कई देशों के लीडर, इंडस्ट्री लीडर, इनोवेटर और स्टार्ट-अप सेक्टर से जुड़े लोग AI इम्पैक्ट समिट के लिए भारत मंडपम में एक साथ आए: पीएम मोदी
AI इम्पैक्ट समिट में, दुनिया को AI के क्षेत्र में भारत की अद्भुत क्षमताएं देखने को मिलीं: पीएम मोदी
भारतीय जहां भी जाते हैं, वे अपनी मातृभूमि की जड़ों से जुड़े रहते हैं और अपनी कर्मभूमि, यानी जिस देश में वे रहते और काम करते हैं, उसके विकास में योगदान देते हैं: पीएम मोदी
आजकल भारत में अंगदान के बारे में जागरूकता लगातार बढ़ रही है। इससे उन लोगों की मदद हो रही है जिन्हें इसकी जरूरत है: पीएम मोदी
आज देश गुलामी की निशानियों को पीछे छोड़ रहा है और भारतीय संस्कृति से जुड़ी निशानियों को महत्व देने लगा है: पीएम मोदी
'राजाजी उत्सव' (23 फरवरी) के अवसर पर, राष्ट्रपति भवन के केन्द्रीय प्रांगण में सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा: पीएम मोदी
आजकल पेंशन, सब्सिडी, इंश्योरेंस, UPI, सब कुछ बैंक अकाउंट से जुड़ा हुआ है: पीएम मोदी
OTP, आधार नंबर या बैंक अकाउंट की जानकारी किसी के साथ शेयर न करें। और सबसे जरूरी बात, समय-समय पर अपना पासवर्ड बदलते रहें: पीएम मोदी
मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि हमारे किसान अब सिर्फ प्रोडक्शन पर ही नहीं, बल्कि क्वालिटी, वैल्यू एडिशन और नए मार्केट पर भी ध्यान दे रहे हैं: पीएम मोदी
चाहे महाकुंभ हो या केरल कुंभ, यह केवल स्नान का पर्व नहीं है। यह स्मृति का जागरण है: पीएम मोदी
उत्तर से दक्षिण तक, नदियां भले अलग हों, किनारे भले अलग हों, पर आस्था की धारा एक ही है - यही भारत है: पीएम मोदी
अम्मा जयललिता का जिक्र होते ही, तमिलनाडु के लोगों के चेहरे खिल उठते हैं। हमारी नारी शक्ति का जुड़ाव तो उनसे और विशेष रहा है: पीएम मोदी

मेरे प्यारे देशवासियो,

नमस्कार | ‘मन की बात’ में आपका स्वागत है, अभिनंदन है | ‘मन की बात’ देश और देशवासियों की उपलब्धियों को सामने लाने का एक मजबूत प्लेटफॉर्म है | देश ने ऐसी ही उपलब्धि, अभी दिल्ली में हुई Global AI Impact Summit के दौरान देखी | कई देशों के नेता, उद्योग जगत के leaders, Innovators और Start-Up sector से जुड़े लोग, AI Impact Summit के लिये भारत मंडपम में एकत्र हुए | आने वाले समय में AI की शक्ति का उपयोग दुनिया किस प्रकार करेगी, इस दिशा में यह summit एक turning point साबित हुई है |

साथियो,

Summit में मुझे World Leaders और Tech CEOs से मिलने का भी अवसर मिला | AI summit की exhibition में मैंने World Leaders को ढ़ेर सारी चीजें दिखाई | मैं दो बातों का विशेष रूप से उल्लेख करना चाहता हूँ | Summit में इन दो products ने दुनिया भर के leaders को बहुत प्रभावित किया | पहला product अमूल के booth पर था | इसमें बताया गया कि कैसे AI जानवरों का इलाज करने में हमारी मदद कर रही है और कैसे 24x7 AI assistance की मदद से किसान अपनी डेयरी और जानवर का हिसाब रखते हैं |

साथियो,

दूसरा product हमारी संस्कृति से संबंधित था | दुनिया भर के leaders ये देखकर हैरत में पड़ गए कि कैसे AI की मदद से हम हमारे प्राचीन ग्रंथों को, हमारे प्राचीन ज्ञान को, हमारी पांडुलिपियों को संरक्षित कर रहे हैं, आज की generation के अनुरूप ढ़ाल रहे हैं |

साथियो,

Exhibition के दौरान display के लिये सुश्रुत संहिता का चयन किया गया | पहले step में दिखाया गया कि कैसे technology की मदद से हम पांडुलिपियों की image quality सुधारकर उन्हें पढ़ने लायक बना रहे हैं | Second step में इस image को मशीन के पढ़ने लायक text में बदला गया | अगले step में machine-readable text को एक AI अवतार ने पढ़ा | और फिर, अगले step में हमने ये भी दिखाया कि कैसे technology से ये अनमोल भारतीय ज्ञान Indian languages और विदेशी भाषाओं में translate किया जा सकता है | भारत के प्राचीन ज्ञान को आधुनिक अवतार के माध्यम से जानने में World Leaders ने बहुत दिलचस्पी दिखाई |

साथियो,

इस summit में दुनिया को AI के क्षेत्र में भारत की अद्भुत क्षमताएँ देखने को मिली हैं | इस दौरान भारत ने तीन Made In India AI Model भी launch किए | यह अपने आप में अब तक की सबसे बड़ी AI summit रही है | इस summit को लेकर युवाओं का जोश और उत्साह देखते ही बन रहा था | मैं सभी देशवासियों को इस summit की सफलता की बधाई देता हूँ |

साथियो,

मैं अक्सर कहता हूँ ‘जो खेले-वो खिले’ | खेल हमें जोड़ता भी है | आजकल आप T-20 world cup के मैच देख रहे होंगे | और मुझे पक्का विश्वास है कि मैच देखते हुए कई बार आँखें किसी खास खिलाड़ी पर टिक जाती होंगी | Jersey किसी और देश की होती है लेकिन नाम सुनकर लगता है कि अरे, ये तो अपने देश का है | तब दिल के किसी कोने में एक हल्की सी खुशी आती है | क्योंकि वो खिलाड़ी भारतीय मूल का होता है और वो उस देश के लिये खेल रहा होता है जहां उसका परिवार बस गया है | वे अपने-अपने देशों की jersey पहनकर मैदान में उतरते हैं, पूरे मन से उस देश का प्रतिनिधित्व करते हैं | Canada की टीम में सबसे ज्यादा भारतीय मूल के खिलाड़ी हैं | टीम के कप्तान दिलप्रीत बाजवा का जन्म पंजाब के गुरदासपुर में हुआ था | नवनीत धालीवाल चंडीगढ़ के हैं | इस list में हर्ष ठाकर, श्रेयस मोवा जैसे कई नाम हैं, जो Canada के साथ-साथ भारत का भी गौरव बढ़ा रहे हैं | America की टीम में कई चेहरे भारत के घरेलू क्रिकेट से निकले हुए हैं | अमेरिकी टीम के कप्तान मोनांक पटेल गुजरात की under-16 और under-18 टीम के लिये भी खेल चुके हैं | मुंबई के सौरभ, हरमीत सिंह, दिल्ली के मिलिंद कुमार, ये सब अमेरिकी टीम की शान हैं | Oman की टीम में आज कई चेहरे हैं जो पहले भारत के अलग-अलग राज्यों में खेल चुके हैं | जतिंदर सिंह, विनायक शुक्ला, करन, जय, आशीष जैसे खिलाड़ी Oman क्रिकेट की मजबूत कड़ी हैं | New Zealand, UAE और Italy की टीमों में भी भारतीय मूल के खिलाड़ी अपनी जगह बना रहे हैं | ऐसे कितने ही भारतीय मूल के खिलाड़ी हैं जो अपने देश का गौरव बढ़ा रहे हैं | वहाँ के युवाओं के लिये प्रेरणा बन रहे हैं | भारतीयता की यही तो विशेषता है | भारतीय जहां भी जाते हैं अपनी मातृभूमि की जड़ों से जुड़े रहते हैं | और अपनी कर्मभूमि यानि जिस देश में रहते हैं उसके विकास में भी सहयोग करते हैं |

