बेशक आकलन करने का एक तरीका उपलब्धियों की सूची है, जिनमें से अधिकांश मात्रात्मक हैं। उदाहरण के तौर पर, फ्लैगशिप योजनाओं के माध्यम से पहुंचने वाला लाभ काफी असाधारण है। जन-धन योजना के माध्यम से 42 करोड़ लोगों का खाता खोलकर उन्हें बैंकों से जोड़ना, भारत में हर घर में वित्तीय समावेशन ले जाना है। मुद्रा योजना के जरिए 29 करोड़ ऋण मंजूर कर 15 लाख करोड़ रुपये वितरित करना, एक उद्यमशीलता क्रांति का बीजारोपण है और इसी प्रकार यूपीआई के माध्यम से डिजिटलीकरण (2020 में 25 बिलियन रीयल-टाइम ट्रांजेक्शन) भारत को दुनिया में सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम बनाना शामिल है।
हालांकि, इन उल्लेखनीय संख्याओं से परे मोदी की सफलता या असफलता का आकलन करने का एक और तरीका है - हमारे राष्ट्रीय चरित्र में बदलाव। इनमें से कुछ परिवर्तन क्या हैं?
सबसे पहले, पीएम मोदी ने केंद्र सरकार की इकोनॉमिक पॉलिसी मेकिंग को मौलिक रूप से बदल दिया है। पीएम मोदी से पहले, विशेष रूप से सिर्फ मैक्रो इकोनॉमिक्स पर ही ध्यान केंद्रित किया जाता था और माइक्रो इकोनॉमिक्स को राज्यों तक ही समीति रखा जाता था। यही कारण है कि आजादी के 66 साल से अधिक समय के बाद भी (2014 में मोदी के सत्ता में आने से पहले) देश, अभी भी अपने सभी गांवों को इलेक्ट्रिफिकेशन करने या हर गांव में उचित स्वच्छता कवरेज सुनिश्चित करने या सभी के लिए स्वास्थ्य सेवा को सस्ती बनाने के लिए संघर्ष कर रहा था।
मोदी ने इस असंतुलन को ठीक किया है। इसलिए, यह सुनिश्चित करना कि हर घर को नल के पानी का कनेक्शन मिले, अब सरकार की प्राथमिकता में उसी प्रकार है जिस प्रकार निजीकरण के लिए नीतिगत ढांचा तैयार करने या नए कृषि कानूनों के साथ कृषि क्षेत्र के लिए एक नया प्रतिमान (पैरडाइम) बनाना। मोदी इन क्षेत्रों में शानदार प्रगति करने में सफल रहे हैं।
दूसरा, मोदी ने हमेशा के लिए केंद्र सरकार से 'सेकेंड बेस्ट' डिलीवरी की उम्मीद करने की मानसिकता को हमेशा के लिए बदल दिया है। इस देश के लोग अब लैगर्ड या फॉलोअर्स होने से संतुष्ट नहीं होंगे। अगर दुनिया एक साल से भी कम समय में कोविड-19 का मुकाबला करने के लिए एक प्रभावी टीका विकसित करती है, तो अब हम उम्मीद करते हैं कि भारत न केवल घरेलू टीकों के साथ उस दौड़ में अग्रणी होगा, बल्कि उसी गति से वैक्सीनेशन भी करेगा जो दुनिया में सबसे तेज है।
तीसरा, मोदी ने पिछले 70 वर्षों के हमारे कैरेक्टर को बदल दिया है, जो एक शक्तिशाली विरोधी का सामना करने से पीछे हट जाता था। चीन, जो वन बेल्ट- वन रोड पहल से दक्षिण चीन सागर तक अपना रास्ता बनाता है, उसे डोकलाम और पैंगोंग झील से पीछे हटते देखा गया। जलवायु परिवर्तन वार्ताओं से मुक्त व्यापार समझौतों तक, बड़े बहुराष्ट्रीय निगम और ग्लोबल थिंक टैंक भारत से सहमत होने का ढोंग करते थे, लेकिन अब सभी ने महसूस किया कि 2021 का यह भारत वह भारत नहीं है जिसे वे 2014 से पहले जानते थे।
चौथा, सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तनों में से एक हमारी विदेश नीति में रहा है। यह अब मोरल साइंस के व्याख्यानों से नहीं, बल्कि अब विशुद्ध रूप से हार्ड कोर राष्ट्रीय हित से संचालित होता है। व्यावहारिक राजनीति, अब नुमाइशी से हटकर शस्त्रागार का हिस्सा है।
पांचवां, निजी उद्यम के लिए सम्मान और वैध लाभ-प्राप्ति अब वर्जित नहीं है। पीएम मोदी ने संसद में उद्यमियों को राष्ट्र निर्माता बताकर उनका बचाव किया, इसे पॉलिसी में पहले से ही समाहित किया जा रहा है और समय के साथ उनका यह अब तक का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक योगदान बन सकता है।
छठा, महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें सामाजिक बंधनों से मुक्त करने के लिए किया गया कार्य, समय के साथ, मोदी का सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक योगदान बन सकता है। भारत के सबसे महत्वपूर्ण केंद्रीय मंत्रालयों के प्रशासन से लेकर आर्म्ड फोर्सेस में स्थायी कमीशन तक और करोड़ों छोटे और सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना से लेकर कॉरपोरेट बोर्डरूम तक और रिग्रेसिव तत्काल ट्रिपल तलाक से स्वतंत्रता से लेकर पैतृक संपत्ति में वैध अधिकारों तक अनेक महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं।
सातवां, पीएम मोदी ने हमारी गौरवशाली सभ्यता की विरासत को हमारे मॉडर्न इम्पल्स के साथ जोड़ने में कामयाबी हासिल की है और यह लंबे समय तक चलने वाला उनका योगदान होगा। यह राष्ट्र अब राम मंदिर के निर्माण का उत्सव उतने ही हर्षोल्लास के साथ मनाता है, जितना वह ASAT मिशन की सफलता में आनंदित होता है या गगनयान के प्रक्षेपण की प्रतीक्षा करता है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार दशकों में एकमात्र ऐसी सरकार है जो पूर्ण बहुमत के साथ फिर से चुनी गई है। जैसा कि देश दूसरी कोविड-19 लहर से जूझ रहा है, मोदी सरकार के लिए अपनी सातवीं वर्षगांठ मनाने का उचित तरीका यह होगा कि वह इस देश के लोगों की सेवा के लिए खुद को फिर से समर्पित कर दे। यह न केवल वर्तमान राष्ट्रीय अनिवार्यता के अनुरूप होगा, बल्कि इस सरकार को वोट करने वाले लोगों के लिए एक उचित उपहार होगा। आखिरकार, क्या सरकारों की भूमिका को स्थायी रूप से 'सत्ता से सेवा' में बदलना पीएम मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि नहीं होगी?
डिस्कलेमर :
यह आर्टिकल पहली बार The Indian Express में पब्लिश हुआ था।
यह उन कहानियों या खबरों को इकट्ठा करने के प्रयास का हिस्सा है जो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और लोगों के जीवन पर उनके प्रभाव पर उपाख्यान / राय / विश्लेषण का वर्णन करती हैं।


