विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ने का हमारा संकल्प बहुत स्पष्ट है: प्रधानमंत्री
हम मिलकर एक ऐसे भारत के निर्माण की दिशा में काम कर रहे हैं, जहां किसान समृद्ध और सशक्त बनें : प्रधानमंत्री
हमने कृषि को विकास का पहला इंजन माना है, जिससे किसानों को विशिष्ट स्थान मिला है: प्रधानमंत्री
हम एक साथ दो बड़े लक्ष्यों पर काम कर रहे हैं - कृषि क्षेत्र का विकास और हमारे गांवों की समृद्धि: प्रधानमंत्री
हमने बजट में 'पीएम धन धान्य कृषि योजना' की घोषणा की है, इसके तहत देश में सबसे कम कृषि उत्पादकता वाले 100 जिलों के विकास पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा: प्रधानमंत्री
हमने बिहार में मखाना बोर्ड के गठन की घोषणा की है: प्रधानमंत्री
हमारी सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समृद्ध बनाने के लिए प्रतिबद्ध है: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत करोड़ों गरीबों को घर दिए जा रहे हैं, स्वामित्व योजना ने संपत्ति मालिकों को 'रिकॉर्ड ऑफ राइट्स' दिया है: प्रधानमंत्री

नमस्कार!

बजट के बाद, बजट से जुड़े वेबिनार में आप सबकी उपस्थिति बहुत अहम है। इस कार्यक्रम से जुड़ने के लिए आप सभी का धन्यवाद।

इस वर्ष का बजट, हमारी सरकार के तीसरे टर्म का पहला पूर्ण बजट था। इस बजट में हमारी नीतियों में निरंतरता दिखी ही है, साथ ही विकसित भारत के विजन में नया विस्तार भी दिखा। बजट से पहले आप सभी स्टेकहोल्डर्स ने जो इनपुट दिए, जो सुझाव दिए, वो बजट बनाते समय बहुत काम आए। अब इस बजट को और ज्यादा प्रभावी रूप से नीचे उतारने में, सही में उसका अच्छे से अच्छा, जल्दी से जल्दी आउटकम मिले, सारे निर्णय-नीतियां प्रभावी बनें, उसमें आप सबकी भूमिका और बढ़ गई है।

साथियों,

विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे भारत के संकल्प बहुत स्पष्ट हैं। हम सभी मिलकर एक ऐसे भारत के निर्माण में जुटे हैं, जहां किसान समृद्ध हो, किसान सशक्त हो। हमारा प्रयास है कि कोई किसान पीछे ना छूटे, हर एक किसान को आगे बढ़ाएं। हमने कृषि को विकास का पहला इंजन मानते हुए, अपने अन्नदाताओं को गौरवपूर्ण स्थान दिया है। हम दो बड़े लक्ष्यों की ओर एक साथ बढ़ रहे हैं, पहला- कृषि सेक्टर का विकास और दूसरा- हमारे गांवों की समृद्धि।

साथियों,

पीएम किसान सम्मान निधि योजना, 6 साल पहले लागू की गई थी। इस योजना के तहत अब तक लगभग पौने 4 लाख करोड़ रुपए किसानों को मिल चुके हैं। इतनी राशि करीब-करीब 11 करोड़ किसानों के खाते में सीधे पहुंचाई गई है। 6 हजार रुपए सालाना की इस आर्थिक मदद से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त हो रही है। हमने एक किसान केंद्रित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है, ताकि देशभर के किसानों तक इस योजना का लाभ पहुंच सके। यानी इसमें किसी बिचौलिए के घुसने या लीकेज की गुंजाइश ही ना रहे, no cut की कंपनी। ये इस बात का उदाहरण है कि अगर आप जैसे एक्सपर्ट और विजनरी लोग, अगर उनका सहयोग होता है तो योजना जल्द से जल्द सफल होती है और ज्यादा अच्छा परिणाम देती है। आपके योगदान से किसी भी योजना को पूरी मजबूती और पारदर्शिता के साथ धरातल पर उतारा जा सकता है। मैं इसके लिए आप सबके सहयोग की और हमेशा सक्रिय सहयोग देने के लिए आपकी सराहना करना चाहूँगा। अब हम इस साल के बजट की घोषणाओं को जमीन पर उतारने के लिए मिलकर के, तेजी से काम करें, ये आवश्यक है। इसमें भी आपका सहयोग पहले की भाती तो मिलेगा ही, लेकिन और ज्यादा मिले, और व्यापक मिले, हर सेक्टर में मिले।

