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पने अनुभवी और वरिष्ठ महानुभावों को सुना है, लेकिन आपको भी बहुत कुछ कहना होगा, आपके मन में भी बहुत सी बातें होंगी और मैं ऐसा अनुभव करता हूँ कि जब सुनते हैं तो आपकी सोच, आपकी भावना, आपके सोचने का दायरा, इन द गिवन सर्कम्स्टैंसिस ऐन्ड सिच्यूएशन्स, इन सारी बातें हम लोगों के लिए एक थॉट प्रोवोकिंग प्रोसेस के लिए सीड्स का काम करती है और अगर मुझे इनोवेशन्स भी करने हैं, नए आईडियाज़ को भी विकसित करना है, तो मुझे भी कहीं ना कहीं सीड्स की जरूरत पड़ती है, खाद और पानी डालने का काम मैं कर लूँगा..! और ऐसा मौका शायद बहुत कम मिलता है..! मैं इसका पूरा फायदा उठाना चाहता हूँ और आप मुझे निराश नहीं करेंगे, इसका मुझे पूरा विश्वास है..!

दूसरी बात है, मैं सी.ए.जी. के इन सारे नौजवान मित्रों का अभिनंदन करना चाहता हूँ..! जितना मैं समझा हूँ, मुझे पूरा बैक ग्राउंड तो मालूम नहीं लेकिन मुझे जितना पता चला है, एक प्रकार से नेटीज़न का ये पहला बच्चा है, सोशल मीडिया का एक स्टेप आगे हो सकता है। ये देश में शायद पहला प्रयोग मैं मानता हूँ कि सभी नौजवान फेसबुक, ट्विटर से एक दूसरे से मिले, उनका एक समूह बना, समूह ने कुछ सोचा और कुछ करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मैं समझता हूँ कि सोशल मीडिया का ये भी एक एक्शन प्लेटफार्म हो सकता है। देश में सोशल मीडिया के क्षेत्र में काफी लोग एक्टिव हैं उनके लिए एक बहुत बड़ा उदाहरण रूप काम ये सी.ए.जी. के मित्रों ने किया है, इसलिए उनको मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूँ..!

दूसरा मैं देख रहा हूँ उनकी टीम स्पिरिट को..! सुबह से ये चल रहा है लेकिन तय करना मुश्किल है कि ये कौन कर रहा है, इसको कौन चला रहा है..! मित्रों, ये एक बहुत बड़ी ताकत है कि इतना सारा करना, इतने सारे लोगों को उन्होंने संपर्क किया, महीनों तक काम किया होगा, लेकिन उनमें से कोई एक चेहरा सामने नहीं आ रहा है, फोटो निकालने के लिए भी कोई धक्का-मुक्की नहीं कर रहा है..! मैं मानता हूँ कि ये कोई छोटी चीज नहीं है। मैं कब से नोटिस कर रहा हूँ और मैं नौजवानों की इस एक चीज से मैं कह सकता हूँ कि आप बहुत सफल होंगे, आपके प्रयास में बहुत सफल होंगे ऐसा मैं मानता हूँ..! खैर मित्रों, जितना समय ये मित्र देंगे, आखिर में मेरे लिए पाँच मिनट रखना, बाकी मैं सुनना चाहता हूँ..! आप मुझे अपने विचार बताएं। देखिए, ये सवाल जो है ना, वो अनएंडिग प्रोसेस है। अर्जुन ने इतने सवाल पूछे, कृष्ण ने इतने जवाब दिए फिर भी सवाल तो रहे ही हैं..! तो उसका कोई अंत आने वाला नहीं है। अच्छा होगा आप मन की बात बताएं तो हम सोचें..! डॉ. जफर महमूद ने बात बताई थी तो वो भी एक थॉट प्रोवोकिंग होता है, कि चलिए ये भी एक दृष्टिकोण है। वी मस्ट ट्राय टू अन्डरस्टैंड अदर्स, उस अर्थ में मैं इस युवा पीढ़ी को भी जानना समझना चाहता हूँ..!

