Shri Narendra Modi's speech at Young Indian Leaders Conclave

Published By : Admin | June 29, 2013 | 11:26 IST

पने अनुभवी और वरिष्ठ महानुभावों को सुना है, लेकिन आपको भी बहुत कुछ कहना होगा, आपके मन में भी बहुत सी बातें होंगी और मैं ऐसा अनुभव करता हूँ कि जब सुनते हैं तो आपकी सोच, आपकी भावना, आपके सोचने का दायरा, इन द गिवन सर्कम्स्टैंसिस ऐन्ड सिच्यूएशन्स, इन सारी बातें हम लोगों के लिए एक थॉट प्रोवोकिंग प्रोसेस के लिए सीड्स का काम करती है और अगर मुझे इनोवेशन्स भी करने हैं, नए आईडियाज़ को भी विकसित करना है, तो मुझे भी कहीं ना कहीं सीड्स की जरूरत पड़ती है, खाद और पानी डालने का काम मैं कर लूँगा..! और ऐसा मौका शायद बहुत कम मिलता है..! मैं इसका पूरा फायदा उठाना चाहता हूँ और आप मुझे निराश नहीं करेंगे, इसका मुझे पूरा विश्वास है..!

दूसरी बात है, मैं सी.ए.जी. के इन सारे नौजवान मित्रों का अभिनंदन करना चाहता हूँ..! जितना मैं समझा हूँ, मुझे पूरा बैक ग्राउंड तो मालूम नहीं लेकिन मुझे जितना पता चला है, एक प्रकार से नेटीज़न का ये पहला बच्चा है, सोशल मीडिया का एक स्टेप आगे हो सकता है। ये देश में शायद पहला प्रयोग मैं मानता हूँ कि सभी नौजवान फेसबुक, ट्विटर से एक दूसरे से मिले, उनका एक समूह बना, समूह ने कुछ सोचा और कुछ करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मैं समझता हूँ कि सोशल मीडिया का ये भी एक एक्शन प्लेटफार्म हो सकता है। देश में सोशल मीडिया के क्षेत्र में काफी लोग एक्टिव हैं उनके लिए एक बहुत बड़ा उदाहरण रूप काम ये सी.ए.जी. के मित्रों ने किया है, इसलिए उनको मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूँ..!

दूसरा मैं देख रहा हूँ उनकी टीम स्पिरिट को..! सुबह से ये चल रहा है लेकिन तय करना मुश्किल है कि ये कौन कर रहा है, इसको कौन चला रहा है..! मित्रों, ये एक बहुत बड़ी ताकत है कि इतना सारा करना, इतने सारे लोगों को उन्होंने संपर्क किया, महीनों तक काम किया होगा, लेकिन उनमें से कोई एक चेहरा सामने नहीं आ रहा है, फोटो निकालने के लिए भी कोई धक्का-मुक्की नहीं कर रहा है..! मैं मानता हूँ कि ये कोई छोटी चीज नहीं है। मैं कब से नोटिस कर रहा हूँ और मैं नौजवानों की इस एक चीज से मैं कह सकता हूँ कि आप बहुत सफल होंगे, आपके प्रयास में बहुत सफल होंगे ऐसा मैं मानता हूँ..! खैर मित्रों, जितना समय ये मित्र देंगे, आखिर में मेरे लिए पाँच मिनट रखना, बाकी मैं सुनना चाहता हूँ..! आप मुझे अपने विचार बताएं। देखिए, ये सवाल जो है ना, वो अनएंडिग प्रोसेस है। अर्जुन ने इतने सवाल पूछे, कृष्ण ने इतने जवाब दिए फिर भी सवाल तो रहे ही हैं..! तो उसका कोई अंत आने वाला नहीं है। अच्छा होगा आप मन की बात बताएं तो हम सोचें..! डॉ. जफर महमूद ने बात बताई थी तो वो भी एक थॉट प्रोवोकिंग होता है, कि चलिए ये भी एक दृष्टिकोण है। वी मस्ट ट्राय टू अन्डरस्टैंड अदर्स, उस अर्थ में मैं इस युवा पीढ़ी को भी जानना समझना चाहता हूँ..!

थैक्यू दोस्तों, आप लोगों ने बहुत कम शब्दों में और अनेकविध विषयों को स्पर्श करने का प्रयास किया..! और मेरे लिए भी ये एक अच्छा अनुभव रहा और ये चीजें काम आएंगी..! मैं याद करने की कोशिश कर रहा था लेकिन मेरे मित्र लिख भी रहे थे इसलिए आप की बातें बेकार नहीं जाएगी। वरना कभी-कभी ऐसा होता है कि हाँ यार, कह तो दिया, लेकिन पता नहीं आगे क्या होगा..!

दो-तीन विषयों को मैं छूना चाहूँगा। जैसे अभी यहाँ हमारे एज्यूकेशन की जो दुदर्शा है उसका वर्णन किया गया। एक छोटा प्रयोग हमने गुजरात में किया। जब मैं पहली बार मुख्यमंत्री बना और मेरी अफसरों के साथ जो पहली मीटिंग थी तो उसमें ध्यान में आया कि हम गर्ल चाइल्ड एज्यूकेशन में देश में बीसवें नंबर पर खड़े थे। आई वॉज़ शॉक्ड, मैंने कहा हम गुजरात को इतना फॉरवर्ड और डेवलप्ड स्टेट मानते हैं, क्या हो गया हमारे राज्य को..! हमारे अफसरों के पास जवाब नहीं था। तो हमने सोचा कि हमको इसमें जिम्मा लेना चाहिए, इसमें कुछ करना चाहिए। हमने गर्ल चाइल्ड एज्यूकेशन का मूवमेंट चलाया। और गर्ल चाइल्ड एज्यूकेशन का मूवमेंट यानि जून महीने में मैं खुद गाँवों में जाता हूँ, जबकि यहाँ टेंपेरेचर होता है 45 डिग्री..! हम जाते हैं, तीन दिन गाँव में रहतें हैं, लोगों से मिलते हैं और हम लगातार पिछले दस साल से इस काम को कर रहे हैं..! आज स्थिति ये आई कि 100% एनरोलमेंट करने में हम सफल हुए हैं..! और मैं जब 100% कहता हूँ तो फिर वो सेक्यूलरिज्म की डिबेट बाजू में रह जाती है, क्योंकि 100% आया मतलब सब आ गए..! फिर वो जो बेकार में समाज को तोड़ने-फोड़ने की भाषा होती है उसका कोई रोल ही नहीं रहता है। अपने आप सॉल्यूशन निकल जाता है। फिर हमारे ध्यान में आया कि टीचर कम है, तो टीचर रिक्रूट किए, फिर हमारे ध्यान में आया इन्फ्रास्ट्रक्चर कम है, तो इन्फ्रास्ट्रक्चर किया, फिर हमें लगा कि क्वालिटी ऑफ एज्यूकेशन में प्राब्लम है, तो लाँग डिस्टेंस एज्यूकेशन को हमने बल दिया, हमने ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी की, स्कूलों को बिजली का कनेक्शन दिया, स्कूलों में कम्प्यूटर दिए, एक के बाद एक हम करते गए..! उसके बाद भी ध्यान में आया कि भाई अभी भी इम्प्रूवमेंट नहीं हो रहा है। सुधार हुआ है पर गति तेज नहीं है, तो वी स्टार्टेट अ प्रेाग्राम कॉल्ड ‘गुणोत्सव’..! हमारे देश में इंजीनियरिेंग कॉलेज का ग्रेडेशन है, बिजनेस कॉलेज का ग्रेडेशन है। ‘ए’ ग्रेड के बिजनेस इन्सटीटयूट कितने हैं, ‘ए’ ग्रेड के मेडिकल कॉलेज कितने हैं..! हमने शुरू किया, ‘ए’ ग्रेड के गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल कितने हैं, ‘बी’ ग्रेड के कितने हैं, ‘सी’ ग्रेड के कितने हैं, ‘डी’ ग्रेड के कितने हैं..! और इतना बारीकी से काम किया, 40 पेज का एक क्वेश्चनर तैयार किया। कोई तीन सौ-चार सौ से भी ज्यादा सवाल हैं..! 40 पेज का क्वेश्चनर ऑनलाइन टीचर्स को दिया जाता है। स्कूल के लोगों को उसे भरना होता है। उसमें हर चीज होती है, बच्चे को पढ़ना-लिखता आता है, पढ़ने के संबंध में आप 10 में से कितने मार्क्स दोगे, स्कूल में सफाई है तो 10 में से कितने दोगे, अगर लाइब्रेरी का उपयोग हो रहा है तो 10 में से कितने दोगे, वो अपने आप भर कर देते हैं। फिर सारी सरकार गणोत्सव के लिए गाँव जाते हैं, मैं खुद भी तीन दिन जाता हूँ। बच्चे स्कूलों में पढ़ते हैं, उन्हें पढ़ना, लिखना, मैथेमेटिक्स वगैरह आता है, लाइब्रेरी का उपयोग, कम्प्यूटर का उपयोग, ये सारे चीजें बारीकी से हम देखतें है। और जो क्वेश्चन पेपर टीचर्स को दिया होता है, वो जो जाते हैं उनको भी दिया जाता है। जो जाते है उनको भी किस जगह पर जाते हैं वो पहले से नहीं बताया जाता, लास्ट मोमेंट उनका लिफाफा खुलता है और उस जगह पर उनको जाना होता है ताकि कोई मैनेज ना करे या पहले से कोई बात ना बताए। वो जो भरता है वो भी ऑनलाइन देते हैं। दोनों का कम्पेयर करते हैं, टीचर्स ने दिया था वो और जो सुपरवाइजर हमारे यहाँ से गया था वो, चाहे चीफ मीनिस्टर गया हो, मीनिस्टर गया हो, आई.ए.एस. अफसर जाते हैं, आई.पी.एस. ऑफिसर जाते हैं, सारे लोग देखते हैं। हमारा सबसे अच्छा एक्सपीरियंस ये था कि वहाँ के स्कूल के लोगों ने जो जवाब दिए थे और बाहर से गए हुए लोगों के जो जवाब थे, उनमें उन्नीस बीस का फर्क था, ज्यादा फर्क नहीं था..! ये अपने आप में सबसे अच्छा सिम्पटम था कि लोग सच बोल रहे थे और ध्यान में आया कि ‘ए’ ग्रेड की स्कूलें बहुत कम हैं, बहुत कम..! फिर हमने टारगेट दिया कि अच्छा भाई, ये बताओ कि अगली बार ‘ए’ ग्रेड की स्कूलें कितनी होंगी..? तो सचमुच में एज्यूकेशन पर बल दिया गया। वरना हमारा आउट-ले है, आउट-पुट है, बजट है, टीचर्स हैं, इन्फ्रास्ट्रक्चर है, सब है, सिर्फ शिक्षा नहीं है..! समस्या का समाधान निकलता है।

