प्रधानमंत्री ने 9 करोड़ किसानों के लिए 18,000 करोड़ रुपये की 21वीं पीएम-किसान किस्त जारी की
भारत प्राकृतिक खेती का वैश्विक केन्द्र बनने की राह पर है: प्रधानमंत्री
भारत के युवा खेती को एक मॉडर्न और बड़े पैमाने पर बढ़ने वाले मौके के तौर पर तेजी से पहचान रहे हैं; इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बहुत मजबूती मिलेगी: प्रधानमंत्री
प्राकृतिक खेती भारत की अपनी देसी अवधारणा है; यह हमारी परंपराओं में बसा है और हमारे पर्यावरण के लिए सटीक है: प्रधानमंत्री
‘एक एकड़, एक सीजन’- एक एकड़ जमीन पर एक सीजन के लिए प्राकृतिक खेती करें: प्रधानमंत्री
हमारा लक्ष्य प्राकृतिक खेती को पूरी तरह से विज्ञान पर आधारित आंदोलन बनाना हो: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज तमिलनाडु के कोयंबटूर में साउथ इंडिया नेचुरल फार्मिंग समिट 2025 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, श्री मोदी ने कोयंबटूर की पवित्र धरती पर मरुधमलाई के भगवान मुरुगन को नमन करके अपनी बात शुरू की। उन्होंने कोयंबटूर को संस्कृति, दया और रचनात्मकता की धरती बताया और इसे दक्षिण भारत की उद्यमिता का शक्ति केन्द्र के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शहर का वस्त्र सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था में एक बड़ा योगदान देता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोयंबटूर ने अब और नाम कमाया है, क्योंकि इसके पूर्व सांसद श्री सी.पी. राधाकृष्णन अब उपराष्ट्रपति के तौर पर देश का मार्गदर्शन कर रहे हैं। 

यह बताते हुए कि प्राकृतिक खेती उनके दिल के बहुत करीब का विषय है, श्री मोदी ने साउथ इंडिया नेचुरल फार्मिंग समिट के आयोजन के लिए तमिलनाडु के सभी किसान भाइयों और बहनों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस कार्यक्रम में शामिल किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, उद्योग जगत के साझेदारों, स्टार्टअप उद्यमों और नवाचार के सूत्रधारों की मौजूदगी को स्वीकार किया और सभी प्रतिभागियों को दिल से बधाई दी। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले सालों में, वे भारतीय खेती में बड़े बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं। श्री मोदी ने कहा, “भारत प्राकृतिक खेती का ग्लोबल हब बनने की राह पर है।” उन्होंने कहा कि देश की जैव-विविधता बदल रही है और युवा अब खेती को एक आधुनिक, बड़े पैमाने पर बढ़ने वाले अवसर के तौर पर देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को काफी मजबूती देगा।

पिछले ग्यारह सालों में पूरे कृषि क्षेत्र में हुए बड़े बदलावों पर जोर देते हुए, श्री मोदी ने बताया कि भारत का कृषि निर्यात लगभग दोगुना हो गया है और सरकार ने कृषि को मॉडर्न बनाने में किसानों की मदद के लिए हर मुमकिन रास्ता खोला है। यह बताते हुए कि अकेले किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) स्कीम के जरिए, इस साल किसानों को 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक की मदद मिली है। श्री मोदी ने कहा कि सात साल पहले जब से पशुधन और मछली पालन सेक्टर को केसीसी का फायदा दिया गया है, तब से इन एरिया में काम करने वाले लोग भी इसका बड़े पैमाने पर लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जैविक खाद पर जीएसटी में कमी लाने से किसानों को और भी अधिक लाभ हुआ है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ देर पहले ही, इसी मंच से, प्रधानमंत्री-किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त जारी की गई, जिससे देश भर के किसानों को 18,000 करोड़ रुपये उनके खाते में ट्रांसफर किए गए। उन्होंने पुष्टि करते हुए कहा कि तमिलनाडु के लाखों किसानों को भी उनके खाते में पैसे मिल गए हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस स्कीम के तहत, अब तक छोटे किसानों के बैंक खाते में सीधे 4 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जा चुके हैं, जिससे वे खेती-बाड़ी की अपनी अलग-अलग जरूरतें पूरी कर पा रहे हैं। उन्होंने इस पहल से फायदा उठाने वाले करोड़ों किसानों को शुभकामनाएं दीं।

