“तिरंगा हर चुनौती से निपटने की ताकत देता है”
“भारत अपनी उपलब्धियों और सफलताओं के आधार पर एक नया प्रभाव पैदा कर रहा है और दुनिया इसे अहमियत दे रही है”
"ग्रीस यूरोप के लिए भारत का प्रवेश द्वार बन जाएगा और यह यूरोपीय संघ के साथ भारत के ठोस संबंधों के लिए एक मजबूत माध्यम होगा"
“21वीं सदी प्रौद्योगिकी पर आधारित है और हमें 2047 तक विकसित भारत बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के मार्ग पर चलना होगा”
“चंद्रयान की सफलता से पैदा हुए उत्साह को शक्ति में बदले जाने की आवश्यकता है”
“'मैं जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान दिल्ली के लोगों को हुई असुविधा के लिए अग्रिम माफी मांगता हूं, मुझे विश्वास है कि दिल्ली के लोग जी-20 शिखर सम्मेलन को सफल बनाकर हमारे वैज्ञानिकों की उपलब्धियों को नई ताकत देंगे”

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

आज प्रात: मैं बेंगलुरू में था, सुबह बहुत जल्दी पहुंचा था और तय किया था कि भारत में जाकर देश को इतनी बड़ी सिद्धी दिलाने वाले वैज्ञानिकों के दर्शन करूँ और इसलिए मैं सुबह-सुबह वहां चला गया। लेकिन वहां जनता जनार्दन ने सुबह से ही सूर्योदय से भी पहले हाथ में तिरंगा लेकर चंद्रयान की सफलता का जिस प्रकार का उत्सव मनाया, वो बहुत ही प्रेरित करने वाला था और अभी कड़ी धूप में सूरज बराबर तप रहा है और इस महीने की धूप तो चमड़ी को भी चीर देती है। ऐसी कड़ी धूप में आप सबका यहां आना और चंद्रयान की सफलता को सेलिब्रेट करना और मुझे भी सेलिब्रेशन में हिस्सेदार बनने का सौभाग्य मिले, ये भी मेरा सौभाग्य है। और मैं इसके लिए आप सबका अभिनंदन करता हूं।

आज जब मैं इसरो पर सुबह पहुंचा था तो चंद्रयान द्वारा जो तस्वीरें ली गई थीं, उन तस्वीरों को पहली बार रिलीज करने का भी मुझे सौभाग्य मिला। शायद अब तो आपने भी टी.वी पर वो तस्वीरें देखी होंगी। वो खूबसूरत तस्वीरें अपने आप में एक बहुत बड़ी वैज्ञानिक सफलता की एक जीती जागती तस्वीर हमारे सामने प्रस्तुत हुई। आमतौर पर एक परंपरा है दुनिया में कि इस प्रकार के सफल अभियान के साथ कुछ पॉइंट का कोई इनको इनाम दिया जाए तो बहुत सोचने के बाद मुझे लगा और जहां पर चंद्रयान-3 ने लैंड किया हुआ है उस पॉइंट को एक नाम दिया गया और नाम दिया है ‘शिवशक्ति’ और जब शिव की बात होती है तो शुभम होता है और शक्ति की बात होती है तो मेरे देश की नारी शक्ति की बात होती है। जब शिव की बात होती है तो हिमालय याद आता है और शक्ति की बात होती है तो कन्याकुमारी याद आता है, हिमालय से कन्याकुमारी तक की इस भावना को उस पॉइंट में प्रतिबिंबित करने के लिए इसका नाम ‘शिवशक्ति’ तय किया है। इसके साथ ही 2019 में चंद्रयान-2 उस समय ये नाम रखने की चर्चा मेरे सामने आई थी, लेकिन मन तैयार नहीं था, भीतर ही भीतर मन ने संकल्प कर लिया था कि पॉइंट 2 को भी नाम तब मिलेगा, जब हम सच्चे अर्थ में हमारी यात्रा में सफल होंगे। और चंद्रयान-3 में सफल हो गए तो आज चंद्रयान-2 का जो पॉइंट था, उसका भी नामकरण किया और उस पॉइंट का नाम रखा है ‘तिरंगा’। हर संकटों से जूझने का सामर्थ्य तिरंगा देता है, हर सपने का साकार करने की प्रेरणा तिरंगा देता है और इसलिए चंद्रयान 2 में विफलता मिली चंद्रयान 3 में सफलता मिली तो प्रेरणा बन गई तिरंगा। और इसलिए चंद्रयान-2 के पॉइंट को अब तिरंगा के रूप में जाना जाएगा। और भी एक महत्वपूर्ण बात आज सुबह मैंने कही है, 23 अगस्त भारत की वैज्ञानिक विकास यात्रा में एक मील का पत्थर है और इसलिए हर वर्ष भारत 23 अगस्त को National Space Day के रूप में मनाएगा।

