वायु योद्धाओं और सैनिकों के साथ बातचीत की, हमारे राष्ट्र की रक्षा में उनका साहस और पेशेवर रूख सराहनीय है: प्रधानमंत्री
'भारत माता की जय' सिर्फ एक नारा नहीं है, यह हर उस सैनिक की शपथ है जो अपने देश के सम्मान और मर्यादा के लिए अपना जीवन दांव पर लगाता है : प्रधानमंत्री
ऑपरेशन सिंदूर भारत की नीति, नीयत और निर्णायक क्षमता की एक त्रिमूर्ति है : प्रधानमंत्री
जब हमारी बहनों और बेटियों का सिंदूर मिटाया गया, तो हमने आतंकवादियों को उनके ठिकानों में ही कुचल दिया : प्रधानमंत्री
आतंक के आकाओं को अब पता है कि भारत के विरूद्ध आंख उठाने से उन्हें विनाश के अलावा कुछ नहीं प्राप्त होगा: प्रधानमंत्री
पाकिस्तान में न केवल आतंकवादी ठिकानों और एयरबेसों को नष्ट कर दिया गया, बल्कि उनके दुर्भावनापूर्ण इरादों और दुस्साहस को भी पराजित किया गया: प्रधानमंत्री
आतंकवाद के खिलाफ भारत की लक्ष्मण रेखा अब स्पष्ट है, अगर कोई और आतंकी हमला होता है, तो भारत जवाब देगा और यह एक निर्णायक जवाब होगा : प्रधानमंत्री
ऑपरेशन सिंदूर का हर क्षण भारत के सशस्त्र बलों की शक्ति का प्रमाण है: प्रधानमंत्री
यदि पाकिस्तान आगे कोई आतंकवादी गतिविधि या सैन्य आक्रमण करता है, तो हम निर्णायक जवाब देंगे, यह जवाब हमारी शर्तों पर, हमारे तरीके से होगा: प्रधानमंत्री
ये नया भारत है! यह भारत शांति चाहता है, लेकिन अगर मानवता पर हमला होता है, तो भारत युद्ध के मैदान में दुश्मन को कुचलना भी जानता है: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज आदमपुर स्थित वायुसेना स्टेशन पर बहादुर वायु योद्धाओं और सैनिकों से मुलाकात की और उनसे परस्पर बातचीत की। उन्हें संबोधित करते हुए उन्होंने ‘भारत माता की जय’ के नारे की शक्ति को रेखांकित किया और इस बात पर जोर दिया कि दुनिया ने अभी-अभी इसकी ताकत देखी है। यह टिप्पणी करते हुए कि यह केवल एक नारा नहीं है, बल्कि भारत माता की गरिमा को बनाए रखने के लिए अपने जीवन को जोखिम में डालने वाले प्रत्येक सैनिक द्वारा ली गई शपथ है, प्रधानमंत्री ने कहा कि यह नारा प्रत्येक नागरिक की आवाज है जो देश के लिए जीना चाहता है और सार्थक योगदान देना चाहता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ‘भारत माता की जय’ युद्ध के मैदान और महत्वपूर्ण मिशनों दोनों में गूंजती है। उन्होंने कहा कि जब भारतीय सैनिक ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाते हैं, तो दुश्मन की रीढ़ में सिहरन पैदा हो जाती है। उन्होंने भारत की सैन्य शक्ति पर जोर देते हुए कहा कि जब भारतीय ड्रोन दुश्मन की किलेबंदी को ध्वस्त करते हैं और जब मिसाइलें सटीक हमला करती हैं, तो दुश्मन को केवल एक ही वाक्य सुनाई देता है- ‘भारत माता की जय’। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि भारत के पास बेहद अंधेरी रात में भी आसमान को रोशन करने की क्षमता है जो दुश्मनों को देश की अदम्य भावना का एहसास करा देता है। उन्होंने कहा कि जब भारत की सेना परमाणु ब्लैकमेल की धमकियों को ध्वस्त कर देती है, तो आसमान और धरती पर बस एक संदेश गूंजता है- 'भारत माता की जय'।

