सभी की सलाह सुनें, लेकिन अपनी आदतों में तभी बदलाव करें जब आप चाहें: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने शिक्षकों को सलाह दी कि वे छात्रों को पहले से सूचित करें ताकि उनमें जिज्ञासा पैदा हो और उनकी समझ बेहतर हो
लक्ष्य पहुंच के भीतर होने चाहिए, लेकिन आसानी से पहुंच वाले नहीं - लक्ष्य निर्धारित करें और कार्य करें: प्रधानमंत्री
मन को विकसित करें, फिर उसे जोड़ें, और फिर अध्ययन के विषयों को व्यवस्थित करें, इससे आपको सफलता मिलेगी: प्रधानमंत्री
पढ़ाई, कौशल, आराम और शौक में संतुलन ही विकास की कुंजी है: प्रधानमंत्री
किताबें ज्ञान प्रदान करती हैं, लेकिन केवल अभ्यास ही आपको पेशेवर रूप से कुशल बनाता है: प्रधानमंत्री
अतीत पर ध्यान केंद्रित करने में समय बर्बाद न करें, आगे आने वाले जीवन के बारे में सोचें: प्रधानमंत्री
शिक्षा केवल परीक्षाओं के लिए नहीं बल्कि जीवन के लिए है, परीक्षाएं स्वयं की परीक्षा लेने के लिए होती हैं: प्रधानमंत्री
बनने की नहीं, करने की आकांक्षा रखें: प्रधानमंत्री
वर्तमान ईश्वर का सबसे बड़ा 'उपहार' है - यहीं और अभी जीएं: प्रधानमंत्री
आप किसी क्षण में जितना अधिक शामिल होते हैं, उतना ही अधिक समय तक आपको वह याद रहता है: प्रधानमंत्री
सहयोगात्मक शिक्षा सभी को बेहतर बनाने में मदद करती है: प्रधानमंत्री
दोहराएं और बुद्धिमान बनें: प्रधानमंत्री
स्कूल में अपनी नींव मजबूत करें, प्रतियोगी परीक्षाएं समय के साथ आएंगी: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने माता-पिता को सलाह दी कि वे बच्चों को उनकी क्षमता, योग्यता और रुचि के अनुसार विकसित होने दें
अपने शौक को व्यावहारिक उत्पाद बनाएं और उन्हें मुफ्त में साझा करें, फीडबैक से नए विचारों और सफलता को बढ़ावा मिलता है: प्रधानमंत्री
खुद को जानें, जीवन के सभी अनुभवों को जीएं: प्रधानमंत्री
परीक्षाएं त्योहारों की तरह होती हैं, उनका उत्‍सव मनाएं: प्रधानमंत्री
सच्चा आत्मविश्वास आंतरिक सत्य से आता है, अपने असली स्वरूप के प्रति सच्चे रहें: प्रधानमंत्री
आराम से जीवन को आकार नहीं मिलता - आपका जीने का तरीका आकार देता है: प्रधानमंत्री
सपना न देखना एक अपराध है - हमेशा सपना देखें: प्रधानमंत्री
खुद अपना सहारा बनें, अपनी खूबियों का जश्न मनाएं: प्रधानमंत्री
बड़े सपने देखें, कम डरें - आत्मकथाएं पढ़ें: प्रधानमंत्री
स्वच्छता बनाए रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता और कर्तव्य है: प्रधानमंत्री
प्रौद्योगिकी एक महान शिक्षक है, इसे अपनाएं, एआई हमारी क्षमताओं को बढ़ाता है: प्रधानमंत्री
एआई का बुद्धिमानी से उपयोग करें, अपनी बुद्धि को बढ़ाएं: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज 9वें परीक्षा पे चर्चा (पीपीसी) के दौरान छात्रों से बातचीत की। प्रधानमंत्री ने दिल्ली स्थित अपने आवास पर परीक्षा के प्रति जागरूक छात्रों के साथ अनौपचारिक संवाद किया।

आपकी शैली, आपकी गति

गुजरात के एक छात्र ने पूछा कि माता-पिता तो बच्चों की चिंता करते हैं और शिक्षक उनका समर्थन करते हैं, लेकिन समस्या तब आती है जब शिक्षक एक अध्ययन पद्धति सुझाते हैं, माता-पिता दूसरी पर जोर देते हैं, और छात्र अलग-अलग पद्धति अपना लेते हैं, जिससे वे इस बात को लेकर असमंजस में पड़ जाते हैं कि कौन सी पद्धति सही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सिलसिला जीवन भर चलता रहता है। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री रहते हुए भी लोग उन्हें अलग-अलग सलाह देते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जिस तरह घर में भाई-बहनों के खान-पान के तरीके अलग-अलग होते हैं—कुछ सब्जियों से शुरुआत करते हैं, कुछ दाल से, कुछ सब कुछ मिलाकर—हर किसी का अपना तरीका होता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आनंद अपनी पद्धति का पालन करने में ही मिलता है। श्री मोदी ने समझाया कि कुछ लोग रात में पढ़ना पसंद करते हैं, कुछ सुबह जल्दी, और हर किसी की अपनी लय होती है। उन्होंने बेईमानी के प्रति आगाह करते हुए बताया कि कैसे कुछ छात्र अपनी माताओं से कहते हैं कि वे सुबह पढ़ेंगे लेकिन फिर पढ़ते नहीं हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि छात्रों को अपनी पद्धति पर भरोसा करना चाहिए, सुझावों को ध्यान से सुनना चाहिए और सुधार केवल अपने व्यक्तिगत अनुभव से ही करने चाहिए, न कि केवल इसलिए कि कोई और ऐसा कहता है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने 'परीक्षा पे चर्चा' शुरू की थी, तब एक पद्धति थी, लेकिन समय के साथ उन्होंने उसमें सुधार किया, यहां तक ​​कि विभिन्न राज्यों में सत्र आयोजित किए, प्रारूप में बदलाव किया लेकिन मूल सिद्धांतों को बरकरार रखा। छात्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री का स्वभाव बहुत ही मिलनसार है और वे आसानी से उनके साथ घुलमिल जाते हैं। उन्होंने समझाया कि सभी को अलग-अलग तौर-तरीकों को सुनना चाहिए, उनमें से प्रत्येक से अच्छे गुण लेने चाहिए, अपने स्वयं के गुणों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और धीरे-धीरे उन्हें मजबूत करना चाहिए।