ब जैसे हमारे यहाँ एक विषय आया कि भाई, सरकार में पता नहीं फाइल कहाँ जाएगी, आदमी कहाँ जायेगा, पता नहीं रहता, दिक्कत रहती है..! मैंने एक बार हमारे अफसरों को कहा था कि मुझे तो लोग हिन्दुवादी मानते हैं और हिन्दुत्व से जुड़ा हुआ मुझे माना जाता है। हमने कहा, हिंदु धर्म में कहा है कि चार धाम की यात्रा करो तो मोक्ष मिल जाता है, लेकिन ये सरकार में फाइल जो है वो चालीस धाम की यात्रा करे तो भी उसका मोक्ष नहीं होता है..! मैंने कहा कम से कम कुछ तो करो भाई, फाइल बस जाती रहती है, घूमती रहती है..! एक बार मैंने मेरे अफसरों को बुलाया, मैंने कहा मान लीजिए कि एक विडो है, उस विडो को सरकार की तरफ से सोइंग मशीन लेने का अधिकार है। सरकार ने बनाया है नियम, उसको मिलना चाहिए। मुझे बताइए, वो विडो को ये सोइंग मशीन कैसे मिलेगा..? मैंने आई.ए.एस. अफसरों को पूछा था। मैंने कहा, कागज पर लिखो वन बाई वन स्टेप कि पहले वो कहाँ जाएगी, फार्म कहाँ से लेगी, फिर किस दफ्तर में जाएगी, फिर कहाँ देगी, कितनी फीस देगी..! यू विल बि सरप्राइज्ड, मेरी सरकार के वो दस अफसर बैठे थे, दस में से एक भी नहीं बता पाया कि वो विडो अपने हक का सोइंग मशीन कहाँ से लेगी..! फिर मैंने उनसे पूछा कि तुम इतने सालों से सरकार में हो, इतने सालों से तुम कानून और नियम बनाते हो, तुम्हें मालूम नहीं है तो एक बेचारी अनपढ़ महिला को कैसे मालूम पड़ेगा..? आई रेज़्ड द क्वेश्चन। उनको भी स्ट्राइक हुआ..! मित्रों, उसमें से हमारे यहाँ गरीब कल्याण मेला, एक कॉन्सेप्ट डेवलप हुआ और सरकार की इस योजना में लाभार्थी खोजने के लिए मैं सरकार को भेजता हूँ। पहले लोग सरकार को खोजते थे, हमने बदला, सरकार लोगों तक जाएगी..! वो लिस्ट बनाते हैं, कि भाई, ये हैन्डीकैप है तो इसको ये मिलेगा, ये विडो है तो इसको ये मिलेगा, ये सीनियर सिटीजन है तो इसको ये मिलेगा, ये ट्राइबल है तो इसको ये मिलेगा... सारा खोजते हैं और गरीब कल्याण मेले में सबको लाने की सरकारी खर्च से व्यवस्था करते हैं और मीडिया की हाजिरी में, लाखों लोगों की हाजिरी में पूरी ट्रांसपेरेंसी के साथ उनको वो दिया जाता है और दिया जाता है इतना ही नहीं, गाँव में बोर्ड लगाया जाता है कि आपके गाँव के इतने-इतने लोगों को ये ये मिला है। कोई गलत नाम होता है तो लोग कहेंगे कि भाई, ये मगनभाई के यहाँ तो ट्रेक्टर है और ये साइकिल ले कर आ गया सरकार से, यानि शर्म आनी शुरू हुई तो ट्रांसपेरेंसी आनी अपने आप शुरु हो जाती है। सारे लिस्ट को ऑनलाइन रखा।

लोग कहते हैं कि जन भागीदारी कैसे लाएं..? एक सवाल आया। देखिए, बहुत आसानी से होता है। सरकार में एक स्वभाव होता है सीक्रेसी का..! उसके दिमाग में पता नहीं कहाँ से भर गया है। एक बात दूसरे को पता ना चले, एक टेबिल वाला दूसरे टेबिल वाले को पता नहीं चलने देता, एक डिपार्टमेंट वाला दूसरे डिपार्टमेंट वाले को पता चलने नहीं देता, एक चैंबर वाला दूसरे चैंबर वाले को पता नहीं चलने देता... कोई बड़ा धमाका होने वाला हो ऐसी सोच रखते हैं..! मैंने कहा ये सब क्या कर रहे हो, यार..? नहीं बोले, ये तो जब फाइनल होगा तब कहेंगे..! मैंने सवाल उठाया, क्यों..? मित्रों, आपको जान कर खुशी होगी, मेरे यहाँ नियम है कि कोई भी पॉलिसी बन रही है तो उसकी ड्राफ्ट पॉलिसी हम ऑनलाइन रखते हैं। वरना पॉलिसी आना यानि सरकार कोई बहुत बड़ा धमाका करने वाली हो, ऐसा टैम्प्रामेंट था..! ड्राफ्ट पॉलिसी हम ऑनलाइन रखते हैं और लोगों को कहते हैं कि बताओ भाई, इस पॉलिसी में आप लोगों का क्या कहना है..? मित्रों, एसेम्बली में डिबेट होने से पहले जनता में डिबेट हो जाता है और वेस्टेड इंटरेस्ट ग्रुप भी उसमें अपना जितना मसाला डालना चाहते हैं, डालते हैं, न्यूट्रल लोग भी डालते हैं, विज़नरी लोग भी डालते हैं। हमारे सरकार में बैठे लोगों की अगर सोचने की मर्यादाएं हैं तो हमारा विज़न एक्सपेंड हो जाता है क्योंकि इतने लोगों का इनपुट मिल जाता है। कभी हमने किसी बद इरादे से... मान लीजिए, बाईं ओर जाने का तय किया है तो लोगों का प्रेशर इतना है कि तुम गलत कर रहे हो, राइट को जाना पड़ेगा, तो उस पॉलिसी ड्राफ्ट में ही इतना सुधार आ जाता है कि वो राइट ट्रेक पर आ जाती है..! और आपको जान कर खुशी होगी मित्रों, इसके कारण हमारे पॉलिसी डिस्प्यूट मिनिमम हो रहें हैं और इस पॉलिसी के कारण डिसिजन लेने में सुविधा मिलती है। ये जन भागीदारी का उत्तम नमूना है मित्रों, यानि पॉलिसी मेकिंग प्रोसेस में भी आप लोगों को जोड़ सकते हैं, ये हमने गुजरात में कर के दिखाया है..! उसी प्रकार से, कभी-कभी एक काम आपने सोचा है, लेकिन सरकार क्या करती है, सरकार कहती है कि ये हमारा बहुत बड़ा विजनरी काम है, हम जनता पे थोप देंगे..! मित्रों, ये लोकतंत्र है, सरकारों को जनता पर कुछ भी थोपने का कोई अधिकार नहीं है..! मैं बारह साल सरकार में रहने के बाद हिम्मत के साथ ये बोल सकता हूँ कि जनता को साथ लेना ही चाहिए और आप जनता को साथ लेने में सफल हुए तो आप कल्पना नहीं कर सकते कि सरकार को कुछ नहीं करना पड़ता, सब काम जनता करके दे देती है..! मेरे यहाँ एक ‘सुजलाम् सुफलाम्’ कैनाल बन रहा था। वो करीब 500 किलोमीटर लंबा कैनाल था। मुझे कैनाल के लिए किसानों से जमीन लेनी थी और हमारे फ्लड वाटर को हम वहाँ पर डालना चाहते थे कि वो एक प्रकार से रिचार्जिंग का भी काम करेगी, ऐसी कल्पना थी। मैंने 10 डिस्ट्रिक्ट में दस-दस, पन्द्रह-पन्द्रह हजार लोगों के सेमीनार किये। खुद पावर पॉइंट प्रेजेन्टेशन करता था और उनको समझाता था कि ये कैनाल ऐसे जाएगी, इतने किलोमीटर का ये फायदा होगा, पानी पर्कोलेट होगा तो आपके कुंए में पानी आएगा, आपका बिजली का इतना खर्चा कम होगा, फसल आपकी तीन-तीन हो सकती है... सारा समझाया मैंने। आपको जानकर के आश्चर्य होगा मित्रों, दो सप्ताह के अंदर लोगों ने जमीन देने का काम पूरा किया..! दो साल में कैनाल बन गई, पानी पहुँच गया, तीन-तीन फसल लोगों ने लेना शुरू कर दिया। हमें कोई प्रॉबलम नहीं आया..! कहने का तात्पर्य ये है कि शासन जितना जनता जर्नादन के साथ जुड़ा होगा, उतनी परिणामों की संभावनाएं बढ़ जाती हैं..! अगर हम लोगों को रोकते हैं तो काम नहीं होता।

