"पहले सौ दिनों में ही हमारी प्राथमिकताएं स्पष्ट रूप से परिलक्षित हैं, यह हमारी गति और पैमाने का भी प्रतिबिंब है"
"वैश्विक अनुप्रयोग के लिए भारतीय समाधान"
"भारत 21वीं सदी का सर्वश्रेष्ठ दावेदार है"
"हरित भविष्य और नेट जीरो भारत की प्रतिबद्धता है"
"पेरिस में निर्धारित जलवायु प्रतिबद्धताओं को समय सीमा से 9 वर्ष पूर्व अर्जित करने वाला भारत जी-20 में पहला देश है"
"पीएम सूर्य घर नि:शुल्‍क विद्युत योजना के साथ, भारत का हर घर बिजली उत्पादक बनने के लिए तैयार है"
"सरकार धरा के प्रति समर्पित लोगों के सिद्धांतों के लिए प्रतिबद्ध है"

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज गुजरात के गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में चौथे वैश्विक अक्षय ऊर्जा निवेशक सम्मेलन एवं प्रदर्शनी (री-इन्वेस्ट) का उद्घाटन किया। इस तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान भारत की 200 गीगावाट से अधिक स्थापित गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता की उल्लेखनीय उपलब्धि में महत्वपूर्ण रूप से योगदान करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। श्री मोदी ने सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की कंपनियों, स्टार्ट-अप्स और प्रमुख उद्यमियों के अत्याधुनिक नवाचारों को दर्शाने वाली प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

इस असर पर एक जन सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने चौथे री-इन्वेस्ट सम्मेलन में आए सभी गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हुए विश्वास जताया कि अगले तीन दिनों में ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और नीतियों के भविष्य पर गंभीर चर्चा की जाएगी। श्री मोदी ने कहा कि इस सम्मेलन में हुई चर्चाओं और सीखों से पूरी मानवता को लाभ होगा। प्रधानमंत्री ने सफल विचार-विमर्शों के लिए अपनी शुभकामनाएं भी दीं।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के लोगों द्वारा साठ वर्षों के बाद तीसरी बार एक ही सरकार को चुनने के जनादेश का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की आकांक्षाएं ही तीसरी बार सरकार के फिर से चुने जाने का कारण हैं। उन्होंने 140 करोड़ नागरिकों, युवाओं और महिलाओं के भरोसे और विश्वास की चर्चा करते हुए कहा कि उनकी आकांक्षाएं इस तीसरे कार्यकाल में नई उड़ान भरेंगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि गरीब, दलित और वंचितों का मानना ​​है कि सरकार का तीसरा कार्यकाल उनके लिए सम्मानजनक जीवन की गारंटी बनेगा। उन्होंने कहा कि भारत के 140 करोड़ नागरिक देश को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि आज का कार्यक्रम इस दिशा में एकमात्र कार्यक्रम नहीं है, बल्कि 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के बड़े विजन, मिशन और कार्ययोजना का एक अंग है। प्रधानमंत्री ने सरकार के कार्यकाल के पहले 100 दिनों में सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों की भी जानकारी दी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले 100 दिनों में सरकार के काम ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए इसकी गति और पैमाने को प्रतिबिंबित किया है। उन्होंने कहा कि भारत के त्वरित विकास के लिए आवश्यक सभी क्षेत्रों पर बल दिया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन 100 दिनों में राष्ट्र के भौतिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे का विस्तार करने के लिए कई निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने बताया कि भारत 7 करोड़ घरों के निर्माण के पथ पर अग्रसर है, जो कई देशों की आबादी से भी अधिक है, जबकि पिछले दो कार्यकालों में लोगों को 4 करोड़ घर सौंपे गए हैं। उन्होंने कहा कि 12 नए औद्योगिक शहर बनाने का फैसला, 8 हाई-स्पीड रोड कॉरिडोर परियोजनाओं को मंजूरी, 15 से अधिक सेमी-हाई स्पीड वंदे भारत ट्रेनों का शुभारंभ, अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए एक ट्रिलियन रुपये के शोध कोष की स्थापना, ई-मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पहलों की घोषणा, उच्च प्रदर्शन वाले जैव-विनिर्माण को बढ़ावा देना और इसके साथ ही बायो ई3 नीति को मंजूरी देना सरकार की उपलब्धियों में शामिल हैं।

