Text of PM's remarks at the Launch of "Skill India"

Published By : Admin | July 15, 2015 | 20:33 IST
Skill India mission is not merely to fill pockets but to bring a sense of self-confidence among the poor: PM Modi
In the coming years, India will be biggest supplier of workforce to the world: PM
Targets of the Skill India initiative is that we need to formalize the informally self learned sector: PM
I will form an army of poor, every poor is my soldier, we will win this war against poverty on behalf of their strength: PM Modi
We need to provide a boost to entrepreneurship to India: PM Modi
Matching job creation with industry demand is the key to end unemployment: PM

उपस्थित सभी महानुभाव और इस सभागृह के बाहर भी Technology के माध्‍यम से जुड़़े हुए और यहां उपस्‍थित सभी मेरे युवा मित्रों

आज पूरा विश्‍व ‘विश्‍व युवा कौशल दिवस’ मना रहा है। भारत भी उस अवसर पर एक महत्‍वपूर्ण कदम उठा रहा है। कुछ दिन पूर्व पूरे विश्‍व ने अंतर्राष्‍ट्रीय योगा दिवस मनाया और हमारे देश के लोगों को ताज्‍जुब हुआ कि दुनिया हमारी तरफ, इस तरफ देख रही है क्‍या? हमें कभी विश्‍वास ही नहीं था कि विश्‍व कभी हमारी तरफ भी गर्व के साथ देखता है। विश्‍व योगा दिवस पर हमने अनुभव किया कि आज पूरा विश्‍व भारत के प्रति एक बड़े आदर और गौरव के साथ देखता है।

हमारे यहां शिक्षा के संबंध में बहुत सारी चर्चाएं होती रहती हैं कि जितने बच्‍चे स्‍कूल जाते हैं। Secondary में उससे कम हो जाते हैं, Higher Secondary में उससे कम हो जाते हैं। Colleges में वो संख्‍या और गिर जाती है और toppertopper तो बहुत कम लोग पहुंचते हैं। तो ये सब जाते कहां है और जो जाते हैं उनका क्‍या होता है? जो ऊपर जाएं उनकी तो सब प्रकार की चिन्‍ता होती है। लेकिन जो रह जाए उसकी भी तो होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए। ये हमारा Mission उन लोगों के लिए है, जो रह जाते हैं। और रह कौन जाते हैं? अमीर परिवार का बच्चा नहीं रह जाता। उसको तो कुछ न कुछ मिल जाता है। पैतृक परंपरा से। जो रह जाता है वो गरीब का बच्‍चा होता है, और एक प्रकार से हमने बहुत योजनापूर्वक गरीबी के खिलाफ एक जंग छेड़ी है। और ये जंग जीतना है। और ये गरीबी के खिलाफ जंग जीतने के लिए गरीब की ही मुझे फौज बनानी है। हर गरीब मेरा फौजी है, हर गरीब नौजवान मेरा फौजी है। उन्‍हीं की ताकत से, उन्‍हीं के बलबूते पर ये गरीबी के खिलाफ जंग जीतना है।

आज देश का कोई नौजवान हाथ फैला करके कुछ मांगने के लिए तैयार नहीं है। वो दयनीय जिंदगी जीना नहीं चाहता। वो आत्‍म-सम्‍मान से जीना चाहता है, वो गर्व से जीना चाहता है। skill, कौशल्‍य, सामर्थ्‍य ये सिर्फ जेब में रुपया लाता है, ऐसा नहीं है। वो जीवन में आत्‍मविश्‍वास भर देता है। जीवन में एक नई ताकत भर देता है। उसे भरोसा होता है कि दुनिया में कहीं पर भी जाऊंगा मेरे पास ये ताकत है, मैं अपना पेट भर लूंगा, मैं कभी भीख नहीं मांगूगा। ये सामर्थ्‍य उसके भीतर आता है और इसलिए ये Skill Development ये सिर्फ पेट भरने के लिए जेब भरने का कार्यक्रम नहीं है। ये हमारे गरीब परिवारों में एक नया आत्‍मविश्‍वास भरना और देश में एक नई ऊर्जा लाने का प्रयास है।

हमारे यहां सालों से, सदियों से हमने सुना है। अमीर परिवारों में क्‍या बात होती है वो तो हमें मालूम नहीं है। लेकिन हम जिस समाज, जीवन से आते है। हम अक्सर सुना करते थे हमारे परिवार में अगल-बगल में सब कुछ हमारे पिताजी और हमारे नौजवान साथियों के पिताजी यही कहते थे, अरे भाई कुछ काम सीखो। अपने पैरों पर खड़े हो जाना।

हमारे देश में मध्‍यम वर्ग, निम्‍न मध्‍यम वर्ग, गरीब परिवारों में ये सहज बोला जाता है। 12 से 15 साल का बच्‍चा हुआ तो मां-बाप यही कहते है कि अरे, भई कुछ काम सीखो, अपने पैरों पर खड़े हो जाओ। अगर जो बात हमारे घर-घर में गूंजती है वो सरकार के कानों तक क्‍यों नहीं पहुंचती है और हमने उस आवाज को सुना है, उस दर्द को सुना है। जो हर मां-बाप के मन में रहता है कि बेटा या बेटी कुछ काम सीखे अपने पैरों पर खड़े हो जाएं। एक बार अपने संतान पैरों पर खड़े हो जाएं तो गरीब परिवार के मां-बाप को लगता है कि चलिए जिंदगी धन्‍य हो गई। ये उसके मकसद में रहता है। उसका कोई मकसद कोई बहुत बड़ी बंगला बना करके, बहुत बड़ी गाड़ियां खड़ी करदे वो नहीं रहता है। Skill Mission के द्वारा हमारी कोशिश है, उन सपनों को पूरा करना और इसलिए एक structure way में एक organised way में राज्‍यों को साथ ले करके एक नए सिरे से इस काम को हम आगे बढ़ाऐंगे।

पिछली शताब्‍दी में, दुनिया के अंदर हमने IIT के माध्‍यम से विश्‍व में अपना नाम बनाया है, दुनिया ने हमारी IIT को एक अच्‍छे institution के रूप में स्‍वीकार किया , हमें गर्व है इस बात का लेकिन इस शताब्‍दी में हमारी आवश्‍यकता है ITI की , अगर पिछली शताब्‍दी में IIT ने दुनिया में नाम कमाया, तो इस शताब्‍दी में हमारी छोटी, छोटी IIT की इकाइयां ये दुनिया में नाम कमाएं ये सपना ले करके हम आगे बढ़ना चाहते हैं।

हम कहते हैं कि हमारे पास 65 प्रतिशत जनसंख्‍या 35 वर्ष से कम आयु की है, अगर उसके पास कौशल्य नहीं होगा, उसके पास अगर अवसर नहीं होंगे तो चुनौतियों को कैसे पार कर पाएगा। अगर वो चुनौतियों को पार नहीं कर पाएगा, तो हमारे लिए वो खुद एक चुनौती बन जाएगा और इसलिए भारत के लिए सबसे पहली अगर कोई प्राथमिकता है तो देश के नौजवानों के लिए रोजगार उपलब्‍ध कराना है । रोजगार के योग्‍य नौजवानों को तैयार करना है । रोजगार के योग्‍य नौजवान को तैयार करने के लिए पूरा एक mechanism, एक व्‍यवस्‍था एक structure तैयार करना, इस mission के द्वारा उन सभी आवश्‍यकताओं को पूर्ति करने का प्रयास करना। हम विश्‍व के युवा देश हैं, दुनिया के बहुत देश हैं जहां समृद्धि बहुत है लेकिन लोग नहीं हैं। घर में चार गाड़ी होंगी लेकिन चलाए कौन ये चिन्‍ता का विषय है।

