उपस्थित सभी महानुभाव,

हमारे देश में एक अनुभव ये आता है कि बहुत सी चीजें Perception के आसपास मंडराती रहती है। और जब बारीकी से उसकी और देखें तो चित्र कुछ और ही नजर आता है। जैसे एक सामान्य व्यक्ति को पूछो तो उसको लगेगा कि “भई, ये जो बड़े-बड़े उद्योग हैं, बड़े-बड़े उद्योग घराने हैं, उससे रोजगार ज्यादा मिलता है।“ लेकिन अगर बारीकी से देखें तो चित्र कुछ और होता है, इसमें इतनी ज्यादा पूंजी लगी है। इतने सारे ताम-झांम, हवाबाजी, ये सब हम देखते आए हैं।

लेकिन अगर बारीकी से देखें तो ultimately हम विकास में हैं। रोजगार हमारी प्राथमिकता है और भारत जैसा देश जिसके पास Demographic dividend हो, जहां पर 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 से कम आयु की हो, उस देश ने अपने विकास की जो भी नीतियां बनानी हो, उसके केंद्र में ये युवा शक्ति होना चाहिए। अगर वो बराबर match कर लिया, तो हम नई ऊंचाईयों को पार कर सकते हैं। ये जितने बड़-बड़े उद्योगों की हम चर्चा सुनते आए हैं, उसमें सिर्फ एक करोड़ 25 लाख लोगों को रोजगार मिलता है। सवा सौ करोड़ देश में सवा करोड़ लोगों को रोजगार, ये जो बहुत बड़े-बड़े लोग जिसके लिए दुनिया में चर्चा रहती है, आधा अखबार जिनसे भरा पडा रहता है, वो देते हैं।

लेकिन इस देश में छोटा-छोटा काम करने वाला व्यक्ति करीब 5 करोड़ 70 लाख लोग, 12 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं। उन सवा करोड़ को रोजगार देने के लिए बहुत सारी व्यवस्थाएं सक्रिय है। लेकिन 12 करोड़ लोगों को रोजगार देने वाले लोगों के लिेए थोड़ी सी हम मदद करें, तो कितना बड़ा फर्क आ सकता है इसका हम अंदाज कर सकते हैं। और इस 5 करोड़ 75 लाख इस क्षेत्र में काम करने वाले लोग हैं, जो स्वरोजगार एक प्रकार से हैं - दर्जी होंगे, कुम्हार होंगे, टायर का पंक्चर करने वाले लोग हैं, साइकिल की repairing करने वाले लोग हैं, अपनी एक ऑटो रिक्शा लेकर के काम करने वाले लोग हैं, सब्जी बेचने वाले, गरीब-गरीब लोग हैं। उनका पूरा जो कारोबार है, उसमें ज्यादा से ज्यादा हिसाब लगाएं जाएं, तो 11 लाख करोड़ रुपयों से ज्यादा उसमें पूंजी नहीं लगी है। यानी सिर्फ 11 लाख करोड़ रुपयों की पूंजी लगी है, 5 करोड़ 75 लाख उसका नेतृत्व कर रहे हैं, और 12 करोड़ लोगों का पेट भरते हैं।

ये बातें जब सामने आईं तो लगा कि देश में स्वरोजगारी के अवसर बढ़ाने चाहिए। देश की Economy को ताकत देने वाला जो नीचे पायरी पर जो लोग हैं, उनकी शक्ति को समझना चाहिए। और उनके लिए अवसर उपलब्ध कराने चाहिए और इस मूल चिंतन में से ये मुद्रा की कल्पना आई है। मेरा अपना एक अनुभव इसमें काम कर रहा था, क्योंकि सिर्फ आर्थिक जगत के लोगों के आंकड़ों के आधार पर निर्णय करना, इतना सरल नहीं होता है। लेकिन कभी-कभी अनुभव बहुत काम आता है।

मैं गुजरात में मुख्यमंत्री रहा तो मैंने पतंग उद्योग की तरफ थोड़ा ध्यान दिया। अब गुजरात में पतंग एक बड़ा त्‍योहार के रूप में मनाया जाता है, और ज्‍यादातर, अब वो पूरा Environment Friendly Industry है, Cottage Industry है। और लाखों की तादाद में गरीब मुसलमान उस काम में लगा हुआ है 90 प्रतिशत से ज्‍यादा पतंग बनाने व कबाड़ का काम गुजरात में मुसलमान कर रहा है, लेकिन वो वही पुरानी चीजें करता था। वो पतंग अगर उसको तय तीन कलर का बनाना है तो तीन कलर के कागज लाता था पेस्टिंग करता था और फिर पतंग बनाता था। अब दुनिया बदल चुकी है तीन कलर का कागज प्रिंट हो सकता है, टाइम बच सकता है। तो मैंने चेन्‍नई की एक Institute को काम दिया कि जरा सर्वे किजिए कि इनकी मुसीबत क्‍या है, कठिनाईयां क्‍या है, अनुभव ये आया कि छोटे-छोटे लोगों को थोड़ी मदद दी जाए थोड़ा Skill Development हो जाए, थोड़ी पैकेजिंग सिखा दिया जाए, आप उसमें कितना बड़ा बदलाव ला सकते है। मुझे आज कहने से आनंद होता है कि जो करीब 35 करोड़ का पतंग का बिजनेस था थोड़ी मदद की वो पतंग का उद्योग 500 करोड़ cross कर गया था।