प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान, एक अन्य छात्र ने पूछा कि अक्सर छात्र स्कूल या शिक्षकों की गति से तालमेल नहीं बिठा पाते और छूटे हुए पाठों को पूरा करने की कोशिश में वे आगे के अध्यायों से भटक जाते हैं और पिछड़ जाते हैं। श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षकों को अपनी गति छात्रों से बस एक कदम आगे रखनी चाहिए, बहुत ज्यादा नहीं, ताकि लक्ष्य पहुंच के भीतर हो, लेकिन इतना आसान न हो कि उसे हासिल करना असंभव हो। जब छात्र ने एग्‍जाम वॉरियर मंत्र 26, "लक्ष्य पहुंच के भीतर होना चाहिए, किंतु आसानी से पहुंच योग्‍य भी ना हो," को याद दिलाया, तो प्रधानमंत्री ने उसकी इस बात की सराहना की। उन्होंने समझाया कि अगर शिक्षक पचास कदम आगे बढ़ जाते हैं, तो छात्र हार मान लेंगे, लेकिन जिस तरह एक किसान खेत जोतता है, उसी तरह शिक्षकों को छात्रों के मन को जोतना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि शिक्षकों को प्रत्येक सप्ताह पढ़ाए जाने वाले अध्यायों की घोषणा पहले से कर देनी चाहिए, ताकि छात्र पाठ से पहले पढ़ना, प्रश्न पूछना या ऑनलाइन खोज करना शुरू कर सकें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब वास्तविक शिक्षण शुरू होता है, तो जिज्ञासा उत्पन्न होती है, समझ गहरी होती है और एकाग्रता बढ़ती है। उन्होंने कहा कि अगर कोई अध्याय बहुत रोचक है, तो छात्र और भी अधिक जानने की इच्छा रखेंगे, जिससे पुनरावलोकन अधिक प्रभावी होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एक सरल विधि है। उन्‍होंने पूछा कि क्या इससे शिक्षक की गति की समस्या बनी रहेगी? जब छात्र ने हां में उत्तर दिया, तो श्री मोदी ने सुधार करते हुए कहा कि ऐसा नहीं होगा, क्योंकि छात्र अब पीछे छूट जाने का अहसास नहीं करेंगे, क्योंकि वे शिक्षक से एक कदम आगे बढ़ चुके हैं। उन्होंने निष्कर्ष निकाला, “पहले मन को विकसित करें, फिर उसे जोड़ें, और फिर अध्ययन के विषयों को व्यवस्थित करें। आप हमेशा छात्रों को सफल पाएंगे।” छात्रों ने कहा कि हर किसी को प्रधानमंत्री के साथ आमने-सामने बैठकर प्रश्न पूछने और बातचीत करने का अवसर नहीं मिलता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री ने उन्हें शिक्षकों से दो कदम पीछे रहने के बजाय दो कदम आगे रहने की सलाह दी, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि वे कभी पीछे न रह जाएं।

 

एक संगीतमय क्षण

 

सिक्किम की एक छात्रा ने बताया कि उसने तीन भाषाओं—हिन्‍दी, नेपाली और बंगाली—में 'हमारा भारत भूमि' शीर्षक से एक देशभक्ति गीत रचा है। प्रधानमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए पूछा कि क्या उसे कविता लिखना पसंद है, और उसकी पुष्टि पर उसे कविता सुनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने उसकी प्रशंसा करते हुए कहा कि उसने राष्ट्र की एकता—एक भारत, श्रेष्ठ भारत—की बात को बहुत खूबसूरती से व्यक्त किया है। इसके बाद श्री मोदी ने एक अन्य छात्रा, मानसी को गाने के लिए कहा। मानसी ने अपनी माता द्वारा रचित एक गीत प्रस्तुत किया, जो विद्यार्थियों को समर्पित था। प्रधानमंत्री ने उसकी प्रशंसा की और उसे अपनी माता को अपनी ओर से बधाई देने के लिए कहा। छात्रा ने बताया कि वह एक यूट्यूब चैनल, फेसबुक पेज और इंस्टाग्राम अकाउंट चलाती है, जिसके फेसबुक पर 1.5 लाख फॉलोअर हैं। प्रधानमंत्री ने आश्चर्य और प्रशंसा व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं से मिलना गर्व की बात है।

श्री मोदी ने सभी विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए बताया कि उन्होंने असम के गमोंसा से उनका अभिवादन किया है, जिसे वे अपना सबसे प्रिय मानते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गमोंसा असम और उत्तर-पूर्वी भारत में महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है, जिसे इस क्षेत्र की महिलाएं घर पर ही बनाती हैं, जो उनकी शक्ति और योगदान को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि बच्चों को सम्मान के प्रतीक के रूप में गमोंसा भेंट करना उनकी हार्दिक इच्छा थी।

 

उद्देश्यपूर्ण तैयारी

छात्र सबावत वेंकटेश ने छात्रों के बीच व्याप्त भ्रम और भय को देखते हुए प्रधानमंत्री से पूछा कि कौशल या अंक में से कौन अधिक महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जीवन में संतुलन आवश्यक है, चाहे वह खाने और सोने के बीच हो, पढ़ाई और खेलने के बीच हो, या कौशल और अंकों के बीच हो। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी एक तरफ बहुत अधिक झुकाव असंतुलन पैदा करता है, जबकि उचित संतुलन स्थिरता सुनिश्चित करता है। उन्होंने समझाया कि कौशल दो प्रकार के होते हैं—जीवन कौशल और व्यावसायिक कौशल—और दोनों ही समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ज्ञान, अवलोकन और अध्ययन के बिना कोई भी कौशल विकसित नहीं हो सकता, और कौशल की शुरुआत ज्ञान से होती है।

श्री मोदी ने उदाहरणों के साथ समझाया कि जीवन कौशल के बिना, खाना पकाने या रेलवे स्टेशन पर टिकट खरीदने जैसे दैनिक कार्यों में भी कठिनाई हो सकती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जीवन कौशल पूर्ण रूप से विकसित किए जाने चाहिए, जिनमें अनुशासन, आत्मविश्वास और अनुकूलनशीलता शामिल हैं। व्यावसायिक कौशल के बारे में उन्होंने बताया कि डॉक्टरों को अपने कौशल को लगातार अद्यतन करते रहना चाहिए, क्योंकि केवल किताबों से कोई हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं बन जाता—वास्तविक कौशल रोगियों के साथ काम करने से आता है। इसी प्रकार, वकीलों को संवैधानिक प्रावधानों के ज्ञान से परे न्यायालय कौशल विकसित करने के लिए वरिष्ठों के मार्गदर्शन में अभ्यास करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि व्यावसायिक कौशल के लिए निरंतर शिक्षण और नई तकनीकों के अनुकूल होना आवश्यक है, यहां तक ​​कि 40 वर्ष की आयु में भी, क्योंकि चिकित्सा और अन्य क्षेत्रों में प्रगति के लिए निरंतर अद्यतन की आवश्यकता होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा और कौशल जुड़वां भाई-बहन हैं, अविभाज्य हैं, और कौशल जीवन में अपरिहार्य है।