हाँ एक विषय आया, यंग जनरेशन को कैसे जोड़ा जाए..! मेरे यहाँ एक प्रयोग किया है, अभी वो फुलप्रूफ और परफेक्ट है ऐसा मैं क्लेम नहीं करता, लेकिन इतना मैं कनवींस जरूर हो गया हूँ कि वी आर इन अ राइट डायरेक्शन, इतना मैं कह सकता हूँ..! मैं ये नहीं कहता हूँ कि मुझे बहुत बड़ा कोई सॉल्यूशन मिल गया है..! उस में हमने सी.एम. फैलोशिप शुरू किया है। उसकी वैबसाइट भी है, आप कभी देख सकते हैं। और मैं नौजवानों को कहता हूँ कि भाई, ये भी एक जगह है जिसको एक्सपीरियंस करना चाहिए। और आपको जानकर के खुशी होगी मित्रों, मेरे यहाँ ढेड-ढेड, दो-दो करोड़ के जिनके पैकेज हैं ऐसे नौजवान अपनी नौकरी छोड़ कर के सरकार की टूटी-फूटी एम्बेसेडर में बैठ कर काम कर रहे हैं। हाईली क्वालिफाइड नौजवान, अच्छी पोजिशन में विदेशों में काम करने वाले नौजवान मेरी ऑफिस में काम कर रहे हैं..! और हर वर्ष जब हम ये करते हैं, तो बारह सौ-पन्द्रह सौ नौजवानों की एप्लीकेशन आती है। अभी मैं धीरे-धीरे इसको डेवलप कर रहा हूँ। थोड़ी कमियाँ हैं, थोडा फुलप्रूफ हो जाएगा तो मैं ज्यादा लोगों को भी लेने वाला हूँ। अब ये दो चीजे हैं, नौजवान को अवसर भी मिलता है, कॉरपोरेट वर्ल्ड में होने के बावजूद भी सरकार क्या होती है ये समझना उसके लिए एक अनूठा अवसर होता है, वो हम उसको दे रहे हैं। एट द सेम टाइम, सरकार की सोच में कोई इनिशियेटिव नहीं होता है, बस चलता रहता है। उसमें एक फ्रेश एयर की जरूरत होती है, नई सोच की जरूरत होती है और ये नई सेाच के लिए मुझे ये सी.एम. फैलोशिप बहुत काम आ रहा है। ये नौजवान इतने ब्राइट हैं, इतने स्मार्ट हैं, इतने क्विक हैं... अनेक नई-नई चीजें हमें देते रहते हैं और उसका हमें फायदा होता है..!

ब जैसे हमारे प्रोफेसर साहब अभी कह रहे थे कि इनोवेशन का काम होना चाहिए..! मित्रों, गुजरात देश का पहला राज्य है जिसने अलग इनोवेशन कमीशन बनाया है। और जो इनोवेशन करते हैं उसको हमारी एक कमेटी जाँच करती है, अगर हमको वो इनोवेशन स्केलेबल लगता है तो उसको हम कानूनन लागू करते हैं और उसके कारण हमारे यहाँ कई लोगों को नए-नए इनोवेशन करने का अवसर मिलता है। इतना ही नहीं, हमने एक और काम किया है। मेरा एक प्रोग्राम चलता है, ‘स्वांत: सुखाय’..! वो काम जिसको करने से मुझे आनंद आता है और जो जनता की भलाई के लिए होना चाहिए। और मेरी सरकार में किसी भी व्यक्ति को इस प्रकार का प्रोजेक्ट लेने की इजाजत है। इससे क्या हो रहा है, अपनी नौकरी करते-करते उसको एक आद चीज ऐसी लगती है जिसमें उसका मन लग जाता है। तो मैं उसको कहता हूँ कि रिसोर्स मोबलाइज़ करने की छूट है, लेकिन ट्रांसपरेन्सी होनी चाहिए..! और आप इस काम को कीजिए..! आज मेरा अनुभव है कि दस साल पहले जिन अफसरों ने स्वांत: सुखाय में कोई कार्यक्रम किया, जैसे मान लीजिए आप अंबाजी जाएंगे तो अंबाजी नगर में पीने के पानी की दिक्कत थी। तो वहाँ हमारा फॉरेस्ट डिपार्टमेंट का एक अधिकारी था, उसने अंबाजी के नजदीक जो पहाड़ियाँ थीं, वहाँ बहुत बड़ी मात्रा में उसने चैक डेम बनाए और पर्वत का पानी वहाँ रोकने की कोशिश की। ये प्रयोग इतना सफल रहा कि अंबाजी का पीने के पानी का प्रॉबलम सॉल्व हो गया। अब उसने तो अपना स्वांत: सुखाय काम किया, और आज तो उसको वहाँ से ट्रांसफर हुए दस साल हो गए, लेकिन आज अगर उसके रिश्तेदार आते हैं तो गुजरात में वो क्या दिखाने ले जाता है..? उस प्रोजेक्ट को दिखाने ले जाता है कि देखिए, मैं जब यहाँ था तो मैंने ये काम किया था..! ये जो उसका खुद का आंनद है, ये आनंद अपने आप इन्सपीरेशन को जनरेट करता है, ऑटो जनरेट हो जाता है। मैंने देखा है कि मेरे यहाँ बहुत सारे अफसर अपने संतोष और सुख के लिए, सरकार की मर्यादाओं में रहते हुए कोई ना कोई नया काम करते हैं। हम थोड़ा मौका दें, थोड़ा खुलापन दें, तो बहुत बड़ा लाभ होता है और गुड गर्वनेंस की दिशा में ऐसे सैकड़ों इनिशियेटिव्स आपको मिल सकते हैं और आज जो आपको परिणाम मिला है वो उसी के कारण मिला है।

दूसरी बात है, एक विषय आया था, जात-पात, धर्म और वोट बैंक का विषय आया था। मैं एक बार एक प्रधानमंत्री का भाषण लाल किले पर से सुन रहा था, एंड आई वॉज़ शॉक्ड..! देश के एक प्रधानमंत्री ने एक बार अपने भाषण में लाल किले पर से कहा था, हिन्दु, मुस्लिम, सिख, इसाई... ऐसा सब वर्णन किया था..! मैंने कहा, क्या जरूरत है भाई, मेरे देशवासियों इतना कहते तो नहीं चलता क्या..? बात मामूली लगेगी आपको..! क्या मेरे देश के प्रधानमंत्री लाल किले पर से मेरे प्यारे देशवासियों, ये नहीं बोल सकते थे क्या..? नहीं, उनको इसी में इन्टरेस्ट था..! मित्रों, गुजरात में आप लोगों ने मुझे सुना होगा। आज मुझे बारह साल हो गए मुख्यमंत्री के नाते, मेरे मुख से हमेशा निकला है, पहले बोलता था पाँच करोड़ गुजराती, फिर बोलता था साढ़े पाँच करोड़ गुजराती, आज बोलता हूँ छह करोड़ गुजराती..! मित्रों, एक नया पॉलिटिकल कोनोटेशन है ये और आने वाले लोगों को इसको स्वीकार करना पड़ेगा। मित्रों, क्या जरूरत है कि हम इस प्रकार की भिन्नताओं को रख कर के सोचते हैं..? कोई आवश्यकता नहीं है, मित्रों..!