फिर मेरी उसमें जरा रूचि बढ़ने लगी तो मैं कई चीजे नई-नई करने लगा। बांस, बांस वो लाते थे असम से। कारण क्‍या तो पतंग में जिस बांस के पट्टे की जरूरत होती है वो साइज का बांस गुजरात में होता नहीं था तो मैंने ये जेनेटिक इंजीनियरिंग वालों को पकड़ा। मैंने कहा बांस हमारे यहां ऐसा क्‍यों न हो दो गांठ के बीच अंतर ज्‍यादा हो ताकि वो हमारा ही लोकल बांस का product उसको काम आ जाए। बांस वो बाहर से लाता है तो उसको फाइनेंस की व्‍यवस्‍था हो फिर मैंने एडवरटाइजमेंट कम्‍पनी को बुलाया। मैंने कहा जरा पतंग वालों के साथ बैठो पतंग के ऊपर कोई एडवरटाइजमेंट का काम हो सकता है क्‍या उनकी कमाई बढ़ सकती है।

छोटी-छोटी चीजों को मैंने इतना ध्‍यान दिया था और मुझे उतना आनंद आया था उस काम में - I’m Talking about 2003-04 - कहने का मेरा तात्‍पर्य यह था कि जो बिल्‍कुल उपेक्षित सा काम था उसमें थोड़ा ध्‍यान दिया गया, फाइनेंस की व्‍यवस्‍था की गई, उसने तेज गति से आगे बढ़ाया। ये ताकत सब दूर है। आप देखिए हर गांव में दो-चार मुसलमान बच्‍चे ऐसे होंगे, इतनें Innovative होते है technology में ईश्‍वरदत्‍त उनको कृपा है। वो तुरंत चीजों को पकड़ लेते है। आप एक ताला उसको रिपेयर करने को दीजिए वो दूसरे दिन वो ताला वैसा बना के दे देगा। जिनके हाथों में ये परम्‍परागत कौशल है। ऐसे लोगों को अगर हम मदद करें और वो कुछ गिरवी रखें तब मिले तो उसके पास तो गिरवी रखने के लिए कुछ नहीं है - सिवाय कि उसका ईमान। उसकी सबसे बड़ी पूंजी है उसका ईमान। ये गरीब इंसान की जो पूंजी है, ईमान। उस पूंजी के साथ मुद्रा अपनी पूंजी जोड़ना चाहता है, ताकि वो सफलता की कुंजी बन जाए और उस दिशा में हम काम करना चाहते है।

कुम्‍हार है, अब बिजली गांव में पहुंच गई है। वो भी चाहता है कि मैं मटकी बनाता हूं और चीजें बनाता हूं। लेकिन अगर Electric motor लग जाए तो मेरा काम तेज हो जाएगा। लेकिन Electric motor खरीदने के लिए पैसा नहीं है। बैंक के लिए उनके पास इतना समय भी नहीं है और उतना नेटवर्क भी नहीं है। लेकिन मैं आज, यहां बैंक के बड़े-बड़े लोग बैठे है। मेरे शब्‍द लिख करके रखिए। एक साल के बाद बैंक वाले Queue लगाएगें मुद्रा वालों के यहां और कहेंगे भई 50 लाख हमको client दे दीजिए।

क्‍योंकि अब देखिए प्रधानमंत्री जन-धन योजना में हिन्‍दुस्‍तान की बैंक सेक्‍टर ने जो काम किया है, मैं जितना अभिनंदन करूं उतना कम है जी, जितना अभिनंदन करूं उतना कम है। कोई सोच नहीं सकता था, क्‍योंकि बैंक के संबंध में एक सोच बनी हुई थी कि बैंक यानी इस दायरे से नीचे नहीं जा सकते। तो बैंक के लोगों ने गर्मी के दिनों में गांव-गांव घर-घर जा करके गरीब की झोपड़ी में जा करके उसको देश की फाइनेंस की Main Stream में लाने का प्रयास किया और इस देश के 14 करोड़ लोगों को, 14 करोड़ लोगों को बैंक खाते से जोड़ दिया। तो ये ताकत हमने अनुभव की है तो उसका ये अलग एक नया step है।

आज वैसे एक ओर भी अवसर है SIDBI का रजत जयंती वर्ष है SIDBI 25 साल की उम्र हो गई और मूलतः SIDBI का कारोबार इसी काम से शुरू हुआ था, छोटे-छोटे लोगों को... लेकिन जितनी तेजी से क्योंकि भारत देश rhythmic way में progress करे तो अपेक्षाएं पूरी नहीं होंगी। हमने उस rhythm को बदलकर के jump लगाने की जरूरत है। हमने दायरा बढ़ाने की जरूरत है। हमने अधिक लोगों को इसके अंदर जोड़ने की आवश्यकता है और सामान्य मानवी का अपना अनुभव है।

आप देखिए हिंदुस्तान में जहां भी women self help group चलते हैं, पैसों के विषय में शायद ऐसी ईमानदारी कहीं देखने को मिलेगी नहीं। उनको अगर 5 तारीख को पैसा जमा करवाना है तो 1 तारीख को जाकर के जमा करवाकर आ जाती हैं। बचत हमारे यहां स्वभाव है, उसको और जरा ताकत देने की आश्यकता है। हमारी परंपरागत वो शक्ति है।