 

अंकों से इतर एक माध्यम के रूप में शिक्षा

इसके अलावा, मणिपुर के इम्फाल स्थित सैनिक स्कूल के एक छात्र ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के प्रति प्रशंसा व्यक्त करते हुए कहा कि उनका जन्मदिन प्रधानमंत्री के जन्मदिन के साथ ही पड़ता है। जवाब में, श्री मोदी ने कहा कि वे बीते हुए वर्षों को नहीं गिनते बल्कि आने वाले वर्षों पर ध्यान केंद्रित करते हैं और छात्रों से आग्रह किया कि वे अतीत में खोए रहने में समय बर्बाद न करें बल्कि भविष्य के बारे में सोचें।

पिछले वर्षों के प्रश्नों पर आधारित परीक्षा की तैयारी रणनीतियों के बारे में पूछे जाने पर, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जब प्रश्नपत्र कठिन लगते हैं तो छात्रों को अक्सर परेशानी होती है, इसका कारण यह नहीं है कि प्रश्नपत्र पाठ्यक्रम से बाहर हैं, बल्कि यह है कि उनका ध्यान केवल दोहराए जाने वाले प्रश्नों के पैटर्न पर ही केंद्रित रहता है। उन्होंने कहा कि यह समस्या उनके स्वयं के छात्र जीवन में भी मौजूद थी और कभी-कभी केवल अंकों पर ध्यान केंद्रित करने वाले शिक्षकों द्वारा इसे और बढ़ावा दिया जाता है। श्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि अच्छे शिक्षक पूर्ण पाठ्यक्रम को कवर करके और जीवन में इसकी प्रासंगिकता को समझाकर सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करते हैं। क्रिकेट में गेंदबाज का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि केवल कंधे की मांसपेशियों को मजबूत करना पर्याप्त नहीं है; व्यायाम करना, योग करना, पूरे शरीर और मन को मजबूत करना, आहार को संतुलित करना और पर्याप्त नींद लेना आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि शिक्षा भी केवल परीक्षाओं के लिए नहीं बल्कि जीवन के लिए है, और परीक्षाएं स्वयं की परीक्षा करने के लिए होती हैं। अंक अंतिम लक्ष्य नहीं हैं; जीवन का संपूर्ण विकास ही अंतिम लक्ष्य है। उन्होंने सलाह दी कि केवल दस प्रश्नों या पैटर्न पर ध्यान केंद्रित करना सीमित सोच है, और यद्यपि इनका अभ्यास किया जा सकता है, किंतु ये तैयारी का केवल एक छोटा सा हिस्सा होना चाहिए, जबकि अधिकांश प्रयास समग्र शिक्षा पर केंद्रित होना चाहिए।

विशेषकर प्री-बोर्ड परीक्षाओं के दौरान पढ़ाई के दबाव को संतुलित करने के विषय पर पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एक आम चिंता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा को बाध्यता या बोझ नहीं समझना चाहिए, बल्कि इसमें पूर्ण भागीदारी आवश्यक है। पूर्ण भागीदारी के बिना, अधूरी शिक्षा सफलता की ओर नहीं ले जा सकती। उन्होंने अंकों को लेकर अत्यधिक जुनून के प्रति आगाह करते हुए पूछा कि क्या किसी को पिछले वर्ष बोर्ड परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्र का नाम याद है? जब छात्र ने 'नहीं' में उत्तर दिया, तो श्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि ऐसी उपलब्धियों की भले ही संक्षिप्त प्रशंसा की जाए, लेकिन वे जल्द ही भुला दी जाती हैं, जिससे पता चलता है कि अंकों का महत्व कितना कम है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे अपने मन को अंकों से न जोड़ें, बल्कि इस बात पर ध्यान केंद्रित करें कि उनका जीवन किस दिशा में जा रहा है, और न केवल कक्षाओं या परीक्षा कक्षों में, बल्कि जीवन में भी निरंतर स्वयं को परखते रहें।

 

कम दबाव, अधिक शिक्षण

संवादात्मक सत्र को आगे बढ़ाते हुए, एक छात्र ने प्रधानमंत्री श्री मोदी से पूछा कि पढ़ाई के दौरान शांत और एकाग्र कैसे रहें, क्योंकि कई तरह के विचार मन में आते हैं और पाठ जल्दी भूल जाते हैं। प्रधानमंत्री ने एक उदाहरण देते हुए उत्तर दिया: “जिस प्रकार आप आज यहां आए हैं, 25 साल बाद भी अगर कोई आपसे इस कार्यक्रम के बारे में पूछे, तो क्या आप भूल जाएंगे या याद रखेंगे?” छात्र ने उत्तर दिया कि यह हमेशा एक विशेष क्षण के रूप में याद रहेगा। श्री मोदी ने समझाया कि ऐसा इसलिए है क्योंकि छात्र पूरी तरह से वर्तमान में लीन रहता है, जिससे स्थायी स्मृति सुनिश्चित होती है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यादें तभी बनी रहती हैं जब व्यक्ति पूरी तरह से किसी गतिविधि में शामिल होता है और अपने अनुभवों को दोस्तों के साथ साझा करता है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे कम आत्मविश्वास वाले लोगों से दोस्ती करें और उन्हें सिखाएं, साथ ही अपनी समझ को पुष्ट करने के लिए कुछ मिनटों के लिए अपने से अधिक प्रतिभाशाली साथियों से मार्गदर्शन भी लें। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस दोहरे लाभ से नए विचार आते हैं, सोच का दायरा बढ़ता है और एकाग्रता मजबूत होती है।

पंजाब के एक अन्य छात्र ने प्रधानमंत्री श्री मोदी से बातचीत करते हुए उनका अभिवादन किया। उन्होंने कक्षा 12 के उन छात्रों के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में पूछा जो बोर्ड परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी एक साथ कर रहे हैं, क्योंकि इन परीक्षाओं के पैटर्न अलग-अलग हैं और समय-सारणी आपस में टकराती है। प्रधानमंत्री ने उनकी चिंता को समझाते हुए इसकी तुलना क्रिकेट और फुटबॉल एक साथ खेलने से की और इस बात पर जोर दिया कि 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि छात्र अपने पाठ्यक्रम को अच्छी तरह से समझ लें, तो प्रतियोगी परीक्षाओं में अपने आप ही सफल हो जाएंगे और इसके लिए अलग से प्रयास करने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि वे बच्चों को उनकी क्षमता, योग्यता और रुचि के अनुसार आगे बढ़ने दें।

