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Skill India mission is not merely to fill pockets but to bring a sense of self-confidence among the poor: PM Modi
In the coming years, India will be biggest supplier of workforce to the world: PM
Targets of the Skill India initiative is that we need to formalize the informally self learned sector: PM
I will form an army of poor, every poor is my soldier, we will win this war against poverty on behalf of their strength: PM Modi
We need to provide a boost to entrepreneurship to India: PM Modi
Matching job creation with industry demand is the key to end unemployment: PM

उपस्थित सभी महानुभाव और इस सभागृह के बाहर भी Technology के माध्‍यम से जुड़़े हुए और यहां उपस्‍थित सभी मेरे युवा मित्रों

आज पूरा विश्‍व ‘विश्‍व युवा कौशल दिवस’ मना रहा है। भारत भी उस अवसर पर एक महत्‍वपूर्ण कदम उठा रहा है। कुछ दिन पूर्व पूरे विश्‍व ने अंतर्राष्‍ट्रीय योगा दिवस मनाया और हमारे देश के लोगों को ताज्‍जुब हुआ कि दुनिया हमारी तरफ, इस तरफ देख रही है क्‍या? हमें कभी विश्‍वास ही नहीं था कि विश्‍व कभी हमारी तरफ भी गर्व के साथ देखता है। विश्‍व योगा दिवस पर हमने अनुभव किया कि आज पूरा विश्‍व भारत के प्रति एक बड़े आदर और गौरव के साथ देखता है।

हमारे यहां शिक्षा के संबंध में बहुत सारी चर्चाएं होती रहती हैं कि जितने बच्‍चे स्‍कूल जाते हैं। Secondary में उससे कम हो जाते हैं, Higher Secondary में उससे कम हो जाते हैं। Colleges में वो संख्‍या और गिर जाती है और toppertopper तो बहुत कम लोग पहुंचते हैं। तो ये सब जाते कहां है और जो जाते हैं उनका क्‍या होता है? जो ऊपर जाएं उनकी तो सब प्रकार की चिन्‍ता होती है। लेकिन जो रह जाए उसकी भी तो होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए। ये हमारा Mission उन लोगों के लिए है, जो रह जाते हैं। और रह कौन जाते हैं? अमीर परिवार का बच्चा नहीं रह जाता। उसको तो कुछ न कुछ मिल जाता है। पैतृक परंपरा से। जो रह जाता है वो गरीब का बच्‍चा होता है, और एक प्रकार से हमने बहुत योजनापूर्वक गरीबी के खिलाफ एक जंग छेड़ी है। और ये जंग जीतना है। और ये गरीबी के खिलाफ जंग जीतने के लिए गरीब की ही मुझे फौज बनानी है। हर गरीब मेरा फौजी है, हर गरीब नौजवान मेरा फौजी है। उन्‍हीं की ताकत से, उन्‍हीं के बलबूते पर ये गरीबी के खिलाफ जंग जीतना है।

आज देश का कोई नौजवान हाथ फैला करके कुछ मांगने के लिए तैयार नहीं है। वो दयनीय जिंदगी जीना नहीं चाहता। वो आत्‍म-सम्‍मान से जीना चाहता है, वो गर्व से जीना चाहता है। skill, कौशल्‍य, सामर्थ्‍य ये सिर्फ जेब में रुपया लाता है, ऐसा नहीं है। वो जीवन में आत्‍मविश्‍वास भर देता है। जीवन में एक नई ताकत भर देता है। उसे भरोसा होता है कि दुनिया में कहीं पर भी जाऊंगा मेरे पास ये ताकत है, मैं अपना पेट भर लूंगा, मैं कभी भीख नहीं मांगूगा। ये सामर्थ्‍य उसके भीतर आता है और इसलिए ये Skill Development ये सिर्फ पेट भरने के लिए जेब भरने का कार्यक्रम नहीं है। ये हमारे गरीब परिवारों में एक नया आत्‍मविश्‍वास भरना और देश में एक नई ऊर्जा लाने का प्रयास है।

हमारे यहां सालों से, सदियों से हमने सुना है। अमीर परिवारों में क्‍या बात होती है वो तो हमें मालूम नहीं है। लेकिन हम जिस समाज, जीवन से आते है। हम अक्सर सुना करते थे हमारे परिवार में अगल-बगल में सब कुछ हमारे पिताजी और हमारे नौजवान साथियों के पिताजी यही कहते थे, अरे भाई कुछ काम सीखो। अपने पैरों पर खड़े हो जाना।

हमारे देश में मध्‍यम वर्ग, निम्‍न मध्‍यम वर्ग, गरीब परिवारों में ये सहज बोला जाता है। 12 से 15 साल का बच्‍चा हुआ तो मां-बाप यही कहते है कि अरे, भई कुछ काम सीखो, अपने पैरों पर खड़े हो जाओ। अगर जो बात हमारे घर-घर में गूंजती है वो सरकार के कानों तक क्‍यों नहीं पहुंचती है और हमने उस आवाज को सुना है, उस दर्द को सुना है। जो हर मां-बाप के मन में रहता है कि बेटा या बेटी कुछ काम सीखे अपने पैरों पर खड़े हो जाएं। एक बार अपने संतान पैरों पर खड़े हो जाएं तो गरीब परिवार के मां-बाप को लगता है कि चलिए जिंदगी धन्‍य हो गई। ये उसके मकसद में रहता है। उसका कोई मकसद कोई बहुत बड़ी बंगला बना करके, बहुत बड़ी गाड़ियां खड़ी करदे वो नहीं रहता है। Skill Mission के द्वारा हमारी कोशिश है, उन सपनों को पूरा करना और इसलिए एक structure way में एक organised way में राज्‍यों को साथ ले करके एक नए सिरे से इस काम को हम आगे बढ़ाऐंगे।

पिछली शताब्‍दी में, दुनिया के अंदर हमने IIT के माध्‍यम से विश्‍व में अपना नाम बनाया है, दुनिया ने हमारी IIT को एक अच्‍छे institution के रूप में स्‍वीकार किया , हमें गर्व है इस बात का लेकिन इस शताब्‍दी में हमारी आवश्‍यकता है ITI की , अगर पिछली शताब्‍दी में IIT ने दुनिया में नाम कमाया, तो इस शताब्‍दी में हमारी छोटी, छोटी IIT की इकाइयां ये दुनिया में नाम कमाएं ये सपना ले करके हम आगे बढ़ना चाहते हैं।