21वीं सदी की खेती के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ाने पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में, बढ़ती मांग की वजह से खेतों और खेती से जुड़े अलग-अलग सेक्टर में केमिकल का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। श्री मोदी ने कहा कि रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अधिक इस्तेमाल से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम हो रही है, मिट्टी की नमी पर असर पड़ रहा है और हर साल खेती की लागत बढ़ रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसका हल फसल विविधता और प्राकृतिक खेती में है।

मिट्टी की उर्वरा शक्ति को फिर से बढ़ाने और फसलों की न्यूट्रिशनल वैल्यू बढ़ाने पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को प्राकृतिक खेती के रास्ते पर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि यह एक विजन और जरूरत दोनों है। तभी हम आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी जैव-विविधता को बचाकर रख सकते हैं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि प्राकृतिक खेती हमें जलवायु परिवर्तन और मौसम के उतार-चढ़ाव का सामना करने में मदद करती है, हमारी मिट्टी को स्वस्थ रखती है और लोगों को नुकसानदायक रसायनों से बचाती है। उन्होंने कहा कि आज का आयोजन इस जरूरी मिशन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

इस बात पर जोर देते हुए कि भारत सरकार किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए बढ़ावा दे रही है, श्री मोदी ने बताया कि एक साल पहले, केंद्र सरकार ने प्राकृतिक खेती पर एक राष्ट्रीय मिशन शुरू किया था, जिससे लाखों किसान पहले ही जुड़ चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस पहल का अच्छा असर खासकर दक्षिण भारत में दिख रहा है। अकेले तमिलनाडु में लगभग 35,000 हेक्टेयर जमीन पर अब जैविक और प्राकृतिक खेती हो रही है।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, “प्राकृतिक खेती भारत की एक देसी अवधारणा है, यह कहीं और से आयातिक नहीं है, बल्कि यह परंपरा से पैदा हुई है और पर्यावरण के साथ जुड़ी हुई है।” उन्होंने खुशी जताई कि दक्षिण भारत के किसान लगातार पारंपरिक प्राकृतिक खेती के तरीके जैसे पंचगव्य, जीवामृत, बीजामृत और मल्चिंग अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन तरीकों से मिट्टी की सेहत बेहतर होती है, फसलें रसायनों से मुक्त रहती हैं और फसल की लागत कम होती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री अन्न यानी बाजरा की खेती को प्राकृतिक खेती के साथ मिलाना धरती मां की रक्षा करने में बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु में भगवान मुरुगन को थेनम थिनाई मावुम चढ़ाया जाता है, जो शहद और श्री अन्न से बनता है। उन्होंने बताया कि तमिल इलाकों में कंबू और समाई जैसे बाजरे, केरल और कर्नाटक में रागी और तेलुगु बोलने वाले राज्यों में सजा और जोन्ना पीढ़ियों से पारंपरिक आहार का हिस्सा रहे हैं।

श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि सरकार इस सुपरफूड को वैश्विक बाजार तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है और उन्होंने यह भी कहा कि प्राकृतिक और रसायन-मुक्त खेती उनकी अंतरराष्ट्रीय पहुंच बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि इस समिट में ऐसी कोशिशों पर चर्चा होनी चाहिए।