 

अंकों, गेमिंग और हास्‍य के बीच संतुलन

एक छात्र ने पढ़ाई पर ही ध्यान केंद्रित करने के सामाजिक दबाव के बावजूद गेमिंग में अपना भविष्य बनाने के बारे में सवाल उठाया। प्रधानमंत्री ने समझाया कि माता-पिता अक्सर शुरुआत में हतोत्साहित करते हैं, लेकिन सफलता मिलने पर वे गर्व महसूस करते हैं और जश्न मनाते हैं। उन्होंने छात्र को पंचतंत्र या पौराणिक कथाओं जैसी भारत की समृद्ध कहानियों पर आधारित गेम बनाकर गेमिंग में अपनी रुचि को रचनात्मक रूप से इस्तेमाल करने और पहचान हासिल करने के लिए उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गेमिंग एक ऐसा कौशल है जिसमें गति और सतर्कता की आवश्यकता होती है, जो आत्म-विकास में योगदान देता है, और उच्च गुणवत्ता वाले गेम में विशेषज्ञता हासिल करने पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। उन्होंने गेमिंग में जुए के खिलाफ चेतावनी दी, यह देखते हुए कि ऐसे प्रचलनों को रोकने के लिए कानून बनाए गए हैं, और इस बात पर बल दिया कि गेमिंग को एक रचनात्मक कौशल के रूप में अपनाया जाना चाहिए।

छात्रों ने प्रधानमंत्री के आवास पर जाने को लेकर उत्साह व्यक्त किया और उनके दोस्ताना व्यवहार, उनके सवालों में वास्तविक रुचि और उनके द्वारा दिए गए विचारशील उत्तरों की सराहना की।

 

डर को ताकत में बदलना - तनाव, समय और आत्मविश्वास का प्रबंधन

 

छात्रों ने बताया कि 'एग्जाम वॉरियर' पढ़ने से परीक्षाओं के प्रति उनका नजरिया कैसे बदल गया। एक छात्र ने कहा कि पहले परीक्षाएं तनाव और डर का कारण बनती थीं, लेकिन किताब पढ़ने के बाद परीक्षाएं दोस्त बन गईं। दूसरे छात्र ने बताया कि पहले वे दूसरों से तुलना करके चिंतित रहते थे, लेकिन अब उन्हें एहसास हुआ कि उनकी अपनी तकनीक अनोखी और कारगर है। एक छात्र ने कहा कि समय प्रबंधन हमेशा से उनके लिए एक चुनौती रहा है, लेकिन 'एग्जाम वॉरियर' से सीखने के बाद उन्होंने जल्दी उठने और कामों को बेहतर ढंग से करने का संकल्प लिया।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने समय के प्रबंधन का एक सरल तरीका सुझाया: सोने से पहले डायरी में कार्यों को लिखना, अगले दिन उनका मिलान करना और यह विश्लेषण करना कि कुछ कार्य अधूरे क्यों रह गए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समय का सदुपयोग करना सीखने से तनाव और थकान दूर होती है। उन्‍होंने कहा कि समय का सदुपयोग करने की उनकी अपनी आदत उन्हें अनेक जिम्मेदारियों के बावजूद तनावमुक्त रखती है।

छात्रों ने बताया कि गणित जैसे विषयों के प्रति उनका डर अब रुचि में बदल गया है। एक छात्र ने कहा कि गणित कभी उनके लिए एक भूत जैसा था, लेकिन अब जुनून बन गया है। प्रधानमंत्री ने वैदिक गणित के अध्ययन को प्रोत्साहित करते हुए इसे आनंददायक और जादुई बताया और रुचि बढ़ाने के लिए इस तरह की विधियों को मित्रों के साथ साझा करने का सुझाव दिया।

एक अन्य छात्र ने बताया कि परीक्षा की तारीखें पहले डर का कारण बनती थीं, लेकिन परीक्षा को उत्सव की तरह मनाने के इस पुस्तक के मंत्र ने उन्हें प्रेरणा दी। प्रधानमंत्री ने सलाह दी कि 'परीक्षा पे चर्चा' से मिलने वाले सबक परिवार के सदस्यों के साथ भी साझा किए जाने चाहिए, क्योंकि वे भी इससे समान रूप से लाभान्वित हो सकते हैं।

छात्रों ने कम अंकों के डर पर काबू पाने के अपने अनुभवों पर विचार व्यक्त किया और यह समझा कि अंक ही सब कुछ नहीं होते। उन्होंने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के असफलताओं के बावजूद दृढ़ रहने के उदाहरण का हवाला दिया। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि तनाव कम होने से गायन, चित्रकला या कविता लेखन जैसी नई कलाओं को सीखने का अवसर मिलता है और उन्होंने रचनात्मक गतिविधियों में रुचि रखने वाले छात्रों की सराहना की।

पुस्तक से प्राप्त आत्मविश्वास ने छात्रों को प्रस्तुतियों के भय को दूर करने में भी मदद की। प्रधानमंत्री ने समझाया कि आत्मविश्वास सत्य और अनुभव से आता है, ठीक वैसे ही जैसे आम लोग अपने द्वारा देखी गई घटनाओं का वर्णन करते समय स्पष्ट रूप से बोल पाते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि छात्रों का आत्मविश्वास उनके अपने प्रयासों और उपलब्धियों की सच्चाई से उत्पन्न होता है।

एक छात्र ने बताया कि साहित्य के लंबे प्रश्नपत्र पहले उन्हें डरा देते थे, लेकिन अब वे तेजी से लिखने और लिखावट सुधारने का अभ्यास करते हैं। प्रधानमंत्री ने प्रश्नपत्र लिखने से पहले 30 सेकंड का विराम लेने, गहरी सांसें लेने और मन को शांत करने जैसी तकनीकों का सुझाव देते हुए कहा कि गलतियां ज्ञान की कमी के कारण नहीं बल्कि जल्दबाजी के कारण होती हैं। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि सही तकनीकों और आत्मविश्वास के साथ छात्र परीक्षा के भय पर काबू पाकर सफल हो सकते हैं।

 