साथियों,

आप अब जानते हैं, आज भारत का कृषि उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर है। 10-11 साल पहले जो कृषि उत्पादन 265 मिलियन टन के करीब था, वो अब बढ़कर 330 मिलियन टन से ज्यादा हो गया है। इसी तरह, बागवानी से जुड़ा उत्पादन बढ़कर 350 मिलियन टन से ज्यादा हो गया है। ये हमारी सरकार के बीज से बाजार तक की अप्रोच का परिणाम है। कृषि सुधार, किसानों का सशक्तिकरण और मजबूत वैल्यू चेन ने इसे संभव बनाया है। अब हमें देश के agricultural potential का पूरा इस्तेमाल करके और भी बड़े targets पाने तक पहुँचना है। इसी दिशा में, हमने बजट में पीएम धन धान्य कृषि योजना का ऐलान किया है, ये मेरे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है। इसके तहत देश के 100 सबसे कम कृषि उत्पादकता वाले जिले, low productivity वाले जिलों के विकास पर फोकस किया जाएगा। आप सबने विकास के कई पैरामीटर पर Aspirational District कार्यक्रम से मिले नतीजों को देखा है। इन जिलों को collaboration, governance और healthy competition का, और convergence का बहुत फायदा मिल रहा है। मैं चाहूंगा कि आप सभी ऐसे जिलों से मिले परिणामों का अध्ययन करें और उसकी लर्निंग से सीखते हुए पीएम धन धान्य कृषि योजना को इन 100 जिलों में बहुत तेज गति से आगे बढ़ाएं। इससे इन 100 जिलों में किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

साथियों,

पिछले कुछ वर्षों में हमारे प्रयासों से देश में दाल का उत्पादन बढ़ा है, और इसके लिए मैं किसानों का अभिनंदन भी करता हूं। लेकिन, अभी भी हमारी घरेलू खपत का 20 प्रतिशत विदेशों पर निर्भर है, आयात पर निर्भर है। यानि हमें अपने दलहन उत्पादन को बढ़ाना ही होगा। हमने चने और मूंग में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है। लेकिन हमें तुअर, उड़द और मसूर के उत्पादन को बढ़ाने के लिए और तेजी से ज्यादा काम करना ही है। दाल उत्पादन को गति देने के लिए आवश्यक है कि उन्नत बीजों की सप्लाई बनी रहे, और हाइब्रिड किस्मों को बढ़ावा दिया जाए। इसके लिए आप सभी को जलवायु परिवर्तन, बाजार की अनिश्चितता, और दाम में आने वाले उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों के समाधान पर फोकस करना होगा।

साथियों,

पिछले दशक में, ICAR ने Breeding program में modern tools और cutting-edge technologies का इस्तेमाल किया। इससे 2014 से 2024 के बीच अनाज, तिलहन, दालें, चारा, गन्ना, विभिन्न फसलों में 2900 से अधिक नई किस्मों का विकास हुआ। आपको ये सुनिश्चित करना होगा कि हमारे देश के किसानों को ये नई वैरायटीज सस्ती दर पर मिलती रहे। हमें ये भी सुनिश्चित करना होगा कि किसानों की उपज मौसम के उतार-चढ़ाव से प्रभावित ना हो। आप जानते हैं कि बजट में इस बार अधिक उपज वाले बीजों के लिए राष्ट्रीय मिशन शुरू करने की घोषणा हुई है। इस कार्यक्रम में अभी जो प्राइवेट सेक्टर के लोग हैं, उन्हें मैं विशेष तौर पर कहूंगा कि इन बीजों के प्रसार पर जरूर फोकस करें। ये बीज, छोटे किसानों तक पहुंचने लगें, इसके लिए इन्हें seed chain का हिस्सा बनाना होगा, और यह काम हमारा है कि हम कैसे बने।

साथियों,

आप सब देख रहे हैं, आज लोगों में पोषण को लेकर काफी जागरूकता बढ़ी है। इसलिए, बागवानी, डेयरी और फिशरी प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग को देखते हुए इन सेक्टर्स में काफी इंवेस्टमेंट किया गया है। फल और सब्जियों का उत्पादन बढ़ाने के लिए अनेक कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। बिहार में मखाना बोर्ड के गठन की घोषणा भी की गई है। मेरा आग्रह है कि आप सभी स्टेकहोल्डर्स, diverse nutritional foods के प्रसार के लिए नए रास्ते तलाश करें। ऐसे पोषण युक्त खाद्य पदार्थों की पहुंच देश के कोने-कोने में और ग्लोबल मार्केट तक होनी चाहिए।

