प्रधानमंत्री महाराष्ट्र में 75,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे
प्रधानमंत्री नागपुर और शिर्डी को जोड़ने वाले समृद्धि महामार्ग के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे
समृद्धि महामार्ग या नागपुर-मुंबई सुपर कम्युनिकेशन एक्सप्रेसवे, देश भर में बेहतर कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे को लेकर प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है
नागपुर में शहरी गतिशीलता में क्रांति लाने के लिए प्रधानमंत्री नागपुर मेट्रो के पहले चरण को राष्ट्र को समर्पित करेंगे और नागपुर मेट्रो के दूसरे चरण की आधारशिला रखेंगे
प्रधानमंत्री एम्स नागपुर को राष्ट्र को समर्पित करेंगे - इसकी आधारशिला भी प्रधानमंत्री ने जुलाई 2017 में रखी थी
प्रधानमंत्री नागपुर और बिलासपुर को जोड़ने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे
प्रधानमंत्री नागपुर रेलवे स्टेशन और अजनी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास कार्य का शिलान्यास करेंगे
प्रधानमंत्री नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वन हेल्थ, नागपुर और नाग नदी प्रदूषण उपशमन परियोजना, नागपुर का शिलान्यास करेंगे
प्रधानमंत्री 'सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीआईपीईटी), चंद्रपुर' और 'सेंटर फॉर रिसर्च, मैनेजमेंट एंड कंट्रोल ऑफ हीमोग्लोबिनोपैथीज, चंद्रपुर' राष्ट्र को समर्पित करेंगे
प्रधानमंत्री गोवा में लगभग 2,870 करोड़ रुपये की लागत से विकसित मोपा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे
हवाई अड्डा पर्यटन को बढ़ावा देगा और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देगा
प्रधानमंत्री 9वीं विश्व आयुर्वेद कांग्रेस के समापन समारोह को संबोधित करेंगे और तीन राष्ट्रीय आयुष संस्थानों का भी उद्घाटन करेंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 11 दिसंबर, 2022 को महाराष्ट्र और गोवा का दौरा करेंगे।

प्रधानमंत्री सुबह करीब साढ़े नौ बजे नागपुर रेलवे स्टेशन पहुंचेंगे, जहां वे वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। प्रधानमंत्री सुबह करीब 10 बजे, फ्रीडम पार्क मेट्रो स्टेशन से खपरी मेट्रो स्टेशन तक मेट्रो की सवारी करेंगे, जहां वे 'नागपुर मेट्रो के पहले चरण' को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। कार्यक्रम के दौरान वे 'नागपुर मेट्रो के दूसरे चरण' की आधारशिला भी रखेंगे। प्रधानमंत्री सुबह करीब 10:45 बजे, नागपुर और शिर्डी को जोड़ने वाले समृद्धि महामार्ग के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे और राजमार्ग का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री सुबह करीब 11:15 बजे एम्स नागपुर राष्ट्र को समर्पित करेंगे।

प्रधानमंत्री नागपुर में एक सार्वजनिक समारोह में, लगभग 11:30 बजे, 1500 करोड़ से अधिक की लागत वाली रेल परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे। वे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वन हेल्थ (एनआईओ), नागपुर और नाग नदी प्रदूषण उपशमन परियोजना, नागपुर की आधारशिला भी रखेंगे। कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री 'सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीआईपीईटी), चंद्रपुर' को राष्ट्र को समर्पित करेंगे और 'सेंटर फॉर रिसर्च, मैनेजमेंट एंड कंट्रोल ऑफ हीमोग्लोबिनोपैथिस, चंद्रपुर' का उद्घाटन करेंगे।

गोवा में लगभग 3:15 बजे प्रधानमंत्री 9वीं विश्व आयुर्वेद कांग्रेस के समापन समारोह को संबोधित करेंगे। वे कार्यक्रम के दौरान तीन राष्ट्रीय आयुष संस्थानों का भी उद्घाटन करेंगे। लगभग 5:15 बजे, प्रधानमंत्री मोपा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, गोवा का उद्घाटन करेंगे।