मुद्रा बैंक के माध्यम से व्यवसाय के क्षेत्र में, स्वरोजगार के क्षेत्र में, उद्योग के क्षेत्र में जो निचले तबके पर आर्थिक व्यवस्था में रहे हुए लोग हैं, वे हमारा सबसे बड़ा client, हमारा सबसे बड़ा target group है। हम उसी पर focus करना चाहते हैं। इन 5 करोड़ 75 लाख जो छोटे व्यापारी हैं... और उनका average कर्ज कितना है? पूरे हिंदुस्तान में 11 लाख करोड़ की उनके पास पूंजी है total पूरे देश में कोई ज्यादा amount नहीं है वो और average कर्ज निकाला जाए तो एक यूनिट का average कर्ज 17 thousand है सिर्फ। 17 thousand हैं, यानि कुछ नहीं है। अगर उसको एक लाख के कर्ज की ताकत दे दी जाए। उसको इतना अगर जोड़ दिया जाए और ये 11 लाख करोड़ है वो एक करोड़ तक अगर पहुंच जाए। हम कल्पना कर सकते हैं देश की economy को GDP को, नीचे से ताकत देने का इतना बड़ा force जो कि कभी untapped था।

और इसलिए जब हम प्रधानमंत्री जन-धन योजना लेकर के आए थे तब हमने कहा था, जहां बैंक नहीं उसको बैंक से जोड़ेंगे। आज जब हम मुद्रा लेकर के आए हैं, तो हमारा मंत्र है जिसको funding नहीं हो रहा है, जो un-funded है, उसको funding करने का हम बीड़ा उठाते हैं।

ये एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें शुरू के समय में सामान्य व्यक्ति जाएगा ये संभव नहीं है क्योंकि बेचारों को अनुभव बहुत खराब है। वो कहता है भई मुझे तो साहूकार से ही पैसा लेना पड़ता है। 24 percent, 30 percent interest देना पड़ता है, वो ही मुझे आदत हो गई है। वो विश्वास नहीं करेगा कि उसको इस प्रकार से ऋण मिल सकता है। हम ये एक नया विश्वास पैदा करना चाहते हैं कि आप देश के लिए काम कर रहे हो, देश के विकास के भागीदार हो, देश आपके लिए चिंता करने के लिए तैयार है। ये message मुझे देना है।

और ये मुद्रा के concept के द्वारा, उसी दिशा में हम आगे बढ़ना चाहते हैं। हमारे देश में agriculture sector में value addition - इतनी बड़ी संभावनाएं हैं। अगर उसकी एक विधा को develop कर दिया जाए तो हमारे किसान को कभी संकटों से गुजरना नहीं पड़ेगा। और ये छोटे-छोटे entrepreneur के माध्यम से ये पूरा network खड़ा किया जा सकता है जो सामान्य किसान, जो सामान्य पैदावार करता है, उसमें value addition का काम करे। और स्थानीय स्तर पर करे। कोई बहुत बड़ी व्यवस्था की आवश्यकता नहीं है। अपने आप उसका काम आगे बढ़ जाएगा।

और हम देखते हैं आम उसको बेचना है, तो बेचारे को बड़ा कम पैसा मिलता है लेकिन एक अगर एक छोटा सा unit भी हो, आम में से अचार बना दे तो ज्यादा पैसा मिलता है और अचार को भी अच्छा बढ़िया bottle में packing करे और ज्यादा पैसा मिलता है और कोई नटी bottle लेकर खड़ी हो जाए तो और ज्यादा पैसा मिलता है advertising होता है तो।

यानि वक्त बदल चुका है, branding, advertising इन सारी चीजों की जरूरत पड़ गई है। हम ऐसे छोटे-छोटे लोगों को ताकत देना चाहते हैं। और उनको अगर ताकत मिलती है तो देश की economy की नीचे की धरातल, जितनी ज्यादा मजबूत होगी, उतनी देश की economy को लाभ होने वाला है। और जब मैंने ये आकड़े बताए तो आप भी चौंक गए होगे कि इतना बड़ा तामझाम सवा करोड़ लोग रोजगार पाते है। और जिसकी ओर कोई देखता नहीं है, वो 12 करोड़ लोगों के पेट भरता है। कितना बड़ा अंतर है। ये जो 12 करोड़ लोग है 25 करोड़ को रोजगार देने की ताकत देते है। वो Potential पड़ा है। और ज्‍यादा कोई शासकीय व्‍यवस्‍था में बड़े बदलाव की भी जरूरत नहीं है। थोड़ी संवदेनशीलता चाहिए, थोड़ी समझ चाहिए और थोड़ा Pro-Active role चाहिए।

मुद्रा एक ऐसा platform खड़ा किया गया है, जिस platform के साथ इसको... आज छोटी-मोटी finance की व्‍यवस्‍थाएं चल पड़ी है। दुनिया में कई जगह पर प्रयोग हुए है Micro finance के। लिए मैं चाहूंगा कि हम पूरे विश्‍व में Micro finance के जो Successful Model है हम भी उसका अध्‍ययन करें। उसकी जो अच्‍छाइयां है जो हमारे लिए suitable है, हम उसको adopt करें। और हिन्‍दुस्‍तान इतना बड़ा देश है कि जो चीज नागालैंड में चलती है वो महाराष्‍ट्र में चलेगी जरूरी नहीं है। विविधता चाहिए। और विविधताओं के अनुसार स्‍थानीय आवश्‍यकताओं के अनुसार अपने मॉडल बनाएं उसकी requirement करें। वरना हम दिल्‍ली में बैठ करके tailor के लिए ये और फिर कहेंगे कि तुमको ये मिलेगा तो मेल नहीं बैठेगा। वो वहां है उसी को पूछना पड़ेगा कि भई बताओं तुम्‍हारे लिए क्‍या जरूरत है? ये अगर हमने कर दिया तो हम बहुत बड़ी मात्रा में समाज के इस नीचे के तबके को मदद कर सकते है।