हाँ पर एक विषय आया कि भाई, इलेक्टोरल रिफार्म में क्या किया। मैं मानता हूँ मित्रों, हमारे देश में इलेक्टोरल रिफार्म की बहुत जरूरत है, उसे और अधिक वैज्ञानिक बनाना चाहिए..! अब जैसे हमारे गुजरात में एक प्रयेाग किया ऑनलाइन वोटिंग का। गुजरात पहला राज्य है जिसने ऑनलाइन वोटिंग की व्यवस्था खड़ी की है और वो हमारा फुलप्रूफ सॉफ्टवेयर है, आप अपने घर से वोट दे सकते हैं। आप मानो उस दिन मुंबई में हो और चुनाव अहमदाबाद में हो रहा है, तो आप मुंबई से भी अपने मोबाइल या अपने कम्प्यूटर से वोट डाल सकते हैं..! हमने उसको प्रायोगिक स्तर पर हमारे पिछले चुनाव में किया था, लेकिन आने वाले दिनों में हम उसको और आगे बढ़ाना चाहते हैं। और तब पोलिंग बूथ पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, उसको उस दिन शहर में रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी..! लेकिन ये हमने स्थानिय निकायों के लिए किया है। पायलट प्रेाजेक्ट है लेकिन बहुत ही सक्सेस गया है, आने वाले दिनों में हम उसको स्केल-अप करना चाहते हैं..! हमने गुजरात में एक कानून बनाया था, दुर्भाग्य से हमारे गर्वनर साहब ने उसको साइन नहीं किया इसलिए वो अटका पड़ा है। हमने कहा कि पंचायती व्यवस्था में कम्पलसरी वोटिंग..! एसेम्बली या पार्लियामेंट के चुनाव का कानून मैं बना नहीं सकता, लेकिन कॉर्पोरेशन, नगरपालिका, जिला पंचायत, तालुका पंचायत, इसके लिए कम्पलसरी वोटिंग..! उसमें एक और विशेषता रखी है, कम्लसरी वोटिंग के साथ-साथ आपको ये जो दस नौजवान खड़े हैं, जो दस दूल्हे आए हैं, अगर ये सब आपको पसंद नहीं है तो इन सबको रिजेक्ट करने का भी वोट..! मित्रों, देश में बुरे लोगों को उम्मीदवार बनाने की जो फैशन चली है और आखिरकार आपको किसी एक उम्मीदवार को पंसद करना पड़ता है, तो लेसर एविल वाला जो कंसेप्ट डेवलप हुआ है उसमें से देश को बाहर लाना पड़ेगा और हम सबको रिजेक्ट करें ये व्यवस्था हमको डेवलप करनी होगी और इतने परसेंट से ज्यादा रिजेक्शन आता है तो वो सारे के सारे कैन्डीटेड चुनाव के लिए ही बेकार हो जाएंगे, वहाँ चुनाव की प्रोसेस नए सिरे से होगी..! तब पॉलिटिकल पार्टियाँ अच्छे लोगों को उम्मीदवार बनाने के लिए मजबूर होगी, मित्रों। और अच्छे लोगों को उम्मीदवार बनाना उनकी मजबूरी होगी, तो मैं मानता हूँ कि जो आप चाहते हैं कि अच्छे लोग क्यों राजनीति में नहीं आते, उनके आने की संभावना बढ़ जाएगी, मित्रों..! आज क्या है, वो अपने हिसाब से चलते हैं। यही है, वोट ले आइए यार, कुछ भी करो, चुनाव जीतना है..! मजबूरी है लेकिन रास्ते भी है, अगर कोई तय करके रास्ते निकाले तो रास्ते निकल सकते हैं..!

ब हमने एक प्रयोग किया, मित्रों..! मैं छोटा था तब मेरे गाँव में डॉ. द्वारकादास जोशी नाम के सर्वोदय के बहुत बड़े लीडर थे। विनोबा जी के बड़े निकट थे और बड़ा ही तपस्वी जीवन था। और हमारे गाँव में हमारे लिए वो हीरो थे, हमारे लिए वो ही सबकुछ थे, वो ही हमको सबकुछ दिखते थे और उनकी बातें हमको याद भी रहती थी। विनोबा जी और गांधीजी दोनों ने एक बात बहुत अच्छी बताई थी। विनोबा जी ने विशेष रूप से उसका उल्लेख किया था। वो कहते थे कि लोकसभा या एसेम्बली का चुनाव होता है, तो गाँव में ज्यादा दरार नहीं होती है। चुनाव होने के बाद गाँव फिर मिल-जुल कर आगे बढ़ता है। लेकिन गाँव के पंचायत के जो चुनाव होते हैं, तो गाँव दो हिस्सों में बंट जाता है और चुनाव के कारण कभी-कभी बेटी ब्याह की होगी वो भी वापिस आ जाती है..! क्यों..? क्योंकि चुनाव में झगड़ा हो गया..! तो गाँव के गाँव बिखर जाते हैं..! गाँव में मिल-जुल के सर्वसम्मति क्यों ना बने..? हमारी सरकार ने एक योजना बनाई ‘समरस गाँव’..! गाँव मिल कर के यूनेनिमसली अपनी बॉडी तय करे। उसमें 30% महिला का रिर्जवेशन होगा, दलितों का होगा, ट्राइबल का होगा, जो नियम से होगा वो सब कुछ होगा..! जब पहली बार मैं इस योजना को लाया था... मैं 7 अक्टूबर, 2001 को मुख्यमंत्री बना था और 11 अक्टूबर, 2001 जयप्रकाश नारायण जी का जन्म दिन था, तो मैंने चार दिन बाद जयप्रकाश जी के जन्म दिन पर इस योजना को घोषित किया था। क्योंकि मैं आया उसके दो या तीन दिन बाद दस हजार गाँव में चुनाव होने वाले थे। तो मैंने सेाचा कि भई इस पर सोचना चाहिए, तो मैंने ‘समरस गाँव’ योजना रखी। मित्रों, आपको जानकर के खुशी होगी कि मेरे यहाँ वॉर्ड, नगर सब मिलाकर मैं देखूं, तो टोटल इलेक्टोरेट में से 45% यूनेनिमस हुआ था, 45%..! आज के युग में ये होना अपने आप में बहुत बड़ी ताकत है। फिर हमने डेवलपमेंट के लिए उनको एक स्पेशल ग्रांट दिया। आगे बढ़ कर के क्या हुआ कि कुछ गाँव में सरपंच के रूप में महिला की बारी थी। उन गाँवों के लोगों ने तय किया कि भाई, इस बार महिला सरपंच है तो सारे मैम्बर भी महिलाओं को बनाएंगे..! और मेरे यहाँ 356 गाँव ऐसे हैं जहाँ एक भी पुरूष पंचायत का मैम्बर नहीं है, 100% वुमन मैंबर हैं और वो पंचायत अच्छे से अच्छे चलाती हैं..! वुमन एम्पावरमेंट कैसे होता है..! मित्रों, सारे निर्णय वो करती है। इसके लिए मैंने फिर क्या किया कि उन महिलाओं को सफल होने के लिए कुछ मेहनत करनी चाहिए थी, तो मैंने ऑफिशियल लेवल पर व्यवस्था की कि भाई, ये महिला पंचायतें जो हैं, इनको जरा स्पेशल अटेंशन दीजिए, स्पेशल ग्रांट भी देनी पड़े तो दीजिए। आज परिणाम ये आया कि पुरूषों के द्वारा चालाई जा रही और पंचायतों से ये महिलाएं सफलता पूर्वक आगे बढ़ रही हैं..!

मित्रों, ऐसा नहीं है कि सारे दरवाजे बंद हैं, अगर खुला मन रख के, सबको साथ लेकर के चलें... और मेरी सरकार का तो मंत्र है, ‘सबका साथ, सबका विकास’..! मित्रों, सरकार को डिस्क्रिमिनेशन करने का अधिकार नहीं है, सरकार के लिए सब समान होने चाहिए, ये हमारा कन्वीक्शन है। लेकिन अगर देश में गरीबी है तो उसका रिफ्लेक्शन सभी जगह होगा। इस पंथ में भी होगा, उस पंथ में भी होगा, इस इलाके में भी होगा, उस इलाके में भी होगा। अशिक्षा है तो अशिक्षा यहाँ भी होगी, अशिक्षा वहाँ भी होगी। लेकिन जानबूझ कर किसी को अशिक्षित रखा जाए, ये भारत का संविधान किसी को अनुमति नहीं देता है और ना ही हिन्दुस्तान के संस्कार हमें अनुमति देते हैं..! इन मूलभूत बातों को ध्यान में रख कर के आगे बढ़ने का प्रयास करने से परिणाम आ सकता है।

हुत अच्छे विषय मुझे आपसे जानने को मिले हैं..! एक विषय आया है एग्रीकल्चर का..! हमारे कश्मीर के मित्र ने भी अच्छे शब्दों का प्रयोग किया कि देश में बहुत प्रकार के कल्चर हैं, लेकिन कॉमन कल्चर एग्रीकल्चर है..! नाइसली प्रेज़न्टेड..! ये बात सही है मित्रों, एग्रीकल्चर में हम पुराने ढर्रे से चल रहे हैं, थोड़ा मॉर्डन, साइंटिफिक अप्रोच एग्रीकल्चर में बहुत जरूरी है। बहुत जल्दी हमें एग्रोटैक की आवश्कता होगी। और नेक्स्ट सितंबर, मोस्ट प्रॉबेबली, 10, 11 और 12 को हम एशिया का सबसे बड़ा एग्रोटैक फेयर यहाँ आयोजित कर रहे हैं। क्योंकि मेरे किसान एग्रो-टैक्नोलॉजी को कैसे उपयोग में लाए, एग्रीकल्चर सैक्टर में कैसे वो प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं, इस पर हम ज्यादा बल दे रहे हैं। और अल्टीमेटली देश की जो माँग है, देश का जो पेट है उस पेट को भरना है और जमीन कम होती जा रही है, लोगों की खेती में संख्या कम होती जा रही है, जैसे अभी हमारे कलाम साहब ने भी बताया। तो उसका मतलब हुआ कि हमको एग्रोटैक पर जाना पड़ेगा, प्रोडक्टिविटी बढ़ानी पड़ेगी। मैं कभी-कभी कहता हूँ कि ‘फाइव-एफ’ फॉर्मूला तथा ‘ई-फोर’ फॉर्मूला..! एग्रीकल्चर सैक्टर में मैं कहता हूँ कि जैसे मेरे यहाँ कॉटन ग्रोइंग है, तो मैंने कहा कि भाई, आज हम कॉटन एक्सपोर्ट करते हैं। कभी भारत सरकार कॉटन एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध लगा देती है, पिछली बार मेरे किसानों को 7000 करोड़ का नुकसान हो गया। हमने कहा नाउ वी हैच टू चेंज आवर पॉलिसी..! हम क्यों डिपेन्डेंट रहें..? इसलिए वी ब्रोट अ ‘फाइव-एफ’ फॉर्मूला, और ‘फाइव-एफ’ फॉर्मूला में फार्म टू फाइबर, फाइबर टू फैब्रिक, फैब्रिक टू फैशन और फैशन टू फॉरेन... वही कपास, कपास का धागा, धागे का कपड़ा, कपड़े से रेडिमेड गारमेंट, रेडिमेड गारमेंट से एक्सपॉर्ट..! देखिए, वैल्यू एडिशन की दिशा में हमको जाना पड़ेगा..! मित्रों, हम पोटेटो बेचते हैं, बाजार में 10 रूपया दाम होगा तो महिला सोचती है कि एक किलो की बजाए पाँच सौ ग्राम ले जाँऊगी..! लेकिन अगर हम पोटेटो चिप्स बना कर के बेचते हैं, तो मेरे किसान की आय ज्यादा होती है। हमें वैल्यू एडीशन की ओर बल देना होगा, तभी हमारे किसानों को वो खेती वायेबल होगी। हम उस पर बल देने के पक्ष में रहे हैं और उस दिशा में वैज्ञानिक ढंग से काम भी कर रहे हैं।