प्रधानमंत्री नागपुर में

समृद्धि महामार्ग

प्रधानमंत्री नागपुर और शिर्डी को जोड़ने वाले 520 किलोमीटर लंबे समृद्धि महामार्ग के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे।

समृद्धि महामार्ग या नागपुर-मुंबई सुपर कम्युनिकेशन एक्सप्रेसवे परियोजना, देश भर में बेहतर कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे को लेकर प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस 701 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे को लगभग 55,000 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है। यह भारत के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे में से एक है, जो महाराष्ट्र के 10 जिलों और अमरावती, औरंगाबाद और नासिक के प्रमुख शहरी क्षेत्रों से होकर गुजरता है। यह एक्सप्रेसवे आसपास के 14 अन्य जिलों की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में मदद करेगा। इस प्रकार विदर्भ, मराठवाड़ा और उत्तरी महाराष्ट्र के क्षेत्रों सहित राज्य के लगभग 24 जिलों के विकास में मदद मिलेगी।

पीएम गति शक्ति के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर कनेक्टिविटी परियोजनाओं की एकीकृत योजना और समन्वित कार्यान्वयन के संदर्भ में प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए, समृद्धि महामार्ग दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट और अजंता एलोरा गुफाओं, शिर्डी, वेरुल, लोनार आदि जैसे पर्यटन स्थलों से जुड़ जाएगा। समृद्धि महामार्ग महाराष्ट्र के आर्थिक विकास को प्रमुखता पूर्वक बढ़ावा देने में एक गेम-चेंजर साबित होगा।

नागपुर मेट्रो

शहरी गतिशीलता में क्रांति लाने वाला एक और कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री 'नागपुर मेट्रो के पहले चरण' को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। वह खपरी मेट्रो स्टेशन पर दो मेट्रो ट्रेनों- खपरी से ऑटोमोटिव स्क्वायर (ऑरेंज लाइन) और प्रजापति नगर से लोकमान्य नगर (एक्वा लाइन) को हरी झंडी दिखाएंगे। नागपुर मेट्रो का पहला चरण 8650 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया गया है। प्रधानमंत्री 6700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित होने वाले नागपुर मेट्रो फेज-2 का शिलान्यास भी करेंगे।

एम्स नागपुर

एम्स नागपुर को राष्ट्र को समर्पित करने से देश भर में स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता को और मजबूती मिलेगी। इस अस्पताल का शिलान्यास भी जुलाई 2017 में प्रधानमंत्री द्वारा किया गया था। इसे केंद्रीय क्षेत्र की योजना - प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत स्थापित किया गया है।

एम्स नागपुर को 1575 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया जा रहा है। यह अत्याधुनिक सुविधाओं वाला एक अस्पताल है। इसमें ओपीडी, आईपीडी, डायग्नोस्टिक सेवाएं, ऑपरेशन थिएटर और 38 विभाग शामिल हैं, जिसमें आयुर्विज्ञान की सभी प्रमुख विशेषता और सुपरस्पेशियलिटी विषय शामिल हैं। यह अस्पताल महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करता है और गढ़चिरौली, गोंदिया और मेलघाट के आसपास के आदिवासी क्षेत्रों के लिए वरदान है।

रेल परियोजनाएं

प्रधानमंत्री नागपुर रेलवे स्टेशन पर नागपुर और बिलासपुर के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।

प्रधानमंत्री नागपुर में सार्वजनिक समारोह में, नागपुर रेलवे स्टेशन और अजनी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास कार्य का शिलान्यास करेंगे, जिनका पुनर्विकास क्रमशः 590 करोड़ रुपये और 360 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। प्रधानमंत्री सरकारी मेंटेनेंस डिपो, अजनी (नागपुर) और नागपुर-इटारसी तीसरी लाइन परियोजना के कोहली-नरखेर खंड को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इन परियोजनाओं को क्रमश: करीब 110 करोड़ रुपये और करीब 450 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वन हेल्थ, नागपुर

प्रधानमंत्री द्वारा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वन हेल्थ (एनआईओ), नागपुर की आधारशिला रखना 'एक स्वास्थ्य' के दृष्टिकोण के तहत देश में क्षमता निर्माण और बुनियादी ढांचे की दिशा में एक कदम है।

