G20 की अध्यक्षता के दौरान, नई दिल्ली ने मल्टीलेटरलिज्म को रिवाइव किया, ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत किया, डेवलपमेंट को समर्थन दिया, और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रयास किए।

आज भारत को G20 की अध्यक्षता ग्रहण किए 365 दिन पूरे हो गए हैं। यह आत्मचिंतन करने, प्रतिबद्धता को दोहराने और "वसुधैव कुटुंबकम" (वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर) की भावना को रिवाइव करने का समय है। पिछले वर्ष जब हमने यह जिम्मेदारी संभाली, तब ग्लोबल लैंडस्केप कई चुनौतियों से जूझ रहा था— COVID-19 महामारी से उबरना, बढ़ते जलवायु संकट, वित्तीय अस्थिरता और विकासशील देशों में ऋण संकट, और इन सबके बीच मल्टीलेटरलिज्म में गिरावट आ रही थी। संघर्षों और प्रतिस्पर्धा के बीच डेवलपमेंट कोऑपरेशन प्रभावित हुआ, जिससे प्रगति बाधित हुई।

G20 की अध्यक्षता ग्रहण करते हुए, भारत ने विश्व को यथास्थिति का एक विकल्प प्रस्तुत करने का प्रयास किया, जो जीडीपी-केंद्रित प्रगति से मानव-केंद्रित प्रगति की ओर एक बदलाव था। भारत का उद्देश्य दुनिया को यह याद दिलाना था कि हमें क्या जोड़ता है, न कि क्या विभाजित करता है। अंततः, वैश्विक संवाद को इस तरह विकसित होना था कि कुछ लोगों के हितों को अनेकों की आकांक्षाओं के सामने पीछे हटना पड़े। इसके लिए मल्टीलेटरलिज्म की मौजूदा अवधारणा में मौलिक सुधार की आवश्यकता थी।

इन्क्लूसिव, एम्बिशियस, एक्शन-ओरिएंटेड और डिसीसिव—ये चार शब्द हमारे G20 अध्यक्षता के दृष्टिकोण को परिभाषित करते हैं, और न्यू दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन (NDLD) जिसे सभी G20 सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से अपनाया गया, इस प्रतिबद्धता का प्रमाण है कि हम इन सिद्धांतों पर काम करने के लिए तत्पर हैं। इंक्लूसिविटी हमारी अध्यक्षता के मूल में रही है। अफ्रीकन यूनियन (AU) को G20 के स्थायी सदस्य के रूप में शामिल करने से 55 अफ्रीकी नेशन इस मंच में शामिल हो गए, जिससे इसका विस्तार होकर वैश्विक आबादी का 80% हिस्सा इसमें शामिल हो गया। इस सक्रिय दृष्टिकोण ने वैश्विक चुनौतियों और अवसरों पर अधिक व्यापक संवाद को बढ़ावा दिया है।

भारत द्वारा दो एडिशंस में आयोजित "वॉइस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट" ने मल्टीलेटरलिज्म के एक नए युग की शुरुआत की। भारत ने अन्तर्राष्ट्रीय चर्चा में ग्लोबल साउथ की चिंताओं को मुख्यधारा में रखा और एक ऐसे युग का शुभारंभ किया जहां विकासशील देश वैश्विक दृष्टिकोण को आकार देने में अपनी सही भूमिका निभा सकते हैं। इंक्लूसिविटी ने G20 के प्रति भारत के घरेलू दृष्टिकोण को भी प्रभावित किया, जिससे यह विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के अनुरूप एक जन-अध्यक्षता बन गई। "जन भागीदारी" कार्यक्रमों के माध्यम से, G20 1.4 अरब नागरिकों तक पहुंचा, जिसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भागीदार बनाया गया। विषयगत मामलों में, भारत ने यह सुनिश्चित किया कि अन्तर्राष्ट्रीय ध्यान व्यापक विकासात्मक लक्ष्यों की ओर केंद्रित हो, जो G20 के अधिकार क्षेत्र के अनुरूप हैं।