जिस प्रकार से सामान्‍य व्‍यक्ति की चिंता करना ये हमारा प्रयास है... और आपने इस सरकार के एक-एक कदम देखें होंगे, गतिशीलता तो आप देखते ही होंगे। वरना सामान्‍यत: देश में योजनाओं की घोषणा को ही काम माना जाता था और आप रोज नई योजना की घोषणा करो तो अखबार के आधार पर देश को समझने वाले जो लोग है वो तो यही मानते है कि वाह देश बहुत आगे बढ़ गया। और दो-चार साल के बाद देखते है कि वही कि वही रह गए। हमारी कोशिश है योजनाओं को धरती पर उतारना।

प्रधानमंत्री जन-धन योजना ये सीधा-सीधा दिखता है। पहल योजना - दुनिया में सबसे बड़ा Cash Transfer का काम। गैस सब्सिडी में। 13 करोड़ लोगों के गैस सब्सिडी सिलेंडर, सब्सिडी सीधी उसके बैंक खाते में चली गई। यानी अगर एक बार निर्णय करें कि इस काम पूरा करना है और हर काम को आप देखिए... जब हमने 15 अगस्‍त को प्रधानमंत्री जन-धन योजना की बात कही करीब-करीब सवा सौ दिन के अंदर उस काम को पूरा कर दिया।

जब हम प्रधानमंत्री जन-धन योजना के बाद हम आगे बढ़े सौ दिन के भीतर-भीतर हमने पहल का काम पूरा कर दिया।

और आज जब बजट के अंदर घोषणा हुई, 50 दिन भी नहीं हुए, वो आज योजना आपके सामने रख दी। और ये Functional होगी और उसका परिणाम मैं कहता हूं एक साल मैं ज्‍यादा समय नहीं कहता। एक साल के भीतर-भीतर हमारी जो Established Banking System है, वो मुद्रा के मॉडल की ओर जाएगी मैं दावे से कहता हूं क्‍योंकि इसकी ताकत इसकी ताकत पहचान में आने वाली है। वे अपना एक लचीली बैंकिंग व्‍यवस्‍था खड़ी करेंगे, एक बहुत बड़ी ऑफिस चाहिए, कोई एयरकंडीशन चाहिए कोई जरूरत नहीं है। ऐसे Bare footed बैंकरर्स तैयार हो सकते है जो मुद्रा के मॉडल पर बड़ी-बड़ी बैंकों का काम भी कर सकते है।

आने वाले दिनों में कम से कम धन लगा करके भी ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों को रोजगार देने का काम इसके साथ सरलता से हो सकता है और ये लोग जो संकट से गुजरते है, ब्‍याज के चक्‍कर में गरीब आदमी मर जाता है। उसको बचाना है और उसकी जो ताकत है उसके लिए अवसर देना है उस अवसर की दिशा में काम कर रहे है, जिस प्रकार से देश में ये जो वर्ग है उसकी जितनी चिंता करते है, उतनी ही देश के किसान की चिंता करना उतना ही जरूरी है।

किसी न किसी कारण से देश का किसान प्राकृतिक संकटों से जूझ रहा है। गत वर्ष, वर्षा कम हुई। वर्षा कम होने के कारण वैसे ही किसान मुसीबत से गुजारा कर रहा था और इस बार जितनी मात्रा में बेमौसमी वर्षा और ओले गिरना। इतनी तबाही हुई है किसान की। हमने मंत्रियों को भेजा था। खेतों में जा करके किसानों से बात करके परिस्थिति का जायजा लिया। कल इन सारे मंत्रियों से मैंने डिटेल में रिपोर्ट ली थी। इन किसानों को हम क्या मदद कर सकते हैं। और मैंने पहले दिन कहा था कि किसान को इस मुसीबत से बचाना, उसका साथ देना, उसको संकटों से बाहर लाना। ये सरकार की, समाज की, हम सबकी जिम्मेवारी है और किसान की चिंता करना ये आवश्यक है।

Natural calamity पहले भी आई है। लेकिन सरकार के जो parameter रहे हैं, उन parameters में आज के संकट में किसान को ज्यादा मदद नहीं मिल सकती है। और इसलिए ये संकट की व्यापकता इतनी है और उस समय है जबकि उसको फसल लेकर के बाजार में जाना था। एक प्रकार से उसके नोटों का बंडल ही जल गया, इस प्रकार से हम कह सकते हैं। इतना बड़ा उसका, उसका पूरा पसीना बहाया हुआ उसका, ये हालत हुई है। और इसलिए हमने insurance company को भी आदेश किया है कि बहुत ही proactive होकर के उनकी मदद की जाए। बैंकों को हमने आदेश किया है कि बैंक उनके जो कर्ज हैं, उनके संबंध में किस प्रकार से restructure करे ताकि उनको इस संकट से बाहर लाया जाए।