भारत के सशस्त्र बलों के साहस और दृढ़ संकल्प की सराहना करते हुए, उन्होंने कहा कि उन्होंने लाखों भारतीयों के दिलों को गर्व से भर दिया है। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों की अद्वितीय बहादुरी और ऐतिहासिक उपलब्धियों के कारण आज हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा है। उन्होंने कहा कि इन वीर नायकों से मिलना वास्तव में सौभाग्य की बात है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब दशकों बाद देश की वीरता की चर्चा होगी, तो इस मिशन का नेतृत्व करने वाले सैनिक सबसे अधिक चर्चित होंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गए हैं। वीर योद्धाओं की भूमि से सशस्त्र बलों को संबोधित करते हुए उन्होंने वायु सेना, नौसेना, सेना और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के साहसी कर्मियों का अभिवादन किया। उन्होंने उनके वीरतापूर्ण प्रयासों की सराहना की और कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का प्रभाव पूरे देश में गूंज रहा है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के दौरान, हर भारतीय सैनिकों के साथ मजबूती से खड़ा था, प्रार्थना कर रहा था और अटूट समर्थन दे रहा था। उन्होंने भारतीय सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति पूरे देश की गहरी कृतज्ञता व्यक्त की और उनके बलिदान को सराहा।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, "ऑपरेशन सिंदूर कोई साधारण सैन्य अभियान नहीं है, बल्कि यह भारत की नीति, इरादे और निर्णायक क्षमता की त्रिमूर्ति है।" उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत बुद्ध और गुरु गोविंद सिंह जी दोनों की भूमि है, जिन्होंने कहा था, “सवा लाख से एक लड़ाऊं, चिड़ियन ते मैं बाज़ तुड़ाऊं, तबै गुरु गोबिंद सिंह नाम कहाऊं।” उन्होंने कहा कि धर्म की स्थापना के लिए अन्याय के खिलाफ हथियार उठाना हमेशा से भारत की परंपरा रही है। उन्होंने पुष्टि की कि जब आतंकवादियों ने भारत की बेटियों पर हमला करने और उन्हें नुकसान पहुंचाने की हिम्मत की, तो भारतीय सेना ने उन्हें उनके ही ठिकानों में कुचल दिया। उन्होंने कहा कि ये हमलावर कायरतापूर्ण तरीके से छिपकर आए थे, यह भूल गए कि उन्होंने किसे चुनौती दी थी - शक्तिशाली भारतीय सशस्त्र बलों को। उन्होंने भारत के सैनिकों की बहादुरी की प्रशंसा की, उन्होंने कहा कि उन्होंने सीधे हमला किया, प्रमुख आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। नौ आतंकवादी ठिकाने नष्ट कर दिए गए, और 100 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया गया। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि आतंकवाद के आकाओं को अब भारत को उकसाने के एक निर्विवाद परिणाम को समझ गए हैं- पूरी तबाही। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में निर्दोष लोगों का खून बहाने की किसी भी कोशिश से केवल विनाश ही होगा, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन आतंकवादियों को पनाह देने वाली पाकिस्तानी सेना को भारतीय सेना, वायु सेना और नौसेना ने निर्णायक रूप से हरा दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा, "भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया है- आतंकवादियों के लिए कोई सुरक्षित पनाहगाह नहीं बची है", उन्होंने पुष्टि की कि भारत उन्हें उनके ही क्षेत्र में मार गिराएगा, ताकि भागने का कोई मौका न मिले। उन्होंने घोषणा की कि भारत के ड्रोन और मिसाइलों ने ऐसा डर पैदा कर दिया है कि पाकिस्तान उनके बारे में सोचकर ही कई दिनों तक नींद खो देगा। महाराणा प्रताप के प्रसिद्ध घोड़े चेतक के बारे में लिखी गई पंक्तियों को उद्धृत करते हुए उन्होंने टिप्पणी की कि ये शब्द अब भारत के उन्नत आधुनिक हथियारों के साथ पूरी तरह से मेल खाते हैं।

श्री मोदी ने सशस्त्र बलों के असाधारण प्रयासों की सराहना करते हुए कहा, "ऑपरेशन सिंदूर की सफलता ने राष्ट्र के संकल्प को मजबूत किया है, देश को एकजुट किया है, भारत की सीमाओं की रक्षा की है और भारत के गौरव को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।" उन्होंने भारतीय वायुसेना के हमलों की जबरदस्त सटीकता को रेखांकित किया और कहा कि उन्होंने पाकिस्तान के भीतर आतंकवादी ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। श्री मोदी ने कहा कि केवल 20-25 मिनट के भीतर, भारतीय बलों ने सीमा पार हमलों को पूरी सटीकता के साथ अंजाम दिया और सटीक लक्ष्यों को भेदा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह के ऑपरेशन केवल आधुनिक, तकनीकी रूप से सुसज्जित और अत्यधिक पेशेवर बल द्वारा ही किए जा सकते हैं। उन्होंने भारतीय सेना की गति और सटीकता की सराहना करते हुए कहा कि उनकी त्वरित और निर्णायक कार्रवाई ने दुश्मन को पूरी तरह से स्तब्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि विरोधियों को पता ही नहीं चला कि उनके गढ़ कब मलबे में तब्दील हो गए।