2030 एजेंडा के महत्वपूर्ण मध्य बिंदुओं पर, भारत ने सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) पर प्रगति को तेज करने के लिए G20 2023 एक्शन प्लान प्रस्तुत किया, जिसमें हेल्थ, एजुकेशन, जेंडर इक्वलिटी और एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी सहित परस्पर जुड़े मुद्दों के लिए एक समग्र और क्रियाशील दृष्टिकोण अपनाया गया। इस प्रोग्रेस को गति देने वाला एक प्रमुख क्षेत्र मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) है। इस क्षेत्र में भारत ने आधार, UPI और डिजिलॉकर जैसे डिजिटल नवाचारों के क्रांतिकारी प्रभाव को ध्यान में रखते हुए, अपनी सिफारिशों में निर्णायक भूमिका निभाई। G20 के माध्यम से डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर रिपोजिटरी स्थापित की गई, जो वैश्विक तकनीकी सहयोग में एक महत्वपूर्ण कदम है। 16 देशों के 50 से अधिक DPI को शामिल करने वाला यह रिपोजिटरी ग्लोबल साउथ के देशों की इंक्लूसिव डेवलपमेंट क्षमता को बढ़ावा देगा।

हमने 'वन अर्थ' पहल के लिए, तत्काल, स्थायी और न्यायसंगत परिवर्तन लाने हेतु महत्वाकांक्षी और इंक्लूसिव टारगेट निर्धारित किए हैं। घोषणापत्र का "ग्रीन डेवलपमेंट पैक्ट" भूख से लड़ने और पृथ्वी की रक्षा करने के बीच चयन करने की चुनौतियों का समाधान करता है, जिसमें एक समग्र रोडमैप की रूपरेखा तैयार की गई है जहां रोजगार और इकोसिस्टम एक दूसरे के पूरक हैं, कंजम्पशन जलवायु के प्रति जागरूक है और उत्पादन पर्यावरण के अनुकूल है।

इसके साथ ही, G20 घोषणापत्र में 2030 तक वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस की स्थापना और ग्रीन हाइड्रोजन के लिए सहयोग, स्वच्छ और हरित विश्व निर्माण की G20 प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। यह दृष्टिकोण सदैव भारत के मूलमंत्र का हिस्सा रहा है और लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट (LiFE) के माध्यम से, विश्व हमारी सदियों पुरानी सतत विकास परंपराओं से लाभान्वित हो सकता है।

इसके अलावा, घोषणापत्र में क्लाइमेट जस्टिस और समानता के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया है और ग्लोबल नॉर्थ के देशों से पर्याप्त वित्तीय एवं तकनीकी सहायता का आह्वान किया गया है। पहली बार, विकास वित्तपोषण में आवश्यक वृद्धि को स्वीकार किया गया, जो अरबों डॉलर से बढ़कर खरबों डॉलर तक पहुंच गई है। G20 ने स्वीकार किया कि विकासशील देशों को 2030 तक अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) को पूरा करने के लिए 5.9 ट्रिलियन डॉलर की आवश्यकता है। संसाधनों की विशालता को देखते हुए, G20 ने बेहतर, बड़े और अधिक प्रभावी मल्टीलेटरल डेवलपमेंट बैंकों के महत्व पर बल दिया। साथ ही, भारत संयुक्त राष्ट्र सुधारों, विशेष रूप से सुरक्षा परिषद के पुनर्गठन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, जो अधिक न्यायसंगत वैश्विक व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।

घोषणापत्र में जेंडर इक्वलिटी को प्रमुखता दी गई, जिसके परिणामस्वरूप अगले वर्ष महिला सशक्तिकरण पर एक समर्पित वर्किंग ग्रुप का गठन किया जाएगा। भारत का महिला रिजर्वेशन बिल 2023, जो भारत की संसद और राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करता है, महिला-नेतृत्व वाले विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

नई दिल्ली घोषणापत्र इन प्रमुख प्राथमिकताओं में सहयोग की एक नई भावना को दर्शाता है, जो नीतिगत सामंजस्य, विश्वसनीय व्यापार और महत्वाकांक्षी जलवायु एक्शन पर केंद्रित है। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हमारी अध्यक्षता के दौरान, G20 ने 87 परिणाम और 18 स्वीकृत दस्तावेज हासिल किए, जो पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है।