पिछले 100 दिनों में हरित ऊर्जा क्षेत्र में हुए विकास का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 7000 करोड़ रुपये से अधिक की व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण योजना के शुभारंभ की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत आने वाले समय में 12,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 31,000 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन की दिशा में काम कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की विविधता, पैमाने, क्षमता, संभावना और प्रदर्शन सभी असाधारण हैं और वैश्विक अनुप्रयोगों के लिए भारतीय समाधानों का मार्ग प्रशस्त करते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व का यह मानना ​​है कि भारत 21वीं सदी का सबसे बेहतर दावेदार है। पिछले एक महीने में भारत द्वारा आयोजित वैश्विक कार्यक्रमों का स्मरण करते हुए श्री मोदी ने कहा कि इस महीने की शुरुआत में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट का आयोजन किया गया, विश्व भर के लोगों ने पहले अंतरराष्ट्रीय सौर महोत्सव, ग्लोबल सेमीकंडक्टर शिखर सम्मेलन में भाग लिया, भारत ने दूसरे एशिया-प्रशांत नागरिक विमानन मंत्रिस्तरीय सम्मेलन की भी मेजबानी की और आज भारत हरित ऊर्जा के सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।

श्री मोदी ने कहा कि यह एक सुखद संयोग है कि गुजरात जिस श्वेत क्रांति, मधुर (शहद) क्रांति, सौर क्रांति की शुरुआत का साक्षी रहा है, वह अब चौथे वैश्विक अक्षय ऊर्जा निवेशक सम्मेलन और एक्सपो का आयोजन में भागीदारी कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि गुजरात भारत का पहला राज्य था जिसने अपनी सौर नीति बनाई। उन्होंने कहा कि इसके बाद सौर ऊर्जा पर राष्ट्रीय नीतियां बनाई गईं। श्री मोदी ने कहा कि जलवायु मामलों से संबंधित मंत्रालय स्थापित करने में गुजरात विश्व भर में अग्रणी राज्यों में से एक है। उन्होंने बताया कि गुजरात ने तब से सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करना शुरू कर दिया था, जब दुनिया ने इसके बारे में सोचा भी नहीं था।

आयोजन स्थल के नाम महात्मा मंदिर का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि इसका नाम महात्मा गांधी के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने जलवायु चुनौती का विषय सामने आने से पहले ही दुनिया को सचेत कर दिया था। महात्मा को उद्धृत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "पृथ्वी के पास हमारी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन हमारी लालसा को पूरा करने के लिए नहीं।" उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का यह दृष्टिकोण भारत की महान परंपरा से प्रेरित है। श्री मोदी ने कहा कि हरित भविष्य, नेट ज़ीरो जैसे शब्द दिखावटी शब्द नहीं हैं, बल्कि ये भारत की केंद्र और हर राज्य सरकार की ज़रूरतें और प्रतिबद्धताएं हैं।

प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि विकासशील अर्थव्यवस्था के रूप में भारत के पास इन प्रतिबद्धताओं से बाहर दूर रहने का एक वैध बहाना था, लेकिन उसमें यह मार्ग नहीं चुना। उन्होंने कहा कि आज का भारत न केवल आज के लिए बल्कि अगले हजार वर्षों के लिए एक आधार तैयार कर रहा है। श्री मोदी ने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल शीर्ष पर पहुंचना नहीं है, बल्कि शीर्ष पर बने रहने के लिए स्वयं को तैयार करना है। उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक स्वयं को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए अपनी ऊर्जा जरूरतों और आवश्यकताओं से अच्छी तरह परिचित है। श्री मोदी ने स्मरण दिलाया कि भारत ने तेल-गैस के भंडार की कमी को ध्यान में रखते हुए सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, परमाणु और जल विद्युत जैसे नवीकरणीय ऊर्जा के आधार पर अपना भविष्य बनाने का फैसला किया था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत पेरिस में तय जलवायु प्रतिबद्धताओं को निर्धारित समय-सीमा से 9 वर्ष पहले हासिल करने वाला पहला जी-20 देश है। श्री मोदी ने 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश के लक्ष्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने हरित बदलाव को जन आंदोलन में बदल दिया है। उन्होंने रूफटॉप सोलर के लिए भारत की अनूठी योजना- पीएम सूर्य घर नि:शुल्क विद्युत योजना का अध्ययन करने का सुझाव दिया, जिसके अंतर्गत सरकार हर परिवार के लिए रूफटॉप सोलर सेटअप के लिए धन मुहैया कराती है और इसको लगाने में सहायता प्रदान करती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस योजना के माध्यम से भारत का हर घर बिजली उत्पादक बन जाता है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत 1 करोड़ 30 लाख से अधिक परिवारों ने पंजीकरण कराया है और अब तक 3.25 लाख घरों में स्थापना का काम पूरा हो चुका है।