दुनिया को जो workforce की जरूरत पड़ने वाली है हम लिख करके रखें आने वाले दशकों में विश्‍व को सबसे ज्‍यादा workforce अगर कहीं से मिलेगा तो हिन्‍दुस्‍तान से मिलेगा। दुनिया की मांग हमारे सामने स्‍पष्‍ट है कि दुनिया को जरूरत पड़ने वाली है लेकिन क्‍या हम उसके लिए सज्ज हैं क्‍या। हमने तैयारी की है क्‍या। ज्‍यादा से ज्‍यादा अभी हमारा ध्‍यान अभी nursing staff की तरफ रहता है। आप देखिए तो nursing staff के लोग जाते हैं या हमारे जो message का काम करने वाले लोग हैं जो gulf countries में गए हैं उसी के इर्द-गिर्द हमारा चला है। हमें न सिर्फ भारत को लेकिन पूरे विश्‍व की human resource की requirement का mapping करके भारत में अभी से सज्ज करना चाहिए कि चलिए आपको nursing में Para-medical के लोग चाहिएं ये हमारी 25 institution हैं, certified institution हैं, यहां से नौजवानों को ले जाइए आपका काम चलाइए। हमें विश्‍व की जो आवश्‍यकताएं हैं, एक बहुत बड़ा job market है, वो job market को वैज्ञानिक तरीके से अध्‍ययन करके हमने अपने लोगों को तैयार करना है। आज हमारे यहां क्‍या हालत है, हममें से बहुत लोग होंगे जिनको एक बात का अनुभव आया होगा यहां बैठे हुए, कभी न कभी अपने दोस्‍तों को कहा होगा यार देखो तुम्‍हारे यहां कोई अच्‍छा driver मिले तो मेरे पास driver नहीं है। अब ये सवाल का जवाब हमें ढूंढना है कि देश में नौजवान हैं, बेरोजगार हैं, और वो driver के बिना परेशान हैं। क्‍या हम रास्‍ता नहीं खोज सकते क्‍या। और आज फिर क्‍या होता है कि वो परम्‍परा से कहीं पर गाड़ी साफ करते-करते गियर बदलना सीख जाता है और steering पकड़ के तो हम कभी कभी risk ririsk लेके उसे रख लेते हैं। अब हमारी गाड़ी का कोई वो training institute बना करके वो सीखता है और कभी-कभार हमारा risk भी रहता है। क्‍या हम इन लोगों को certify करने की व्‍यवस्‍था कर सकते हैं जो अपने तरीके से परम्‍परागत सीख सके किसी institution में नहीं गए लेकिन कम से कम जो उसको रखता है उसको पता चले कि हां भाई ये इसके पास ये certificate है मतलब कहीं उसका exam हो चुका है। भले अपने आप सीखा हो। आज उम्र भले 35-40 पार कर गया हो लेकिन उसको लगता है के भई मेरे पास कोई authority नहीं है, कोई identity नहीं है, तो ये सरकार ये व्‍यवस्‍था करने जा रही है के भले आप परम्‍परा से सीखे हो लेकिन अगर आप basic norms को पार करते हो तो हम आपको certificate देंगे जो certificate किसी engineer से कम नहीं होगा, मैं विश्‍वास से कहता हूं। अब ये बड़ी कठिनाई है, सब्‍बरवाल बता रहे थे कि हर कोई कहता है भई अनुभव क्‍या है, वो कहता है पहले काम तो दो फिर मैं अनुभव का बताऊं। पहले मुर्गा कि पहले अंडा, इसी का बहस चल रहा है, नौकरी नहीं अनुभव नहीं, अनुभव नहीं इसलिए नौकरी नहीं, ये ही चलता रहता है।

हमारे साथ हमारी हां आवश्‍यकता है entrepreneurship को बल देना। कभी-कभी उद्योग जगत के लोग भी entrepreneur को रखने से डरते हैं, उनको लगता है यार रख लूंगा और सरकार का कोई साहब आके सर गिनेगा और ज्‍यादा हो गए तो मर गया मेरे कारखाने को ताला लग जाएगा, तो रखने को तैयार नहीं है । कानून की जकड़न भी कभी-कभी ऐसी है कि हमारे नौजवानों को जगह नहीं मिलती। हम चाहते हैं कि देश में रोजगारों का अवसर बढ़े। जो entrepreneurship के लिए जाना चाहता है उसको अवसर मिले। जो apprenticeship के लिए जाना चाहता है उसको अवसर मिले। जब तक उसको ये अवसर नहीं मिलेगा अनुभव आएगा नहीं। और इससे हमारी कोशिश है के apprenticeship को कैसे बढ़ावा दें। इस पूरे mission को हमनें skill तक सीमित नहीं रखा। इसके साथ entrepreneurship को जोड़ा। क्‍योंकि हम ये नहीं चाहते कि हर कोई बने तो बस कहीं-कहीं नौकरी खोजता रहे, जरूरी नहीं है। एक ड्राईवर भी entrepreneur बन सकता है। वो भी contract पर गाड़ी लेके sub-contractor बनके गाड़ी चला सकता है। हम उसके अंदर ये skill लाना चाहते हैं। जिस प्रकार से कभी-कभार क्‍या होता है जब तक आप value addition नहीं करते आप कुछ भी नहीं कर सकते। मान लीजिए आपको driving आता है लेकिन आप उसको कहते हो साहब मुझे computer का typing भी आता है। तो तुरन्‍त कहे अच्‍छा-अच्‍छा भई ये भी आता है, तो चलो-चलो फिर जब driving का काम पूरा होगा तो कम्‍प्‍यूटर करते रहना। तो जब उसको पता चले extra quality है तो उसका value बढ़ जाता है। हम चाहते हैं कि skill में multiple activity की ताकत उसकी हो। मैं देख रहा हूं मुझे कोई बता रहा था, बहुत समय हुआ कोई एक नौजवान था, plumber था, तो plumber के नाते जो काम मिलता था वो करता रहता था, लेकिन उसने धीरे-धीरे अपने-आपको yoga trainer के लिए तैयार किया और मजा ये है कि सुबह एक-दो घंटे yoga trainer के लिए जा करके वो ज्‍यादा कमाता था, जबकि plumber से बाद में कम। फिर क्‍या हुआ वो yoga training के साथ अब plumber भी जुड़ गया तो जहां yoga training करता है वो ही लोग को कहें यार देखो उधर plumber की जरूरत है तुम चले जाओ। उसने एक नई चीज सीखी। दोनों चीजें ऐसी हैं कि जिसमें उसको कोई college की degree की जरूरत नहीं थी। वो कमाना शुरू कर दिया। हम चाहते हैं कि देश के अन्‍दर इन बातों को कैसे भरोसा करें। आने वाले दिनों में पूरे विश्‍व में, पूरे विश्‍व में करोड़ों-करोड़ों की तादाद में workforce की requirement है। और अगले दशक में हमारे पास चार-साढ़े चार, पांच करोड़ के करीब लोग surplus होंगे workforce हमारे पास। अगर हम ये mismatch को दूर करते हैं, हम आवश्‍यकता के अनुसार उसको तैयार करते हैं तो हमारे नौजवानों को रोजगार के लिए अवसर मिलेंगे। कभी-कभार क्‍या होता है कि एक area है जहां chemical की industry आ रही है लेकिन वहां पर क्‍या पढ़ाया जाता है तो automobile पढ़ाया जाता है। अब उसको वहां job मिलती नहीं है। हमें mapping करना होगा कि काम किया है, बहुत बड़ी मात्रा में काम हुआ है कि किस इलाके में हमारा क्‍या potential है, क्‍या-क्‍या establishment है, वहां पर किस प्रकार की requirement है। हम उस प्रकार का human resource training करेंगे ताकि उसको walk to work के लिए वो तैयार हो जाएं, उसको अपने घर के पास ही काम-काज मिल जाए तो उसको आर्थिक रूप से ज्‍यादा बोझ नहीं बनता है। नहीं तो होता क्‍या है कि जो चीज को सीखता है उसके 100 किलोमीटर की range में वो काम ही नहीं होता। मुझे याद है जब मैं गुजरात में काम करता था, शुरू-शुरू में मैंने देखा automobile में वो चीजें पढ़ाई जाती थीं जो गाडि़यां बाजार में थीं ही नहीं। हमारी technology थी। खैर बाद में तो course बदल दिए सब, जो trainers थे उनकी भी training की, काफी कुछ बदलाव लाना पड़ा, लेकिन आज भी शायद कई जगह पर बहुत जगह पर ऐसा हो। और इसलिए आवश्‍यक हैं कि हमारी सारी training institutes को dynamic बनाना है। टेक्‍नोलॉजी इतनी तेजी से बदल रही है, अगर हमारी training dynamic नहीं होगी तो हमारा वो व्‍यक्ति relevant नहीं रहेगा। पुराने जमाने के cook को आज oven चलाना नहीं आता है तो घर में वो cook काम नहीं करेगा। उसको आना चाहिए, oven क्‍या, सीखना पड़ता है हर चीज को, additional training आवश्‍यक होती है और इसलिए dynamics बहुत आवश्‍यक है उसके लिए । हम जिस training की ओर बल दे रहे हैं उसकी दिशा में हमारा प्रयास है। कौशल्‍य के संबंध में भारत की पहचान सदियों से रही है। हमने अपनी इस विधा को भुला दिया है। सदियों पहले हमारे यहां, हमारी विशेषताओं को कितना माना जाता था। हमारे कौशल्‍य की ताकत को माना जाता था। हमने फिर से एक बार उसको regain करना है। अगर आज दुनिया में चीन ने अपनी ये पहचान बनाई है कि चीन की एक पहचान बन गई है कि जैसे वो दुनिया की manufacturing factory बन गया है। अगर चीन की पहचान दुनिया की manufacturing factory की है तो हिन्‍दुस्‍तान की पहचान दुनिया की required human resource का capital बनने की बन सकती है। हमारे पास जो ताकत है उस पर हमें बल देना है। हम अपनी ताकत पर जितना हम जोर लगाएंगे हम चीजों को उतना प्राप्‍त कर पाएंगे और इसलिए हमारी कोशिश यह है कि हम mapping करके, human resource की requirement के अनुसार training करें। और हमें पता होना चाहिए। आज, आज भी मैं बताता हूं आज देश में लाखों की तादाद में trained drivers नहीं है। देश को जितने trained drivers चाहिए, उसकी perfect training के लिए जिस प्रकार की आधुनिक व्‍यवस्‍था चाहिए वो व्‍यवस्‍था भी उपलब्‍ध नहीं है। फिर तो वो चलते-चलते सीखता रहता है। कहने का तात्‍पर्य यह है कि बेरोजगारी का कोई कारण नहीं है। अगर हम रोजगार को ध्‍यान में रखते हुए, विकास के मॉडल को ध्‍यान में रखते हुए human resource development के design तैयार करें। अगर इन तीनों को जोड़ करके प्रयास करें।