सरकार की तरफ से भी एक बहुत बड़ा अहम निर्णय हम करने जा रहे हैं। अब तक खेत में 50 प्रतिशत से ज्यादा अगर नुकसान हुआ हो, तभी वो उस मदद पाने की list में आता है। 50 प्रतिशत से ज्यादा अगर नुकसान हुआ होगा तभी आपको मदद मिल सकती है। अगर 50 प्रतिशत से कम हुआ है तो मदद नहीं मिल सकती है। राज्यों के मुख्यमंत्रियों का भी ये एक सुझाव था कि साहब ये norms बदलना चाहिए। हमारे मंत्री अभी जाकर के आए, उन्होंने प्रत्यक्ष देखा, और ये सब देखने के बाद एक बहुत बड़ा हमने एक महत्वपूर्ण निर्णय किया है कि अब किसान के वो जो 50 प्रतिशत के नुकसान वाला दायरा था उसको बदलकर के 33 percent भी अगर नुकसान हुआ है तो भी वो किसान हकदार बनेगा।

उसके कारण मुझे मालूम है बहुत बड़ा बोझ आने वाला है, बहुत बड़ा बोझ आने वाला है लेकिन किसान को 50 प्रतिशत वाले हिसाब में रखने से उसको ज्यादा लाभ नहीं मिलेगा। 33 percent जो कि कईयों की मांग थी, उसको हमने स्वीकार किया है।

दूसरा विषय है उसको जो मुआवजा दिया जाता है। देश में आजादी के बाद सबसे बड़ा निर्णय पहली बार हुआ है 50 प्रतिशत को 33 प्रतिशत लाना। और दूसरा महत्वपूर्ण आजादी के बाद इतना बड़ा jump नहीं लगाया है, किसानों को मदद करने में हम इतना बड़ा jump इस बार लगा रहे हैं। और आज उसको जो मदद करने के सारे parameters हैं, उसको अब डेढ़ गुना कर दिया जाएगा। अगर उसको नुकसान में पहले 100 रुपया मिलता था, 150 मिलेगा, लाख मिलता था तो डेढ़ लाख मिलेगा, उसकी मदद डेढ़ गुना कर दी जाएगी।

कभी हमारे यहां incremental होता था 5 percent, 2 percent, 50 प्रतिशत वृद्धि। और ये किसान को तत्काल मदद मिले। राज्यों ने सर्वे का काम किया है। भारत सरकार और राज्य सरकार मिलकर के उसको आगे बढ़ाएगी लेकिन मैं चाहता हूं हमारे देश के किसानों को जितनी मदद हो सके, उतनी मदद करने के लिए ये सरकार संकल्पबद्ध है। क्योंकि आर्थिक विकास की यात्रा में किसान का भी बहुत बड़ा योगदान है और हमारी जीवन नैया चलाने में भी किसान का बहुत बड़ा योगदान है। बैंक हो, insurance company हो, भारत सरकार हो, राज्य सरकार हो, हम सब मिलकर के किसान को इस संकट की घड़ी से हम बाहर लाएंगे। ऐसा मुझे पूरा विश्वास है।

फिर एक बार मैं SIDBI की इस रजत जयंती वर्ष के प्रारंभ पर उनको मैं बहुत-बहुत शुभकामना देता हूं और SIDBI आने वाले दिनों में नए लक्ष्य को लेकर के और नई ऊंचाइयों को पार करने में सफल होगा, ऐसी मेरी शुभकामनाएं हैं।

और मुद्रा platform प्रधानमंत्री मुद्रा योजना आने वाले दिनों में देश की आर्थिक, जो पक्की धरोहर है उसको जानदार बनाना, शानदार बनाने के काम में मुद्रा बहुत बड़ा role play करेगी। और ये पूंजी उसकी सफलत की कुंजी बने, ये मंत्र को हम चरितार्थ करेंगे। इसी एक शुभ आशय के साथ आज इस महत्वपूर्ण योजना को प्रारंभ करते हुए मुझे खुशी हो रही है, मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद।

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TMC के संरक्षण में रहे अपराधियों को सजा मिलेगी: जादवपुर,पश्चिम बंगाल में पीएम मोदी
April 24, 2026
मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए जाएंगे: पीएम मोदी
TMC ने बंगाल की पहचान को नष्ट कर दिया है, यहाँ घुसपैठियों को बसाया जा रहा है, वे जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं और लोगों का रोजगार छीन रहे हैं: जादवपुर में पीएम मोदी
आप हमें आशीर्वाद दीजिए, हम आपको TMC के भय से आजादी दिलाएंगे: जादवपुर में पीएम मोदी ने नेताजी के विचारों को दोहराया

भारत माता की...

भारत माता की...

भारत माता की...

मैं अपना भाषण प्रारंभ करूं उससे पहले... मैं देख रहा हूं छोटे-छोटे कलाकार बालक कुछ चित्र बनाकर ले आए हैं। ये तो बड़ी अमृत टोकड़ी लेकर के आए हैं...लगता है आपका ये प्यार मेरी बहुत बड़ी अमानत है। आप अगर पीछे एड्रेस लिखा होगा तो मैं आपको धन्यवाद की चिट्ठी भेजूंगा। आप जो भी लाए हैं मेरे एसपीजी के साथियों को दे दीजिए.. मैं आपको जरूर पत्र भेजूंगा। वहां दो बालक एकदम दूर खड़े हैं... उनसे ले लीजिए... बढ़िया-बढ़िया ड्रॉइंग बनाकर ले आए हैं आप लोग। मेरा सौभाग्य है आपका इतना प्यार...

भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की..