थैक्यू दोस्तों, आप लोगों ने बहुत कम शब्दों में और अनेकविध विषयों को स्पर्श करने का प्रयास किया..! और मेरे लिए भी ये एक अच्छा अनुभव रहा और ये चीजें काम आएंगी..! मैं याद करने की कोशिश कर रहा था लेकिन मेरे मित्र लिख भी रहे थे इसलिए आप की बातें बेकार नहीं जाएगी। वरना कभी-कभी ऐसा होता है कि हाँ यार, कह तो दिया, लेकिन पता नहीं आगे क्या होगा..!

दो-तीन विषयों को मैं छूना चाहूँगा। जैसे अभी यहाँ हमारे एज्यूकेशन की जो दुदर्शा है उसका वर्णन किया गया। एक छोटा प्रयोग हमने गुजरात में किया। जब मैं पहली बार मुख्यमंत्री बना और मेरी अफसरों के साथ जो पहली मीटिंग थी तो उसमें ध्यान में आया कि हम गर्ल चाइल्ड एज्यूकेशन में देश में बीसवें नंबर पर खड़े थे। आई वॉज़ शॉक्ड, मैंने कहा हम गुजरात को इतना फॉरवर्ड और डेवलप्ड स्टेट मानते हैं, क्या हो गया हमारे राज्य को..! हमारे अफसरों के पास जवाब नहीं था। तो हमने सोचा कि हमको इसमें जिम्मा लेना चाहिए, इसमें कुछ करना चाहिए। हमने गर्ल चाइल्ड एज्यूकेशन का मूवमेंट चलाया। और गर्ल चाइल्ड एज्यूकेशन का मूवमेंट यानि जून महीने में मैं खुद गाँवों में जाता हूँ, जबकि यहाँ टेंपेरेचर होता है 45 डिग्री..! हम जाते हैं, तीन दिन गाँव में रहतें हैं, लोगों से मिलते हैं और हम लगातार पिछले दस साल से इस काम को कर रहे हैं..! आज स्थिति ये आई कि 100% एनरोलमेंट करने में हम सफल हुए हैं..! और मैं जब 100% कहता हूँ तो फिर वो सेक्यूलरिज्म की डिबेट बाजू में रह जाती है, क्योंकि 100% आया मतलब सब आ गए..! फिर वो जो बेकार में समाज को तोड़ने-फोड़ने की भाषा होती है उसका कोई रोल ही नहीं रहता है। अपने आप सॉल्यूशन निकल जाता है। फिर हमारे ध्यान में आया कि टीचर कम है, तो टीचर रिक्रूट किए, फिर हमारे ध्यान में आया इन्फ्रास्ट्रक्चर कम है, तो इन्फ्रास्ट्रक्चर किया, फिर हमें लगा कि क्वालिटी ऑफ एज्यूकेशन में प्राब्लम है, तो लाँग डिस्टेंस एज्यूकेशन को हमने बल दिया, हमने ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी की, स्कूलों को बिजली का कनेक्शन दिया, स्कूलों में कम्प्यूटर दिए, एक के बाद एक हम करते गए..! उसके बाद भी ध्यान में आया कि भाई अभी भी इम्प्रूवमेंट नहीं हो रहा है। सुधार हुआ है पर गति तेज नहीं है, तो वी स्टार्टेट अ प्रेाग्राम कॉल्ड ‘गुणोत्सव’..! हमारे देश में इंजीनियरिेंग कॉलेज का ग्रेडेशन है, बिजनेस कॉलेज का ग्रेडेशन है। ‘ए’ ग्रेड के बिजनेस इन्सटीटयूट कितने हैं, ‘ए’ ग्रेड के मेडिकल कॉलेज कितने हैं..! हमने शुरू किया, ‘ए’ ग्रेड के गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल कितने हैं, ‘बी’ ग्रेड के कितने हैं, ‘सी’ ग्रेड के कितने हैं, ‘डी’ ग्रेड के कितने हैं..! और इतना बारीकी से काम किया, 40 पेज का एक क्वेश्चनर तैयार किया। कोई तीन सौ-चार सौ से भी ज्यादा सवाल हैं..! 