हम कहते हैं कि हमारे पास 65 प्रतिशत जनसंख्‍या 35 वर्ष से कम आयु की है, अगर उसके पास कौशल्य नहीं होगा, उसके पास अगर अवसर नहीं होंगे तो चुनौतियों को कैसे पार कर पाएगा। अगर वो चुनौतियों को पार नहीं कर पाएगा, तो हमारे लिए वो खुद एक चुनौती बन जाएगा और इसलिए भारत के लिए सबसे पहली अगर कोई प्राथमिकता है तो देश के नौजवानों के लिए रोजगार उपलब्‍ध कराना है । रोजगार के योग्‍य नौजवानों को तैयार करना है । रोजगार के योग्‍य नौजवान को तैयार करने के लिए पूरा एक mechanism, एक व्‍यवस्‍था एक structure तैयार करना, इस mission के द्वारा उन सभी आवश्‍यकताओं को पूर्ति करने का प्रयास करना। हम विश्‍व के युवा देश हैं, दुनिया के बहुत देश हैं जहां समृद्धि बहुत है लेकिन लोग नहीं हैं। घर में चार गाड़ी होंगी लेकिन चलाए कौन ये चिन्‍ता का विषय है।

दुनिया को जो workforce की जरूरत पड़ने वाली है हम लिख करके रखें आने वाले दशकों में विश्‍व को सबसे ज्‍यादा workforce अगर कहीं से मिलेगा तो हिन्‍दुस्‍तान से मिलेगा। दुनिया की मांग हमारे सामने स्‍पष्‍ट है कि दुनिया को जरूरत पड़ने वाली है लेकिन क्‍या हम उसके लिए सज्ज हैं क्‍या। हमने तैयारी की है क्‍या। ज्‍यादा से ज्‍यादा अभी हमारा ध्‍यान अभी nursing staff की तरफ रहता है। आप देखिए तो nursing staff के लोग जाते हैं या हमारे जो message का काम करने वाले लोग हैं जो gulf countries में गए हैं उसी के इर्द-गिर्द हमारा चला है। हमें न सिर्फ भारत को लेकिन पूरे विश्‍व की human resource की requirement का mapping करके भारत में अभी से सज्ज करना चाहिए कि चलिए आपको nursing में Para-medical के लोग चाहिएं ये हमारी 25 institution हैं, certified institution हैं, यहां से नौजवानों को ले जाइए आपका काम चलाइए। हमें विश्‍व की जो आवश्‍यकताएं हैं, एक बहुत बड़ा job market है, वो job market को वैज्ञानिक तरीके से अध्‍ययन करके हमने अपने लोगों को तैयार करना है। आज हमारे यहां क्‍या हालत है, हममें से बहुत लोग होंगे जिनको एक बात का अनुभव आया होगा यहां बैठे हुए, कभी न कभी अपने दोस्‍तों को कहा होगा यार देखो तुम्‍हारे यहां कोई अच्‍छा driver मिले तो मेरे पास driver नहीं है। अब ये सवाल का जवाब हमें ढूंढना है कि देश में नौजवान हैं, बेरोजगार हैं, और वो driver के बिना परेशान हैं। क्‍या हम रास्‍ता नहीं खोज सकते क्‍या। और आज फिर क्‍या होता है कि वो परम्‍परा से कहीं पर गाड़ी साफ करते-करते गियर बदलना सीख जाता है और steering पकड़ के तो हम कभी कभी risk ririsk लेके उसे रख लेते हैं। अब हमारी गाड़ी का कोई वो training institute बना करके वो सीखता है और कभी-कभार हमारा risk भी रहता है। क्‍या हम इन लोगों को certify करने की व्‍यवस्‍था कर सकते हैं जो अपने तरीके से परम्‍परागत सीख सके किसी institution में नहीं गए लेकिन कम से कम जो उसको रखता है उसको पता चले कि हां भाई ये इसके पास ये certificate है मतलब कहीं उसका exam हो चुका है। भले अपने आप सीखा हो। आज उम्र भले 35-40 पार कर गया हो लेकिन उसको लगता है के भई मेरे पास कोई authority नहीं है, कोई identity नहीं है, तो ये सरकार ये व्‍यवस्‍था करने जा रही है के भले आप परम्‍परा से सीखे हो लेकिन अगर आप basic norms को पार करते हो तो हम आपको certificate देंगे जो certificate किसी engineer से कम नहीं होगा, मैं विश्‍वास से कहता हूं। अब ये बड़ी कठिनाई है, सब्‍बरवाल बता रहे थे कि हर कोई कहता है भई अनुभव क्‍या है, वो कहता है पहले काम तो दो फिर मैं अनुभव का बताऊं। पहले मुर्गा कि पहले अंडा, इसी का बहस चल रहा है, नौकरी नहीं अनुभव नहीं, अनुभव नहीं इसलिए नौकरी नहीं, ये ही चलता रहता है।

