इस वर्ष के केंद्रीय बजट ने कृषि और ग्रामीण परिवर्तन को नई दिशा प्रदान की है: प्रधानमंत्री
सरकार ने कृषि क्षेत्र को लगातार मजबूत किया है, प्रमुख प्रयासों से किसानों के जोखिम कम हुए हैं और उन्हें बुनियादी आर्थिक सुरक्षा मिली है: प्रधानमंत्री
यदि हम उच्च मूल्य वाली कृषि को बढ़ावा दें, तो यह कृषि को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में बदल देगा: प्रधानमंत्री
निर्यात-उन्मुख उत्पादन बढ़ने से प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजित होगा: प्रधानमंत्री
मत्स्य पालन ग्रामीण समृद्धि के लिए एक उच्च मूल्य और उच्च प्रभाव वाला क्षेत्र और निर्यात वृद्धि का एक प्रमुख आधार बन सकता है: प्रधानमंत्री
सरकार एग्रीस्टैक के माध्यम से कृषि के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना विकसित कर रही है: प्रधानमंत्री
प्रौद्योगिकी तभी परिणाम देती है जब सिस्टम इसे अपनाएं हैं, संस्थान इसे एकीकृत करें हैं और उद्यमी इस पर नवाचार करें: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज बजट के बाद आयोजित तीसरे वेबिनार को संबोधित किया। इस वेबिनार का मुख्य विषय ‘कृषि और ग्रामीण परिवर्तन’ था। प्रौद्योगिकी और आर्थिक विकास से संबंधित पिछले सत्रों को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बजट तैयार करने के दौरान हितधारकों ने बहुमूल्य सहयोग प्रदान किया। श्री मोदी ने कहा कि अब बजट के बाद, यह उतना ही महत्वपूर्ण है कि देश अपनी पूरी क्षमता का लाभ उठाए और इस दिशा में आपके सुझाव और यह वेबिनार इसलिए महत्वपूर्ण हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार और देश के दीर्घकालिक विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। श्री मोदी ने 'पीएम किसान सम्मान निधि' और 'न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी)' जैसे कई कार्यक्रमों पर बल दिया, जिनसे किसानों को डेढ़ गुना लाभ मिल रहा है। श्री मोदी ने कहा कि सरकार ने कृषि क्षेत्र को लगातार मजबूत किया है।

मौजूदा योजनाओं की सफलता के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि 10 करोड़ किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि प्राप्त हुई है और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत लगभग 2 लाख करोड़ रुपए के बीमा दावों का निपटारा किया गया है। श्री मोदी ने यह भी कहा कि संस्थागत ऋण कवरेज 75 प्रतिशत से अधिक हो गया है। श्री मोदी ने कहा कि इन अनेक प्रयासों से किसानों के जोखिम कम हुए हैं और उन्हें बुनियादी आर्थिक सुरक्षा मिली है।

खाद्यान्न और दालों के रिकॉर्ड उत्पादन पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने 21वीं सदी की दूसरी तिमाही की शुरुआत के साथ ही इस क्षेत्र में नई ऊर्जा डालने का आह्वान किया। इस वर्ष के केंद्रीय बजट में इस दिशा में किए गए नए प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए, श्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि वेबिनार की चर्चाओं से बजट प्रावधानों के कार्यान्वयन में तेजी आएगी। श्री मोदी ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि इस वेबिनार में हुई चर्चा और उससे प्राप्त सुझाव जमीनी स्तर पर बजट प्रावधानों को यथाशीघ्र लागू करने में सहायक साबित होंगे।

प्रधानमंत्री ने वैश्विक मांग में हो रहे बदलावों और भारतीय कृषि को निर्यात-उन्मुख बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने उत्पादकता और निर्यात क्षमता बढ़ाने के लिए भारत की विविध जलवायु का पूर्ण उपयोग करने का आग्रह किया। श्री मोदी ने कहा कि इस वेबिनार में, हमारी कृषि को निर्यात-उन्मुख बनाने पर अधिकतम चर्चा करना आवश्यक है।