'एक स्वास्थ्य' का दृष्टिकोण इस बात को मान्यता देता है कि मनुष्य का स्वास्थ्य पशुओं के स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ा है। यह दृष्टिकोण इस बात को मानता है कि मनुष्यों को प्रभावित करने वाले अधिकांश संक्रामक रोग प्रकृति में जूनोटिक (पशु से मानव) हैं। संस्थान की स्थापना 110 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से की जाएगी। सभी हितधारकों के साथ सहयोग और समन्वय कायम करते हुए यह देश भर में 'एक स्वास्थ्य' के दृष्टिकोण के अनुरूप अनुसंधान और क्षमता निर्माण में सुधार के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य करेगा।

अन्य परियोजनाएं

प्रधानमंत्री नागपुर में नाग नदी के प्रदूषण उपशमन परियोजना की आधारशिला रखेंगे। राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (एनआरसीपी) के तहत यह परियोजना 1925 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से संचालित की जाएगी।

विदर्भ क्षेत्र में सिकल सेल रोग का प्रसार, विशेष रूप से जनजातीय जनसंख्या में तुलनात्मक रूप से अधिक है। अन्य हीमोग्लोबिनोपैथी जैसे थैलेसीमिया और एचबीई के साथ रोग होना, देश में रोगियों की संख्या में काफी वृद्धि होने का कारण बनता है। इस समस्या का समाधान करने के लिए, प्रधानमंत्री ने फरवरी, 2019 में 'सेंटर फॉर रिसर्च, मैनेजमेंट एंड कंट्रोल ऑफ हीमोग्लोबिनोपैथिस, चंद्रपुर' की आधारशिला रखी थी। प्रधानमंत्री अब इस केंद्र को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इसे देश में हीमोग्लोबिनोपैथी के क्षेत्र में नवीन अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास, मानव संसाधन विकास के लिए एक उत्कृष्टता केंद्र के रूप में परिकल्पना की गई है।

प्रधानमंत्री केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईपीईटी), चंद्रपुर राष्ट्र को समर्पित करेंगे। संस्थान का उद्देश्य पॉलिमर और संबद्ध उद्योगों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कुशल मानव संसाधन विकसित करना है।

प्रधानमंत्री गोवा में

मोपा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, गोवा

प्रधानमंत्री का यह निरंतर प्रयास रहा है कि देश भर में विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा और परिवहन सुविधाएं प्रदान की जाएं। इस दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री गोवा में मोपा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे का उद्घाटन करेंगे। हवाई अड्डे की आधारशिला नवंबर 2016 में खुद प्रधानमंत्री द्वारा रखी गई थी।

इस हवाई अड्डे को लगभग 2,870 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है। इसे स्थायी बुनियादी ढांचे के थीम पर तैयार किया गया है और इसमें सौर अन्य सुविधाओं के साथ-साथ ऊर्जा संयंत्र, हरित भवन, रनवे पर एलईडी लाइटें, वर्षा जल संचयन, रीसाइक्लिंग सुविधाओं के साथ अत्याधुनिक सीवेज उपचार संयंत्र हैं। इसने 3-डी मोनोलिथिक प्रीकास्ट बिल्डिंग, स्टेबिलरोड, रोबोमैटिक हॉलो प्रीकास्ट वॉल, 5जी कंपैटिबल आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी कुछ सर्वश्रेष्ठ तकनीकों को अपनाया है। हवाई अड्डे की कुछ विशेषताओं में दुनिया के सबसे बड़े विमानों को संभालने में सक्षम रनवे, विमानों के लिए रात की पार्किंग सुविधा के साथ-साथ 14 पार्किंग बे, सेल्फ-बैगेज ड्रॉप सुविधाएं, अत्याधुनिक और आत्मनिर्भर हवाई नेविगेशन बुनियादी ढांचा शामिल हैं।

