उपस्थित सभी देवियों और सज्‍जनों, 

समाज में कैसे-कैसे नर-रत्‍न पैदा हुए हैं, महापुरूष पैदा हुए हैं, जिसके कारण हम सबको उत्‍तम विरासत प्राप्‍त हुई है। अगर आज यह समारोह यहां नहीं हुआ होता तो शायद नार्थ में रहने वाले कई लोग होंगे, जिनको यह पता तक नहीं होता कि अयंकाली जी कौन थे और इस देश का दुर्भाग्‍य रहा है, इसने किसी कारणवश, समाज के लिए जीने-जूझने वाले लोगों को भुला दिया है। शायद हम सबका दायित्‍व बनता है कि हमारे सभी महान पूर्वजों और उनके जीवन से प्रेरणा ले के नई पीढ़ी को संस्‍कारित करने के लिए हमें प्रयास करना चाहिए। 

पूरे केरल में ओणम का पर्व मनाया जा रहा है। मैं आज, सभी मेरे केरल के भाइयों-बहनों को ओणम की शुभकामनाएं देता हूं। आज 8 सितंबर है, इसका महात्‍मय मुझे बड़ा महत्‍वपूर्ण लगता है, क्‍योंकि 8 सितंबर को महात्‍मा अयंकाली का जन्‍म हुआ, लेकिन उसी केरल की धरती पर दूसरे महान समाज सुधारक नारायण गुरू जी का भी जन्‍म हुआ। आज केरल के जीवन में दो संगठनों, केपीएमस और एसएनडीपी, उनकी मर्जी के बिना न कोई समाज नीति चल सकती है, न कोई राजनीति चल सकती है। लेकिन, वो उसका एक अलग पहलू है। आज हम जब आज केरल के महान समाज सुधारक, महान संत अयंकाली जी की 152वीं जयंति पर मिले हैं। मेरा यह सौभाग्‍य रहा कि मैं पिछले बार केरल में केपीएमएस के निमंत्रण पर एक कार्यक्रम में गया था और शायद हम जिस विचारधारा में पले हुए लोग हैं, उसमें शायद मैं पहला था, जिसको आपके यहां आने का सौभाग्‍य मिला था। 

उस समय “कायल सभा” की शताब्‍दी का समारोह प्रारंभ हो रहा था। एक प्रकार से अब वो कायल शताब्‍दी की पूर्णाहुति का ही कालखंड है। उसमें भी मुझे आने का सौभाग्‍य मिला है। आप कल्‍पना कर सकते हैं कि स्‍वामी विवेकानंद जी को केरल पर इतना गुस्‍सा क्‍यों आया था। क्‍या वो केरल को प्‍यार नहीं करते थे? क्‍या केरल की भूमि उनको अपनी नहीं लगती थी? लेकिन केरल की जो समाज व्‍यवस्‍था बन गयी थी और जिस प्रकार से वहां दलितों पर जुल्‍म होता था, दलितों के साथ अन्‍याय होता था, इसने स्‍वामी विवेकानंद जी को बेचैन कर दिया था। उन्‍हें लगा, ये क्‍या समाज है, ये क्‍या कर रहे हैं ये लोग। सर्वाधिक गुस्‍से में स्‍वामी विवेकानंद थे और उसी गुस्‍से में से उनके मन से ये उदगार निकले थे। 

हमारे देश का, आजादी का ये आंदोलन देखें तो उस सारे आजादी के आंदोलन में 19वीं शताब्‍दी की घटनाओं का बहुत महत्‍व है। 19वीं शताब्‍दी में हमारे देश में, हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने में कोई न कोई समाज सुधारक पैदा हुआ। कोई न कोई सांस्‍कृतिक आंदोलन चला। एक प्रकार से 20वीं शताब्‍दी का आजादी के आंदोलन की पीठिका, 19वीं शताब्‍दी के समाज सुधारक आंदलोनों से हुई, सांस्‍कृतिक चेतना से हुई। 1200 साल की गुलामी के अंदर अपना सब कुछ भुला चुके समाज को फिर से एक बार प्राणवान बनाने का प्रयास उस समय महापुरूषों ने किया। 

उसी कालखंड में केरल में अयंकाली जी की समाज सुधार और संघर्ष की गतिविधि नारायण गुरू का शिक्षा आंदोलन और उसी समय डा. पलप्‍पु, मन्‍नायु पद्मनाभन, पंडित करप्‍पन, स्‍वामी वागपट्टानंदन, ऐसे एक से एक दिग्‍गज केरल की धरती पर सामाजिक चेतना को जगाने में लगे थे। 

लेकिन, 1913 में महात्‍मा गांधी हिन्‍दुस्‍तान लौटे, उससे पहले संत अयंकाली जी ने एक कायल सभा के द्वारा एक अद्भुत सत्‍याग्रह किया गया था। हम नार्थ के लोगों को मालूम नहीं है, लेकिन केरल के दलित समाज को जागृ‍त करने के लिए उनके अधिकारों के लिए, उस समय शासकों ने वहां के, अन्‍य लोगों ने, वहां के समाज के अगुवा लोगों ने, ये करने से मना कर दिया। ये कहा कि तुम्‍हें जमीन की इंच की जगह नही मिलेगी, सम्‍मेलन करने के लिए। उस जमाने में एक दलित मां का बेटा, सारा समाज सामने हो तो क्‍या करता, चुप हो जाता, बैठ जाता? 

