प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 15 दिसंबर, 2020 को गुजरात में कच्छ के ढोर्दो की यात्रा पर जाएंगे और इस दौरान राज्य में कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। इन परियोजनाओं में एक विलवणीकरण संयंत्र, एक हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा पार्क और एक पूर्ण रूप से स्वचालित दूध प्रसंस्करण और पैकिंग संयंत्र शामिल हैं। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भी उपस्थित रहेंगे। प्रधानमंत्री सफेद रण की यात्रा भी करेंगे और उसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल होंगे।

अपने विस्तृत तटवर्ती क्षेत्र का उपयोग करते हुए गुजरात, कच्छ के मांडवी में प्रस्तावित विलवणीकरण संयंत्र के साथ समुद्री जल को पीने के पानी में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। यह संयत्र 10 करोड़ लीटर प्रति दिन की क्षमता (100 एमएलडी) के साथ नर्मदा ग्रिड, सौनी नेटवर्क और अपशिष्ट जल शोधन बुनियादी ढांचे के पूरक के रूप में गुजरात में जल सुरक्षा की स्थिति को मजबूत बनाएगा। यह देश में टिकाऊ और सस्ते जल संसाधन संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। मुंद्रा, लखपत, अबडासा और नखत्राणा तालुका के क्षेत्रों के लगभग 8 लाख लोगों को इस संयंत्र से साफ पीने का पानी मिल सकेगा। भचाऊ, रापर और गांधीधाम के ऊपरी जिले भी इसके बचे हुए पानी का इस्तेमाल कर सकेंगे। यह दाहेज (100 एमएलडी), द्वारका (70 एमएलडी), घोघा भावनगर (70 एमएलडी) और गिर सोमनाथ (30 एमएलडी) के साथ गुजरात के पांच प्रस्तावित विलवणीकरण संयत्रों में से एक होगा।

गुजरात के कच्छ जिले के विगहाकोट गांव के पास हाइब्रिड अक्षय ऊर्जा पार्क देश का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन पार्क होगा। यहां नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन 30 गीगावॉट तक पहुंचेगा। 72,600 हेक्टेयर से भी ज्यादा बड़े क्षेत्र में फैले इस पार्क में पवन और सौर ऊर्जा संचय के लिए एक समर्पित हाइब्रिड पार्क क्षेत्र होगा इसके साथ ही पवन ऊर्जा पार्क की गतिविधियों के लिए भी यहां एक विशेष क्षेत्र होगा।

प्रधानमंत्री कच्छ के सरहद डेयरी अंजार में पूरी तरह से स्वचालित एक दूध प्रसंस्करण और पैकिंग संयंत्र का शिलान्यास भी करेंगे। इस संयंत्र के निर्माण में 121 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसकी प्रति दिन 2 लाख लीटर दूध को संसाधित करने की क्षमता होगी।

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प्रधानमंत्री ने राष्ट्र और मानवता की सेवा में सर्वस्व समर्पण को दर्शाते हुए संस्कृत सुभाषित साझा किया
February 11, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र और मानवता की सेवा में सर्वस्व समर्पण को दर्शाने वाला एक संस्कृत सुभाषित साझा किया:

"यस्येमे हिमवन्तो महित्वा यस्य समुद्रं रसया सहाहुः।

यस्येमाः प्रदिशो यस्य बाहू कस्मै देवाय हविषा विधेम॥"

इसमें कहा गया है कि जिस राष्ट्र की महिमा का वर्णन स्वयं हिमालय करता है, जिसकी कीर्ति नदियों के साथ समुद्र तक प्रवाहित होती है और जिसकी भुजाओं के समान दिशाएं उसे नमन करती हैं, उस राष्ट्र को हम अपना सर्वस्व समर्पित करते हैं।

श्री मोदी ने कहा कि अंत्योदय के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भी इसी भावना के साथ अपना संपूर्ण जीवन देश के हर नागरिक को सशक्त बनाने के लिए समर्पित किया था।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा:

“सर्वस्व समर्पण उस चेतना की अभिव्यक्ति है, जिसमें राष्ट्र और मानवता सर्वोपरि होती है। अंत्योदय के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने भी इसी भावना से देश के जन-जन को सशक्त बनाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

यस्येमे हिमवन्तो महित्वा यस्य समुद्रं रसया सहाहुः।

यस्येमाः प्रदिशो यस्य बाहू कस्मै देवाय हविषा विधेम॥"