"मेरे सपनों का भारत" और "भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के गुमनाम नायक" पर चयनित निबंधों का अनावरण किया
प्रधानमंत्री ने एमएसएमई प्रौद्योगिकी केंद्र और ओपन-एयर थिएटर सभागार - पेरुन्थालाईवर कामराजर मणिमंडपम का उद्घाटन किया
“भारत का जन भी युवा है, और भारत का मन भी युवा है; भारत अपने सामर्थ्य से भी युवा है, भारत अपने सपनों से भी युवा है; भारत अपने चिंतन से भी युवा है, भारत अपनी चेतना से भी युवा है”
"भारत अपने युवाओं को डेमोग्राफिक डिविडेंड के साथ-साथ डेवलपमेंट ड्राइवर भी मानता है"
“आज भारत के युवा में अगर श्रम का सामर्थ्य है, तो भविष्य की स्पष्टता भी है; इसीलिए, भारत आज जो कहता है, दुनिया उसे आने वाले कल की आवाज़ मानती है”
“युवा में वो क्षमता होती है कि वो पुरानी रूढ़ियों का बोझ लेकर नहीं चलता है; यही युवा, खुद को, समाज को, नई चुनौतियों के हिसाब से तैयार कर सकता है”
"आज के युवा 'कर सकता हूँ' की भावना से ओतप्रोत हैं, जो हर पीढ़ी के लिये प्रेरणा का स्रोत है”
"भारत के युवा वैश्विक समृद्धि की गाथा लिख रहे हैं"
"नए भारत का मंत्र - प्रतिस्पर्धा करो और जीतो; जुट जाओ और जीतो; जुट जाओ और जंग जीतो”
प्रधानमंत्री ने युवाओं से उन स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में शोध करने और लिखने का आह्वान किया, जिन्हें वह पहचान नहीं मिली जिनके वे हकदार थे

पुदुचेरी के लेफ्टिनेंट गवर्नर तमिल- साई जी, मुख्यमंत्री एन रंगासामी जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्री नारायण राणे जी, श्री अनुराग ठाकुर जी, श्री निशीत प्रमाणिक जी, श्री भानु प्रताप सिंह वर्मा जी, पुदुचेरी सरकार के वरिष्ठ मंत्रिगण, सांसद गण, विधायक गण, देश के अन्य राज्यों के मंत्रीगण, और मेरे युवा साथियों ! वणक्कम! आप सभी को राष्ट्रीय युवा दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं !

भारत मां की महान संतान स्वामी विवेकानंद जी को उनकी जयंती पर मैं नमन करता हूं। आज़ादी के अमृत महोत्सव में उनकी जन्मजयंती और अधिक प्रेरणादायी हो गई है। ये वर्ष, दो और वजहों से भी और विशेष हो गया है। हम इसी वर्ष श्री ऑरबिंदो की 150वीं जन्मजयंति मना रहे हैं, और इस साल महाकवि सुब्रमण्य भारती जी की भी 100वीं पुण्य तिथि है। इन दोनों मनीषियों का, पुदुचेरी से खास रिश्ता रहा है। ये दोनों एक दूसरे की साहित्यिक और आध्यात्मिक यात्रा के साझीदार रहे हैं। So, the National Youth Festival being held in पुदुचेरी is dedicated to these great sons of Mother India. Friends, Today in पुदुचेरी, MSME टेक्नोलॉजी सेंटर is Inaugurated. The role of MSME sector is very very important in creating आत्मनिरभर Bharat. बहुत ज़रूरी है कि हमारे MSMEs उस टेक्नॉलॉजी का उपयोग करें जो आज दुनिया को बदल रही हैं। इसलिए देश में आज Technology Centre Systems Program का बहुत बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। पुदुचेरी में बना MSME टेक्नॉलॉजी सेंटर उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

साथियों,

आज पुदुचेरी के युवाओं को कामराज जी के नाम पर मनीमंडप्पम, एक प्रकार का सभागृह, multipurpose use वाला उसका एक और उपहार मिल रहा है। ये सभागृह, कामराज जी के योगदान की याद तो दिलाएगा ही, हमारे युवा टैलेंट को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का एक प्लेटफॉर्म देगा।

साथियों,

आज दुनिया भारत को एक आशा की दृष्टि से, एक विश्वास की दृष्टि से देखती है। क्योंकि, भारत का जन भी युवा है, और भारत का मन भी युवा है। भारत अपने सामर्थ्य से भी युवा है, भारत अपने सपनों से भी युवा है। भारत अपने चिंतन से भी युवा है, भारत अपनी चेतना से भी युवा है। भारत युवा है क्योंकि भारत की दृष्टि ने हमेशा आधुनिकता को स्वीकार किया है, भारत के दर्शन ने परिवर्तन को अंगीकार किया है। भारत तो वो है- जिसकी प्राचीनता में भी नवीनता है। हमारे हजारों साल पुराने वेदों ने कहा है-

