कई बाधाओं के बावजूद, यह दशक भारत के लिए अभूतपूर्व विकास का दशक रहा है, जो सशक्त उपलब्धियों और लोकतंत्र को मजबूत करने के प्रयासों से चिन्हित है: प्रधानमंत्री
21वीं सदी के इस दशक में, भारत तेज़ी से सुधारों के दौर से गुज़र रहा है: प्रधानमंत्री
हमने बजट को न केवल व्यय केंद्रित बनाया है, बल्कि परिणाम केंद्रित भी बनाया है: प्रधानमंत्री
पिछले एक दशक में, हमने प्रौद्योगिकी और नवाचार को विकास के मुख्य चालक के रूप में माना है: प्रधानमंत्री
आज, हम विश्व के साथ व्यापार समझौते कर रहे हैं, क्योंकि आज का भारत आत्मविश्वास से भरा है और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार है: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली में आयोजित ईटी नाउ ग्लोबल बिजनेस समिट 2026 को संबोधित किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने ग्लोबल बिजनेस समिट में मौजूद सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं और ‘व्यवधानों का दशक, परिवर्तन की शताब्दी’ विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि 21वीं शताब्दी के पिछले दशक में कई व्यवधान देखने को मिले, जिनमें वैश्विक महामारी, विभिन्न क्षेत्रों में तनाव और युद्ध और आपूर्ति श्रृंखला में आईं बाधाएं शामिल हैं, इन चुनौतियों ने वैश्विक संतुलन को हिला कर रख दिया। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि मुश्किल भरे वक्त में ही किसी देश की वास्तविक शक्ति सामने उभर कर आती है और प्रधानमंत्री ने इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि इन व्यवधानों के बावजूद, भारत का यह दशक उल्लेखनीय विकास, उत्कृष्ट प्रदर्शन और लोकतंत्र के सुदृढ़ीकरण से भरा रहा है। श्री मोदी ने याद दिलाया कि जब पिछला दशक शुरू हुआ था, तब भारत ग्यारहवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी और उथल-पुथल के बीच पतन की आशंकाएं थीं, लेकिन आज भारत तेजी से विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। इस बात पर जोर देते हुए कि भारत परिवर्तन की शताब्दी का एक प्रमुख आधार बनेगा, श्री मोदी ने कहा कि भारत वर्तमान में वैश्विक विकास में सोलह प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है और साथ ही उन्होंने विश्वास जताया कि यह योगदान वर्ष दर वर्ष बढ़ता रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत आगे भी वैश्विक विकास को गति देगा और विश्व अर्थव्यवस्था के नए इंजन के रूप में उभरेगा। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद एक नई वैश्विक व्यवस्था उभरी थी, लेकिन सात दशक बाद वह व्यवस्था टूट रही है और दुनिया एक नई व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। उन्होंने इसके पीछे की वजहों पर सवाल उठाते हुए बताया कि पिछली व्यवस्था 'सबके लिए एक ही तरीका' के ​​दृष्टिकोण पर आधारित थी। यह मान लिया गया था कि विश्व अर्थव्यवस्था केंद्र में रहेगी, आपूर्ति श्रृंखलाएं मजबूत और विश्वसनीय बनी रहेंगी और देशों को केवल योगदानकर्ता के रूप में देखा जाएगा। उन्होंने कहा कि अब इस मॉडल को चुनौती मिल रही है और यह अपनी प्रासंगिकता खो रहा है, क्योंकि हर देश यह महसूस कर रहा है कि उसे खुद को मजबूती से विकसित करना होगा। 

श्री मोदी ने ज़ोर देते हुए कहा कि आज दुनिया जिस बात पर चर्चा कर रही है, भारत ने उसे 2015 में ही अपनी नीति का हिस्सा बना लिया था। उन्होंने याद दिलाया कि जब एक दशक पहले नीति आयोग की स्थापना हुई थी, तो उसके संस्थापक दस्तावेज़ में भारत का दृष्टिकोण साफ तौर पर बताया गया था, कि देश किसी भी विदेशी विकास मॉडल को आयात नहीं करेगा, बल्कि विकास के लिए अपना स्वयं का दृष्टिकोण अपनाएगा। उन्होंने कहा कि इस नीति ने भारत को अपनी ज़रुरतों और हितों के मुताबिक फैसले लेने का आत्मविश्वास दिया। यही एक प्रमुख कारण है कि उथल-पुथल भरे एक दशक में भी भारत की अर्थव्यवस्था कमजोर नहीं हुई, बल्कि लगातार मजबूत होती रही। 