हमारे साथ हमारी हां आवश्‍यकता है entrepreneurship को बल देना। कभी-कभी उद्योग जगत के लोग भी entrepreneur को रखने से डरते हैं, उनको लगता है यार रख लूंगा और सरकार का कोई साहब आके सर गिनेगा और ज्‍यादा हो गए तो मर गया मेरे कारखाने को ताला लग जाएगा, तो रखने को तैयार नहीं है । कानून की जकड़न भी कभी-कभी ऐसी है कि हमारे नौजवानों को जगह नहीं मिलती। हम चाहते हैं कि देश में रोजगारों का अवसर बढ़े। जो entrepreneurship के लिए जाना चाहता है उसको अवसर मिले। जो apprenticeship के लिए जाना चाहता है उसको अवसर मिले। जब तक उसको ये अवसर नहीं मिलेगा अनुभव आएगा नहीं। और इससे हमारी कोशिश है के apprenticeship को कैसे बढ़ावा दें। इस पूरे mission को हमनें skill तक सीमित नहीं रखा। इसके साथ entrepreneurship को जोड़ा। क्‍योंकि हम ये नहीं चाहते कि हर कोई बने तो बस कहीं-कहीं नौकरी खोजता रहे, जरूरी नहीं है। एक ड्राईवर भी entrepreneur बन सकता है। वो भी contract पर गाड़ी लेके sub-contractor बनके गाड़ी चला सकता है। हम उसके अंदर ये skill लाना चाहते हैं। जिस प्रकार से कभी-कभार क्‍या होता है जब तक आप value addition नहीं करते आप कुछ भी नहीं कर सकते। मान लीजिए आपको driving आता है लेकिन आप उसको कहते हो साहब मुझे computer का typing भी आता है। तो तुरन्‍त कहे अच्‍छा-अच्‍छा भई ये भी आता है, तो चलो-चलो फिर जब driving का काम पूरा होगा तो कम्‍प्‍यूटर करते रहना। तो जब उसको पता चले extra quality है तो उसका value बढ़ जाता है। हम चाहते हैं कि skill में multiple activity की ताकत उसकी हो। मैं देख रहा हूं मुझे कोई बता रहा था, बहुत समय हुआ कोई एक नौजवान था, plumber था, तो plumber के नाते जो काम मिलता था वो करता रहता था, लेकिन उसने धीरे-धीरे अपने-आपको yoga trainer के लिए तैयार किया और मजा ये है कि सुबह एक-दो घंटे yoga trainer के लिए जा करके वो ज्‍यादा कमाता था, जबकि plumber से बाद में कम। फिर क्‍या हुआ वो yoga training के साथ अब plumber भी जुड़ गया तो जहां yoga training करता है वो ही लोग को कहें यार देखो उधर plumber की जरूरत है तुम चले जाओ। उसने एक नई चीज सीखी। दोनों चीजें ऐसी हैं कि जिसमें उसको कोई college की degree की जरूरत नहीं थी। वो कमाना शुरू कर दिया। हम चाहते हैं कि देश के अन्‍दर इन बातों को कैसे भरोसा करें। आने वाले दिनों में पूरे विश्‍व में, पूरे विश्‍व में करोड़ों-करोड़ों की तादाद में workforce की requirement है। और अगले दशक में हमारे पास चार-साढ़े चार, पांच करोड़ के करीब लोग surplus होंगे workforce हमारे पास। अगर हम ये mismatch को दूर करते हैं, हम आवश्‍यकता के अनुसार उसको तैयार करते हैं तो हमारे नौजवानों को रोजगार के लिए अवसर मिलेंगे। कभी-कभार क्‍या होता है कि एक area है जहां chemical की industry आ रही है लेकिन वहां पर क्‍या पढ़ाया जाता है तो automobile पढ़ाया जाता है। अब उसको वहां job मिलती नहीं है। हमें mapping करना होगा कि काम किया है, बहुत बड़ी मात्रा में काम हुआ है कि किस इलाके में हमारा क्‍या potential है, क्‍या-क्‍या establishment है, वहां पर किस प्रकार की requirement है। हम उस प्रकार का human resource training करेंगे ताकि उसको walk to work के लिए वो तैयार हो जाएं, उसको अपने घर के पास ही काम-काज मिल जाए तो उसको आर्थिक रूप से ज्‍यादा बोझ नहीं बनता है। नहीं तो होता क्‍या है कि जो चीज को सीखता है उसके 100 किलोमीटर की range में वो काम ही नहीं होता। मुझे याद है जब मैं गुजरात में काम करता था, शुरू-शुरू में मैंने देखा automobile में वो चीजें पढ़ाई जाती थीं जो गाडि़यां बाजार में थीं ही नहीं। हमारी technology थी। खैर बाद में तो course बदल दिए सब, जो trainers थे उनकी भी training की, काफी कुछ बदलाव लाना पड़ा, लेकिन आज भी शायद कई जगह पर बहुत जगह पर ऐसा हो। और इसलिए आवश्‍यक हैं कि हमारी सारी training institutes को dynamic बनाना है। टेक्‍नोलॉजी इतनी तेजी से बदल रही है, अगर हमारी training dynamic नहीं होगी तो हमारा वो व्‍यक्ति relevant नहीं रहेगा। पुराने जमाने के cook को आज oven चलाना नहीं आता है तो घर में वो cook काम नहीं करेगा। उसको आना चाहिए, oven क्‍या, सीखना पड़ता है हर चीज को, additional training आवश्‍यक होती है और इसलिए dynamics बहुत आवश्‍यक है उसके लिए । हम जिस training की ओर बल दे रहे हैं उसकी दिशा में हमारा प्रयास है। कौशल्‍य के संबंध में भारत की पहचान सदियों से रही है। हमने अपनी इस विधा को भुला दिया है। सदियों पहले हमारे यहां, हमारी विशेषताओं को कितना माना जाता था। हमारे कौशल्‍य की ताकत को माना जाता था। हमने फिर से एक बार उसको regain करना है। अगर आज दुनिया में चीन ने अपनी ये पहचान बनाई है कि चीन की एक पहचान बन गई है कि जैसे वो दुनिया की manufacturing factory बन गया है। अगर चीन की पहचान दुनिया की manufacturing factory की है तो हिन्‍दुस्‍तान की पहचान दुनिया की required human resource का capital बनने की बन सकती है। हमारे पास जो ताकत है उस पर हमें बल देना है। हम अपनी ताकत पर जितना हम जोर लगाएंगे हम चीजों को उतना प्राप्‍त कर पाएंगे और इसलिए हमारी कोशिश यह है कि हम mapping करके, human resource की requirement के अनुसार training करें। और हमें पता होना चाहिए। आज, आज भी मैं बताता हूं आज देश में लाखों की तादाद में trained drivers नहीं है। देश को जितने trained drivers चाहिए, उसकी perfect training के लिए जिस प्रकार की आधुनिक व्‍यवस्‍था चाहिए वो व्‍यवस्‍था भी उपलब्‍ध नहीं है। फिर तो वो चलते-चलते सीखता रहता है। कहने का तात्‍पर्य यह है कि बेरोजगारी का कोई कारण नहीं है। अगर हम रोजगार को ध्‍यान में रखते हुए, विकास के मॉडल को ध्‍यान में रखते हुए human resource development के design तैयार करें। अगर इन तीनों को जोड़ करके प्रयास करें।