साथियों,

2019 में हमने पीएम मत्स्य संपदा योजना को लॉन्च किया था। इस सेक्टर के वैल्यू चेन को मजबूत बनाने, इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और इसे आधुनिक बनाने की दिशा में ये एक महत्वपूर्ण कदम था। इससे मछली पालन के क्षेत्र में production, productivity और post-harvest management बेहतर करने में मदद मिली। बीते वर्षों में, कई योजनाओं के माध्यम से इस सेक्टर में निवेश भी बढ़ाया गया, जिसके परिणाम आज हमारे सामने हैं। आज फिश प्रोडक्शन दोगुना हो चुका है, हमारा निर्यात भी दोगुना हो चुका है। हमारा प्रयास है कि Indian Exclusive Economic Zone और खुले समुद्र से सस्टेनेबल मछली पालन को बढ़ावा मिले। इसके लिए एक कार्य योजना तैयार की जाएगी। मैं चाहूंगा, आप सभी इस सेक्टर में Ease of Doing Business को बढ़ावा देने वाले आइडियाज पर मंथन करें, और उस पर जल्द से जल्द काम शुरू करें। इसके साथ ही हमें अपने पारंपरिक मछुआरे साथियों के हितों की रक्षा भी सुनिश्चित करनी होगी।

साथियों,

हमारी सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समृद्ध बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। पीएम आवास योजना-ग्रामीण, इसके तहत करोड़ों गरीबों को घर दिया जा रहा है, स्वामित्व योजना से संपत्ति मालिकों को 'Record of Rights' मिला है। हमने सेल्फ हेल्प ग्रुप्स की आर्थिक ताकत बढाई है, उनको मदद बढ़ाई है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से छोटे किसानों और कारोबारियों को फायदा हुआ है। हमने 3 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा है। हमारे प्रयासों से सवा करोड़ से ज्यादा बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। इस बजट में ग्रामीण समृद्धि और विकास के कार्यक्रमों के ऐलान से रोजगार के अनेक नए अवसरों की संभावना बनी है। स्किलिंग और टेक्नोलॉजी में निवेश से नए मौके बन रहे हैं। आप सभी इन विषयों पर जरूर चर्चा करें कि कैसे अभी चल रही योजनाओं को और प्रभावी बनाया जाए। इस दिशा में आपके सुझाव और योगदान, इससे सकारात्मक परिणाम जरूर मिलेंगे। हम सभी की सक्रिय भागीदारी से ही, गांव सशक्त होंगे, ग्रामीण परिवार सशक्त होंगे। और मुझे विश्वास है कि ये वेबिनार सच्चे अर्थ में, जल्द से जल्द, कम से कम समय में, अच्छे से अच्छे ढंग से, बजट को क्रियान्वित करने का और वो भी आप सबके सहयोग और सुझाव से करने का, अब ऐसा ना हो कि इस वेबिनार में बजट नया बनाने की चर्चा हो। अब ये बजट बन चुका है, अब ये योजना आ चुकी है। अब हमारा सारा फोकस एक्शन पर होना चाहिए। एक्शन के अंदर कठिनाइयां क्या हैं, कमियां क्या हैं, किस प्रकार के बदलाव की जरूरत है, उस पर जरूर हम ध्यान दें। तब तो जाकर के ये वेबिनार परिणामकारी होगा। अन्यथा हम एक साल के बाद जो बजट आने वाला है, उसकी चर्चा आज कर लेंगे, तो अभी जो हुआ है, उसका फायदा नहीं मिलेगा। और इसलिए मेरा आप सबसे आग्रह है कि हम जो बजट आया है, अब उसी बजट से हमने एक साल में लक्ष्य हासिल करने हैं, और उसमें सरकार अकेली नहीं, इस क्षेत्र के सभी स्टेकहोल्डर्स, एक दिशा में, एक मत के साथ, एक लक्ष्य के साथ, चल पड़े। यही एक अपेक्षा के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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आज दुनिया संसाधनों की कमी से नहीं, बल्कि भरोसे की कमी से जूझ रही है: G7 समिट में पीएम मोदी
June 16, 2026

राष्ट्रपति मैक्रों,
Your Excellencies,

नमस्कार!

