प्रधानमंत्री ने आपदा प्रतिरोधी क्षमता को मजबूत करने हेतु 5 प्रमुख वैश्विक प्राथमिकताओं को रेखांकित किया
भारत ने सुनामी चेतावनी प्रणाली स्थापित की जिससे 29 देशों को लाभ होगा: प्रधानमंत्री
भारत छोटे द्वीपीय विकासशील देशों को बड़े महासागरीय देशों के रूप में मान्यता देता है और उनकी कमजोरियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल देता है: प्रधानमंत्री
पूर्व चेतावनी प्रणाली और समन्वय को मजबूत करना महत्वपूर्ण है: प्रधानमंत्री
आपदाओं से उबरने संबंधी सीख एवं सर्वोत्तम तरीकों का एक वैश्विक डिजिटल संग्रह पूरी दुनिया के लिए लाभकारी होगा: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय आपदा रोधी अवसंरचना सम्मेलन 2025 को संबोधित किया। सभा को संबोधित करते हुए, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आपदा रोधी अवसंरचना सम्मेलन 2025 में भाग लेने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया। यह सम्मेलन यूरोप में पहली बार आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने इस आयोजन में सहयोग के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति महामहिम श्री इमैनुएल मैक्रों और फ्रांस सरकार का आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने आगामी संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन के लिए भी अपनी शुभकामनाएं दीं।

इस सम्मेलन के विषय ‘तटीय क्षेत्रों के लिए एक सुदृढ़ भविष्य को आकार देना’ पर प्रकाश डालते हुए, श्री मोदी ने प्राकृतिक आपदाओं एवं जलवायु परिवर्तन के प्रति तटीय क्षेत्रों व द्वीपों की संवेदनशील स्थिति को रेखांकित किया। उन्होंने भारत और बांग्लादेश में चक्रवात रेमल, कैरिबियन में तूफान बेरिल, दक्षिण-पूर्व एशिया में तूफान यागी, संयुक्त राज्य अमेरिका में तूफान हेलेन, फिलीपींस में तूफान उसागी और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में चक्रवात चिडो सहित हाल की विभिन्न आपदाओं का हवाला दिया। श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि इन आपदाओं ने जान-माल को काफी नुकसान पहुंचाया है, जिससे प्रतिरोधी अवसंरचना और सक्रिय आपदा प्रबंधन की आवश्यकता को बल मिलता है।

वर्ष 1999 के भीषण चक्रवात और 2004 की सुनामी सहित विभिन्न विनाशकारी आपदाओं से जुड़े भारत के पिछले अनुभवों को याद करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे भारत ने सुदृढ़ता के साथ अनुकूलन एवं पुनर्निर्माण किया, संवेदनशील क्षेत्रों में चक्रवात संबंधी आश्रयों का निर्माण किया और 29 देशों को लाभान्वित करने वाली सुनामी चेतावनी प्रणाली की स्थापना में योगदान दिया।

आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन (सीडीआरआई) द्वारा 25 छोटे द्वीपीय विकासशील देशों के साथ मिलकर आपदा रोधी घरों, अस्पतालों, स्कूलों, ऊर्जा प्रणालियों, जल सुरक्षा के उपायों और पूर्व चेतावनी प्रणालियों के निर्माण के लिए जारी कार्यों को रेखांकित करते हुए, श्री मोदी ने प्रशांत, हिंद महासागर एवं कैरीबियाई क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति की सराहना की और गठबंधन में अफ्रीकी संघ की भागीदारी का स्वागत किया। प्रमुख वैश्विक प्राथमिकताओं की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए, प्रधानमंत्री ने 5 प्रमुख विषयों को रेखांकित किया। पहला, भविष्य की चुनौतियों से निपटने हेतु कुशल कार्यबल तैयार करने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा में आपदा रोधी पाठ्यक्रमों, मॉड्यूल एवं कौशल विकास के कार्यक्रमों को समन्वित करने का महत्व। दूसरा, उन्होंने आपदाओं का सामना करने वाले और सुदृढ़ता के साथ पुनर्निर्माण करने वाले देशों से प्राप्त सर्वोत्तम तरीकों और सीखों का दस्तावेजीकरण करने के हेतु एक वैश्विक डिजिटल संग्रह की आवश्यकता पर बल दिया। श्री मोदी ने आपदा से निपटने के लिए नवोन्मेषी वित्तपोषण की आवश्यकता पर जोर दिया तथा उन्होंने विकासशील देशों को आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने के लिए कार्यान्वित करने योग्य कार्यक्रम बनाने को तीसरी प्राथमिकता बताया। चौथा, प्रधानमंत्री ने छोटे द्वीपीय विकासशील देशों को बड़े महासागरीय देशों के रूप में मान्यता देने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया तथा उनकी कमजोरियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। पांचवीं प्राथमिकता का उल्लेख करते हुए, श्री मोदी ने पूर्व चेतावनी प्रणाली एवं समन्वय को मजबूत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला और समय पर निर्णय लेने एवं अंतिम छोर तक प्रभावी संचार की सुविधा स्थापित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस सम्मेलन में होने वाली चर्चाओं में इन आवश्यक पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने विकास में सुदृढ़ता की आवश्यकता पर बल देते हुए कठिन परिस्थितियों में स्थिर बनी रहने वाली अवसंरचना के निर्माण का आह्वान किया। उन्होंने दुनिया के लिए एक मजबूत और आपदा-प्रतिरोधी भविष्य के निर्माण की दिशा में वैश्विक प्रयासों का आग्रह करते हुए अपने संबोधन का समापन किया।

 

पूरा भाषण पढ़ने के लिए यहां क्लिक कीजिए

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
PM Modi hails India’s ‘Mission Drishti’ launch as ‘world’s first OptoSAR satellite’ enters orbit

Media Coverage

PM Modi hails India’s ‘Mission Drishti’ launch as ‘world’s first OptoSAR satellite’ enters orbit
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
प्रधानमंत्री ने उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन जी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं
May 04, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन जी को आज उनके जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उपराष्ट्रपति विकसित भारत के सामूहिक स्वप्न को सुदृढ़ बनाने की दिशा में बहुआयामी प्रयास कर रहे हैं। श्री मोदी ने कहा कि संसदीय कार्यवाही की उत्पादकता और प्रभावशीलता बढ़ाने के उनके निरंतर प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सर्वांगीण विकास के प्रति उपराष्ट्रपति का अटूट समर्पण और गरीबों एवं वंचितों के प्रति उनकी चिंता भी उतनी ही प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि उनका सार्वजनिक जीवन समर्पण, अनुशासन और स्पष्ट उद्देश्य की भावना से प्रेरित है। श्री मोदी ने उपराष्ट्रपति के अच्छे स्वास्थ्य, सुख और राष्ट्र की सेवा में निरंतर रत रहते हुए उनके दीर्घायु होने की कामना की।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर अपनी पोस्ट में लिखा:

उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। वे विकसित भारत के हमारे सामूहिक स्वप्न को साकार करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। संसदीय कार्यवाही की उत्पादकता और प्रभावशीलता बढ़ाने के उनके प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। गरीबों और वंचितों के प्रति चिंता के साथ सर्वांगीण विकास के प्रति उनका पूर्ण उत्साह भी उतना ही प्रेरणादायक है। उनका सार्वजनिक जीवन समर्पण, अनुशासन और स्पष्ट उद्देश्यबोध से प्रेरित है। मैं उनके अच्छे स्वास्थ्य, सुख और राष्ट्र की सेवा निरंतर रत रहते हुए उनके दीर्घायु होने की कामना करता हूं।