40 पेज का क्वेश्चनर ऑनलाइन टीचर्स को दिया जाता है। स्कूल के लोगों को उसे भरना होता है। उसमें हर चीज होती है, बच्चे को पढ़ना-लिखता आता है, पढ़ने के संबंध में आप 10 में से कितने मार्क्स दोगे, स्कूल में सफाई है तो 10 में से कितने दोगे, अगर लाइब्रेरी का उपयोग हो रहा है तो 10 में से कितने दोगे, वो अपने आप भर कर देते हैं। फिर सारी सरकार गणोत्सव के लिए गाँव जाते हैं, मैं खुद भी तीन दिन जाता हूँ। बच्चे स्कूलों में पढ़ते हैं, उन्हें पढ़ना, लिखना, मैथेमेटिक्स वगैरह आता है, लाइब्रेरी का उपयोग, कम्प्यूटर का उपयोग, ये सारे चीजें बारीकी से हम देखतें है। और जो क्वेश्चन पेपर टीचर्स को दिया होता है, वो जो जाते हैं उनको भी दिया जाता है। जो जाते है उनको भी किस जगह पर जाते हैं वो पहले से नहीं बताया जाता, लास्ट मोमेंट उनका लिफाफा खुलता है और उस जगह पर उनको जाना होता है ताकि कोई मैनेज ना करे या पहले से कोई बात ना बताए। वो जो भरता है वो भी ऑनलाइन देते हैं। दोनों का कम्पेयर करते हैं, टीचर्स ने दिया था वो और जो सुपरवाइजर हमारे यहाँ से गया था वो, चाहे चीफ मीनिस्टर गया हो, मीनिस्टर गया हो, आई.ए.एस. अफसर जाते हैं, आई.पी.एस. ऑफिसर जाते हैं, सारे लोग देखते हैं। हमारा सबसे अच्छा एक्सपीरियंस ये था कि वहाँ के स्कूल के लोगों ने जो जवाब दिए थे और बाहर से गए हुए लोगों के जो जवाब थे, उनमें उन्नीस बीस का फर्क था, ज्यादा फर्क नहीं था..! ये अपने आप में सबसे अच्छा सिम्पटम था कि लोग सच बोल रहे थे और ध्यान में आया कि ‘ए’ ग्रेड की स्कूलें बहुत कम हैं, बहुत कम..! फिर हमने टारगेट दिया कि अच्छा भाई, ये बताओ कि अगली बार ‘ए’ ग्रेड की स्कूलें कितनी होंगी..? तो सचमुच में एज्यूकेशन पर बल दिया गया। वरना हमारा आउट-ले है, आउट-पुट है, बजट है, टीचर्स हैं, इन्फ्रास्ट्रक्चर है, सब है, सिर्फ शिक्षा नहीं है..! समस्या का समाधान निकलता है।

ब जैसे हमारे यहाँ एक विषय आया कि भाई, सरकार में पता नहीं फाइल कहाँ जाएगी, आदमी कहाँ जायेगा, पता नहीं रहता, दिक्कत रहती है..! मैंने एक बार हमारे अफसरों को कहा था कि मुझे तो लोग हिन्दुवादी मानते हैं और हिन्दुत्व से जुड़ा हुआ मुझे माना जाता है। हमने कहा, हिंदु धर्म में कहा है कि चार धाम की यात्रा करो तो मोक्ष मिल जाता है, लेकिन ये सरकार में फाइल जो है वो चालीस धाम की यात्रा करे तो भी उसका मोक्ष नहीं होता है..! मैंने कहा कम से कम कुछ तो करो भाई, फाइल बस जाती रहती है, घूमती रहती है..! एक बार मैंने मेरे अफसरों को बुलाया, मैंने कहा मान लीजिए कि एक विडो है, उस विडो को सरकार की तरफ से सोइंग मशीन लेने का अधिकार है। सरकार ने बनाया है नियम, उसको मिलना चाहिए। मुझे बताइए, वो विडो को ये सोइंग मशीन कैसे मिलेगा..? मैंने आई.ए.