मैं भाषण शुरू करूं उससे पहले यहां के जो कैंडिडेट्स हैं... उनसे आग्रह करता हूं कि जरा आगे आ जाएं... जो ये चुनाव में कैंडिडेट है वो जरा आगे आ जाएं... मैं एक बार उनसे मिलकर के आता हूं आप लगातार भारत माता की जय बोलते रहिए... बोलिए भारत माता की... जय सत्य नारायण। जय राधा - माधव, जय मां दयामयी काली.... जादवपुर बासी, केमोन आछेन सबाइ?

सबसे पहले मैं शिबानी पीठ की मां काली… और विशालाक्षी माता को प्रणाम करता हूं। मैं चैतन्य महाप्रभु के चरणों में भी नमन करता हूँ।

भाइयों बहनों, सबसे पहले तो मैं आप सबसे क्षमा मांगता हूं... क्योंकि आप लंबे समय से धूप में खड़े हैं... हमारी योजना ये सारी बेकार हो गई पंडाल छोटा पड़ गया, लेकिन आपका प्यार बढ़ता ही जा रहा है। मैं आप सबसे क्षमा चाहता हूं कि हम पूरी व्यवस्था नहीं कर पाए और उसके कारण आपको इतनी भयंकर गर्मी में भरी दुपहरी में तपना पड़ रहा है। लेकिन मैं आपको विश्वास दिलाता हूं आप जो धूप में तप कर रहे है ना मैं आपका तप बेकार नहीं जाने, मैं आपके इस तप को ब्याज समेत लौटाऊंगा, आपके इस प्यार को ब्याज समेत लौटाऊंगा इस क्षेत्र का विकास कर के।

भाइयों-बहनों,

बंगाल के पहले चरण का मतदान हो चुका है...और बंपर मतदान हुआ है...जबरदस्त मतदान हुआ है। देश आजाद होने के बाद देश ने कभी ऐसा देखा नहीं जो इस बार बंगाल के लोगों ने कर के दिखाया है। हर तरफ यही चर्चा है कि बीजेपी को कितना बड़ा समर्थन बंगाल में मिला है...आज बंगाल के छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारी... भयमुक्त होकर बीजेपी के साथ हैं। आज बंगाल के टैक्सी वालों से लेकर रिक्शा चलाने वाले तक... भयमुक्त होकर बीजेपी की सरकार के लिए समर्थन दे रहे हैं। आज नाव चलाने वालों हो या नाम कमाने वाले हो हर कोई खुलेआम परिवर्तन के लिए भाजपा के भरोसे पर बंगाल का भाग्य बनाने के लिए तैयार है। आज बंगाल के सरकारी कर्मचारी से लेकर बंगाल के पुलिस कर्मी तक...भयमुक्त होकर उज्ज्वल बंगाल के लिए मैंदान में आए हैं। बंगाल के शिक्षक...यहां के वकील, यहां के डॉक्टर...हर प्रोफेशन के लोग बीजेपी के समर्थन में उतरे हुए हैं। हर कोई कह रहा है… चारों तरफ से ही गूंज रही है एक ही नारा सुनाई दे रहा है एक ही आवाज आ रही है पाल्टानो दोरकार... पाल्टानो दोरकार... पाल्टानो दोरकार... पाल्टानो दोरकार... पाल्टानो दोरकार...

साथियों,

पहले चरण के मतदान ने ये पक्का कर दिया है कि कई जिलों में TMC का खाता भी नहीं खुलेगा। अब दूसरे चरण में आपको TMC की करारी हार पर...और विकसित बंगाल के संकल्प पर पक्की मुहर लगानी है। लगाओगे... ज्यादा से ज्यादा मतदान करोगे... ये कल जो हुआ है उसका रिकॉर्ड तोड़ोगे... ये कल जिन्होंने मतदान किया है.. उन्होंने आपके लिए चुनौती खड़ी कर दी है... करोगे मतदान इतना। साथियों- बीजेपी की विजय विशाल और निर्णायक हो...बंगाल में विकास का नया युग पूरी ताकत से आए...अब 29 अप्रैल को, ये काम आपको करना है। ये बंगाल के सामने बहुत बड़ा मौका है। और इसलिए एक भी वोट छूटना नहीं चाहिए। मेरा आपसे आग्रह है... बीजेपी के सभी प्रत्याशियों को भारी बहुमत से जिताकर भेजिए...

साथियों,

पिछले 15 वर्षों में TMC ने बंगाल को केवल और केवल लूटने का काम किया है। ऐसा कोई काम नहीं जहां टीएमसी का करप्शन नही.. इसलिए बंगाल की जनता कह रही है भर्ती घोटाला चोलबे ना.. भर्ती घोटाला..भर्ती घोटाला… पूरी ताकत से बोलिए… भर्ती घोटाला… भर्ती घोटाला… . चिटफंड घोटाला… चिटफंड घोटाला… कोयला खनन घोटाला… कोयला खनन घोटाला… बालू के खनन में घोटाला… पूरी ताकत से बोलिए आप मेरे से भी आपकी ताकत ज्यादा होनी चाहिए… गरीबों के राशन की लूट… चोलबे ना.. गरीबों के राशन की लूट…तस्करों को छूट… कटमनी… कमीशन…