एक ही फसल की खेती के बजाय फसल विविधता जैसी खेती को बढ़ावा देने की अपनी लगातार अपील को दोहराते हुए, प्रधानमंत्री ने माना कि दक्षिण भारत के कई इलाके इस मामले में प्रेरणा का स्रोत रहे हैं। उन्होंने बताया कि केरल और कर्नाटक के पहाड़ी इलाकों में सीढीनुमा खेती के उदाहरण साफ तौर पर दिखाई देते हैं। श्री मोदी ने कहा कि एक ही खेत में नारियल, सुपारी और फलों के पौधे उगाए जाते हैं और नीचे मसाले तथा काली मिर्च उगाई जाती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि छोटे प्लॉट पर इस तरह की समन्वित खेती प्राकृतिक खेती की मूल सोच को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि खेती के इस मॉडल को पूरे भारत में बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकारों से इस बात पर विचार करने की अपील करते हुए कहा कि इन तरीकों को देश के अलग-अलग इलाकों में कैसे लागू किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दक्षिण भारत खेती की जीती-जागती यूनिवर्सिटी रहा है। उन्होंने बताया कि यह इलाका दुनिया के कुछ सबसे पुराने चालू डैम का घर है और कलिंगारायण नहर 13वीं सदी में यहीं बनी थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस इलाके के मंदिरों के तालाब विकेन्द्रित जल संरक्षण प्रणाली के मॉडल बन गए। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस जमीन ने हजारों साल पहले खेती के लिए नदी के पानी को रेगुलेट करके वैज्ञानिक तौर पर जल संबंधी इंजीनियरी की शुरुआत की थी। उन्होंने भरोसा जताया कि देश और दुनिया के लिए प्राकृतिक खेती को लेकर नेतृत्व भी इसी इलाके से आएगी।

इस बात पर जोर देते हुए कि एक विकसित भारत के लिए भविष्योन्मुखी कृषि प्रणाली बनाने के लिए मिलकर कोशिश करने की जरूरत है, प्रधानमंत्री ने किसानों से “एक एकड़, एक सीजन” प्राकृतिक खेती शुरू करने और उसे करने एवं उसके परिणाम के आधार पर आगे बढ़ने की अपील की। ​​उन्होंने वैज्ञानिक और अनुसंधान संस्थानों से प्राकृतिक खेती को कृषि के पाठ्यक्रम का एक मुख्य हिस्सा बनाने की अपील की और उन्हें किसानों के खेतों को जीती-जागती लैब की तरह इस्तेमाल करने के लिए बढ़ावा दिया। प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारा लक्ष्य प्राकृतिक खेती को पूरी तरह से विज्ञान आधारित आंदोलन बनाना हो।”

श्री मोदी ने इस अभियान में राज्य सरकारों और किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) की अहम भूमिका के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में देश में 10,000 एफपीओ बनाए गए हैं। उनके समर्थन से, छोटे किसान क्लस्टर बनाए जा सकते हैं, जिन्हें सफाई, पैकेजिंग और प्रोसेसिंग की सुविधाओं से लैस किया जा सकता है, और सीधे ई-नाम जैसे ऑनलाइन मार्केट से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब पारंपरिक ज्ञान, वैज्ञानिक ताकत और सरकारी मदद एक साथ आएंगे, तो किसान तरक्की करेंगे और धरती मां स्वस्थ रहेंगी।

प्रधानमंत्री ने यह विश्वास जताते हुए अपनी बात खत्म की कि यह समिट देश में प्राकृतिक खेती को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि इस मंच से नई अवधारणा और नए समाधान निकलेंगे।

इस आयोजन में तमिलनाडु के राज्यपाल श्री आर.एन. रवि, केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

तमिलनाडु नेचुरल फार्मिंग स्टेकहोल्डर्स फोरम द्वारा आयोजित साउथ इंडिया नेचुरल फार्मिंग समिट 2025 19 से 21 नवंबर, 2025 तक चलेगा। इस समिट का मकसद सतत, पर्यावरण-अनुकूल और रसायन-मुक्त खेती के तरीकों को बढ़ावा देना है और भारत के खेती के भविष्य के लिए एक सटीक, जलवायु-अनुकूल और आर्थिक रूप से टिकाऊ मॉडल के तौर पर प्राकृतिक और उर्वरा शक्ति की पुनर्प्राप्ति वाली खेती की ओर तेजी से बदलाव लाना है।

