प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने मानवता की रक्षा के लिए आदरणीय बापू द्वारा अहिंसा की भावना को दर्शाने वाले संस्कृत में रचित सुभाषितम को साझा किया।

"अहिंसा परमो धर्मस्तथाऽहिंसा परन्तपः।

अहिंसा परमं सत्यं यतो धर्मः प्रवर्तते॥"

सुभाषितम् का तात्‍पर्य है कि अहिंसा सर्वोच्च कर्तव्य है, अहिंसा सर्वोच्च तपस्या है। अहिंसा ही परम सत्य है, जिस भाव को लेकर समस्त धर्मों की रचना हुई है।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर अपनी एक पोस्‍ट में लिखा;

“पूज्य बापू ने मानवता की रक्षा के लिए हमेशा अहिंसा पर बल दिया। इसमें वह शक्ति है, जो बिना हथियार के दुनिया को बदल सकती है।

अहिंसा परमो धर्मस्तथाऽहिंसा परन्तपः।

अहिंसा परमं सत्यं यतो धर्मः प्रवर्तते॥"

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प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए चुनौतियों को पार करने में आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति के महत्व पर बल दिया
March 17, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज संस्कृत में एक सुभाषितम का पाठ किया, जिसमें जीवन की सबसे कठिन बाधाओं को दूर करने में आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति के महत्व का उल्‍लेख किया गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि साहस और दृढ़ संकल्प से परिपूर्ण व्यक्ति के लिए जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है। श्री मोदी ने कहा कि हम इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के बल पर सर्वाधिक कठिन चुनौतियों पर भी विजय प्राप्त कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर पोस्‍ट में लिखा;

"जो व्यक्ति साहस और संकल्प से भरा हो, उसके लिए जीवन में कुछ भी असंभव नहीं। आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति के बल पर हम कठिन से कठिन चुनौतियों को पार कर सकते हैं।

एकोऽपि सिंहः साहस्रं यूथं मथ्नाति दन्तिनाम् ।
तस्मात् सिंहमिवोदारमात्मानं वीक्ष्य सम्पतेत्॥"

जिस प्रकार एक शेर में हजार हाथियों को हराने की शक्ति होती है, उसी प्रकार एक व्यक्ति को शेर की तरह निडरता, साहस, आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति के साथ नेक कार्यों में संलग्न होना चाहिए।