एस. अफसरों को पूछा था। मैंने कहा, कागज पर लिखो वन बाई वन स्टेप कि पहले वो कहाँ जाएगी, फार्म कहाँ से लेगी, फिर किस दफ्तर में जाएगी, फिर कहाँ देगी, कितनी फीस देगी..! यू विल बि सरप्राइज्ड, मेरी सरकार के वो दस अफसर बैठे थे, दस में से एक भी नहीं बता पाया कि वो विडो अपने हक का सोइंग मशीन कहाँ से लेगी..! फिर मैंने उनसे पूछा कि तुम इतने सालों से सरकार में हो, इतने सालों से तुम कानून और नियम बनाते हो, तुम्हें मालूम नहीं है तो एक बेचारी अनपढ़ महिला को कैसे मालूम पड़ेगा..? आई रेज़्ड द क्वेश्चन। उनको भी स्ट्राइक हुआ..! मित्रों, उसमें से हमारे यहाँ गरीब कल्याण मेला, एक कॉन्सेप्ट डेवलप हुआ और सरकार की इस योजना में लाभार्थी खोजने के लिए मैं सरकार को भेजता हूँ। पहले लोग सरकार को खोजते थे, हमने बदला, सरकार लोगों तक जाएगी..! वो लिस्ट बनाते हैं, कि भाई, ये हैन्डीकैप है तो इसको ये मिलेगा, ये विडो है तो इसको ये मिलेगा, ये सीनियर सिटीजन है तो इसको ये मिलेगा, ये ट्राइबल है तो इसको ये मिलेगा... सारा खोजते हैं और गरीब कल्याण मेले में सबको लाने की सरकारी खर्च से व्यवस्था करते हैं और मीडिया की हाजिरी में, लाखों लोगों की हाजिरी में पूरी ट्रांसपेरेंसी के साथ उनको वो दिया जाता है और दिया जाता है इतना ही नहीं, गाँव में बोर्ड लगाया जाता है कि आपके गाँव के इतने-इतने लोगों को ये ये मिला है। कोई गलत नाम होता है तो लोग कहेंगे कि भाई, ये मगनभाई के यहाँ तो ट्रेक्टर है और ये साइकिल ले कर आ गया सरकार से, यानि शर्म आनी शुरू हुई तो ट्रांसपेरेंसी आनी अपने आप शुरु हो जाती है। सारे लिस्ट को ऑनलाइन रखा।

लोग कहते हैं कि जन भागीदारी कैसे लाएं..? एक सवाल आया। देखिए, बहुत आसानी से होता है। सरकार में एक स्वभाव होता है सीक्रेसी का..! उसके दिमाग में पता नहीं कहाँ से भर गया है। एक बात दूसरे को पता ना चले, एक टेबिल वाला दूसरे टेबिल वाले को पता नहीं चलने देता, एक डिपार्टमेंट वाला दूसरे डिपार्टमेंट वाले को पता चलने नहीं देता, एक चैंबर वाला दूसरे चैंबर वाले को पता नहीं चलने देता... कोई बड़ा धमाका होने वाला हो ऐसी सोच रखते हैं..! मैंने कहा ये सब क्या कर रहे हो, यार..? नहीं बोले, ये तो जब फाइनल होगा तब कहेंगे..! मैंने सवाल उठाया, क्यों..? मित्रों, आपको जान कर खुशी होगी, मेरे यहाँ नियम है कि कोई भी पॉलिसी बन रही है तो उसकी ड्राफ्ट पॉलिसी हम ऑनलाइन रखते हैं। वरना पॉलिसी आना यानि सरकार कोई बहुत बड़ा धमाका करने वाली हो, ऐसा टैम्प्रामेंट था..! ड्राफ्ट पॉलिसी हम ऑनलाइन रखते हैं और लोगों को कहते हैं कि बताओ भाई, इस पॉलिसी में आप लोगों का क्या कहना है..? मित्रों, एसेम्बली में डिबेट होने से पहले जनता में डिबेट हो जाता है और वेस्टेड इंटरेस्ट ग्रुप भी उसमें अपना जितना मसाला डालना चाहते हैं, डालते हैं, न्यूट्रल लोग भी डालते हैं, विज़नरी लोग भी डालते