प्रारंभ में, हवाई अड्डे का पहला चरण प्रति वर्ष लगभग 4.4 मिलियन यात्रियों (एमपीपीए) को सुविधाएं प्रदान करेगा, जिसे अधिकतम 33 एमपीपीए क्षमता तक बढ़ाया जा सकता है। हवाई अड्डा राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा और पर्यटन उद्योग की जरूरतों को पूरा करेगा। इसमें प्रमुख लॉजिस्टिक हब के रूप में सेवा प्रदान करने की क्षमता है, जो कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों को सीधे तौर पर जोड़ता है। हवाई अड्डे के लिए मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी की भी योजना है।

विश्वस्तरीय हवाईअड्डा होने के साथ-साथ यह हवाईअड्डा आगंतुकों को गोवा का एहसास और अनुभव भी प्रदान करेगा। हवाई अड्डे में व्यापक रूप से अजुलेजोस टाइलों का उपयोग किया गया है, जो गोवा के मूल उत्पाद हैं। फूड कोर्ट एक ठेठ गोवा कैफे के आकर्षण को भी प्रस्तुत करता है। इसमें क्यूरेटेड पिस्सू बाजार के लिए एक निर्दिष्ट क्षेत्र भी होगा, जहां स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों को अपने माल का प्रदर्शन और विपणन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

9वीं विश्व आयुर्वेद कांग्रेस और राष्ट्रीय आयुष संस्थान

प्रधानमंत्री तीन राष्ट्रीय आयुष संस्थानों का भी उद्घाटन करेंगे और 9वीं विश्व आयुर्वेद कांग्रेस के समापन समारोह को संबोधित करेंगे। तीन संस्थान - अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), गोवा, राष्ट्रीय यूनानी चिकित्सा संस्थान (एनआईयूएम), गाजियाबाद और राष्ट्रीय होम्योपैथी संस्थान (एनआईएच), दिल्ली, अनुसंधान और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करेंगे और लोगों के लिए सस्ती आयुष सेवाओं की सुविधा भी प्रदान करेंगे। इन संस्थानों को लगभग 970 करोड़ रुपये की कुल लागत से विकसित किया गया है। इनके माध्यम से, अस्पताल के बिस्तरों की संख्या में लगभग 500 की वृद्धि होगी और छात्रों के प्रवेश में भी लगभग 400 की वृद्धि होगी।

9वीं विश्व आयुर्वेद कांग्रेस (डब्ल्यूएसी) और आरोग्य एक्सपो में 50 से अधिक देशों, अंतर्राष्ट्रीय छात्रों और आयुर्वेद के विभिन्न अन्य हितधारकों का प्रतिनिधित्व करने वाले 400 से अधिक विदेशी प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी होगी। 9वीं डब्ल्यूएसी का मूल विषय "एक स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद" है।

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August 01, 2026

एल्लरिगू नन्ना नमस्कारगलु।

रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशनबेलूर मठ के अध्यक्ष परम पूज्य स्वामी गौतमानंद जी महाराज, श्री रामकृष्ण आश्रम, मैसुरू के अध्यक्ष पूज्य स्वामी मुक्तिदानंद जी, रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के ट्रस्टी पूज्य स्वामी यादवेंद्रानंद जी, राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत जी, मुख्यमंत्री श्री डी.के. शिवकुमार जी, सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार जी, विधायक विजयेंद्र येदियुरप्पा जी, के. हरीश गौड़ा जी, अन्य महानुभाव, पूज्य संतगण और भाईयों और बहनों।

सर्वप्रथम मैं मैसूरू की अधिष्ठात्री देवी मां चामुंडेश्वरी को प्रणाम करता हूं। अभी दो दिन पहले ही हम सभी ने गुरू पूर्णिमा भी मनाई है। आप सब जानते हैं, मेरी यात्रा जहां से शुरू हुई और आज मैं जहां हूं, इसमें राम कृष्ण मिशन का बहुत अहम योगदान है। मैं तीन महीने पहले हावड़ा में बेलूर मठ गया था। सभी पूज्य संतों से सतसंग करने का अवसर मिला था। मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे फिर मैसूरू में श्री रामकृष्ण आश्रम से जुड़े संतों से, मेरे गुरू बंधुओं से मिलने का, उनसे आशीर्वाद लेने का अवसर मिला है। आप सभी की उपस्थिति की वजह से, आज मैसूरू की इस पवित्र भूमि पर मुझे एक अलग ही ऊर्जा अनुभव हो रही है। मैं आप सभी संतों के चरणों में सादर प्रणाम करता हूं।