कभी-कभार क्‍या होता है कि जो इस प्रकार के training institutions हैं उनको ये पता नहीं होता कि दुनिया कैसे बदल रही है। वो अपना पुराने ढर्रे से चलते हैं। आवश्‍यकता है जैसे आज यहां है, यहां पर रोजगार देने वाले लोग भी बैठे है, रोजगार लेने वाले भी मौजूद हैं और रोजगारी के योग्‍य नौजवानों को तैयार करने वाले लोग भी मौजूद हैं और इन सारी चीजों के लिए नीति निर्धारण करने वाले लोग भी मौजूद हैं। इस सभागृह में सब प्रकार के लोग हैं। क्‍यों, ये हमें आदत बनानी होगी। हमारे उद्योग जगत के लोगों के साथ, हमारे technical world के साथ लगातार हमें बैठना पड़ेगा। उनसे पूछना पड़ेगा कि क्‍या लगता है Next ten year किस प्रकार की चीजें आप देख रहे हैं। वो कहते है next ten year ऐसा ऐसा आने वाला है। ऐसी ऐसी संभावना है तो हमें हमारा syllabus अभी से उसी प्रकार ऐसा बनाना चाहिए। हमारी training institution को ऊपर से तैयार करनी चाहिए तो यहां हमारा training के institutions से लोग बाहर निकले और वहां पर जाते ही उनको नई technology आ गई है तो placement मिल जाएगा। तो हमने futuristic vision के साथ हमने यह सोचना होगा कि next ten year के development की design क्‍या है, कौन सी technology काम करने वाली है, किस प्रकार से व्‍यवस्‍था बनाने वाली है, हमारा human resource development according to that होना चाहिए। अगर हमारा human resource development according to that होता है तो मैं नहीं मानता हूं कि बेरोजगारी का कोई कारण बनता है, उसको रोजगार मिलता है। कैसी training से कितना फर्क होता है, मैं अपने अनुभव कुछ शेयर करना चाहता हूं। गुजरात के लोग, मैं गुजरात में था इसलिए वहां का उदाहरण दे रहा हूं। सेना में बहुत कम जाते हैं। अब वो उनका development ही अलग है। लेकिन हमने सोचा है भई क्‍यों न हो हमारे लोग क्‍यों न सेना में जाएं। तो मैंने जरा पूछताछ की, कि क्‍या problem है भई। नहीं बोले जब physical exercise और exam होते हैं उसी में fail हो जाते हैं। तो उनको बोले वो आते हैं तो हमारा उसमें scope है, कोटा है लेकिन हमें मौका नहीं मिलता है। तो मैंने क्‍या किया army के कुछ retired अफसरों को बुलाया। हमने कहा भई हमारे जो tribal belt है वहां के नौजवानों को तुम trained करो कि exam कैसे पास करते हैं। सब हमारा मेल बैठ गया। उन्‍होंने training के camp लगाने शुरू किए। एक-एक महीने के camp लगाते गए और जब भर्ती होने लगी तो करीब जो 5-7 percent लोग हमारे मुश्‍किल से जाते थे। 35-40 percent तक पहुंचा दिया था। training मात्र से। उनको समझाया कि भई ऐसे दौड़ते हैं, सीना ऐसे करते हैं, जरा एक-दो चीजें तुम्‍हें करना आ जाएगी तुम्‍हारी entry हो जाएगी। वो तैयार हो गए। कहने का तात्‍पर्य यह है कि ऐसा नहीं है कि कोई नौजवान जाना नहीं चाहता, लेकिन कोई उसको समझाए तो। चीजें छोटी-छोटी होती हैं लेकिन बहुत बड़ा बदलाव लाती है, बहुत बड़ा बदलाव लाती है। और आज, job market एक इतना बड़ी field है, क्‍योंकि हर किसी को कोई न कोई सेवादार की जरूरत होती है, किसी न किसी की व्‍यवस्‍था हो जाए। मैं जब skill development के लिए मैं काफी दिमाग खपाता रहता था क्‍योंकि मुझे लगता है कि ये और आज से नहीं मैं कई वर्षों से इसमें ज़रा रुचि लेता था। मैंने बहुत साल पहले ये सबरवाल जी को अपने यहां भाषण के लिए बुलाया था। जब मैंने सुना कि ये job market में काफी काम कर रहे है तो मैंने कहा कि भई बताओ तुम क्‍या-क्‍या सोचते हो। बहुत साल पहले की बात है। कहने का तात्‍पर्य यह है कि मुझे पता लग रहा था कि इसका एक अलग महत्‍व है। इस महत्‍व को हमें अनुभव करना चाहिए। एक बार मैंने बहुत छोटी उम्र में दादा धर्माधिकारी को मैं पढ़ता रहता था। आचार्य विनोबा भावे के साथी थे। Gandhian थे और बड़े ही समर्पित Gandhian थे। चिंतक थे। एक बढ़िया उन्‍होंने अपना एक प्रसंग लिखा है। कोई नौजवान उनके पास गया कि दादा कहीं नौकरी मिल जाए, काम मिल जाए तो उन्‍होंने पूछा कि तुम्‍हें क्‍या आता है, बोले कि मैं graduate हूं। तो कहा कि अरे भई मैं तुझे पूछ रहा हूं कि क्‍या आता है, अरे बोला मैं graduate हूं। अरे भई तुम graduate हो मैंने सुन लिया, मुझे समझ आ गया, तुम्‍हें आता क्‍या है। नहीं बोले कि मैं graduate हूं। मुझे कुछ काम तो मिले। चल अरे भई तुझे driving आता है क्‍या, तुम्‍हें बर्तन साफ करना आता है, तुम्‍हें रोटी पकाना आता है क्‍या, कपड़े धोना आता है। क्‍या आता है बताओ न। अरे मैं तो केवल graduate हूं। दादा धर्माधिकारी ने बढ़िया ढंग से एक चीज को लिखा है, अपने स्‍वानुभवों से लिखा है और इसलिए आवश्‍यक है कि उसको जीवन जीने का भी कौशल्‍य इस हस्‍त कौशल्‍य से आता है। जो हाथ से वो कला सीखता है जो ताकत आती है उससे जीवन जीवन्‍य का कौशल्‍य प्राप्‍त होता है और उसको प्राप्‍त कराने की दिशा में हमारा एक प्रयास है। हम उसे entrepreneur भी बनाना चाहते हैं।