"अपि यथा, युवानो मत्सथा, नो विश्वं जगत्, अभिपित्वे मनीषा,॥

यानी, ये युवा ही हैं जो विश्व में सुख से सुरक्षा तक का संचार करते हैं। युवा ही हमारे भारत के लिए, हमारे राष्ट्र के लिए सुख और सुरक्षा के रास्ते अवश्य बनाएँगे। इसीलिए, भारत में जन – जन से जग तक योग की यात्रा हो, Revolution हो या Evolution हो, राह, सेवा की हो या समर्पण की, बात परिवर्तन की हो या पराक्रम की, राह, सहयोग की हो या सुधार की, बात जड़ों से जुड़ने की हो या जग में विस्तार की, ऐसी कोई राह नहीं जिसमें हमारे देश के युवा ने बढ़-चढ़कर हिस्सा ना लिया हो। अगर कभी भारत की चेतना विभाजित होती है तो ऐसे समय शंकर जैसा कोई युवा, आदि शंकरचार्य बनकर देश को एकता के सूत्र में पिरो देता है। जब भारत को अन्याय और अत्याचार से लड़ने की जरूरत होती है तो गुरु गोबिन्द सिंह जी के बेटे युवाओं का बलिदान आज भी रास्ता दिखाते हैं। जब भारत को आज़ादी के लिए क्रांति की जरूरत होती है, तो सरदार भगत सिंह से लेकर चंद्रशेखर आज़ाद और नेताजी सुभाष तक कितने ही युवा देश के लिए अपना सब कुछ अर्पण कर देते हैं। जब भारत को आध्यात्म की, सृजन की शक्ति की जरूरत होती है तो श्री ऑरोबिंदो से लेकर सुब्रमण्य भारती से साक्षात्कार होता है। और, जब भारत को अपना खोया हुआ स्वाभिमान फिर से पाने की, अपने गौरव को दुनिया में फिर से प्रतिष्ठित करने की अधीरता होती है, तो स्वामी विवेकानन्द जैसा एक युवा भारत के ज्ञान से, सनातन आवाहन से दुनिया के मानस को जागृत कर देता है।

साथियों,

विश्व ने इस बात को माना है कि आज भारत के पास दो असीम शक्तियां हैं- एक डेमोग्राफी और दूसरी डेमोक्रेसी। जिस देश के पास जितनी युवा जनसंख्या है, उसके सामर्थ्य को उतना ही बड़ा माना जाता है, उसकी संभावनाओं को उतना ही व्यापक माना जाता है। लेकिन भारत के युवाओं के पास डेमोग्राफिक डिविडेंड के साथ साथ लोकतांत्रिक मूल्य भी हैं, उनका डेमोक्रेटिक डिविडेंड भी अतुलनीय है। भारत अपने युवाओं को डेमोग्राफिक डिविडेंड के साथ साथ डवलपमेंट ड्राइवर भी मानता है। आज भारत का युवा हमारे development के साथ साथ हमारी democratic values को भी लीड कर रहा है। आप देखिए, आज भारत के युवा में अगर टेक्नालजी का charm है, तो लोकतन्त्र की चेतना भी है। आज भारत के युवा में अगर श्रम का सामर्थ्य है, तो भविष्य की स्पष्टता भी है। इसीलिए, भारत आज जो कहता है, दुनिया उसे आने वाले कल की आवाज़ मानती है। आज भारत जो सपने देखता है, जो संकल्प लेता है, उसमें भारत के साथ साथ विश्व का भविष्य दिखाई देता है। और भारत के इस भविष्य का, दुनिया के भविष्य का निर्माण आज हो रहा है। ये ज़िम्मेदारी, ये सौभाग्य आप जैसे करोड़ों – करोड़ों देश के नौजवानों को मिला है। वर्ष 2022 का ये साल, आपके लिए, भारत की युवा पीढ़ी के लिए बहुत अहम है। आज हम 25वां नेशनल यूथ फेस्टिवल मना रहे हैं। ये नेताजी सुभाष बाबु का 125वी जन्मजयंती का वर्ष भी है। और 25 साल बाद देश आजादी के 100 वर्ष भी मनाएगा। यानि 25 का ये संयोग निश्चित रूप से भारत की भव्य-दिव्य तस्वीर बनाने का योग भी है। आजादी के समय जो युवा पीढ़ी थी, उसने देश के लिए अपना सब कुछ कुर्बान करने में एक पल नहीं गवाया था। But today's youth has to live for the country, And fulfill the dreams of our freedom fighters. महर्षि श्री ऑरोबिन्दो ने कहा था -A brave, frank, clean-hearted, courageous and aspiring youth is the only foundation, on which the future nation can be built. उनकी ये बात, आज 21वीं सदी के भारत के युवाओं के लिए जीवन मंत्र की तरह है। आज हम एक राष्ट्र के रूप में, दुनिया के सबसे बड़े युवा देश के रूप में हम एक पड़ाव पर हैं। ये भारत के लिए नए सपनों, नए संकल्पों का पड़ाव है। ऐसे में भारत के युवाओं का सामर्थ्य, भारत को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

साथियों,

श्री ऑरबिंदो युवाओं के लिए कहा करते थे- It is the young, who must be the builders of the new world. Revolution और Evolution के इर्दगिर्द ही उन्होंने अपने जिस दर्शन को रखा था, वो युवाओं की भी असली पहचान है। यही दो गुण एक वाइब्रेंट नेशन की भी बड़ी ताकत हैं। युवा में वो क्षमता होती है, वो सामर्थ्य होता है कि वो पुरानी रूढ़ियों का बोझ लेकर नहीं चलता, वो उन्हें झटकना जानता है। यही युवा, खुद को, समाज को, नई चुनौतियां, नई डिमांड के हिसाब से evolve कर सकता है, नए सृजन कर सकता है। और आज हम देश में यही होते देख रहे हैं। अब भारत का युवा evolution पर सबसे अधिक फोकस कर रहा है। आज Disruption हो रहा है लेकिन Disruption, Development के लिए हो रहा है। आज भारत का युवा Innovation कर रहा है, समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट हो रहा है। Friends, Today's youth has a "Can Do" spirit which is a source of inspiration for every generation. ये भारत के युवाओं की ही ताकत है कि आज भारत डिजिटल पेमेंट के मामले में दुनिया में इतना आगे निकल गया है। आज भारत का युवा, Global Prosperity के Code लिख रहा है। पूरी दुनिया के यूनिकॉर्न इकोसिस्टम में भारतीय युवाओं का जलवा है। भारत के पास आज 50 हज़ार से अधिक स्टार्ट अप्स का मजबूत इकोसिस्टम है। इसमें से 10 हज़ार से अधिक स्टार्ट अप्स तो कोरोना की चुनौतियों के बीच, बीते 6-7 महीनों में बने हैं। यही भारत के युवाओं की ताकत है, जिसके दम पर हमारे देश Start-Ups के Golden age में प्रवेश कर रहा है।