मित्रों, आपको जानकर के हैरानी होगी और मैं हैरान हूँ कि हमारे देश की मीडिया का ध्यान इस बात पर क्यों नहीं गया है। एक बहुत बड़ा सीरियस डेवलपमेंट हो रहा है। भारत सरकार यूरोपियन देशों के साथ वार्ता कर रही है, एक एम.ओ.यू. साइन होने की दिशा में जा रहे हैं। और वो क्या है..? ये देश कैसा है, कि हिन्दुस्तान से मटन एक्पोर्ट करने के लिए सब्सीडि दी जा रही है, प्रमोशन एक्टीविटी हो रही है, इनकम टैक्स एक्ज़मशन हो रहा है और देश के लिए मिल्क एंड मिल्क प्रोडक्ट यूरोप से इम्पोर्ट करने के लिए एम.ओ.यू. हो रहा है..! मैं हैरान हूँ कि ये देश कैसे चलेगा..! जैसे हमारे यहाँ पर गुजरात में मिल्क प्रोडक्ट के साथ में अमूल जैसी इतनी बड़ी इंस्टीट्यूशन खत्म हो जाएगी..! लेकिन फिर भी वो उस दिशा में जा रहे हैं, यानि उनके निर्णय में कौन सा प्रेशर है, किसका प्रेशर है ये खोज का विषय है। लेकिन लॉजिक नहीं है..! हमारे हिन्दुस्तान के कैटल की प्रोडक्टिविटि कैसे बढ़े, हमारी रिक्वायर्मेंट की पूर्ति कैसे हो, आपको इन बातों पर बल देना चाहिए, लेकिन अगर मीट पर ज्यादा इनकम होती है तो अच्छे-अच्छे दूध देने वाले पशु भी काट कर विदेश भेजे जाएंगे और विदेश वालों का फायदा ऐसे होगा कि वहाँ से मिल्क यहाँ एक्सपोर्ट करेंगे, उनको बहुत बड़ी पैदावार होगी..! मित्रों, ऐसी मिस मैच पॉलिसी लेकर के आते हैं जिसके कारण देश तबाह हो रहा है..! हम आगे चल कर देखेंगे कि इसको कैसे सही रूप में समझा जाए..! अभी तो मेरे पास बहुत प्राइमरी नॉलेज है, मैं पूरी जानकारी इकट्ठी कर रहा हूँ। मैं अभी किसी पर ब्लेम नहीं कर रहा हूँ, लेकिन मैंने जितना सुना है, जाना है, अगर ये सही है तो चिंता का विषय है..! और इसलिए मैं मानता हूँ कि हमें एक कन्सीस्टेंट पॉलिसी के साथ एग्रीकल्चर क्षेत्र में काम करने की आवश्यकता है और हम उस काम को कर सकते हैं। हमें उस दिशा में प्रयास करना चाहिए।

स्मॉल स्केल इन्डस्ट्री की बहुत बड़ी ताकत होती है..! मित्रों, नौजवान को रोजी-रोटी कमाने के लिए भगवान ने दो हाथ दिए हैं, हमें उन हाथों को हुनर देना चाहिए, स्किल डेवलपमेंट..! और मैं तीन बातों पर बल देने के पक्ष में हूँ। अगर भारत को चाइना के साथ कम्पीटीशन करना है, और भारत का हमेशा चाइना के साथ कम्पीटीशन होना चाहिए..! भारत को पाकिस्तान के साथ स्पर्धा का मन छोड़ देना चाहिए। मित्रों, ये एक ऐसा दुर्भाग्य है कि आए दिन सुबह-शाम पाकिस्तान-इंडिया, पाकिस्तान-इंडिया चलता रहता है। अमेरिका से भी कोई विदेशी मेहमान आते हैं तो वो भी क्लब करके आते हैं, दो दिन हिन्दुस्तान में और एक दिन पाकिस्तान में..! मैं तो कहता हूँ कि प्रतिबंध लगाओ कि भाई, हिन्दुस्तान आना है तो सीधे-सीधे यहाँ आओ और यहाँ से सीधे-सीधे अपने घर वापिस जाओ..! हिन्दुस्तान को अगर कम्पीटिशन करनी है तो एशियन कन्ट्रीज में हम चाइना के साथ तुलना में कहाँ खड़े हैं, जापान के साथ आज तुलना में कहाँ खड़े हैं, अर्बन डेवलपमेंट में हम सिंगापुर के सामने आज कहाँ खड़े हैं..! हमारी सोच बदलनी होगी, मित्रों..! मूलभूत रूप में हम इस दायरे से बाहर नहीं आएंगे तो हम लंबे विज़न के साथ काम नहीं कर सकते। ये बात सही है कि एक्सटर्नल अफेयर्स मिनिस्ट्री का रोल बदल चुका है, लेकिन वो समझने को तैयार नहीं हैं..! वो कभी जमाना रहा होगा जब यू.एन.ओ. का जन्म हुआ होगा, लेकिन सारी चीजें अब इररिलेवेंट हो रही हैं..! आज एक्सटर्नल अफेयर्स मिनिस्ट्री का काम ट्रेड एंड कॉमर्स हो गया है। डिप्लोमेसी वाले दिन चले गए हैं, मित्रों। डिप्लोमेसी नेबरिंग कंट्री के साथ होती है, बाकी तो ट्रेड एंड कॉमर्स होता है। और इसलिए हमारी जो एक्सटर्नल अफेयर्स मिनिस्ट्री का पूरा मिशन है, उस मिशन के अंदर जो लोग रखे जाएं वो इस कैलीबर के रखने पड़ेंगे। उसका पूरी तरह रिइंजीनियरिंग करना पड़ेगा। अभी तो जो लोग बैठे हैं उनसे ये अपेक्षा तो नहीं कर सकते..! मित्रों, सारे विषयों पर एक नई सोच के साथ बहुत कुछ किया जा सकता है।

मय की सीमा है लेकिन आप सबसे सुनने का मुझे अवसर मिला। बहुत सी बातें हैं जिसमें अभी भी कुछ करना बाकी होगा, मेरे राज्य में भी बहुत सी बातें होंगी जिसमें अभी भी कुछ करना बाकी होगा। लेकिन जब लोगों से मिलते हैं, सुनते हैं तो ध्यान आता है कि हाँ भाई, इस बात की ओर ध्यान देना होगा, उस बात की ओर ध्यान देना होगा..! मुझे खुशी हुई, और खास तौर पर मैं सी.ए.जी. के मित्रों का आभारी हूँ। वैसे मेरे लिए कार्यक्रम था सुबह कलाम साहब के साथ आना, कलाम साहब का स्वागत करना, शुरू में मुझे कुछ बोलना, बाद में कलाम साहब का बोलना और उसके बाद मुझे जाना..! मैंने सामने से कहा था कि भाई, इतने लोग आ रहे हैं तो क्या मैं बैठ सकता हूँ..? तो सी.ए.जी. के मित्रों ने मुझे अनुमति दी की हाँ, आप बैठ सकते हैं, तो मैं उनका आभारी हूँ और मुझे कई प्रकार के कई विषयों को सुनने को मिला। और मित्रों, जैसे कलाम साहब कहते थे, राजनेताओं के लिए चाइना में एक अलग पद्घति है। वहाँ एक निश्चित पॉलिटिकल फिलॉसोफी है और उसको लेकर के चलते हैं। लेकिन हमने हमारे सिस्टम में ट्रेनिंग को बड़ा महत्व दिया है। आपको शायद पता होगा, जब पहली बार मेरी सरकार बनी तो पूरी सरकार को लेकर मैं तीन दिन आई.आई.एम. में पढ़ने के लिए गया था..! और आई.आई.एम. के लोगों को हमने कहा कि भई, बताइए हमको, सारी दुनिया को आप पढ़ाते हो, सारी दुनिया की कंपनीओं को आप चलाते हो, तो हमें भी तो चलाओ ना... और उन्होंने काफी मेहनत की थी। बहुत नए-नए विषयों को हमें पढ़ाया था। हमारे मंत्रियों के लिए भी उपयोगी हुआ था। मैं हमारे कुछ अफसरों को भी लेकर गया था। मैं मानता हूँ कि लर्निंग एक कन्टीन्यूअस होना चाहिए..! मेरे यहाँ सरकार के अफसरों के लिए एक वाइब्रेंट लेक्चर सीरीज चलता है। उस वाइब्रेंट लेक्चर सीरीज में मैं दुनिया के एक्सपर्ट लोगों को बुलाता हूँ और उनसे हम सुनने के लिए बैठते हैं। मैं भी जैसे यहाँ सुनने के लिए बैठा था, वहाँ बैठता हूँ। अभी जैसे पिछले हफ्ते मिस्टर जिम ओ’नील करके दुनिया के एक बहुत ही बड़े इकोनोमिस्ट हैं, वो आए थे। दो घंटे हमारे साथ बैठे, काफी बातें हुई..! तो मित्रों, कई विषय हैं जिस पर हम प्रयास कर रहे हैं। आपके मन में और भी कई सुझाव होंगे। मित्रों, मैं सोशल मीडिया में बहुत एक्टिव हूँ। सोशल मीडिया में आप जो भी सुझाव भेजोगे, मैं उसको पढ़ता हूँ, मेरे तक वो पहुंचते हैं..! जरूरी हुआ तो मैं सरकार में फॉलो करता हूँ। आप बिना संकोच आपके मन में जो बातें आएं, मुझे डायरेक्ट पोस्ट कर सकते हैं और मैं आपको विश्वास देता हूँ कि वो कहीं ना कहीं मेरे दिमाग के एक कोने में पड़ी होगी, कभी ना कभी तो वो पौधा बन के निकलेगी और हो सकता है वो पौधा वट वृक्ष बने, हो सकता है वही पौधा फल भी दे और हो सकता है कि वो फल को खाने वालों में आप स्वयं भी हो सकते हैं..! ऐसे पूरे विश्वास के साथ बहुत-बहुत धन्यवाद, बहुत-बहुत शुभकामनाएं, थैंक्यू..!