उच्च मूल्य वाली कृषि पर ध्यान केंद्रित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कोको, काजू और चंदन जैसी फसलों के क्षेत्र-विशिष्ट संवर्धन के लिए बजट प्रस्तावों का विस्तृत विवरण दिया। श्री मोदी ने पूर्वोत्तर में अगरवुड और हिमालयी राज्यों में शीतोष्ण मेवों की फसलों को बढ़ावा देने के बजट प्रस्ताव पर भी प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने कहा कि निर्यात उन्मुख उत्पादन से प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन के माध्यम से ग्रामीण रोजगार सृजित होगा। श्री मोदी ने कहा कि यदि हम सब मिलकर उच्च मूल्य वाली कृषि का विस्तार करें, तो यह कृषि को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में बदल देगा।

प्रधानमंत्री ने वैश्विक ब्रांडिंग और गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के लिए विशेषज्ञों, उद्योग जगत और किसानों को शामिल करते हुए एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने स्थानीय किसानों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने के महत्व पर बल दिया। श्री मोदी ने कहा कि इन सभी विषयों पर चर्चा से इस वेबिनार का महत्व और भी बढ़ जाएगा।

मत्स्य पालन क्षेत्र का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है। श्री मोदी ने आगे बताया कि हमारे विभिन्न जलाशयों और तालाबों में वर्तमान में लगभग 4.5 लाख टन मछली का उत्पादन हो रहा है, जबकि अतिरिक्त 20 लाख टन उत्पादन की अपार संभावना है। श्री मोदी ने कहा कि मत्स्य पालन, निर्यात वृद्धि का एक प्रमुख आधार बन सकता है।

प्रधानमंत्री ने समुद्री अर्थव्यवस्था की क्षमता को साकार करने के लिए हैचरी, चारा और लॉजिस्टिक्स में नए व्यावसायिक मॉडलों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने मत्स्य पालन विभाग और स्थानीय समुदायों के बीच मजबूत तालमेल को प्रोत्साहित किया। श्री मोदी ने कहा कि यह ग्रामीण समृद्धि के लिए एक उच्च मूल्य और उच्च प्रभाव वाला क्षेत्र बन सकता है और लोगों को इस पर मिलकर विचार-विमर्श करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और अंडा उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि इसे और आगे ले जाने के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रजनन, रोग निवारण और वैज्ञानिक प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है। श्री मोदी ने आगे कहा कि पशुधन का स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण विषय है और जब वह 'एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य' की बात करते हैं तो इसमें पशुधन का स्वास्थ्य भी शामिल है।

वैक्सीन उत्पादन के मामले में देश की आत्मनिर्भरता का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत प्रौद्योगिकी के विस्तार और पशुपालन करने वाले किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड की उपलब्धता का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि पशुओं को मुंहपका-खुरपका बीमारी से बचाने के लिए 125 करोड़ से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए पशुपालन अवसंरचना विकास कोष भी शुरू किया गया है।

जोखिमों को कम करने के लिए, प्रधानमंत्री ने एकल फसल पर निर्भरता के बजाय फसल विविधीकरण की वकालत की। उन्होंने खाद्य तेल, दालों और प्राकृतिक खेती के लिए चलाए जा रहे अभियानों को इस क्षेत्र की मजबूती बढ़ाने के साधन के रूप में बताया। श्री मोदी ने कहा कि इसलिए, सरकार फसल विविधीकरण पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

प्रधानमंत्री ने प्रतिभागियों को याद दिलाया कि चूंकि कृषि राज्य का विषय है, इसलिए राज्यों को अपने बजटीय दायित्वों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकतम प्रभाव के लिए जिला स्तर पर बजट प्रावधानों को मजबूत करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने कृषि में "प्रौद्योगिकी संस्कृति" पर विस्तार से बात करते हुए ई-एनएएम और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के विकास का जिक्र किया। उन्होंने किसान पहचान पत्र और डिजिटल भूमि सर्वेक्षण को क्रांतिकारी कदम बताया। श्री मोदी ने कहा कि सरकार कृषि में 'प्रौद्योगिकी संस्कृति' लाने पर विशेष जोर देती है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्लेटफार्मों और डिजिटल सर्वेक्षणों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रौद्योगिकी तभी परिणाम देती है जब संस्थानों और उद्यमियों द्वारा इसे अपनाया जाता है। उन्होंने प्रौद्योगिकी को पारंपरिक प्रणालियों के साथ प्रभावी ढंग से एकीकृत करने के तरीकों पर सुझाव आमंत्रित किए। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वेबिनार से प्राप्त सुझाव प्रौद्योगिकी को सही ढंग से एकीकृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

