"भारत अनुकूलनशीलता और प्रगति के प्रतीक के रूप में उभरा है"
"भारत की विकास गाथा नीति, सुशासन और नागरिकों के कल्याण को सरकार द्वारा दी गई सर्वोच्च प्राथमिकता पर आधारित है"
" भारत दुनिया के लिए आशा की किरण है, यह इसकी मजबूत अर्थव्यवस्था और पिछले 10 वर्षों के परिवर्तनकारी सुधारों का परिणाम है''
"गिफ्ट सिटी की परिकल्पना एक ऐसे गतिशील इकोसिस्टनम के रूप में की गई है जो अंतर्राष्ट्रीय वित्त के परिदृश्य को पुन: परिभाषित करेगा"
"हम गिफ्ट सिटी को नए दौर की वैश्विक वित्तीय और प्रौद्योगिकी सेवाओं का वैश्विक केंद्र बनाना चाहते हैं"
"भारत द्वारा सीओपी 28 में की गई प्रो प्लैरनेट पहल है 'ग्लोबल ग्रीन क्रेडिट इनिशिएटिव' "
"भारत आज दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ते फिनटेक बाजारों में से एक है"
" गिफ्ट आईएफएससी का अत्याधुनिक डिजिटल बुनियादी ढांचा एक ऐसा मंच प्रदान करता है जो व्यवसायों को दक्षता बढ़ाने में सक्षम बनाता है"
"भारत गहरे लोकतांत्रिक मूल्यों तथा व्यापार एवं वाणिज्य की ऐतिहासिक परंपरा वाला देश है"

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने फिनटेक से संबंधित ग्‍लोबल थॉट लीडरशिप प्‍लेटफॉर्म-इन्फिनिटी फोरम के दूसरे संस्करण को आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। इन्फिनिटी फोरम का दूसरा संस्करण वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2024 के पूर्ववर्ती कार्यक्रम के रूप में भारत सरकार के तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (आईएफएससीए) और गिफ्ट सिटी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। इन्फिनिटी फोरम के दूसरे संस्करण का विषय 'गिफ्ट-आईएफएससी: नर्व सेंटर फॉर न्यू एज ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज' है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में दिसंबर 2021 में इन्फिनिटी फोरम के पहले संस्करण के आयोजन के दौरान महामारी से प्रभावित दुनिया को याद किया, जो वैश्विक आर्थिक स्थिति की अनिश्चितता से घिरी हुई थी। उन्‍होंने इस बात को रेखांकित किया कि वह चिंताजनक स्थिति अभी तक पूरी तरह से समाप्त नहीं हुई है। प्रधानमंत्री ने भू-राजनीतिक तनावों, बेतहाशा महंगाई और बढ़ते ऋण स्तरों की चुनौतियों का उल्‍लेख करते हुए रेखांकित किया कि भारत अनुकूलनशीलता और प्रगति के प्रतीक के रूप में उभरा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी स्थिति में गिफ्ट सिटी में इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन गुजरात के गौरव को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर गुजरात के लोगों को 'गरबा' को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किए जाने पर बधाई भी दी। उन्होंने कहा, "गुजरात की सफलता देश की सफलता है"।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने दोहराया कि भारत की विकास गाथा नीति, सुशासन और नागरिकों के कल्याण को सरकार द्वारा दी गई सर्वोच्च प्राथमिकता पर आधारित है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान भारत की विकास दर 7.7 फीसदी रही है। आईएमएफ द्वारा सितंबर 2023 में किए गए उल्लेख का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने वर्ष 2023 में 16 प्रतिशत वैश्विक विकास दर में भारत के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने विश्व बैंक का भी हवाला देते हुए कहा, “वैश्विक चुनौतियों के बीच, भारतीय अर्थव्यवस्था से काफी उम्मीदें हैं।” श्री मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के इस बयान को भी स्वीकार किया कि भारत ग्‍लोबल साउथ का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। उन्होंने विश्व आर्थिक मंच की इस टिप्पणी पर भी प्रकाश डाला कि भारत में लाल फीताशाही कम होने से निवेश के बेहतर अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्‍होंने इस बात को भी रेखांकित किया कि भारत दुनिया के लिए आशा की किरण है, यह इसकी मजबूत अर्थव्यवस्था और पिछले 10 वर्षों के परिवर्तनकारी सुधारों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब शेष विश्‍व राजकोषीय और मौद्रिक राहत पर ध्यान केंद्रित रहा था, तो भारत दीर्घकालिक विकास और आर्थिक क्षमता विस्तार पर ध्यान केंद्रित कर रहा था।

वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ एकीकरण बढ़ाने के लक्ष्य पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने अनेक क्षेत्रों में लचीली एफडीआई नीति, अनुपालन बोझ में कमी की उपलब्धियों को सूचीबद्ध करते हुए आज 3 एफटीए पर हस्ताक्षर किए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गिफ्ट आईएफएससीए भारतीय और वैश्विक वित्तीय बाजारों को एकीकृत करने के एक बड़े सुधार का हिस्सा है। श्री मोदी ने कहा, " गिफ्ट सिटी की परिकल्पना एक ऐसे गतिशील इकोसिस्‍टम के रूप में की गई है, जो अंतर्राष्ट्रीय वित्त के परिदृश्य को पुन: परिभाषित करेगा"। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि यह नवाचार, दक्षता और वैश्विक सहयोग के नए मानक स्थापित करेगा। उन्होंने 2020 में एक एकीकृत नियामक के रूप में अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण की स्थापना की महत्वपूर्ण उपलब्धि का उल्‍लेख किया। उन्होंने बताया कि आईएफएससीए ने आर्थिक उथल-पुथल के इस दौर में निवेश के नए रास्ते खोलने वाले 27 नियम और 10 से अधिक प्रारूप बनाए हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस बात का उल्लेख करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की कि इन्फिनिटी फोरम के पहले संस्करण के दौरान प्राप्त सुझावों के आधार पर कई पहल की गई हैं, जैसे अप्रैल 2022 में आईएफएससीए ने कोष प्रबंधन गतिविधियों के संचालन के लिए व्यापक ढांचे को अधिसूचित किया है। प्रधानमंत्री ने बताया कि आज आईएफएससीए के साथ 80 कोष प्रबंधन संस्थाएं पंजीकृत हैं जिन्‍होंने 24 बिलियन डॉलर से अधिक का कोष स्थापित किया है, और 2 प्रमुख अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों को 2024 में गिफ्ट आईएफएससी में अपने पाठ्यक्रम शुरू करने की मंजूरी मिल गई है। उन्होंने मई 2022 में आईएफएससीए द्वारा जारी एयरक्राफ्ट लीजिंग फ्रेमवर्क पर भी बात की, जहां आज तक 26 इकाइयां परिचालन शुरू कर चुकी हैं।