प्रधानमंत्री ने पीएम सूर्य घर नि:शुल्क विद्युत योजना के परिणामों की जानकारी देते हुए बताया कि इसके माध्यम से एक माह में 250 यूनिट बिजली की खपत करने वाला एक छोटा परिवार, 100 यूनिट तक बिजली को वापस ग्रिड को बेचकर वर्ष भर में कुल मिलाकर लगभग 25 हजार रुपये बचाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लोगों को बिजली बिल से लगभग 25 हजार रुपये का लाभ होगा। उन्होंने कहा कि बचत की गई राशि अर्जित की गई राशि है। उन्होंने कहा कि अगर बचाई गई धन राशि को 20 वर्ष के लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड में निवेश किया जाए, तो पूरी धन राशि 10 लाख रुपये से अधिक होगी जिसका उपयोग बच्चों की शिक्षा और विवाह के लिए किया जा सकता है।

श्री मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री सौर घर योजना रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण का माध्यम बन रही है, जिससे करीब 20 लाख रोजगारों का सृजन हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि सरकार का लक्ष्य इस योजना के तहत 3 लाख युवाओं को कुशल जनशक्ति के रूप में तैयार करना है। इनमें से एक लाख युवा सोलर पीवी तकनीशियन होंगे। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने में हर परिवार के योगदान को ध्यान में रखते हुए कहा कि हर 3 किलोवाट सौर बिजली से 50-60 टन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को रोका जा सकेगा।

श्री मोदी ने कहा कि जब 21वीं सदी का इतिहास लिखा जाएगा, तब भारत की सौर क्रांति स्वर्ण अक्षरों में लिखी जाएगी। श्री मोदी ने भारत के पहले सौर गांव मोढेरा, जहां सदियों पुराना सूर्य मंदिर भी है, के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि आज गांव की सभी ज़रूरतें सौर ऊर्जा से पूरी होती हैं। उन्होंने कहा कि आज देश भर में ऐसे कई गांवों को सौर गांवों में बदलने का अभियान चल रहा है।

सूर्यवंशी भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या शहर का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने बताया कि इसे प्रेरणा मानकर सरकार अयोध्या को एक आदर्श सौर शहर बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। उन्होंने कहा कि अयोध्या के हर घर, हर कार्यालय, हर सेवा को सौर ऊर्जा से ऊर्जान्वित करने का प्रयास किया जा रहा है। श्री मोदी ने प्रसन्नता व्यक्त की कि अयोध्या की कई सुविधाएं और घर सौर ऊर्जा से ऊर्जान्वित हो रहे हैं, जबकि अयोध्या में बड़ी संख्या में सौर स्ट्रीट लाइट, सौर चौराहे, सौर नावें, सौर जल एटीएम और सौर भवन भी देखे जा सकते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने भारत में ऐसे 17 शहरों की पहचान की है जिन्हें इसी तरह सौर शहरों के रूप में विकसित किया जाना है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्रों को सौर ऊर्जा उत्पादन का माध्यम बनाने की योजना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज किसानों को सिंचाई के लिए सौर पंप और छोटे सौर संयंत्र लगाने में सहायता की जा रही है।