साथियों,

नए भारत का यही मंत्र है- Compete and Conquer. यानि जुट जाओ और जीतो। जुट जाओ और जंग जीतो। Paralympics में भारत ने जितने मेडल जीते उतने भारत ने अब तक के इतिहास में नहीं जीते थे। ओलंपिक में भी हमारा प्रदर्शन श्रेष्ठ रहा, क्योंकि हमारे युवाओं में जीत का विश्वास पैदा हुआ। हमारे कोविड वैक्सीनेशन प्रोग्राम की सफलता में तो युवाओं की भूमिका, एक अलग ही स्तर पर नजर आई है। हम देख रहे हैं कि किस तरह 15 से 18 वर्ष के युवा तेजी से खुद को वैक्सीन लगवा रहे हैं। इतने कम समय में 2 करोड़ से ज्यादा बच्चों का टीकाकरण हो चुका है। मैं आज के किशोरों में जब कर्तव्य निष्ठा के दर्शन करता हूं तो देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए मेरा विश्वास और दृढ़ जाता है। ये हमारे किशोर 15 से 18 साल के बाल साथियों ने जो sense of responsibility है, और ये पूरे कोरोना काल में भारत के युवाओं में दिखी है।

साथियों,

सरकार का प्रयास है कि युवाओं की इसी ताकत के लिए उन्हें स्पेस मिले, सरकार का दखल कम से कम हो। सरकार की कोशिश उन्हें सही माहौल देने का है, संसाधन देने की है, उनका सामर्थ्य बढ़े, इसकी व्यवस्था बनाने की है। डिजिटल इंडिया के माध्यम से सरकारी प्रक्रियाओं को सरल करना, हज़ारों compliances के बोझ से मुक्ति, इसी भावना को बल देती है। मुद्रा, स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया ऐसे अभियानों से युवाओं को बहुत मदद मिल रही है। स्किल इंडिया, अटल इनोवेशन मिशन और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, युवाओं के सामर्थ्य को बढ़ाने का ही प्रयास है।

साथियों,

हम जानते हैं कि बेटे-बेटी एक समान हैं। इसी सोच के साथ सरकार ने बेटियों की बेहतरी के लिए शादी की उम्र को 21 साल करने का निर्णय लिया है। बेटियां भी अपना करियर बना पाएं, उन्हें ज्यादा समय मिले, इस दिशा में ये एक बहुत महत्वपूर्ण कदम है।

साथियों,

आज़ादी के इस अमृतकाल में अपने राष्ट्रीय संकल्पों की सिद्धि हमारे आज के एक्शन से तय होगी। ये एक्शन हर स्तर पर, हर सेक्टर के लिए बहुत ज़रूरी हैं। Can we work with a mission to promote Vocal for Local? शॉपिंग करते समय आपकी चॉइस में किसी भारतीय के श्रम की, भारतीय मिट्टी की महक हो, इस बात को कभी मत भुलना हर बार इसी तराजु पर चीजों को तोलना और कुछ भी खरीद करने के निर्णय से पहले इस तराजु से तोलकर के देखें कि उसमे मेरे देश के मजदूर के पसीने की महक है कि नहीं है। उसमे श्री ऑरबिंदों श्री विवेकानंद ऐसे महापुरुषों ने जिस मिट्टी को मां के समान माना है। उस भारत मां की मिट्टी की महक है कि नहीं है। Vocal for Local, हमारी बहुत समस्याओं का समाधान आत्मनिर्भरता में है। हमारे देश में बनी हुई चीजों को खरीदने में है। रोजगार भी उसी से पैदा होने वाला है। अर्थव्यवस्था भी उसी से तेज गति से बढ़ने वाली है। देश के गरीब से गरीब को सम्मान भी उसी से प्राप्त होने वाला है। और इसलिए Vocal for Local हमारे देश का नौजवान उसे अपना जीवन मंत्र बना ले। तो आप कल्पना कर सकते हैं आजादी के 100 साल कैसे भव्य होंगे कैसे दिव्य होंगे। सामर्थ्य से भरे हुए होंगे। संक्लपों की सिद्धी के पल होंगे।

साथियों,

हर बार एक विषय में अवश्य कहता हूं। दोबारा कहना चाहुंगा, और आप लोगों के बीच कहने का मन इसलिए करता है। क्योंकि आप लोगों ने इसपे लीडरशीप ली है, और वो है स्वच्छता। स्वच्छता को भी लाइफ स्टाइल का हिस्सा बनाने में आप सभी नौजवानों का बहुत बड़ा योगदान अहम है। आज़ादी की लड़ाई में हमारे ऐसे अनेक सेनानी रहे हैं, जिनके योगदान को वो पहचान नहीं मिल पाई, जिसके वो हकदार थे। उनके त्याग, तपस्या, बलिदान कोई कमी नहीं थी, लेकिन उन्हे वो हक नहीं मिला। ऐसे व्यक्तियों के बारे में हमारे युवा जितना ज्यादा लिखेंगे, रिसर्च करेंगे, इतिहास के उन पन्नों को खोज – खोजकर के निकालेंगे। उतना ही देश की आने वाली पीढ़ियों में जागरूकता बढ़ेगी। हमारे स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास अधिक तन्दुरुस्त होगा, अधिक सशक्त होगा, अधिक प्रेरक होगा।