समिट में किसान-उत्पादक संगठन और ग्रामीण उद्यम के लिए बाजार संपर्क जबनाने पर भी फोकस किया जाएगा, साथ ही जैविक खाद के इस्तेमाल, कृषि उत्पाद प्रसंस्करण, जलवायु-अनुकूल पैकेजिंग और देसी प्रौद्योगिकी में नवाचार दिखाए जाएंगे। इस कार्यक्रम में तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के 50,000 से अधिक किसान, प्राकृतिक खेती करने वाले, वैज्ञानिक, जैविक खाद के आपूर्तिकर्ता, विक्रेता और हितधारक हिस्सा लेंगे। 

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सरकार कृषि में 'टेक्नोलॉजी कल्चर' लाने पर विशेष जोर दे रही है: पीएम मोदी
March 06, 2026
इस वर्ष के केंद्रीय बजट ने कृषि और ग्रामीण परिवर्तन को नई दिशा प्रदान की है: प्रधानमंत्री
सरकार ने कृषि क्षेत्र को लगातार मजबूत किया है, प्रमुख प्रयासों से किसानों के जोखिम कम हुए हैं और उन्हें बुनियादी आर्थिक सुरक्षा मिली है: प्रधानमंत्री
यदि हम उच्च मूल्य वाली कृषि को बढ़ावा दें, तो यह कृषि को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में बदल देगा: प्रधानमंत्री
निर्यात-उन्मुख उत्पादन बढ़ने से प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजित होगा: प्रधानमंत्री
मत्स्य पालन ग्रामीण समृद्धि के लिए एक उच्च मूल्य और उच्च प्रभाव वाला क्षेत्र और निर्यात वृद्धि का एक प्रमुख आधार बन सकता है: प्रधानमंत्री
सरकार एग्रीस्टैक के माध्यम से कृषि के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना विकसित कर रही है: प्रधानमंत्री
प्रौद्योगिकी तभी परिणाम देती है जब सिस्टम इसे अपनाएं हैं, संस्थान इसे एकीकृत करें हैं और उद्यमी इस पर नवाचार करें: प्रधानमंत्री

नमस्कार !

बजट वेबिनार सीरीज के तीसरे वेबिनार में, मैं आप सभी का अभिनंदन करता हूं। इससे पहले, टेक्नोलॉजी, रिफॉर्म्स और इकोनॉमिक ग्रोथ जैसे अहम विषयों पर दो वेबिनार हो चुके हैं। आज, Rural Economy और Agriculture जैसे अहम सेक्टर पर चर्चा हो रही है। आप सभी ने बजट निर्माण में अपने मूल्यवान सुझावों से बहुत सहयोग दिया, और आपने देखा होगा बजट में आप सबके सुझाव रिफ्लेक्ट हो रहे हैं, बहुत काम आए हैं। लेकिन अब बजट आ चुका है, अब बजट के बाद उसके full potential का लाभ देश को मिले, इस दिशा में भी आपका अनुभव, आपके सुझाव और सरल तरीके से बजट का सर्वाधिक लोगों को लाभ हो। बजट का पाई-पाई पैसा जिस हेतु से दिया गया है, उसको परिपूर्ण कैसे करें? जल्द से जल्द कैसे करें? आपके सुझाव ये वेबिनार के लिए बहुत अहम है।

साथियों,

आप सभी जानते हैं, कृषि, एग्रीकल्चर, विश्वकर्मा, ये सब हमारी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। एग्रीकल्चर, भारत की लॉन्ग टर्म डेवलपमेंट जर्नी का Strategic Pillar भी है, और इसी सोच के साथ हमारी सरकार ने कृषि सेक्टर को लगातार मजबूत किया है। करीब 10 करोड़ किसानों को 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पीएम किसान सम्मान निधि मिली है। MSP में हुए Reforms से अब किसानों को डेढ़ गुना तक रिटर्न मिल रहा है। इंस्टिट्यूशनल क्रेडिट कवरेज 75 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। पीएम फसल बीमा योजना के तहत लगभग 2 लाख करोड़ रुपए के क्लेम सेटल किए गए हैं। ऐसे अनेक प्रयासों से किसानों का रिस्क बहुत कम हुआ है, और उन्हें एक बेसिक इकोनॉमिक सिक्योरिटी मिली है। इससे कृषि क्षेत्र का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। आज खाद्यान्न और दालों से लेकर तिलहन तक देश रिकॉर्ड उत्पादन कर रहा है। लेकिन अब, जब 21वीं सदी का दूसरा क्वार्टर शुरू हो चुका है, 25 साल बीत चुके हैं, तब कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा से भरना भी उतना ही आवश्यक है। इस साल के बजट में इस दिशा में नए प्रयास हुए हैं। मुझे विश्वास है, इस वेबिनार में आप सभी के बीच हुई चर्चा, इससे निकले सुझाव, बजट प्रावधानों को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने में मदद करेंगे।