मेरे प्यारे देशवासियो,

किसी भी माता-पिता के लिए अपने बच्चे को खोने से बड़ा दु:ख कुछ और हो ही नहीं सकता । छोटे से बच्चे को खोने का दुख तो और भी गहरा होता है । कुछ ही दिन पहले हमने केरला की एक नन्ही मासूम आलिन शेरिन अब्राहम को खो दिया है । महज 10 महीनों में वो इस दुनिया से चली गई । कल्पना कीजिए- उसके सामने पूरी जिंदगी थी, जो अचानक खत्म हो गई । कितने ही सपने और खुशियां अधूरी रह गई । उसके parents जिस पीड़ा से गुजर रहे होंगे, उसे शब्दों से व्यक्त नहीं किया जा सकता है । लेकिन इतने गहरे दर्द के बीच भी आलिन के पिता अरुण अब्राहम और माँ शेरिन ने एक ऐसा फैसला लिया, जिससे हर देशवासी का हृदय उनके प्रति सम्मान से भर गया है । उन्होंने आलिन के अंगदान का फैसला किया । इस एक फैसले से पता चलता है कि उनकी सोच कितनी बड़ी है और व्यक्तित्व कितना विशाल । एक तरफ वे अपनी बच्ची को खोने के शोक में डूबे थे, तो वहीं दूसरों की मदद का भाव भी उनमें भरा था । वे चाहते थे कि किसी भी परिवार को ऐसा दिन देखना ना पड़े । आलिन शेरिन अब्राहम आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसका नाम देश के कम उम्र की organ donors में जुड़ गया है । साथियो, इन दिनों भारत में organ donation को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ रही है। इससे उन लोगों की मदद हो रही है, जिन्हें इसकी जरूरत है । इसके साथ ही देश में medical research को भी बल मिल रहा है । इस दिशा में कई संस्थाएँ और लोग असाधारण कार्य कर रहे हैं।

साथियो,

केरला की आलिन की तरह ही ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्होंने organ donation के जरिए, किसी को दूसरा जीवन दिया है । जैसे दिल्ली की लक्ष्मी देवी जी हैं । उन्होंने बीते वर्ष केदारनाथ की यात्रा की । इसके लिए उन्हें 14 किलोमीटर की ट्रैकिंग करनी पड़ी । आपको ये जानकर हैरानी होगी कि उन्होंने यह यात्रा heart transplant के बाद की । उनका heart केवल 15 प्रतिशत ही काम कर रहा था । ऐसे में उन्हें एक donor का heart मिला, जिसकी मृत्यु हो गई थी । इसके बाद तो उनका जीवन ही बदल गया । पश्चिम बंगाल के गौरांग बनर्जी दो बार नाथू-ला गए हैं । ये समुन्द्र तल से 14 हजार फीट की ऊंचाई पर है । और खास बात ये है कि उन्होंने यह उपलब्धि lung transplant के बाद हासिल की । राजस्थान में सीकर के रामदेव सिंह जी को kidney transplant कराना पड़ा था । आज वे sporting activity में कमाल कर रहे हैं ।

साथियो,

आपको इस तरह के बहुत से प्रेरक उदाहरण देखने को मिल जाएंगे । इससे ये बात फिर साबित होती है कि किसी एक की नेक पहल, ना जाने कितने लोगों की जिंदगी बदल सकती है । मैं उन सभी लोगों की हृदय से सराहना करता हूं, जिन्होंने ऐसे नेक कार्य किए हैं ।

मेरे प्यारे देशवासियो,

आज़ादी के अमृत महोत्सव के दौरान मैंने लाल किले से पंच प्राणों की बात कही थी । उनमें से एक है, गुलामी की मानसिकता से मुक्ति । आज देश गुलामी के प्रतीकों को पीछे छोड़कर भारत की संस्कृति से जुड़ी चीजों को महत्व देने लगा है । इस दिशा में हमारे राष्ट्रपति भवन ने भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है । कल यानि 23 फरवरी को राष्ट्रपति भवन में ‘राजाजी उत्सव’ मनाया जाएगा । इस अवसर पर राष्ट्रपति भवन के केन्द्रीय प्रांगण में सी. राजगोपालाचारी जी की प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा । वे स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर जनरल थे । वे उन लोगों में थे, जिन्होंने सत्ता को पद की तरह नहीं, सेवा की तरह देखा । सार्वजनिक जीवन में उनका आचरण, आत्मसंयम और स्वतंत्र चिंतन, आज भी हमें प्रेरित करता है । दुर्भाग्य से, आजादी के बाद भी राष्ट्रपति भवन में ब्रिटिश प्रशासकों की मूर्तियां तो लगी रहने दी गईं, लेकिन देश के महान सपूतों को जगह नहीं दी गई । British architect Edwin Lutyens की प्रतिमा भी राष्ट्रपति भवन में लगी हुई थी । अब इस प्रतिमा के स्थान पर राजाजी की प्रतिमा लगाई जाएगी । राजाजी उत्सव के दौरान राजगोपालाचारी जी पर आधारित प्रदर्शनी भी लगेगी । ये प्रदर्शनी 24 फरवरी से 1 मार्च तक चलेगी । मौका निकालकर आप भी इसे देखने जरूर जाइएगा ।

