समझौते के तहत 4 हजार टन धान, वो कंपनी, बिहार के इन FPO's से खरीदेगी। अब इन FPO's से जुड़े किसानों को मंडी नहीं जाना पड़ेगा। उनकी उपज अब सीधे नेशनल और इंटरनेशनल मार्केट में पहुंचेगी। साफ है कि इन सुधारों के बाद, खेती से जुड़े बहुत सारे छोटे-बड़े उद्योगों के लिए बहुत बड़ा मार्ग खुलेगा, ग्रामीण उद्योगों की ओर देश आगे बढ़ेगा। मैं आपको एक और उदाहरण देता हूं। मान लीजिए, कोई नौजवान एग्रीकल्चर सेक्टर में कोई स्टार्ट-अप शुरू करना चाहता है। वो चिप्स की फैक्ट्री ही खोलना चाहता है। अभी तक ज्यादातर जगह होता ये था कि पहले उसे मंडी में जाकर आलू खरीदने होते थे, फिर वो अपना काम शुरू कर पाता था। लेकिन अब वो नौजवान, जो नए-नए सपने लेकर आया है वो सीधे गांव के किसान के पास जाकर उससे आलू के लिए समझौता कर सकेगा। वो किसान को बताएगा कि मुझे इस क्लालिटी का आलू चाहिए, इतना आलू चाहिए। वो किसान को अच्छी क्वालिटी के आलू पैदा करने में हर तरह की तकनीकी सहायता भी करेगा।

साथियों, इस तरह के समझौतों का एक और पहलू है। आपने ये देखा होगा कि जहां डेयरी होती हैं, वहां आसपास के पशुपालकों को दूध बेचने में आसानी तो होती है, डेयरियां भी पशुपालकों का, उनके पशुओं का ध्यान रखती हैं। पशुओं का सही समय पर टीकाकरण हो, उनके लिए सही तरह के शेड बनें, पशुओं को अच्‍छा आहार मिले, पशु बीमार हो जाएं तो उनका डॉक्‍टर पहुंच जाए और मैं तो गुजरात में रहा हूं। मैंने देखा है, डेयरी कैसे पशुओं को संभालती है। बड़ी डेयरी दुग्‍ध उत्‍पादक उन तक जाकर के किसानों की मदद करती है। और इन सबके बाद भी यह महत्‍वपूर्ण बात है, यह जो दूध खरीदने का काम है, यह तो डेयरी कर लेती है लेकिन पशु का मालिक, पशुपालक या किसान ही रहता है। पशु का मालिक कोई और नहीं बनता है। वैसे ही जमीन का मालिक किसान ही रहेगा। ऐसे ही बदलाव अब खेती में भी होने का मार्ग खुल गया है।

साथियों, ये भी जगजाहिर रहा है कि कृषि व्यापार करने वाले हमारे साथियों के सामने एसेन्शियल कमोडिटी एक्ट के कुछ प्रावधान, हमेशा आड़े आते रहे हैं। बदलते हुए समय में इसमें भी बदलाव किया है। दालें, आलू, खाद्य तेल, प्याज जैसी चीजें अब इस एक्ट के दायरे से बाहर कर दी गई हैं। अब देश के किसान, बड़े-बड़े स्टोरहाउस में, कोल्ड स्टोरेज में इनका आसानी से भंडारण कर पाएंगे। जब भंडारण से जुड़ी कानूनी दिक्कतें दूर होंगी तो हमारे देश में कोल्ड स्टोरेज का भी नेटवर्क और विकसित होगा, उसका और विस्तार होगा।

साथियों, कृषि क्षेत्र में इन ऐतिहासिक बदलावों के बाद, इतने बड़े व्यवस्था परिवर्तन के बाद कुछ लोगों को अपने हाथ से नियंत्रण जाता हुआ दिखाई दे रहा है। इसलिए अब ये लोग MSP पर किसानों को गुमराह करने में जुटे हैं। ये वही लोग हैं, जो बरसों तक MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को अपने पैरों की नीचे दबाकर बैठे रहे। मैं देश के प्रत्येक किसान को इस बात का भरोसा देता हूं कि MSP की व्यवस्था जैसे पहले चली आ रही थी, वैसे ही चलती रहेगी। इसी तरह हर सीजन में सरकारी खरीद के लिए जिस तरह अभियान चलाया जाता है, वो भी पहले की तरह चलते रहेंगे।