साथियों,

आज दुनिया के बाजार खुल रहे हैं, ग्लोबल डिमांड बदल रही है। इस वेबिनार में अपनी खेती को एक्सपोर्ट ओरिएंटेड बनाने पर भी ज्यादा से ज्यादा चर्चा आवश्य़क है। हमारे पास Diverse Climate है, हमें इसका पूरा फायदा उठाना है। एग्रो क्लाइमेटिक जोन, उस विषय में हम बहुत समृद्ध है। इस साल का बजट इन सब बातों के लिए अनगिनत नए अवसर देने वाला बजट है। प्रोडक्टिविटी बढ़ाने की दिशा तय करता है, और एक्सपोर्ट स्ट्रेंथ को बढ़ावा देता है। बजट में हमने high value agriculture पर फोकस किया है। नारियल, काजू, कोको, चंदन, ऐसे उत्पादों के regional-specific promotion की बात कही है, और आपको मालूम है, दक्षिण के हमारे जो राज्य हैं खासकर केरल है, तमिलनाडु है, नारियल की पैदावार बहुत करते हैं। लेकिन अब वो क्रॉप, वो सारे पेड़ इतने पुराने हो चुके हैं कि उसकी वो क्षमता नहीं रही है। केरल के किसानों को अतिरिक्त लाभ हो, तमिलनाडु के किसानों को अतिरिक्त लाभ हो। इसलिए इस बार कोकोनट पर एक विशेष बल दिया गया है, जिसका फायदा आने वाले दिनों में हमारे इन किसानों को मिलेगा।

साथियों,

नॉर्थ ईस्ट की तरफ देखें, अगरवुड बहुत कम लोगों को मालूम है, जो ये अगरबत्ती शब्द है ना, वो अगरवुड से आया हुआ है। अब हिमालयन राज्यों में टेम्परेट नट क्रॉप्स, और इन्हें बढ़ावा देने का प्रस्ताव बजट में रखा गया है। जब एक्सपोर्ट ओरिएंटेड प्रोडक्शन बढ़ेगा, तो ग्रामीण क्षेत्रों में प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के जरिए रोजगार सृजन होगा। इस दिशा में एक coordinated action कैसे हो, आप सभी स्टेकहोल्डर्स मिलकर जरूर मंथन करें। अगर हम मिलकर High Value Agriculture को स्केल करते हैं, तो ये एग्रीकल्चर को ग्लोबली कंपेटिटिव सेक्टर में बदल सकता है। एग्री experts, इंडस्ट्री और किसान एक साथ कैसे आएं, किसानों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने के लिए किस तरह से गोल्स सेट किए जाएं, क्वालिटी, ब्रांडिंग और स्टैंडर्ड्स, ऐसे हर पहलू, इन सबको कैसे प्रमोट किया जाए, इन सारे विषयों पर चर्चा, इस वेबिनार को, इसके महत्व को बढ़ाएंगे। मैं एक और बात आपसे कहना चाहूंगा। आज दुनिया हेल्थ के संबंध में ज्यादा कॉनशियस है। होलिस्टिक हेल्थ केयर और उसमें ऑर्गेनिक डाइट, ऑर्गेनिक फूड, इस पर बहुत रुचि है। भारत में हमें केमिकल फ्री खेती पर बल देना ही होगा, हमें नेचुरल फार्मिंग पर बल देना होगा। नेचुरल फार्मिंग से, केमिकल फ्री प्रोडक्ट से दुनिया के बाजार तक पहुंचने में हमारे लिए एक राजमार्ग बन जाता है। उसके लिए सर्टिफिकेशन, लेबोरेटरी ये सारी व्यवस्थाएं सरकार सोच रही है। लेकिन आप लोग इसमें भी जरूर अपने विचार रखिए।