साथियों,

मैं पिछले दिनों BRICS Summit के लिए साउथ अफ्रीका में था, इस बार साउथ अफ्रीका के BRICS Summit के साथ-साथ पूरे अफ्रीका को भी वहां निमंत्रित किया गया था। और BRICS Summit में मैंने देखा शायद ही दुनिया का कोई व्यक्ति हो, जिसने चंद्रयान की बात न की हो, बधाई न दी हो और जो बधाइयां मुझे वहां मिली हैं, वो आते ही मैंने सब वैज्ञानिकों के सामने उनको सुपुर्द कर दी हैं और आप सबको भी सुपुर्द कर रहा हूं कि पूरे विश्व ने बधाइयां भेजी हैं।

साथियों,

हर कोई ये जानने का प्रयास करता था चंद्रयान की इस यात्रा के संबंध में, ये कालजयी उपलब्धि के संबंध में और नया भारत, नए सपने, नए संकल्प और नई सिद्धी एक के बाद एक दुनिया के अंदर एक नया प्रभाव, अपने भारत के तिरंगे का सामर्थ्य अपनी सफलताओं के आधार पर, achievements के आधार पर आज दुनिया अनुभव भी कर रही है, स्वीकार भी कर रही है और सम्मान भी दे रही है।

साथियों,

BRICS Summit के बाद मेरा ग्रीस जाना हुआ, 40 साल बीत गए भारत के किसी प्रधानमंत्री ने ग्रीस की यात्रा नहीं की थी। मेरा सौभाग्य है कि बहुत सारे काम जो छूट जाते हैं, वो मुझे ही करने होते हैं। ग्रीस में भी जिस प्रकार से भारत का मान-सम्मान, भारत का सामर्थ्य और ग्रीस को लगता है कि भारत और ग्रीस की दोस्ती, ग्रीस एक प्रकार से यूरोप का प्रवेश द्वार बनेगा और भारत और ग्रीस की दोस्ती, भारत और यूरोपीयन यूनियन के रिश्तों को मजबूती देने का एक बहुत बड़ा माध्यम बनेगा।

साथियों,

आने वाले दिनों में कुछ दायित्व हमारे भी हैं। वैज्ञानिकों ने हमारा काम किया है। सैटेलाइट हो, चंद्रयान की यात्रा हो, सामान्य मानवी के जीवन में इसका बहुत बड़ा प्रभाव होता है और इसलिए इस बार मेरे देश की युवा शक्ति की विज्ञान के प्रति रूचि बढ़े, टेक्नोलॉजी के प्रति रूचि बढ़े, हमें इस बात को आगे ले जाना है हम सिर्फ उत्सव, उत्साह, उमंग, नई ऊर्जा सिर्फ इतने से अटकने वाले लोग नहीं हैं, हम एक सफलता प्राप्त करते हैं तो वहीं पर मजबूत कदम रखकर नई उछाल के लिए तैयार हो जाते हैं। और इसलिए, गुड गवर्नेंस के लिए, लास्ट माइल डिलीवरी के लिए, सामान्य मानवी की जिंदगी में सुधार के लिए ये स्पेस साइंस कैसे काम आ सकता है, ये सैटेलाइट कैसे काम आ सकते हैं, ये हमारी यात्रा कैसे उपयोगी हो सकती है, उसको हमें आगे बढ़ाना है। और इसलिए मैं सरकार के सभी विभागों को सूचित कर रहा हूं कि वे अपने-अपने विभाग में जो जन-सामान्य से जुड़े काम हैं, उन कामों में स्पेस साइंस का, स्पेस टेक्नोलॉजी का सैटेलाइट के सामर्थ्य का डिलीवरी में कैसे उपयोग करें, quick response पर कैसे उपयोग करें, ट्रांसपेरेंसी में कैसे उपयोग करें, perfection में कैसे उपयोग करें, उन सारे बातों की ओर वो अपनी समस्याओं को खोज के निकाले। और मैं देश के नौजवानों के लिए आने वाले दिनों में hackathon organize करना चाहता हूं। पिछले दिनों कई hackathon में देश के लाखों विद्यार्थी 30-30, 40-40 घंटे नॉन-स्टॉप काम करके बढ़िया-बढ़िया आईडिया दिए हैं और उसमें से एक वातावरण पैदा हुआ है। मैं आने वाले दिनों में ऐसे hackathon की बड़ी श्रृंखला चलाना चाहता हूं ताकि देश का जो young mind है, young talent है और जन सामान्य की मुसीबतें है इसके solution के लिए ये space science, satellite, technology उसका उपयोग करें, उस दिशा में हम काम करेंगे।