साथियों,

पुदुचेरी एक भारत-श्रेष्ठ भारत का खूबसूरत उदाहरण है। भिन्न भिन्न क्षेत्रों से अलग-अलग धाराएं आकर इस स्थान को एकीकृत पहचान देती हैं। यहां जो संवाद होगा, वो एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना को और सुदृढ़ करेगा। आपके विचारों से कुछ नया भाव निकले और जो कुछ नई चीज़ें आप यहाँ से सीखकर जाएं, वो बरसों-बरस तक राष्ट्रसेवा की प्रेरणा बनेंगे। I have full faith in the National Youth Festival and this will show the way to achieve our aspirations.

साथियों,

ये त्योहारों का भी समय है। अनगिनत त्योहार, हिन्दुस्तान के हर कोने में त्योहार। कहीं मकर सक्रांति, कहीं लोहड़ी, कहीं पोंगल, कहीं उत्तरायण, कहीं बीहू, ऐसे सभी त्योहारों की आप सबको अग्रिम शुभकामनाएं। कोरोना से पूरी सावधानी और सतर्कता के साथ हमें त्योहार मनाने हैं। आप खुश रहें, स्वस्थ रहें। बहुत-बहुत शुभकामनाएं। धन्यवाद !

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Text of PM’s remarks in the Lok Sabha
April 16, 2026

आदरणीय अध्यक्ष जी,

इस महत्वपूर्ण विधेयक पर आज सुबह से चर्चा प्रारंभ हुई है। काफी साथी यहां से भी जिन मुद्दों को स्पर्श किया गया है, उसको तथ्यों से और तर्क से सदन को जरूर जानकारी देंगे। और इसलिए मैं उन विषयों में जाना नहीं चाहता।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

राष्ट्र के जीवन में कुछ महत्वपूर्ण पल आते हैं और उस समय की समाज की मनोस्थिति और नेतृत्व की क्षमता, उस पाल को कैप्चर करके एक राष्ट्र की अमानत बना देती है, एक मजबूत धरोहर तैयार कर देती है। मैं समझता हूं कि भारत के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में यह वैसे ही पल हैं। आवश्यकता तो यह थी कि 25-30 साल पहले जब से यह विचार सामने आया, आवश्यकता महसूस हुई, हम इसको लागू कर देते और हम आज उसको काफी परिपक्वता तक पहुंचा देते हैं। और आवश्यकता के अनुसार उसमें समय-समय पर सुधार भी होते और यही तो लोकतंत्र की ब्‍यूटी होती है। हमारी, हम मदर ऑफ डेमोक्रेसी हैं। हमारी हजारों साल की लोकतंत्र की एक विकास यात्रा रही है, और उस विकास यात्रा में एक नया आयाम जोड़ने का एक शुभ अवसर सदन के हम सभी साथियों को मिला है। और मैंने प्रारंभ में कहा है कि हम सब भाग्यवान हैं कि हमें ऐसे महत्वपूर्ण और देश की आधी आबादी को इस राष्ट्र निर्माण की नीति निर्धारण प्रक्रिया में हिस्सेदार बनाने का सौभाग्य मिल रहा है। यह हम लोगों के लिए सौभाग्य है और मैं चाहता हूं कि मेरे सभी माननीय सांसद, मैं इधर-उधर की आज बात नहीं करना चाहता हूं, हम सभी सांसद इस महत्वपूर्ण अवसर को जाने ना दें। हम भारतीय सब मिलकर के देश को नई दिशा देने जा रहे हैं। हमारी शासन व्यवस्था को संवेदनशीलता से भरने का एक सार्थक प्रयास करने के लिए जा रहे हैं और मुझे विश्वास है कि इस मंथन से जो अमृत निकलेगा, वह देश की राजनीति की भी, उसके रूप स्वरूप को तो तय करने ही करने वाला है, लेकिन यह देश की दिशा और दशा भी तय करने वाला है, इतने महत्वपूर्ण मोड़ पर हम खड़े हैं।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