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શ્રી રામ જન્મભૂમિ મંદિર ધ્વજારોહણ ઉત્સવ દરમિયાન પ્રધાનમંત્રીના સંબોધનનો મૂળપાઠ

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ઉત્તર પ્રદેશના હરદોઈમાં ગંગા એક્સપ્રેસવેના ઉદ્ઘાટન પ્રસંગે પ્રધાનમંત્રીના સંબોધનનો મૂળપાઠ
April 29, 2026
This transformative infrastructure project will boost connectivity and drive progress across Uttar Pradesh: PM
Just as Maa Ganga has been the lifeline of UP and this country for thousands of years, similarly, in this era of modern progress, this expressway passing near her, will become the new lifeline of UP's development: PM
Recently, I had the opportunity to dedicate the Delhi-Dehradun Expressway to the nation.
I had then remarked that these emerging expressways are the lifelines shaping the destiny of a developing India, and these modern pathways are today heralding India's bright future: PM
Ganga Expressway will not only connect one end of UP to the other, it will also bring limitless possibilities of the NCR closer: PM

ભારત માતાની જય.

ગંગા મૈયાની જય.

ગંગા મૈયાની જય.

ઉત્તર પ્રદેશના રાજ્યપાલ આનંદીબેન પટેલ, અહીંના મુખ્યમંત્રી શ્રીમાન યોગી આદિત્યનાથજી, નાયબ મુખ્યમંત્રી કેશવ પ્રસાદ મૌર્ય, બ્રજેશજી પાઠક, કેન્દ્રીય મંત્રીમંડળના મારા સાથી જીતિન પ્રસાદજી, પંકજ ચૌધરીજી, યુપી સરકારના મંત્રીગણ, સાંસદ અને ધારાસભ્યગણ અન્ય જનપ્રતિનિધિઓ અને વિશાળ સંખ્યામાં પધારેલા મારા વહાલા ભાઈઓ અને બહેનો.

સૌ પ્રથમ, હું ભગવાન નરસિંહની આ પુણ્ય ભૂમિને પ્રણામ કરું છું. અહીંથી થોડા કિલોમીટરના અંતરે માં ગંગા કૃપા વરસાવતી વહે છે. તેથી, આ આખો વિસ્તાર કોઈ તીર્થથી ઓછો નથી. અને હું માનું છું કે યુપીને એક્સપ્રેસવેનું આ વરદાન મળ્યું છે, તે પણ માં ગંગાના જ આશીર્વાદ છે. હવે તમે થોડા જ કલાકોમાં સંગમ પણ પહોંચી શકો છો, અને કાશીમાં બાબાના દર્શન કરીને પણ પાછા આવી શકો છો.

 

સાથીઓ,

જેમ માં ગંગા હજારો વર્ષોથી યુપીની અને આ દેશની જીવનરેખા રહી છે, તેવી જ રીતે આધુનિક પ્રગતિના આ યુગમાં, તેમની નજીકથી પસાર થતો આ એક્સપ્રેસવે, યુપીના વિકાસની નવી લાઇફ લાઇન બનશે. એ પણ એક અદભૂત સંયોગ છે કે છેલ્લા ચાર-પાંચ દિવસમાં હું માં ગંગાના સાનિધ્યમાં જ રહ્યો છું. 24 એપ્રિલે જ્યારે હું બંગાળમાં હતો, ત્યારે મેં માં ગંગાના દર્શન કર્યા હતા, અને પછી ગઈકાલે તો હું કાશીમાં હતો. આજે સવારે જ ફરી બાબા વિશ્વનાથ, માં અન્નપૂર્ણા અને માં ગંગાના દર્શન કરવાનું સૌભાગ્ય મળ્યું છે. અને હવે માં ગંગાના નામે બનેલા આ એક્સપ્રેસવેના લોકાર્પણનો અવસર મળ્યો છે. મને ખુશી છે કે યુપી સરકારે આ એક્સપ્રેસવેનું નામ માં ગંગાના નામ પર રાખ્યું છે. આમાં વિકાસનું અમારું વિઝન પણ દેખાય છે, અને આપણી વિરાસતના પણ દર્શન થાય છે. હું યુપીના કરોડો લોકોને ગંગા એક્સપ્રેસવેના અભિનંદન પાઠવું છું.

સાથીઓ,

આજે લોકશાહીના ઉત્સવનો પણ એક મહત્વનો દિવસ છે. બંગાળમાં આ સમયે બીજા તબક્કાનું મતદાન થઈ રહ્યું છે, અને જે સમાચાર આવી રહ્યા છે, તેનાથી ખબર પડે છે કે બંગાળમાં ભારે મતદાન થઈ રહ્યું છે. પ્રથમ તબક્કાની જેમ જ જનતા મત આપવા માટે મોટી સંખ્યામાં ઘરોમાંથી બહાર નીકળી રહી છે, લાંબી લાંબી કતારોની તસવીરો સોશિયલ મીડિયામાં છવાયેલી છે. છેલ્લા 6-7 દાયકામાં જે નહોતું થયું, જેની કલ્પના પણ મુશ્કેલ હતી, તેવા નિર્ભય વાતાવરણમાં બંગાળમાં આ વખતે મતદાન થઈ રહ્યું છે. લોકો ભય મુક્ત થઈને મત આપી રહ્યા છે. આ દેશના બંધારણ અને દેશની મજબૂત થઈ રહેલી લોકશાહીનું પુણ્ય પ્રતિક છે. હું બંગાળની મહાન જનતાનો આભાર વ્યક્ત કરું છું કે તેઓ પોતાના અધિકાર પ્રત્યે આટલા સજાગ છે, મોટી સંખ્યામાં વોટિંગ કરી રહ્યા છે. હજુ વોટિંગ પૂરું થવામાં કેટલાય કલાકો બાકી છે, હું બંગાળની જનતાને આગ્રહ કરીશ કે લોકશાહીના આ પર્વમાં આવા જ ઉત્સાહથી ભાગ લે.

સાથીઓ,

થોડા સમય પહેલા જ્યારે બિહારમાં ચૂંટણી થઈ, ત્યારે ભાજપ NDAએ પ્રચંડ જીત નોંધાવી હતી, એક ઇતિહાસ રચી દીધો હતો. હમણાં જ ગઈકાલે ગુજરાતમાં મહાનગરપાલિકા, નગરપાલિકા, જિલ્લા પંચાયતો, નગર પંચાયતો, તાલુકા પંચાયત, આ તમામના ચૂંટણીના પરિણામો આવ્યા છે. અને મારા ઉત્તર પ્રદેશના વાસીઓને જાણીને ખુશી થશે કે, 80 થી 85 ટકા નગરપાલિકા અને પંચાયતો ભાજપે જીતી લીધી છે. અને મને વિશ્વાસ છે કે આ પાંચ રાજ્યોની ચૂંટણીમાં પણ ભાજપ ઐતિહાસિક જીતની હેટ્રિક લગાવવા જઈ રહી છે. 4 મેના પરિણામો, વિકસિત ભારતના સંકલ્પને મજબૂત કરશે, દેશના વિકાસની ગતિને નવી ઊર્જાથી ભરશે.

