केंद्र और राज्यों के सामूहिक प्रयासों से विकसित भारत@2047 का सपना साकार होगा: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का सपना विकसित राज्यों के माध्यम से साकार किया जा सकता है; प्रत्येक राज्य और जिले को 2047 के लिए एक विजन बनाना चाहिए, ताकि 2047 में विकसित भारत को साकार किया जा सके
प्रधानमंत्री ने नीति आयोग को निवेश आकर्षित करने के लिए ‘निवेश-अनुकूल चार्टर’ तैयार करने का निर्देश दिया
प्रधानमंत्री ने जल संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल के लिए राज्य स्तर पर नदी ग्रिड बनाने को प्रोत्साहित किया

प्रधानमंत्री ने राज्यों को भविष्य में वृद्धों के मुद्दों का समाधान करने के लिए जनसांख्यिकी प्रबंधन योजनाएं शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया
प्रधानमंत्री ने युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने के लिए उनके कौशल और प्रशिक्षण पर जोर दिया
हमें विकसित भारत के लिए गरीबी से मुक्ति को प्राथमिकता के रूप में लक्ष्य बनाना चाहिए: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने नीति आयोग को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा बैठक के दौरान दिए गए सुझावों का अध्ययन करने का निर्देश दियाबैठक में 20 राज्यों और 6 केंद्रशासित प्रदेशों ने भाग लिया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नीति आयोग की 9वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित की गई थी। इसमें 20 राज्यों और 6 केंद्रशासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले मुख्यमंत्रियों/ उपराज्यपालों ने भाग लिया।

प्रधानमंत्री ने विकसित भारत @2047 के विजन को साकार करने के लिए सभी राज्यों और केंद्र के सहयोग और सामूहिक प्रयास पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने पिछले दस वर्षों में विकास की गति को बनाए रखा है। भारतीय अर्थव्यवस्था, जो 2014 में दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी, 2024 तक 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है। उन्होंने कहा कि अब सरकार और सभी नागरिकों का सामूहिक लक्ष्य दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना है।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि हमारे देश ने पिछले दस वर्षों में सामाजिक और आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करके पहले ही काफी प्रगति की है। पहले से मुख्य रूप से आयात पर निर्भर एक देश, भारत अब दुनिया को कई उत्पाद निर्यात करता है। देश ने रक्षा, अंतरिक्ष, स्टार्ट-अप और खेल जैसे व्यापक क्षेत्रों में विश्व मंच पर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने 140 करोड़ नागरिकों के आत्मविश्वास और उत्साह की सराहना की, जो हमारे देश की प्रगति के पीछे प्रेरक शक्ति है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह बदलाव का दशक है, जो विभिन्न क्षेत्रों में ढेरों अवसर लेकर आया है। उन्होंने राज्यों को इन अवसरों का उपयोग करने और नीति निर्माण और क्रियान्वयन में नवीन दृष्टिकोणों के माध्यम से विकास के लिए अनुकूल नीतियां बनाने और शासन के कार्यक्रम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के विजन को विकसित राज्यों के माध्यम से साकार किया जा सकता है और विकसित भारत की आकांक्षा जमीनी स्तर यानी प्रत्येक जिले, ब्लॉक और गांव तक पहुंचनी चाहिए। इसके लिए, प्रत्येक राज्य और जिले को 2047 के लिए एक विजन बनाना चाहिए, ताकि 2047 में विकसित भारत को साकार किया जा सके।

प्रधानमंत्री ने नीति आयोग द्वारा संचालित आकांक्षी जिला कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इसकी सफलता की कुंजी मापन योग्य मापदंडों की निरंतर और ऑनलाइन निगरानी थी, जिससे विभिन्न सरकारी योजनाओं में अपने कार्य निष्पादन को बेहतर बनाने के लिए जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा हुई।

प्रधानमंत्री ने युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने के लिए कौशल और प्रशिक्षण पर जोर दिया, क्योंकि दुनिया कुशल मानव संसाधन के लिए भारत की ओर अनुकूल रूप से देख रही है।