कभी-कभार क्‍या होता है कि जो इस प्रकार के training institutions हैं उनको ये पता नहीं होता कि दुनिया कैसे बदल रही है। वो अपना पुराने ढर्रे से चलते हैं। आवश्‍यकता है जैसे आज यहां है, यहां पर रोजगार देने वाले लोग भी बैठे है, रोजगार लेने वाले भी मौजूद हैं और रोजगारी के योग्‍य नौजवानों को तैयार करने वाले लोग भी मौजूद हैं और इन सारी चीजों के लिए नीति निर्धारण करने वाले लोग भी मौजूद हैं। इस सभागृह में सब प्रकार के लोग हैं। क्‍यों, ये हमें आदत बनानी होगी। हमारे उद्योग जगत के लोगों के साथ, हमारे technical world के साथ लगातार हमें बैठना पड़ेगा। उनसे पूछना पड़ेगा कि क्‍या लगता है Next ten year किस प्रकार की चीजें आप देख रहे हैं। वो कहते है next ten year ऐसा ऐसा आने वाला है। ऐसी ऐसी संभावना है तो हमें हमारा syllabus अभी से उसी प्रकार ऐसा बनाना चाहिए। हमारी training institution को ऊपर से तैयार करनी चाहिए तो यहां हमारा training के institutions से लोग बाहर निकले और वहां पर जाते ही उनको नई technology आ गई है तो placement मिल जाएगा। तो हमने futuristic vision के साथ हमने यह सोचना होगा कि next ten year के development की design क्‍या है, कौन सी technology काम करने वाली है, किस प्रकार से व्‍यवस्‍था बनाने वाली है, हमारा human resource development according to that होना चाहिए। अगर हमारा human resource development according to that होता है तो मैं नहीं मानता हूं कि बेरोजगारी का कोई कारण बनता है, उसको रोजगार मिलता है। कैसी training से कितना फर्क होता है, मैं अपने अनुभव कुछ शेयर करना चाहता हूं। गुजरात के लोग, मैं गुजरात में था इसलिए वहां का उदाहरण दे रहा हूं। सेना में बहुत कम जाते हैं। अब वो उनका development ही अलग है। लेकिन हमने सोचा है भई क्‍यों न हो हमारे लोग क्‍यों न सेना में जाएं। तो मैंने जरा पूछताछ की, कि क्‍या problem है भई। नहीं बोले जब physical exercise और exam होते हैं उसी में fail हो जाते हैं। तो उनको बोले वो आते हैं तो हमारा उसमें scope है, कोटा है लेकिन हमें मौका नहीं मिलता है। तो मैंने क्‍या किया army के कुछ retired अफसरों को बुलाया। हमने कहा भई हमारे जो tribal belt है वहां के नौजवानों को तुम trained करो कि exam कैसे पास करते हैं। सब हमारा मेल बैठ गया। उन्‍होंने training के camp लगाने शुरू किए। एक-एक महीने के camp लगाते गए और जब भर्ती होने लगी तो करीब जो 5-7 percent लोग हमारे मुश्‍किल से जाते थे। 35-40 percent तक पहुंचा दिया था। training मात्र से। उनको समझाया कि भई ऐसे दौड़ते हैं, सीना ऐसे करते हैं, जरा एक-दो चीजें तुम्‍हें करना आ जाएगी तुम्‍हारी entry हो जाएगी। वो तैयार हो गए। कहने का तात्‍पर्य यह है कि ऐसा नहीं है कि कोई नौजवान जाना नहीं चाहता, लेकिन कोई उसको समझाए तो। चीजें छोटी-छोटी होती हैं लेकिन बहुत बड़ा बदलाव लाती है, बहुत बड़ा बदलाव लाती है। और आज, job market एक इतना बड़ी field है, क्‍योंकि हर किसी को कोई न कोई सेवादार की जरूरत होती है, किसी न किसी की व्‍यवस्‍था हो जाए। मैं जब skill development के लिए मैं काफी दिमाग खपाता रहता था क्‍योंकि मुझे लगता है कि ये और आज से नहीं मैं कई वर्षों से इसमें ज़रा रुचि लेता था। मैंने बहुत साल पहले ये सबरवाल जी को अपने यहां भाषण के लिए बुलाया था। जब मैंने सुना कि ये job market में काफी काम कर रहे है तो मैंने कहा कि भई बताओ तुम क्‍या-क्‍या सोचते हो। बहुत साल पहले की बात है। कहने का तात्‍पर्य यह है कि मुझे पता लग रहा था कि इसका एक अलग महत्‍व है। इस महत्‍व को हमें अनुभव करना चाहिए। एक बार मैंने बहुत छोटी उम्र में दादा धर्माधिकारी को मैं पढ़ता रहता था। आचार्य विनोबा भावे के साथी थे। Gandhian थे और बड़े ही समर्पित Gandhian थे। चिंतक थे। एक बढ़िया उन्‍होंने अपना एक प्रसंग लिखा है। कोई नौजवान उनके पास गया कि दादा कहीं नौकरी मिल जाए, काम मिल जाए तो उन्‍होंने पूछा कि तुम्‍हें क्‍या आता है, बोले कि मैं graduate हूं। तो कहा कि अरे भई मैं तुझे पूछ रहा हूं कि क्‍या आता है, अरे बोला मैं graduate हूं। अरे भई तुम graduate हो मैंने सुन लिया, मुझे समझ आ गया, तुम्‍हें आता क्‍या है। नहीं बोले कि मैं graduate हूं। मुझे कुछ काम तो मिले। चल अरे भई तुझे driving आता है क्‍या, तुम्‍हें बर्तन साफ करना आता है, तुम्‍हें रोटी पकाना आता है क्‍या, कपड़े धोना आता है। क्‍या आता है बताओ न। अरे मैं तो केवल graduate हूं। दादा धर्माधिकारी ने बढ़िया ढंग से एक चीज को लिखा है, अपने स्‍वानुभवों से लिखा है और इसलिए आवश्‍यक है कि उसको जीवन जीने का भी कौशल्‍य इस हस्‍त कौशल्‍य से आता है। जो हाथ से वो कला सीखता है जो ताकत आती है उससे जीवन जीवन्‍य का कौशल्‍य प्राप्‍त होता है और उसको प्राप्‍त कराने की दिशा में हमारा एक प्रयास है। हम उसे entrepreneur भी बनाना चाहते हैं।

अब आप देखिए tourism हमारे देश में develop कर रहा है। जो स्‍थान tourist destination है, वहां tourist guide तैयार करने की कोई institute है क्‍या, नहीं है। वहां पर language courses है क्‍या। अगर आगरा है, tourist destination है तो आगरा के अंदर language courses सबसे ज्‍यादा क्‍यों नहीं होने चाहिए। ताकि वहां पर उनके बच्‍चों को सहज रूप से लैंगवेज आती हो, tourist को लगेगा अपनापन, उसकी भाषा में बात करेगा। ये अगर हमें tourism develop करना है तो हमें हमारे वहां के driver को manners सिखाने से लेकर के language से communicate करने वाले लोगों तक की एक सहज समाज में फौज खड़ी करनी पड़ती है, जिनकी रोजी-रोटी भी उसी से चलती है। हमें जब तक इस प्रकार का टारगेटिड और जो कि देश की ताकत को बढ़ाता है, service sector में भी हम specific चीजों को करें तो बदलाव आता है। आज देश में tourism को बढ़ावा देने के लिए बहुत बड़ी ताकत है, बहुत बड़ी ताकत है। लेकिन उस प्रकार से जो human resource तैयार करने चाहिए, वो human resource करने के लिए हम उतने उदासीन होते हैं। मैं तो इस मत का हूं कि जो-जो tourist destination हो वहां पर हमेशा competition होते रहने चाहिए guide के। who is the best guide । कौन उस शहर का बढ़िया से बढ़िया वर्णन करता है। Competition हो, ईनाम देते रहो, आपको बढ़िया से बढिया, आपको ढेर सारे नौजवान मिलते रहेंगे जो history बताएंगे, archaeology बताएंगे, architecture बताएंगे, व्‍यक्तियों के नाम बताएंगे। सब पचासों सवालों के जवाब दे पाएंगे। धीरे-धीरे potential खड़ा हो जाएगा। कहने का मेरा तात्‍पर्य यह है कि हमारे यहां संभावनाएं बहुत है, मुझे जब मैं skill में काम करता था, मैंने क्‍या किया, हमारे यहां अफसर लोग आए हुए थे। चल रहा था, कैसे करना हे, मैंने कहा कि एक काम करो भई, गर्भाधान से लेकर मृत्‍यु तक, जीवन में कितनी चीजों की आवश्‍यकता होती है, उसकी एक सूची बना लो और जो सूची बनेगी, उतनी skill चाहिए। तो उन अफसरों ने कहा अब हम सोचते हैं। उन्‍होंने सरसरी नज़र में दो-तीन दिन बैठे बनाए तो कोई nine hundred and twenty six चीजें लेकर के आएं। कि वो जन्‍म के बाद उसको ये चाहिए, पढ़ाई के समय ये लगेगा, शादी के समय गुलदस्‍ता लगेगा। सारी चीजों की लिस्‍ट बनाई। कोई nine hundred and twenty six चीजें ऐसे ही सरसरी, वैसे बनाई जाए तो शायद दो हजार निकलेंगी। मैंने कहा कि इन nine hundred and twenty six का skill development है क्‍या तुम्‍हारे पास। लोगों को जरुरत है। ये हमने सोचना होगा। अगर भई गुलदस्‍ते की जरुरत है तो गुलदस्‍ता देना और value addition कैसे होता है, मैं हैरान था, मैं कोई अगर technology नई आए तो देखने का ज़रा शौकीन हूं।