अयंकाली जी चुप नहीं हुए। उन्‍होंने ठान ली कि मैं इस जुल्‍म के खिलाफ संघर्ष करूंगा। उन्‍होंने रास्‍ता खोजा। उन्‍होंने सब नावें इकट्ठी की, नौकाएं इकट्ठी की और समुद्र के अंदर एक नौकाओं के द्वारा एक विशाल जगह बना दी और नाव में सभा की उन्‍होंने। वह कायल सभा जो कही जाती है, 1913 के हर प्रतिबंध के बीच, समुंदर के अंदर। जमीन नहीं देते हो तो आप जानें, दुनिया जाने। परमात्‍मा ने मुझे जगह दी है समुन्दर को चीर कर के मैं वहां जायूँगा, लेकिन मैं हक़ों की लड़ाई लडूंगा, ये मिजाज अयंकाली जी ने बताया। समुन्दर में नाव इक्कठी कर कर के, नौकायें इक्कठी करके, वहीं उन्ही नौकायों में मंच बनाया, नाव में ही श्रोता आये और उन्होने सत्याग्रह किया था। 

महात्मा गाँधी 1915 में हिंदुस्तान आये थे और बाद में महात्मा गाँधी ने जब अयंकाली जी की इस शक्ति को देखा तो, महात्मा गाँधी जी ने स्वयं संत अयंकाली जी को मिलने गये थे। लेकिन, हम जब इतिहास के पन्नों को देखतें हैं तो ये चीजें हमे मिलती नहीं। पता नहीं, क्या कारण है? इसे क्यों ओझल कर दिया गया है! समाज सुधार के आंदोलन के रूप में, जो बातें हमने बाबा साहेब आम्बेडकर से सुनी हैं, जो हमे पढ़ने को मिलती है, अयंकाली जी की बातो में वो सारी बाते उस समय मिलती थी, 19वीं शताब्दी में। इतना ही नहीं, आज ह्यूमन राइट्स से सम्बंधित दुनिया में जितने भी डॉक्युमेंट्स हैं, यूएन से लेकर, कहीं पे भी, अगर उन डॉक्युमेंट्स को आप अयंकाली जी ने 19वीं शताबदी में जिन बातों को कहा था, उसको अगर हम जोड़ेंगे, तो बहुत सी बाते वो मिलेंगी, जो 19वीं शताबदी में अयंकाली जी ने कही थी जिन बातों को आज विश्व में ह्यूमन राइट्स की बातों के साथ जोड़ा गया। 

इतना ही नहीं, केरल में तो हम जानते हैं, दक्षिण में तो स्थिति ये थी की अगर किसी दलित को जाना है तो पीछे झाडू लगाना पड़ता था, उसके पद-चिन्ह ना रह पायें, ये पागलपन उस जमाने में था। कोई दलित बैलगाड़ी नहीं रख सकता था। बैलगाड़ी मे बैठ नहीं सकता था, वो दिन थे। तब अयंकाली जी ने सत्याग्रह किया था। उन्होने तय किया, जिस रास्ते पर प्रतिबंध है उस रास्ते पर मैं जाउंगा, बैलगाड़ी ले कर के जाउंगा और अयंकाली जी गये, बहुत बड़ा संघर्ष हुआ, मारपीट हुई, कुछ लोगों को चोटे पहुंची, लेकिन वो झुके नहीं। समाज को जगाने के लिये वो निरंतर प्रयास करते रहे। 

आज जितने भी मजदूर आंदोलन चल रहे हैं, उन सभी मजदूर आंदोलनो को भी अगर कोई सच्चाई सीखनी है तो, अयंकाली जी से सीखने को मिलेगी। 

उन्होंने कृषि मजदूरों को आज़ादी दिलाने का आंदोलन चलाया था। जो कृषि मजदूर थे, उनके लिये काम का समय तय हो, उनके लिये वेतन तय हो, उनके बच्चों को सरकारी स्कूल मे एडमिशन का अधिकार मिले, महिलायों के लिये मजदूरी का प्रकार अलग हो, इन सारे विषयों की लड़ाई लड़ कर के विजय प्राप्त की थी, अयंकाली जी ने। वे एक प्रकार से समाज सुधारक भी थे, लेकिन साथ-साथ समाज के हकों के लिये संघर्ष करना और उन्हें हक दिलाना, ये उस समय अयंकाली जी ने किया था और कृषि जीवन के अंदर अनेक अधिकार पाने में सुविधा मिली थी। आज केरल में जो शिक्षा की जो स्थिति है, अगर इसका गर्व हम करतें हैं, तो हमे इस बात का भी गर्व करना होगा की दो महापुरुष विशेष रूप से, जिन्‍होंने केरल में शिक्षा की जोत जलाई थी, एक संत अयंकाली जी और दूसरे नारायण गुरु जी। उस समय दलित, शोषित, पीड़ित, वंचित, पिछड़े, इनके लिये शिक्षा, ये उनका प्राथमिक विषय रहा था और उसके कारण केरल के समाज जीवन में इतना बड़ा बदलाव आया, इतना परिवर्तन आया। 

हम हिन्दुस्तान की आज़ादी के आंदोलन की जब चर्चा करतें हैं, तो 1930 की दांडी यात्रा को एक टर्निंग प्‍वाइंट के रूप में देखते हैं। मैं समझाता हूं, आज़ादी के आंदोलन में 1930 की दांडी यात्रा एक महत्वपूर्ण टर्निंग पॉइंट है, तो दलित उद्धार के आंदोलन में 1913 का कायल सम्‍मेलन, ये टर्निंग प्‍वाइंट है। बाबा साहब कहते थे- संगठित बनो, संघर्ष करो, शिक्षित बनो। संत अयंकाली जी ने भी इन्‍हीं तीन मंत्रों को ले कर के समाज को सशक्‍त बनाने का काम किया था। उस अर्थ में ऐसे महापुरूष, जिन्‍होंने समाज के हकों के लिए लड़ाई लड़ी, समाज के अंदर चेतना जगाई, लेकिन कभी समग्रतया समाज जीवन में दरार पैदा होने का प्रयास होने नहीं दिया। सामाजिक एकता को कभी आंच न आए, इसके लिए वह प्रयारत रहे। यह अपने आप में बहुत बड़ी बात है। बाबा साहब अंबेदकर का जीवन देखिए, दलित उद्धार के लिए लड़ाई लड़ी। लेकिन दलितों के अंदर नफरत की आग जलाने का प्रयास कभी बाबा साहब अंबेदकर ने नहीं किया। यही तो दिव्‍य दृष्टि होती है और वही अयंकाली जी का था कि उन्‍होंने अन्‍याय के खिलाफ लड़ना तय माना लेकिन, समाज के प्रति प्रेम, उसमें कभी कटुता को जन्‍म न आए, इसके लिए एक जागरूक प्रयास किया और उसका परिणाम है कि समाज के ताने-बाने बचे रहते हैं। 

समाज जीवन में, यह विविधताओं भरा देश है। विविधता में एकता, यह हमारे भारत की विशेषता है। ये भारत के सौंदर्य को बढ़ाने वाले, हमारी विरासत हैं। उन विविधता में एकता को बनाये रखते हुए, सामाजिक एकता के मूल मंत्र को कोई आंच न आए। लेकिन उसके साथ कोई वंचित न रह जाए। किसी से अन्‍याय न हो, ये व्‍यवस्‍थाओं के ऊपर बल देना, यह हर समय की मांग होती है। 