 

સાથીઓ,

દેશના ઝડપી વિકાસ માટે આપણે ઝડપથી આધુનિક ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચરનું પણ નિર્માણ કરવાનું છે. ડિસેમ્બર 2021 માં ગંગા એક્સપ્રેસવેનોં શિલાન્યાસ કરવા હું શાહજહાંપુર આવ્યો હતો. હજુ 5 વર્ષથી પણ ઓછો સમય થયો છે, અને તમે જુઓ, દેશના સૌથી મોટા એક્સપ્રેસવેમાં સામેલ યુપીનો સૌથી લાંબો ગ્રીન કોરિડોર એક્સપ્રેસવે, આ 5 વર્ષની અંદર જ બનીને તૈયાર થઈ ગયો છે. આજે હરદોઈથી તેનું લોકાર્પણ પણ થઈ રહ્યું છે. એટલું જ નહીં, એક તરફ ગંગા એક્સપ્રેસવેનું નિર્માણ પૂરું થયું છે, તો સાથે જ તેના વિસ્તરણની યોજના પર કામ પણ શરૂ થઈ ગયું છે. ટૂંક સમયમાં ગંગા એક્સપ્રેસવે મેરઠથી આગળ વધીને હરિદ્વાર સુધી પહોંચશે. તેના વધુ સારા ઉપયોગ માટે ફર્રુખાબાદ લિંક એક્સપ્રેસવેનું નિર્માણ કરી તેને અન્ય એક્સપ્રેસવે સાથે પણ જોડવામાં આવશે. આ છે ડબલ એન્જિન સરકારનું વિઝન! આ છે ભાજપ સરકારના કામ કરવાની ઝડપ! આ છે ભાજપ સરકારના કામ કરવાની રીત!

ભાઈઓ-બહેનો,

થોડા દિવસ પહેલા મને દિલ્હી-દહેરાદૂન એક્સપ્રેસવેના લોકાર્પણનો અવસર મળ્યો હતો. ત્યારે મેં કહ્યું હતું કે આ નવા બનતા એક્સપ્રેસવે, વિકસિત થતા ભારતની હસ્તરેખાઓ છે અને આ આધુનિક હસ્તરેખાઓ આજે ભારતના ઉજ્જવળ ભવિષ્યનો જયઘોષ કરી રહી છે.

સાથીઓ,

હવે એ સમય જતો રહ્યો જ્યારે એક રસ્તા માટે દાયકાઓ સુધી રાહ જોવી પડતી હતી! એકવાર જાહેરાત થઈ ગઈ, તો વર્ષો સુધી ફાઈલો ચાલતી હતી! ચૂંટણી માટે પથ્થર લાગી જતો હતો, ત્યારબાદ સરકારો આવતી-જતી રહેતી હતી, પરંતુ કામનું કંઈ નામનિશાન નહોતું મળતું. ક્યારેક તો જૂની ફાઈલો શોધવા માટે મોટા મોટા અફસરોને બબ્બે વર્ષ સુધી મહેનત કરવી પડતી હતી. ડબલ એન્જિન સરકારમાં શિલાન્યાસ પણ થાય છે અને નક્કી કરેલા સમયમાં લોકાર્પણ પણ થઈને જ રહે છે. એટલા માટે જ, આજે યુપીના એક્સપ્રેસવે કરતા પણ વધારે રફ્તાર જો ક્યાંય હોય, તો તે યુપીના વિકાસની રફ્તાર જ છે.

 

સાથીઓ,

આ એક્સપ્રેસવે માત્ર એક હાઈ-સ્પીડ રોડ નથી. આ નવી સંભાવનાઓનો, નવા સપનાઓનો, નવા અવસરોનો ગેટવે છે. ગંગા એક્સપ્રેસવે આશરે 600 કિલોમીટર લાંબો છે. પશ્ચિમ યુપીમાં મેરઠ, બુલંદશહેર, હાપુડ, અમરોહા, સંભલ અને બદાઉન. મધ્ય યુપીમાં શાહજહાંપુર, હરદોઈ, ઉન્નાવ, રાયબરેલી. પૂર્વી યુપીમાં પ્રતાપગઢ અને પ્રયાગરાજ, તેની આસપાસના બીજા જિલ્લાઓ, ગંગા એક્સપ્રેસવેથી આ વિસ્તારોના કરોડો લોકોનું જીવન બદલાશે.

સાથીઓ,

આ વિસ્તારોને ગંગા જી અને તેમની સહાયક નદીઓની ફળદ્રુપ જમીનનું વરદાન મળ્યું છે. પરંતુ, પહેલાની સરકારોએ જે રીતે ખેડૂતોની ઉપેક્ષા કરી, તેના કારણે ખેડૂતો મુશ્કેલીઓમાં જ ઘેરાઈને રહી ગયા! અહીંના ખેડૂતોના પાક મોટા બજારો સુધી પહોંચી શકતા નહોતા. કોલ્ડ સ્ટોરેજની અછત હતી. લોજિસ્ટિક્સનો અભાવ હતો. ખેડૂતોને તેમની મહેનતનું સાચું મૂલ્ય મળતું નહોતું. હવે તે મુશ્કેલીઓનું સમાધાન પણ ઝડપથી થશે. ગંગા એક્સપ્રેસવેથી ઓછા સમયમાં મોટા બજારો સુધી પહોંચ મળશે. અહીં ખેતી માટે જરૂરી ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચરનો વિકાસ થશે. તેનાથી આપણા ખેડૂતોની આવક વધશે.

સાથીઓ,

ગંગા એક્સપ્રેસવે યુપીના એક છેડાને બીજા છેડા સાથે તો જોડે જ છે. તે NCRની અસીમ સંભાવનાઓને પણ નજીક લાવશે. ગંગા એક્સપ્રેસવે પર ગાડીઓ તો દોડશે જ, તેની આસપાસ નવા ઔદ્યોગિક અવસરો વિકસિત થશે. આ માટે હરદોઈ જેવા બીજા જિલ્લાઓમાં ઇન્ડસ્ટ્રિયલ કોરિડોર વિકસિત કરવામાં આવી રહ્યા છે. તેનાથી હરદોઈ, શાહજહાંપુર, ઉન્નાવ સહિત તમામ 12 જનપદોમાં નવા ઉદ્યોગો આવશે. અલગ-અલગ સેક્ટર્સ જેવા કે ફાર્મા, ટેક્સટાઇલ વગેરેના ક્લસ્ટર્સ વિકસિત થશે. યુવાનો માટે રોજગારના નવા અવસરો પણ તૈયાર થશે.

 

સાથીઓ,

આપણા આ યુવાનો મુદ્રા યોજના અને ODOP જેવી યોજનાઓ, તેની તાકાતથી પોતે પણ નવા નવા કીર્તિમાન સ્થાપી રહ્યા છે. અહીં નાના ઉદ્યોગો, MSMEs ને પ્રોત્સાહન મળી રહ્યું છે. વધુ સારી કનેક્ટિવિટીની સુવિધાથી તેમના માટે પણ નવા રસ્તાઓ ખુલશે. મેરઠની સ્પોર્ટ્સ ઇન્ડસ્ટ્રી, સંભલની હસ્તકલા, બુલંદશહેરનું સિરામિક, હરદોઈનું હેન્ડલૂમ, ઉન્નાવનું લેધર, પ્રતાપગઢના આમળાની પ્રોડક્ટ્સ, આ બધું મોટા સ્તરે દેશ-દુનિયાના માર્કેટમાં પહોંચશે. લાખો પરિવારોની તેનાથી આવક વધશે. તમે મને જણાવો, શું જૂની સપા સરકારમાં હરદોઈ, ઉન્નાવ જેવા જિલ્લાઓમાં ઇન્ડસ્ટ્રિયલ કોરિડોર બનાવવાની કલ્પના પણ થઈ શકતી હતી શું? આપણા હરદોઈથી પણ એક્સપ્રેસવે પસાર થશે, તેવું કોઈ ક્યારેય વિચારી શકતું હતું શું? આ કામ માત્ર ભાજપ સરકારમાં જ સંભવ છે.

સાથીઓ,

પહેલા યુપીને પછાત અને બીમારુ પ્રદેશ કહેવામાં આવતું હતું. તે જ ઉત્તર પ્રદેશ આજે 1 ટ્રિલિયન ડોલરની ઇકોનોમી બનવા માટે આગળ વધી રહ્યો છે. આ એક બહુ મોટું લક્ષ્ય છે. પરંતુ, તેની પાછળ એટલી જ મોટી તૈયારી પણ છે. કારણ કે, યુપી પાસે આટલી અસીમ ક્ષમતા છે. દેશની આટલી મોટી યુવા વસ્તીની ક્ષમતા યુપી પાસે છે. આ તાકાતનો ઉપયોગ અમે યુપીને મેન્યુફેક્ચરિંગ હબ બનાવવા માટે કરી રહ્યા છીએ. યુપીમાં નવા ઉદ્યોગો અને કારખાનાઓ લાગશે, અહીં જ્યારે મોટા પ્રમાણમાં રોકાણ આવશે, ત્યારે જ અહીં આર્થિક પ્રગતિના દરવાજા ખુલશે, યુવાનો માટે રોજગારના અવસરો પેદા થશે.

