क्रम संख्या

समझौता/समझौता ज्ञापन

1.

मालदीव को 4,850 करोड़ रुपये की ऋण सहायता (एलओसीका विस्तार किया गया

2.

भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित ऋण सहायता पर मालदीव के वार्षिक ऋण चुकौती दायित्वों में कमी की गई

3.

भारत-मालदीव मुक्त व्यापार समझौते (आईएमएफटीएपर वार्ता का शुभारंभ किया गया

4.

भारत-मालदीव राजनयिक संबंधों की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ पर संयुक्त रूप से स्मारक डाक टिकट जारी किया गया

 

क्रम संख्या

उद्घाटन / हस्तांतरण

1.

भारत की क्रेता ऋण सुविधाओं के अंतर्गत हुलहुमाले में 3,300 सामाजिक आवास इकाइयों का हस्तांतरण किया गया

2.

अड्डू शहर में सड़क और जल निकासी प्रणाली परियोजना का उद्घाटन किया गया

3.

मालदीव में उच्च प्रभाव वाली 6 सामुदायिक विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया

4.

72 वाहनों और अन्य उपकरणों का हस्तांतरण किया गया

5.

दो भीष्म हेल्थ क्यूब सैट सौंपे गए

6.

माले में रक्षा मंत्रालय भवन का उद्घाटन किया गया

 

क्रम संख्या

समझौता ज्ञापनों/समझौतों का आदान-प्रदान

मालदीव की ओर से प्रतिनिधि

भारतीय पक्ष के प्रतिनिधि

1.

मालदीव को 4,850 करोड़ रुपये की ऋण सहायता के लिए समझौता

श्री मूसा ज़मीरवित्त एवं योजना मंत्री

डॉएसजयशंकरविदेश मंत्री

2.

भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित ऋण सहायता पर मालदीव के वार्षिक ऋण चुकौती दायित्वों को कम करने पर संशोधन समझौता

श्री मूसा ज़मीरवित्त एवं योजना मंत्री

डॉएसजयशंकरविदेश मंत्री

3.

भारत-मालदीव मुक्त व्यापार समझौते (एफटीएके विचारार्थ विषय

श्री मोहम्मद सईदआर्थिक विकास और व्यापार मंत्री

डॉएसजयशंकरविदेश मंत्री

4.

मत्स्य पालन और जलीय कृषि के क्षेत्र में सहयोग पर समझौता ज्ञापन

श्री अहमद शियाममत्स्य पालन और समुद्री संसाधन मंत्री

डॉएसजयशंकरविदेश मंत्री

5.

भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और मालदीव मौसम विज्ञान सेवा (एमएमएस), पर्यटन और पर्यावरण मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन

श्री थोरिक इब्राहिमपर्यटन एवं पर्यावरण मंत्री

डॉएसजयशंकरविदेश मंत्री

6.

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा मालदीव के गृह सुरक्षा और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बीच डिजिटल परिवर्तन के लिए जनसंख्या स्तर पर कार्यान्वित सफल डिजिटल समाधानों को साझा करने के क्षेत्र में सहयोग पर समझौता ज्ञापन

श्री अली इहसानगृह सुरक्षा और प्रौद्योगिकी मंत्री

डॉएसजयशंकरविदेश मंत्री

7.

मालदीव द्वारा भारतीय फार्माकोपिया (आईपीको मान्यता देने पर समझौता ज्ञापन

श्री अब्दुल्ला नाज़िम इब्राहिमस्वास्थ्य मंत्री

डॉएसजयशंकरविदेश मंत्री

8.

मालदीव में यूपीआई के उपयोग पर भारत के एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट लिमिटेड (एनआईपीएलऔर मालदीव मौद्रिक प्राधिकरण (एमएमएके बीच नेटवर्क-टू-नेटवर्क समझौता

डॉअब्दुल्ला खलीलविदेश मंत्री

डॉएसजयशंकरविदेश मंत्री

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
India’s digital economy enters mature phase as video dominates: Nielsen

Media Coverage

India’s digital economy enters mature phase as video dominates: Nielsen
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
कैबिनेट ने भारत के सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को मंजूरी दी
May 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज संसद में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करके भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करना है।

बिंदुवार विवरण:

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में 4 की वृद्धि अर्थात् 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है।

प्रमुख प्रभाव:

न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

व्यय:

न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर होने वाला व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान किया गया है कि “भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश और संसद के कानून द्वारा अधिक संख्या निर्धारित न किए जाने तक सात से अधिक अन्य न्यायाधीश नहीं होंगे…”।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के तहत एक अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम की धारा 2 में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 10 निर्धारित की गई थी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 द्वारा बढ़ाकर 13 कर दिया गया था और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा बढ़ाकर 17 कर दिया गया था। हालांकि, मंत्रिमंडल द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 1979 के अंत तक 15 न्यायाधीशों तक सीमित था, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर इस सीमा को हटाया दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को मूल अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से संशोधन करके अंतिम बार 30 से बढ़ाकर 33 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दिया गया था।