प्रधानमंत्री ने कहा, “21वीं सदी के इस दशक में भारत सुधारों की तेज़ रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा है।” भारत की सबसे बड़ी ताकत इस बात में निहित है कि ये सुधार मजबूरी से नहीं, बल्कि दृढ़ विश्वास और प्रतिबद्धता से प्रेरित हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि उपस्थित विशेषज्ञों और आर्थिक नेताओं ने 2014 से पहले का वह दौर देखा है, जब सुधार केवल संकट या मजबूरी में ही किए जाते थे। उन्होंने याद दिलाया कि 1991 के सुधार तब आए, जब देश दिवालियापन के कगार पर था और उसे सोना गिरवी रखना पड़ा था। उन्होंने यह भी बताया कि पहले की सरकारों ने भी यही तरीका अपनाया था। जब मजबूरी सामने आई, तो सुधार लागू किए गए। श्री मोदी ने 26/11 आतंकी हमले के बाद एनआईए के गठन, बिजली क्षेत्र में ग्रिड फेल होने के बाद सुधार और खाद्य सुरक्षा अधिनियम के उदाहरण दिए, जिसे महंगाई बढ़ने और आदिवासी क्षेत्रों में भुखमरी फैलने के बाद लागू किया गया था, लेकिन तब भी इसका क्रियान्वयन ठीक से नहीं हुआ। प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि मजबूरी में किए गए सुधार कभी भी देश के लिए सही परिणाम नहीं देते। इसीलिए उनकी सरकार ने पूरी व्यवस्था को बदलने के लिए काम किया। श्री मोदी ने प्रक्रियागत सुधारों के बारे में विस्तार से बताया और कैबिनेट नोट्स का उदाहरण दिया, जिन्हें तैयार करने में पहले हफ़्तों या महीनों लग जाते थे, जिससे विकास की रफ्तार धीमी हो जाती थी। उनकी सरकार ने निर्णय लेने की प्रक्रिया को समयबद्ध और प्रौद्योगिकी आधारित बनाया, ताकि फाइलें अनिश्चित काल तक लंबित न रहें और इसके परिणाम आज स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। 

श्री मोदी ने रेलवे ओवरब्रिज की मंजूरी का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले इसमें सालों लग जाते थे और कई मंजूरियों की ज़रुरत होती थी, लेकिन अब इसे सुव्यवस्थित कर दिया गया है, जिससे बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास हुआ है। उन्होंने सीमावर्ती बुनियादी ढांचे पर भी प्रकाश डाला और याद दिलाया कि पहले सीमावर्ती क्षेत्रों में एक सामान्य सड़क के लिए भी दिल्ली से अनुमति लेनी पड़ती थी, जिससे स्थानीय निर्णय लेने में बाधा उत्पन्न होती थी। 2014 के बाद, उनकी सरकार ने स्थानीय प्रशासन को सशक्त बनाया, जिसके नतीजतन सीमावर्ती बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास हुआ। 

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली यूपीआई एक ऐसा सुधार है, जिसने वैश्विक प्रभाव डाला है। यह मात्र एक ऐप नहीं है, बल्कि नीति, प्रक्रिया और वितरण के समन्वय का बेहतरीन प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यूपीआई ने उन नागरिकों को बैंकिंग और वित्तीय लाभ पहुंचाए हैं, जिन्होंने कभी ऐसी सेवाओं तक पहुंच की कल्पना भी नहीं की थी। श्री मोदी ने आगे कहा कि डिजिटल इंडिया, डिजिटल भुगतान प्रणाली और जन धन-आधार-मोबाइल जैसी पहल मजबूरी से नहीं बल्कि दृढ़ विश्वास से उत्पन्न हुई है, जो उन नागरिकों को शामिल करने की दृष्टि से प्रेरित है, जो पहले वंचित रह गए थे। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि आज भी सरकार उसी दृढ़ विश्वास के साथ आगे बढ़ रही है। 