ભાઈઓ-બહેનો,

આ જ વિઝનને કેન્દ્રમાં રાખીને વિતેલા વર્ષોમાં સતત કામ થયું છે. તમે બધા પોતે પણ અનુભવી રહ્યા છો, જે યુપીની ઓળખ પહેલા પલાયનથી થતી હતી, આજે તેને ઇન્વેસ્ટર્સ સમિટ અને ઇન્ડસ્ટ્રિયલ કોરિડોર માટે ઓળખવામાં આવે છે. યુપીની ઇન્વેસ્ટર સમિટમાં દેશ અને દુનિયાથી કંપનીઓ આવે છે. યુપીમાં હજારો કરોડ રૂપિયાનું રોકાણ થઈ રહ્યું છે. આજે જો ભારત દુનિયામાં બીજો સૌથી મોટો મોબાઈલ ઉત્પાદક છે તો, તેમાં બહુ મોટું યોગદાન યુપીનું છે. આજે ભારત જેટલા મોબાઈલ બનાવી રહ્યું છે, તેમાં અડધા મોબાઈલ આપણા યુપીમાં બની રહ્યા છે. હમણાં થોડા અઠવાડિયા પહેલા જ મેં નોઈડામાં સેમિકન્ડક્ટર પ્લાન્ટનો શિલાન્યાસ પણ કર્યો છે.

 

સાથીઓ,

તમે બધા જાણો છો, AIના આ યુગમાં સેમિકન્ડક્ટર કેટલી મોટી ફિલ્ડ બનતી જઈ રહી છે. યુપી તેમાં પણ લીડ લેવા માટે આગળ વધી રહ્યું છે. ભવિષ્યમાં અસીમ અવસરો વાળો બહુ મોટો વિસ્તાર યુપીના લોકો માટે ખુલી રહ્યો છે.

સાથીઓ,

ઉત્તર પ્રદેશનો ઔદ્યોગિક વિકાસ આજે ભારતની સામરિક તાકાત પણ બની રહ્યો છે. આજે દેશના બે ડિફેન્સ કોરિડોર્સમાંથી એક યુપીમાં છે. મોટી મોટી ડિફેન્સ કંપનીઓ અહીં પોતાની ફેક્ટરી લગાવી રહી છે. બ્રહ્મોસ જેવી મિસાઈલો, જેની તાકત દુનિયા માને છે, આજે તે યુપીમાં બની રહી છે. રક્ષા ઉપકરણોના નિર્માણમાં જે નાના નાના પાર્ટ્સ જોઈએ છે, તેની સપ્લાય માટે MSMEsને કામ મળે છે. તેનો બહુ મોટો લાભ ઉત્તર પ્રદેશના MSME સેક્ટરને થઈ રહ્યો છે. નાના નાના જિલ્લાઓમાં પણ હવે યુવાનો મોટા મોટા ઉદ્યોગો સાથે જોડાવાનું સપનું જોઈ શકે છે.

સાથીઓ,

આજે ઉત્તર પ્રદેશ આટલી ઝડપી ગતિએ વિકાસ કરી રહ્યો છે, કારણ કે યુપીએ જૂની સિયાસતને પણ બદલી છે અને નવી ઓળખ પણ બનાવી છે. તમે યાદ કરો, એક સમયે યુપીની ઓળખ ખાડાઓથી થતી હતી. આજે તે જ યુપી દેશમાં સૌથી વધારે એક્સપ્રેસવે વાળો પ્રદેશ બની ચૂક્યો છે. પહેલા અહીં પાડોશના જિલ્લા સુધી જવું પણ બહુ મુશ્કેલ હતું. પરંતુ આજે ઉત્તર પ્રદેશમાં 21 એરપોર્ટ છે, 5 ઇન્ટરનેશનલ એરપોર્ટ છે. હવે તો નોઈડા ઇન્ટરનેશનલ એરપોર્ટનું ઉદ્ઘાટન પણ થઈ ચૂક્યું છે. ગંગા એક્સપ્રેસવેથી નોઈડા ઇન્ટરનેશનલ એરપોર્ટ થોડા જ કલાકોના અંતરે છે.

ભાઈઓ-બહેનો,

આપણું ઉત્તર પ્રદેશ ભગવાન રામ અને ભગવાન કૃષ્ણની ધરતી છે. પરંતુ, પાછલી સરકારોએ પોતાની કરતૂતોના કારણે અપરાધ અને જંગલરાજને યુપીની ઓળખ બનાવી દીધી હતી. યુપીના માફિયાઓ પર ફિલ્મો બનતી હતી. પરંતુ હવે યુપીના કાયદા અને વ્યવસ્થાનું દેશભરમાં ઉદાહરણ આપવામાં આવે છે.

 

ભાઈઓ બહેનો,

સંસાધનોની મનમાની પૂર્વકની વહેંચણી કરનારા જે સપાઈઓના હાથમાંથી સત્તા ગઈ છે, તેમને યુપીની આ પ્રગતિ પસંદ નથી આવી રહી. તેઓ ફરી એકવાર યુપીને જૂના સમયમાં ધકેલવા માંગે છે. તેઓ ફરી એકવાર સમાજને વહેંચવા અને તોડવા માંગે છે.

સાથીઓ,

સમાજવાદી પાર્ટી વિકાસ વિરોધી પણ છે અને નારી વિરોધી પણ છે. હમણાં વિતેલા દિવસોમાં દેશે ફરી એકવાર સપા અને કોંગ્રેસ જેવી પાર્ટીઓનો અસલી ચહેરો જોયો છે. કેન્દ્રની NDA સરકાર સંસદમાં નારીશક્તિ વંદન સંશોધન લઈને આવી હતી. જો આ સંશોધન પાસ થઈ ગયું હોત, તો વર્ષ 2029ની ચૂંટણીથી જ મહિલાઓને વિધાનસભા અને લોકસભામાં અનામત મળત! મોટી સંખ્યામાં અમારી માતાઓ-બહેનો સાંસદ-ધારાસભ્ય બનીને દિલ્હી-લખનૌ પહોંચતી. તે પણ કોઈ અન્ય વર્ગની બેઠકો ઓછી કર્યા વગર! પરંતુ, સપાએ આ સંશોધન બિલની વિરુદ્ધમાં વોટ આપ્યો.

સાથીઓ,

આ બિલથી તમામ રાજ્યોની બેઠકો પણ વધતી. અમે સંસદમાં સાફ સાફ કહ્યું હતું કે તમામ રાજ્યોની બેઠકો એક જ ગુણોત્તરમાં વધશે. પરંતુ યુપીને ગાળ આપીને પોલિટિક્સ કરનારી DMK જેવી પાર્ટીઓ, તેમને આ વાત પર વાંધો હતો કે યુપીની બેઠકો કેમ વધશે? તમે જુઓ, સમાજવાદી પાર્ટી સંસદમાં તેમના જ સૂર પુરાવી રહી હતી. આ સપા વાળા અહીંથી તમારા વોટ લઈને સંસદમાં જાય છે, અને સંસદમાં યુપીના લોકોને ગાળો આપનારાઓની સાથે ઊભા રહે છે. એટલા માટે જ યુપીના લોકો કહે છે કે સમાજવાદી પાર્ટી ક્યારેય સુધરી શકે નહીં. આ લોકો હંમેશા મહિલા વિરોધી રાજનીતિ જ કરશે. આ લોકો હંમેશા તુષ્ટિકરણ અને અપરાધીઓની સાથે ઊભા રહેશે. સપા ક્યારેય પરિવારવાદ અને જાતિવાદથી ઉપર ઉઠી શકતી નથી. આ લોકો હંમેશા વિકાસ વિરોધી રાજનીતિ જ કરશે. યુપીએ સપા અને તેના સહયોગીઓથી સાવધ રહેવાનું છે.

 

સાથીઓ,

આજે દેશ એક જ સંકલ્પ લઈને આગળ વધી રહ્યો છે- વિકસિત ભારતનો સંકલ્પ! આ સંકલ્પને પૂરો કરવામાં ઉત્તર પ્રદેશની બહુ મોટી ભૂમિકા છે. તમે બધા જોઈ રહ્યા છો, આજે આખી દુનિયા કેવી રીતે યુદ્ધ, અશાંતિ અને અસ્થિરતામાં ફસાયેલી છે. દુનિયાના મોટા મોટા દેશોમાં હાલત ખરાબ છે. પરંતુ, ભારત વિકાસના રસ્તે તે જ ગતિથી આગળ વધી રહ્યો છે. બહારના દુશ્મનોને આ પસંદ નથી આવી રહ્યું. અંદર બેઠેલા કેટલાક લોકો પણ સત્તાની ભૂખમાં ભારતને નીચું દેખાડવાના પ્રયાસોમાં લાગેલા છે. છતાં પણ, આપણે ન માત્ર સુરક્ષિત છીએ, પરંતુ વિકાસના નવા નવા કીર્તિમાન પણ સ્થાપી રહ્યા છીએ. આપણે આત્મનિર્ભર ભારત અભિયાનને આગળ વધારી રહ્યા છીએ. આપણે આધુનિકમાં આધુનિક ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચરનું નિર્માણ કરી રહ્યા છીએ. ગંગા એક્સપ્રેસવે આ દિશામાં એક વધુ મજબૂત કદમ છે. મને વિશ્વાસ છે કે ગંગા એક્સપ્રેસવે જે સંભાવનાઓને આપણા દરવાજા સુધી લઈને આવશે, યુપીના લોકો પોતાના પરિશ્રમ અને પોતાની પ્રતિભાથી તેમને સાકાર કરીને જ રહેશે. આ જ સંકલ્પ સાથે, આપ સૌને ફરી એકવાર ખૂબ ખૂબ અભિનંદન. ખૂબ ખૂબ ધન્યવાદ!

ભારત માતાની જય.

ભારત માતાની જય.

વંદે માતરમ.

વંદે માતરમ.

વંદે માતરમ.

વંદે માતરમ.

વંદે માતરમ.

ખૂબ ખૂબ ધન્યવાદ!