एक बार मैं एक tribal belt में गया। तो वहां मुझे, वहां के आदिवासी बच्‍चियों ने एक गुलदस्‍ता दिया और मैं हैरान था कि उस गुलदस्‍ते के हर फूल पर मेरी तस्‍वीर लगाई हुई थी। मेरे लिए वो surprise था। मुझे लगा कि उन्‍होंने चिपकाया होगा। तो मैंने ज़रा यूं करके देखा तो ऐसा तो नहीं लगा। तो मैंने फिर उनको वापिस बुलाया। मैंने कहा कि ये क्‍या है, ये tribal बच्‍चियों की मैं बात कर रहा हूं। बोले, हमने गुलाब की पत्‍तियों पर laser technique से आपकी फोटो छापी है। अब आप बताइए value addition करने की क्‍या सोच होती है। एक आदिवासी इलाके की गरीब स्‍कूल की बच्‍ची को भी ये दिमाग में आता है कि टैक्‍नोलॉजी का कैसे उपयोग होता है। मतलब work dynamics बदल रहे हैं। हम उसके लिए सज्ज कैसे करे। मुझे तो लगता है कि कोई ये चलाए न कि भई एक घंटे का training , board लगाकर बैठ जाए। क्‍या, mobile phone कैसे उपयोग किया जाए, मैं सिखाउंगा। मैं बताता हूं साहब लोग लग के queue में खड़े हो जाएंगे। बहुत लोग है जो ये तो ढूंढते रहते है कि नया model कौन सा आया है। लेकिन उनको ये पता नहीं होता है कि ये green या red button के सिवाए इसका क्‍या उपयोग होता है। अब किसी के दिमाग में है हां भई मैं ये करूंगा, आप देखिए लोग जाएंगे कि अच्‍छा भई मैं नया लाया हूं अच्‍छा बता कैसे operate करेंगे, क्‍या-क्‍या चीजें होती हैं। सीखने क लिए लोग जाएंगे, उपयोग करेंगे। कहने का तात्‍पर्य यह है कि हमें ये जोड़ना है, हमें कौशल्‍य के साथ जीवन जीने की क्षमता, कौशल्‍य के साथ रोजगार के अवसर, कौशल्‍य के साथ विश्‍व के अंदर भारत का डंका बजाने का प्रयास। इस लक्ष्‍य को लेकर हम इस काम को लेकर के चल रहे हैं मैं राजीव प्रताप रूडी और उनकी पूरी टीम का बधाई देता हूं जिस प्रकार से इस कार्यक्रम की रचना की है। जिस प्रकार से इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाया है। और उसमें देखिए innovation कैसे होते हैं। मुझे बाहर, आपको भी मौका मिले तो देखिए एक बच्‍ची ने ये जो ship के अंदर कंटेनर होते हैं। वो जो rejected माल जो होता है container उसको लगाया है और उसने कंटेनर को ही अंदर school में convert कर दिया है। जो कि discard होने वाला था। वो टूटने के लिए जाने वाला था। देखिए कैसे लोग अपने कौशल्‍य का उपयोग करते हैं। किस प्रकार से चीजों में professionalism आ रहा है। हमें इन चीजों को लाना है और मैं मानता हूं कि भारत के नौजवानों के पास भरपूर क्षमताएं हैं, उसको अवसर मिलने चाहिए। वो किसी भी चुनौतियों को चुनौती देने के लिए सामथर्यवान होता है और अब भारत जो कि demographic dividend के लिए गर्व करता है उस demographic dividend की गारंटी skill में है, trained man power में है और उस trained man power schools पर बल देकर के हम आगे बढ़े, यहीं मेरी शुभकामनाएं हैं और इन नौजवान बच्‍चों को जिन्‍होंने दुनिया में हमारा नाम रोशन किया है। वे अब जा रहे हैं। World Competition में, हम उनको बहुत-बहुत शुभकामनाएं दें।

मैं आशा करता हूं कि हम दुनिया में इस क्षेत्र में हमारी पहचान बनाएं कि हां भई हमारे नौजवानों में कौशल्‍य के अंदर और ये Olympic से कम नहीं होता इनका ये game, इनका ये कौशल्‍य दिखाना। बड़ा महत्‍वपूर्ण होता है। हमारे देश में अभी ध्‍यान नहीं गया क्‍योंकि वो नहीं है, glamour नहीं है। लेकिन धीरे-धीरे आ जाएगा। आज शुरू किया है मैंने। धीरे-धीरे दुनिया का ध्‍यान जाएगा।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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My dear countrymen, Namaskar. Today, I am expressing Mann ki Baat at a time when Corona is testing our patience; it is testing the limits of all of us at enduring misery. Many of our near and dear ones have left us untimely. After successfully confronting the first wave of Corona, the country was full of enthusiasm, full of self-confidence, but this storm has shaken the country.

Friends, in the days gone by, to tide over this crisis, I had long deliberations with experts from myriad sectors. People from our Pharma industry, vaccine manufacturers, those connected with oxygen production, experts from the medical field have put forth their valuable suggestions to the government. This time, for emerging victorious in this battle, we have to accord priority to expert and scientific advice. The Government of India is applying its entire might to give a fillip to the endeavours of State Governments. The State Governments too are trying their best to fulfill their responsibilities.

Friends, presently, the country’s doctors and health workers are waging a colossal battle against Corona. Over the past one year, they have undergone varied experiences. Joining us, at the moment, is the well known Dr Shashank Joshi ji from Mumbai.

Dr Shashank ji has immense grassroot level experience in the field of treatment of Corona and allied research. He has also been the Dean of the Indian College of Physicians. Let’s speak to Dr Shashank.