हैं। हमारे सरकार में बैठे लोगों की अगर सोचने की मर्यादाएं हैं तो हमारा विज़न एक्सपेंड हो जाता है क्योंकि इतने लोगों का इनपुट मिल जाता है। कभी हमने किसी बद इरादे से... मान लीजिए, बाईं ओर जाने का तय किया है तो लोगों का प्रेशर इतना है कि तुम गलत कर रहे हो, राइट को जाना पड़ेगा, तो उस पॉलिसी ड्राफ्ट में ही इतना सुधार आ जाता है कि वो राइट ट्रेक पर आ जाती है..! और आपको जान कर खुशी होगी मित्रों, इसके कारण हमारे पॉलिसी डिस्प्यूट मिनिमम हो रहें हैं और इस पॉलिसी के कारण डिसिजन लेने में सुविधा मिलती है। ये जन भागीदारी का उत्तम नमूना है मित्रों, यानि पॉलिसी मेकिंग प्रोसेस में भी आप लोगों को जोड़ सकते हैं, ये हमने गुजरात में कर के दिखाया है..! उसी प्रकार से, कभी-कभी एक काम आपने सोचा है, लेकिन सरकार क्या करती है, सरकार कहती है कि ये हमारा बहुत बड़ा विजनरी काम है, हम जनता पे थोप देंगे..! मित्रों, ये लोकतंत्र है, सरकारों को जनता पर कुछ भी थोपने का कोई अधिकार नहीं है..! मैं बारह साल सरकार में रहने के बाद हिम्मत के साथ ये बोल सकता हूँ कि जनता को साथ लेना ही चाहिए और आप जनता को साथ लेने में सफल हुए तो आप कल्पना नहीं कर सकते कि सरकार को कुछ नहीं करना पड़ता, सब काम जनता करके दे देती है..! मेरे यहाँ एक ‘सुजलाम् सुफलाम्’ कैनाल बन रहा था। वो करीब 500 किलोमीटर लंबा कैनाल था। मुझे कैनाल के लिए किसानों से जमीन लेनी थी और हमारे फ्लड वाटर को हम वहाँ पर डालना चाहते थे कि वो एक प्रकार से रिचार्जिंग का भी काम करेगी, ऐसी कल्पना थी। मैंने 10 डिस्ट्रिक्ट में दस-दस, पन्द्रह-पन्द्रह हजार लोगों के सेमीनार किये। खुद पावर पॉइंट प्रेजेन्टेशन करता था और उनको समझाता था कि ये कैनाल ऐसे जाएगी, इतने किलोमीटर का ये फायदा होगा, पानी पर्कोलेट होगा तो आपके कुंए में पानी आएगा, आपका बिजली का इतना खर्चा कम होगा, फसल आपकी तीन-तीन हो सकती है... सारा समझाया मैंने। आपको जानकर के आश्चर्य होगा मित्रों, दो सप्ताह के अंदर लोगों ने जमीन देने का काम पूरा किया..! दो साल में कैनाल बन गई, पानी पहुँच गया, तीन-तीन फसल लोगों ने लेना शुरू कर दिया। हमें कोई प्रॉबलम नहीं आया..! कहने का तात्पर्य ये है कि शासन जितना जनता जर्नादन के साथ जुड़ा होगा, उतनी परिणामों की संभावनाएं बढ़ जाती हैं..! अगर हम लोगों को रोकते हैं तो काम नहीं होता।

हाँ एक विषय आया, यंग जनरेशन को कैसे जोड़ा जाए..! मेरे यहाँ एक प्रयोग किया है, अभी वो फुलप्रूफ और परफेक्ट है ऐसा मैं क्लेम नहीं करता, लेकिन इतना मैं कनवींस जरूर हो गया हूँ कि वी आर इन अ राइट डायरेक्शन, इतना मैं कह सकता हूँ..! मैं ये नहीं कहता हूँ कि मुझे बहुत बड़ा कोई सॉल्यूशन मिल गया है..! उस में हमने सी.