साथियों,

एक्सपोर्ट बढ़ाने में एक बहुत बड़ा फैक्टर फिशरीज सेक्टर का पोटेंशियल भी है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश भी है। आज हमारे अलग-अलग तरह के जलाशय, तालाब, ये सब मिलाकर लगभग 4 लाख टन मछली उत्पादन होता है। जबकि इसमें 20 लाख टन अतिरिक्त उत्पादन की संभावना मौजूद है। अब विचार कीजिए आप, 4 लाख टन से हम अतिरिक्त 20 लाख टन जोड़ दें, तो हमारे गरीब मछुआरे भाई-बहन हैं, उनकी जिंदगी कैसी बदल जाएगी। हमारे पास Rural Income को डायवर्सिफाई करने का अवसर है। फिशरीज एक्सपोर्ट ग्रोथ का बड़ा प्लेटफॉर्म बन सकता है, दुनिया में इसकी मांग है। इस वेबिनार से अगर बहुत ही प्रैक्टिकल सुझाव निकलते हैं, तो कैसे रिज़रवॉयर, उसकी पोटेंशियल की सटीक मैपिंग की जाए, कैसे क्लस्टर प्लानिंग की जाए, कैसे फिशरीज डिपार्टमेंट और लोकल कम्युनिटी के बीच मजबूत कोऑर्डिनेशन हो, तो बहुत ही उत्तम होगा। हैचरी, फीड, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, एक्सपोर्ट, उसके लिए आवश्यक लॉजिस्टिक्स, हर स्तर पर हमें नए बिजनेस मॉडल विकसित करने ही होंगे। ये Rural Prosperity, ग्रामीण समृद्धि के लिए, वहां की हाई वैल्यू, हाई इम्पैक्ट सेक्टर के रूप में परिवर्तित करने का एक अवसर है हमारे लिए, और इस दिशा में भी हम सबको मिलकर काम करना है, और आप आज जो मंथन करेंगे, उसके लिए, उस कार्य के लिए रास्ता बनेगा।

साथियों,

पशुपालन सेक्टर, ग्रामीण इकोनॉमी का हाई ग्रोथ पिलर है। भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा मिल्क प्रोड्यूसर है, Egg प्रोडक्शन में हम दूसरे स्थान पर है। हमें इसे और आगे ले जाने के लिए ब्रीडिंग क्वालिटी, डिजीज प्रिवेंशन और साइंटिफिक मैनेजमेंट पर फोकस करना होगा। एक और अहम विषय पशुधन के स्वास्थ्य का भी है। मैं जब One Earth One Health की बात करता हूं, तो उसमें पौधा हो या पशु, सबके स्वास्थ्य की बात शामिल है। भारत अब वैक्सीन उत्पादन में आत्मनिर्भर है। फुट एंड माउथ डिजीज, उससे पशुओं को बचाने के लिए सवा सौ करोड़ से अधिक डोज पशुओं को लगाई जा चुकी है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत टेक्नोलॉजी का विस्तार किया जा रहा है। हमारी सरकार में अब पशुपालन क्षेत्र के किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड का भी लाभ मिल रहा है। निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एनिमल हसबेंड्री इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड की शुरुआत भी की गई है, और आपको ये पता है हम लोगों ने गोबरधन योजना लागू की है। गांव के पशुओं के निकलने वाला मलमूत्र है, गांव का जो वेस्ट है, कूड़ा-कचरा है। हम गोबरधन योजना में इसका उपयोग करके गांव भी स्वच्छ रख सकते हैं, दूध से आय होती है, तो गोबर से भी आय हो सकती है, और एनर्जी सिक्योरिटी की दिशा में गैस सप्लाई में भी ये गोबरधन बहुत बड़ा योगदान दे सकता है। ये मल्टीपर्पज बेनिफिट वाला काम है, और गांव के लिए बहुत उपयोगी है। मैं चाहूंगा कि सभी राज्य सरकारें इसको प्राथमिकता दें, इसको आगे बढ़ाएं।