21वीं सदी में भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। विश्व में भी आज भारत की स्वीकृति हम सब महसूस कर रहे हैं और यह हम सबके लिए गौरव का पल है। एक समय हमारे पास आया है, और इस समय को हमने एक विकसित भारत के संकल्प के साथ जोड़ा है। और मैं पक्का मानता हूं कि विकसित भारत का मतलब केवल उत्तम प्रकार के रेल, रास्ते, इंफ्रास्ट्रक्चर या कुछ आर्थिक प्रगति के आंकड़े, सिर्फ इतने से ही विकसित भारत की सीमित कल्पना वाले हम लोग नहीं हैं। हम चाहते हैं कि विकसित भारत, जिसके नीति निर्धारण में सबका साथ सबका विकास का मंत्र समाहित हो। देश की 50% जनसंख्या नीति निर्धारण का हिस्सा बने, यह समय की मांग है। हम पहले ही देरी कर चुके हैं, कारण कोई भी होंगे, जिम्‍मेवार कोई भी होंगे, लेकिन इस सच्चाई को हमें स्वीकार करना होगा कि जब हम अकेले मिलते हैं, तब मानते हैं हां यार! लेकिन जब सामूहिक रूप से मिलते हैंं, मुझे याद है जब इसकी प्रक्रिया चली थी, सभी दलों से मिलना हुआ है, एक दल को छोड़कर के, जिन-जिन से मिलना हुआ है, हर एक ने सैद्धांतिक विरोध नहीं किया है। बाद में जाकर के जो कुछ भी हुआ होगा, राजनीतिक दिशा पकड़ी जा रही है। लेकिन जो राजनीतिक दिशा में ही सोचते हैं, मैं उनको भी एडवाइस करना चाहूंगा, एक मित्र के रूप में एडवाइस करता हूं और सबको काम आएगी। हमारे देश में जबसे वूमेन रिजर्वेशन को लेकर चर्चा हुई है और उसके बाद जब-जब चुनाव आया है, हर चुनाव में महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस-जिस ने विरोध किया है, जिस-जिस ने विरोध किया है, देश की महिलाओं ने उन्हें माफ नहीं किया है। उनका हाल बुरे से बुरा किया है। लेकिन यह भी देखिए कि 24 का चुनाव में ऐसा नहीं हुआ। क्यों नहीं हुआ? यह इसलिए नहीं हुआ कि 24 में सबने सहमति से इसको पारित किया, तो यह विषय ही नहीं रहा। किसी के पक्ष में पॉलिटिकल फायदा नहीं हुआ, किसी का नुकसान भी नहीं हुआ। सहज रूप से जो मुद्दे थे, उन मुद्दों के आधार पर चुनाव लड़ा, क्योंकि 24 में सब साथ में थे। कुछ लोग यहां हैं, कुछ लोग नहीं है, लेकिन सब साथ में थे। आज भी मैं कहता हूं, अगर हम सब साथ में जाते हैं, तो इतिहास गवाह है कि यह किसी एक के राजनीतिक पक्ष में नहीं जाएगा। यह देश के लोकतंत्र के पक्ष में जाएगा, देश के सामूहिक निर्णय शक्ति के पक्ष में जाएगा और हम सब उसके यश के हकदार होंगे। ना ट्रेजरी बैंक इसका हकदार रहेगा, ना मोदी उसका हकदार रहेगा, यहां बैठे हुए सब हकदार रहेंगे और इसलिए जिन लोगों को इसमें राजनीति की बू आ रही है, मैं चाहूंगा कि वह खुद के परिणामों को पिछले 30 साल में देख लें। फायदा उनका भी इसी में है, रास्ता दिखा रहा हूं कि इसी में फायदा है कि जो नुकसान हो रहा है, उससे बच जाओगे और इसलिए मैं समझता हूं कि इसमें राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मुझे याद है, तब तो मैं शासकीय व्यवस्था की राजनीति में नहीं था, मैं एक एक संगठन के कार्यकर्ता के नाते काम करता था। उस समय एक चर्चा सुनने को मिलती थी गलियारों में कि देखिए यह कैसे लोग हैं, पंचायतों में आरक्षण देना है, तो बहुत आराम से दे देते हैं। लेकिन पंचायतों में आरक्षण देना है, तो आराम से देते हैं क्योंकि उसमें उनको खुद का पद जाने का डर नहीं लगता है। उसको लगता है, हम सुरक्षित है यार, वहां दे दो। यह उस समय गलियारों में बहुत चर्चा थी कि बोले यह कभी नहीं करेंगे यहां बैठे हुए, क्यों? क्योंकि उनका कुछ जाएगा और इसलिए और बाकी पंचायत का हो जाता है, 50% तक पहुंच गए।

मैं राजनीतिक दृष्टि से और भी एक बात समझाना चाहता हूं साथियों,

आज से 25 साल, 30 साल पहले जिसने भी विरोध किया, तो विरोध राजनीतिक सतह से नीचे नहीं गया था। आज ऐसा समझने की गलती मत करना, पिछले 25-30 साल में ग्रास रूट लेवल पर पंचायती चुनाव व्यवस्थाओं में जीत कर के आई हुई बहनों में एक political consciousness है, वह ओपिनियन मेकर हैं ग्रास रूट लेवल पर, 30 साल पहले वह शांत रहती थी, बोलती नहीं थी, समझती थी, बोलती नहीं थी। आज वह वोकल है और इसलिए अब जो भी पक्ष-विपक्ष होगा, वो जो लाखों बहनें कभी ना कभी पंचायत में काम कर चुकी हैं, प्रतिनिधित्व कर चुकी है, जनता के सुख-दुख की समस्याओं को गहराई से देखा है, वह आंदोलित है। वह कहती हैं कि झाड़ू-कचरा वाले काम में तो हमें जोर देते हो, वह तो परिवार में भी पहले होता था, अब हमें निर्णय प्रक्रिया में जोड़ो और निर्णय प्रक्रियाएं विधानसभा में और पार्लियामेंट में होती हैं। और इसलिए मैं राजनीतिक जीवन में जो लोग प्रगति चाहते हैं, मैं किसी भी संसद की बात करता हूं, किसी भी एमलए की बात करता हूं, यह दल वो दल की बात मैं नहीं कर रहा हूं। जो भी राजनीतिक जीवन में सफलतापूर्वक आगे बढ़ना चाहते हैं, उनको यह मानकर चलना पड़ेगा कि पिछले 25-30 साल में लाखों बहनें ग्रास रूट लेवल पर लीडर बन चुकी हैं। अब उनके अंदर सिर्फ यहां 33% का नहीं, वहां भी वह आपके फैसलों को प्रभावित करने वाली हैं और इसलिए जो आज विरोध करेंगे उसको लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी, लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी। और इसलिए राजनीतिक समझदारी भी इसी में है कि हम ग्रास रूट लेवल पर महिलाओं की जो पॉलिटिकल लीडरशिप खड़ी हुई है, उसको आपने अब कंसीडर करना पड़ेगा। यहां मैंने सुना, हमारे मुलायम सिंह जी थे तब से एक विषय चला रहे हैं, उनके परिवार वाले भी चला रहे हैं। आप देश की बहनों पर भरोसा करो ना, उनकी समझदारी पर भरोसा करो, एक बार 33% बहनों को यहां आने दो, आकर के उनको निर्णय करने दो, किसको देना है, किसको नहीं देना है, इस वर्ग को देना है, उस वर्ग को देना है, करेंगे वह निर्णय, हम उनके सामर्थ्य पर आशंका क्यों करते हैं भाई? एक बार आने तो दो! उनको आने तो दो! जब आएंगे, तो 34 में और धर्मेंद्र जी, धर्मेंद्र जी मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने मेरी पहचान करा दी। यह बात सही है, मैं अति पिछड़े समाज से आता हूं। धर्मेंद्र जी, मैं आपका बहुत आभारी हूं और अखिलेश जी मेरे मित्र हैं, तो कभी-कभी मदद कर देते हैं। यह बात सही है कि मैं अति पिछडे समाज से आता हूं, लेकिन मेरा दायित्व समाज के सबको साथ लेकर के चलने का है और यही मेरे संविधान ने मुझे यही रास्ता दिखाया है। मेरे लिए, मेरे लिए संविधान ही सर्वोपरि है और इसलिए और यह संविधान की ताकत है कि मेरे जैसा अत्यंत छोटे समाज का अति पिछड़े समाज के व्यक्ति को इतना बड़ा दायित्व देश ने दिया है। और इसलिए मैं तो देशवासियों का ऋणी हूँ और मैं तो संविधान निर्माताओं का ऋणी हूँ कि जिसके कारण आज मैं यहां हूं।