G-7 समिट में हमारे गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए मैं राष्ट्रपति मैक्रों का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।

Friends,

आज का विश्व पहले से कहीं अधिक inter-connected और inter-dependent है। किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि केवल उसकी सीमाओं के भीतर तय नहीं होती। Mobility, data, capital, technology, ये सभी हमें आपस में जोड़ते हैं।

ऐसे समय में Partnerships का महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। लेकिन साझेदारियाँ तभी सफल होती हैं जब उनके केंद्र में विश्वास हो। आज सबसे महत्वपूर्ण Strategic Asset कोई mineral, technology या market नहीं, बल्कि आपसी विश्वास है।

विश्वास कि टेक्नॉलजी और supply chains को हथियार के रूप में नहीं, global good के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। विश्वास कि विकास के अवसर कुछ देशों तक सीमित नहीं रहेंगे। विश्वास कि वैश्विक संस्थान सभी देशों की आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम होंगे।

Friends,

पिछली सदी में मानवता को दो विश्व युद्धों से गुज़रना पड़ा। अनेक बलिदानों के बाद विश्व समुदाय ने शांति, स्थिरता और समृद्धि की ओर बढ़ने के लिए व्यवस्थाएं विकसित की। इन व्यवस्थाओं का आधार भी trust ही था।

किन्तु अनेक दशकों से, अनेक पीढ़ियों के योगदान से बनाए गए विश्वास को आज चोट पहुँच रही है। कोविड ने हमें आईना दिखाया कि trust और solidarity के दावे कितने खोखले थे।

Today the world does not suffer from a shortage of resources; it suffers from a shortage of trust. And the future of our partnerships depends on building this trust.

अमेरिका के राष्ट्रपति रोनल्ड रेगन ने कहा था: Trust but Verify. यह आज के समय में भी प्रासंगिक है। भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व है कि हम नए युग के अनुरूप trusted rules based order का निर्माण करें।

Friends,

भारत ने सदैव विश्व को एक परिवार के रूप में देखा है। हमारे सभी प्रयास “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” यानि, welfare and happiness for all के मूल सिद्धांत पर आधारित रहे हैं।

भारत का अनुभव दिखाता है कि विकास सबसे अधिक प्रभावी तब होता है जब वह लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ा हो। यही सिद्धांत हमारी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का भी आधार है। इसी सोच के साथ भारत ने International Solar Alliance, Coalition for Disaster Resilient Infrastructure, ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस, Mission LiFE, और “एक पेड़ माँ के नाम” जैसी वैश्विक पहलों को आगे बढ़ाया है।

संकट के समय भारत ने First Responder के रूप में सभी देशों की सहायता करना अपना दायित्व समझा है। कोविड महामारी के दौरान भारत ने डेढ़ सौ से अधिक देशों को दवाइयाँ और vaccines उपलब्ध कराईं।

श्रीलंका में cyclone हो, अफगानिस्तान में भूकंप हो, मोज़ाम्बिक में floods हों, या क्यूबा और जमैका में hurricane, भारत ने सदैव "Humanity First" के सिद्धांत पर कार्य किया है। हमारी विकास साझेदारियाँ भी इसी भावना को प्रतिबिंबित करती हैं। हमारे प्रयास पार्टनर देशों में capacity building और कौशल विकास पर केन्द्रित रहे हैं।

भारत का मानना है: The true test of partnership is not what we build for others, but what we enable others to build for themselves.

Friends,

आज ग्लोबल साउथ की विश्व समुदाय से बहुत उम्मीदें हैं। किन्तु उनकी अपेक्षा सहारे की नहीं, साथ की है। वे वैश्विक विकास के लाभार्थी नहीं, उसके भागीदार बनना चाहते हैं।

हमें donor–recipient की सोच से आगे बढ़कर, equal पार्टनर्स के रूप में काम करना होगा। उनके पास-पास नहीं, साथ-साथ चलना होगा। साझेदारी को dependency के बजाय, dignity से जोड़ना होगा। इन प्रयासों से हम भावी पीढ़ियों के सतत विकास की मजबूत नींव रख सकेंगे।

Friends,

अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ और वैश्विक एकजुटता तभी सार्थक बन सकती हैं, जब हम साझा चुनौतियों का मिलकर समाधान करें। भारत का दृढ विश्वास है कि विश्व के विभिन्न हिस्सों में चल रहे तनावों और युद्धों का स्थायी समाधान dialogue, diplomacy और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मार्ग से ही संभव है।

हम west asia में शांति प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं। इस संघर्ष से west asia में हमारे मित्र देशों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है। होर्मुज़ स्ट्रेट में maritime ट्रेड में आई बाधा के कारण पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा। भारत के कई civilians को जान गंवानी पड़ी। Global maritime ट्रेड के माध्यम से सभी देशों को आपस में जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा हमारा दायित्व है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें, और Seafarers बिना भय के अपना कार्य कर सकें।

Friends,

भारत इन विषयों पर सभी पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

बहुत-बहुत धन्यवाद।