साथियों,

मैसूरू भारत की अनादि सांस्कृतिक चेतना का केंद्र रहा है। यहां के मंदिर, यहां की परंपराएं और उत्सव, मैसूरू का दशहरा, यहां के भव्य महल, इसका संगीत और साहित्य, भारत की विरासत इस शहर के कण-कण में रची बसी है। और यह देखकर बहुत संतोष मिलता है। इस शहर ने इस विरासत को उसी कुशलता से सहेजा भी है, संवारा भी है। श्री रामकृष्ण आश्रम और स्वामी विवेकानंद जी की स्मृतियां भी मैसुरू की विरासत का ही एक समृद्ध हिस्सा हैं। कुछ देर पहले मैं उस ऐतिहासिक भवन में भी गया था, जहां स्वामी विवेकानंद जी ने अपने प्रवास के दौरान कुछ समय बिताया था। कर्नाटका के कितने ही विद्वान और मनीषी इस स्थान से जुड़े रहे हैं। राष्ट्रकवि कुवेम्पु जैसे महापुरुष जब मैसुरू में थे, उनका भी श्रीरामकृष्ण आश्रम से गहरा जुड़ाव था। आज स्वामी विवेकानंद कल्चरल यूथ सेंटर, यानी विवेका स्मारका के उद्घाटन के जरिए, हम इस मिशन को नया विस्तार दे रहे हैं। इसके लिए मैं श्रीरामकृष्ण आश्रम और इससे जुड़े सभी विद्वानों को हार्दिक बधाई देता हूं।

साथियों,

व्यक्ति से विभूति का निर्माण एकाएक नहीं होता। इसके लिए हमें जीवन की अनगिनत परीक्षाएँ देनी होती हैं। साधना करनी होती है, तप करना होता है, खुद को तपाना पड़ता है, खपाना पड़ता है। ख्याति के बाद तो संसार पीछे खड़ा होता है। लेकिन, तप के समय महान विभूतियों को पहचानना आसान नहीं होता। जो साधक को तपस्या में पहचानता है, वो उसकी सिद्धि का सहभागी भी होता है।

इसलिए भाइयों बहनों,

स्वामी विवेकानंद के जीवन में मैसुरू का इतना अहम योगदान था। करीब 130 वर्ष पहले, स्वामी जी, एक युवा संन्यासी के रूप में भ्रमण करते हुए मैसुरू आए थे। तब उनकी प्रसिद्धि वैसी नहीं थी। लेकिन, विचार उतने ही ऊंचे थे। उस समय उन्हें जिन लोगों ने पहचाना, जो उनके साथ जुड़े, उनमें से एक प्रमुख नाम मैसुरू के तत्कालीन महाराजा का भी था। जब स्वामी विवेकानंद जी अमेरिका में थे, तो उन्होंने वहाँ से मैसुरू के तत्कालीन महाराजा को एक पत्र लिखा था। उसमें उन्होंने स्वयं महाराजा के सहयोग का उल्लेख किया था।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी ने भारतीय चेतना को आत्मसात किया था। उन्होंने शास्त्रों को आत्मसात किया था जो कहते हैं- “परं परोपकारार्थं यो जीवति स जीवति”। अर्थात्, वास्तव में वही जीता है जो दूसरों के लिए जीता है। इसी मंत्र पर चलते हुए, मैसुरू के इस श्री रामकृष्ण आश्रम ने पिछले वर्ष अपने सौ साल पूरे किए हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएँ हों, या प्राकृतिक आपदा में राहत कार्य, श्री रामकृष्ण आश्रम ने स्वामी विवेकानंद जी की विरासत को जीवंत रखा है। मुझे विश्वास है विवेका स्मारका साधकों और श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक उत्थान का तीर्थ बनेगा। स्वामी विवेकानंद जी की प्रेरणा थी- ‘शिव ज्ञाने जीव सेवा’। यानी जीव की सेवा ही शिव की सेवा है। हमें इस विवेका स्मारक में इसलिए, ऐसे युवाओं को गढ़ना है, जिनके लिए समाज और राष्ट्र के हित, गरीब-वंचित के दुःख, अपने सुख-दुःख से ऊपर हों। जिन युवाओं के लिए राष्ट्र प्रथम ही सर्वोपरि मंत्र हो, मां भारती की सेवा ही जिनका जीवन लक्ष्य हो।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी युवाओँ की शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार मानते थे। उन्होंने स्वयं ये देखा था कि कैसे दुनिया के देश अपने युवाओं को शिक्षित बना रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से तब भारत गुलाम था। भारत के युवा भी गुलामी की जंजीरों में जक़ड़े हुए थे। उस दौर से लेकर अब तक, भारत के युवा ने एक लंबी यात्रा तय की है। भारत का जो युवा कभी जंजीरों में था, आज वो युवा दुनिया के विकास को गति दे रहा है।