कभी-कभी मुझे लगता है, लोग चर्चा करते हैं, ये 5000 साल हो गए, इस संस्‍कृति को, परंपरा को। ये कैसे इतना चल रहा है। दुनिया में कई संस्‍कृतियां नष्‍ट हो गईं, क्‍या कारण है? अगर हम देखें तो इस समाज की एक विशेषता है। हर युग में हमारे देश में कोई न कोई समाज सुधारक पैदा हुए हैं। उन समाज सुधारकों ने अपने ही समाज की बुराइयों या कमियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। 

महात्‍मा गांधी ने आजादी का आंदोलन लड़ा, लेकिन साथ-साथ ही हिंदू समाज में जो अस्‍पृष्‍यता थी, उसके खिलाफ भी उन्‍होंने जंग छेड़ा, लड़ाई लड़ी। राजाराम मोहन राय समाज जीवन के लिए अनेक काम किए, लेकिन समाज में महिलाओं के खिलाफ जो अन्‍याय हो रहा था, उसके खिलाफ लड़ाई लड़ी। हम भाग्‍यशाली हैं एक प्रकार से, सदियों से हम देखें, कोई युग ऐसा नहीं गया है, कि हमारे भीतर कोई बुराइयां आई है तो हमारे भीतर ही कोई महापुरूष पैदा हुआ है। उसने हमें उन बुराइयों से मुक्ति के लिए कभी डांटा है तो कभी झकझोरा है, कभी शिक्षित किया है और हमें सुधार करने के लिए रास्‍ता दिखाया है और हम टिके हैं, उसका कारण यह है कि हमारे यहां एक ऑटो पायलट व्‍यवस्‍था है। हमारे भीतर से ही ऐसे महापुरूष पैदा होते हैं, जो हमारी कमियों को दूर करके, हमें सशक्‍त करने का निरंतर प्रयास करते हैं। हम इसलिए भाग्‍यवान हैं, कि जो काल बाह्य चीजें हैं, जो किसी समय उपयोगी रही होगी लेकिन, समय रहते निकम्‍मी रह गई होगी। अगर हमें ऐसे संत नहीं मिले होते, ऐसे समाज सुधारक नहीं मिले होते, तो वहीं चीजें हमारे लिए बोझ बन जाती। हमारे यहां ऐसे महापुरूष पैदा हुए, जिन्‍होंने हमें उस काल बाह्य चीजों से मुक्ति दिलाई। आधुनिक बनने की दिशा दी। नवचेतना जगाने का प्रयास किया। 

एक समाज के रूप में हम स्‍थगितता को लेकर हम जीने वाले, पनपे हुए लोग नहीं हैं। हम नित्‍य नूतन प्रयास करने वाले लोग हैं और हर सदी में हुआ है। उस प्रयास करने वाले महापुरूषों में अनेक महापुरूषों का जैसे स्‍मरण होता है, संत अयंकाली जी का भी होता है। आजादी के आंदोलन में सारे हिन्‍दुस्‍तान की तरफ नजर करना, समाज सुधारक, भक्ति आंदोलन चेतना आंदोलन, हर कोने में महापुरूषों की भरमार थी। आजादी के लिए पहले समाज को साशक्‍त करने के लिए उन्‍होंने मेहनत की थी। उसी पीठिका का परिणाम था कि 20वीं शताब्‍दी में हम पूरी ताकत के साथ आजादी के लिए सफलता की ओर आगे बढे और उसकी पीठिका तैयार करने में अयंकाली जैसे अनेक महापुरूषों ने, नारायण गुरू स्‍वामी जैसे अनेक महापुरूषों ने प्रयास किया था जिस पर परिणाम लाभदायक रहा। 

समाज में आजादी के बाद दलित, पीडि़त, शोषितों से मु‍क्ति के लिए हम बाबा साहब अंबेडकर के जितने आभारी हों, उतने कम हैं। भारत के संविधान में एक ऐसी व्‍यवस्‍था दी है, जिसके कारण हमें अपना हक पाने का अवसर मिला है। ये भारत के संविधान निर्माता सब मिल कर के दलितों का, पीडि़तों का, शोषितों का कल्‍याण हो, उसकी चिंता की है। लेकिन हमें कभी एक समाज के नाते, इतने में ही संतुष्‍ट हो कर के चलेगा क्‍या? एक समाज के अग्र वर्ग का बेटा, उसको बैंक में नौकरी मिल जाए, एक दलित मां का बेटा, उसको नौकरी मिल जाए। दोनों को समानता मिलेगी। लेकिन इससे समाज की एकता हो जाती है क्‍या। नहीं होती है। इसलिए सिर्फ समानता के स्‍टेशन पर हमारी गाड़ी अटक गई तो हमें जहां जाना है, वहां हम कभी पहुंच नहीं पाएंगे। इसलिए सिर्फ समता से काम नहीं चलता है।सब समाजों के लिये समता हो, इन से काम नहीं चलता है, समता के आगे भी एक यात्रा है, और उस यात्रा के अंतिम मंजिल है समरसता। 

समता पर सब कुछ बन गए, दलित का बेटा भी डॉक्टर बन गया, ब्राह्मण का भी बेटा भी डॉक्टर बन गया, दोनों डॉक्टरी कर रहे हैं, लेकिन फिर भी अगर समरसता नहीं है तो कुछ न कुछ कमी महसूस होती है । ये समरसता कब आती है, संविधान की व्यवस्था से, कानून की व्यवस्था से, हकों की लड़ाई लड़ते-लड़ते समता तो मिल सकती, लेकिन समरसता पाने के लिये समाज मे एक सतत निरन्तर, जागरूक समाज का प्रयासकरना पड़ता है । और इसलिये दो मूल बातों को ले करके चलना पड़ता है, सम-भाव+मम-भाव=समरसता। समता प्‍लस ममता इज इक्‍वल टू समरसता। समता है, लेकिन अगर ममता नहीं है तो समाज एक रस नहीं बन सकता। सम-भाव है, लेकिन मम-भाव नहीं है, ये भी मेरा है, मेरा ही भाई है, उसकी और मेरी रगों में एक ही खून है, ये भाव जब तक पैदा नहीं होता, तब तक समरसता नहीं आती है । 