G20 अध्यक्षता के दौरान भारत ने भू-राजनीतिक मुद्दों और उनके आर्थिक प्रभाव पर विचार-विमर्श का नेतृत्व किया। आतंकवाद और निर्दोष नागरिकों की निर्मम हत्या अस्वीकार्य है, और इसके प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनानी होगी। शत्रुता की जगह मानवतावाद को अपनाना होगा और यह दोहराना होगा कि यह युद्ध का समय नहीं है।

मुझे यह बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि हमारी अध्यक्षता के दौरान भारत ने असाधारण उपलब्धियां हासिल कीं: इसने मल्टीलेटरलिज्म को पुनर्जीवित किया, ग्लोबल साउथ की आवाज को बुलंद किया, विकास का समर्थन किया और दुनिया भर में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए संघर्ष किया।
जब हम G20 की अध्यक्षता ब्राजील को सौंप रहे हैं, हम इस विश्वास के साथ ऐसा कर रहे हैं कि People, Planet, Peace और Prosperity के लिए हमारे सामूहिक कदम आने वाले वर्षों तक गूंजते रहेंगे।

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इटली और भारत: इंडो-मेडिटेरेनियन के लिए एक स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप
May 20, 2026

भारत और इटली के बीच संबंध अब एक निर्णायक दौर में पहुंच चुके हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में अभूतपूर्व तेजी आई है और यह सौहार्दपूर्ण मित्रता से आगे बढ़कर स्वतंत्रता, लोकतंत्र और भविष्य को लेकर साझा विजन पर आधारित एक सच्ची स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप में बदल गए हैं।

ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था गहरे बदलाव के दौर से गुजर रही है, इटली और भारत की साझेदारी उच्च राजनीतिक और संस्थागत स्तर पर नियमित संवाद से आगे बढ़ रही है और अब एक नए तथा व्यापक आयाम हासिल कर रही है, जो हमारी आर्थिक गतिशीलता, सामाजिक रचनात्मकता और हजारों साल पुरानी सभ्यतागत समझ को साथ जोड़ती है। हमारा सहयोग इस साझा समझ को दर्शाता है कि 21वीं सदी में समृद्धि और सुरक्षा इस बात से तय होगी कि देश इनोवेशन, एनर्जी ट्रांजिशन के प्रबंधन और स्ट्रैटेजिक संप्रभुता को मजबूत करने में कितने सक्षम हैं। इसी उद्देश्य से हमने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा तथा डाइवर्स बनाने का संकल्प लिया है, ताकि नए लक्ष्यों को हासिल किया जा सके और एक-दूसरे की पूरक क्षमताओं का बेहतर उपयोग हो सके। हमारा लक्ष्य इटली की डिजाइन क्षमता, मैन्युफैक्चरिंग एक्सीलेंस और वर्ल्ड-क्लास सुपरकंप्यूटर्स, जो उसे एक इंडस्ट्रियल पावरहाउस बनाते हैं, को भारत की तेज आर्थिक ग्रोथ, इंजीनियरिंग टैलेंट, बड़े पैमाने की क्षमता, इनोवेशन और 100 से ज्यादा यूनिकॉर्न तथा 2 लाख स्टार्ट-अप वाले एंटरप्रेन्योरशिप इकोसिस्टम के साथ जोड़कर मजबूत तालमेल बनाना है। यह केवल साधारण इंटीग्रेशन नहीं, बल्कि ऐसा साझा वैल्यू क्रिएशन है जिसमें दोनों देशों की औद्योगिक ताकतें एक-दूसरे को और मजबूत बनाती हैं।

यूरोपियन यूनियन और भारत के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दोनों दिशाओं में ट्रेड और इनवेस्टमेंट बढ़ाने का रास्ता खोलता है। हमारा लक्ष्य 2029 तक इटली और भारत के बीच 20 बिलियन यूरो के ट्रेड टारगेट को हासिल करना और उससे आगे निकलना है। इसके लिए डिफेंस और एयरोस्पेस, क्लीन टेक्नोलॉजी, मशीनरी, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, केमिकल्स, फार्मास्युटिकल्स, टेक्सटाइल, एग्री-फूड, टूरिज्म समेत कई सेक्टर्स पर फोकस किया जाएगा।