साथियों,

पिछले 15 वर्षों में टीएमसी की सरकार ने बंगाल की पहचान को तहस-नहस कर दिया है। बंगाल में घुसपैठियों को लाकर बसाया जा रहा है। यहां घुसपैठिए बंगाल की जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं, यहां के लोगों का रोजगार छीन रहे हैं। एक ओर टीएमसी का करप्शन दूसरी ओर घुसपैठियों का दबाव बंगाल के युवाओं को अपना घर छोड़कर....रोजगार की तलाश में पलायन करना पड़ रहा है।इस समस्या का समाधान तभी होगा, जब TMC पूरी तरह जाएगी और बीजेपी पूरी शक्ति से आएगी। इसलिए, करप्शन और घोटालों से मुक्ति के लिएस पोल्टानो दोरकार,.. पोल्टानो दोरकार,.. युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए-पोल्टानो दोरकार, बंगाल की सुरक्षा और सम्मान के लिए-पोल्टानो दोरकार,

साथियों,

भाजपा का विश्वास है कि बेटी सशक्त होगी, तो समाज सशक्त होगा।

इसीलिए, हम हर योजना में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना चाहते हैं।

हम चाहते हैं, कि बंगाल की हर बहन आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बने। उसके पास आगे बढ़ने के लिए अवसरों की कमी ना हो। लेकिन आपने देखा, कुछ दिन पहले देश की संसद में कैसे टीएमसी और उसके साथियों ने महिला आरक्षण का विरोध किया। देश चाहता है कि राजनीति में बेटियों की भागीदारी बढ़े, लेकिन टीएमसी नहीं चाहती। भाजपा चाहती है कि देश की नारी शक्ति सशक्त हो, लेकिन टीएमसी इसके विरोध में खड़ी हो गई है। आज बंगाल में हमारे साथी घर-घर जाकर मातृशक्ति भोरशा कार्ड दे रहे हैं। हर बहन को हर महीने तीन हजार रुपए का भरोसा मिल रहा है। यानि 36 हजार रुपया.. मैं आपको विश्वास दिलाता हूं....बंगाल में भाजपा की सरकार बनेगी....उसके बाद, महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए कई और कदम उठाए जाएंगे। जिन अपराधियों और गुंडों को TMC सरकार में पाला गया है.... महिलाओं के खिलाफ बलात्कार जैसी घटनाओं के जो दोषी हैं... ऐसे हर अपराधी को.... ऐसे हर अपराधी को कानून सजा देगा। और हम सजा दिलवाकर रहेंगे। TMC राज में यहाँ बेटियाँ सुरक्षित नहीं हैं। लेकिन, बीजेपी राज में एक भी बलात्कारी, एक भी क्रिमिनल सुरक्षित नहीं रहेगा। सबका हिसाब होगा। और ये मोदी की गारंटी है।

साथियों,

जादवपुर में सिंडिकेट ने यहां के विकास को अपना बंधक बना लिया है। यहां बालू, ईंट और सीमेंट की सप्लाई पर किसका कब्ज़ा है? क्या ये किसी से छिपा है? बीते वर्षों में अवैध निर्माण के मामले कई गुना बढ़ गए हैं। जो लोग खुद को जादवपुर का शुभचिंतक कहते हैं, वो जमीनों पर अवैध कब्ज़ा कर रहे हैं। जादवपुर के वेटलैंड्स को देख लीजिए .. यहां लैंड माफिया कैसे पर्यावरण को निगल रहे हैं। क्या ये सब बिना निर्मम सरकार की मिलीभगत के हो सकता है? और अगर कोई अपनी जमीन पर घर बनाने की कोशिश करे, तो उन्हें सिंडिकेट वालों को प्रोटेक्शन मनी देनी पड़ती है। ऐसे हालात को हमें बदलना ही होगा।

साथियों,

जादवपुर यूनिवर्सिटी का नाम दुनिया भर में सम्मान से लिया जाता था। इस कैंपस की नींव ही राष्ट्रवाद पर रखी गई थी। लेकिन आज यहाँ की स्थिति देखिए। कैंपस के अंदर धमकियां दी जा रही हैं, दीवारों पर देशविरोधी बातें लिखी जा रही हैं... और छात्र अपनी पढ़ाई के बजाय सड़कों पर प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। हम यहाँ अराजकता नहीं, academic माहौल चाहते हैं.. हम यहाँ धमकियां नहीं, संवाद चाहते हैं। जो सरकार अपने ही राज्य के सबसे बड़े शिक्षण संस्थान को नहीं बचा सकती, वो बंगाल का भविष्य क्या बचाएगी? बंगाल के नौजवानों का भविष्य क्या बचाएगी…

साथियों,

देश जब अंग्रेज़ों के अत्याचार से, अंग्रेज़ों दमन से तंग आ चुका था...