इसलिये, हमे सम-भाव की यात्रा को मम-भाव से जोडना है, हमें समता की यात्रा को ममता की यात्रा के साथ जोड़ना है। समता और ममता के भाव को जोड़ कर के ही हम समरसता की यात्रा को आगे बड़ा सकते हैं । तभी जा करके समाज में किसी के प्रति कटुता पैदा नहीं होगी, किसी के साथ अन्याय नहीं होगा, किसी को अपने हकों के लिये लड़ाई नहीं लड़नी पड़ेगी, सहज रूप से उसे प्राप्त होगा । मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आने वाला युग समरसता की यात्रा का युग है । 

इसे परिपूर्ण करना, समाज का शासकों का, सुधारकों का, शिक्षकों का, संस्कृतिक नेतृत्‍व करने वालों का, सबका सामूहिक दायित्व है । 

भारत "बहुरत्न वसुंधरा" है । हर युग में ऐसे लोग मिले हैं जिन्होने साहित्यों को पैदा किया है, इन साहित्यों का लाभ हमें अवश्‍य मिलेगा। 

मैं फिर एक बार परम पूज्‍य अयंकाली जी, उनके उन महान कामों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करता हूँ, उनके चरणों में नमन करता हूँ, और केपीएमएस के द्वारा ये जो निरन्तर प्रयास चले हैं, मैं उन सब को बहुत हृदय से अभिनन्दन देता हूँ । राजनीतिक दृष्टि से कभी हमारा और उनका मेल नहीं रहा, लेकिन जो प्यार् मुझे केपीएमएस से मिला है, हमेशा मिला है और बाबू तो हमारे लिये, मैंने देखा है, हमेशा, प्यार लिये रहते हैं। ये प्‍यार बना रहेगा। 

मुझे आज आप के बीच आने का अवसर मिला, दिल्ली के इस महत्‍वपूर्ण ओडिटोरियम में , कभी किसी ने सोचा होगा, 152 साल पहले पैदा हुये एक संत को, इस महत्‍वपूर्ण भवन में हम लोगों को श्रद्धांजलि देने का सौभाग्‍य प्राप्त होगा। यही तो बताता है कि ये समरसता की यात्रा का युग है, और इस समरसता की यात्रा को हम सब मिल कर आगे बढायेंगे। 

फिर एक बार आप सब को मेरी शुभकामनाएं। फिर एक बार ओणम की बहुत-बहुत शुभकामनाएं, धन्यवाद । 

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શ્રી રામ જન્મભૂમિ મંદિર ધ્વજારોહણ ઉત્સવ દરમિયાન પ્રધાનમંત્રીના સંબોધનનો મૂળપાઠ

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દમણ, ગુજરાતમાં વિવિધ વિકાસ કાર્યોના શિલાન્યાસ/લોકાર્પણ પ્રસંગે પ્રધાનમંત્રીજીના સંબોધનનો મૂળપાઠ
June 05, 2026
The launch of projects across healthcare, aviation, tourism and infrastructure marks a new development push for Daman that will transform lives across the UT: PM
The data released today reflects the strength of India's economy, with growth of 7.7% in FY 2025–26 and 7.8% in the quarter ending March 31: PM
Even amid severe global challenges, the collective efforts of 1.4 billion Indians have ensured that India is not only sustaining itself but also staying ahead of the curve: PM
The National Family Health Survey clearly reflects the government's focus on healthcare. While most deliveries in India earlier took place outside hospitals, today over 90% of all deliveries occur in hospitals: PM
Thanks to Mission Indradhanush, child immunization coverage in India has risen from 60% before 2014 to nearly 90% today: PM

ભારત માતા કી જય! ભારત માતા કી જય!

દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવના એડમિનિસ્ટ્રેટર પ્રફુલ્લ ભાઈ પટેલ, સંસદમાં મારા સહયોગી કલાબેન ડેલકર, દમણ મ્યુનિસિપલ કાઉન્સિલના પ્રમુખ દીપિકા ટંડેલ જી, દમણ જિલ્લા પંચાયતના અધ્યક્ષ ધર્મ બાબુ પટેલ, સિલવાસા મ્યુનિસિપલ કાઉન્સિલના અધ્યક્ષ સોમનાથ દેવરેજી, દાદરા નગર હવેલી જિલ્લા પંચાયતના અધ્યક્ષ નિશા ભાવસાર જી, દીવ મ્યુનિસિપલ કાઉન્સિલના અધ્યક્ષ હરીશ કપાયાજી, દીવ જિલ્લા પંચાયતના અધ્યક્ષ કોટિયા રંજીતાબેન અને અહીં વિશાળ સંખ્યામાં પધારેલા મારા વહાલા ભાઈઓ-બહેનો,

તમે જેમ અહીં એકઠા થયા છો, તેવી જ રીતે લક્ષદ્વીપમાં પણ બહુ મોટી સંખ્યામાં લોકો વીડિયોના માધ્યમથી અમારી સાથે જોડાયેલા છે, કારણ કે આજે લક્ષદ્વીપના વિકાસની પણ એક નવી શરૂઆત, એક નવો પ્રકલ્પ, જે આખા લક્ષદ્વીપના જીવનમાં એક ક્રાંતિકારી કામ કરવાનો છે, તેના માટે પણ કેટલીક યોજનાઓનું શિલાન્યાસ અને લોકાર્પણ થયું છે.

સાથીઓ,

કેટલાક વર્ષો પહેલાં, જ્યારે હું તમારી વચ્ચે આવ્યો હતો, તો મેં કહ્યું હતું આ આપણું દમણ ઝડપથી મિની ઇન્ડિયા બની રહ્યું છે અને આજે હું જોઈ રહ્યો છું, ડાબી બાજુ આખું બંગાળ છે અને જમણી બાજુ આખું અસામ છે. દમણ મિની ઇન્ડિયાનું જીવતું-જાગતું ઉદાહરણ બની ચૂક્યું છે. અહીંની વિવિધતા, અલગ-અલગ ક્ષેત્રોના લોકોનું અહીં નિવાસ કરવું, આખા ભારતની સુંદર ઝલક તમારી વચ્ચે આવીને મળી જાય છે. તમે બધા આટલી મોટી સંખ્યામાં અમને આશીર્વાદ આપવા આવ્યા, હું આના માટે આપ સૌનો ખૂબ-ખૂબ ધન્યવાદ કરું છું.