अब आप देखिए tourism हमारे देश में develop कर रहा है। जो स्‍थान tourist destination है, वहां tourist guide तैयार करने की कोई institute है क्‍या, नहीं है। वहां पर language courses है क्‍या। अगर आगरा है, tourist destination है तो आगरा के अंदर language courses सबसे ज्‍यादा क्‍यों नहीं होने चाहिए। ताकि वहां पर उनके बच्‍चों को सहज रूप से लैंगवेज आती हो, tourist को लगेगा अपनापन, उसकी भाषा में बात करेगा। ये अगर हमें tourism develop करना है तो हमें हमारे वहां के driver को manners सिखाने से लेकर के language से communicate करने वाले लोगों तक की एक सहज समाज में फौज खड़ी करनी पड़ती है, जिनकी रोजी-रोटी भी उसी से चलती है। हमें जब तक इस प्रकार का टारगेटिड और जो कि देश की ताकत को बढ़ाता है, service sector में भी हम specific चीजों को करें तो बदलाव आता है। आज देश में tourism को बढ़ावा देने के लिए बहुत बड़ी ताकत है, बहुत बड़ी ताकत है। लेकिन उस प्रकार से जो human resource तैयार करने चाहिए, वो human resource करने के लिए हम उतने उदासीन होते हैं। मैं तो इस मत का हूं कि जो-जो tourist destination हो वहां पर हमेशा competition होते रहने चाहिए guide के। who is the best guide । कौन उस शहर का बढ़िया से बढ़िया वर्णन करता है। Competition हो, ईनाम देते रहो, आपको बढ़िया से बढिया, आपको ढेर सारे नौजवान मिलते रहेंगे जो history बताएंगे, archaeology बताएंगे, architecture बताएंगे, व्‍यक्तियों के नाम बताएंगे। सब पचासों सवालों के जवाब दे पाएंगे। धीरे-धीरे potential खड़ा हो जाएगा। कहने का मेरा तात्‍पर्य यह है कि हमारे यहां संभावनाएं बहुत है, मुझे जब मैं skill में काम करता था, मैंने क्‍या किया, हमारे यहां अफसर लोग आए हुए थे। चल रहा था, कैसे करना हे, मैंने कहा कि एक काम करो भई, गर्भाधान से लेकर मृत्‍यु तक, जीवन में कितनी चीजों की आवश्‍यकता होती है, उसकी एक सूची बना लो और जो सूची बनेगी, उतनी skill चाहिए। तो उन अफसरों ने कहा अब हम सोचते हैं। उन्‍होंने सरसरी नज़र में दो-तीन दिन बैठे बनाए तो कोई nine hundred and twenty six चीजें लेकर के आएं। कि वो जन्‍म के बाद उसको ये चाहिए, पढ़ाई के समय ये लगेगा, शादी के समय गुलदस्‍ता लगेगा। सारी चीजों की लिस्‍ट बनाई। कोई nine hundred and twenty six चीजें ऐसे ही सरसरी, वैसे बनाई जाए तो शायद दो हजार निकलेंगी। मैंने कहा कि इन nine hundred and twenty six का skill development है क्‍या तुम्‍हारे पास। लोगों को जरुरत है। ये हमने सोचना होगा। अगर भई गुलदस्‍ते की जरुरत है तो गुलदस्‍ता देना और value addition कैसे होता है, मैं हैरान था, मैं कोई अगर technology नई आए तो देखने का ज़रा शौकीन हूं।

एक बार मैं एक tribal belt में गया। तो वहां मुझे, वहां के आदिवासी बच्‍चियों ने एक गुलदस्‍ता दिया और मैं हैरान था कि उस गुलदस्‍ते के हर फूल पर मेरी तस्‍वीर लगाई हुई थी। मेरे लिए वो surprise था। मुझे लगा कि उन्‍होंने चिपकाया होगा। तो मैंने ज़रा यूं करके देखा तो ऐसा तो नहीं लगा। तो मैंने फिर उनको वापिस बुलाया। मैंने कहा कि ये क्‍या है, ये tribal बच्‍चियों की मैं बात कर रहा हूं। बोले, हमने गुलाब की पत्‍तियों पर laser technique से आपकी फोटो छापी है। अब आप बताइए value addition करने की क्‍या सोच होती है। एक आदिवासी इलाके की गरीब स्‍कूल की बच्‍ची को भी ये दिमाग में आता है कि टैक्‍नोलॉजी का कैसे उपयोग होता है। मतलब work dynamics बदल रहे हैं। हम उसके लिए सज्ज कैसे करे। मुझे तो लगता है कि कोई ये चलाए न कि भई एक घंटे का training , board लगाकर बैठ जाए। क्‍या, mobile phone कैसे उपयोग किया जाए, मैं सिखाउंगा। मैं बताता हूं साहब लोग लग के queue में खड़े हो जाएंगे। बहुत लोग है जो ये तो ढूंढते रहते है कि नया model कौन सा आया है। लेकिन उनको ये पता नहीं होता है कि ये green या red button के सिवाए इसका क्‍या उपयोग होता है। अब किसी के दिमाग में है हां भई मैं ये करूंगा, आप देखिए लोग जाएंगे कि अच्‍छा भई मैं नया लाया हूं अच्‍छा बता कैसे operate करेंगे, क्‍या-क्‍या चीजें होती हैं। सीखने क लिए लोग जाएंगे, उपयोग करेंगे। कहने का तात्‍पर्य यह है कि हमें ये जोड़ना है, हमें कौशल्‍य के साथ जीवन जीने की क्षमता, कौशल्‍य के साथ रोजगार के अवसर, कौशल्‍य के साथ विश्‍व के अंदर भारत का डंका बजाने का प्रयास। इस लक्ष्‍य को लेकर हम इस काम को लेकर के चल रहे हैं मैं राजीव प्रताप रूडी और उनकी पूरी टीम का बधाई देता हूं जिस प्रकार से इस कार्यक्रम की रचना की है। जिस प्रकार से इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाया है। और उसमें देखिए innovation कैसे होते हैं। मुझे बाहर, आपको भी मौका मिले तो देखिए एक बच्‍ची ने ये जो ship के अंदर कंटेनर होते हैं। वो जो rejected माल जो होता है container उसको लगाया है और उसने कंटेनर को ही अंदर school में convert कर दिया है। जो कि discard होने वाला था। वो टूटने के लिए जाने वाला था। देखिए कैसे लोग अपने कौशल्‍य का उपयोग करते हैं। किस प्रकार से चीजों में professionalism आ रहा है। हमें इन चीजों को लाना है और मैं मानता हूं कि भारत के नौजवानों के पास भरपूर क्षमताएं हैं, उसको अवसर मिलने चाहिए। वो किसी भी चुनौतियों को चुनौती देने के लिए सामथर्यवान होता है और अब भारत जो कि demographic dividend के लिए गर्व करता है उस demographic dividend की गारंटी skill में है, trained man power में है और उस trained man power schools पर बल देकर के हम आगे बढ़े, यहीं मेरी शुभकामनाएं हैं और इन नौजवान बच्‍चों को जिन्‍होंने दुनिया में हमारा नाम रोशन किया है। वे अब जा रहे हैं। World Competition में, हम उनको बहुत-बहुत शुभकामनाएं दें।

