मन और पेट को भा गई खिचड़ी

Published By : Admin | September 16, 2016 | 23:56 IST

ये पूछना स्वाभाविक है कि – भारत के प्रधानमंत्री खाने में क्या पसंद करते हैं? क्या उन्हें मसालेदार खाना पसंद है?

इस ओर कुछ इशारा नरेंद्र मोदी स्वयं करते हैं, वो कहते हैं:

“जो लोग सार्वजनिक जीवन में काम करते हैं, उनका जीवन बहुत ही अनियमित होता है। इसलिए यदि कोई सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होना चाहता है, तो उसका पेट मजबूत होना चाहिए।”

“35 वर्षों में विभिन्न संगठनात्मक पदों पर काम करते हुए मुझे पूरे देश का भ्रमण करना पड़ा। मुझे भोजन मांगना पड़ा और जो मिला उसे खाया। मैंने कभी लोगों से अपने लिए कोई खास खाना बनाने के लिए नहीं कहा।”

“मुझे खिचड़ी बहुत पसंद है। लेकिन मुझे जो भी मिले, मैं खा लेता हूं।”

वो कहते हैं “मैं चाहता हूं कि मेरी सेहत ऐसी हो कि वो देश के लिए बोझ न बने। अपनी अंतिम सांस तक मैं एक स्वस्थ व्यक्ति के रूप में जीना चाहता हूं।”

प्रधानमंत्री की भूमिका में बहुत अधिक यात्रा अपरिहार्य है और बहुत अधिक प्रीतिभोजों में शामिल होना पड़ता है। वो प्रत्येक प्रीतिभोज में स्थानीय शाकाहारी व्यंजन पसंद करते हैं। वो शराब नहीं पीते, इस कारण जाहिर तौर पर उनके गिलास में मादकपेय की जगह पानी रहता है या कोई जूस।

डिस्कलेमर :

यह उन कहानियों या खबरों को इकट्ठा करने के प्रयास का हिस्सा है जो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और लोगों के जीवन पर उनके प्रभाव पर उपाख्यान / राय / विश्लेषण का वर्णन करती हैं।

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भारत के खेलों में बदलाव के लिए प्रधानमंत्री मोदी का प्रयास
May 09, 2024

भारत के खेल बजट में रिकॉर्ड वृद्धि, खेलो इंडिया गेम्स और टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम सहित तमाम इनिशिएटिव; भारत में खेल परिदृश्य पर मोदी सरकार के जोर को दर्शाते हैं। भारत में ‘युवा ओलंपिक’ और ‘ओलंपिक 2036’ की मेजबानी के लिए पीएम मोदी का प्रयास, पिछले दशक में भारत के खेलों के लिए अग्रणी बदलाव और विजन को दर्शाता है।

एथलीट अंजू बॉबी जॉर्ज ने खेलों के लिए प्रधानमंत्री मोदी के अभूतपूर्व समर्थन की सराहना की और बताया कि कैसे पीएम मोदी ने उनसे मुलाकात की और भारत में खेलों से जुड़े विषयों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस क्षेत्र के विभिन्न मुद्दों के बारे में गहराई से जानकारी ली और भारत के खेलों में बदलाव के लिए मिशन मोड पर इन मुद्दों को हल करने पर बल दिया।

मुद्दों को सुलझाने के इरादे के साथ-साथ, पीएम मोदी हमेशा विभिन्न एथलीटों के संपर्क में रहे और भारत में खेलों को देखने के तरीके में एक व्यवस्थित बदलाव लाने की कोशिश की। इसके अलावा, भारत के खेलों में बदलाव; देश में बेहतर खेल इंफ्रास्ट्रक्चर का भी परिणाम था।

उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी खेलों में वाकई दिलचस्पी रखते हैं। वह हर एथलीट को जानते हैं...उनके प्रदर्शन को जानते हैं। किसी भी बड़ी चैंपियनशिप से पहले, वह उन्हें व्यक्तिगत रूप से बुलाते हैं और उनसे बातचीत करते हैं...शानदार विदाई समारोह का आयोजन करते हैं और वापसी पर जीत को सेलिब्रेट भी करते हैं।"

उन्होंने कहा कि प्रत्येक एथलीट खुश है क्योंकि प्रधानमंत्री खुद उनके करियर, बेहतरी और परफॉरमेंस में गहरी दिलचस्पी ले रहे हैं।