मेरे प्यारे देशवासियो,

‘मन की बात’ में, मैंने आपसे Digital Arrest पर विस्तार से बात की है | इसके बाद देश में Digital Arrest और Digital Fraud को लेकर हमारे समाज में काफी जागरूकता आई, लेकिन अभी भी हमारे आसपास ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जो अक्षम्य हैं | निर्दोष लोगों को Digital Arrest और Financial Fraud का निशाना बनाया जा रहा है | कई बार पता चलता है कि किसी Senior Citizen की जीवनभर की कमाई ठग ली गई | कभी किसी उन पैसों की ठगी हो जाती है, जो उसने बच्चों की फीस जमा करने के लिए बचाए थे | कारोबारियों से धोखाधड़ी की खबरें भी हमें देखने को मिलती हैं | कोई फोन करता है और कहता है – मैं एक बड़ा अधिकारी हूं | आपको कुछ details share करनी होगी | इसके बाद भोले-भाले लोग ऐसा ही कर बैठते हैं | इसीलिए, आपका सतर्क रहना, जागरूक रहना बेहद जरूरी है |

साथियो,

आप सभी KYC – Know Your Customer यानि अपने ग्राहक को जानें, इस process को तो जानते ही होंगे | कभी-कभी, जब आपको आपके बैंक से KYC update या re-KYC करवाने के message आते हैं, तो मन में सवाल उठता है – मैंने तो पहले ही KYC करवा रखी है, तो ये फिर क्यों ? मेरा आपसे आग्रह है, झुंझलाइए नहीं, ये आपके पैसे की सुरक्षा के लिए ही है | हम सभी जानते हैं कि आजकल pension, subsidy, बीमा, UPI सब कुछ बैंक खाते से जुड़ा है | इसी वजह से बैंक समय-समय पर re-KYC करते हैं, ताकि आपका bank account सुरक्षित रहे | हां, इसमें भी आपको एक बात याद रखनी है | जो अपराधी हैं, वो फर्जी call करते हैं, SMS और link भेजते हैं | इसीलिए हमें सतर्क रहना है और ऐसे धोखेबाजों के झांसे में नहीं आना है | KYC या re-KYC केवल अपने बैंक की शाखा या आधिकारिक App और authorised medium से ही कराएं | OTP, आधार नंबर या बैंक खाते संबंधी जानकारी किसी को भी न दें और सबसे अहम बात, अपने password को समय-समय पर जरूर बदलते रहें | जैसे हर मौसम के साथ खान-पान बदल जाता है, पहनावा भी बदल जाता है, वैसे ही नियम बना लीजिए कि हर कुछ दिन में आपको अपना password भी बदल लेना है |

साथियो,

हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने इन्हीं विषयों पर वित्तीय साक्षरता सप्ताह का आयोजन किया था | वित्तीय साक्षरता का ये अभियान अब पूरे वर्ष जारी रहेगा | इसलिए भारतीय रिजर्व बैंक के message का ध्यान रखें और अपनी KYC updated रखें |
याद रखिए –
सही KYC, समय पर re-KYC करे खाता सुरक्षित,
बनें सशक्त नागरिक,
क्योंकि सशक्त नागरिकों से ही बनता है मजबूत और आत्मनिर्भर भारत|

मेरे प्यारे देशवासियो,

हमारे किसान केवल अन्नदाता नहीं हैं | वे धरती के सच्चे साधक हैं | मिट्टी को सोना बनाना क्या होता है, ये कोई हमारे किसानों से सीखे और हमारा आज का किसान तो परंपरा और technology, दोनों को साथ लेकर चल रहा है और मुझे ये देखकर खुशी होती है कि हमारे किसान अब सिर्फ उत्पादन नहीं, बल्कि गुणवत्ता, value addition और नए बाजारों पर भी ध्यान दे रहे हैं | ओडिशा में हिरोद पटेल नाम के एक युवा किसान से जुड़ी जानकारी वाकई बहुत प्रेरक है | करीब आठ साल पहले तक वे अपने पिता शिव शंकर पटेल के साथ पारंपरिक ढ़ंग से धान की खेती करते थे लेकिन उन्होंने खेती को नए नजरिये से देखना शुरू किया | अपने खेत के तालाब के ऊपर उन्होंने मजबूत जालीदार ढांचा बनाया | उस पर बेल वाली सब्जियां उगाई, तालाब के चारों ओर केले, अमरूद और नारियल लगाए और तालाब में मछली पालन भी शुरू किया | यानि एक ही जगह – पारंपरिक खेती भी हो रही है, सब्जी भी, फल भी, मछली भी | इससे जमीन का बेहतर उपयोग हुआ, पानी की बचत हुई और अतिरिक्त आमदनी भी मिली | आज दूर-दूर से किसान उनका model देखने आते हैं |

साथियो,

केरला के त्रिसूर जिले में एक गांव ऐसा है, जहां एक ही खेत में 570 तरह की धान की किस्में लगाई जाती हैं | इसमें स्थानीय किस्में भी हैं, हर्बल किस्में भी हैं और दूसरे राज्यों से लाई गई प्रजातियां भी हैं | ये केवल खेती नहीं, बीजों की विरासत को बचाने का महा अभियान है | हमारे किसानों की मेहनत का असर आंकड़ों में भी दिख रहा है | भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बन चुका है | 15 करोड़ टन से अधिक चावल का उत्पादन, ये छोटी उपलब्धि नहीं है | हम अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं और दुनिया की food basket में योगदान भी दे रहे हैं |

साथियो,

अब तो कृषि उत्पाद हवाई मार्ग से भी ज्यादा आसानी से विदेश पहुंच रहे हैं | कर्नाटका के नंजनगुड केले, मैसूरु पान के पत्ते और इंडी नींबू को मालदीव भेजा गया | ये उत्पाद अपने स्वाद और गुणवत्ता के लिए जाने जाते हैं और इन्हें GI टैग भी मिला है | आज का किसान quality भी चाहता है, quantity भी बढ़ा रहा है और अपनी पहचान भी बना रहा है |

मेरे प्यारे देशवासियो,

पिछले वर्ष, इसी समय महाकुंभ की अद्भुत तस्वीरें आपको जरूर याद होंगी | संगम के तट पर उमड़ता जनसागर, आस्था का अथाह प्रवाह और स्नान के उस पावन क्षण में, जैसे भारत अपनी सनातन चेतना से साक्षात्कार कर रहा था | साथियो, महाकुंभ की वही धारा, वही माघ का महीना, वही श्रद्धा का स्वर, जब उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ता है, तो एक नई पहचान ले लेता है |

साथियो,

केरला की धरती पर, भारतप्पुझा नदी के किनारे तिरुनावाया में सदियों पुरानी एक परंपरा रही है – मामंगम | इसे कई लोग महा माघ महोत्सव या केरला कुम्भ भी कहते हैं | माघ के महीने में पवित्र नदी में स्नान और उस क्षण को जीवन का अमिट स्मरण बना लेना, यही इसकी आत्मा है | समय के साथ यह परंपरा जैसे ओझल हो गई थी | करीब ढ़ाई-सौ वर्षों तक यह आयोजन उसी भव्यता में नहीं हुआ था जैसे पहले हुआ करता था | लेकिन आज अपनी विरासत को फिर से पहचान रहे हमारे देश में इतिहास ने फिर करवट ली है | इस बार बिना किसी बड़ी घोषणा के केरला कुम्भ का सफल आयोजन हुआ | लोगों ने इसके बारे में एक ने दूसरे को बताया, कानों-कान बात पहुँचती गई और देखते ही देखते श्रद्धालु तिरुनावाया पहुँचने लगे |