“मेड इन इटली” हमेशा से पूरी वर्ल्ड में एक्सीलेंस का प्रतीक रहा है और आज इसकी स्वाभाविक साझेदारी “मेक इन इंडिया” पहल के हाई-क्वालिटी लक्ष्यों के साथ बन रही है। इस संदर्भ में भारत के लिए प्रोडक्शन को लेकर इटली की कंपनियों की बढ़ती रुचि और इटली में भारतीय इंडस्ट्री की बढ़ती मौजूदगी, जिनकी संख्या अब दोनों तरफ से 1,000 से ज्यादा हो चुकी है, एक सकारात्मक संकेत है जो हमारी सप्लाई चेन के इंटीग्रेशन को और मजबूत करेगा।

टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन हमारी साझेदारी के केंद्र में है। आने वाले दशकों को ऐसी टेक्नोलॉजिकल क्रांति आकार देगी जिसका दायरा बेहद व्यापक होगा। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, क्रिटिकल मिनरल्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स में तेज प्रगति शामिल है। भारत का डायनामिक इनोवेशन इकोसिस्टम, हाई स्किल्ड प्रोफेशनल टैलेंट पूल और इटली की एडवांस्ड इंडस्ट्रियल क्षमताएं इन सेक्टर्स में हमारे सहयोग को स्वाभाविक और रणनीतिक बनाती हैं। हमारी यूनिवर्सिटीज और रिसर्च सेंटर्स के बीच बढ़ती साझेदारी भी इसे मजबूत आधार देगी।

भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पहले ही बड़ी संख्या में देशों, खासकर ग्लोबल साउथ में, अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। खासतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब हमारे समाज और ग्लोबल अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल रही है। इटली और भारत लंबे समय से यह सुनिश्चित करने के लिए साथ काम कर रहे हैं कि AI डेवलपमेंट जिम्मेदारीपूर्ण और मानव-केंद्रित हो। इसी नजरिये से भारत और इटली AI को समावेशी विकास के एक मजबूत माध्यम के रूप में भी देखते हैं, खासकर ग्लोबल साउथ के लिए, जहां डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुलभ बहुभाषी टेक्नोलॉजी विभाजन बढ़ाने के बजाय उसे कम कर सकती हैं। टेक्नोलॉजी के केंद्र में इंसान को रखने वाले भारत के MANAV विजन और मानवीय परंपरा पर आधारित मानव-केंद्रित “एल्गोर-एथिक्स” को बढ़ावा देने में इटली की अग्रणी भूमिका के आधार पर हमारी साझेदारी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि AI सामाजिक सशक्तिकरण का माध्यम बने। हमारा दृष्टिकोण भारत की डिजिटल क्षमता को इटली की एथिकल और इंडस्ट्रियल विशेषज्ञता के साथ जोड़ता है, ताकि टेक्नोलॉजी मानव गरिमा की सेवा करे। सुरक्षित डिजिटल सहयोग, कैपेसिटी बिल्डिंग और मजबूत साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी बेस्ट प्रैक्टिसेज को साझा करते हुए हमारा लक्ष्य ऐसा स्वतंत्र, भरोसेमंद और समान अवसर वाला डिजिटल स्पेस तैयार करना है, जिसमें हर देश AI को आकार देने और उससे लाभ उठाने में सक्षम हो। यही दृष्टिकोण इटली की G7 प्रेसीडेंसी और नई दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 के निष्कर्षों के केंद्र में है। AI को इंसानों द्वारा इंसानों के लिए बनाए गए एक माध्यम के रूप में देखने का मतलब यह स्पष्ट करना है कि टेक्नोलॉजी न तो लोगों की जगह ले सकती है, न उनके मौलिक अधिकारों को कमजोर कर सकती है और न ही इसका इस्तेमाल जनमत को प्रभावित करने या लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बदलने के लिए होना चाहिए। तेजी से जुड़ती दुनिया में स्वतंत्रता और मानव गरिमा की रक्षा को लेकर हमारा दृष्टिकोण इसी चुनौती पर आधारित है।

हमारा सहयोग स्पेस सेक्टर तक भी फैला हुआ है। स्पेस एक्सप्लोरेशन और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी में भारत की प्रभावशाली प्रगति, साथ ही एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में इटली की उत्कृष्ट क्षमता, संयुक्त पहलों और अगली पीढ़ी की टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के लिए बड़े अवसर प्रदान करती है।

