प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज कनाडा के कनानस्किस में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान मैक्सिको की राष्ट्रपति महामहिम डॉ. क्लाउडिया शिनबाम पार्डो से मुलाकात की। यह दोनों नेताओं के बीच पहली मुलाकात थी। प्रधानमंत्री ने मैक्सिको की राष्ट्रपति को ऐतिहासिक जीत पर बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने आतंकवाद से भारत की लड़ाई में मैक्सिको के समर्थन के लिए राष्ट्रपति शिनबाम को धन्यवाद दिया। भारत और मैक्सिको के बीच दोस्ती के ऐतिहासिक रिश्तों पर बल देते हुए, दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, स्टार्ट-अप, नवाचार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा ऑटोमोटिव क्षेत्र में संबंधों को और बढ़ाने तथा लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने की दिशा में काम करने पर सहमति व्यक्त की। दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार और निवेश सहयोग पर संतोष व्यक्त करते हुए, नेताओं ने निकटवर्ती क्षेत्र के संदर्भ में मैक्सिको द्वारा पेश किए गए अवसरों पर चर्चा की। फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में बढ़ते अवसरों पर चर्चा हुई, जहां भारत किफायती गुणवत्ता वाली दवाओं और अन्य फार्मास्यूटिकल उत्पादों की आपूर्ति और उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके अलावा कृषि और समग्र स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग पर भी चर्चा हुई।

राष्ट्रपति शीनबाम ने प्रौद्योगिकी, नवाचार और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना में भारत की प्रगति की सराहना की। उन्होंने इन क्षेत्रों में भारत के साथ सहयोग की इच्छा व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि दोनों देशों को सेमीकंडक्टर, एआई, क्वांटम और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं तलाशनी चाहिए। नेताओं ने दोनों पक्षों के थिंक-टैंक समुदायों के बीच आगामी बैठकों और दोनों देशों के बीच जीवंत सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों पर भी ध्यान दिया, जो पर्यटन प्रवाह को भी बढ़ावा देगा।

साझेदार देशों के रूप में, नेताओं ने वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं पर विचारों का आदान-प्रदान किया। प्रधानमंत्री ने 2016 में मैक्सिको की यात्रा को याद किया और राष्ट्रपति शीनबाम को भारत आने का निमंत्रण दिया।

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कैबिनेट ने भारत के सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को मंजूरी दी
May 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज संसद में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करके भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करना है।

बिंदुवार विवरण:

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में 4 की वृद्धि अर्थात् 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है।

प्रमुख प्रभाव:

न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

व्यय:

न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर होने वाला व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान किया गया है कि “भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश और संसद के कानून द्वारा अधिक संख्या निर्धारित न किए जाने तक सात से अधिक अन्य न्यायाधीश नहीं होंगे…”।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के तहत एक अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम की धारा 2 में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 10 निर्धारित की गई थी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 द्वारा बढ़ाकर 13 कर दिया गया था और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा बढ़ाकर 17 कर दिया गया था। हालांकि, मंत्रिमंडल द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 1979 के अंत तक 15 न्यायाधीशों तक सीमित था, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर इस सीमा को हटाया दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को मूल अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से संशोधन करके अंतिम बार 30 से बढ़ाकर 33 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दिया गया था।