 

ભાઈઓ-બહેનો,

મને કેટલીય વાર દમણ અને દીવ આવવાનો અવસર મળ્યો છે. દાદરા અને નગર હવેલી પણ આવતો રહું છું અને જ્યારે હું મુખ્યમંત્રી કે પ્રધાનમંત્રી નહોતો, ત્યારે તો બહુ વાર આવતો હતો. પરંતુ હવે જ્યારે હું અહીં આવું છું અને અહીંના સુશાસનને જોઈને, ગવર્નન્સ મોડલને જોઈને બહુ સારું લાગે છે. દર વખતે મને લાગે છે કે ગત વખતની સરખામણીમાં આ ક્ષેત્ર વિકાસની રાહ પર માઈલો આગળ વધી ગયું છે.

સાથીઓ,

દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવએ દાયકાઓથી વિકાસના સપના જોયા હતા. જે સપના પહેલાં જોયા, એ પેઢીઓ તો ચાલી ગઈ. પરંતુ આજે જે પેઢી છે, તે પોતાની આંખોની સામે જોઈ રહી છે કે તેમના માતા-પિતા, દાદા-દાદી જે સપના જોતા હતા, એ આજે સપના પૂરા થતા તમે પોતાની આંખોથી જોઈ રહ્યા છો. આજે પણ અહીં કનેક્ટિવિટી, હેલ્થ, એજ્યુકેશન, ટુરિઝમ અને અર્બન ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચર આનાથી જોડાયેલી અનેક પરિયોજનાઓનું ઉદ્ઘાટન અને શિલાન્યાસ થયું છે. વિકાસના આ કામ દમણ અને આખી યુનિયન ટેરિટરી માટે અહીંના લોકોના જીવનને સરળ બનાવશે. આનાથી યુવાનો માટે નવા અવસરો તૈયાર થશે. આ કામોની પાછળ પ્રફુલ્લ ભાઈ પટેલની દ્રષ્ટિ, તેમની અને તેમની ટીમની મહેનત સાફ-સાફ નજરે પડે છે. હું આના માટે પણ પ્રફુલ્લ ભાઈ અને તેમની આખી ટીમની સરાહના કરું છું. હું બધાને લક્ષદ્વીપના લોકોને, દાદરા-નગર હવેલીના લોકોને અનેક-અનેક શુભકામનાઓ આપું છું, આપ સૌને વધામણી આપું છું.

સાથીઓ,

આજે તમારી વચ્ચે આવ્યો છું, તો એક સુખદ સમાચાર આવ્યા છે. હું તો આજે સવારે દિલ્હીથી નીકળી ચૂક્યો હતો, પરંતુ અત્યારે જે આંકડા સામે આવ્યા છે, જે સમાચાર આવ્યા છે, તે ખરેખર પ્રસન્નતા આપનારા છે અને હું પણ ઈચ્છું છું, આ ખુશી તમારી સાથે પણ વહેંચું. આજે જે આંકડા આવ્યા છે, એ આંકડાઓથી સાફ છે કે ભારતની અર્થવ્યવસ્થાનો પાયો કેટલો મજબૂત છે. વર્ષ 2025-26 માં એટલે કે જે ફાઇનાન્સિયલ યર પાછલું પૂરું થયું, વર્ષ 2025-26 માં ભારતે 7.7 પર્સન્ટનો ગ્રોથ રેટ હાસલ કર્યો છે, 7.7 અને પાછલો ક્વાર્ટર જે 31 માર્ચે ખતમ થયો, તેમાં પણ ભારતનો ગ્રોથ 7.8 પર્સન્ટ રહ્યો છે, 7.8 અને આ દુનિયામાં તેજ ગતિથી આગળ વધનારી મોટી ઇકોનોમી છે. દરેક ભારતીયને ગર્વ થાય, આ છે તેની ગતિ. આજે દેશ જે રિફોર્મ એક્સપ્રેસ પર ચાલી રહ્યો છે, આજે દેશમાં ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચરનો જે આટલો વિકાસ થઈ રહ્યો છે, ગરીબ કલ્યાણને લઈને આટલા મોટા સ્તરે જે કામ ચાલી રહ્યું છે, આ બધા પ્રયાસોનું પરિણામ છે કે આજે દેશ મોટી ઇકોનોમીમાં સૌથી તેજ ગતિથી આગળ વધી રહ્યો છે અને આપણે બધા જાણીએ છીએ, દુનિયા સંકટોમાં ઘેરાયેલી છે, આખી દુનિયાની અર્થવ્યવસ્થા સવાલોના નિશાનો નીચે દબાયેલી પડી છે, વૈશ્વિક સંકટના આ ખરાબમાં ખરાબ દોરમાં પણ 140 કરોડ દેશવાસીઓના સામૂહિક પ્રયાસોથી ભારત પોતાની જાતને સંભાળી તો રાખી જ રહ્યું છે, પરંતુ સાથે-સાથે સૌથી આગળ રહેવામાં પણ તેના પ્રયાસો સફળ થતા જઈ રહ્યા છે. હું દેશવાસીઓને આર્થિક ક્ષેત્રની આ નવી ઊંચાઈને પ્રાપ્ત કરવા માટે ખૂબ-ખૂબ વધામણી આપું છું અને હું દેશને ફરી આશ્વસ્ત કરું છું કે દેશ દુનિયાભરમાં ચાલી રહેલા આ સંકટોનો સામનો કરતા Reform, Perform અને Transform ના રસ્તા પર આવી જ રીતે દ્રઢ સંકલ્પની સાથે, તેજ ગતિથી આગળ વધતો જ રહેશે, આ મારી દેશવાસીઓને ગેરંટી છે.