प्रधानमंत्री ने पीएम आवास योजना और पीएम ग्राम सड़क योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण समृद्धि के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर स्वयं सहायता समूहों के प्रभाव का उल्लेख किया। श्री मोदी ने कहा कि हमारी सरकार ग्रामीण समृद्धि के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।

'लखपति दीदी' अभियान पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने 2029 तक 3 करोड़ और सफल महिला उद्यमियों को तैयार करने का लक्ष्य रखा। उन्होंने इस लक्ष्य को और अधिक तेजी से हासिल करने के लिए सुझाव मांगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस लक्ष्य को और भी तेजी से हासिल करने के लिए लोगों के सुझाव महत्वपूर्ण होंगे।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के समापन में, व्यापक भंडारण अभियान और कृषि-वित्तीय प्रौद्योगिकी तथा आपूर्ति श्रृंखलाओं में नवाचार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने उद्यमियों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने अंत में कहा कि उन्हें विश्वास है कि आज की इन चर्चाओं से प्राप्त होने वाले सकारात्मक परिणाम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान करेंगे।

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सरकार कृषि में 'टेक्नोलॉजी कल्चर' लाने पर विशेष जोर दे रही है: पीएम मोदी
March 06, 2026
इस वर्ष के केंद्रीय बजट ने कृषि और ग्रामीण परिवर्तन को नई दिशा प्रदान की है: प्रधानमंत्री
सरकार ने कृषि क्षेत्र को लगातार मजबूत किया है, प्रमुख प्रयासों से किसानों के जोखिम कम हुए हैं और उन्हें बुनियादी आर्थिक सुरक्षा मिली है: प्रधानमंत्री
यदि हम उच्च मूल्य वाली कृषि को बढ़ावा दें, तो यह कृषि को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में बदल देगा: प्रधानमंत्री
निर्यात-उन्मुख उत्पादन बढ़ने से प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजित होगा: प्रधानमंत्री
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नमस्कार !

बजट वेबिनार सीरीज के तीसरे वेबिनार में, मैं आप सभी का अभिनंदन करता हूं। इससे पहले, टेक्नोलॉजी, रिफॉर्म्स और इकोनॉमिक ग्रोथ जैसे अहम विषयों पर दो वेबिनार हो चुके हैं। आज, Rural Economy और Agriculture जैसे अहम सेक्टर पर चर्चा हो रही है। आप सभी ने बजट निर्माण में अपने मूल्यवान सुझावों से बहुत सहयोग दिया, और आपने देखा होगा बजट में आप सबके सुझाव रिफ्लेक्ट हो रहे हैं, बहुत काम आए हैं। लेकिन अब बजट आ चुका है, अब बजट के बाद उसके full potential का लाभ देश को मिले, इस दिशा में भी आपका अनुभव, आपके सुझाव और सरल तरीके से बजट का सर्वाधिक लोगों को लाभ हो। बजट का पाई-पाई पैसा जिस हेतु से दिया गया है, उसको परिपूर्ण कैसे करें? जल्द से जल्द कैसे करें? आपके सुझाव ये वेबिनार के लिए बहुत अहम है।

साथियों,

आप सभी जानते हैं, कृषि, एग्रीकल्चर, विश्वकर्मा, ये सब हमारी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। एग्रीकल्चर, भारत की लॉन्ग टर्म डेवलपमेंट जर्नी का Strategic Pillar भी है, और इसी सोच के साथ हमारी सरकार ने कृषि सेक्टर को लगातार मजबूत किया है। करीब 10 करोड़ किसानों को 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पीएम किसान सम्मान निधि मिली है। MSP में हुए Reforms से अब किसानों को डेढ़ गुना तक रिटर्न मिल रहा है। इंस्टिट्यूशनल क्रेडिट कवरेज 75 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। पीएम फसल बीमा योजना के तहत लगभग 2 लाख करोड़ रुपए के क्लेम सेटल किए गए हैं। ऐसे अनेक प्रयासों से किसानों का रिस्क बहुत कम हुआ है, और उन्हें एक बेसिक इकोनॉमिक सिक्योरिटी मिली है। इससे कृषि क्षेत्र का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। आज खाद्यान्न और दालों से लेकर तिलहन तक देश रिकॉर्ड उत्पादन कर रहा है। लेकिन अब, जब 21वीं सदी का दूसरा क्वार्टर शुरू हो चुका है, 25 साल बीत चुके हैं, तब कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा से भरना भी उतना ही आवश्यक है। इस साल के बजट में इस दिशा में नए प्रयास हुए हैं। मुझे विश्वास है, इस वेबिनार में आप सभी के बीच हुई चर्चा, इससे निकले सुझाव, बजट प्रावधानों को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने में मदद करेंगे।