श्री मोदी ने कहा कि भारत अक्षय ऊर्जा से जुड़े हर क्षेत्र में बहुत तेजी से और बड़े पैमाने पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले दशक में भारत ने पहले की तुलना में परमाणु ऊर्जा से 35 प्रतिशत अधिक विद्युत का सजृन किया है और भारत हरित हाइड्रोजन के क्षेत्र में वैश्विक प्रमुख बनने का प्रयास कर रहा है। श्री मोदी ने इस दिशा में लगभग बीस हजार करोड़ रुपये के हरित हाइड्रोजन मिशन के शुभारंभ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत में अपशिष्ट से ऊर्जा का एक बड़ा अभियान भी संचालित है। महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए उठाए गए कदमों पर जोर देते हुए श्री मोदी ने कहा कि सरकार पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण से संबंधित बेहतर तकनीक विकसित करने के लिए स्टार्ट-अप को समर्थन देने के साथ-साथ एक सर्कुलर दृष्टिकोण को बढ़ावा दे रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने मिशन लाइफ यानी पर्यावरण के लिए जीवनशैली के भारत के विजन की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार प्रो-प्लैनेट लोगों के सिद्धांतों के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भारत की अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन पहल, भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान हरित परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित करने और जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन के शुभारंभ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने इस दशक के अंत तक अपने रेलवे को शून्य उत्सर्जन वाला बनाने का लक्ष्य रखा है, साथ ही भारत ने 2025 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को प्राप्त करने का निर्णय लिया है। उन्होंने जल संरक्षण के लिए प्रत्येक गांव में बनाए गए हजारों अमृत सरोवर का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का उल्लेख करते हुए सभी से इस पहल में शामिल होने का आग्रह किया।

भारत में अक्षय ऊर्जा की बढ़ती मांग को देखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार इस मांग को पूरा करने के लिए नई नीतियां बना रही है और हर तरह से सहायता प्रदान कर रही है। अपने संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने न केवल ऊर्जा उत्पादन बल्कि विनिर्माण क्षेत्र में भी निवेशकों के लिए जबरदस्त अवसरों के बारे में चर्चा की। श्री मोदी ने भारत के हरित परिवर्तन में निवेश को आमंत्रित करते हुए कहा कि भारत पूर्ण रूप से मेड इन इंडिया समाधानों के लिए प्रयास कर रहा है और अनेक संभावनाओं का सृजन कर रहा है। उन्होंने भारत सही मायनों में विस्तार और बेहतर रिटर्न की गारंटी है।

इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र पटेल, केन्द्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रहलाद जोशी, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गोवा के मुख्यमंत्री उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

चौथा वैश्विक अक्षय ऊर्जा निवेशक सम्मेलन और एक्सपो (री-इन्वेस्ट) अक्षय ऊर्जा निर्माण और उपयोग में भारत की प्रभावशाली प्रगति को स्पष्ट करने के लिए आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन में करीब ढाई दिन तक विश्व भर से आये प्रतिनिधि भाग लेंगे। उपस्थित गणमान्य मुख्यमंत्रियों की पूर्ण बैठक, सीईओ गोलमेज सम्मेलन और अभिनव वित्तपोषण, हरित हाइड्रोजन और भविष्य के ऊर्जा समाधानों पर विशेष चर्चाओं सहित इस व्यापक कार्यक्रम में भागीदारी करेंगे। जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क और नॉर्वे भागीदार देशों के रूप में इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं। गुजरात मेजबान राज्य है और आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश भागीदार राज्यों के रूप में भाग ले रहे हैं।

इस प्रदर्शनी में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों, स्टार्ट-अप्स और उद्योग जगत के प्रमुखों के अत्याधुनिक नवाचारों को प्रदर्शित किया जाएगा। यह प्रदर्शनी स्थायी भविष्य के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करेगी।

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February 27, 2026
Developed nations are eager to sign trade deals with India because a confident India is rising beyond doubt and despair: PM
In the last 11 years, a new energy has flowed into the nation's consciousness, India is determined to regain its rightful strength: PM
India's Digital Public Infrastructure has today become a subject of global discussion: PM
Today, every move India makes is closely watched and analysed across the world, the AI Summit is a clear example of this: PM
Nation-building never happens through short-term thinking; It is shaped by a long-term vision, patience and timely decisions: PM

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।