शोर के बीच डटे रहना

एक छात्र ने पूछा कि घर के शोर और माता-पिता के सहयोग के अभाव में पढ़ाई कैसे की जाए। प्रधानमंत्री ने सामान से लदी बैलगाड़ी पर बैठकर पढ़ रहे एक बच्चे का वीडियो याद दिलाया और इस बात पर जोर दिया कि सफलता के लिए आराम जरूरी नहीं है। उन्होंने बताया कि बोर्ड परीक्षाओं में कई शीर्ष अंक प्राप्त करने वाले छात्र छोटे, वंचित गांवों से आते हैं और उन्होंने उन नेत्रहीन छात्राओं की प्रेरणादायक कहानी साझा की जिन्होंने कठिनाइयों के बावजूद क्रिकेट में जीत हासिल की। ​​उन्होंने कहा कि जीवन आरामदेह परिस्थितियों से नहीं, बल्कि जीने के तरीके से आकार लेता है।

तमिलनाडु के एक अन्य छात्र ने परीक्षा की तैयारी में बाधा डालने वाले मेहमानों का मुद्दा उठाया। प्रधानमंत्री ने सलाह दी कि मेहमानों से उनके बचपन के अनुभवों के बारे में पूछकर स्थिति को सकारात्मक बनाया जाए, जिससे ध्यान दूसरी ओर जाए और दबाव कम हो।

 

बड़े सपने, उससे भी बड़े कार्य

लद्दाख के एक छात्र ने पूछा कि क्या बच्चों को बड़े सपने देखने चाहिए और उन सपनों को साकार करने की शुरुआत कैसे की जाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि सपने न देखना एक अपराध है, लेकिन सपनों को साकार करने के लिए कर्म आवश्यक हैं। उन्होंने समझाया कि अंतरिक्ष यात्री बनने जैसी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अध्ययन, जीवनी और गहन रुचि की आवश्यकता होती है, साथ ही उन्होंने उपहास से बचने के लिए सपनों को सार्वजनिक न करने की चेतावनी भी दी। उन्होंने छात्रों को अपने सपनों को लिखकर निजी तौर पर संजोने के लिए प्रोत्साहित किया।

बड़े सपनों को साकार करने के लिए दैनिक आदतों से संबंधित एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए, श्री मोदी ने महान व्यक्तित्वों की जीवनियां पढ़ने का सुझाव दिया। उन्होंने समझाया कि उनके संघर्षों और शुरुआती कदमों को समझने से छात्रों को उनसे जुड़ाव महसूस करने और आत्मविश्वास प्राप्त करने में मदद मिलती है, जिससे उन्हें चरण दर चरण प्रगति करने का तरीका पता चलता है।

इसके बाद एक छात्र ने प्रधानमंत्री को समर्पित एक भावपूर्ण कविता सुनाई, जिसमें उन्हें भारत का गौरव, मानवता का सेवक और राष्ट्र के सपनों को साकार करने वाला नेता बताया गया। प्रधानमंत्री ने कविता की हार्दिक प्रशंसा की और छात्र की सराहना की।

जब प्रधानमंत्री शिक्षक बने

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि वे स्वतंत्रता शताब्दी के अवसर पर 2047 तक एक विकसित भारत की कल्पना करते हैं। उन्‍होंने इस बात पर जोर दिया कि उस समय 35 से 45 वर्ष की आयु के युवा इस सपने को साकार करने के लिए अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर होंगे। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी 1915 में अफ्रीका से लौटे और 1947 तक स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया, तथा भगत सिंह जैसे नेताओं के बलिदान ने पीढ़ियों को स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यदि इतनी ऐतिहासिक स्वतंत्रता प्राप्त की जा सकती है, तो सामूहिक प्रयासों से एक विकसित भारत का सपना निश्चित रूप से साकार किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने छात्रों से विकसित भारत के प्रति अपनी व्यक्तिगत प्रतिबद्धताओं को लिखने का आग्रह किया और उनसे कौशल विकास, आत्मविश्वास और स्वदेशी उत्पादों के उपयोग से संबंधित पांच कार्यों की पहचान करने को कहा, जिन पर वे विचार कर सकते थे। उन्होंने छात्रों के जवाबों पर ध्यान दिया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि स्वदेशी को अपनाना मन को तैयार करने और औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागने से शुरू होता है। उन्‍होंने कहा कि विदेशी वस्तुओं के प्रति आकर्षण स्कूलों में भी बना हुआ है। उन्होंने छात्रों को निर्देश दिया कि वे अपने दैनिक उपयोग की सभी वस्तुओं की सूची बनाएं, विदेशी उत्पादों की पहचान करें और धीरे-धीरे उन्हें भारतीय विकल्पों से बदलें, यह सुनिश्चित करते हुए कि एक वर्ष के भीतर उनके घर भारतीय वस्तुओं से भर जाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि भारतीय स्वयं अपने उत्पादों पर गर्व नहीं करेंगे, तो दुनिया भी नहीं करेगी। उन्होंने देरी के लिए "इंडियन टाइम" को दोष देने की प्रवृत्ति की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह के रवैये से राष्ट्र का अपमान होता है, और स्वच्छता से शुरू करते हुए कर्तव्य पालन का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विकसित राष्ट्र सफाईकर्मियों के कारण नहीं, बल्कि नागरिकों द्वारा कूड़ा न फैलाने के कारण स्वच्छ दिखाई देते हैं। उन्‍होंने आग्रह करते हुए कहा कि भारतीयों को स्वच्छता के मामले में कभी समझौता न करने का संकल्प लेना चाहिए, यहां तक ​​कि किसी के द्वारा फेंके गए कूड़े को स्वयं उठा लेना चाहिए, ताकि कूड़ा फेंकने वाला शर्मिंदा हो। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य बनाए रखना भी एक कर्तव्य है, और यदि नागरिक इन जिम्मेदारियों को निभाते हैं, तो कोई भी ताकत भारत को विकसित होने से नहीं रोक सकती, और युवावस्था में पहुंचने पर युवाओं को इसका सबसे अधिक लाभ मिलेगा। उन्होंने पूछा कि क्या उन्हें ऐसा काम करना चाहिए जिससे उन्हें लाभ मिले, और छात्रों ने हां में जवाब दिया। फिर उन्होंने वर्तमान पीढ़ी के लिए विशेष रूप से प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उपलब्ध विशाल अवसरों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जहां उनके युग में ऐसे अवसर नहीं थे, वहीं आज के युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता का बुद्धिमानी से उपयोग करना चाहिए। उन्होंने समझाया कि केवल जीवनी का सारांश देने के लिए एआई का उपयोग करने से कोई खास लाभ नहीं होता, लेकिन एआई से उम्र और रुचियों के आधार पर जीवनी की अनुशंसा करने के लिए कहना और फिर उन पुस्तकों को पढ़ना वास्तविक विकास की ओर ले जाता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एआई केवल मनोरंजन का साधन नहीं होना चाहिए, बल्कि शक्ति और ज्ञान बढ़ाने का साधन होना चाहिए। छात्रों ने एआई के उपयोग पर उनके मार्गदर्शन की सराहना की और इसे अपने स्वयं के तकनीकी प्रयासों के लिए प्रासंगिक बताया।