· आज भारत की अर्थव्यवस्था, सबसे तेजी से आगे बढ़ रही है।

· किसकी वजह से? भारत के युवाओँके सामर्थ्य से।

· आज भारत में दुनिया की तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम है।

· किसकी वजह से? भारत के युवाओँ के सामर्थ्य से।

· आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत से बने Digital Solutions, दुनिया के अनेक देशों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की नई यात्रा पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत AI, Deep Tech, Space Technology और Innovation के नए अध्याय लिख रहा है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

अभी कुछ दिन पहले ही हमने देखा है, भारत के युवाओं ने अंतरिक्ष में कमाल कर दिया है। पहली बार युवाओं का बनाया हुआ एक प्राइवेट कंपनी का रॉकेट, अंतरिक्ष तक पहुंचा है। आज कोई भी सेक्टर हो, भारत युवा अपना दम-खम दिखा रहा है। हम सभी अपने आसपास देख रहे हैं, आज छोटे से छोटे व्यवसाय में लगा युवा, भारत की डिजिटल इकॉनमी को आगे बढ़ा रहा है। वो मुद्रा लोन के जरिए नई शुरुआत कर रहा है। वो देश की स्टार्टअप revolutionको लीड कर रहा है। आत्मनिर्भर भारत का अभियान हो, मेक इन इंडिया का अभियान हो, इसकी सफलता के पीछे भारत के युवाओं की ही ताकत है।

साथियों,

किसी भी देश में, युवाओं का सामर्थ्य तभी उस राष्ट्र की शक्ति बनता है, जब उसे सही अवसर मिले, जब उसे सही दिशा मिले, और जब उसे अपनी ही धरती पर बड़े सपने देखने, उन्हें पूरा करने का भरोसा मिले। और इसमें बहुत बड़ी भूमिका हमारे शिक्षा संस्थानों की होती है। मुझे खुशी है कि आज भारत में शिक्षण संस्थाओँ की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले 12 वर्षों में, 650 से ज्यादा नई यूनिवर्सिटीज बनी हैं। पिछले 12 वर्षों में करीब 14 हजार नए कॉलेज बने हैं। 4 हजार से ज्यादा नई ITI बनाई गई हैं। 9 नए आई.आई.एम, 7 नई आई.आई.टी, और13 नए एम्स भी स्थापित किए गए हैं। आज देश में MBBS की सीटें करीब 1 लाख 40 हजार हो चुकी हैं। मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 823 हो गई है।

साथियों,

एक ओर हम एजुकेशन इनफ्रास्ट्रक्चर को modernize कर रहे हैं। साथ ही, शिक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक जरूरतों के हिसाब से ढाला जा रहा है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी, भारत के युवाओँ को 21वीं सदी के अनुरूप तैयार करने का माध्यम बन रही है।