साथियो,

महाकुंभ हो या केरला कुम्भ, यह केवल स्नान का पर्व नहीं है | यह स्मृति का जागरण है | यह संस्कृति का पुनरस्मरण है | उत्तर से दक्षिण तक, नदियां भले अलग हों, किनारे भले अलग हों, पर आस्था की धारा एक ही है - यही भारत है |

साथियो,

हमारे देश में ऐसे लोग हमेशा जनता के दिलों में बसे रहते हैं जिन्होंने समाज के कल्याण के लिए काम किया होता है, जिन्होंने अपने नेक कार्यों में जनता को प्राथमिकता दी होती है | अम्मा जयललिता जी, ऐसी ही एक लोकप्रिय लीडर थीं | 24 फरवरी उनके जन्मदिन का अवसर होता है | तमिलनाडु के लोगों का उनसे लगाव कितना गहरा था, यह मुझे आज भी राज्य के दौरे में दिखता है | अम्मा जयललिता जी का जिक्र होते ही, तमिलनाडु के लोगों के चेहरे खिल उठते हैं | हमारी नारी शक्ति का जुड़ाव तो उनसे और विशेष रहा है | ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि सरकार में रहते हुए उन्होंने माताओं-बहनों और बेटियों के लिए कई सराहनीय प्रयास किये | राज्य में कानून-व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए भी उन्होंने बहुत ठोस कदम उठाए थे | देशभक्ति की भावना उनमें कूट-कूट कर भरी थी | इसके साथ ही भारत की सांस्कृतिक विरासत पर उन्हें बहुत गर्व था | अम्मा जयललिता जी के साथ हुई हर मुलाकात, हर प्रकार की बातचीत मेरे मन में आज भी ताजा है | वे गुजरात में 2002 और 2012 में हुए मेरे दो शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल हुई थीं | जब हम दोनों अपने-अपने राज्य में मुख्यमंत्री थे, तब good governance जैसे विषयों पर अक्सर हमारे बीच बातचीत होती रहती थी | उनकी सोच बिल्कुल स्पष्ट थी और विचार बेहद सुलझे हुए | यह उनकी एक बड़ी खासियत थी | कई वर्ष पहले उन्होंने पोंगल के पावन अवसर पर मुझे lunch के लिए चेन्नई आमंत्रित किया था | स्नेह से भरा उनका वो भाव मेरे लिए अविस्मरणीय रहेगा | एक बार फिर मैं उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं |
जयललिता अवरगलक्क,
येन निनैवाजंलि-गल,
समुदायत्तिर्क्कु,
अवर आट्रिय सेवै येंड्रूम निनैविल इरुक्कुम |
(English Translation: My tributes to Jayalalitha,
Her services to the people will always be remembered.)

मेरे प्यारे देशवासियो,

अब मैं बात करूंगा अपने प्यारे, छोटे होनहार बच्चों से, उन बच्चों से जिनका इस समय exam चल रहा है | मुझे उम्मीद है, आपने इस महीने की शुरुआत में ‘परीक्षा पे चर्चा’ देखी होगी और आपको उससे कुछ सीखने को भी मिला होगा | लेकिन, मैं फिर भी पूछूँगा पढ़ाई की ज्यादा tension तो नहीं ले रहे हैं न आप ?

मेरे प्यारे बच्चो,

आप तो exam warriors हैं | मुझे विश्वास है, आप सभी पूरे मन से इम्तिहान की तैयारियों में लगे होंगे | हाँ, ऐसे समय में मन में थोड़ी शंका आना भी स्वाभाविक है | कभी लगता है, सब याद रहेगा या नहीं रहेगा | कभी लगता है, समय कम तो नहीं पड़ जाएगा ना ! ये भाव हर पीढ़ी के बच्चों ने महसूस किए हैं, आप अकेले नहीं हैं | आप याद रखिए, आपका मूल्य आपकी mark sheet से तय नहीं होता | इसलिए खुद पर भरोसा रखिए | जो पढ़ा है, उसे पूरे मन से लिखिए | और जो नहीं आया, उस एक सवाल को अपने मन पर हावी मत होने दीजिए | और एक बात, अपने माता-पिता और शिक्षकों से बात करते रहिए | वे आपके नंबरों से नहीं, आपके प्रयास से आपकी पहचान करते हैं, वो आपकी मेहनत से खुश रहते हैं | मुझे पूरा भरोसा है कि आप परीक्षा में भी सफल होंगे और अपने जीवन में भी सफलता की नई ऊंचाई प्राप्त करेंगे |

साथियो,

इन दिनों रमजान चल रहा है | मैं इस पवित्र महीने के लिए सभी को शुभकामनाएं देता हूँ | कुछ ही दिनों बाद होली का पर्व भी आ रहा है | यानि रंग, गुलाल और हंसी-खुशी से भरा समय दस्तक देने वाला है | आप सभी अपने परिवार और अपनों के साथ खुशी के साथ सारे त्योहार मनाएं | और हाँ, कुछ मंत्र हमेशा याद रखें, जैसे vocal for local. हमारे होली के त्योहारों में या अन्य कोई भी त्योहार में अनेक ऐसे साजो-सामान घुस गए हैं, जो विदेशी हैं | इन्हें त्योहारों से दूर रखिए, होली से भी दूर रखिए, स्वदेशी अपनाइये | जब आप स्वदेशी खरीदते हैं तो देश को आत्मनिर्भर बनाने के अभियान में भी मदद करते हैं |

साथियो,

मुझे हर महीने ‘मन की बात’ के लिए आपके ढ़ेरों सुझाव मिलते हैं | आपके भेजे गए संदेशों से हमें देश के कोने-कोने में छिपी अद्भुत प्रतिभाओं के बारे में पता चलता है | निजी स्वार्थ से उठकर समाज के लिए कुछ करने की अनेक प्रेरणादायी गाथाएं आपके माध्यम से देशभर के लोगों तक पहुंची हैं | आप ऐसे ही अपने प्रयास जारी रखें | मुझे आपके संदेशों का इंतजार रहेगा | मैं एक बार फिर आपको और आपके परिवार को आने वाले त्योहारों की अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूँ |

बहुत-बहुत धन्यवाद |

नमस्कार |

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August 21, 2026
The world sees India as a bright spot for growth and hope: PM
Today, India is implementing next-generation reforms at the policy level and undertaking reforms at governance level: PM
Increasing production was met with punishment earlier but today, our government is providing incentives for boosting production
India has political stability and continuity in its policies: PM
Earlier, the approach of regulations was, 'prohibited unless permitted’; We are changing this approach and taking it towards 'permitted unless prohibited’: PM
The relationship between the government and citizens should be based on trust, not suspicion: PM
Today, we are shaping policies that are pro-people, pro-growth and pro-development: PM