आईएफएससीए के दायरे का विस्तार किए जाने के बारे में प्रधानमंत्री ने गिफ्ट आईएफएससीए को पारंपरिक वित्त और उद्यमों से आगे ले जाने के सरकार के प्रयासों को दोहराया। श्री मोदी ने कहा, "हम गिफ्ट सिटी को नए दौर की वैश्विक वित्तीय और प्रौद्योगिकी सेवाओं का वैश्विक केंद्र बनाना चाहते हैं।" उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि गिफ्ट सिटी द्वारा प्रदान किए गए उत्पाद और सेवाएं दुनिया के सामने आने वाली चुनौतियों को हल करने में मदद करेंगी और हितधारकों को बहुत बड़ी भूमिका निभानी होगी।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जलवायु परिवर्तन की महत्‍वपूर्ण चुनौती की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के नाते भारत की चिंताओं को रेखांकित किया। उन्होंने हाल ही में सीओपी 28 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत की प्रतिबद्धता के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि भारत और दुनिया के वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए किफायती वित्त की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने वैश्विक विकास और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए टिकाऊ वित्त की आवश्यकता को समझने की आवश्यकता दोहराई, जो जी-20 की अध्यक्षता के दौरान प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में से एक था। उन्होंने कहा कि यह हरित, अधिक अनुकूलनशीलता वाले और अधिक समावेशी समाजों और अर्थव्यवस्थाओं की ओर परिवर्तन को बढ़ावा देगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ अनुमानों के अनुसार, 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए भारत को भी कम से कम 10 ट्रिलियन डॉलर की आवश्यकता होगी, इस निवेश की एक निश्चित राशि को वैश्विक स्रोतों के माध्यम से भी वित्त पोषित करना होगा। उन्होंने आईएफएससी को सतत वित्त का वैश्विक केंद्र बनाने पर जोर देते हुए कहा, “गिफ्ट आईएफएससी, भारत को लो कार्बन वाली अर्थव्यवस्था बनाने के लिए आवश्यक हरित पूंजी प्रवाह का एक कुशल चैनल है। ग्रीन बॉन्ड्स, सस्टेनेबल बॉन्ड्स और सस्टेनेबिलिटी लिंक्ड बॉन्ड्स जैसे वित्तीय उत्पादों के विकास से पूरी दुनिया की राह आसान हो जाएगी।” उन्होंने भारत द्वारा सीओपी 28 में की गई प्रो प्‍लैनेट पहल 'ग्लोबल ग्रीन क्रेडिट इनिशिएटिव' के बारे में भी जानकारी दी। श्री मोदी ने उद्योगपतियों से ग्रीन क्रेडिट के लिए एक बाजार तंत्र विकसित करने के बारे में अपने विचार रखने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत आज दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ते फिनटेक बाजारों में से एक है।" उन्होंने कहा कि फिनटेक में भारत की ताकत गिफ्ट आईएफएससी के विजन के साथ संबद्ध है, और इसके परिणामस्वरूप यह स्‍थान तेजी से फिन-टेक का उभरता हुआ केंद्र बन रहा है। आईएफएससीए की उपलब्धियों को सूचीबद्ध करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आईएफएससीए की ओर से 2022 में फिनटेक के लिए एक प्रगतिशील नियामक ढांचा और आईएफएससीए की फिनटेक प्रोत्साहन योजना को जारी किया गया, जो नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए भारतीय और विदेशी फिनटेक को अनुदान प्रदान करती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि गिफ्ट सिटी में वैश्विक फिनटेक दुनिया का प्रवेश द्वार और दुनिया के लिए फिनटेक प्रयोगशाला बनने की क्षमता मौजूद है। उन्होंने निवेशकों से इसका अधिकतम लाभ उठाने का भी आग्रह किया।

वैश्विक पूंजी के प्रवाह हेतु गिफ्ट आईएफएससी के एक प्रमुख प्रवेश द्वार बनने पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने 'ट्राई-सिटी' की अवधारणा को समझाया, यानी ऐतिहासिक शहर अहमदाबाद और राजधानी गांधीनगर के बीच स्थित होने से इसे असाधारण कनेक्टिविटी मिलती है। उन्होंने कहा, "गिफ्ट आईएफएससी का अत्याधुनिक डिजिटल बुनियादी ढांचा एक ऐसा मंच प्रदान करता है जो व्यवसायों को दक्षता बढ़ाने में सक्षम बनाता है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि गिफ्ट आईएफएससी एक चुंबक के रूप में उभरा है, जो वित्तीय और प्रौद्योगिकी जगत की प्रतिभाओं को आकर्षित करता है। उन्होंने बताया कि आज, आईएफएससी में 58 परिचालन संस्थाएं, इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज सहित 3 एक्सचेंज, 9 विदेशी बैंकों सहित 25 बैंक, 29 बीमा संस्थाएं, 2 विदेशी विश्वविद्यालय, परामर्श फर्म, कानून फर्म और सीए फर्म सहित 50 से अधिक पेशेवर सेवा प्रदाता हैं। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि अगले कुछ वर्षों में गिफ्ट सिटी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय केंद्रों में से एक होगी।

प्रधानमंत्री ने इस बात को रेखांकित करते हुए कहा, "भारत गहरे लोकतांत्रिक मूल्यों तथा व्यापार एवं वाणिज्य की ऐतिहासिक परंपरा वाला देश है।" भारत में प्रत्येक निवेशक या कंपनी के लिए विविध अवसरों की मौजूदगी का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि गिफ्ट के संबंध में भारत का विजन उसकी विकास गाथा से जुड़ा हुआ है। प्रधानमंत्री ने प्रतिदिन 4 लाख हवाई यात्रियों का उदाहरण देते हुए 2014 में यात्री विमानों की संख्या 400 से बढ़कर आज 700 से अधिक होने और पिछले 9 वर्षों में भारत में हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी होने का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने गिफ्ट सिटी द्वारा विमान पट्टे पर देने वालों को प्रदान की जाने वाली विभिन्न सुविधाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया, "आने वाले वर्षों में हमारी एयरलाइंस लगभग 1000 विमान खरीदने जा रही हैं।" उन्होंने आईएफएससीए के जहाजों को पट्टे पर देने वाले ढांचे, आईटी प्रतिभा के बड़े समूह, डेटा संरक्षण कानूनों और गिफ्ट की डेटा एम्‍बेसी पहल का भी उल्लेख किया जो सभी देशों और व्यवसायों को डिजिटल निरंतरता के लिए सुरक्षित सुविधाएं प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा, "भारत की युवा प्रतिभा की बदौलत, हम सभी बड़ी कंपनियों के वैश्विक क्षमता केंद्रों का आधार बन गए हैं।"

अपने संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अगले कुछ वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और 2047 तक एक विकसित देश बन जाएगा। उन्होंने इस यात्रा में पूंजी के नए रूपों, डिजिटल प्रौद्योगिकियों और नए दौर की वित्तीय सेवाओं की भूमिका पर जोर दिया। यात्रा। उन्होंने कहा कि गिफ्ट सिटी अपने कुशल नियमों, संचा‍लन के लिए तैयार बुनियादी ढांचे, विशाल भारतीय आंतरिक अर्थव्यवस्था तक पहुंच, संचालन की लाभकारी लागत और प्रतिभा लाभ के साथ बेजोड़ अवसर पैदा कर रहा है। उन्होंने सभी निवेशकों को आमंत्रित करते हुए कहा, “आइए, गिफ्ट आईएफएससी के साथ मिलकर हम वैश्विक सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ें। वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन भी जल्द ही होने जा रहा है”। श्री मोदी ने अपनी बात समाप्‍त करते हुए कहा, " आइए, हम साथ मिलकर दुनिया के गंभीर मुद्दों का समाधान खोजने के लिए नवोन्‍मेषी विचारों का पता लगाएं और उन्हें आगे बढ़ाएं।"

पृष्‍ठभूमि

इन्फिनिटी फोरम का दूसरा संस्करण वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2024 के पूर्ववर्ती कार्यक्रम के रूप में भारत सरकार के तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (आईएफएससीए) और गिफ्ट सिटी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। यह फोरम एक ऐसा मंच प्रदान करता है, जहां दुनिया भर से प्रगतिशील विचार, गंभीर समस्याएं, नवीन प्रौद्योगिकियों की तलाश की जाती हैं, उन पर चर्चा की जाती है तथा समाधानों और अवसरों में विकसित की जाती हैं।

इन्फिनिटी फोरम के दूसरे संस्करण का विषय 'गिफ्ट-आईएफएससी: नर्व सेंटर फॉर न्यू एज ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज' है, जिसका निम्नलिखित तीन ट्रैक के माध्यम से परस्‍पर अनुबद्ध किया जाएगा:

· प्‍लीनरी ट्रैक: नए दौर के अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय केंद्र का निर्माण

· ग्रीन ट्रैक: मेकिंग अ केस फॉर अ "ग्रीन स्टैक"

· सिल्वर ट्रैक: 'लॉन्गविटी फाइनेंस हबऐट गिफ्ट-आईएफएससी

प्रत्येक ट्रैक में एक वरिष्ठ उद्योगपति द्वारा इन्फिनिटी टॉक तथा भारत और दुनिया भर में वित्तीय क्षेत्र के उद्योग विशेषज्ञों और व्‍यवसायियों के एक पैनल द्वारा चर्चा शामिल होगी, जो व्यावहारिक अंतर्दृष्टि और कार्यान्वयन योग्य समाधान प्रदान करेगी।

फोरम में 300 से अधिक सीएक्सओ की भागीदारी होगी। इसमें भारत तथा अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी सहित 20 से अधिक देशों के वैश्विक दर्शकों की मजबूत ऑनलाइन भागीदारी होगी। इस कार्यक्रम में विदेशी विश्वविद्यालयों के कुलपति और विदेशी दूतावासों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

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For India, Nation First is the highest guiding principle: PM
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The government is empowering the poor and middle-class: PM
The collective efforts of 140 crore Indians will realise the dream of a Viksit Bharat: PM

स्वर साधना, मनोकामना, आराधना। एक बहुत ही शुभ शुरुआत के बाद। अच्छा होता आप ही का कार्यक्रम चलता। आप सबको नमस्कार।

रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के सभी दर्शक और अब तो बहुत सारी भाषाओं में भी है, तो उन सबको भी मेरा प्रणाम! मैं इस समिट में हिस्सा लेने आए सभी साथियों का भी अभिनंदन करता हूं। 24 घंटे चलने वाले चैनलों में ब्रेकिंग न्यूज इसका बहुत बड़ा महत्व होता है। और आजकल तो दुनिया में ही, पूरी दुनिया में कहीं पर भी नजर डालो, पूरी दुनिया ब्रेकिंग न्यूज के मोड पर ही है, और इतनी भागदौड़ में आप सभी, इस समिट को होस्ट कर रहे हैं, इसका हिस्सा बने हैं। और इसलिए आप विशेष बधाई के पात्र हैं। और इस बार आपकी चर्चा का विषय भी उतना ही अहम है...Great Power India: Nation First...

साथियों,

हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है...यतो धर्मस्ततो जयः ! यानि जय का, शक्ति का, मूल धर्म है। और धर्म यानि ड्यूटी, धर्म यानि जस्टिस, धर्म यानि समभाव, धर्म यानि संवाद, धर्म यानि संवेदना और यही तो नेशन फर्स्ट की भावना में भी समाहित है। भारत, अपनी पावर को इसी लैंस से देखता है, इसी तराज़ू पर तौलता है।

साथियों,

भारत की एक और विशेषता है और अब तो दुनिया ने भी मान लिया है। हम किसी क्षणिक घटना पर उतावले होने वाले देश नहीं है, हम वो हैं जिसने विकास और विनाश, देखा भी झेला भी है। हम वो देश हैं, जिसके जेहन में युगों की मेमरी चिप लगी हुई है, हम युगों की मेमरी चिप वाले नेशन हैं। और इसलिए भारत आज जो कर रहा है, और ये मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ, भारत जो कर रहा है वो आने वाले एक हज़ार वर्ष का फ्यूचर लिखने वाला है। और यही दुनिया के लिए सबसे बड़ी भारत की गारंटी है। भारत, Fast-Growing Economy भी है। एक Credible Economy भी है। और भारत, rising power के साथ-साथ और अभी आप तो ढेर सारी डिक्शनरी लेकर बैठ गए थे, सुपर पावर तक ले गए। लेकिन मैं इतना जरूर कहूँगा कि भारत Reliable power है। मैं अभी दो-तीन दिन पहले G7 समिट से लौटा हूं और दुनिया का हर नेता हर देश इस बात को भली-भांति समझता है कि आज के भारत के लिए नेशन फर्स्ट ही सबसे बड़ा मंत्र है, सबसे बड़ा सिद्धांत है।

साथियों,

कुछ दिन पहले ही, हमारी सरकार को 12 साल पूरे हो चुके हैं। उसके लिए भी अर्नब ने आपको तालियाँ बजाने के लिए मजबूर कर दिया। पिछले बारह वर्षों की जो भी सिद्धियां देश की रही हैं, उनके मूल में अगर आप तराजू से तौलोगे, हर निर्णय, हर कदम, हर प्रयास उनके मूल में राष्ट्र प्रथम की भावना ही केंद्र में है। स्वच्छ भारत अभियान से लेकर मेक इन इंडिया खादी खरीदने पर जोर स्थानीय वस्तुएं खरीदने पर जोर ये सारे Initiative इसलिए सफल हुए क्योंकि देश की जनता ने देश को सबसे ऊपर रखते हुए अपना कर्तव्य निभाया। देश के नागरिकों को मैं सलाम करता हूँ।

साथियों,

यहां हमारे साथी श्रीधर वेंबु जी बैठे हैं। जब हमारे उद्यमी नेशन फर्स्ट की भावना के साथ चलते हैं, जब वो देश की आवश्यकताओं को समझते हुए अपने लक्ष्य बनाते हैं तो संस्थाएं भी बनती हैं और देश भी समृद्ध होता है। श्रीधर वेंबु जी ने क्या काम किया है, शायद यहाँ बातों में कितना निकला होगा मुझे मालूम नहीं, लेकिन अभी मैं फ़्रांस में vivatech में गया था, करीब डेढ़ 2 लाख नौजवान वहाँ होंगे, चलने के लिए भी मैं और फ्रांस के राष्ट्रपति अलग अलग स्टॉल पर जा रहे थे, देखने के लिए भई नौजवानों ने क्या काम किया है। तो हम जोहो के स्टॉल पर गए, मैं हैरान था जी, और गर्व होता था कि जोहो के स्टाल पर यूरोप के नौजवानों की जो भीड़ लगी थी और वो समझना चाहते है कि क्या है ये दुनिया में नई चीज, भारत में शायद उतनी चर्चा नहीं होगी, जितनी मैंने वहाँ फ्रांस में देखी, बधाई हो आपको।

साथियों,

सरकार की नीति और निर्णयों में नेशन फर्स्ट का क्या प्रभाव होता है, इसका एक उदाहरण हमारा आदिवासी क्षेत्र है। मैं आज कोई फिलोस्फी झाड़ने वाला नहीं हूँ, कुछ बातें जो हुई है वो हल्की फुल्की बता दूंगा और उससे आप अंदाज लगा लेंगे कि काम कैसे होता है। मैं आदिवासी क्षेत्र की बात करता हूँ। भारत के 10 करोड़ से अधिक आबादी की चर्चा, मतलब कि आदिवासी समाज की चर्चा और हम सबको पता है कि दशकों से माओवादी आतंक वहाँ अपने डेरा तंबू डालकर बैठ हुआ था। जहां 21वीं सदी में भी इन आतंकियों ने एक भी सुविधा पहुंचने नहीं दी, सरकारी एक वेहिकल नहीं गुजर सकता था वहाँ से। गोलियों से भून दिया जाता था। अनेक सरकारें आई-गईं, कई पीढ़ियां आई-गईं, लगता था कि हिंसा का ये दुर्भाग्य ऐसे ही रहेगा। आप कल्पना कर सकते हैं, 2004 से 2014 के बीच, मैं उस दस साल का हिसाब बताता हूँ, 2004 से 2014 के बीच माओवादी आंतक के कारण, 17 हज़ार से भी अधिक हिंसक घटनाएं हुईं थीं। और करीब-करीब 7 हज़ार से ज्यादा जानें गईं थी।

साथियों,

आज आपके लिए वन लाइन न्यूज होगा या टीवी पर आधे घंटे डिबेट होगी कि माओवाद आतंकवाद खत्म हो गया, चीजें ऐसी नहीं होती। उसके लिए खपना पड़ता है और इसलिए मैं बताना चाहता हूँ। और इसलिए मैं बताना चाहता हूं और आजकल जो लोग, कुछ लोग संविधान दिखाते रहते हैं, लेकिन जब ये लोग सरकार में थे और नक्सल प्रभावित इलाकों में संविधान का नाम लेने पर गोली मार दी जाती थी और तब ये लोग चुप बैठे थे, तब उनके हाथो में संविधान नहीं दिखता था, कांप रहे थे उनके हाथ। उस दर्दनाक स्थिति से कांग्रेस को कोई खास फर्क नहीं पड़ता था।

साथियों,

2014 के बाद, हालात को बदलने के लिए हम राष्ट्र प्रथम के भाव से आगे बढ़े, हम निकल पड़े। बोलते नहीं थे, बताते भी नहीं थे, करते जरूर थे। हमने संकल्प लिया कि नक्सलवाद-माओवाद को जड़ से उखाड़ फेकेंगे और आज पूरा देश नतीजा देख रहा है, आज देश में माओवादी आतंक, अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।

और साथियों,

कई बार अंतिम परिणाम इतना बड़ा और व्यापक होता है कि उसके पीछे की मेहनत पर ध्यान नहीं जाता। रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को मैं खासतौर पर इसके बारे में बताना चाहता हूं।

साथियों,

जिन नक्सल प्रभावित इलाकों में दिन में जाने से भी, यानी सामान्य मानवी डरा रहता था, उसको लगता था कहीं अपहरण हो जाएगा तो, कभी वसूली का डर रहता था, कभी साथ में जो कुछ भी है वो लूट लेने का डर रहता था। और जहां पर विकास की बात बोल तक नहीं सकते थे आप, लेकर के जा नहीं सकते थे, सब नामुमकिन था, ऐसे क्षेत्रों में हम हम विकास का संकल्प लेकर आगे बढ़े। वहां बीते 12 वर्षों में हमारी सरकार ने 12 हज़ार किलोमीटर से अधिक की सड़कें बनाईं। और कई बार तो हमने देखा, कई बार तो हमने देखा कि सड़क बनाने के जो हमारा साजो सामान होता है उसको जला दिया जाता था। कांट्रेक्टर को भगा दिया जाता था। अगर 25 लोग रोड पर काम करते तो 200 लोग पुलिस सुरक्षा रखते थे ताकि काम चले। यह सब इसलिए करते थे- तय किया था।

साथियों,

साढ़े 9 हज़ार से अधिक मोबाइल टावर बनाए। एक टावर नहीं लगने और लगा हुआ टावर तोड़ देते थे। क्योंकि उनको हमेशा वहां आक्रोश पैदा करना था। करीब 45,000 गांव में मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाई। नक्सल प्रभावित जिलों में 1800 से अधिक बैंक ब्रांच खोली गई। करीब 75,000 बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट और 6000 से अधिक नए पोस्ट ऑफिस बनाए गए। सिर्फ बम, बंदूक और गोली के सहारे काम नहीं किया है साथियों, हमने दिलों को जीतने के लिए, ईश्वर ने जो भी शक्ति दी थी उसको खपाया था।

साथियों,

हम बुलंद इरादों के साथ नक्सल प्रभावित इलाकों में जनसामान्य की आशा, आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए जा रहे थे। आप हैरान हो जाएंगे एक मशहूर नक्सली, करोड़ों रुपए का इनाम थे उसके, उसकी मां के पास हम पहली बार राशन कार्ड लेकर गए। बेटा अपनी मां को राशन कार्ड लेने नहीं देता था, आतंकवाद अपना चलाने के लिए। इतनी घटनाएं हैं, मैं हैरान था। और सरकार चुप बैठी थी, उनको संविधान उस समय तो दिखता नहीं था। लेकिन इन सारे प्रयासों का परिणाम यह आया कि जन सामान्य में एक विश्वास का नया दौर आया। आज आप देखिए बस्तर जैसे इलाकों में बम बंदूक नहीं बस्तर ओलंपिक्स की धूम है। और अब तक इस ओलंपिक के दो एडिशन हो चुके हैं। पहली बार डेढ़ लाख से अधिक युवाओं ने और दूसरी बार करीब 4 लाख युवाओं ने बस्तर ओलंपिक्स में हिस्सा लिया। यानी जहां कभी टेरर था, वहां टैलेंट को अवसर मिल रहा है, वहां स्पोर्ट्स फल-फूल रहा है।

साथियों,

12 वर्षों के इस सेवाकाल की एक और बड़ी सिद्धि रही है, यह सिद्धि है, निराशा से निकलकर आशा-आकांक्षा सबसे भरे भारत का निर्माण।

साथियों,

नक्सल कहीं और होगा लेकिन घटनाओं की पीड़ा हिंदुस्तान के हर कोने में होती थी और जिस समय नक्सल खत्म होने की बातें आने लगी तो विश्वास सिर्फ नक्सली इलाके का नहीं, हिंदुस्तान के कोने-कोने में जगने लगा। 2014 से पहले के 10 वर्षों में जो कांग्रेस सरकार चली, उससे नाराजगी केवल गवर्नेंस की नहीं थी। तब देश की निराशा इससे कहीं अधिक थी, देश उम्मीद खो चुका था, लोगों को लगता था कि कुछ हो ही नहीं सकता, कुछ बदल ही नहीं सकता।

साथियों,

पिछले 12 वर्षों में भारत ने उसी निराशा को आशा में बदला है और मुझे इस बात का सबसे ज्यादा संतोष है। आज हर किसी को यह लगता है कि थोड़ी और मेहनत करेंगे, तो यह हो सकता है। वो दिन चले गए जब एक ही बात सुनाई देती थी, कतई नहीं हो सकता, कतई नहीं हो सकता, वो जमाना चला गया, आज ये होकर रहेगा। ये जो भाव आया है यही भारत की असली सिद्धि है, और यही रियल पावर है। चुनौतियां तो आज भी बहुत है और हमेशा रहेगी और चुनौतियां बहुरूपिया होती है, वो नए-नए अवतार में सामने आती रहती है, अरे आएगी, जिस रूप में आएगी, जंग उससे भी लड़ लेंगे जी और जीत भी लेंगे। लेकिन यह हो सकता है और हम यह करके रहेंगे, जब इस भाव से देश आगे बढ़ता है, तब सपने पूरे होते हैं।

साथियों,

मैं यहां भारत के 100 से ज्यादा जिलों और 500 से ज्यादा ब्लॉक्स की चर्चा करना चाहूंगा। यह विकास के हर पैरामीटर पर पीछे छूट गए थे और पहले की सरकार ने इन पर पिछड़ा होने का ठप्पा लगा दिया था, यह तो बैकवर्ड डिस्ट्रिक्ट है, ये तो बैकवर्ड इलाका है। हमने देश के इस बहुत बड़े क्षेत्र को पिछड़ेपन की निराशा से बाहर निकालकर डेवलपमेंट की एस्पिरेशन जगाई। सबसे पहले तो हमने पहचान ही बदल दी, हमने कहा ये एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट है, ये एस्पिरेशनल ब्लॉक है, हमने एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट का प्रोग्राम बनाया, एस्पिरेशनल ब्लॉक का प्रोग्राम बनाया और सरकार ने विकास के हर पैरामीटर पर बहुत बारीकी से काम शुरू किया। इस डिस्ट्रिक्ट में ये तीन पहलू है, पहले उसमें से बाहर निकलो। यहां छह पहलू है, पहले इसमें से बाहर निकलो। बड़ा फोकस वे में काम शुरू किया। आज यह एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट और ब्लॉक्स राज्य की ओवरऑल ग्रोथ को आगे बढ़ाने का काम करने लगे हैं। जो पहले ग्रोथ को पीछे खींचते थे, इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट में बहुत बड़ी आबादी गरीब थी, अभाव में थी। बीते वर्षों में 25 करोड़ गरीबों ने गरीबी को परास्त किया है। तो इसमें इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट की एक बहुत बड़ी भूमिका है।

साथियों,

हम देखते हैं कि जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो सिर्फ घर का वो व्यक्ति ठीक होता है ऐसा नहीं है। जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो पूरा परिवार ठीक हो जाता है। ऐसे ही, जब घर का कोई एक बेटा-बेटी कुछ अचीव करता है, तो सिर्फ वो व्यक्ति अचीव करके नहीं आता, वो पूरा परिवार, पूरा परिवार अचीवमेंट से भर जाता है, विश्वास बदल जाता है। ऐसे ही, जब कोई गरीबी से बाहर आता है, तो सम्पूर्ण समाज का फायदा होता है, देश का फायदा होता है। 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, निओ मिडिल क्लास में आए हैं, तो इसका फायदा केवल उन परिवारों तक नहीं रहता, बल्कि मिडिल क्लास का भी इसमें फायदा होता है। क्योंकि यह नया कंज्यूमर है, जो इकोनॉमी को ड्राइव करता है, उससे अल्टीमेटली मिडिल क्लास के लिए अवसर बनते हैं। यानी गरीबी कम होना केवल वेलफेयर का ही विषय नहीं है, यह अवसरों के विस्तार की गाथा है, नई एस्पिरेशंस की प्रेरणा है।

साथियों,

पिछले 12 वर्ष में जो इतना विशाल मिडिल क्लास देश में तैयार हुआ है, वो सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता रहा है। मिडिल क्लास की Ease of Living के लिए सरकार ने हर स्तर पर काम किया है। अब जैसे अपने घर का सपना है। हर मिडिल क्लास परिवार की एक इच्छा रहती है कि भई खुद का घर हो, हर किसी को पूछोगे एक मन में रहता है मेरा अपना घर हो। 2014 में अगर किसी परिवार को अपना घर खरीदना होता था, तो होम लोन डबल डिजिट के इंटरेस्ट रेट पर मिलता था। लेकिन आज किसी भी बैंक से होम लोन 7-8 परसेंट के रेट पर मिल जाता है। पहले लोन लेना भी किसी युद्ध जीतने जैसा था, युद्ध जीतने में जितनी ताकत लगती थी, उतनी लोन लेने में लगती थी। आज यह घर बैठे ही संभव हो पा रहा है। मैं यहीं की बात बताता हूं, यह दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोग जानते हैं कि कैसे शहरी मिडिल क्लास के हजारों घर अधूरे अटके हुए थे। पैसे दे दिए थे, पूरे जिंदगी भर की कमाई बिल्डर को दे दी थी। उसने भी बढ़िया-बढ़िया पम्पलेट दिखाए, सपने दिखाए। अभी किराए पर घर में रहते हैं, तो किराया भी देना है, घर जल्दी मिलेगा। उधर किराया रहता है, घर मिल नहीं रहा, घर बन नहीं रहा, यह बहुत बुरा हाल था। इन अधूरे घरों को पूरा करने के लिए हमने 25 हजार करोड़ रुपए का स्पेशल फंड बनाया। और आपको जानकर खुशी होगी कि देश में बरसों से अटके करीब 60 हजार घरों को डिलीवरी किया जा चुका है।

साथियों,

एक और चीज है, जो रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है। यह जरूरत है, कनेक्टिविटी की, ट्रांसपोर्ट की। आज आप सोशल मीडिया में देखिए, दुनियाभर से जो भी टूरिस्ट आता है, भारत आता है, वो हमारे मेट्रो सिस्टम को देखकर हैरान रह जाता है।