उन्होंने राज्यों को निवेशक के अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने नीति आयोग को मापदंडों का एक 'निवेश-अनुकूल चार्टर' तैयार करने का निर्देश दिया, जिसमें निवेश आकर्षित करने के लिए लागू की जाने वाली नीतियां, कार्यक्रम और प्रक्रियाएं शामिल होंगी। निवेश आकर्षित करने के लिए उनके बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए इन मापदंडों में उपलब्धि के आधार पर राज्यों की निगरानी की जा सकती है। उन्होंने निवेश आकर्षित करने के लिए केवल प्रोत्साहन के बजाय कानून और व्यवस्था, सुशासन और इंफ्रास्ट्रक्चर के महत्व पर भी जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने जल संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल के लिए राज्य स्तर पर नदी ग्रिड बनाने को प्रोत्साहित किया।

उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि हमें विकसित भारत के लिए प्राथमिकता के रूप में गरीबी से मुक्ति को लक्षित करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हमें गरीबी से निपटने के लिए केवल कार्यक्रम स्तर पर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर से गरीबी को खत्म करने से हमारे देश में बदलाव आएगा।

प्रधानमंत्री ने सभी राज्यों को कृषि में उत्पादकता और विविधीकरण बढ़ाने तथा किसानों को बाजार से जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने प्राकृतिक खेती के तरीकों को अपनाने पर जोर दिया, जिससे मिट्टी की उर्वरता में सुधार हो सकता है, कम लागत के कारण किसानों को बेहतर और त्वरित लाभ मिल सकता है और उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार भी उपलब्ध हो सकता है।

प्रधानमंत्री ने राज्यों को भविष्य में वृद्धों के मुद्दों का समाधान करने के लिए जनसांख्यिकी प्रबंधन योजनाएं शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया।

प्रधानमंत्री ने राज्यों से सभी स्तरों पर सरकारी अधिकारियों का क्षमता निर्माण करने को कहा और उन्हें इसके लिए क्षमता निर्माण आयोग के साथ सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।

मुख्यमंत्रियों/ उपराज्यपालों ने विकसित भारत @ 2047 के विजन के लिए विभिन्न सुझाव दिए और अपने राज्यों में उठाए जा रहे कदमों पर भी चर्चा की। कृषि, शिक्षा और कौशल विकास, उद्यमिता, पेयजल, अनुपालन में कमी, शासन, डिजिटलीकरण, महिला सशक्तिकरण, साइबर सुरक्षा आदि के क्षेत्र में कुछ प्रमुख सुझाव और सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों पर प्रकाश डाला गया। कई राज्यों ने 2047 के लिए राज्य विजन बनाने के लिए अपने प्रयासों को भी साझा किया।

प्रधानमंत्री ने नीति आयोग को बैठक के दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा दिए गए सुझावों का अध्ययन करने का निर्देश दिया।

उन्होंने बैठक में भाग लेने और अपने विचार एवं अनुभव साझा करने के लिए सभी मुख्यमंत्रियों और उपराज्यपालों के प्रति आभार व्यक्त किया और विश्वास व्यक्त किया कि भारत सहकारी संघवाद की शक्ति के माध्यम से विकसित भारत @2047 के विजन को साकार करने के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है।

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प्रधानमंत्री ने दुनिया की विविध संस्कृतियों के सम्मान पर जोर देते हुए एक संस्कृत सुभाषितम साझा किया
June 29, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया:

“देशाचारान् समयाञ्जातिधर्मान् बुभूषते यस्तु परावरज्ञः।

स तत्र तत्राधिगतः सदैव महाजनस्याधिपत्यं करोति॥" 

यह सुभाषितम दर्शाता है कि विश्व की विविध संस्कृतियों का सम्मान करने से लोगों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना बढ़ती है और आपसी समझ तथा भाईचारा मजबूत होता है।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर लिखा:

दुनिया की अलग-अलग संस्कृतियों का सम्मान करने से लोगों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना बढ़ती है। इससे आपसी समझ और भाईचारा और मजबूत होता है।

देशाचारान् समयाञ्जातिधर्मान् बुभूषते यस्तु परावरज्ञः।

स तत्र तत्राधिगतः सदैव महाजनस्याधिपत्यं करोति॥