प्रधानमंत्री ने एक छात्र द्वारा प्रस्तुत कर्नाटक शास्त्रीय संगीत शैली की बांसुरी सुनी और उसकी प्रशंसा की। उन्होंने एक छात्र द्वारा भेंट किए गए हस्तनिर्मित गुलदस्ते की सराहना की और बसंत पंचमी के दौरान उत्तराखंड की पारंपरिक महत्ता की ओर ध्‍यान दिलाया। उन्होंने त्रिपुरा की परंपराओं के संदर्भों को भी स्वीकार किया और छात्रों द्वारा भेंट की गई जैविक चाय और असमिया गमछा की प्रशंसा करते हुए उन्हें कविता लेखन जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने सभी को हार्दिक धन्यवाद और शुभकामनाएं दीं।

आगामी 'परीक्षा पे चर्चा' के कुछ अंश साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कई छात्रों ने देश के विभिन्न हिस्सों में 'परीक्षा पे चर्चा' आयोजित करने का सुझाव दिया था, जो इस विशेष एपिसोड में झलकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परिवार में भाई-बहनों के अच्छे गुणों से सीखना चाहिए और महान बनने की आकांक्षा रखना गलत नहीं है, लेकिन इसे दूसरों से तुलना करने से नहीं जोड़ना चाहिए। उन्होंने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन दोनों में शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला और साथ ही इस बात पर भी बल दिया कि खेल जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने छात्रों को अपने विचार और अनुभव खुलकर साझा करने के लिए आमंत्रित किया।

अगला एपिसोड 9 फरवरी, 2026 को सुबह 10 बजे प्रसारित होगा

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आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

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यह नया भारत है, जो अपने विकास के लिए कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ता: पीएम मोदी
March 23, 2026
Today, India is moving forward with a new confidence; Now India faces challenges head-on: PM
From the Gulf to the Global West and from the Global South to neighbouring countries, India is a trusted partner for all: PM
What gets measured gets improved and ultimately gets transformed: PM
This is the new India, It is leaving no stone unturned for development: PM

नमस्कार!

पिछले कुछ समय में मुझे एक-दो बार टीवी9 भारतवर्ष देखने का मौका मिला है। नॉर्मली भी युद्धों और मिसाइलों पर आपका बहुत फोकस होता है और आजकल तो आपको कंटेंट की ओवरफीडिंग हो रही है। बड़े-बड़े देश टीवी9 को इतना सारा कंटेंट देने पर तुले हुए हैं, लेकिन On a Serious Note, आज विश्व जिन गंभीर परिस्थितियों से गुजर रहा है, वो अभूतपूर्व है और बेहद गंभीर है। और इन स्थितियों के बीच, आज टीवी-9 नेटवर्क ने विचारों का एक बेहद महत्वपूर्ण मंच बनाया है। आज इस समिट में आप सभी India and the world, इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं। मैं आप सबको बधाई देता हूं। इस समिट के लिए अपनी शुभकामनाएं देता हूं। सभी अतिथियों का अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

आज जब दुनिया, conflicts के कारण उलझी हुई है, जब इन conflicts के दुष्प्रभाव पूरी दुनिया पर दिख रहे हैं, तब India and the world की बात करना बहुत ही प्रासंगिक है। भारत आज वो देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। 2014 के पहले की स्थितियों को पीछे छोड़कर के आज भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। अब भारत चुनौतियों को टालता नहीं है बल्कि चुनौतियों से टकराता है। आप बीते 5-6 साल में देखिए, कोरोना की महामारी के बाद चुनौतियां एक के बाद एक बढ़ती ही गई हैं। ऐसा कोई साल नहीं है, जिसने भारत की, भारतीयों की परीक्षा न ली हो। लेकिन 140 करोड़ देशवासियों के एकजुट प्रयास से भारत हर आपदा का सामना करते हुए आगे बढ़ रहा है। इस समय युद्ध की परिस्थितियों में भी भारत की नीति और रणनीति देखकर, भारत का सामर्थ्य देखकर दुनिया के अनेकों देश हैरान हैं। हमारे यहां कहावत है, सांच को आंच नहीं। 28 फरवरी से दुनिया में जो उथल-पुथल मची है, इन कठोर विपरीत परिस्थितियों में भी भारत प्रगति के, विकास के, विश्वास के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इन 23 दिनों में भारत ने अपनी Relationship Building Capacity दिखाई है, Decision Making Capacity दिखाई है और Crisis Management Capacity दिखाई है।

साथियों,

आज जब दुनिया इतने सारे खेमों में बंटी हुई है, भारत ने अभूतपूर्व और अकल्पनीय bridges बनाए हैं। Gulf से लेकर Global West तक, Global South से लेकर पड़ोसी देशों तक भारत सभी का trusted partner है। कुछ लोग पूछते हैं, हम किसके साथ हैं? तो उनको मेरा जवाब यही है कि हम भारत के साथ हैं, हम भारत के हितों के साथ हैं, शांति के साथ हैं, संवाद के साथ हैं।

साथियों,

संकट के इसी समय में जब global supply chains डगमगा रही हैं, भारत ने diversification और resilience का मॉडल पेश किया है। Energy हो, fertilizers हों या essential goods अपने नागरिकों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए भारत ने निरंतर प्रयास किया है और आज भी कर रहे है।