World Leaders Forum का ये प्रतिष्ठित मंच, Business और Industry की दुनिया के सभी जाने माने दिग्गज, पॉलिसी मेकर्स, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों।

आप सबके बीच आकर के खुश होना बहुत स्वाभाविक भी है। इस साल समिट का फोकस Shared Future पर है। पिछले कुछ वर्षों में दुनिया ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं। और इन अनुभवों ने एक बात बहुत स्पष्ट कर दी है, कोई चाहे या ना चाहे, हर देश का भविष्य, उसका फ्यूचर, एक-दूसरे से जुड़ा हुआ ही है, Isolation में कुछ संभव नहीं है। इसीलिए Shared Futures की ये theme, आज और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है। और भारत तो हमेशा से इसी भावना को लेकर चला है। जी-20 की अध्यक्षता में इसलिए ही भारत का मंत्र रहा, One Earth, One Family, One Future. Shared Future की ये भावना और इसके साथ जुड़ा दायित्वबोध, 21वीं सदी के इस विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान देता है।

साथियों,

आज दुनिया में growth को लेकर के कई तरह की चिंताएं हैं। दुनिया ने बड़ा भयंकर एक रूप देखा है इन दिनों। Resources का वेपनाइजेशन हो रहा है। अविश्वास का वातावरण विश्व के लिए अनेक नई चुनौतियां लेकर के आ रहा है। लेकिन ऐसे समय में भी, दुनिया भारत को growth और hope के bright spot के रूप में देख रही है। भारत ने पिछले 10-12 साल में अपनी 25 करोड़ आबादी को गरीबी से बाहर निकाला है। इतना ही नहीं, अगर आने वाले दिनों की चर्चा करें, तो IMF का forecast है कि भारत दुनिया की fastest growing major economy बना रहेगा। और भारत निरंतर वो कदम उठा रहा है, जो उसके विकास को गति दे रहे हैं।

Friends,

अभी पिछले हफ्ते ही, 15 अगस्त को मैंने लाल किले से सप्त-धारा की सप्त-शक्तियों की बात की है। मैन्यूफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, फूड प्रोसेसिंग, ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी समेत, मैंने ऐसे सात सेक्टर्स की बात की है, जिन पर भारत का आज बहुत ज्यादा फोकस है। और इसलिए भारत आज, Policy level पर, नेक्स्ट जनरेशन reforms कर रहा है, ताकि हमारा future सुरक्षित हो। Governance पर reforms कर रहा है, Ease of Living के लिए reforms कर रहा है। पिछली बार जब मैं इसी मंच के माध्यम से आपसे जुड़ा था, तब भी मैंने कहा था, ये Reforms हमारे लिए Compulsion नहीं है। ये हमारा commitment है, ये हमारा conviction है।

साथियों,

2014 में, जब हमारी सरकार बनी, तो उसके बाद से ही रिफॉर्म्स ने कैसे देश की दिशा और दशा बदली है, मैं इसका एक बहुत दिलचस्प उदाहरण आपको देना चाहता हूं। यहां मौजूद शायद ही किसी को PLP के बारे में पता होगा, कोई है, जिसको PLP के बारे में पता है? अपना हाथ उठाएं। यहां इतने मीडिया के दिग्गज बैठे हैं, PLP आपको पता है? और आप सुनकर के हैरान हो जाएंगे। PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट, इसके बारे में किसी को पता नहीं है। और एक दूसरा टर्म आपने जरूर सुना है PLI, ये ज्यादातर लोगों को पता होगा। PLI- यानी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव।

साथियों,

ये दोनों टर्म, भारत के दो अलग-अलग Time Period को डिफाइन करते हैं। आजकल Explainer का जमाना है, तो मैं आपको Explain करता हूं।

साथियों,

आज की युवा पीढ़ी को ये सुनकर हैरानी होगी, कि हमारे देश में एक समय ऐसा भी था, कि अगर कोई कंपनी तय लिमिट से ज्यादा प्रॉडक्शन कर दे, तो उसे पनिशमेंट दिया जाता था। ये पहले की लाइसेंस राज वाली सरकारों का, PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट मॉडल था। ऐसे भी उदाहरण रहे हैं कि अगर किसी फैक्ट्री ने ज्यादा डिमांड देखते हुए ज्यादा प्रॉडक्शन कर दिया, तो उसे नोटिस भेज दिया जाता था। मजबूरी में वो कंपनी अपना प्रॉडक्ट मार्केट में बेचने के बजाय, उसे खुद ही नष्ट कर देती थी।

साथियों,

आज जो लोग Make In India और आत्मनिर्भर भारत अभियान का मजाक उड़ाते हैं, उनके पुरखों की सोच यही थी, PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट। ऐसा करने के पीछे एक विशेष तरह की विकृत मानसिकता काम करती थी। ऐसी मानसिकता वाले लोग हमेशा चाहते थे कि जरूरी चीजों की किल्लत बनी रहे। देश के नागरिकों को अभाव में रखना उनकी पॉलिसी थी। वो चाहते थे कि जनता उनके सामने हाथ जोड़े, हाथ फैलाए, आप समझ गए मैं किन लोगों की बात कर रहा हूं। लोगों से हाथ जुड़वाने के बाद उपकार करना, उन सरकारों का तरीका था, इसलिए वो प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट मॉडल पर चलते थे। आप कल्पना कर सकते हैं, ऐसे करके उन लोगों ने Employment Generation के बेसिक principal का गला घोंट दिया था। और हैरानी ये, इन लोगों के दरबारियों ने again I repeat, इन लोगों के दरबारियों ने, कभी इसके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाई।

साथियों,

हर reform की शुरुआत सबसे पहले, आपके सोचने के तरीके, आपके मानसिक, किस रेंज में आप काम कर रहे हैं, इस सोच के reform से ही होती है। जहां पहले production बढ़ाने पर पनिशमेंट मिलता था, वहीं आज हमारी सरकार production बढ़ाने पर incentive दे रही है। और आज PLI स्कीम की सक्सेस दुनिया देख रही है। सिर्फ इस एक योजना की वजह से, मैं सारी योजनाओं की बात नहीं करता हूं, एक की बात करता हूं, करीब ढाई लाख करोड़ रुपए का actual investment हुआ है। 22 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का production और sales हुई है। 15 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का exports हुआ है, और 14 लाख से ज्यादा direct और indirect jobs बनी हैं। और मैं फिर याद दिलाउंगा, ये आंकड़े सिर्फ एक स्कीम के हैं। आप सोचिए, पहले का लाइसेंस राज वाली सरकार का पनिशमेंट मॉडल जहां बेरोजगारी बढ़ाता था, वहीं आज का हमारा incentive मॉडल लाखों नई जॉब्स क्रिएट कर रहा है।