સાથીઓ,

આજે આપણા માટે વિકાસ જેટલો જરૂરી છે, એટલું જ મહત્વનું છે કે આપણું વિકાસનું મોડલ સસ્ટેનેબલ હોય. આજે વર્લ્ડ એન્વાયરમેન્ટ ડેના દિવસે આપણા અહીં યુનિયન ટેરિટરી સ્ટેટ આ સંકલ્પને સાકાર કરી રહ્યું છે. આજે એક તરફ અહીં હજારો કરોડની વિકાસ પરિયોજનાઓનું લોકાર્પણ અને શિલાન્યાસ થયું છે. સાથે જ અહીં આશરે એક લાખ એક વૃક્ષ માતાના નામે, એક લાખ છોડ પણ વાવવામાં આવી રહ્યા છે. મને ગર્વ છે કે એક એવો કેન્દ્રશાસિત પ્રદેશ છે, જેણે સરકારી ઈમારતોમાં શત પ્રતિશત, 100 પર્સન્ટ સૌર ઊર્જાના ઉપયોગની ઉપલબ્ધિ હાંસલ કરી છે. આજે દીવમાં દિવસમાં જેટલી વીજળીની ડિમાન્ડ હોય છે, તે સોલર પાવરથી જ પૂરી થઈ રહી છે અને આપણે તો આને હજુ આગળ લઈને જવાનું છે. ઘરોમાં પણ સોલર ઊર્જાથી વીજળી મળે, એટલું જ નહીં વધારાની વીજળીથી પરિવારની આવક પણ થાય, તેના માટે રૂફટોપ સોલર પ્લાન્ટ્સ લગાવવાની પહેલ શરૂ થઈ છે. હું આ ઉપલબ્ધિઓ માટે પણ આપ સૌની સરાહના કરું છું.

 

સાથીઓ,

સાથે-સાથે મને એ પણ જણાવવામાં આવ્યું છે, દમણના લોકો આ દિવસોમાં અહીં સ્વચ્છતા અભિયાન પણ ચલાવી રહ્યા છે. આ દર્શાવે છે કે સ્વચ્છતા કઈ રીતે દમણના જનજીવનમાં સંસ્કાર બની ચૂકી છે અને આ સંસ્કાર સ્વચ્છતામાં નજરે પડી રહ્યા છે. હું આ જનભાગીદારીના તમારા પ્રયાસો માટે દમણના લોકોનું અભિનંદન કરું છું.

સાથીઓ,

દાદરા નગર હવેલી, દમણ અને દીવ, આ સંઘ શાસિત પ્રદેશ હોવાની સાથે જ ભારતની ઓળખ અને વિરાસત પણ છે. એટલા માટે, આના વિકાસ માટે અમારા લક્ષ્ય પણ સાધારણ નથી. મને યાદ છે, જ્યારે હું ગયા વર્ષે સિલવાસા આવ્યો હતો, ત્યારે મેં તમને સિંગાપોરનું ઉદાહરણ આપ્યું હતું. મેં કહ્યું હતું કે એક સમયે સિંગાપોર માછીમારોનું નાનું એવું ગામ હતું. પરંતુ, સિંગાપોરના લોકોએ એક સપનું જોયું, ત્યાંના લોકોએ મોટું લક્ષ્ય નક્કી કર્યું અને આજે એ જ સિંગાપોર દુનિયાનું સૌથી મોટું બિઝનેસ હબ બની ચૂક્યું છે. આજે દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવ પણ એ જ સપનું જોઈ રહ્યા છે. આ નમો એરપોર્ટ, દમણગંગા નદી પર બનનારો આઇકોનિક બ્રિજ, ‘બીચ ફ્રન્ટ’ તેના પર બનનારો કન્વેન્શન સેન્ટર, આવા બધા ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચર દ્વારા આપણે ભવિષ્યના મોટા સંકલ્પોનો પાયો નાખી રહ્યા છીએ. આ પ્રોજેક્ટ્સ દ્વારા લોકોની અવરજવર સરળ થશે. અહીં બિઝનેસ માટે નવી સંભાવનાઓ બનશે. દમણના બંને કિનારા પર વિકાસની ગતિ હજુ વધુ તેજ થશે.

સાથીઓ,

અહીં સગવડતાના અર્થતંત્રથી જોડાયેલા અવસરો વધશે અને સાથે જ ટ્રાન્સપોર્ટ નગર જેવી સુવિધાથી વ્યાપાર, લોજિસ્ટિક્સને પણ નવી ગતિ મળશે.

 

સાથીઓ,

આ ક્ષેત્રમાં બ્લુ ઇકોનોમી માટે અમે જે વિઝન તૈયાર કર્યું છે, તે વિઝન પણ હાઇટેક ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચરની તાકાતથી જ સાકાર થશે. એટલા માટે જ, લક્ષદ્વીપના કલપેની અને કદમત દ્વીપોમાં પણ આજે જ આધુનિક પોર્ટ્સની આધારશિલા રાખવામાં આવી રહી છે. આ તમામ પ્રયાસો બ્લુ ઇકોનોમીમાં દેશની તાકાતને વધારશે અને જેવું મેં કહ્યું આ લક્ષદ્વીપનું ભાગ્ય બદલનારા પગલાં છે.

સાથીઓ,

ભાજપની સરકારમાં, એનડીએની અમારી સરકારમાં અમારા માટે વિકાસની પહેલી કસોટી છે- ગરીબ, વંચિત, આદિવાસી અને મિડલ ક્લાસના જીવનમાં બદલાવ! આના માટે, હેલ્થ સેક્ટર અમારી બહુ મોટી પ્રાથમિકતા છે. વિતેલા વર્ષોમાં દેશ હેલ્થ કેર માટે હોલિસ્ટિક વિઝન લઈને આગળ વધ્યો. અમે ઈલાજથી જોડાયેલી દરેક ચિંતાનું સમાધાન કર્યું છે. આજે ગરીબમાં ગરીબ પાસે પણ આયુષ્માન કાર્ડની સુવિધા છે. તેમની પાસે 5 લાખ રૂપિયા સુધીના મફત ઈલાજનો ભરોસો છે. બીમારીની સમયસર તપાસ થઈ શકે, તેના માટે, પ્રધાનમંત્રી આયુષ્માન આરોગ્ય મંદિરોની વ્યવસ્થા છે. જન ઔષધિ કેન્દ્રો દ્વારા સસ્તી દવાઓ પણ મળી રહી છે. આ સુવિધાઓ હજુ બહેતર થાય, હજુ આધુનિક થાય, તેના માટે આયુષ્માન ભારત ડિજિટલ મિશન દ્વારા આજે સ્વાસ્થ્ય સેવાઓને ટેકનોલોજીથી જોડવામાં આવી રહી છે.