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि भारत का नया दृष्टिकोण बजट में भी झलकता है। उन्होंने बताया कि पहले बजट पर चर्चा केवल व्यय पर केंद्रित रहती थी, कितना पैसा आवंटित किया गया, क्या सस्ता या महंगा हुआ, कितनी नई ट्रेनों की घोषणा की गई और इन घोषणाओं के नतीजों पर कोई सवाल नहीं उठाया जाता था। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने बजट को व्यय के साथ-साथ परिणाम केंद्रित भी बनाया है। श्री मोदी ने बजट में एक और महत्वपूर्ण बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि 2014 से पहले बजट से बाहर के उधार पर चर्चा हावी रहती थी, जबकि अब बजट से बाहर के सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। उन्होंने बजट से बाहर के सुधारों का जिक्र किया, जैसे अगली पीढ़ी का जीएसटी, योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग का गठन, अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण, तीन तलाक विरोधी कानून और नारी शक्ति वंदन अधिनियम का अधिनियमन। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि चाहे बजट में घोषणा की जाए या न की जाए, सुधारों की रफ्तार लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में ही बंदरगाह और समुद्री क्षेत्र में सुधार किए गए, जहाज निर्माण उद्योग के लिए पहल की गईं, जन विश्वास अधिनियम के तहत सुधार किए गए, ऊर्जा सुरक्षा के लिए शांति अधिनियम लागू किया गया, श्रम कानून में सुधार किए गए, भारतीय न्याय संहिता लाई गई, वक्फ अधिनियम में सुधार किए गए और ग्रामीण रोजगार सृजन के लिए एक नया विकसित भारत जी राम जी विधेयक पारित किया गया। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पूरे वर्ष लगातार ऐसे अनेक सुधार किए गए हैं। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष के बजट ने सुधार की रफ्तार को और आगे बढ़ाया है और साथ ही उन्होंने पूंजीगत व्यय और प्रौद्योगिकी जैसे दो महत्वपूर्ण कारकों पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों की तरह, अवसंरचना पर खर्च बढ़ाकर लगभग 17 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है और पूंजीगत व्यय के कई गुना प्रभाव से विभिन्न क्षेत्रों में क्षमता, उत्पादकता और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। उन्होंने पांच विश्वविद्यालय टाउनशिप के निर्माण, द्वितीय और तृतीय स्तर के शहरों के लिए शहरी आर्थिक क्षेत्रों के विकास और सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर जैसी घोषणाओं का उल्लेख करते हुए इन्हें युवाओं और राष्ट्र के भविष्य में वास्तविक निवेश बताया। 

श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा कि पिछले एक दशक में प्रौद्योगिकी और नवाचार को विकास के प्रमुख चालक के रूप में मान्यता मिली है, साथ ही स्टार्टअप और हैकाथॉन संस्कृति को बढ़ावा दिया गया है। उन्होंने बताया कि भारत में अब विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत दो लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने जोखिम लेने की भावना को प्रोत्साहित किया है और नवाचार को पुरस्कृत किया है, जिसके परिणाम साफ दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष का बजट इन प्राथमिकताओं को और मजबूत करता है, विशेष रूप से बायोफार्मा, सेमीकंडक्टर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण घोषणाओं के साथ। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की आर्थिक शक्ति में वृद्धि के साथ-साथ सरकार ने राज्यों को भी सशक्त बनाया है। उन्होंने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि 2004 से 2014 के बीच राज्यों को कर हस्तांतरण के माध्यम से लगभग 18 लाख करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि 2014 से 2025 तक राज्यों को पहले ही 84 लाख करोड़ रुपये प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के बजट में प्रस्तावित लगभग 14 लाख करोड़ रुपये के साथ, उनकी सरकार के अंतर्गत राज्यों को कुल कर हस्तांतरण लगभग 100 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा, जिससे राज्य सरकारें देश भर में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में सक्षम होंगी। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के मुक्त व्यापार समझौतों पर वैश्विक स्तर पर व्यापक चर्चा और विश्लेषण हो रहा है, लेकिन उन्होंने इस बात पर ज्यादा ज़ोर देते हुए कहा कि 2014 से पहले ऐसे समझौते क्यों संभव नहीं थे। उन्होंने सवाल उठाया कि एक ही देश, युवा शक्ति और शासन प्रणाली होने के बावजूद, विकसित देशों के साथ व्यापक ऐसे व्यापार समझौते पहले क्यों नहीं हो पाए। उन्होंने साफ किया कि यह बदलाव सरकार की दूरदृष्टि, नीति, इरादे और भारत की बढ़ी हुई ताकत के चलते आया है। उन्होंने कहा कि ऐसे वक्त में जब भारत को नीतिगत गतिरोध और घोटालों से घिरे पांच सबसे कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, तब कोई भी देश भारत पर भरोसा करने को तैयार नहीं था। श्री मोदी ने कहा कि 2014 से पहले भारत का विनिर्माण आधार कमजोर था और पूर्ववर्ती सरकारों को डर था कि विकसित देशों के साथ व्यापार समझौतों से बाजार पर कब्जा हो सकता है। उन्होंने याद दिलाया कि उस निराशा भरे माहौल में भी, पूर्ववर्ती सरकार केवल चार व्यापक व्यापार समझौते ही कर पाई थी। इसके विपरीत पिछले एक दशक में भारत ने विभिन्न क्षेत्रों के 38 देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि आज का भारत आत्मविश्वास से भरा है, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार है और पिछले 11 सालों में हमने एक मजबूत विनिर्माण प्रणाली विकसित की है। उन्होंने कहा कि इस मजबूती और सशक्तिकरण ने पूरी दुनिया का भरोसा जीता है, जो भारत की व्यापार नीति में एक अहम बदलाव का आधार बना है और विकसित भारत की ओर यात्रा का एक अनिवार्य स्तंभ बन गया है। 