साथियों, किसानों को MSP देने और सरकारी खरीद के लिए जितना काम हमारी सरकार ने किया है, वो पहले कभी नहीं किया गया। बीते 5 साल में जितनी सरकारी खरीद हुई है और 2014 से पहले के 5 साल में जितनी सरकारी खरीद हुई है, उसके आंकड़े देखेंगे तो कौन सच बोल रहा है, कौन किसानों के लिए काम कर रहा है, कौन किसानों की भलाई के लिए काम कर रहा है इसकी गवाही वहीं से मिल जाएगी। मैं अगर दलहन और तिलहन की ही बात करूं तो पहले की तुलना में, दलहन और तिलहन की सरकारी खरीद करीब-करीब 24 गुणा अधिक की गई है। इस साल कोरोना संक्रमण के दौरान भी रबी सीज़न में किसानों से गेहूं की रिकॉर्ड खरीद की गई है। इस साल रबी में गेहूं, धान, दलहन और तिलहन को मिलाकर, किसानों को 1 लाख 13 हजार करोड़ रुपए MSP पर दिया गया है। ये राशि भी पिछले साल के मुकाबले 30 प्रतिशत से ज्यादा है। यानि कोरोना काल में न सिर्फ रिकॉर्ड सरकारी खरीद हुई बल्कि किसानों को रिकॉर्ड भुगतान भी किया गया है।

साथियों, 21वीं सदी के भारत का ये दायित्व है कि वो देश के किसानों के लिए आधुनिक सोच के साथ, नई व्यवस्थाओं का निर्माण करे। देश के किसान को, देश की खेती को, आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमारे प्रयास निरंतर जारी रहेंगे। और इसमें निश्चित तौर पर कनेक्टिविटी की बड़ी भूमिका तो है ही। अंत में, एक बार फिर कनेक्टिविटी के तमाम प्रोजेक्ट्स के लिए बिहार को, देश को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। और मैं फिर एक बार वही आग्रह करूंगा कि हमें कोरोना से लड़ाई लड़ते रहना है। हमें कोरोना को पराजित करके रहना है। हमें हमारे परिवार के सदस्‍य को कोरोना से बचाना है और इसके लिए जो भी नियम तय किए गए हैं, उनका हम सबने पालन करना है। कोई एक उसमें छूट जाता है तो फिर मामला गड़बड़ हो जाता है, हम सबने पालन करना है। मैं फिर एक बार मेरे बिहार के प्‍यारे भाइयो-बहनो को बहुत-बहुत धन्‍यवाद देता हूं।

 

नमस्‍कार!

 

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PM thanks world leaders for their greetings on India’s 74th Republic Day
January 26, 2023
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The Prime Minister, Shri Narendra Modi has thanked world leaders for their greetings on India’s 74th Republic Day.

In response to a tweet by the Prime Minister of Australia, the Prime Minister said;

"Thank you Prime Minister @AlboMP. Greetings to you and to the friendly people of Australia on Australia Day."

In response to a tweet by the Prime Minister of Nepal, the Prime Minister said; "Thank You @cmprachanda ji for your warm wishes!"

In response to a tweet by the Prime Minister of Bhutan, the Prime Minister said; "Thank you @PMBhutan Dr. Lotay Tshering for your warm wishes! India is committed to its unique partnership with Bhutan for progress and prosperity of both our nations."

In response to a tweet by the President of Maldives, the Prime Minister said; "Thank you for your warm greetings, President @ibusolih. Glad to see the sustained progress achieved by India-Maldives partnership, underpinned by common democratic values."

In response to a tweet by the Prime Minister of Israel, the Prime Minister said; "Thank you for your warm wishes for India's Republic Day, PM @netanyahu. Look forward to further strengthening our strategic partnership."

In response to a tweet by the President of France, the Prime Minister said; "Grateful for your warm greetings my dear friend @EmmanuelMacron on India’s Republic Day. I share your commitment to work together for success of India’s G20 Presidency & 25th anniversary of India-France Strategic Partnership. India and France together are a force for global good."

In response to a tweet by the Prime Minister of Mauritius, the Prime Minister said; "Thank you, PM @KumarJugnauth. In our shared journey as modern Republics, our two countries have been partnering closely in people-centred development. Looking forward to taking our cherished partnership with Mauritius to even greater heights."