સાથીઓ,

આયુષ્માન કાર્ડ અને જન ઔષધિ કેન્દ્રોથી જ ગરીબ અને મધ્યમ વર્ગના આશરે સવા બે લાખ કરોડ રૂપિયા ખર્ચ થતા બચ્યા છે.

ભાઈઓ-બહેનો,

કેન્દ્ર સરકારની નીતિઓનો બહુ લાભ આ ક્ષેત્રના લોકોને પણ થયો છે. એક સમયે અહીં ઈલાજની સારી સુવિધાઓનો પણ અભાવ હતો. અહીં મેડિકલ કોલેજ સુધી નહોતી. પરંતુ, હવે મેડિકલ કોલેજ પણ છે અને તેમાં પોસ્ટ ગ્રેજ્યુએશનનું ભણતર પણ શરૂ થઈ ગયું છે. સિલવાસાની નમો હોસ્પિટલ ગયા વર્ષથી હજારો લોકોની સેવા કરી રહી છે. આજે દમણમાં પણ નમો હોસ્પિટલનું લોકાર્પણ થયું છે. આ ક્ષેત્રના લોકોને પણ હવે હજુ બહેતર હેલ્થ કેરનો લાભ મળશે.

 

સાથીઓ,

અમારી સરકાર કેવી રીતે સ્વાસ્થ્યને પ્રાથમિકતા આપતા ચાલી રહી છે, આનું એક પ્રમાણ નેશનલ ફેમિલી હેલ્થ સર્વેના પરિણામોમાં પણ મળે છે. એક સમયે ભારતમાં મોટાભાગના બાળકોની ડિલિવરી હોસ્પિટલમાં નહોતી થતી. આજે દેશમાં 90 ટકાથી વધુ ડિલિવરી હોસ્પિટલોમાં થઈ રહી છે, જેના કારણે માતા મૃત્યુ કે નવજાતની મૃત્યુમાં બહુ મોટી અટકાવ આવી છે. મિશન ઇન્દ્રધનુષના કારણે બાળકોના રસીકરણના ક્ષેત્રમાં પણ ભારતે સારી પ્રગતિ કરી છે. 2014 પહેલાં માત્ર 60 ટકા બાળકોનું પૂર્ણ રસીકરણ થઈ શકતું હતું. આજે આ આંકડો વધીને આશરે 90 ટકા સુધી પહોંચી ગયો છે. સ્વાસ્થ્ય સુરક્ષાના ક્ષેત્રમાં પણ મોટો બદલાવ આવ્યો છે. 2014 પહેલાં 30 ટકાથી પણ ઓછા પરિવારો સ્વાસ્થ્ય વીમા યોજનાથી જોડાયેલા હતા. આજે આયુષ્માન ભારતે, એ આંકડાઓને પણ બદલી દીધા છે. હવે 60 ટકાથી વધુ પરિવારોને આ સુરક્ષા મળી રહી છે.

સાથીઓ,

સ્વાસ્થ્યના ક્ષેત્રમાં સરકારના આ પ્રયાસોનો લાભ જો કોઈને સૌથી વધારે મળ્યો છે, તો તે મારા દેશની નારી શક્તિ છે.

સાથીઓ,

પહેલાં આ ક્ષેત્રના યુવાનોને હાયર એજ્યુકેશન માટે પણ બહાર જવું પડતું હતું. પરંતુ, આજે અહીં નેશનલ લેવલની, એક નહીં કેટલીય ઇન્સ્ટિટ્યૂટ બની ચૂકી છે. પાછલા વર્ષોમાં અહીં શાળાઓની નવી બિલ્ડિંગ્સ બની છે, શાળાઓમાં સ્માર્ટ ક્લાસરૂમ પણ બન્યા છે. 40 હજારથી વધુ વિદ્યાર્થીઓને આનો લાભ મળી રહ્યો છે. મને ખુશી છે કે કેન્દ્રશાસિત પ્રદેશ ધીમે-ધીમે એજ્યુકેશનના ક્ષેત્રમાં આગળ આવી રહ્યો છે. સ્વામી વિવેકાનંદ એજ્યુકેશન હબ જેવા કેટલાય નિર્માણ અહીં થઈ રહ્યા છે.

ભાઈઓ-બહેનો,

આ શિક્ષણ ક્રાંતિમાં આપણી દીકરીઓ પાછળ ન રહે, આ પણ મારો સંકલ્પ છે. આના માટે કેટલાય મોટા પ્રયાસો કરવામાં આવી રહ્યા છે. સરસ્વતી સાયકલ સ્કીમ, સરસ્વતી વિદ્યા યોજના, અહીંની દીકરીઓને બહુ મદદ કરી રહી છે.

 

સાથીઓ,

આજે ભારતની કોશિશ છે કે દેશના યુવાનોને ડિગ્રીની સાથે જ સાચી દિશા પણ મળે. તેમને એવો એક્સપોઝર મળે, જે લોકલ ટેલેન્ટને ગ્લોબલ અવસરોથી જોડે. ડિઝાઇન, લો, એન્જિનિયરિંગ, મેડિકલ એજ્યુકેશન, આઈટી, ડ્રોન અને રિન્યુએબલ એનર્જી જેવા ક્ષેત્રોમાં આપણી આજની તૈયારી ભારતની વર્કફોર્સને મજબૂત બનાવશે. એટલા માટે પ્રોફેશનલ સંસ્થાઓનો વિસ્તાર બહુ મહત્વપૂર્ણ છે.

સાથીઓ,

આજે NIFT ના અઢારમાં કેમ્પસની આધારશિલા રાખવામાં આવી છે. આ સંસ્થાન અહીંના યુવાનોને ગ્લોબલ એક્સપોઝરથી જોડશે. આઈ.ટી.આઈ. દમણમાં ડ્રોન ટેકનિશિયન જેવા નવા કોર્સીસ પણ શરૂ થયા છે. પીએમ વિશ્વકર્મા અને પીએમ સૂર્ય ઘર મફત વીજળી યોજના, આનાથી જોડાયેલા ટ્રેનિંગ પ્રોગ્રામ્સનો લાભ પણ યુવાનોને મળી રહ્યો છે.