PM – Namaskar Dr Shashank ji

Dr Shashank – Namaskar Sir

PM – Just recently had got an opportunity to speak to you. I had liked the clarity in your thoughts. I felt all citizens of the country should know about your thoughts. From what we used to hear, I present it before you in the form of a question. Dr Shashank, all of you are deeply involved at the moment in saving lives, day and night…first of all, I’d like you to tell people about the Second Wave; how different it is medically, what precautions are necessary

Dr Shashank – Thank you Sir. This second deluge that has come in rapidly. This virus is faster moving than the first wave. But the good thing is that the recovery rate is higher and mortality rate pretty low. There are 2 – 3 differences here. The first is – to an extent, it has been observed in youth and children too. And the symptoms…like the earlier one…breathlessness, dry cough, fever…all these are there…along with it, loss of smell and taste are also there. And people are a bit scared. There is absolutely no need of being scared. 80 to 90 percent people do not show any of these symptoms. What they call Mutation – there’s no need to be afraid of that. These mutations keep on happening…the way we change our clothes, the virus keeps changing its colours…hence there is nothing to fear and we shall overcome this wave too. Waves keep coming and going, the virus keeps coming and going…these are the various symptoms and we have to be alert medically. Covid has a 14 to 21 day’s timetable, in which we should avail of the Doctor’s advice.

PM – Dr Shashank, the analysis that you mentioned is interesting for me too. I have received many letters containing numerous apprehensions of people regarding treatment…the demand for certain medicines is very high…that’s why I want you to tell people about the treatment of Covid, as well.

Dr Shashank – Yes Sir. People start clinical treatment very late…in the belief that the illness will subside on its own…they believe in what they keep watching on their Mobile feeds. If they abide by information provided by the government, they will not face these difficulties. In Covid, the clinical treatment protocol has magnitude of three types – light or mild Covid, medium or moderate Covid and intense, what is called severe Covid. In the case of mild Covid, we do oxygen monitoring, pulse monitoring and fever monitoring. If the fever rises, sometimes we use medicines like paracetamol…and one should consult a Doctor. In the case of moderate or severe Covid, it is extremely important to contact the Doctor. Correct and inexpensive medicines are available. Steroids can save life…inhalers can be given, tablets can be given. And along with that, oxygen has to be administered…there are many simple treatments available. But often what is happening is – there is a new experimental medicine called Remdesivir. But one thing about this medicine is that one has to stay 2 – 3 days lesser in the hospital and it aids in clinical recovery. And this medicine too works only when it is taken in the first 9-10 days…and it is to be taken only for five days. The way people are running after Remdesivir…they should stop doing that. This medicine has a limited role…it should be taken only when people are put on oxygen in a hospital, strictly as per the Doctor’s advice. It is important for all people to understand this. If we do PRANAYAM, our lungs will expand a bit. And there’s an injection available for thinning blood…it is called Heparin. If these simple medicines are given, 98% people recover. So, staying positive is very important. It is imperative that treatment protocol is as per the Doctor’s advice. And it is not at all required to run after all these expensive medications. Sir, we have excellent treatments, we have oxygen, we have ventilator facilities…we have everything Sir. Whenever this medicine is available, it should be given only to appropriate people. On this, many myths are doing the rounds. Sir, I want to clarify that we have the world’s best treatment available…you will see that India has the best recovery rate. If you compare Europe, America, our patients are recovering through our treatment protocols.

PM – Dr Shashank, many thanks to you. The pieces of information that Dr Shashank gave us are very important and useful for all of us.

Friends, I urge all of you…if you need any information, if you have any apprehension, get the information only from the correct source. You can consult your family doctor or doctors in the neighbourhood on the phone. I am noticing that many of our doctors are taking upon themselves this responsibility, on their own. Many doctors are providing information to people through social media. They are counseling on phone and WhatsApp. Many hospitals have websites where information is available…there you can seek advice of doctors too. This is commendable.

Joining me is Dr Naveed Nazeer Shah from Srinagar. Dr Naveed is a professor at a Government Medical College in Srinagar. Naveed ji has cured many a Corona patient under his supervision. In this holy month of Ramzan, Dr Naveed is performing his duty and has also taken out time to talk to us. Come, let’s speak to him.

PM – Naveed ji namaskar

Dr Naveed – Namaskar Sir

PM – Dr Naveed, during these difficult times, our listeners of Mann ki Baat have raised the question of Panic Management. Through your experience, what will you answer them?

Dr Naveed – See, when Corona began, the first hospital to be designated as Covid Hospital was our City Hospital, which comes under a medical college. The atmosphere then was that of fear. At least in people, it was so. They used to feel that perhaps, if a person contracts Covid, it would be taken as a Death Sentence. And amidst that, the doctors and paramedical staff working at our hospital also underwent that sense of fear…how will we face these patients…aren’t we at a risk of contracting the infection! But as time passed, we too observed that if we wear protective gear fully, abide by precautions colllectively; we too, including our staff can stay safe. As time passed by, we kept on noticing that some patients or people who were ill were asymptomatic, who displayed no symptoms of the infection. We saw that close to 90-95% of the patients are those who recover without in-medication…thus, with the passage of time, the fear of corona in the minds of people largely reduced. Today what we refer to as the Second Wave that has come in this time…there is no need to panic this time around too. Amidst this occurrence too, if we adhere to the protective measures, such as wearing masks, using hand sanitizers…beyond that, if we maintain physical distance and avoid social gathering, we can carry on with our daily work and keep ourselves protected from this infection too.

Modi ji- Dr. Naveed people have many questions regarding the vaccine too, like how much protection we will get from the vaccine, how assured we can feel after the vaccine? Tell us something about this; listeners will be greatly benefitted.

Dr. Naveed- From the time since the corona infection has surfaced before us, till today, we don’t have any effective treatment available…we can fight this disease with only two things -one is protective measures … and we have already been saying that if we get some effective vaccine we can overcome this disease. Our country presently has two vaccines available Covaccine and Covishield which have been made here itself. Other companies too who have done their trials have found that its efficacy is more than 60%. And if we talk of Jammu Kashmir, till now, 15 to 16 lakh people have taken the vaccine. Yes, quite a few misconceptions or myths about this have come up on social media enumerating the side effects … till now, in our place, no side effects have been found in vaccines that have been administered. Only things that are routinely associated with every vaccine – someone getting fever, ache in the entire body or getting pain locally where injection is applied- we have seen such side effects in all patients ;we have not seen any gross adverse effect. And yes , secondly,some people had the apprehension that after vaccination, that is on getting the vaccine, some people got positive. In this, companies themselves have given guidelines that if someone is vaccinated, they may have infection, they can get positive. But the severity of the disease, that is its intensity in such patients will not be so much, that is, they may get positive but the disease can not prove to be fatal in them. So we should remove from our mind such misconception about the vaccine. Whosoever’s turn comes…Because from 1st May, vaccine administration programme for all those above 18 years in the entire country will begin, it is an appeal to the people that come and get vaccinated and protect yourselves and overall, our society and our community will be protected from Covid 19 infection.

Modi ji- Dr Naveed many many thanks to you, and best wishes to you for the pious month of Ramazan.

Dr. Naveed- Many many thanks.