एम. फैलोशिप शुरू किया है। उसकी वैबसाइट भी है, आप कभी देख सकते हैं। और मैं नौजवानों को कहता हूँ कि भाई, ये भी एक जगह है जिसको एक्सपीरियंस करना चाहिए। और आपको जानकर के खुशी होगी मित्रों, मेरे यहाँ ढेड-ढेड, दो-दो करोड़ के जिनके पैकेज हैं ऐसे नौजवान अपनी नौकरी छोड़ कर के सरकार की टूटी-फूटी एम्बेसेडर में बैठ कर काम कर रहे हैं। हाईली क्वालिफाइड नौजवान, अच्छी पोजिशन में विदेशों में काम करने वाले नौजवान मेरी ऑफिस में काम कर रहे हैं..! और हर वर्ष जब हम ये करते हैं, तो बारह सौ-पन्द्रह सौ नौजवानों की एप्लीकेशन आती है। अभी मैं धीरे-धीरे इसको डेवलप कर रहा हूँ। थोड़ी कमियाँ हैं, थोडा फुलप्रूफ हो जाएगा तो मैं ज्यादा लोगों को भी लेने वाला हूँ। अब ये दो चीजे हैं, नौजवान को अवसर भी मिलता है, कॉरपोरेट वर्ल्ड में होने के बावजूद भी सरकार क्या होती है ये समझना उसके लिए एक अनूठा अवसर होता है, वो हम उसको दे रहे हैं। एट द सेम टाइम, सरकार की सोच में कोई इनिशियेटिव नहीं होता है, बस चलता रहता है। उसमें एक फ्रेश एयर की जरूरत होती है, नई सोच की जरूरत होती है और ये नई सेाच के लिए मुझे ये सी.एम. फैलोशिप बहुत काम आ रहा है। ये नौजवान इतने ब्राइट हैं, इतने स्मार्ट हैं, इतने क्विक हैं... अनेक नई-नई चीजें हमें देते रहते हैं और उसका हमें फायदा होता है..!

ब जैसे हमारे प्रोफेसर साहब अभी कह रहे थे कि इनोवेशन का काम होना चाहिए..! मित्रों, गुजरात देश का पहला राज्य है जिसने अलग इनोवेशन कमीशन बनाया है। और जो इनोवेशन करते हैं उसको हमारी एक कमेटी जाँच करती है, अगर हमको वो इनोवेशन स्केलेबल लगता है तो उसको हम कानूनन लागू करते हैं और उसके कारण हमारे यहाँ कई लोगों को नए-नए इनोवेशन करने का अवसर मिलता है। इतना ही नहीं, हमने एक और काम किया है। मेरा एक प्रोग्राम चलता है, ‘स्वांत: सुखाय’..! वो काम जिसको करने से मुझे आनंद आता है और जो जनता की भलाई के लिए होना चाहिए। और मेरी सरकार में किसी भी व्यक्ति को इस प्रकार का प्रोजेक्ट लेने की इजाजत है। इससे क्या हो रहा है, अपनी नौकरी करते-करते उसको एक आद चीज ऐसी लगती है जिसमें उसका मन लग जाता है। तो मैं उसको कहता हूँ कि रिसोर्स मोबलाइज़ करने की छूट है, लेकिन ट्रांसपरेन्सी होनी चाहिए..! और आप इस काम को कीजिए..! आज मेरा अनुभव है कि दस साल पहले जिन अफसरों ने स्वांत: सुखाय में कोई कार्यक्रम किया, जैसे मान लीजिए आप अंबाजी जाएंगे तो अंबाजी नगर में पीने के पानी की दिक्कत थी। तो वहाँ हमारा फॉरेस्ट डिपार्टमेंट का एक अधिकारी था, उसने अंबाजी के नजदीक जो पहाड़ियाँ थीं, वहाँ बहुत बड़ी मात्रा में उसने चैक डेम बनाए और पर्वत का पानी वहाँ रोकने की कोशिश की। ये प्रयोग इतना सफल रहा कि अंबाजी का पीने के पानी का प्रॉबलम सॉल्व हो गया। अब उसने तो अपना स्वांत: सुखाय काम किया, और आज तो उसको वहाँ से ट्रांसफर हुए दस साल हो गए, लेकिन आज अगर उसके रिश्तेदार आते हैं तो