सिक्योरिटी और स्टेबिलिटी देशों की समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी बनी हुई हैं। इटली और भारत डिफेंस, सिक्योरिटी और स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर्स में अपने सहयोग को और मजबूत करना चाहते हैं। हमारा सहयोग महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क, ड्रग तस्करी, साइबर क्राइम और मानव तस्करी जैसे खतरों के खिलाफ मजबूती बढ़ाने में मदद करेगा।

एनर्जी हमारी साझेदारी का एक और प्रमुख स्तंभ है। डाइवर्सिफाइड एनर्जी सोर्सेज की ओर बढ़ रहे ग्लोबल ट्रांजिशन के लिए इनोवेशन, इनवेस्टमेंट और सहयोग की जरूरत है। भारत और इटली रिन्यूएबल एनर्जी से लेकर हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी तक, और स्मार्ट ग्रिड से लेकर मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तक कई क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं। ग्रीन हाइड्रोजन एक्सपोर्ट हब बनने की भारत की पहल जहां अपार संभावनाएं प्रदान करती है, वहीं यह रिन्यूएबल इंफ्रास्ट्रक्चर में इटली की एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और यूरोप के लिए एनर्जी गेटवे के रूप में उसकी रणनीतिक भूमिका के साथ पूरी तरह मेल खाती है। इस संदर्भ में भारत की अगुवाई वाली प्रमुख पहलों, इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA), कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) और ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस (GBA) में अन्य देशों के साथ हमारा सहयोग भी महत्वपूर्ण है।

फिजिकल, डिजिटल और मानवीय कनेक्टिविटी वह कड़ी है जो हमें एक साथ जोड़ती है। भारत और इटली दोनों ग्लोबल अर्थव्यवस्था के दो अहम केंद्रों, इंडो-पैसिफिक और मेडिटेरेनियन, के मध्य स्थित हैं। इन क्षेत्रों को अलग-अलग दायरों के रूप में नहीं, बल्कि तेजी से एक-दूसरे से जुड़ते हुए क्षेत्रों के रूप में देखा जाना चाहिए।

दरअसल, हम उस उभरते हुए “इंडो-मेडिटेरेनियन” को देख रहे हैं, जो ट्रेड, टेक्नोलॉजी, एनर्जी, डेटा और विचारों का एक महत्वपूर्ण कॉरिडोर बनता जा रहा है, जो हिंद महासागर को यूरोप से जोड़ता है। इसी आपस में जुड़े हुए क्षेत्र में हमारे संबंध स्वाभाविक रूप से एक विशेष स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप में विकसित हो रहे हैं, जो दो महाद्वीपों को जोड़ते हुए नई ग्लोबल डायनामिक्स को आकार दे रही है।

इसी संदर्भ में इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर हमारे क्षेत्रों को मॉडर्न ट्रांसपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल नेटवर्क, एनर्जी सिस्टम और मजबूत सप्लाई चेन के जरिए जोड़ने की एक दूरदर्शी पहल है। भारत और इटली इस विजन को हकीकत में बदलने के लिए अन्य साझेदार देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।

हम अपनी साझा चुनौतियों का समाधान दोनों देशों के बीच गहरी साझेदारी और दीर्घकालिक सांस्कृतिक संबंधों के आधार पर कर सकते हैं। भारतीय संस्कृति में “धर्म” की अवधारणा उस जिम्मेदारी की भावना को दर्शाती है, जो हमारे कार्यों का आधार बननी चाहिए, जबकि “वसुधैव कुटुम्बकम”, यानी “पूरी दुनिया एक परिवार है”, का सिद्धांत आज के आपस में जुड़े डिजिटल युग में गहराई से प्रतिध्वनित होता है। ऐसे मूल्य इटली की पुनर्जागरण काल से जुड़ी मानवतावादी परंपरा में भी स्वाभाविक रूप से दिखाई देते हैं, जो हर व्यक्ति की गरिमा और समाजों तथा लोगों को जोड़ने में संस्कृति की शक्ति को महत्व देती है।

इसलिए हमारा साझा विजन लोगों को केंद्र में रखकर मजबूत और भविष्योन्मुखी भारत-इटली साझेदारी की नींव रखना है।

(लेखक: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी)