प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने लगभग 10,000 करोड़ के कुल निवेश के साथ तीन प्रमुख रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास के भारतीय रेलवे के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है:

ए) नई दिल्ली रेलवे स्टेशन,

बी) अहमदाबाद रेलवे स्टेशन तथा

सी) छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी), मुंबई

रेलवे स्टेशन किसी भी शहर के लिए एक महत्वपूर्ण और केंद्रीय स्थान होता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने रेलवे के बदलाव में स्टेशनों के विकास को महत्व दिया है। आज का कैबिनेट का फैसला स्टेशन विकास को नई दिशा देता है। 199 स्टेशनों के पुनर्विकास का काम चल रहा है। इनमें से 47 स्टेशनों के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। बाकी स्टेशनों के लिए मास्टर प्लानिंग और डिजाइन का काम चल रहा है। 32 स्टेशनों पर तेजी से काम हो रहा है। आज कैबिनेट ने 3 बड़े स्टेशनों अर्थात् नई दिल्ली, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी), मुंबई और अहमदाबाद रेलवे स्टेशनों के लिए, 10,000 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है।

स्टेशन डिजाइन के मानक तत्व इस प्रकार होंगे:

  1. प्रत्येक स्टेशन में एक ही स्थान पर सभी यात्री सुविधाओं के साथ खुदराकैफेटेरियामनोरंजन सुविधाओं के लिए एक विशाल रूफ प्लाजा (36/72/108 मीटर) होगा।
  2. रेलवे ट्रैक के दोनों ओर स्टेशन भवन के साथ शहर के दोनों किनारों को स्टेशन से जोड़ा जाएगा।
  3. फूड कोर्टवेटिंग लाउंजबच्चों के खेलने की जगहस्थानीय उत्पादों के लिए जगह आदि सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।
  4. शहर के भीतर स्थित स्टेशनों में सिटी सेंटर जैसी जगह होगी।
  5. स्टेशनों को आरामदेह बनाने के लिएपर्याप्त रोशनीवे फाइंडिंग/संकेतध्वनिकीलिफ्ट/एस्कलेटर/ट्रेवलेटर्स होंगे।
  6. पर्याप्त पार्किंग सुविधाओं के साथ यातायात के सहज संचालन के लिए मास्टर प्लान तैयार किया गया है।
  7. परिवहन के अन्य साधनों जैसे मेट्रोबस आदि के साथ एकीकरण होगा।
  8. सौर ऊर्जाजल संरक्षण/रिसाइकिलिंग और बेहतर ट्री कवर के साथ ग्रीन बिल्डिंग तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
  9. दिव्यांगजनों के अनुकूल सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
  10. इन स्टेशनों को इंटेलिजेंट बिल्डिंग की अवधारणा पर विकसित किया जाएगा।
  11. आगमन/प्रस्थान का पृथक्करणअव्यवस्था मुक्त प्लेटफॉर्मबेहतर सतहपूरी तरह से ढके हुए प्लेटफॉर्मों का निर्माण किया जाएगा।
  12. सीसीटीवी और एक्सेस कंट्रोल लगाने से रेलवे स्टेशन सुरक्षित रहेंगे।
  13. ये प्रतिष्ठित स्टेशन भवन होंगे।

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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर प्रधानमंत्री ने विभाजन पीड़ितों के साहस को किया याद
August 14, 2026
प्रधानमंत्री ने परिश्रम और पुरुषार्थ के महत्व को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर हम विभाजन से प्रभावित सभी लोगों के साहस को याद करते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास का वह एक ऐसा क्षण था जिसने कई जिंदगियां तबाह कर दीं, लोगों के परिवार उजड़ गए, कई लोगों को अपनों को खोना पड़ा और लोगों ने अत्यधिक पीड़ा झेली।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी स्थिति में भी लोगों ने शून्य से शुरू कर अपना जीवन पुनर्स्थापित किया, विपरीत परिस्थितियों को उपलब्धियों में बदला और राष्ट्र की प्रगति में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि इन लोगों का जीवन सभी को मानवीय जिजीविषा की शक्ति की याद दिलाता है। श्री मोदी ने उम्मीद जताई कि यह दिन हमारे देश में सद्भाव और भाईचारा बनाए रखने तथा विकसित भारत के निर्माण की दिशा में सामूहिक रूप से काम करने के हमारे संकल्प को और मजबूत करे।

प्रधानमंत्री ने उस भयावह दौर से उबरकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान देने वाले सभी देशवासियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अपने साहस और क्षमता से उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को साकार करने का उदाहरण प्रस्तुत किया। श्री मोदी ने सभी से सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने एक सुभाषितम् साझा करते हुए इस बात पर बल दिया कि परिश्रम, उद्यम और समर्पित प्रयासों से ही विविध कलाएं, विज्ञान, तकनीकी कौशल, शिल्प तथा नवाचार विकसित होते हैं और सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसलिए, किसी को भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए बल्कि साहस, कर्मठता और निरंतर प्रयास के साथ अपने लक्ष्यों की ओर दृढ़ता से अग्रसर रहना चाहिए क्योंकि पुरुषार्थ ही भाग्य का निर्माता है।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर श्रृंखलाबद्ध पोस्ट में लिखा:

आज हम #PartitionHorrorsRemembranceDay मना रहे हैं। विभाजन से प्रभावित सभी लोगों के साहस को हम याद करते हैं। इतिहास का वह क्षण कई जिंदगियों को तहस-नहस कर देने वाला था…परिवार उजड़ गए, लोगों ने अपनों को खोया और असहनीय पीड़ा सहनी पड़ी।
इन सब पर विजय प्राप्त करते हुए, लोगों ने शून्य से अपना जीवन पुनर्स्थापित किया, विपत्ति को सफलता में परिवर्तित किया और राष्ट्र की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उनकी जीवन यात्राएं हमें मानवीय जिजीविषा की शक्ति की याद दिलाती हैं। आशा है कि यह दिन हमारे देश में सद्भाव और भाईचारे को बनाए रखने के हमारे संकल्प को और मजबूत करेगा और हम सब मिलकर एक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में काम करेंगे।

"विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन सभी देशवासियों का हृदय से नमन, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने अपने साहस और सामर्थ्य से दिखाया कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को सिद्ध किया जाता है। आइए, सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करें।

उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः।
कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति॥”

It is through hard work, enterprise and dedicated effort that diverse arts, science, technological skills, craftsmanship and innovations flourish, paving the way for success. Therefore, one should not remain dependent on fate; rather, one should move steadily towards one's goals with courage, diligence and persistent effort, for it is human endeavor that shapes destiny.