इस बात पर जोर देते हुए कि भारत का उद्देश्य पाकिस्तान के अंदर आतंकवादी मुख्यालयों पर हमला करना और प्रमुख आतंकवादियों को खत्म करना था, प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा नागरिक विमानों का उपयोग करके अपनी गतिविधियों को छिपाने के प्रयास के बावजूद, भारतीय सेना ने अत्यंत सावधानी और सटीकता के साथ जवाब दिया। उन्होंने सतर्कता और जिम्मेदारी बनाए रखते हुए अपने मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए सशस्त्र बलों की सराहना की। उन्होंने गर्वपूर्वक से घोषणा की कि भारतीय सैनिकों ने अपने उद्देश्यों को पूरी सटीकता और दृढ़ संकल्प के साथ पूरा किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस ऑपरेशन ने न केवल पाकिस्तान के भीतर आतंकवादी ठिकानों और एयरबेसों को नष्ट कर दिया, बल्कि उनके नापाक इरादों और दुर्भावनापूर्ण दुस्साहस को भी कुचल दिया।

श्री मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद, दुश्मन ने बौखला कर कई भारतीय एयरबेस को निशाना बनाने की बार-बार कोशिश की। हालांकि, पाकिस्तान के हर हमले को निर्णायक रूप से विफल कर दिया गया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की शक्तिशाली वायु रक्षा प्रणाली के सामने पाकिस्तानी ड्रोन, यूएवी, विमान और मिसाइलें सभी विफल हो गए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की तैयारियों और तकनीकी ताकत ने दुश्मन के खतरों को पूरी तरह से बेअसर कर दिया। उन्होंने देश के एयरबेस की देखरेख करने वाले शीर्ष अधिकारियों की सराहना की और भारतीय वायु सेना के हर वायु योद्धा की हार्दिक प्रशंसा की। उन्होंने देश की रक्षा में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन और अटूट समर्पण की सराहना की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख अब पूरी तरह से स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि अगर भारत पर कोई और आतंकवादी हमला होता है तो देश निर्णायक और मजबूती से जवाब देगा। उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के दौरान भारत की दृढ़ कार्रवाई को याद करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अब खतरों से निपटने में देश का नया मानक बन गया है। उन्होंने तीन प्रमुख सिद्धांतों को दोहराया जो उन्होंने कल रात राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में व्यक्त किए थे। सबसे पहले, अगर भारत पर कोई आतंकवादी हमला होता है तो जवाब अपनी शर्तों पर दिया जाएगा। दूसरा, भारत किसी भी तरह के परमाणु ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेगा। तीसरा, भारत अब आतंकवादी सरगनाओं और उन्हें शरण देने वाली सरकारों के बीच अंतर नहीं करेगा। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, "दुनिया अब इस नए और दृढ़ भारत को पहचान रही है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के प्रति अपने दृढ़ दृष्टिकोण को समायोजित कर रहा है।"

श्री मोदी ने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर का प्रत्येक क्षण भारत के सशस्त्र बलों की शक्ति और क्षमता का प्रमाण है", उन्होंने सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच असाधारण समन्वय की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनका तालमेल उल्लेखनीय रहा। उन्होंने समुद्र पर नौसेना के प्रभुत्व, सीमाओं पर सेना के सुदृढ़ीकरण और हमले तथा प्रतिरक्षा में भारतीय वायु सेना की दोहरी भूमिका रेखांकित की। उन्होंने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और अन्य सुरक्षा बलों की उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सराहना की। उन्होंने भारत की एकीकृत वायु और भूमि युद्ध प्रणालियों की प्रभावशीलता को रेखांकित करते हुए घोषणा की कि यह एकजुटता अब भारत की सैन्य शक्ति की पहचान बन चुकी है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सैनिकों और उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकी के बीच उल्लेखनीय समन्वय को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की पारंपरिक वायु रक्षा प्रणाली जो कई युद्धों की गवाह रही है, को आकाश जैसे स्वदेशी प्लेटफार्मों और एस-400 जैसी आधुनिक, शक्तिशाली प्रणालियों द्वारा सुदृढ़ किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत का मजबूत सुरक्षा कवच एक निर्णायक ताकत बन गया है। पाकिस्तान के बार-बार के प्रयासों के बावजूद, भारतीय एयरबेस और प्रमुख रक्षा बुनियादी ढांचा पूरी तरह सुरक्षित रहा। प्रधानमंत्री ने इस सफलता का श्रेय सीमा पर तैनात प्रत्येक सैनिक और ऑपरेशन में शामिल प्रत्येक व्यक्ति के समर्पण और वीरता को दिया। उन्होंने उनकी प्रतिबद्धता को भारत की अटूट राष्ट्रीय रक्षा की नींव के रूप में स्वीकार किया।