लेकिन आदरणीय अध्यक्ष जी!

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आज जीवन के हर एक क्षेत्र में हम देखें कि नारी शक्ति देश के गौरव को बढ़ाने वाले, परचम लहराने में कहीं पीछे नहीं हैं जी। हम गर्व कर सकें, इस प्रकार से जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में आज हमारी माताएं-बहनें बहुत बड़ा योगदान, हमारी बेटियां तो कमाल कर रही हैं, जीवन के हर क्षेत्र में! इतना बड़ा सामर्थ्‍य, उसको हम हिस्सेदारी से रोकने के लिए क्यों इतनी ताकत खपा रहे हैं जी, उनके जुड़ने से सामर्थ्‍य बढ़ने वाला है और इसलिए मैं आज अपील करने आया हूं आपके पास कि इसको राजनीति के तराजू से मत तौलिये। यह राष्ट्रहित का निर्णय है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आज का हमारा यह, हमारे सामने यह अवसर एक साथ बैठकर के, एक दिशा में सोच करके विकसित भारत बनाने में हमारी नारी शक्ति की भागीदारी को एक खुले मन से निर्णय करने का अवसर है, स्वीकार करने का अवसर है और मैंने जैसा पहले भी कहा कि आज पूरा देश और विशेष करके नारी शक्ति, हमारे निर्णय तो देखेंगी, लेकिन निर्णय से ज्यादा हमारी नीयत को देखेगी। और इसलिए हमारी नीयत की खोट, देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