Modi ji: Friends, in this period of Corona crisis, all are getting aware of the importance of vaccine … so it is my appeal that don’t get swayed by any rumour about the vaccine. You all must be knowing that people above 45 years of age can benefit from the free vaccine that has been sent to all state governments by the government of India. Now from 1st May onwards ,the vaccine is going to be made available for every person above 18 years in the country. Now the Corporate Sector, companies too will be able to participate in the programme of administering vaccine to their employees. I also want to say that the programme of free vaccine by the government of India that is going on now will continue further too. I appeal also to the states to extend the benefit of this free vaccine campaign of government of India to maximum number of the people of their state.
Friends, we all know how difficult mentally it is to take care of ourselves, our family during disease. But our nursing staff in hospitals has to do this very job continuously, with so many patients at the same time. This sense of service is a great strength of our society. Only a nurse can tell properly about the service and hard work of the nursing staff. That is why, in Mann Ki Baat, I have invited sister Bhavana Dhruv ji who is providing her services at B R Ambedkar Medical College in Raipur. She is taking care of several Corona patients. Come , let us talk to her.

Modi ji- Namaskaar Bhavana ji!

Bhavana-Respected Prime Minister ji, Namaskar!

Modi ji- Bhavana ji…

Bhavana- Yes sir

Modi ji- Do tell the audience of Mann Ki Baat how you have so many responsibilities in family, so much multitasking and yet, along with that, you are working with Corona patients. The experience that you have with Corona patients, people of the country would definitely like to hear that because sisters, nurses are closest to the patient for the longest duration, so they can understand every aspect in great detail…please tell us.

Bhavana- Yes Sir… my total experience in COVID is 2 months. We do our duties for 14 days and after that we are given rest. Then after 2 months our Covid duties are repeated sir. When I was put on Covid duty for the first time, first of all I shared this Covid duty part with my family members. This was in May. And as I shared this, all got scared, worried … they started telling me that I should work with care…it was an emotional situation Sir. When my daughter asked me, “Mamma you are going for Covid duty?”… it was a very emotional moment for me. But when I went near a Covid patient, I had left a responsibility at home. And when I met Covid patients Sir, they were much more frightened than them. All the patients were so frightened by the name Covid that they were not able to understand what was happening to them or what we would do further. To remove their fear we gave them a very healthy environment. When we were told to do COVID duty, first of all, we were asked to wear a PPE Kit, which is quite difficult… to do duty with the PPE Kit on. Sir this was very tough for us …in 2 months duty, I have worked everywhere …14- 14 days duty in wards, in ICU, in Isolation.

Modi ji- That means, in all, you have been doing this very work for the past one year.

Bhavana- Yes Sir; before going there I did not know who my colleagues were. I worked as a team member… whatever problem they had… I shared, I came to know about the patients and removed their stigma, there were many people who were frightened of even the name of Covid. They showed all symptoms… when we used to take their history, but because of fear they wouldn’t be able to get their test done, then we would counsel them … and Sir when severity would increase, by then their lungs would have already been infected…by the time they came they would need ICU by then and with them their entire family would come. So I have seen 1-2 such cases sir and not just that …I have worked with all age groups. In that were small kids, ladies, men, senior citizens… all kinds of patients sir. When we talked to them they said that they did not come because of fear, we got the same answer from all. Then we counselled them Sir, that there is nothing to fear, just follow us … we will support you … follow whatever protocol is there. We could do only this much for them.

Modi ji- Bhavana ji, I felt nice talking to you, you have given me quite good information. You have shared by your experience, definitely this will send a message of positivity to the countrymen. Many many thanks to you Bhavana ji.
Bhavan- Thank you so much sir…thank you so much….Jain Hind sir.

Modi ji- Jai Hind!

Hundreds of thousands of brothers and sisters like Bhavana Ji and countless others from Nursing Staff are performing their duties exemplarily. This is a big inspiration for all of us. Pay special attention to your health as well. Take care of your family too.

Friends, Sister Surekha ji is now connected with us from Bengaluru at this time. Surekha Ji is Senior Nursing Officer in K.C. Jindal Hospital. Come let us get to know about her experiences also -

Modi ji: Namaste Surekha ji!

Surekha: - I am really proud and honored sir to speak to prime minister of our country.

Modi Ji:- Surekha ji...You along with all fellow nurses and hospital staff are doing excellent work. India is thankful to you all. What is your message for the citizens in this fight against COVID-19.

Surekha:- Yes sir... Being a responsible citizen I would really like to tell something like please be humble to your neighbors and early testing and proper tracking help us to reduce the mortality rate and moreover please if you find any symptoms isolate yourself and consult nearby doctors and get treated as early as possible. So, community need to know awareness about this disease and be positive, don’t be panic and don’t be stressed out. It worsens the condition of the patient. We are thankful to our Government proud to have a vaccine also and I am already vaccinated with my own experience I wanted to tell the citizens of India, no vaccine provides 100% protection immediately. It takes time to build immunity. Please don’t be scared to get vaccinated. Please vaccinate yourself; there is a minimal side effects and I want to deliver the message like, stay at home, stay healthy, avoid contact with the people who are sick and avoid touching the nose, eyes and mouth unnecessarily. Please practice physically distancing, wear mask properly, wash your hands regularly and home remedies you can practice in the house. Please drink ayurvedic kaadha(आयुर्वेदिककाढ़ा), take steam inhalation and mouth gargling everyday and breathing exercise also you can do it. And one more thing last and not the least please have a sympathy towards frontline workers and professionals. We need your support and co-operation. We will fight together. We will get through with the pandemic. This is what my message to the people sir.

Modi ji:- Thank you surekha ji.

Surekha:- Thank you sir.

Surekha ji, indeed, you are holding fort in a very difficult time. Take care of yourself! I wish the very best for your family. I will also urge the people of the country, as Bhavna Ji, Surekha ji, have narrated from their experiences. Positive Spirit is imperative to fight Corona and the countrymen have to maintain the very same positive spirit.

My dear friends, along with Doctors and Nursing Staff, at the moment frontline Workers like Lab-Technicians and Ambulance Drivers are also working in a godlike manner ! When an Ambulance reaches a patient, the family feels as if an angel has visited them in form of an Ambulance Driver! The country must know about all the services rendered by them & about their experiences! I have one such gentleman with me right now - Mr. Prem Verma ji, who is an Ambulance Driver. As his name denotes, Prem Verma ji does his work, his duty, with full love and dedication. Come! Let’s talk to him -

Modi ji - Namaste Prem ji |

Prem ji - Namaste sir ji |

Mr. Modi - Bhai! Prem |

Prem ji - yes sir.

Modi ji – About your work.

Prem ji - yes

Modi ji – Do tell us in detail. Also tell us about your experiences.

Prem ji - I am on the post of driver and as soon as Control gives us a call on a tab… We respond to the call that comes from 102 and head towards the patient. We go to the patient and for the last two years we are continuing this work. We wear our kit, wearing our gloves & mask, reach the patient and wherever they ask us to drop, in whichever hospital, we drop them as soon as possible.

Modi ji - You must have had both doses of vaccine?

Prem ji - Absolutely sir.

Modi ji - Then what is your message for others to get vaccinated?

Prem ji - Sir Absolutely | Everyone should get this dose and it is good for the family as well. Now my mom insists that I quit this job. I told her- mother, if I too leave the job and sit idle, then who will carry these patients? Because everyone is deserting, leaving behind their jobs in this period of corona! Everyone is leaving the job. Mom tells me to leave that job. I said no mom, I will not leave the job!

Modi ji – Prem Ji do not hurt mother. Try to convince your mother.

Prem ji - yes

Modi ji - But this thing you told about your mother?

Prem ji - Yes.

Modi ji - It is very touching.

Prem ji - Yes.

Modi ji - To your mother too.

Prem ji - Yes.

Modi ji - Do convey my pranam.

Prem ji - Absolutely

Mr. Modi – And Yes?

Prem ji – yes Sir

Modi ji - and Prem ji through you

Prem ji - yes

Modi ji – These drivers running our ambulance service too

Prem ji - yes

Modi ji - How much risk you all taking at your jobs!

Prem ji - yes

Modi ji - and what does everyone's mother think?

Prem ji - Absolutely sir

Modi ji - When this conversation will reach the audience

Prem ji - yes


Modi ji - I definitely believe that it will touch their hearts too!

Prem ji - yes

Modi ji - thank you very much, Prem ji. In a way, you are an example of what we call the flow of the Ganges of love!

Prem ji - Thank you sir

Modi ji - thanks bhaiyya!

Prem ji - Thank you.

Friends, Prem Verma ji and thousands of people like him today are serving the people by putting their own lives at stake! Ambulance Drivers have also contributed a lot to all the lives that have been saved in this fight against Corona. Premji, I commend you and all your colleagues across the country. keep reaching on time, keep saving lives!

My dear countrymen, it is true that many people are getting infected with Corona. However, the number of people recovering from Corona is equally high. Preeti Chaturvedi of Gurugram has also recently defeated Corona. Preeti ji is joining us in 'Mann Ki Baat'. Her experiences will be of immense benefit for all of us.

Modi ji : Preeti ji, Namaste

Preeti ji : Namaste Sir. How are you doing?

Modi ji : I am fine . First of all, as for Covid19

Preeti ji : Ji

Modi ji : you successfully overcame it

Preeti ji : Ji

Modi ji : I would like to appreciate you for that.

Preeti ji : Thank you so much Sir

Modi ji : I wish for the faster recovery of your health

Preeti ji : Ji thank you Sir

Modi ji : Preeti ji

Preeti ji : Yes Sir

Modi ji : Is it just you who got infected in the current wave or have other members of your family been affected by it too?

Preeti ji : No no Sir, it was just me

Modi ji : God has been kind. Well, I would like

Preeti ji : Yes Sir

Modi ji : That you share some experiences of the state of your suffering … then, perhaps those listening in right now may also get guidance on how to handle themselves at such a time.

Preeti ji : Sure Sir. In the initial stage, I got extremely lethargic and after that there was a slight soreness of the throat. I felt that these were symptoms and so I got myself tested. On the second day, as soon as the report came in and I was diagnosed positive, I quarantined myself. I isolated myself in a room and consulted with doctors. I started the prescribed medication .

Modi ji : So your family was saved due to quick action on your part.

Preeti ji : Yes Sir. They got tested later too.Everyone else was negative. I was the only positive. Prior to that, I had isolated myself inside a room. After keeping all my necessities, I locked myself in the room. And along with that, I again started medication with the doctor. Sir, along with medication, I started yoga &Ayurvedic.Along with that I also started taking kadha, decoction. In order to boost my immunity Sir, in the day, whenever I used to take my food, I took healthy food, which was a protein rich diet. I took a lot of fluid, I gargled , inhaled steam and took hot water. I incorporated all of this as part of my daily routine. And Sir, I would like to say that these days, the most important thing is … one shouldn’t get worried at all. One has to remain mentally strong and for me, yoga and breathing exercise helped and I felt better doing them.

Modi ji : Yes. Preeti ji, now that your process is complete, you have come out of the crisis

Preeti ji : Yes Sir

Modi ji : You have tested negative too…

Preeti ji : Yes Sir

Modi ji : So what are you doing right now to take care of your health?

Preeti ji : Sir, I have not stopped doing Yoga

Modi ji : Ok

Preeti ji : I am still taking decoction and to boost my immunity, I am eating good, healthy food.

Modi ji : Yes

Preeti ji : I used to earlier neglect my own self but now I pay a lot of attention to my own being.

Modi ji : Thank you Preeti ji

Preeti ji : Thank you so much Sir.

Modi ji : I think the information you shared will help a lot of people. May you stay healthy; may your family members stay healthy, I wish you all the best.

My dear countrymen, today, our personnel from the medical field, frontline workers are all endeavouring 24x7 in service work. Similarly, other people of the society also are not lagging behind at this time. The country is once again united and fighting against Corona. These days, I see that someone is delivering medicines to families living in quarantine, someone is sending vegetables, milk, fruits etc. Someone is offering free ambulance services to patients. Even in such challenging times, in different corners of the country, voluntary organizations are coming forward and trying to do whatever they can to help others. This time, new awareness is also being seen in the villages. By strictly following the Covid rules, people are protecting their village from the corona, proper arrangements are also being made for those who are coming from outside. Many young people have also come forward in the cities, working together with the local residents, in order to prevent the rise of Corona cases in their area. Meaning, on the one hand, the country is working day and night for hospitals, ventilators and medicines and on the other hand, the countrymen are also fighting the challenge of Corona with a lot of heart. This resolve gives us so much strength, so much confidence. Whatever efforts are being made are of great service to the society. They strengthen the power of society.

My dear countrymen, today we kept the entire conversation of 'Mann Ki Baat' focused on the corona pandemic, because, today, our biggest priority is to defeat this disease. Today is also Bhagwan Mahavir Jayanti. On this occasion, I convey my good wishes to all the countrymen. The messages of Bhagwan Mahavir inspire us towards perseverance and self-restraint. The holy month of Ramzan is also going on. There is also Buddha Purnima ahead. There is also the 400th Prakash Parv of Guru Tegh Bahadur ji. A landmark day ahead is PochisheBoishak - Tagore Jayanti. All these inspire us to perform our duties. As a citizen, the more we perform our duties with efficiency in our lives, the faster we will move on the path of the future, free from crisis. With this wish, I once again urge all of you to get vaccinated and we also have to take full care. ‘Dawaibhi, Kadaibhi’ - Get vaccinated and maintain all precautions. Never forget this mantra. We will soon prevail together over this calamity. With this belief, I thank you all very much. Namaskar!