સાથીઓ,

દેશમાં રમતગમતને પણ નવી વિચાકધારા સાથે આગળ વધારવામાં આવી. આપણી રમતો હવે માત્ર મોટા શહેરો કે મોટા સ્ટેડિયમો સુધી સીમિત નથી. ખેલો ઇન્ડિયા જેવા પ્રયાસોએ યુવાનોને પોતાની પ્રતિભા દેખાડવાનો નવો મંચ આપ્યો છે. આનાથી નાના-નાના ક્ષેત્રોમાં નેશનલ લેવલ પર રમત જગતમાં આપણા બાળકો આગળ આવી રહ્યા છે અને આનો પણ લાભ આ ક્ષેત્રને થયો છે. દીવ આજે બીચ સ્પોર્ટ્સનું એક મોટું કેન્દ્ર બનીને ઉભર્યું છે. ઘોઘલા બીચ પર થયેલી બીચ ગેમ્સે પણ દેશનું ધ્યાન આ ક્ષેત્ર તરફ ખેંચ્યું છે. આજે અહીં આધુનિક સ્પોર્ટ્સ ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચર પર સતત કામ થઈ રહ્યું છે. ખાનવેલમાં ફૂટબોલ સેન્ટર અને દમણમાં વોલીબોલ ટ્રેનિંગ સેન્ટર અહીં રમત સંસ્કૃતિને મજબૂત કરી રહ્યા છે.

સાથીઓ,

આજે દેશનું બહુ મોટું ફોકસ ટુરિઝમ પર પણ છે. અમારો પ્રયાસ છે કે ટુરિઝમથી સ્થાનિક કલા અને સંસ્કૃતિને પ્રોત્સાહન મળે. નાના-નાના સ્થાનોને પણ મોટા-મોટા અવસરોથી જોડી શકાય. ‘દેખો અપના દેશ’ જેવા પ્રયાસે લોકોને દેશની વિવિધતા વિશે જાણવા માટે પ્રેરિત કર્યા છે. આજે ભારતમાં હેરિટેજ ટુરિઝમ, ‘બીચ ટુરિઝમ’, ઇકો-ટુરિઝમ, એડવેન્ચર ટુરિઝમ, આ સેક્ટર્સને નવી ઊર્જા મળી રહી છે.

સાથીઓ,

દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવમાં તો પર્યટન પણ એટલી અસીમ સંભાવનાઓવાળું એક ક્ષેત્ર છે. આ ક્ષેત્રને પ્રાકૃતિક સુંદરતાનું અદ્ભુત વરદાન મળ્યું છે. એટલા માટે જ પર્યટનને લઈને દેશે જે નીતિઓ પર કામ કર્યું છે, દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવને તેનો મોટો લાભ મળી રહ્યો છે. 2021 માં અહીં આશરે 6 લાખ ટૂરિસ્ટ આવ્યા હતા. 2025 માં આ સંખ્યા વધીને લગભગ 50 લાખ સુધી પહોંચી ગઈ છે. એટલે કે કેટલાક જ વર્ષોમાં ટુરિઝમ ફૂટફોલમાં આશરે 10 ગણો વધારો થયો છે. આ સારૂં ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચર, સારી સુવિધાઓ, સાફ-સુથરા ‘બીચ’ ના કારણે સંભવ થયું છે. દમણ નાઇટ માર્કેટ, રામસેતુ સી-ફ્રન્ટ, નમોપથ સી-ફ્રન્ટ, નાની દમણ ફોર્ટ, ગંગેશ્વર ટેમ્પલ કોમ્પ્લેક્સ, આવા અનેક સ્થાનો આજે આખા ક્ષેત્રની નવી ઓળખ બનાવી રહ્યા છે.

 

સાથીઓ,

દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવ, આના સપનાઓને પૂરા કરવા માટે આપણે અહીંની ઔદ્યોગિક તાકાતને પણ વધારવાની છે. આ પણ ગર્વની વાત છે કે આ યુનિયન ટેરિટરીએ મેન મેડ ફાઈબર ના ક્ષેત્રમાં પોતાની અલગ ઓળખ બનાવી છે. દાદરા અને નગર હવેલીને નેશનલ મેન મેડ ફાઈબર કેપિટલના રૂપમાં ઓળખવામાં આવે છે. પ્લાસ્ટિક એક્સપોર્ટમાં પણ આ ક્ષેત્ર સતત આગળ વધી રહ્યું છે. સરકારે અહીં ઇન્ડસ્ટ્રીઝ અને MSMEs ને સપોર્ટ આપવા માટે પણ સતત પ્રયાસો કર્યા છે. અહીં MSMEs અને અન્ય ઇન્ડસ્ટ્રીઝને કરોડો રૂપિયાથી વધુની આર્થિક સહાયતા આપવામાં આવી છે. કેન્દ્રશાસિત પ્રદેશના લઘુ ઉદ્યોગો અને કુટીર ઉદ્યોગો માટે નવા અવસરો ખુલી રહ્યા છે. મને વિશ્વાસ છે, આવનારા સમયમાં આ ક્ષેત્ર મેન્યુફેક્ચરિંગનું મોટું હબ બનશે.

સાથીઓ,

જ્યારે વિકાસના વિઝનની સાથે સંવેદનશીલ ગવર્નન્સ જોડાય છે, તો પરિવર્તન તેજ ગતિથી જમીન પર ઉતરે છે. દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવમાં આપણા આ પ્રયાસોનો પ્રભાવ જોઈને સંતોષ થાય છે. મને આ ધરતીના લોકો પર પૂરો વિશ્વાસ છે. અહીંના યુવાનો, અહીંની માતાઓ-બહેનો, અહીંના ખેડૂતો, કારીગરો, શ્રમિકો અને ઉદ્યમીઓ, આવનારા વર્ષોમાં આ વિકાસ યાત્રાને હજુ આગળ લઈ જશે. હું તમને ભરોસો અપાવું છું, તમારા સપનાઓને પૂરા કરવા માટે કેન્દ્ર સરકાર ખભેથી ખભો મિલાવીને ઊભી રહેશે. આ જ વિશ્વાસની સાથે, હું એકવાર ફરી વિકાસ પરિયોજનાઓ માટે તમને ખૂબ-ખૂબ વધામણી આપું છું. મારી સાથે બોલો ભારત માતા કી જય! ભારત માતા કી જય! ભારત માતા કી જય!

ખૂબ-ખૂબ ધન્યવાદ.