2023 में इस नए सदन में हमने सर्वसम्मति से एक प्रकार से इस अधिनियम को स्वीकार किया था। पूरे देश में खुशी का वातावरण बना, उस पर कोई राजनीतिक रंग नहीं लगे और इसलिए वह कभी राजनीतिक इशू भी नहीं बना, एक अच्छी स्थिति है। अब सवाल यह है कि हमें कितने समय तक इसको रोकना है, अब यहां जो लोग जनसंख्या वगैरा के विषय उठाते हैं, क्या आपको मालूम नहीं है, मैं चाहूंगा कि अमित भाई अपने भाषण में इन सारी चीजों को उल्‍लेख करेंगे, जब कि हमने जनगणना के संबंध में कब-कब क्या-क्या किया था, बाद में कोविड आया, उसके कारण क्या मुसीबत आई, कैसे रुकावटें आई। यह सारी बात हम सबके सामने हैं, इसमें कोई विषय नहीं है। लेकिन पिछले दिनों जब हम 23 में चर्चा कर रहे थे, तब भी व्यापक रूप से बात यह थी कि इसको जल्दी करो, हर कोई कह रहा था जल्दी करो। अब 24 में संभव नहीं था क्योंकि इतने कम समय में यह करना मुश्किल था। अब 29 में हमारे पास अवसर है, अगर हम उन 29 में भी नहीं करते, तो स्थिति क्या बनेगी, हम कल्पना कर सकते हैं, तो फिर हम देश की माताओं-बहनों को यह विश्वास नहीं बना पाएंगे कि हम सचमुच में यह प्रयास सच्चे अर्थ से कर सकते हैं। और इसलिए समय की मांग है कि अब हम ज्यादा विलंब ना करें, इस दरमियान राजनीतिक दल के लोगों से, संविधान के जानकार लोगों से, जो महिलाओं में एक्टिविस्ट के नाते काम करने वाले, ऐसे लोगों से भी कई चर्चाएं हुई, कुछ लोगों ने खुद होकर के भी सुझाव दिए। सारा मंथन करते-करते यहां भी सभी दलों से लगातार बातें करके होती रही हैं। स्ट्रक्चरल वे में भी हुई है, इनफॉर्मल वे में भी हुई है और उसमें से आखिर बनाए हुए यह कुछ रास्ता निकालना होगा, ताकि हम हमारी माताओं-बहनों की शक्ति को जोड़ सकते हैं।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं एक बात जरूर कहना चाहूंगा। यहां बैठ करके हमें किसी को संविधान ने देश को टुकड़ों में सोचने का अधिकार ही नहीं दिया है। जो शपथ लेकर के हम बैठे हैं ना, हम सबको एक राष्ट्र के रूप में विचार करना हमारा दायित्व बनता है। चाहे कश्मीर हो या कन्याकुमारी, हम टुकड़ों में ना सोच सकते हैं, ना टुकड़ों में हम निर्णय कर सकते हैं। और इसलिए निराधार रूप में, जिसमें कोई सच्चाई नहीं, रत्ती भर सच्चाई नहीं, सिर्फ राजनीतिक लाभ लेने के लिए जो बवंडर खड़ा किया जा रहा है, मैं आज बड़ी जिम्मेवारी के साथ इस सदन में इस पवित्र जगह से कहना चाहता हूं, क्या यह दक्षिण हो, उत्तर हो, पूरब हो, पश्चिम हो, छोटे राज्य हो, बड़े राज्य हो, मैं आज यह जिम्मेवारी से कहना चाहता हूं कि यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भी भेदभाव नहीं करेगी, यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ अन्याय नहीं करेगी, भूतकाल में जो सरकारें रहीं और जिनके कालखंड में जो परिसीमन हुआ और जो अनुपात उस समय से चला आ रहा है, तो उस अनुपात में भी कोई बदलाव नहीं होगा और वृद्धि भी उसी अनुपात पर होगी। अगर गारंटी शब्द चाहिए, तो मैं गारंटी शब्द उपयोग करता हूं। वादा की बात करते हो, तो मैं वादा शब्द उपयोग करता हूं। अगर तमिल में कोई अच्छा शब्द हो, तो वो भी मैं बोलने के लिए तैयार हूं, क्योंकि जब नियत साफ है, तो फिर शब्दों का खेल करने की हमें जरूरत नहीं है जी।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं आज सदन के सभी साथियों को यह भी कहना चाहता हूं कि साथियों, हम भ्रम में ना रहे, हम उस अहंकार में ना रहे हैं और मैं हम शब्द का उपयोग कर रहा हूं। मैं और तुम की बात नहीं कर रहा हूं मैं, हम इस भ्रम में ना रहें कि हम देश की नारी शक्ति को हम कुछ दे रहे हैं, जी नहीं। उसका हक है; और हमने, हमने कई दशकों से उसको रोका हुआ है, आज उसका प्रायश्चित करके हमें उस पाप में से मुक्ति पाने का यह अवसर है। हम सब जानते हैं, हर एक ने कैसे चालाकी की हर बार, चतुराई की, बिल्कुल हम तो इसके पक्ष में ही है, लेकिन; हम इसके साथ ही हैं, लेकिन; हर बार कोई ना कोई टेक्निकल पूंछ लगा दी इसको और इसको रोका गया है। हर बार ऐसे ही चीजें लाई गई हैं। हिम्मत नहीं हैं कि हम 33% महिलाओं के आरक्षण का विरोध कर पाए, वह तो जमाना चला गया, आपको करना नहीं है, लेकिन कहने की हिम्मत भी नहीं है। और इसलिए टेक्निकल बहानेबाजी, यह करो तो यह, वो करो तो वो, ढिकना करो तो, अब देश की नारी को यह नहीं समझा पाओगे, सदन में नंबर का खेल क्या होता है, वह तो समय तय करेगा, लेकिन यह पक्का है कि अब इन भांति-भांति के बहानेबाजी, भांति-भांति टेक्निकल मुद्दों के आधार पर चीजों को उलझा करके तीन दशक तक इसको अड़ंगे डालें हमने फंसा-फंसा कर रखा, आपने जो अचीव करना था, कर लिया, अब छोड़ दो ना भाई! तीन दशक कम पढ़ते हैं क्या रोकने में, तीन दशक तक आपने रोका, फिर भी कुछ कर नहीं पाए, तो अब तो करो।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

यहां कुछ लोगों को लगता है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

यहां कुछ लोगों को लगता है, इसमें कहीं ना कहीं मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है। अरे भाई, इनको बोलने दीजिए, वहां पर बेचारे के मुंह पर ताला लगा हुआ है, वहां बंगाल में कोई बोलने नहीं देता उसको।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आदरणीय अध्यक्ष जी,

देखिए इसका अगर विरोध करेंगे, तो स्वाभाविक है कि राजनीतिक लाभ मुझे होगा। लेकिन साथ चलेंगे, तो किसी को भी नहीं होगा, यह लिखकर रखो। किसी को नहीं होगा, क्योंकि फिर अलग पहलू हो जाता है, फिर किसी को फायदा नहीं होता। और इसलिए हमें क्रेडिट नहीं चाहिए, जैसे ही यह पारित हो जाए, मैं कल advertisement दे करके सबका धन्यवाद करने के लिए तैयार हूं, सबकी फोटो छपवाने के लिए तैयार हूं, क्रेडिट आप ले लो चलो! क्रेडिट की चिंता है क्या जी? ले लो ना क्रेडिट, आपको जिसकी फोटो छपवानी है, सरकारी खर्चे से हम करवा देंगे। सामने से, सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूँ।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