साथियों,

आज भारत में ये तेज विकास, ये तेज रिफॉर्म इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि भारत में और जिसका अभी सत्य ने उल्लेख किया, political stability है, हमारी policy में continuity है। पहले देश में रिफॉर्म्स की बात करने वाले घोषणा तो कर देते थे, बाद में भूल जाते थे। लेकिन हमने रिफॉर्म्स को लेकर एक क्लियर रोडमैप बनाया। इस रोडमैप की प्रमुख दिशा रही है- गवर्नेंस लेवेल के रिफॉर्म्स हों! इसके लिए, आज 21वीं सदी के भारत में, हम सिर्फ regulations नहीं बदल रहे हैं, हम regulation की पूरी philosophy बदल रहे हैं। पहले regulations की अप्रोच थी- “Prohibited unless permitted.” यानी जब तक सरकार इजाजत ना दे, तब तक आप वो काम नहीं कर सकते। हम इस approach को बदलकर, “Permitted unless prohibited” की तरफ ले जा रहे हैं। यानी, जो काम कानून ने स्पष्ट रूप से मना नहीं किया है, उसके लिए हर कदम पर permission की कोई जरूरत नहीं होनी चाहिए। और इसके पीछे सोच बहुत सीधी है, सरकार और नागरिक के रिश्ते का आधार, Suspicion नहीं, trust होना चाहिए।

साथियों,

यही सोच आपको Jan Vishwas बिल में भी दिखाई देती है। मैं मानता हूं, हर procedural गलती को criminal offence मान लेना ठीक नहीं है। इसीलिए अनेक offences को decriminalise किया गया है। कई मामलों में जेल की जगह केवल आर्थिक penalty का प्रावधान किया गया है। Government और enterprise के रिश्ते में, हम इसी reform mindset को आगे बढ़ा रहे हैं। बीते वर्षों में 40 हजार से ज्यादा compliances हटाए गए हैं, 40 thousand. डेढ़ हजार से ज्यादा, 15 hundred, डेढ़ हजार से ज्यादा, पुराने और बेकार हो चुके कानून हमने खत्म किए, और जब इन सारे reforms को एक साथ देखते हैं, तो अंदाजा होता है, हमारी industries और businesses के कंधों से कितना बड़ा बोझ कम हुआ है।

साथियों,

गवर्नेंस रिफॉर्म्स की इस प्रक्रिया, उस पर हम निरंतर काम कर रहे है। अभी संसद के मॉनसून सत्र में हमने ‘बैंकर्स बुक एविडेंस बिल’ पारित किया है। और वो भी तब जब विपक्ष ने संसद में लगातार गतिरोध बनाया हुआ था। हमने देश की सेवा करने का काम रूकने नहीं दिया। अब इस कानून ने 19वीं सदी के अंग्रेजी कानून को रिप्लेस किया है। अब बैंकों के डिजिटल रिकॉर्ड्स की स्वीकार्यता को कानूनी मान्यता दी गई है। इससे कानूनी उलझनें कम होंगी, सिस्टम में पारदर्शिता होगी, Ease of Doing Business बढ़ेगा।

साथियों,

गवर्नेंस में रिफॉर्म का एक मतलब ये भी है कि सिस्टम ऐसे बनें, जिसमें एक-एक मानव जीवन और उसके समय के प्रति संवेदनशीलता हो। मैं रेलवे का उदाहरण देता हूं। हमारी रेलवेज में भी इसी अप्रोच के साथ काम हुआ है। आज साढ़े 6 हजार से ज्यादा रेलवे स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की व्यवस्था है। 10 हजार से ज्यादा लेवल क्रॉसिंग गेट्स को भी इंटरलॉकिंग से जोड़ा जा चुका है। इससे ह्यूमन एरर से होने वाले हादसों की आशंका बहुत कम हुई है।

साथियों,

जब 2014 में हमारी सरकार आई, तो करीब 9 हजार फाटक ऐसे थे जो Un-Manned थे। इन्हें हटाना कोई रॉकेट साइंस नहीं था। Un-Manned क्रॉसिंग्स की वजह से हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, लेकिन पहले की सरकारों को इससे बहुत फर्क नहीं पड़ता था। हमने मिशन मोड में, गत दस वर्ष में, इन Un-Manned क्रॉसिंग्स को समाप्त कर दिया। हमने रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज बनाने की गति भी कई गुना बढ़ा दी। और इसी का नतीजा है कि 2014 के पहले के मुकाबले ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या में Ninety Percent तक की कमी आई है, 90, Ninety Percent. 12 साल पहले जहां एक साल में करीब डेढ़ सौ रेल दुर्घटनाएं होती थीं, वहीं अब इनकी संख्या घटकर 15-20 रह गई है। और हम इसे और कम से कम करने का प्रयास लगातार कर रहे हैं।

साथियों,

Railways में स्वच्छता भी गवर्नेंस रिफॉर्म का एक बड़ा उदाहरण है। एक समय था, जब रेल पटरियों पर गंदगी और human waste एक बड़ी समस्या हुआ करती थी। आज स्थिति पूरी तरह बदल गई है। 2014 से पहले हमारी ट्रेनों में जहां लगभग 12 हजार बायो-टॉयलेट्स लगाए गए थे, वहीं 2014 के बाद ट्रेनों में 3 लाख 60 हजार से ज्यादा बायो-टॉयलेट्स लगाए गए हैं। यानी, 97 प्रतिशत से ज्यादा बायो-टॉयलेट्स पिछले 12 वर्षों में लगे हैं। ये बदलाव सिर्फ सफाई का नहीं, यात्रियों की गरिमा, स्वच्छता और आधुनिक भारत के निर्माण की दिशा में गवर्नेंस का एक नया मॉडल है। ये करोड़ों यात्रियों को बेहतर अनुभव देने का अभियान भी है।

साथियों,

गवर्नेंस की क्वालिटी का एक और पैमाना, और वो पैमाना है - समय। जो प्रोजेक्ट शुरू हो, वो समय पर पूरा हो। और जो सर्विस लोगों को मिले, वो भी समय की कसौटी पर खरी उतरे। दिल्ली-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल सिस्टम इसका बहुत अच्छा उदाहरण है। इस कॉरिडोर पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चल रही हैं। ये हमारे देश में पहले कभी सोचा नहीं जा सकता था। अब तक 4 करोड़ से ज्यादा यात्री इसमें ट्रैवल कर चुके हैं। और इसका एक और अहम फैक्टर है, जिसकी चर्चा नहीं होती है। दिल्ली मेरठ नमो भारत रैपिड रेल की पंक्चुअलिटी 99.9 परसेंट है। वरना हम तो हर चीज में कहते हैं, लेट हो तो कहते थे, ये तो इंडियन टाइम है। वक्त बदला है, ये मैं छोटी-छोटी चीजें इसलिए बताता हूं, कि हमें अंदाज आए कि कितने बड़े व्यापक स्तर पर काम हो रहा है। इसी तरह, Delhi Metro की पंक्चुअलिटी। Delhi Metro की पंक्चुअलिटी 99.9 परसेंट है। और ये punctuality, New York, Hong Kong और Paris जैसे शहरों की Metro से करीब-करीब बराबर हो चुकी है। ये सिर्फ समय पर चलती हुई Metro और नमो रेपिड रेल की कहानी नहीं है, ये समय के साथ बदलते हुए भारत की पहचान है। मैं जानता हूं कि अभी भी, और र्मैं कोई इतने से संतोष मानकर बैठने वाला व्यक्ति नहीं हूं, अभी भी इस दिशा में हमें बहुत कुछ करना है, बहुत कुछ बाकी है, लेकिन हम लगातार कर रहे हैं। लेकिन एक शुरूआत तो हुई है और ये शुरुआत सराहनीय है।