साथियों,

स्कूली शिक्षा में भी बड़े स्तर पर काम हुआ है। देशभर में 14 हजार से ज्यादा पीएम श्री स्कूल विकसित किए गए हैं। शिक्षा केवल किताबी न रहे, बच्चों में इनोवेशन और साइंटिफिक टेंपरामेंट विकसित हो, इसके लिए,10 हजार से ज्यादा अटल टिंकरिंग लैब्स स्थापित हुई हैं।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी, राष्ट्र उत्थान के लिए शिक्षा के साथ-साथ समानता को भी उतना ही अहम मानते थे। शिक्षा में भेदभाव न हो, अवसरों में भेदभाव न हो, आज ये देश का विज़न बन गया है। आज बेटियाँ भी सैनिक स्कूलों में एड्मिशन ले रहीं हैं। एनडीए में बेटियां राष्ट्र के लिए योगदान दे रही हैं। आज मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी पढ़ाई मातृभाषा में करने की सुविधा हो गई है। इससे, भाषा के आधार पर अवसरों में होने वाले भेदभाव पर लगाम लग रही है।

साथियों,

युवा शक्ति का स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वास से भरे रहना उतना ही जरूरी है। जो देश खेलों को महत्व देते हैं, वहां के युवाओं में इन तीनों गुणों का तेजी से विकास होता है। इसलिए आज खेलों को राष्ट्र निर्माण की एक महत्वपूर्ण धारा के रूप में देखा जा रहा है। खेलो इंडिया यूथ गेम्स, यूनिवर्सिटी गेम्स, पैरा गेम्स और विंटर गेम्स जैसे आयोजनों ने देशभर के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया है। आज देशभर में आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है, खेलो इंडिया सेंटर के माध्यम से सुविधाएं बढ़ रही हैं, गांवों से लेकर छोटे शहरों तक नई प्रतिभाओं की पहचान की जा रही है।

और साथियों,

आज इस अभियान के परिणाम भी साफ - साफ दिखाई दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भारत का प्रदर्शन बेहतर होता जा रहा है। हमारे खिलाड़ी नए-नए कीर्तिमान बना रहे हैं, हमारी बेटियां देश का गौरव बढ़ा रही हैं।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी की तरह, हमें विवेका स्मारका, बड़े उद्देश्य के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है। ऐसे स्थान पर मैं हमारे युवाओं से कुछ आग्रह करना चाहता हूं।

साथियों,

मैसुरू को अक्सर भारत के सबसे स्वच्छ शहरों में स्थान मिला है। मैं इसके लिए यहां के लोगों को हृदय से बधाई देता हूं। क्या इस अवसर पर हम ये संकल्प ले सकते हैं, कि भविष्य में स्वच्छता के संकल्प को निरंतर मजबूत करते रहेंगे। हमें यहाँ की प्राकृतिक संपदाओं को संरक्षित करना चाहिए। हमें पर्यावरण से जुड़े संकल्प लेने चाहिए। हमें पानी की हर बूंद बचाने के लिए मिशन मोड में काम करना होगा।

साथियों,

आज ही यहां ‘वाल्मीकि रामायण’ के कन्नड़ा अनुवाद का विमोचन भी हुआ है। मैं कन्नड़ा भाषा से जुड़ी एक अपील भी करना चाहता हूं। कर्नाटका महान लेखकों और कवियों की धरती है। कन्नड़ा भाषी लोग हमेशा से पढ़ने की संस्कृति के लिए जाने जाते हैं। स्मार्टफोन के इस युग में इस स्वभाव को और बढ़ावा मिलना चाहिए। क्या हम युवा पीढ़ी को कन्नड़ा साहित्य से गहराई से जुड़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

साथियों,

मैसुरू अपने सिल्क, चंदन और हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध है। जब भी हम किसी को उपहार दें, तो क्या हम ये सुनिश्चित कर सकते हैं कि वो किसी भारतीय के हाथों और पसीने से बनी चीज हो? इससे हमारी संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही, एक और परिवार को आर्थिक सहायता भी मिलेगी।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी ने जिस तरह के भारत का सपना देखा था, उसे पूरा करने का दायित्व आज की पीढ़ी पर है। मुझे विश्वास है, विवेका स्मारका इसके लिए एक ऊर्जा स्रोत का काम करेगा। मैं एक बार फिर, यहां एकत्र पूज्य संतजनों गुरू बंधुओं और मैसुरू के लोगों को नमन करते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।