तब नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने आज़ादी की आस जगाई थी...उन्होंने पूरे देश आह्वान किया थी... तुम मुझे खून दो...मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा। आज बंगाल...15 साल के महा-जंगलराज से परेशान है। 15 सालों के महा-जंगलराज में...यहां बहुत खून बहाया गया है। लेकिन अब बंगाल में नई क्रांति का आरंभ हो रहा है। इस क्रांति के मूल में आप हैं, जनता-जनार्दन है… यहां को नौजवान है… यहां बहनें हैं बेटियां हैं , यहां का किसान है, यहां का मजदूर है… और ये क्रांति आने का रास्ता क्या है

भारत के संविधान से आपको मिली एक वोट की ताकत है। एक वोट की ताकत है। इसलिए, मैं आप सभी से एक विनम्र आग्रह करने आया हूं… भाई ये चित्र ले लो इस बेटी से… एक मिनट बेटा ले लेते हैं...कितनी मेहनत करोगे.. दे दीजिए... धन्यवाद... धन्यवाद बेटा...नेताजी सुभाष बाबू ने कहा था तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा। बंगाल के मेरे भाइयों बहनोंं आप हमें आशीर्वाद दीजिए, हम आपको आज़ादी देंगे।… आप हमें आशीर्वाद दीजिए, हम आपको आज़ादी देंगे। आज़ादी...TMC के भॉय से। आज़ादी...TMC के भ्रष्टाचार से। आज़ादी...TMC के सिंडिकेट से। आज़ादी...बेटियों पर अत्याचार से। आज़ादी...पलायन की मजबूरी से। आज़ादी...बेरोजगारी और बेकारी से। आज़ादी...घुसपैठियों के कब्ज़े से।

साथियों,

कमल छाप पर दिया आपका हर वोट...पढ़ाई, कमाई, दवाई, सिंचाई और सुनवाई... हर चीज़ की आज़ादी देगा। कमल छाप पर दिया, आपका हर वोट...उस सोच से आज़ादी देगा...जो बंगाल में हिंसा और रक्तपात को बढ़ावा देती है। कमल छाप पर दिया आपका हर वोट...आपके सपनों को उड़ान देगा...बंगाल को फिर से भारत का नंबर वन स्टेट बनाएगा।

कमल छाप पर दिया आपका हर वोट...बंगाल को...डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों का बंगाल बनाएगा।

साथियों,

जादवपुर और साउथ 24 परगना में बड़ी संख्या में हमारे दलित-वंचित वर्ग के लोग रहते हैं। बंगाल में TMC की सरकार है। लेकिन, हमारे इन दलित भाई-बहनों को पिछड़े भाई-बहनों को इस समाज की सेवा वो नहीं किए. मैं आपको वादा करता हूं कि हम करके रहेंगे , हम आप की सेवा के लिए खप जाएंगे। हमने उज्ज्वला योजना में इस जिले में 11 लाख गैस सिलिंडर दिये हैं। इनमें से लगभग 3 लाख गैस कनेक्शन SC/ST परिवारों को मिले हैं। पीएम किसान सम्मान निधि के तहत यहां साढ़े चार लाख किसानों को मदद मिल रही है। इन्हें यहां अब तक 1000 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी जा चुकी है। इनमें बड़ी संख्या में छोटे और सीमांत किसान वर्ग से आते हैं। ऐसी कितनी ही योजनाएँ केंद्र सरकार इस वर्ग के लिए चला रही है। लेकिन भाइयों बहनों, यहाँ बैठी TMC सरकार खुद तो दलित-वंचित वर्ग के खिलाफ है ही...वो केंद्र सरकार की दलितों के लिए वंचितों के लिए जो योजनाएं हैं, उनमें भी अड़ंगे लगा रही है। आप मुझे बताइये...बीजेपी सरकार गरीबों को मुफ्त इलाज की सुविधा देना चाहती है। इसके लिए, हम आयुष्मान भारत योजना चला रहे हैं। गरीब परिवारों के 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज का खर्च मोदी सरकार उठाती है। लेकिन TMC ने इस योजना को बंगाल में रोक रखा है। पीएम आवास योजना में भी टीएमसी सरकार घपला कर रही है। सही लाभार्थी को पक्के घर मिलने नहीं दिए जा रहे हैं।

साथियों,

ये जादवपुर का सुभाषग्राम, कोडालिया... ये क्षेत्र नेताजी सुभाष की विरासत से जुड़ा है। इतना गौरवशाली क्षेत्र...लेकिन, आज यहाँ लोग साफ पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। आर्सेनिक की वजह से कई जगह पानी जहरीला हो रहा है। गरीब, दलित, वंचित समाज के लोगों का जीवन दांव पर लगा है। लेकिन, TMC सरकार ने इसका कोई ठोस समाधान नहीं दिया है। हमारी केंद्र सरकार ने हर घर नल से साफ जल पहुंचाने के लिए जलजीवन मिशन शुरू किया है। लेकिन, TMC ने उसे भी अपने भ्रष्टाचार का शिकार बना लिया है।

भाइयों बहनों,

इन समस्याओं का समाधान अब दूर नहीं है। 4 मई के बाद बीजेपी की सरकार बनेगी। भारी बहुमत से बनेगी। इसी के साथ, बंगाल की परेशानियों का अंत भी शुरू हो जाएगा। बंगाल के लोगों को, यहाँ के एससी-एसटी समाज को केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ भी मिलने लगेगा। आप याद रखिएगा... पीएम-सीएम, एक शाथे… पीएम-सीएम, एक शाथे, उन्नोयोन होबे दिने-राते!

साथियों,

कमल के बटन को दबाकर मेरे इन सभी साथियों को मेरे सभी उम्मीदवारों को आप विजयी बनाएं। मुझे विश्वास है बंगाल की माताएं बहने और बेटियां बंगाल में बदलाव के सबसे बड़ी शक्ति बनेगी। आप इतनी बड़ी संख्या में अपना आशीर्वाद देने यहां आए इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

दोनों हाथ ऊपर उठाकर के मुट्ठी बंद कर के पूरी ताकत से बोलिए भारत माता की...

भारत माता की...

भारत माता की...

भारत माता की...

वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे...