प्रधानमंत्री मोदी ने इंदौर में मध्य प्रदेश शहरी विकास महोत्सव में विभिन्न शहरी विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया
पीएम मोदी ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 के विजेताओं को सम्मानित किया और शीर्ष 3 स्वच्छ शहर इंदौर, भोपाल और चंडीगढ़ के प्रतिनिधियों को पुरस्कार दिए
पिछले 4 वर्षों में हमने 8 करोड़ 30 हजार से अधिक शौचालय बनाए हैं: इंदौर में प्रधानमंत्री
हमारी सरकार शहरों के लिए 5 बड़ी योजनाओं पर काम कर रही है, इन योजनाओं में स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), स्मार्ट सिटी मिशन, अमृत, एवं दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन शामिल हैं: प्रधानमंत्री मोदी
बापू की 150 वीं जन्म जयंती पर स्वच्छ भारत का सपना, अब बहुत दूर नहीं। ये सपना पूरा होगा और हम सब मिलकर इसे पूरा करेंगे: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज राज्य भर में विभिन्न स्थानों पर शहरी विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना, शहरी पेय जल जलापूर्ति योजनाएं, शहरी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, शहरी स्वच्छता, शहरी परिवहन एवं शहरी परिदृश्य परियोजनाएं शामिल हैं।

इंदौर में आयोजित एक समारोह में उन्होंने स्वच्छ सर्वेक्षण-2018 पुरस्कार प्रदान किए एवं स्वच्छ सर्वेक्षण-2018 परिणाम डैशबोर्ड लांच किया।

इस अवसर पर एक विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वच्छ भारत महात्मा गांधी का स्वप्न था जो अब 125 करोड़ भारतीयों को संकल्प बन चुका है। उन्होंने कहा कि पूरा देश इंदौर से प्रेरणा ग्रहण कर सकता है जिसे भारत में सबसे स्वच्छ शहर के पुरस्कार से नवाजा गया है। उन्होंने स्वच्छता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले तीन राज्यों-झारखंड, महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ की भी सराहना की।

प्रधानमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि किस प्रकार केंद्र सरकार भारत में शहरी बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।

स्वच्छ भारत मिशन के अतिरिक्त, उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), स्मार्ट सिटी मिशन, अमृत, एवं दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार 2022 तक सभी के लिए आवास के विजन की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में लगभग 1.15 करोड़ घरों का निर्माण किया जा चुका है और 2022 तक लक्ष्य अर्जित करने के लिए लगभग 2 करोड़ और अधिक घरों का निर्माण किया जाना है।

प्रधानमंत्री ने विकास के अन्य क्षेत्रों में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया।

 

 

 

 

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कैबिनेट ने भारत के सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को मंजूरी दी
May 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज संसद में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करके भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करना है।

बिंदुवार विवरण:

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में 4 की वृद्धि अर्थात् 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है।

प्रमुख प्रभाव:

न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

व्यय:

न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर होने वाला व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान किया गया है कि “भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश और संसद के कानून द्वारा अधिक संख्या निर्धारित न किए जाने तक सात से अधिक अन्य न्यायाधीश नहीं होंगे…”।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के तहत एक अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम की धारा 2 में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 10 निर्धारित की गई थी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 द्वारा बढ़ाकर 13 कर दिया गया था और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा बढ़ाकर 17 कर दिया गया था। हालांकि, मंत्रिमंडल द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 1979 के अंत तक 15 न्यायाधीशों तक सीमित था, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर इस सीमा को हटाया दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को मूल अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से संशोधन करके अंतिम बार 30 से बढ़ाकर 33 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दिया गया था।