साथियों,

वर्ष 2014 में करीब 28 लाख लोग, हर रोज मेट्रो से सफर करते थे। आज करीब एक करोड़ अठाइस लाख लोग हर रोज मेट्रो से सफर कर रहे हैं। अब वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत जैसी हाई स्पीड ट्रेन्स देश को कनेक्ट कर रही हैं। अच्छी सड़कों, अच्छे हाईवे से, समय तो बच ही रहा है, गाड़ियों की मैंटेनेंस पर होने वाला खर्चा भी कम हुआ है। बीते वर्षों में एयरपोर्ट्स की संख्या डबल हुई है। इससे कई छोटे-छोटे शहरों में भी मिडिल क्लास को हवाई यात्रा की सुविधा पहली बार मिली है।

साथियों,

पिछले 12 साल, मिडिल क्लास के लिए कमाई के साथ-साथ बचत के भी रहे हैं। 2013-14 में, लगभग 2 लाख रुपए तक की आय होने पर टैक्स लगता था, आप सबको वो नसीब रहा होगा। और यह टैक्स मिडिल क्लास देता रहता था। आज 12 लाख रुपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है। यानी टैक्स फ्री इनकम कई गुणा बढ़ गई है।

साथियों,

GST रिफॉर्म्स के कारण भी मिडिल क्लास को बहुत सुविधा हुई है। टैक्स फाइलिंग का समय और खर्चा भी बच गया है। क्योंकि यह बहुत ही आसान हो गया है। घर बैठे ही ITR फाइल हो रहे हैं, अगर कोई सेटलमेंट का इश्यू है, तो वो फेसलेस हो रहा है।

साथियों,

मिडिल क्लास परिवारों में एक बड़ा खर्चा डायबिटीज या ऐसी लाइफस्टाइल से जुड़े इलाज का भी रहता है। जन औषधि केंद्रों पर 80 परसेंट डिस्काउंट पर ऐसी दवाएं मिल रही हैं। अगर आपका पहले हजार रुपया खर्चा होता था, तो आज 200 रुपये में काम हो जाता है, 800 रुपये बच रहा है और इससे बीते वर्षों में करीब 40 हज़ार करोड़ रुपए की बचत देश के अनेक परिवारों की हुई है। मिडिल क्लास के बजट का एक बड़ा हिस्सा बुजुर्गों के इलाज पर भी जाता है। आज 70 वर्ष से ऊपर के हर नागरिक के लिए 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध है।

साथियों,

एक सामान्य स्वभाव है कि जब कोई सुविधा लगातार मिलती है, तो इंसान पहले की परेशानी भूल जाता है। अब 2 लाख रुपये पर आप टैक्स देते थे, अब 12 लाख तक नहीं देना पड़ रहा, लेकिन जब मैं कहूं, तब ताली बजती है। और बस में, ट्रेन में थोड़ी देर भी अगर कुछ मुसीबत आ गई, तो ढेर सारी गालियां देना शुरू हो जाते हैं और यही क्‍लास सबसे ज्यादा बोलता है।

साथियों,

मैंने जैसा कहा ना कि भई पुरानी तकलीफे भूल जाता है आदमी। आप लोगों को आज ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट से जुड़ी परेशानियां बिल्कुल याद नहीं होंगी। पहले ड्राइविंग लाइसेंस लेना होता था, तो कितनी दिक्कत होती थीं, पासपोर्ट लेना होता था, तो क्‍या-क्‍या कुछ नहीं करना पड़ता था, कितने पापड़ बेलने पड़ते थे। आज ड्राइविंग लाइसेंस लेना भी आसान हुआ है और तत्काल पासपोर्ट भी औसतन 3 दिन में ही मिल जाता है।

साथियों,

मैं जानता हूं, हमारी सरकार जिस तरह काम कर रही है, उसने देश के लोगों की एस्पिरेशन बहुत बढ़ा दी है। एक काम हुआ, तो लोगों की डिमांड वहीं खत्म नहीं हो जाती है। वो उससे भी बेहतर काम चाहते है, उससे भी अपग्रेड सुविधा चाहते हैं। अगर पहले डिमांड नई सड़क की थी, तो सड़क बनने के बाद लोग पूछते हैं, मेट्रो कब आएगी? पहले अपेक्षा होती थी कि ट्रेन समय पर पहुंच जाए, ट्रेन में बैठने की साफ-सुथरी जगह मिल जाए। आज डिमांड है कि हमारे रूट पर वंदे भारत क्यों नहीं चल रही है?

साथियों,

कुछ लोगों को ये असंतोष लगता है, यह एस्पिरेशन है, हमारे देश में एक फौज ऐसी है, उसको लगता है कि यह सब मामला कुछ गड़बड़ है। लेकिन लोग आखिरकार यह अपेक्षाएं किसके पास करेंगे भई, जो करता है, उससे ही करेंगे ना! सामान्‍य लोग हीनहीं, पूरी कांग्रेस पार्टी कहती है कि जरा मोदी जी, यह हो जाना चाहिए, यह होना चाहिए, कहते रहते हैं ना! उनको भरोसा है, करेगा तो ये ही करेगा!

साथियों,

एस्पिरेशंस वहीं होती है, जहां लोगों को लगता है कि सपने पूरे हो सकते हैं। और भारत के युवाओं की, भारत के गरीब और मिडिल क्लास की यही एस्पिरेशन है। आज भाजपा-एनडीए सरकारों की ऊर्जा बनी हुई है।