साथियों,

जब राष्ट्रनीति ही राजनीति का मुख्य आधार हो, तब देश का भविष्य सर्वोपरि होता है। लेकिन जब राजनीति में व्यक्तिगत स्वार्थ हावी हो जाता है, तब लोग देश के फ्यूचर के बजाय अपने फ्यूचर के बारे में सोचते हैं। आप ज़रा याद कीजिए 2004 से 2010 के बीच क्या हुआ था? तब कांग्रेस सरकार के समय पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों का संकट आया था और तब कांग्रेस ने देश की नहीं बल्कि अपनी सत्ता की चिंता की। उस वक्त कांग्रेस ने एक लाख अड़तालीस हज़ार करोड़ रुपए के ऑयल बॉन्ड जारी किए थे और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने खुद कहा था कि वो आने वाली पीढ़ी पर कर्ज का बोझ डाल रहे हैं। यह जानते हुए भी कि ऑयल बॉन्ड का फैसला गलत है, जो रिमोट कंट्रोल से सरकार चला रहे थे, उन लोगों ने अपनी सत्ता बचाने के लिए यह गलत निर्णय किया क्योंकि जवाबदेही उस समय नहीं होनी थी, उस बॉन्ड पर री-पेमेंट 2020 के बाद होनी थी।

साथियों,

बीते 5-6 वर्षों में हमारी सरकार ने कांग्रेस सरकार के उस पाप को धोने का काम किया है, और इस धुलाई का खर्चा कम नहीं आया है, ऐसी लाँड्री आपने देखी नहीं होगी। 1 लाख 48 हज़ार करोड़ रुपए की जगह, देश को 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पेमेंट करनी पड़ी क्योंकि इसमें ब्याज भी जुड़ गया था। यानी हमने करीब-करीब दोगुनी राशि चुकाने के लिए मजबूर हुए। आजकल कांग्रेस के जो नेता बयानों की मिसाइलें दाग रहे हैं, मिसाइल आई तो टीवी9 को मजा आएगा, उनकी इस विषय का जिक्र आते ही बोलती बंद हो जाती है।

साथियों,

पश्चिम एशिया में बनी परिस्थितियों पर मैंने आज लोकसभा में अपना वक्तव्य दिया है। दुनिया में जहां भी युद्ध हो रहे हैं, वो भारत की सीमा से दूर हैं। लेकिन आज की व्यवस्थाओं में कोई भी देश युद्धों से दुष्प्रभाव से दूर रहे, ऐसा संभव नहीं होता। अनेक देशों में तो स्थिति बहुत गंभीर हो चुकी है। और इन हालातों में हम देख रहे हैं कि राजनीतिक स्वार्थ से भरे कुछ लोग, कुछ दल, संकट के इस समय में भी अपने लिए राजनीतिक अवसर खोज रहे हैं। इसलिए मैं टीवी9 के मंच से फिर कहूंगा, यह समय संयम का है, संवेदनशीलता का है। हमने कोरोना महासंकट के दौरान भी देखा है, जब देशवासी एकजुट होकर संकट का सामना करते हैं, तो कितने सार्थक परिणाम आते हैं। इसी भाव के साथ हमें इस युद्ध से बनी परिस्थितियों का सामना करना है।

साथियों,

दुनिया की हर उथल-पुथल के बीच, भारत ने अपनी प्रगति की गति को भी बनाए रखा है। अगर मैं 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद, बीते 23 दिनों का ही ब्यौरा दूं, तो पूरब से पश्चिम तक, उत्तर से दक्षिण तक देश में हजारों करोड़ के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का काम हुआ है। दिल्ली मेट्रो रेल के महत्वपूर्ण कॉरिडोर्स का लोकार्पण, सिलचर का हाई स्पीड कॉरिडोर का शिलान्यास, कोटा में नए एयरपोर्ट का शिलान्यास, मदुरै एयरपोर्ट को इंटरनेशनल एयरपोर्ट का दर्जा देना, ऐसे अनेक काम बीते 23 दिनों में ही हुए हैं। बीते एक महीने के दौरान ही औद्योगिक विकास को गति देने के लिए भव्य स्कीम को मंजूरी दी गई है। इसके तहत देशभर में 100 plug-and-play industrial parks विकसित किए जाएंगे। देश में Small Hydro Power Development Scheme को भी हरी झंडी दी गई है। इससे आने वाले वर्षों में 1,500 मेगावाट नई hydro power capacity जोड़ी जाएगी। इसी दौरान जल जीवन मिशन को साल 2028 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। किसानों के हित में भी अनेक बड़े निर्णय लिए गए हैं। बीते एक महीने में ही पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। और जो हमारे MSMEs हैं, जो हमारे निर्यातक हैं, उनके लिए भी करीब 500 करोड़ रुपए के राहत पैकेज की भी घोषणा की गई है। यह सारे कदम इस बात का प्रमाण हैं कि विकसित भारत बनाने के लिए देश कितनी तेज गति से काम कर रहा है।

साथियों,

Management की दुनिया में एक सिद्धांत कहा जाता है - What gets measured, gets managed. लेकिन मैं इसमें एक बात और जोड़ना चाहता हूं, What gets measured, gets improved और ultimately, gets transformed. क्योंकि आकलन जागरूकता पैदा करता है। आकलन जवाबदेही तय करता है और सबसे महत्वपूर्ण आकलन संभावनाओं को जन्म देता है।

साथियों,

अगर आप 2014 से पहले के 10-11 साल और 2014 के बाद के 10-11 साल का आप आकलन करेंगे, तो यही पाएंगे कि कैसे इसी सिद्धांत पर चलते हुए, भारत ने हर सेक्टर को Transform किया है। जैसे पहले हाईवे बनते थे, करीब 11-12 किलोमीटर प्रति दिन की रफ्तार से, आज भारत करीब 30 किलोमीटर प्रतिदिन की स्पीड से हाईवे बना रहा है। पहले पोर्ट्स पर शिप का Turnaround Time, 5-6 दिन का होता था। आज वही काम, करीब-करीब 2 दिन से भी कम समय में पूरा हो रहा है। पहले Startup Culture के बारे में चर्चा ही नहीं होती थी। 2014 से पहले, हमारे देश में 400-500 स्टार्ट अप्स ही थे। आज भारत में 2 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रर्ड स्टार्ट अप्स हैं। पहले मेडिकल education में सीटें भी सीमित थीं, करीब 50-55 हजार MBBS seats थीं, आज यह बढ़कर सवा लाख से ज्यादा हो चुकी हैं। पहले देश के Banking system से भी करोड़ों लोग बाहर थे। देश में सिर्फ 25 करोड़ के आसपास ही बैंक account थे। वहीं जनधन योजना के माध्यम से 55 करोड़ से ज्यादा बैंक अकाउंट खुले हैं। पहले हमारे देश में airports की संख्या भी 70 से कम थी। आज एयरपोर्ट्स की संख्या भी बढ़कर 160 से ज्यादा हो चुकी है।