इसके साथ-साथ हमें नई पीढ़ी को भी विज्ञान की तरफ आकर्षित करना है। 21वीं सदी टेक्नोलॉजी ड्राइवेन है और दुनिया में वहीं देश आगे बढ़ने वाला है, जिसकी साइंस और टेक्नोलॉजी में महारथ होगी। और इसलिए समय की मांग है कि 2047 में हमारे देश को विकसित भारत बनाने के सपने को पार करने के लिए हमें साइंस और टेक्नोलॉजी की राह पर और अधिक मजबूती से आगे बढ़ना है। हमारी नई पीढ़ी को बचपन से ही साइंटिफिक टैम्पर के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार करना है। और इसलिए ये जो बड़ी सफलता मिली है, ये जो उमंग है, उत्साह है उसको अब शक्ति में चैनलाइज करना है और शक्ति में चैनलाइज करने के लिए MyGov पर 1 सितंबर से एक क्विज कंपटीशन आरंभ होगी, ताकि हमारे नौजवान छोटे-छोटे सवाल-जवाब देखेंगे तो उनकी धीरे-धीरे उसमें रूचि बनेगी। और जो नई education policy है, उसने साइंस और टेक्नोलॉजी के लिए बहुत भरपूर व्यवस्था करके रखी हुई है। हमारी नई शिक्षा नीति इसको बहुत अधिक बल देने वाली शिक्षा नीति है और उसमें जाने के लिए एक रास्ता बनेगा, हमारा क्विज कंपटीशन। मैं आज यहां से देश के नौजवानों को, मेरे देश के विद्यार्थियों को और हर स्कूल को मैं कहूंगा कि स्कूल का एक कार्यक्रम बने कि ये चंद्रयान से जुड़ा हुआ जो क्विज कंपटीशन है, उस क्विज कंपटीशन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। देश के करोड़ों-करोड़ों युवा इसका हिस्सा बने और हम इसको आगे ले जाए, मैं समझता हूं यह बहुत बड़ा परिणाम देगा।

आज मेरे सामने आप सब आए हैं तो एक और बात की ओर मैं आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। विश्व की भारत के प्रति एक बहुत जिज्ञासा बढ़ी है, आकर्षण बढ़ा है, विश्वास बढ़ा है, लेकिन इन सबके बावजूद भी कुछ मौके होते हैं, जब उसे इन चीजों की अनुभूति होनी चाहिए। हम सबके सामने तत्काल एक अवसर आने वाला है और खासकर के दिल्लीवासियों के लिए अवसर आने वाला है और वो है जी-20 समिट। एक प्रकार से विश्व का बहुत बड़ा निर्णायक नेतृत्व, ये हमारी दिल्ली की धरती पर होगा, हिन्दुस्तान में होगा। पूरा भारत यजमान है, लेकिन मेहमान तो दिल्ली आने वाले हैं।