गुजरात में वो क्या दिखाने ले जाता है..? उस प्रोजेक्ट को दिखाने ले जाता है कि देखिए, मैं जब यहाँ था तो मैंने ये काम किया था..! ये जो उसका खुद का आंनद है, ये आनंद अपने आप इन्सपीरेशन को जनरेट करता है, ऑटो जनरेट हो जाता है। मैंने देखा है कि मेरे यहाँ बहुत सारे अफसर अपने संतोष और सुख के लिए, सरकार की मर्यादाओं में रहते हुए कोई ना कोई नया काम करते हैं। हम थोड़ा मौका दें, थोड़ा खुलापन दें, तो बहुत बड़ा लाभ होता है और गुड गर्वनेंस की दिशा में ऐसे सैकड़ों इनिशियेटिव्स आपको मिल सकते हैं और आज जो आपको परिणाम मिला है वो उसी के कारण मिला है।

दूसरी बात है, एक विषय आया था, जात-पात, धर्म और वोट बैंक का विषय आया था। मैं एक बार एक प्रधानमंत्री का भाषण लाल किले पर से सुन रहा था, एंड आई वॉज़ शॉक्ड..! देश के एक प्रधानमंत्री ने एक बार अपने भाषण में लाल किले पर से कहा था, हिन्दु, मुस्लिम, सिख, इसाई... ऐसा सब वर्णन किया था..! मैंने कहा, क्या जरूरत है भाई, मेरे देशवासियों इतना कहते तो नहीं चलता क्या..? बात मामूली लगेगी आपको..! क्या मेरे देश के प्रधानमंत्री लाल किले पर से मेरे प्यारे देशवासियों, ये नहीं बोल सकते थे क्या..? नहीं, उनको इसी में इन्टरेस्ट था..! मित्रों, गुजरात में आप लोगों ने मुझे सुना होगा। आज मुझे बारह साल हो गए मुख्यमंत्री के नाते, मेरे मुख से हमेशा निकला है, पहले बोलता था पाँच करोड़ गुजराती, फिर बोलता था साढ़े पाँच करोड़ गुजराती, आज बोलता हूँ छह करोड़ गुजराती..! मित्रों, एक नया पॉलिटिकल कोनोटेशन है ये और आने वाले लोगों को इसको स्वीकार करना पड़ेगा। मित्रों, क्या जरूरत है कि हम इस प्रकार की भिन्नताओं को रख कर के सोचते हैं..? कोई आवश्यकता नहीं है, मित्रों..!

हाँ पर एक विषय आया कि भाई, इलेक्टोरल रिफार्म में क्या किया। मैं मानता हूँ मित्रों, हमारे देश में इलेक्टोरल रिफार्म की बहुत जरूरत है, उसे और अधिक वैज्ञानिक बनाना चाहिए..! अब जैसे हमारे गुजरात में एक प्रयेाग किया ऑनलाइन वोटिंग का। गुजरात पहला राज्य है जिसने ऑनलाइन वोटिंग की व्यवस्था खड़ी की है और वो हमारा फुलप्रूफ सॉफ्टवेयर है, आप अपने घर से वोट दे सकते हैं। आप मानो उस दिन मुंबई में हो और चुनाव अहमदाबाद में हो रहा है, तो आप मुंबई से भी अपने मोबाइल या अपने कम्प्यूटर से वोट डाल सकते हैं..! हमने उसको प्रायोगिक स्तर पर हमारे पिछले चुनाव में किया था, लेकिन आने वाले दिनों में हम उसको और आगे बढ़ाना चाहते हैं। और तब पोलिंग बूथ पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, उसको उस दिन शहर में रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी..! लेकिन ये हमने स्थानिय निकायों के लिए किया है। पायलट प्रेाजेक्ट है लेकिन बहुत ही सक्सेस गया है, आने वाले दिनों में हम उसको स्केल-अप करना चाहते हैं..! हमने