साथियों,

हमारे रिफॉर्म्स रोडमैप का एक और बड़ा आयाम है- पॉलिसी लेवल पर होने वाले रिफॉर्म्स! आज हम ऐसी policies बना रहे हैं, जो pro-people हों, Pro-growth हों, pro development हों! पॉलिसीज़ देश और देश के लोगों की जरूरत के हिसाब से होनी चाहिए न कि पॉलिसीज़ बनाकर देश को उनके हिसाब से चलने को मजबूर होना पड़े! मैं आपको एक और Interesting उदाहरण देना चाहता हूं। कुछ साल पहले तक हमारे यहाँ देश का नक्शा बनाना भी गैर-कानूनी था, मैप बनाए तो गैर कानूनी था, आप जेल चले जाएंगे। बिना परमिशन के आप देश में मैपिंग का काम भी नहीं कर सकते थे। आप सोचिए, विदेशी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के जरिए भारत के किसी भी कोने को मैप कर सकती थी, लेकिन भारत में भारतीयों पर भारत का मैप बनाने पर पाबंदी लगी हुई थी।

साथियों,

आज टेक्नोलॉजी के इस दौर में, इस एक पाबंदी से कितने स्टार्टअप्स की हत्या हो सकती थी! कितने ideas implement होने से वंचित रह सकते थे! हमने इस व्यवस्था को भी बदला। हमने Geospatial डेटा का Deregulation किया और आज Geospatial डेटा कितने ही स्टार्टअप्स का आधार बन रहा है।

साथियों,

आज आप लगातार ड्रोन्स की उपयोगिता बढ़ते हुए देख रहे हैं। एग्रीकल्चर में, डिफेंस में, डिलिवरी में, शूटिंग में, कंटेंट क्रिएशन में, ये सब संभव ही नहीं होता, अगर सरकार ने इससे जुड़े नियमों में Reform नहीं किए होते। पहले देश में ड्रोन फ्लाइंग पूरी तरह नियमों में, बंधनों में जकड़ी हुई थी। हमने उसे बंधनों से आजाद किया, और आज भारत की ड्रोन इंडस्ट्री, एक अभूतपूर्व उड़ान के साथ आगे बढ़ रही है।

साथियों,

पहले border areas को लेकर सरकारों की सोच थी कि बॉर्डर पर roads और infrastructure बढ़ेगा, तो उसका फायदा दुश्मन भी उठा सकता है। हमने इस सोच को बदला। हमने कहा, Border infrastructure कमजोरी नहीं, देश की ताकत है। और इसीलिए आज border areas में roads, bridges और tunnels का network तेजी से बढ़ रहा है। सिर्फ 2024 और 2025 में ही, BRO के 250 infrastructure projects देश को समर्पित किए गए हैं। सोच बदली, तो border infrastructure की तस्वीर भी बदल गई।

साथियों,

एक उदाहरण न्यूक्लियर रिफॉर्म्स का भी है। एक ऐसे समय में, जब विकास पूरी तरह से energy dependent है, बंदिशों और प्रतिबंधों के कारण, देश अपने न्यूक्लियर potential का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा था। हमने शांति बिल के जरिए इसमें भी बड़ा रिफॉर्म किया है। आज भारत में न्यूक्लियर एनर्जी में प्राइवेट सेक्टर के लिए रास्ता खुल चुका है। इसी तरह, हमने एक बड़ा पॉलिसी रिफॉर्म डिफेंस सेक्टर में भी किया। 200 साल के पहले जो व्यवस्था चली आ रही थी, उसे बदलकर हमने 40 से ज्यादा ordnance फैक्ट्रीज़ को मर्ज करके 7 फैक्ट्रीज़ बना दी। और उसका परिणाम हमें देखने को मिल रहा है। आज भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए भी आत्मनिर्भर बन रहा है, और 2014 की तुलना में, हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट 55 गुना बढ़ा है। और इसलिए, कई बार रिफॉर्म्स हमारे जीवन में इस तरह घुल-मिल जाते हैं कि हमारा उनकी तरफ ध्यान ही नहीं जाता। आप सोचिए, आपका कोई सामान्य दिन आज कैसे बीतता है। आप सुबह उठते हैं, फोन पर घर का सामान ऑर्डर कर देते हैं, और जब तक ऑफिस के लिए रेडी होते हैं, वो सारा सामान आपके घर आकर के पहुंच जाता है। आपकी गली के स्ट्रीट वेंडर से लेकर, आपकी गाड़ी के शो रूम तक, आपकी सारी पेमेंट्स, सिर्फ एक क्यूआर कोड स्कैन करके हो जाती है। अगर आपकी बेटी, किसी दूसरे शहर में पढ़ती है, तो आप फोन से उसे पैसे भेज सकते हैं, और वो पैसा, कुछ सेकंड्स में उसके पास भी पहुंच जाता है। कई बार तो बिटिया क्यूआर ही शेयर कर देती है कि ‘पापा-मां मैंने ये ड्रेस ले ली है, इसकी पेमेंट कर दीजिए, और आप उसकी शॉपिंग अपने घर बैठे-बैठे करवा देते हैं। ये चीजें Remarkable हैं, लेकिन अब ये कोई भारत के लोगों को कम से कम हैरानी नहीं होती, बाहर के लोग आते हैं, उनको आश्चर्य होता है, अच्छा ऐसे होता है। भारत के लोगों का रूटीन हो गया है। ये भारत के सामान्य मानवी के जीवन का हिस्सा बन चुका है। आप सोचिए, 2014 से पहले ऐसी कितनी ही बातें क्या पॉसिबल थीं?