हमारी संसदीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी यह सिर्फ आंकड़ों का खेल या एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में सुधार, इतना सीमित नहीं है। लोकतंत्र की जननी के रूप में, मदर ऑफ डेमोक्रेसी के रूप में यह निर्णय भारत का कमिटमेंट है, यह सांस्कृतिक कमिटमेंट है और इसी कमिटमेंट के कारण पंचायतों में यह व्यवस्था बनी और अब तो 20 से अधिक राज्‍यों में 50% हुआ है और हमने अनुभव किया है, मुझे लंबे अरसे तक, मुझे लंबे अरसे तक मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने का जनता ने अवसर दिया और उसी कालखंड में ग्रासरूट लेवल पर वूमेन लीडरशिप को मैंने देखा है। मेरा अनुभव है कि संवेदनशीलता के साथ समस्याओं के समाधान में उनका कमिटमेंट बहुत ही परिणामकारी रहते थे, विकास की यात्रा को गति देने में रहते थे और उस अनुभव के आधार पर मैं कहता हूं कि इस सदन में उनकी आवाज नई शक्ति बनेगी, नई सोच जुड़ेगी, देश की दिशा में एक संवेदनशीलता जुड़ेगी, तथ्य और तर्क के आधारों पर अनुभव जब जुड़ता है, तब मैं समझता हूं उसका सामर्थ्य अनेक गुना बढ़ जाता है और सदन कितना समृद्ध होता है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

हमारे देश में अनुभवी नारी शक्ति की कोई कमी नहीं है, सामर्थ्यवान में कोई कमी नहीं है, हम भरोसा करें, वह कंट्रीब्यूट करेंगी, बहुत अच्छा कंट्रीब्यूट करेंगी और आज भी जितनी हमारी बहनें यहां हैं, जब भी उनको अवसर मिला है, उन्होंने बहुत अच्छे ढंग से अपनी बात बताई है, सदन को समृद्ध किया है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आज देश में वर्तमान में, देश में 650 से ज्यादा पंचायत हैं, डिस्ट्रिक्ट पंचायत, करीब पौने तीन सौ महिलाएं उसका नेतृत्व कर रही हैं और केंद्र के कैबिनेट मिनिस्टर से ज्यादा उनके पास जिम्मेदारी और धन और व्यवस्था होती है, काम करती हैं जी। करीब 6700 ब्लॉक पंचायतों में 2700 से अधिक ब्लॉक पंचायत ऐसी हैं, जिसका नेतृत्व महिलाओं के हाथ में है। आज देश में 900 से अधिक शहरों में अर्बन लोकल बॉडीज की हेड के रूप में मेयर्स हों या स्टैंडिंग कमेटी का काम देखने वाली बहनें हैं, उनकी ताकत है। और मैं मानता हूं कि आज देश जो प्रगति कर रहा है, उस प्रगति में इनका भी महत्वपूर्ण योगदान है, उस ऋण को हमें स्वीकार करने का यह अवसर है। और जब यह अनुभव सदन के साथ जड़ेगा, तब वह अनेक गुना ताकत बढ़ा देगा।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

एक लंबी प्रतीक्षा यानी एक प्रकार से हम सबके लिए यह सवालिया निशान पैदा हो, ऐसी परिस्थिति हम ही लोगों ने पैदा की है। यह अवसर है कि हम पुरानी जो कुछ भी मर्यादा रही होंगी, मुश्किलें रही होंगी, उससे बाहर निकले, हिम्मत के साथ हम आगे बढ़े और नारी शक्ति का राष्ट्र के विकास में उनकी सहभागिता को हम सुनिश्चित करें और मैं पक्का मानता हूं कि अगर आज हम मिलकर के निर्णय करते हैं और मैं तो आग्रह करूंगा कि हमें सर्व सहमति से इसको को आगे बढ़ना चाहिए और जब सर्वसम्मति से बढ़ता है, तो ट्रेजरी बैंक पर एक दबाव रहता है जी, उनको भी लगता है कि नहीं भाई सबको सबका इसमें हक है, हर एक की बात मान के चलो, कोई नुकसान नहीं है। सामूहिक शक्ति से तो अनेक परिणाम हमें अच्छे मिलते हैं।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं ज्यादा समय न लेते हुए इतना ही कहूंगा कि इसको राजनीति के तराजू से ना तोलें। हम जब भी कुछ निर्णय करने जा रहे हैं, तो देश के, इतने बड़े देश का आधा जिम्मा जो उठा रहे हैं, उनका भी कोई हक बनता है यहां आने का, हमें रोकना नहीं चाहिए। और दूसरा संख्या के संबंध में भी, संख्या के संबंध में भी, संख्या के संबंध में भी एक मत पहले से बनता आया था, चर्चा थी कि साहब यह जो है, इनका कम मत करो, अधिक कर दो, तो जल्दी हो जाएगा। वह अधिक वाला विषय अब आया है कि चलो भाई पहले जो संख्या थी 33% और बढ़ा दो, ताकि किसी को ऐसा ना लगे कि मेरा हक चला गया। एक नई शक्ति जुड़ेगी, अतिरिक्त शक्ति जुड़ेगी और अब सदन के रचना भी तो अब, जो पहले से हमने सोच कर रखा है, जगह तो बना ली है।

और आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं लाइटर वे में जरूर कहना चाहूंगा, हर एक के अपने राजनीतिक कारण होते हैं और पराजय का डर जरा हैरान करने वाला होता है। लेकिन अपने यहां जब कोई भी शुभ काम होता है, उसको नजर ना लग जाए, इसलिए काला टीका लगाने की परंपरा है। मैं आपका धन्यवाद करता हूं काला टीका लगाने के लिए!

बहुत-बहुत धन्यवाद!