साथियों,

पहले भी योजनाएं तो बनती थीं, लेकिन आज फर्क है, आज परिणाम दिखते हैं। पहले गति धीमी थी, आज भारत fastrack पर है। पहले संभावनाएं भी अंधकार में थीं, आज संकल्प सिद्धियों में बदल रहे हैं। इसलिए दुनिया को भी यह संदेश मिल रहा है कि यह नया भारत है। यह अपने विकास के लिए कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ रहा है।

साथियों,

आज हमारा प्रयास है कि अतीत में विकास का जो असंतुलन पैदा हो गया था, उसको अवसरों में बदला जाए। अब जैसे हमारा पूर्वी भारत है। हमारा पूर्वी भारत संसाधनों से समृद्ध है, दशकों तक वहां जिन्होंने सरकारें चलाई हैं, उनकी उपेक्षा ने पूर्वी भारत के विकास पर ब्रेक लगा दी थी। अब हालात बदल रहे हैं। जिस असम में कभी गोलियों की आवाज सुनाई देती थी, आज वहां सेमीकंडक्टर यूनिट बन रही है। ओडिशा में सेमीकंडक्टर से लेकर पेट्रोकेमिकल्स तक अनेक नए-नए सेक्टर का विकास हो रहा है। जिस बिहार में 6-7 दशक में गंगा जी पर एक बड़ा पुल बन पाया था एक, उस बिहार में पिछले एक दशक में 5 से ज्यादा नए पुल बनाए गए हैं। यूपी में कभी कट्टा मैन्युफैक्चरिंग की कहानियां कही जाती थीं, आज यूपी, मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में दुनिया में अपनी पहचान बना रहा है।

साथियों,

पूर्वी भारत का एक और बड़ा राज्य पश्चिम बंगाल है। पश्चिम बंगाल, एक समय में भारत के कल्चर, एजुकेशन, इंडस्ट्री और ट्रेड का हब होता था। बीते 11 वर्षों में केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के विकास के लिए बड़ी मात्रा में निवेश किया है। लेकिन दुर्भाग्य से, आज वहां एक ऐसी निर्मम सरकार है, जो विकास पर ब्रेक लगाकर बैठी है। TV9 बांग्ला के जो दर्शक हैं, वो जानते हैं कि बंगाल में आयुष्मान योजना पर निर्मम सरकार ने ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम आवास योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। चाय बागान श्रमिकों के लिए शुरू हुई योजना के लिए ब्रेक लगाया हुआ है। यानी विकास और जनकल्याण से ज्यादा प्राथमिकता निर्मम सरकार अपने राजनीतिक स्वार्थ को दे रही है।

साथियों,

देश में इस तरह की राजनीति की शुरुआत जिस दल ने की है, वो अपने गुनाहों से बच नहीं सकती और वो पार्टी है - कांग्रेस। कांग्रेस पार्टी की राजनीति का एक ही लक्ष्य रहा है, किसी भी तरह विकास का विरोध और कांग्रेस यह तब से कर रही है, जब मैं गुजरात में था। गुजरात में वर्षों तक जनता ने हमें आशीर्वाद दिया, तो कांग्रेस ने उस जनादेश को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने गुजरात की छवि पर सवाल उठाए, उसकी प्रगति को कटघरे में खड़ा किया और जब यही विश्वास पूरे देश में दिखाई दिया, तो कांग्रेस का विरोध भी रीजनल से नेशनल हो गया।

साथियों,

जब राजनीति में विरोध, विकास के विरोध में बदल जाए, जब आलोचना देश की उपलब्धियों पर सवाल उठाने लगे, तब यह सिर्फ सरकार का विरोध नहीं रह जाता, यह देश की प्रगति से असहज होने की मानसिकता बन जाती है। आज कांग्रेस इसी मानसिकता की गुलाम बन चुकी है। आज स्थिति यह है कि देश की हर सफलता पर प्रश्न उठाया जाता है, हर उपलब्धि में कमी खोजी जाती है और हर प्रयास के असफल होने की कामना की जाती है। कोविड के समय, देश ने अपनी वैक्सीन बनाई, तो कांग्रेस ने उस पर भी संदेह जताया। Make in India की बात हुई, तो कहा गया कि यह सफल नहीं होगा, बब्बर शेर कहकर इसका मजाक उड़ाया गया। जब देश में डिजिटल इंडिया अभियान शुरू हुआ, तो उसका मजाक उड़ाया गया। लेकिन हर बार यह कांग्रेस का दुर्भाग्य और देश का सौभाग्य रहा कि भारत ने हर चुनौती को सफलता में बदला। आज भारत दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीनेशन ड्राइव का उदाहरण है। भारत डिजिटल पेमेंट्स में दुनिया का अग्रणी देश है। भारत मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप्स में नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

साथियों,

लोकतंत्र में विरोध जरूरी होता है। लेकिन विरोध और विद्वेष के बीच एक रेखा होती है। सरकार का विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है। लेकिन देश को बदनाम करना, यह कांग्रेस की नीयत पर सवाल खड़ा करता है। जब विरोध इस स्तर तक पहुंच जाए कि देश की उपलब्धियां भी असहज करने लगें, तो यह राजनीति नहीं, यह दृष्टिकोण की समस्या है। अभी हमने ग्लोबल AI समिट में भी देखा है। जब पूरी दुनिया भारत में जुटी हुई थी, तो कांग्रेस के लोग कपड़े फाड़ने वहां पहुंच गए थे। इन लोगों को देश की इज्जत की कितनी परवाह है, यह इसी से पता चलता है। इसलिए आज आवश्यकता है कि देशहित को, दलहित से ऊपर रखा जाए क्योंकि अंत में राजनीति से ऊपर, राष्ट्र होता है, राष्ट्र का विकास होता है।

साथियों,

आज का यह दिन भी हमें यही प्रेरणा देता है। आज के ही दिन शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु और शहीद सुखदेव ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। आज ही, समाजवादी आंदोलन के प्रखर आदर्श डॉ. राम मनोहर लोहिया जी की जयंती भी है। यह वो प्रेरणाएं हैं, जिन्होंने देश को हमेशा स्व से ऊपर रखा है। देशहित को सबसे ऊपर रखने की यही प्रेरणा, भारत को विकसित भारत बनाएगी। यही प्रेरणा भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी। मुझे पूरा विश्वास है कि टीवी9 की यह समिट भी भारत के आत्मविश्वास और दुनिया के भरोसे पर, भारतीयों पर जो भरोसा है, उस भरोसे को और सशक्त करेगी। आप सभी को मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं और आपके बीच आने का अवसर दिया, आप सबसे मिलने का मौका लिया, इसलिए बहुत-बहुत धन्यवाद!

नमस्‍कार!