साथियों,

आज दुनिया के बाजार खुल रहे हैं, ग्लोबल डिमांड बदल रही है। इस वेबिनार में अपनी खेती को एक्सपोर्ट ओरिएंटेड बनाने पर भी ज्यादा से ज्यादा चर्चा आवश्य़क है। हमारे पास Diverse Climate है, हमें इसका पूरा फायदा उठाना है। एग्रो क्लाइमेटिक जोन, उस विषय में हम बहुत समृद्ध है। इस साल का बजट इन सब बातों के लिए अनगिनत नए अवसर देने वाला बजट है। प्रोडक्टिविटी बढ़ाने की दिशा तय करता है, और एक्सपोर्ट स्ट्रेंथ को बढ़ावा देता है। बजट में हमने high value agriculture पर फोकस किया है। नारियल, काजू, कोको, चंदन, ऐसे उत्पादों के regional-specific promotion की बात कही है, और आपको मालूम है, दक्षिण के हमारे जो राज्य हैं खासकर केरल है, तमिलनाडु है, नारियल की पैदावार बहुत करते हैं। लेकिन अब वो क्रॉप, वो सारे पेड़ इतने पुराने हो चुके हैं कि उसकी वो क्षमता नहीं रही है। केरल के किसानों को अतिरिक्त लाभ हो, तमिलनाडु के किसानों को अतिरिक्त लाभ हो। इसलिए इस बार कोकोनट पर एक विशेष बल दिया गया है, जिसका फायदा आने वाले दिनों में हमारे इन किसानों को मिलेगा।

साथियों,

नॉर्थ ईस्ट की तरफ देखें, अगरवुड बहुत कम लोगों को मालूम है, जो ये अगरबत्ती शब्द है ना, वो अगरवुड से आया हुआ है। अब हिमालयन राज्यों में टेम्परेट नट क्रॉप्स, और इन्हें बढ़ावा देने का प्रस्ताव बजट में रखा गया है। जब एक्सपोर्ट ओरिएंटेड प्रोडक्शन बढ़ेगा, तो ग्रामीण क्षेत्रों में प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के जरिए रोजगार सृजन होगा। इस दिशा में एक coordinated action कैसे हो, आप सभी स्टेकहोल्डर्स मिलकर जरूर मंथन करें। अगर हम मिलकर High Value Agriculture को स्केल करते हैं, तो ये एग्रीकल्चर को ग्लोबली कंपेटिटिव सेक्टर में बदल सकता है। एग्री experts, इंडस्ट्री और किसान एक साथ कैसे आएं, किसानों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने के लिए किस तरह से गोल्स सेट किए जाएं, क्वालिटी, ब्रांडिंग और स्टैंडर्ड्स, ऐसे हर पहलू, इन सबको कैसे प्रमोट किया जाए, इन सारे विषयों पर चर्चा, इस वेबिनार को, इसके महत्व को बढ़ाएंगे। मैं एक और बात आपसे कहना चाहूंगा। आज दुनिया हेल्थ के संबंध में ज्यादा कॉनशियस है। होलिस्टिक हेल्थ केयर और उसमें ऑर्गेनिक डाइट, ऑर्गेनिक फूड, इस पर बहुत रुचि है। भारत में हमें केमिकल फ्री खेती पर बल देना ही होगा, हमें नेचुरल फार्मिंग पर बल देना होगा। नेचुरल फार्मिंग से, केमिकल फ्री प्रोडक्ट से दुनिया के बाजार तक पहुंचने में हमारे लिए एक राजमार्ग बन जाता है। उसके लिए सर्टिफिकेशन, लेबोरेटरी ये सारी व्यवस्थाएं सरकार सोच रही है। लेकिन आप लोग इसमें भी जरूर अपने विचार रखिए।