साथियों,

भारत ने बीते 10-12 सालों में Ease of Living से जुड़े जो रिफॉर्म्स किए हैं, उसकी वजह से लोगों का, खासतौर पर हमारे मिडिल क्लास का जो जीवन बदला है, वो दुनिया के कई विकसित देशों में आज भी एक सपना ही है।

साथियों,

आज दुनिया का सबसे सस्ता डेटा भारत में है, हम सस्ते और अच्छे स्मार्टफोन्स बना रहे हैं। अभी सत्या ने उसका वर्णन किया। भारत दुनिया के fastest 5G rollouts करने वाले देशों में से एक है। हमने आधार को बैंकिंग, मोबाइल कनेक्टिविटी और सर्विसेज से जोड़कर, ई-के.वाई.सी और Digital Authentication जैसी सर्विसेज को पॉसिबल किया है। आज आपको अगर बैंक अकाउंट खोलना है, तो उसके लिए बैंक जाने तक की जरूरत नहीं है। सरकार ने बैंक को ही, आपके पास पहुंचा दिया है। आज चाहे कोई बिल जमा करना हो, कोई टिकट करानी हो, किसी सरकारी दफ्तर में जाने की जरूरत नहीं पड़ती, ये सारा काम ऑनलाइन हो जाता है। इनकम टैक्स की फाइलिंग का काम आसान हुआ है। ऐसी व्यवस्था बनी है कि फॉर्म में मैक्सिमम जानकारियां पहले से भरी होती हैं। आप ये इन्फॉर्मेशन वेरिफाई करते हैं, कुछ जोड़ना है तो जोड़ देते हैं, और सबमिट करते हैं, आपका काम पूरा हो जाता है। पहले जो रिफंड आने में महीनों लगते थे, अब वो भी कुछ ही दिनों में आ जाता है।

साथियों,

आज ई-संजीवनी की मदद से, शायद इसकी चर्चा अभी बहुत कम होती है, ई-संजीवनी की मदद से, गांव के दूर दराज के लोग भी, कहीं से भी डॉक्टर्स के साथ सीधी अपनी चर्चा करके अपने उपचार का रास्ता लेते हैं। और इससे जिन लोगों को अस्पताल जाने के लिए कई किलोमीटर का सफर करना पड़ता था, आज डॉक्टर उनके घर पर, उनकी स्क्रीन पर उपलब्ध है। अब तक ये आंकड़ा भी आपको जरूर आश्चर्य करेगा। यानी भारत ने टेक्नोलॉजी को किस प्रकार से अडाप्ट किया है, सामान्य मानवीय के जीवन को कैसे सरल किया है। अब तक ईं-संजीवनी के तहत करीब-करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशंस हो चुकी हैं।

साथियों,

आज भारत में Travel Experience बदल रहा है, भारत के नागरिकों की यात्राएं पूरी तरह बदल गई हैं। यहां इस हॉल में ऐसा व्यक्ति खोजना मुश्किल होगा, जिसने एयरपोर्ट पर डिजी यात्रा का इस्तेमाल ना किया हो। ऐसे ही आजकल बहुत सारा काम Seamless तरीके से हो रहा है। हाइवे पर फास्ट टैग चल रहे हैं, ताकि आप बिना रुके टोल देकर आगे बढ़ सकें। Ease of Living का सही अर्थ यही है। समय की बचत हो रही है, जीवन आसान हो रहा है, और करोड़ों लोग अपनी प्रगति पर फोकस कर पा रहे हैं।

साथियों,

Politics में अक्सर वही फैसले headlines बनते हैं, जिनका असर आज दिखाई दे, यानी उसकी उमर 24 घंटे हो। पहले की सरकारों ने इलेक्शन सामने देख कर भी घोषणाएं करने का फॉर्मूला अपनाया। लेकिन ऐसी घोषणाओं से देश नहीं बदला। देश बदलने वाले फैसले वो होते हैं, जिनका प्रभाव जमीन पर दिखे, जो वर्तमान और भविष्य, दोनों को ध्यान में रखकर के लिए गए होने चाहिए।

साथियों,

पीएम कुसुम योजना और पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना इसका बहुत बड़ा यूनीक Example है। कुसुम योजना से किसानों को बिजली की चिंता से मुक्ति मिली है। और सूर्यघर योजना से मिडिल क्लास को बहुत फायदा हुआ है।

साथियों,

मैं ये जानता हूं कि अगर मैंने ये अनाउंस कर दिया होता कि आज से लाखों-लाख परिवारों के लिए बिजली मुफ्त है, तो सारा मीडिया, सारी स्क्रीन्स, सारे न्यूजपेपर्स, बड़ी-बड़ी हेडलाइन बनाकर के खबर दे देते कि मोदी जी ने आज अनाउंस कर दिया है। लेकिन हमने कुछ दूसरे अप्रोच से काम शुरू किया। हमने हर घर की छत पर एक सूरज उगाने की ठान ली, और आज देश के 50 लाख से ज्यादा परिवार, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जुड़े हैं। सरकार ने 22 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा इन परिवारों को दिए हैं, ये सोलर सिस्टम लगाने के लिए, ताकि उनकी छत पर सोलर प्लांट लगाकर सोलर पावर पैदा की जा सके। अब ये परिवार, एक्स्ट्रा बिजली को, बिजली ग्रिड में बेचकर, पैसे भी कमा रहे हैं। खुद का बिल तो जीरो हुआ, कमाई भी होने लगी। इस योजना से लोगों के सपनों को भी विस्तार मिल रहा है। बिजली बिल कम हुआ है, तो अब घर में फ्रिज, कूलर, वाशिंग मशीन, टीवी जैसी चीजें लोग खरीदकर रखने लगे हैं। अब ये डर नहीं होता कि बिजली कटौती की वजह से दूध फट जाएगा, अब चिंता नहीं रहती है। अब स्कूल जाने वाले बच्चे रातभर चैन से सो पाते हैं। मैं फिर कहता हूं- इलेक्शन हो या ना हो, लेकिन ये सूर्यघर और उसकी रोशनी बनी रहेगी, इस प्लांट का फायदा, सालों तक देश के परिवारों को होता रहेगा।

साथियों,

आने वाले समय में Ease of Living और Ease of Doing Business का और विस्तार होगा। देश के Youth के लिए, नारीशक्ति के लिए, Farmers के लिए, गरीब और Middle Class के लिए, हमारी सरकार लगातार काम करती रहेगी, हमारी Reform Express और अधिक गति से आगे बढ़ने वाली है। विकसित भारत का लक्ष्य पूरा करने के लिए, हम पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करते रहेंगे। और मैं, मेरे लिए भारत का future अगर सुनिश्चित हो गया ना, तो दुनिया के future में भी स्थिरता लाने का बहुत बड़ा काम इसी धरती से होने वाला है। इस आत्मविश्वास के साथ भारत जितना स्टेबल होगा, भारत का future जितना सुरक्षित होगा, विश्व को सुरक्षत्व का एहसास देने की ताकत यहीं से पैदा होने वाली है। इस सामर्थ्य के साथ, इसी संकल्प के साथ, मैं एक बार फिर, आज के इस कार्यक्रम में मुझे आमंत्रित करने के लिए, Economic Times की पूरी टीम का हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। वन्दे मातरम् !