मैं आशा करता हूं कि हम दुनिया में इस क्षेत्र में हमारी पहचान बनाएं कि हां भई हमारे नौजवानों में कौशल्‍य के अंदर और ये Olympic से कम नहीं होता इनका ये game, इनका ये कौशल्‍य दिखाना। बड़ा महत्‍वपूर्ण होता है। हमारे देश में अभी ध्‍यान नहीं गया क्‍योंकि वो नहीं है, glamour नहीं है। लेकिन धीरे-धीरे आ जाएगा। आज शुरू किया है मैंने। धीरे-धीरे दुनिया का ध्‍यान जाएगा।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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આજે જાહેર કરાયેલા આંકડા સ્પષ્ટપણે દર્શાવે છે કે ભારતની અર્થવ્યવસ્થાનો પાયો કેટલો મજબૂત છે; વર્ષ 2025–26 માં ભારતે 7.7% નો વૃદ્ધિ દર હાંસલ કર્યો, અને અગાઉના ક્વાર્ટરમાં, જે 31 માર્ચે સમાપ્ત થયો હતો, તેમાં પણ ભારતની વૃદ્ધિ 7.8% રહી હતી: PM
આ ગંભીર વૈશ્વિક કટોકટીની વચ્ચે પણ, 1.4 બિલિયન (140 કરોડ) નાગરિકોના સામૂહિક પ્રયાસોએ સુનિશ્ચિત કર્યું છે કે ભારત માત્ર પોતાને ટકાવી રાખતું નથી, પરંતુ સમય કરતાં આગળ રહેવાના તેના પ્રયાસોમાં સફળ પણ થઈ રહ્યું છે: PM
અમારી સરકાર આરોગ્યને કેવી રીતે પ્રાથમિકતા આપે છે તે રાષ્ટ્રીય પરિવાર સ્વાસ્થ્ય સર્વેક્ષણ (NFHS) ના તારણો દ્વારા સ્પષ્ટપણે સાબિત થાય છે; અગાઉ, ભારતમાં મોટાભાગની બાળકની સુવાવડ (ડિલિવરી) હોસ્પિટલોમાં થતી ન હતી; આજે, દેશમાં 90 ટકાથી વધુ તમામ ડિલિવરી હોસ્પિટલોમાં થાય છે: PM
મિશન ઈન્દ્રધનુષના કારણે, ભારતે બાળ રસીકરણમાં મજબૂત પ્રગતિ જોઈ છે; 2014 પહેલા માત્ર 60 ટકા બાળકોનું સંપૂર્ણ રસીકરણ થતું હતું; આજે આ આંકડો વધીને લગભગ 90 ટકા સુધી પહોંચી ગયો છે: PM

ભારત માતા કી જય! ભારત માતા કી જય!

દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવના એડમિનિસ્ટ્રેટર પ્રફુલ્લ ભાઈ પટેલ, સંસદમાં મારા સહયોગી કલાબેન ડેલકર, દમણ મ્યુનિસિપલ કાઉન્સિલના પ્રમુખ દીપિકા ટંડેલ જી, દમણ જિલ્લા પંચાયતના અધ્યક્ષ ધર્મ બાબુ પટેલ, સિલવાસા મ્યુનિસિપલ કાઉન્સિલના અધ્યક્ષ સોમનાથ દેવરેજી, દાદરા નગર હવેલી જિલ્લા પંચાયતના અધ્યક્ષ નિશા ભાવસાર જી, દીવ મ્યુનિસિપલ કાઉન્સિલના અધ્યક્ષ હરીશ કપાયાજી, દીવ જિલ્લા પંચાયતના અધ્યક્ષ કોટિયા રંજીતાબેન અને અહીં વિશાળ સંખ્યામાં પધારેલા મારા વહાલા ભાઈઓ-બહેનો,

તમે જેમ અહીં એકઠા થયા છો, તેવી જ રીતે લક્ષદ્વીપમાં પણ બહુ મોટી સંખ્યામાં લોકો વીડિયોના માધ્યમથી અમારી સાથે જોડાયેલા છે, કારણ કે આજે લક્ષદ્વીપના વિકાસની પણ એક નવી શરૂઆત, એક નવો પ્રકલ્પ, જે આખા લક્ષદ્વીપના જીવનમાં એક ક્રાંતિકારી કામ કરવાનો છે, તેના માટે પણ કેટલીક યોજનાઓનું શિલાન્યાસ અને લોકાર્પણ થયું છે.

સાથીઓ,

કેટલાક વર્ષો પહેલાં, જ્યારે હું તમારી વચ્ચે આવ્યો હતો, તો મેં કહ્યું હતું આ આપણું દમણ ઝડપથી મિની ઇન્ડિયા બની રહ્યું છે અને આજે હું જોઈ રહ્યો છું, ડાબી બાજુ આખું બંગાળ છે અને જમણી બાજુ આખું અસામ છે. દમણ મિની ઇન્ડિયાનું જીવતું-જાગતું ઉદાહરણ બની ચૂક્યું છે. અહીંની વિવિધતા, અલગ-અલગ ક્ષેત્રોના લોકોનું અહીં નિવાસ કરવું, આખા ભારતની સુંદર ઝલક તમારી વચ્ચે આવીને મળી જાય છે. તમે બધા આટલી મોટી સંખ્યામાં અમને આશીર્વાદ આપવા આવ્યા, હું આના માટે આપ સૌનો ખૂબ-ખૂબ ધન્યવાદ કરું છું.

ભાઈઓ-બહેનો,

મને કેટલીય વાર દમણ અને દીવ આવવાનો અવસર મળ્યો છે. દાદરા અને નગર હવેલી પણ આવતો રહું છું અને જ્યારે હું મુખ્યમંત્રી કે પ્રધાનમંત્રી નહોતો, ત્યારે તો બહુ વાર આવતો હતો. પરંતુ હવે જ્યારે હું અહીં આવું છું અને અહીંના સુશાસનને જોઈને, ગવર્નન્સ મોડલને જોઈને બહુ સારું લાગે છે. દર વખતે મને લાગે છે કે ગત વખતની સરખામણીમાં આ ક્ષેત્ર વિકાસની રાહ પર માઈલો આગળ વધી ગયું છે.

સાથીઓ,

દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવએ દાયકાઓથી વિકાસના સપના જોયા હતા. જે સપના પહેલાં જોયા, એ પેઢીઓ તો ચાલી ગઈ. પરંતુ આજે જે પેઢી છે, તે પોતાની આંખોની સામે જોઈ રહી છે કે તેમના માતા-પિતા, દાદા-દાદી જે સપના જોતા હતા, એ આજે સપના પૂરા થતા તમે પોતાની આંખોથી જોઈ રહ્યા છો. આજે પણ અહીં કનેક્ટિવિટી, હેલ્થ, એજ્યુકેશન, ટુરિઝમ અને અર્બન ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચર આનાથી જોડાયેલી અનેક પરિયોજનાઓનું ઉદ્ઘાટન અને શિલાન્યાસ થયું છે. વિકાસના આ કામ દમણ અને આખી યુનિયન ટેરિટરી માટે અહીંના લોકોના જીવનને સરળ બનાવશે. આનાથી યુવાનો માટે નવા અવસરો તૈયાર થશે. આ કામોની પાછળ પ્રફુલ્લ ભાઈ પટેલની દ્રષ્ટિ, તેમની અને તેમની ટીમની મહેનત સાફ-સાફ નજરે પડે છે. હું આના માટે પણ પ્રફુલ્લ ભાઈ અને તેમની આખી ટીમની સરાહના કરું છું. હું બધાને લક્ષદ્વીપના લોકોને, દાદરા-નગર હવેલીના લોકોને અનેક-અનેક શુભકામનાઓ આપું છું, આપ સૌને વધામણી આપું છું.

સાથીઓ,

આજે તમારી વચ્ચે આવ્યો છું, તો એક સુખદ સમાચાર આવ્યા છે. હું તો આજે સવારે દિલ્હીથી નીકળી ચૂક્યો હતો, પરંતુ અત્યારે જે આંકડા સામે આવ્યા છે, જે સમાચાર આવ્યા છે, તે ખરેખર પ્રસન્નતા આપનારા છે અને હું પણ ઈચ્છું છું, આ ખુશી તમારી સાથે પણ વહેંચું. આજે જે આંકડા આવ્યા છે, એ આંકડાઓથી સાફ છે કે ભારતની અર્થવ્યવસ્થાનો પાયો કેટલો મજબૂત છે. વર્ષ 2025-26 માં એટલે કે જે ફાઇનાન્સિયલ યર પાછલું પૂરું થયું, વર્ષ 2025-26 માં ભારતે 7.7 પર્સન્ટનો ગ્રોથ રેટ હાસલ કર્યો છે, 7.7 અને પાછલો ક્વાર્ટર જે 31 માર્ચે ખતમ થયો, તેમાં પણ ભારતનો ગ્રોથ 7.8 પર્સન્ટ રહ્યો છે, 7.8 અને આ દુનિયામાં તેજ ગતિથી આગળ વધનારી મોટી ઇકોનોમી છે. દરેક ભારતીયને ગર્વ થાય, આ છે તેની ગતિ. આજે દેશ જે રિફોર્મ એક્સપ્રેસ પર ચાલી રહ્યો છે, આજે દેશમાં ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચરનો જે આટલો વિકાસ થઈ રહ્યો છે, ગરીબ કલ્યાણને લઈને આટલા મોટા સ્તરે જે કામ ચાલી રહ્યું છે, આ બધા પ્રયાસોનું પરિણામ છે કે આજે દેશ મોટી ઇકોનોમીમાં સૌથી તેજ ગતિથી આગળ વધી રહ્યો છે અને આપણે બધા જાણીએ છીએ, દુનિયા સંકટોમાં ઘેરાયેલી છે, આખી દુનિયાની અર્થવ્યવસ્થા સવાલોના નિશાનો નીચે દબાયેલી પડી છે, વૈશ્વિક સંકટના આ ખરાબમાં ખરાબ દોરમાં પણ 140 કરોડ દેશવાસીઓના સામૂહિક પ્રયાસોથી ભારત પોતાની જાતને સંભાળી તો રાખી જ રહ્યું છે, પરંતુ સાથે-સાથે સૌથી આગળ રહેવામાં પણ તેના પ્રયાસો સફળ થતા જઈ રહ્યા છે. હું દેશવાસીઓને આર્થિક ક્ષેત્રની આ નવી ઊંચાઈને પ્રાપ્ત કરવા માટે ખૂબ-ખૂબ વધામણી આપું છું અને હું દેશને ફરી આશ્વસ્ત કરું છું કે દેશ દુનિયાભરમાં ચાલી રહેલા આ સંકટોનો સામનો કરતા Reform, Perform અને Transform ના રસ્તા પર આવી જ રીતે દ્રઢ સંકલ્પની સાથે, તેજ ગતિથી આગળ વધતો જ રહેશે, આ મારી દેશવાસીઓને ગેરંટી છે.

સાથીઓ,

આજે આપણા માટે વિકાસ જેટલો જરૂરી છે, એટલું જ મહત્વનું છે કે આપણું વિકાસનું મોડલ સસ્ટેનેબલ હોય. આજે વર્લ્ડ એન્વાયરમેન્ટ ડેના દિવસે આપણા અહીં યુનિયન ટેરિટરી સ્ટેટ આ સંકલ્પને સાકાર કરી રહ્યું છે. આજે એક તરફ અહીં હજારો કરોડની વિકાસ પરિયોજનાઓનું લોકાર્પણ અને શિલાન્યાસ થયું છે. સાથે જ અહીં આશરે એક લાખ એક વૃક્ષ માતાના નામે, એક લાખ છોડ પણ વાવવામાં આવી રહ્યા છે. મને ગર્વ છે કે એક એવો કેન્દ્રશાસિત પ્રદેશ છે, જેણે સરકારી ઈમારતોમાં શત પ્રતિશત, 100 પર્સન્ટ સૌર ઊર્જાના ઉપયોગની ઉપલબ્ધિ હાંસલ કરી છે. આજે દીવમાં દિવસમાં જેટલી વીજળીની ડિમાન્ડ હોય છે, તે સોલર પાવરથી જ પૂરી થઈ રહી છે અને આપણે તો આને હજુ આગળ લઈને જવાનું છે. ઘરોમાં પણ સોલર ઊર્જાથી વીજળી મળે, એટલું જ નહીં વધારાની વીજળીથી પરિવારની આવક પણ થાય, તેના માટે રૂફટોપ સોલર પ્લાન્ટ્સ લગાવવાની પહેલ શરૂ થઈ છે. હું આ ઉપલબ્ધિઓ માટે પણ આપ સૌની સરાહના કરું છું.

સાથીઓ,

સાથે-સાથે મને એ પણ જણાવવામાં આવ્યું છે, દમણના લોકો આ દિવસોમાં અહીં સ્વચ્છતા અભિયાન પણ ચલાવી રહ્યા છે. આ દર્શાવે છે કે સ્વચ્છતા કઈ રીતે દમણના જનજીવનમાં સંસ્કાર બની ચૂકી છે અને આ સંસ્કાર સ્વચ્છતામાં નજરે પડી રહ્યા છે. હું આ જનભાગીદારીના તમારા પ્રયાસો માટે દમણના લોકોનું અભિનંદન કરું છું.

સાથીઓ,

દાદરા નગર હવેલી, દમણ અને દીવ, આ સંઘ શાસિત પ્રદેશ હોવાની સાથે જ ભારતની ઓળખ અને વિરાસત પણ છે. એટલા માટે, આના વિકાસ માટે અમારા લક્ષ્ય પણ સાધારણ નથી. મને યાદ છે, જ્યારે હું ગયા વર્ષે સિલવાસા આવ્યો હતો, ત્યારે મેં તમને સિંગાપોરનું ઉદાહરણ આપ્યું હતું. મેં કહ્યું હતું કે એક સમયે સિંગાપોર માછીમારોનું નાનું એવું ગામ હતું. પરંતુ, સિંગાપોરના લોકોએ એક સપનું જોયું, ત્યાંના લોકોએ મોટું લક્ષ્ય નક્કી કર્યું અને આજે એ જ સિંગાપોર દુનિયાનું સૌથી મોટું બિઝનેસ હબ બની ચૂક્યું છે. આજે દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવ પણ એ જ સપનું જોઈ રહ્યા છે. આ નમો એરપોર્ટ, દમણગંગા નદી પર બનનારો આઇકોનિક બ્રિજ, ‘બીચ ફ્રન્ટ’ તેના પર બનનારો કન્વેન્શન સેન્ટર, આવા બધા ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચર દ્વારા આપણે ભવિષ્યના મોટા સંકલ્પોનો પાયો નાખી રહ્યા છીએ. આ પ્રોજેક્ટ્સ દ્વારા લોકોની અવરજવર સરળ થશે. અહીં બિઝનેસ માટે નવી સંભાવનાઓ બનશે. દમણના બંને કિનારા પર વિકાસની ગતિ હજુ વધુ તેજ થશે.

સાથીઓ,

અહીં સગવડતાના અર્થતંત્રથી જોડાયેલા અવસરો વધશે અને સાથે જ ટ્રાન્સપોર્ટ નગર જેવી સુવિધાથી વ્યાપાર, લોજિસ્ટિક્સને પણ નવી ગતિ મળશે.

સાથીઓ,

આ ક્ષેત્રમાં બ્લુ ઇકોનોમી માટે અમે જે વિઝન તૈયાર કર્યું છે, તે વિઝન પણ હાઇટેક ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચરની તાકાતથી જ સાકાર થશે. એટલા માટે જ, લક્ષદ્વીપના કલપેની અને કદમત દ્વીપોમાં પણ આજે જ આધુનિક પોર્ટ્સની આધારશિલા રાખવામાં આવી રહી છે. આ તમામ પ્રયાસો બ્લુ ઇકોનોમીમાં દેશની તાકાતને વધારશે અને જેવું મેં કહ્યું આ લક્ષદ્વીપનું ભાગ્ય બદલનારા પગલાં છે.

સાથીઓ,

ભાજપની સરકારમાં, એનડીએની અમારી સરકારમાં અમારા માટે વિકાસની પહેલી કસોટી છે- ગરીબ, વંચિત, આદિવાસી અને મિડલ ક્લાસના જીવનમાં બદલાવ! આના માટે, હેલ્થ સેક્ટર અમારી બહુ મોટી પ્રાથમિકતા છે. વિતેલા વર્ષોમાં દેશ હેલ્થ કેર માટે હોલિસ્ટિક વિઝન લઈને આગળ વધ્યો. અમે ઈલાજથી જોડાયેલી દરેક ચિંતાનું સમાધાન કર્યું છે. આજે ગરીબમાં ગરીબ પાસે પણ આયુષ્માન કાર્ડની સુવિધા છે. તેમની પાસે 5 લાખ રૂપિયા સુધીના મફત ઈલાજનો ભરોસો છે. બીમારીની સમયસર તપાસ થઈ શકે, તેના માટે, પ્રધાનમંત્રી આયુષ્માન આરોગ્ય મંદિરોની વ્યવસ્થા છે. જન ઔષધિ કેન્દ્રો દ્વારા સસ્તી દવાઓ પણ મળી રહી છે. આ સુવિધાઓ હજુ બહેતર થાય, હજુ આધુનિક થાય, તેના માટે આયુષ્માન ભારત ડિજિટલ મિશન દ્વારા આજે સ્વાસ્થ્ય સેવાઓને ટેકનોલોજીથી જોડવામાં આવી રહી છે.

સાથીઓ,

આયુષ્માન કાર્ડ અને જન ઔષધિ કેન્દ્રોથી જ ગરીબ અને મધ્યમ વર્ગના આશરે સવા બે લાખ કરોડ રૂપિયા ખર્ચ થતા બચ્યા છે.

ભાઈઓ-બહેનો,

કેન્દ્ર સરકારની નીતિઓનો બહુ લાભ આ ક્ષેત્રના લોકોને પણ થયો છે. એક સમયે અહીં ઈલાજની સારી સુવિધાઓનો પણ અભાવ હતો. અહીં મેડિકલ કોલેજ સુધી નહોતી. પરંતુ, હવે મેડિકલ કોલેજ પણ છે અને તેમાં પોસ્ટ ગ્રેજ્યુએશનનું ભણતર પણ શરૂ થઈ ગયું છે. સિલવાસાની નમો હોસ્પિટલ ગયા વર્ષથી હજારો લોકોની સેવા કરી રહી છે. આજે દમણમાં પણ નમો હોસ્પિટલનું લોકાર્પણ થયું છે. આ ક્ષેત્રના લોકોને પણ હવે હજુ બહેતર હેલ્થ કેરનો લાભ મળશે.

સાથીઓ,

અમારી સરકાર કેવી રીતે સ્વાસ્થ્યને પ્રાથમિકતા આપતા ચાલી રહી છે, આનું એક પ્રમાણ નેશનલ ફેમિલી હેલ્થ સર્વેના પરિણામોમાં પણ મળે છે. એક સમયે ભારતમાં મોટાભાગના બાળકોની ડિલિવરી હોસ્પિટલમાં નહોતી થતી. આજે દેશમાં 90 ટકાથી વધુ ડિલિવરી હોસ્પિટલોમાં થઈ રહી છે, જેના કારણે માતા મૃત્યુ કે નવજાતની મૃત્યુમાં બહુ મોટી અટકાવ આવી છે. મિશન ઇન્દ્રધનુષના કારણે બાળકોના રસીકરણના ક્ષેત્રમાં પણ ભારતે સારી પ્રગતિ કરી છે. 2014 પહેલાં માત્ર 60 ટકા બાળકોનું પૂર્ણ રસીકરણ થઈ શકતું હતું. આજે આ આંકડો વધીને આશરે 90 ટકા સુધી પહોંચી ગયો છે. સ્વાસ્થ્ય સુરક્ષાના ક્ષેત્રમાં પણ મોટો બદલાવ આવ્યો છે. 2014 પહેલાં 30 ટકાથી પણ ઓછા પરિવારો સ્વાસ્થ્ય વીમા યોજનાથી જોડાયેલા હતા. આજે આયુષ્માન ભારતે, એ આંકડાઓને પણ બદલી દીધા છે. હવે 60 ટકાથી વધુ પરિવારોને આ સુરક્ષા મળી રહી છે.

સાથીઓ,

સ્વાસ્થ્યના ક્ષેત્રમાં સરકારના આ પ્રયાસોનો લાભ જો કોઈને સૌથી વધારે મળ્યો છે, તો તે મારા દેશની નારી શક્તિ છે.

સાથીઓ,

પહેલાં આ ક્ષેત્રના યુવાનોને હાયર એજ્યુકેશન માટે પણ બહાર જવું પડતું હતું. પરંતુ, આજે અહીં નેશનલ લેવલની, એક નહીં કેટલીય ઇન્સ્ટિટ્યૂટ બની ચૂકી છે. પાછલા વર્ષોમાં અહીં શાળાઓની નવી બિલ્ડિંગ્સ બની છે, શાળાઓમાં સ્માર્ટ ક્લાસરૂમ પણ બન્યા છે. 40 હજારથી વધુ વિદ્યાર્થીઓને આનો લાભ મળી રહ્યો છે. મને ખુશી છે કે કેન્દ્રશાસિત પ્રદેશ ધીમે-ધીમે એજ્યુકેશનના ક્ષેત્રમાં આગળ આવી રહ્યો છે. સ્વામી વિવેકાનંદ એજ્યુકેશન હબ જેવા કેટલાય નિર્માણ અહીં થઈ રહ્યા છે.

ભાઈઓ-બહેનો,

આ શિક્ષણ ક્રાંતિમાં આપણી દીકરીઓ પાછળ ન રહે, આ પણ મારો સંકલ્પ છે. આના માટે કેટલાય મોટા પ્રયાસો કરવામાં આવી રહ્યા છે. સરસ્વતી સાયકલ સ્કીમ, સરસ્વતી વિદ્યા યોજના, અહીંની દીકરીઓને બહુ મદદ કરી રહી છે.

સાથીઓ,

આજે ભારતની કોશિશ છે કે દેશના યુવાનોને ડિગ્રીની સાથે જ સાચી દિશા પણ મળે. તેમને એવો એક્સપોઝર મળે, જે લોકલ ટેલેન્ટને ગ્લોબલ અવસરોથી જોડે. ડિઝાઇન, લો, એન્જિનિયરિંગ, મેડિકલ એજ્યુકેશન, આઈટી, ડ્રોન અને રિન્યુએબલ એનર્જી જેવા ક્ષેત્રોમાં આપણી આજની તૈયારી ભારતની વર્કફોર્સને મજબૂત બનાવશે. એટલા માટે પ્રોફેશનલ સંસ્થાઓનો વિસ્તાર બહુ મહત્વપૂર્ણ છે.

સાથીઓ,

આજે NIFT ના અઢારમાં કેમ્પસની આધારશિલા રાખવામાં આવી છે. આ સંસ્થાન અહીંના યુવાનોને ગ્લોબલ એક્સપોઝરથી જોડશે. આઈ.ટી.આઈ. દમણમાં ડ્રોન ટેકનિશિયન જેવા નવા કોર્સીસ પણ શરૂ થયા છે. પીએમ વિશ્વકર્મા અને પીએમ સૂર્ય ઘર મફત વીજળી યોજના, આનાથી જોડાયેલા ટ્રેનિંગ પ્રોગ્રામ્સનો લાભ પણ યુવાનોને મળી રહ્યો છે.

સાથીઓ,

દેશમાં રમતગમતને પણ નવી વિચાકધારા સાથે આગળ વધારવામાં આવી. આપણી રમતો હવે માત્ર મોટા શહેરો કે મોટા સ્ટેડિયમો સુધી સીમિત નથી. ખેલો ઇન્ડિયા જેવા પ્રયાસોએ યુવાનોને પોતાની પ્રતિભા દેખાડવાનો નવો મંચ આપ્યો છે. આનાથી નાના-નાના ક્ષેત્રોમાં નેશનલ લેવલ પર રમત જગતમાં આપણા બાળકો આગળ આવી રહ્યા છે અને આનો પણ લાભ આ ક્ષેત્રને થયો છે. દીવ આજે બીચ સ્પોર્ટ્સનું એક મોટું કેન્દ્ર બનીને ઉભર્યું છે. ઘોઘલા બીચ પર થયેલી બીચ ગેમ્સે પણ દેશનું ધ્યાન આ ક્ષેત્ર તરફ ખેંચ્યું છે. આજે અહીં આધુનિક સ્પોર્ટ્સ ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચર પર સતત કામ થઈ રહ્યું છે. ખાનવેલમાં ફૂટબોલ સેન્ટર અને દમણમાં વોલીબોલ ટ્રેનિંગ સેન્ટર અહીં રમત સંસ્કૃતિને મજબૂત કરી રહ્યા છે.

સાથીઓ,

આજે દેશનું બહુ મોટું ફોકસ ટુરિઝમ પર પણ છે. અમારો પ્રયાસ છે કે ટુરિઝમથી સ્થાનિક કલા અને સંસ્કૃતિને પ્રોત્સાહન મળે. નાના-નાના સ્થાનોને પણ મોટા-મોટા અવસરોથી જોડી શકાય. ‘દેખો અપના દેશ’ જેવા પ્રયાસે લોકોને દેશની વિવિધતા વિશે જાણવા માટે પ્રેરિત કર્યા છે. આજે ભારતમાં હેરિટેજ ટુરિઝમ, ‘બીચ ટુરિઝમ’, ઇકો-ટુરિઝમ, એડવેન્ચર ટુરિઝમ, આ સેક્ટર્સને નવી ઊર્જા મળી રહી છે.

સાથીઓ,

દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવમાં તો પર્યટન પણ એટલી અસીમ સંભાવનાઓવાળું એક ક્ષેત્ર છે. આ ક્ષેત્રને પ્રાકૃતિક સુંદરતાનું અદ્ભુત વરદાન મળ્યું છે. એટલા માટે જ પર્યટનને લઈને દેશે જે નીતિઓ પર કામ કર્યું છે, દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવને તેનો મોટો લાભ મળી રહ્યો છે. 2021 માં અહીં આશરે 6 લાખ ટૂરિસ્ટ આવ્યા હતા. 2025 માં આ સંખ્યા વધીને લગભગ 50 લાખ સુધી પહોંચી ગઈ છે. એટલે કે કેટલાક જ વર્ષોમાં ટુરિઝમ ફૂટફોલમાં આશરે 10 ગણો વધારો થયો છે. આ સારૂં ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચર, સારી સુવિધાઓ, સાફ-સુથરા ‘બીચ’ ના કારણે સંભવ થયું છે. દમણ નાઇટ માર્કેટ, રામસેતુ સી-ફ્રન્ટ, નમોપથ સી-ફ્રન્ટ, નાની દમણ ફોર્ટ, ગંગેશ્વર ટેમ્પલ કોમ્પ્લેક્સ, આવા અનેક સ્થાનો આજે આખા ક્ષેત્રની નવી ઓળખ બનાવી રહ્યા છે.

સાથીઓ,

દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવ, આના સપનાઓને પૂરા કરવા માટે આપણે અહીંની ઔદ્યોગિક તાકાતને પણ વધારવાની છે. આ પણ ગર્વની વાત છે કે આ યુનિયન ટેરિટરીએ મેન મેડ ફાઈબર ના ક્ષેત્રમાં પોતાની અલગ ઓળખ બનાવી છે. દાદરા અને નગર હવેલીને નેશનલ મેન મેડ ફાઈબર કેપિટલના રૂપમાં ઓળખવામાં આવે છે. પ્લાસ્ટિક એક્સપોર્ટમાં પણ આ ક્ષેત્ર સતત આગળ વધી રહ્યું છે. સરકારે અહીં ઇન્ડસ્ટ્રીઝ અને MSMEs ને સપોર્ટ આપવા માટે પણ સતત પ્રયાસો કર્યા છે. અહીં MSMEs અને અન્ય ઇન્ડસ્ટ્રીઝને કરોડો રૂપિયાથી વધુની આર્થિક સહાયતા આપવામાં આવી છે. કેન્દ્રશાસિત પ્રદેશના લઘુ ઉદ્યોગો અને કુટીર ઉદ્યોગો માટે નવા અવસરો ખુલી રહ્યા છે. મને વિશ્વાસ છે, આવનારા સમયમાં આ ક્ષેત્ર મેન્યુફેક્ચરિંગનું મોટું હબ બનશે.

સાથીઓ,

જ્યારે વિકાસના વિઝનની સાથે સંવેદનશીલ ગવર્નન્સ જોડાય છે, તો પરિવર્તન તેજ ગતિથી જમીન પર ઉતરે છે. દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવમાં આપણા આ પ્રયાસોનો પ્રભાવ જોઈને સંતોષ થાય છે. મને આ ધરતીના લોકો પર પૂરો વિશ્વાસ છે. અહીંના યુવાનો, અહીંની માતાઓ-બહેનો, અહીંના ખેડૂતો, કારીગરો, શ્રમિકો અને ઉદ્યમીઓ, આવનારા વર્ષોમાં આ વિકાસ યાત્રાને હજુ આગળ લઈ જશે. હું તમને ભરોસો અપાવું છું, તમારા સપનાઓને પૂરા કરવા માટે કેન્દ્ર સરકાર ખભેથી ખભો મિલાવીને ઊભી રહેશે. આ જ વિશ્વાસની સાથે, હું એકવાર ફરી વિકાસ પરિયોજનાઓ માટે તમને ખૂબ-ખૂબ વધામણી આપું છું. મારી સાથે બોલો ભારત માતા કી જય! ભારત માતા કી જય! ભારત માતા કી જય!

ખૂબ-ખૂબ ધન્યવાદ.