साथियों,

एक्सपोर्ट बढ़ाने में एक बहुत बड़ा फैक्टर फिशरीज सेक्टर का पोटेंशियल भी है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश भी है। आज हमारे अलग-अलग तरह के जलाशय, तालाब, ये सब मिलाकर लगभग 4 लाख टन मछली उत्पादन होता है। जबकि इसमें 20 लाख टन अतिरिक्त उत्पादन की संभावना मौजूद है। अब विचार कीजिए आप, 4 लाख टन से हम अतिरिक्त 20 लाख टन जोड़ दें, तो हमारे गरीब मछुआरे भाई-बहन हैं, उनकी जिंदगी कैसी बदल जाएगी। हमारे पास Rural Income को डायवर्सिफाई करने का अवसर है। फिशरीज एक्सपोर्ट ग्रोथ का बड़ा प्लेटफॉर्म बन सकता है, दुनिया में इसकी मांग है। इस वेबिनार से अगर बहुत ही प्रैक्टिकल सुझाव निकलते हैं, तो कैसे रिज़रवॉयर, उसकी पोटेंशियल की सटीक मैपिंग की जाए, कैसे क्लस्टर प्लानिंग की जाए, कैसे फिशरीज डिपार्टमेंट और लोकल कम्युनिटी के बीच मजबूत कोऑर्डिनेशन हो, तो बहुत ही उत्तम होगा। हैचरी, फीड, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, एक्सपोर्ट, उसके लिए आवश्यक लॉजिस्टिक्स, हर स्तर पर हमें नए बिजनेस मॉडल विकसित करने ही होंगे। ये Rural Prosperity, ग्रामीण समृद्धि के लिए, वहां की हाई वैल्यू, हाई इम्पैक्ट सेक्टर के रूप में परिवर्तित करने का एक अवसर है हमारे लिए, और इस दिशा में भी हम सबको मिलकर काम करना है, और आप आज जो मंथन करेंगे, उसके लिए, उस कार्य के लिए रास्ता बनेगा।

साथियों,

पशुपालन सेक्टर, ग्रामीण इकोनॉमी का हाई ग्रोथ पिलर है। भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा मिल्क प्रोड्यूसर है, Egg प्रोडक्शन में हम दूसरे स्थान पर है। हमें इसे और आगे ले जाने के लिए ब्रीडिंग क्वालिटी, डिजीज प्रिवेंशन और साइंटिफिक मैनेजमेंट पर फोकस करना होगा। एक और अहम विषय पशुधन के स्वास्थ्य का भी है। मैं जब One Earth One Health की बात करता हूं, तो उसमें पौधा हो या पशु, सबके स्वास्थ्य की बात शामिल है। भारत अब वैक्सीन उत्पादन में आत्मनिर्भर है। फुट एंड माउथ डिजीज, उससे पशुओं को बचाने के लिए सवा सौ करोड़ से अधिक डोज पशुओं को लगाई जा चुकी है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत टेक्नोलॉजी का विस्तार किया जा रहा है। हमारी सरकार में अब पशुपालन क्षेत्र के किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड का भी लाभ मिल रहा है। निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एनिमल हसबेंड्री इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड की शुरुआत भी की गई है, और आपको ये पता है हम लोगों ने गोबरधन योजना लागू की है। गांव के पशुओं के निकलने वाला मलमूत्र है, गांव का जो वेस्ट है, कूड़ा-कचरा है। हम गोबरधन योजना में इसका उपयोग करके गांव भी स्वच्छ रख सकते हैं, दूध से आय होती है, तो गोबर से भी आय हो सकती है, और एनर्जी सिक्योरिटी की दिशा में गैस सप्लाई में भी ये गोबरधन बहुत बड़ा योगदान दे सकता है। ये मल्टीपर्पज बेनिफिट वाला काम है, और गांव के लिए बहुत उपयोगी है। मैं चाहूंगा कि सभी राज्य सरकारें इसको प्राथमिकता दें, इसको आगे बढ़ाएं।