साथियों,

हमने पिछले अनुभवों से समझा है कि केवल एक ही फसल पर टिके रहना किसान के लिए जोखिम भरा है। इससे आय के विकल्प भी सीमित हो जाते हैं। इसलिए, हम crop diversification पर फोकस कर रहे हैं। इसके अलावा, National Mission on Edible Oils And Pulses, National Mission on Natural Farming, ये सभी एग्रीकल्चर सेक्टर की ताकत बढ़ा रहे हैं।

साथियों,

आप भी जानते हैं एग्रीकल्चर स्टेट सब्जेक्ट है, राज्यों का भी एक बड़ा एग्रीकल्चर बजट होता है, हमें राज्यों को भी निरंतर प्रेरित करना है कि वो अपना दायित्व निभाने में, हम उनको कैसे मदद दें, हमारे सुझाव उनको कैसे काम आएं। राज्य का भी एक-एक पैसा जो गांव के लिए, किसान के लिए तय हुआ है, वो सही उपयोग हो। हमें बजट प्रावधानों को जिला स्तर तक मजबूत करना होगा। तभी नई पॉलिसीज का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाया जा सकता है।

साथियों,

ये टेक्नोलॉजी की सदी है और सरकार का बहुत जोर एग्रीकल्चर में टेक्नोलॉजी कल्चर लाने पर भी है। आज e-NAM के माध्यम से मार्केट एक्सेस का डेमोक्रेटाइजेशन हुआ है। सरकार एग्रीस्टैक के जरिए, एग्रीकल्चर के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रही है। इसके तहत डिजिटल पहचान, यानी किसान आईडी बनाई जा रही है। अब तक लगभग 9 करोड़ किसानों की किसान आईडी बन चुकी है, और लगभग 30 करोड़ भूमि पार्सलों का डिजिटल सर्वे किया गया है। भारत-विस्तार जैसे AI आधारित प्लेटफॉर्म, रिसर्च इंस्टीट्यूशंस और किसानों के बीच की दूरी कम कर रहे हैं।

लेकिन साथियों,

टेक्नोलॉजी तभी परिणाम देती है, जब सिस्टम उसे अपनाएं, संस्थाएं उसे इंटीग्रेट करें और एंटरप्रेन्योर्स उस पर इनोवेशन खड़ा करें। इस वेबिनार में आपको इससे जुड़े सुझावों को मजबूती से सामने लाना होगा। हम टेक्नोलॉजी को कैसे सही तरीके से इंटीग्रेट करें, इस दिशा में इस वेबिनार से निकले सुझावों की बहुत बड़ी भूमिका होगी।

साथियों,

हमारी सरकार ग्रामीण समृद्धि के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वामित्व योजना, पीएम ग्रामीण सड़क योजना, स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक मदद, इसने रूरल इकोनॉमी को निरंतर मजबूत किया है। लखपति दीदी अभियान की सफलता को भी हमें नई ऊंचाई देनी है। अभी तक गांव की 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने में हम सफल हो चुके हैं। अब 2029 तक, 2029 तक 3 करोड़ में और 3 करोड़ जोड़ना है, और 3 करोड़ और लखपति दीदियां बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। ये लक्ष्य और तेजी से कैसे प्राप्त किया जाए, इसे लेकर भी आपके सुझाव महत्वपूर्ण होंगे।

साथियों,

देश में स्टोरेज का बहुत बड़ा अभियान चल रहा है। लाखों गोदाम बनाए जा रहे हैं। स्टोरेज के अलावा एग्री एंटरप्रेन्योर्स प्रोसेसिंग, सप्लाई चैन, एग्री-टेक, एग्री-फिनटेक, एक्सपोर्ट, इन सब में इनोवेशन और निवेश बढ़ाना आज समय की मांग है। मुझे विश्वास है आज जो आप मंथन करेंगे, उससे निकले अमृत से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी। आप सबको इस वेबिनार के लिए मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं, और मुझे पूरा विश्वास है कि जमीन से जुड़े हुए विचार, जड़ों से जुड़े हुए विचार, इस बजट को सफल बनाने के लिए, गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए बहुत काम आएंगे। आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।