श्री मोदी ने कहा कि भारत के पास अब अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी है जिसका पाकिस्तान मुकाबला नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारतीय वायुसेना और अन्य सैन्य शाखाओं ने दुनिया की कुछ सबसे उन्नत रक्षा तकनीकों तक पहुंच प्राप्त कर ली है। उन्होंने माना कि नई तकनीक के साथ महत्वपूर्ण चुनौतियां भी आती हैं और जटिल तथा परिष्कृत प्रणालियों को बनाए रखने और कुशलतापूर्वक संचालित करने के लिए अत्यधिक कौशल एवं सटीकता की आवश्यकता होती है। आधुनिक युद्धकला में अपनी श्रेष्ठता का प्रदर्शन करते हुए सामरिक विशेषज्ञता के साथ तकनीक को सहजता से एकीकृत करने के लिए भारत के सशस्त्र बलों की सराहना करते हुए श्री मोदी ने घोषणा की कि भारतीय वायुसेना ने अब न केवल हथियारों से बल्कि डेटा और ड्रोन से भी दुश्मनों का मुकाबला करने की कला में महारत हासिल कर ली है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान की अपील के जवाब में भारत की सैन्य कार्रवाई को अभी अस्थायी रूप से रोका गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर पाकिस्तान आगे भी कोई आतंकवादी गतिविधि या सैन्य उकसावे में शामिल होता है, तो भारत पूरी शक्ति से जवाब देगा। उन्होंने पुष्टि की कि भारत की प्रतिक्रिया पूरी तरह से अपनी शर्तों पर तय होगी। उन्होंने इस निर्णायक रुख का श्रेय देश के सशस्त्र बलों के साहस, वीरता और सतर्कता को दिया। सैनिकों से उनके दृढ़ संकल्प, जुनून और तत्परता को बनाए रखने का आग्रह करते हुए और इस बात पर जोर देते हुए कि भारत को हर समय सतर्क और तैयार रहना चाहिए, प्रधानमंत्री ने यह घोषणा करते हुए अपनी बात का समापन किया कि यह एक नया भारत है- एक ऐसा भारत जो शांति चाहता है लेकिन अगर मानवता को खतरा है तो वह विरोधियों को कुचलने में तनिक भी संकोच नहीं करेगा।

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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर प्रधानमंत्री ने विभाजन पीड़ितों के साहस को किया याद
August 14, 2026
PM shares Sanskrit Subhashitam highlighting the power of hard work and human endeavor

Prime Minister Shri Narendra Modi today stated that as we mark Partition Horrors Remembrance Day, we recall the courage of all those who were impacted by Partition. He noted that it was a moment in history that tore apart several lives, where families were uprooted, loved ones were lost, and immense suffering was endured.

The Prime Minister highlighted that at the same time, overcoming this, people rebuilt their lives from nothing, turned adversity into achievement, and contributed immensely to our nation’s progress. He observed that their life journeys remind us of the strength of the human spirit. Shri Modi expressed hope that this day may deepen our resolve to preserve harmony and brotherhood in our nation and collectively work towards building a Viksit Bharat.

The Prime Minister offered his heartfelt tributes to all those countrymen who, emerging from that horrific period, made invaluable contributions to the progress of the country. He stated that through their courage and capability, they showed how resolutions are accomplished even in adverse circumstances. Shri Modi called upon everyone to further strengthen the national spirit of goodwill and solidarity.

Sharing a Subhashitam, the Prime Minister emphasized that it is through hard work, enterprise, and dedicated effort that diverse arts, science, technological skills, craftsmanship, and innovations flourish, paving the way for success. He added that therefore, one should not remain dependent on fate; rather, one should move steadily towards one's goals with courage, diligence, and persistent effort, for it is human endeavor that shapes destiny.

In a series of posts on X, the Prime Minister wrote:

"Today we mark #PartitionHorrorsRemembranceDay. We recall the courage of all those who were impacted by Partition. It was a moment in history that tore apart several lives…families were uprooted, loved ones were lost and immense suffering was endured.

At the same time, overcoming this, people rebuilt their lives from nothing, turned adversity into achievement and contributed immensely to our nation’s progress. Their life journeys remind us of the strength of the human spirit.

May this day deepen our resolve to preserve harmony and brotherhood in our nation and collectively work towards building a Viksit Bharat."

"विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन सभी देशवासियों का हृदय से नमन, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने अपने साहस और सामर्थ्य से दिखाया कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को सिद्ध किया जाता है। आइए, सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करें।

उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः।
कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति॥”

It is through hard work, enterprise and dedicated effort that diverse arts, science, technological skills, craftsmanship and innovations flourish, paving the way for success. Therefore, one should not remain dependent on fate; rather, one should move steadily towards one's goals with courage, diligence and persistent effort, for it is human endeavor that shapes destiny.