जी-20 की मेजबानी, पूरा देश मेजबान है, लेकिन ज्यादा से ज्यादा जिम्मेदारी मेरे दिल्ली के भाइयों-बहनों की है, मेरे दिल्ली के नागरिकों की है। और इसलिए देश की साख पर रत्ती भर भी आंच न आए, ये हमारी दिल्ली को करके दिखाना है। देश की आन-बान-शान का झंडा ऊंचा करने का सौभाग्य मेरे दिल्ली के भाइयों-बहनों के पास है। और इतनी बड़ी मात्रा में विश्व से मेहमान आते हैं तो असुविधा तो होती ही होती है अपने घर में अगर 5-7 मेहमान आ जाए तो घर के लोग मुख्य सोफा पर नहीं बैठते, बगल वाली छोटी सी चेयर पर बैठ जाते हैं, क्योंकि मेहमान को जगह देते हैं। हमारे यहां भी अतिथि देवो भव के हमारे संस्कार हैं, हमारी तरफ से जितना ज्यादा मान, सम्मान, स्वागत हम दुनिया को देंगे वो सम्मान अपना बढ़ाने वाले हैं, हमारा गौरव बढ़ाने वाले हैं\, हमारी साख बढ़ाने वाले हैं और इसलिए सितंबर में 5 तारीख से लेकर के 15 तारीख तक बहुत सारी गतिविधियां यहां रहेंगी। मैं दिल्लीवासियों से आने वाले दिनों में जो असुविधा होने वाली है, उसकी क्षमायाचना आज ही कर लेता हूं। और मैं उनसे आग्रह करता हूं ये मेहमान हम सबके हैं, हमें थोड़ी तकलीफ होगी, थोड़ी असुविधा होगी, ट्रैफिक की सारी व्यवस्थाएं बदल जाएगी, बहुत जगह पर जाने से हमें रोका जाएगा, लेकिन कुछ चीजें आवश्यक होती हैं और हम तो जानते हैं कि परिवार में अगर शादी भी होती है ना तो घर के हर लोग कहते हैं, अगर नाखून काटते समय थोड़ा सा अगर खून निकल गया हो तो भी लोग अरे भई संभालो घर में अवसर है कुछ चोट नहीं लगनी चाहिए, कुछ बुरा नहीं होना चाहिए। तो ये बड़ा अवसर है, एक परिवार के नाते ये सारे मेहमान हमारे है, हमें हम सबके प्रयासों से ये हमारा जी-20 समिट शानदार हो, रंग बिरंगा हो, हमारी पूरी दिल्ली रंग-राग से भरी हुई हो, ये काम दिल्ली के मेरे नागरिक भाई-बहन करके दिखाएंगे ये मेरा पूरा विश्वास है।

मेरे प्यारे भाइयों-बहनों, मेरे परिवारजनों

कुछ ही दिन के बाद रक्षा-बंधन का पर्व आ रहा है। बहन भाई को राखी बांधती है। और हम तो कहते आए हैं, चंदा मामा। बचपन से ही पढ़ाया जाता है चंदा मामा, हमें बचपन से सिखाया जाता है धरती मां, धरती मां है, चंदा मामा है मतलब कि हमारी धरती मां चंदा मामा की बहन है और इस राखी का त्योहार ये धरती मां लूनर को राखी के रूप में भेजकर के चंदा मामा के साथ राखी का त्योहार मनाने जा रही है। और इसलिए हम भी ऐसा राखी का शानदार त्योहार मनाए, ऐसा भाईचारा का, ऐसा बंधुत्व का, ऐसा प्यार का वातावरण बनाए कि जी-20 समिट में भी चारों तरफ ये बंधुत्व, ये भाईचारा, ये प्यार, ये हमारी संस्कृति, हमारी परंपरा का दुनिया को परिचय कराएं। मुझे विश्वास है कि आने वाले त्योहार शानदार होंगे और सिंतबर महीना हमारे लिए अनेक रूप से विश्व में फिर से एक बार इस बार वैज्ञानिकों ने चंद्रयान की सफलता से जो झंडा गाड़ा है हम दिल्लीवासी जी-20 की मेहमान नवाजी अद्भुत करके उस झंडे को नई ताकत दे देंगे, ऐसा मेरा पूरा विश्वास है। मैं आप सबको इतनी धूप में यहां आकर के, हमारे वैज्ञानिकों के महोत्सव को सामूहिक रूप से मनाने के लिए तिरंगे को लहराने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं, बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। मेरी साथ बोलिए –

भारत माता की जय। भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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Prime Minister shares Sanskrit Subhashitam emphasising the importance of remaining active for progression
February 13, 2026

The Prime Minister, Shri Narendra Modi, shared a Sanskrit Subhashitam emphasising the importance of remaining active for progression, like the ever-dynamic sun.

"चरन् वै मधु विन्दति चरन् स्वादुमुम्बरम्

सूर्यस्य पश्य श्रेमाणं यो न तन्द्रयते चरंश्चरैवेति॥"

The Subhashitam conveys, "It is the one who keeps progressing who gains the best rewards in the world, just like the ever-dynamic sun earns glory. Hence, one should always be active."

Shri Modi stated that, the PM Surya Ghar-Free Electricity Scheme, which began today, is also illuminated by Lord Sun who infuses energy and enthusiasm into the lives of all of us.

The Prime Minister posted on X:

"भगवान सूर्य हम सबके जीवन में ऊर्जा और उत्साह का संचार करते हैं। आज के दिन शुरू हुई पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना भी उन्हीं से रोशन है। यह देशवासियों को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने के लिए निरंतर प्रेरित कर रही है।

चरन् वै मधु विन्दति चरन् स्वादुमुम्बरम्

सूर्यस्य पश्य श्रेमाणं यो न तन्द्रयते चरंश्चरैवेति॥"