साथियों,

एक तरफ, देश का बहुत बड़ा वर्ग एस्पिरेशनल है, तो दूसरी तरफ, राजनीति की एक टोली है, जिसका जीवन मंत्र बन गया है- ऑलवेज अगेंस्ट! यह टोली, क्रॉनिक डिससैटिस्फैक्शन यानी स्थाई असंतोष से भरी हुई है। आज मैं रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को जरा इस टोली के लक्षण बताने जा रहा हूं। Symptoms पता चलेगा, तो आपको समझ आ जाएगा कि मैं क्या कह रहा हूं। आप आसानी से पहचान लेंगे। जैसे मैं उदाहरण देता हूं, आप समझ जाएंगे। इनको आप अक्सर कहते सुनेंगे, अरे फलां जगह तो चौबीस घंटे बिजली आती है, यहां क्यों नहीं? और अगले ही दिन ये लोग डैम्स का, सोलर पार्क का, थर्मल का, न्यूक्लियर प्लांट का विरोध करने के लिए ढपली लेकर के आ जाएंगे। यानी पहले दिन बिजली क्‍यों नहीं और दूसरे दिन तुम हाइड्रो पावर का डैम क्यों बना रहे हो, यह जमात ऐसी है। यह वो लोग हैं, जो खनिजों के खनन का विरोध करते थे, लेकिन आज पूछते हैं कि भारत का रेयर अर्थ मिनरल्स भंडार कहां है, सप्लाई चेन कहां है? और भारत में फलाने देश की तरह, इलेक्ट्रिक व्हीकल का इकोसिस्टम क्यों नहीं है? यह वही लोग हैं, जो कभी डेटा या आटा, इसकी डिबेट चलाते थे। पहले डाटा कि आटा, डाटा कि आटा, बड़ा मजा आता था। आज यही लोग पूछते हैं कि बताओ मोदी जी, AI में क्या काम हुआ? हद देखिए, एक सांस में कहते हैं, एक ही सांस में कहते हैं कि AI में यह होना चाहिए था, वो होना चाहिए था, हुआ क्यों नहीं? लेकिन दूसरी सांस में वही लोग कहते मिलेंगे, अरे यह डेटा सेंटर क्यों बना रहे हो? यह सेमीकंडक्टर प्लांट क्यों लगा रहे हो? और फिर यह लोग उसके 100 नुकसान गिनाने के लिए घंटे-घंटे भर सोशल मीडिया के स्‍क्रीन पर दिखेंगे, टीवी डिबेट पर दिखेंगे, अखबारों में भरे रहेंगे।

साथियों,

यह लोग करप्शन को लेकर दुनियाभर के इंडेक्स उठाकर लाते हैं, भारत को कटघरे में खड़ा करते हैं, इनके इकोसिस्टम का मीडिया भी 24-24 घंटे उछालता रहता है, लेकिन जब करप्शन के विरुद्ध एक्शन होता है, जब कार्रवाई होती है, तो यही लोग चिल्लाते हैं, सबसे पहले हल्ला मचाने का काम कौन करते हैं, यही गलत हो रहा है, फलाना गया ढीकना गया, रेड कर दी, जांच कर दी, harass कर दिया। सवाल उठाए जाते हैं, कार्रवाई ऐसे क्यों हो रही है, वैसे क्यों नहीं, अब क्यों हो रही है, तब क्यों नहीं, A पर क्यों हो रही है, B पर क्यों नहीं हो रही है, यही उनका खेल है।

साथियों,

इन लोगों का कैरेक्टर समझना देश के लिए बहुत जरूरी है। खासतौर पर मेरे देश के युवाओं को इनको पहचानने की जरूरत है और हमारी जेन जी को तो बहुत जल्दी समझना चाहिए, जल्दी समझो वरना अब सूर्यवंशी आया है, वो तेज गति से समझाता है।

साथियों,

यह लोग एक तरफ कहेंगे कि देश की सेनाओं को छूट नहीं है, हथियार नहीं मिल रहे हैं, लेकिन जब सरकार कोई डिफेंस डील करेगी, कोई आधुनिक हथियार खरीदती है, तो सबसे पहले आकर कहते हैं कि यह क्यों खरीदा? यह दुनिया भर में भारत की कूटनीति पर सवाल करेंगे, लेकिन जब भारत कूटनीति के लिए, सुरक्षा के लिए कहीं कोई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनाने लगेगा, तो यह लोग ढोल-ढपली लेकर हल्ला मचाना शुरू कर देते हैं।

साथियों,

आज भारत जिस अहम कालखंड में है, इसमें ऐसे लोगों को पहचानना होगा, उनके कुतर्क को समझना होगा और उनसे सतर्क रहना बहुत जरूरी होगा। और आज दुर्भाग्य से, आज देश के मुख्य विपक्षी दल, कांग्रेस पर, ऐसे ही लोगों का कब्जा हो गया है। कांग्रेस कभी नेशन फर्स्ट की बात करेगी, यह सोचना भी अब झूठे सपने जैसा हो गया है। कल्पना ही नहीं कर सकते क्या कभी कांग्रेस में यह फिर से आएगी बात, जो गांधी जी के जमाने में थी।

साथियों,

आज दुनिया पुरानी धाराओं को चैलेंज कर रही है, डिसरप्शन्स की स्केल बहुत बड़ी हो गई है, लेकिन इसका एक और पक्ष है। यह चुनौतियां, नए अवसर भी ला रही है। भारत के हर युवा, हर उद्यमी, हर इनोवेटर, हर स्टार्टअप को, इन्हीं अवसरों पर फोकस करना है और इसमें सरकार, नेशन फर्स्ट की भावना के साथ पूरी तरह देश के लोगों के साथ है। भारत आज रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार हो चुका है। यह गति आगे और तेज होगी, मैं रिपब्लिक टीवी के इस मंच से देशवासियों से फिर कहूंगा कि हमारा सपना जितना बड़ा है, हमारे प्रयास भी उतने ही विराट होंगे और 140 करोड़ देशवासियों का यही साझा प्रयास, विकसित भारत बनाकर रहेगा। और आप सब लोग, मैं विश्वास से कहता हूं, अपनी आंखों से विकसित भारत देखने वाले हैं। आने वाली पीढ़ियों तक इंतजार करना पड़े, इस प्रकार से मैं काम नहीं करता, आप खुद अपनी आंखों से देखकर के जाएंगे। इसी विश्वास के साथ, मैं फिर एक बार रिपब्लिक टीवी को, उसके दर्शकों को और आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं! बहुत-बहुत धन्यवाद!