साथियों,

हमने पिछले अनुभवों से समझा है कि केवल एक ही फसल पर टिके रहना किसान के लिए जोखिम भरा है। इससे आय के विकल्प भी सीमित हो जाते हैं। इसलिए, हम crop diversification पर फोकस कर रहे हैं। इसके अलावा, National Mission on Edible Oils And Pulses, National Mission on Natural Farming, ये सभी एग्रीकल्चर सेक्टर की ताकत बढ़ा रहे हैं।

साथियों,

आप भी जानते हैं एग्रीकल्चर स्टेट सब्जेक्ट है, राज्यों का भी एक बड़ा एग्रीकल्चर बजट होता है, हमें राज्यों को भी निरंतर प्रेरित करना है कि वो अपना दायित्व निभाने में, हम उनको कैसे मदद दें, हमारे सुझाव उनको कैसे काम आएं। राज्य का भी एक-एक पैसा जो गांव के लिए, किसान के लिए तय हुआ है, वो सही उपयोग हो। हमें बजट प्रावधानों को जिला स्तर तक मजबूत करना होगा। तभी नई पॉलिसीज का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाया जा सकता है।

साथियों,

ये टेक्नोलॉजी की सदी है और सरकार का बहुत जोर एग्रीकल्चर में टेक्नोलॉजी कल्चर लाने पर भी है। आज e-NAM के माध्यम से मार्केट एक्सेस का डेमोक्रेटाइजेशन हुआ है। सरकार एग्रीस्टैक के जरिए, एग्रीकल्चर के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रही है। इसके तहत डिजिटल पहचान, यानी किसान आईडी बनाई जा रही है। अब तक लगभग 9 करोड़ किसानों की किसान आईडी बन चुकी है, और लगभग 30 करोड़ भूमि पार्सलों का डिजिटल सर्वे किया गया है। भारत-विस्तार जैसे AI आधारित प्लेटफॉर्म, रिसर्च इंस्टीट्यूशंस और किसानों के बीच की दूरी कम कर रहे हैं।

लेकिन साथियों,

टेक्नोलॉजी तभी परिणाम देती है, जब सिस्टम उसे अपनाएं, संस्थाएं उसे इंटीग्रेट करें और एंटरप्रेन्योर्स उस पर इनोवेशन खड़ा करें। इस वेबिनार में आपको इससे जुड़े सुझावों को मजबूती से सामने लाना होगा। हम टेक्नोलॉजी को कैसे सही तरीके से इंटीग्रेट करें, इस दिशा में इस वेबिनार से निकले सुझावों की बहुत बड़ी भूमिका होगी।

साथियों,

हमारी सरकार ग्रामीण समृद्धि के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वामित्व योजना, पीएम ग्रामीण सड़क योजना, स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक मदद, इसने रूरल इकोनॉमी को निरंतर मजबूत किया है। लखपति दीदी अभियान की सफलता को भी हमें नई ऊंचाई देनी है। अभी तक गांव की 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने में हम सफल हो चुके हैं। अब 2029 तक, 2029 तक 3 करोड़ में और 3 करोड़ जोड़ना है, और 3 करोड़ और लखपति दीदियां बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। ये लक्ष्य और तेजी से कैसे प्राप्त किया जाए, इसे लेकर भी आपके सुझाव महत्वपूर्ण होंगे।

साथियों,

देश में स्टोरेज का बहुत बड़ा अभियान चल रहा है। लाखों गोदाम बनाए जा रहे हैं। स्टोरेज के अलावा एग्री एंटरप्रेन्योर्स प्रोसेसिंग, सप्लाई चैन, एग्री-टेक, एग्री-फिनटेक, एक्सपोर्ट, इन सब में इनोवेशन और निवेश बढ़ाना आज समय की मांग है। मुझे विश्वास है आज जो आप मंथन करेंगे, उससे निकले अमृत से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी। आप सबको इस वेबिनार के लिए मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं, और मुझे पूरा विश्वास है कि जमीन से जुड़े हुए विचार, जड़ों से जुड़े हुए विचार, इस बजट को सफल बनाने के लिए, गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए बहुत काम आएंगे। आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।