मौजूदा सरकार खासकर पिछड़े लोगों को प्राथमिकता देते हुए, हर नागरिक को विकास में भागीदार बनाने के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा कि पहले की सरकारों ने दिव्यांगजनों के लिए महज़ घोषणाएं कीं, लेकिन उनकी सरकार ने भारतीय सांकेतिक भाषा को संस्थागत रूप देकर सच्ची संवेदनशीलता का उदाहरण पेश किया। उन्होंने कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय ने लंबे समय से अधिकारों के लिए संघर्ष किया है और उनकी सरकार ने उन्हें सम्मान और सुरक्षा प्रदान करने के लिए कानून बनाया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पिछले एक दशक में लाखों महिलाओं को तीन तलाक की प्रथा से मुक्ति मिली है और लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले सालों में सरकारी तंत्र की सोच में भी बदलाव आया है और अब वह अधिक संवेदनशील हो गया है, जो मुफ्त राशन वितरण जैसी योजनाओं में साफ तौर पर दिखाई देता है। उन्होंने विपक्ष द्वारा इस योजना का मजाक उड़ाने की आलोचना करते हुए कहा कि जहां 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकल चुके हैं, वहीं मुफ्त राशन यह सुनिश्चित करता है कि नव-मध्यम वर्ग में प्रवेश करने वाले लोग फिर से गरीबी में न गिरें। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस योजना पर लाखों करोड़ों रुपये खर्च किए हैं, जिससे गरीबों और नव-मध्यम वर्ग को भरपूर सहायता मिली है। 

श्री मोदी ने दृष्टिकोण में भी अंतर पर बात करते हुए कहा कि कुछ लोग सवाल उठाते हैं कि वे 2047 और विकसित भारत की बात क्यों करते हैं और इसे अनिश्चित बताते हैं। उन्होंने जवाब दिया कि अगर स्वतंत्रता सेनानियों की सोच भी ऐसी ही होती, तो भारत को कभी आजादी नहीं मिलती। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जब राष्ट्र सर्वोपरि होता है, तो हर निर्णय और नीति देश के हित में होती है। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताते हुए कहा कि सरकार का दृष्टिकोण साफ है, भारत को विकसित बनाने की दिशा में निरंतर काम करना। उन्होंने आगे कहा कि चाहे आज की पीढ़ी 2047 तक रहे या न रहे, राष्ट्र और उसकी आने वाली पीढ़ियां तो रहेंगी ही, इसलिए वर्तमान पीढ़ी का यह कर्तव्य है कि वह भविष्य को सुरक्षित और उज्ज्वल बनाने के लिए स्वयं को समर्पित करे। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया को अब बदलावों के साथ जीने के लिए तैयार रहना होगा, क्योंकि उनका स्वरूप बदलता रहेगा और व्यवस्थाएं तेजी से परिवर्तित होंगी। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण पहले से ही दिखाई दे रहे बदलावों पर प्रकाश डाला और इस बात पर जोर दिया कि एआई भविष्य में और भी क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगा, जिसके लिए भारत तैयार है। श्री मोदी ने घोषणा करते हुए कहा कि कुछ ही दिनों में भारत में ग्लोबल एआई इम्पैक्ट समिट का आयोजन किया जाएगा, जिसमें कई देशों और विश्व भर के प्रौद्योगिकी क्षेत्र के अग्रणी नेता भाग लेंगे। उन्होंने यह आश्वासन देते हुए अपना संबोधन समाप्त किया कि हम सब मिलकर एक बेहतर दुनिया का निर्माण करेंगे और इसी विश्वास के साथ उन्होंने शिखर सम्मेलन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। 

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