गुजरात में एक कानून बनाया था, दुर्भाग्य से हमारे गर्वनर साहब ने उसको साइन नहीं किया इसलिए वो अटका पड़ा है। हमने कहा कि पंचायती व्यवस्था में कम्पलसरी वोटिंग..! एसेम्बली या पार्लियामेंट के चुनाव का कानून मैं बना नहीं सकता, लेकिन कॉर्पोरेशन, नगरपालिका, जिला पंचायत, तालुका पंचायत, इसके लिए कम्पलसरी वोटिंग..! उसमें एक और विशेषता रखी है, कम्लसरी वोटिंग के साथ-साथ आपको ये जो दस नौजवान खड़े हैं, जो दस दूल्हे आए हैं, अगर ये सब आपको पसंद नहीं है तो इन सबको रिजेक्ट करने का भी वोट..! मित्रों, देश में बुरे लोगों को उम्मीदवार बनाने की जो फैशन चली है और आखिरकार आपको किसी एक उम्मीदवार को पंसद करना पड़ता है, तो लेसर एविल वाला जो कंसेप्ट डेवलप हुआ है उसमें से देश को बाहर लाना पड़ेगा और हम सबको रिजेक्ट करें ये व्यवस्था हमको डेवलप करनी होगी और इतने परसेंट से ज्यादा रिजेक्शन आता है तो वो सारे के सारे कैन्डीटेड चुनाव के लिए ही बेकार हो जाएंगे, वहाँ चुनाव की प्रोसेस नए सिरे से होगी..! तब पॉलिटिकल पार्टियाँ अच्छे लोगों को उम्मीदवार बनाने के लिए मजबूर होगी, मित्रों। और अच्छे लोगों को उम्मीदवार बनाना उनकी मजबूरी होगी, तो मैं मानता हूँ कि जो आप चाहते हैं कि अच्छे लोग क्यों राजनीति में नहीं आते, उनके आने की संभावना बढ़ जाएगी, मित्रों..! आज क्या है, वो अपने हिसाब से चलते हैं। यही है, वोट ले आइए यार, कुछ भी करो, चुनाव जीतना है..! मजबूरी है लेकिन रास्ते भी है, अगर कोई तय करके रास्ते निकाले तो रास्ते निकल सकते हैं..!

ब हमने एक प्रयोग किया, मित्रों..! मैं छोटा था तब मेरे गाँव में डॉ. द्वारकादास जोशी नाम के सर्वोदय के बहुत बड़े लीडर थे। विनोबा जी के बड़े निकट थे और बड़ा ही तपस्वी जीवन था। और हमारे गाँव में हमारे लिए वो हीरो थे, हमारे लिए वो ही सबकुछ थे, वो ही हमको सबकुछ दिखते थे और उनकी बातें हमको याद भी रहती थी। विनोबा जी और गांधीजी दोनों ने एक बात बहुत अच्छी बताई थी। विनोबा जी ने विशेष रूप से उसका उल्लेख किया था। वो कहते थे कि लोकसभा या एसेम्बली का चुनाव होता है, तो गाँव में ज्यादा दरार नहीं होती है। चुनाव होने के बाद गाँव फिर मिल-जुल कर आगे बढ़ता है। लेकिन गाँव के पंचायत के जो चुनाव होते हैं, तो गाँव दो हिस्सों में बंट जाता है और चुनाव के कारण कभी-कभी बेटी ब्याह की होगी वो भी वापिस आ जाती है..! क्यों..? क्योंकि चुनाव में झगड़ा हो गया..! तो गाँव के गाँव बिखर जाते हैं..! गाँव में मिल-जुल के सर्वसम्मति क्यों ना बने..? हमारी सरकार ने एक योजना बनाई ‘समरस गाँव’..! गाँव मिल कर के यूनेनिमसली अपनी बॉडी तय करे। उसमें 30% महिला का रिर्जवेशन होगा, दलितों का होगा, ट्राइबल का होगा, जो नियम से होगा वो सब कुछ होगा..! जब पहली बार मैं इस योजना को लाया था... मैं 7 अक्टूबर, 2001 को मुख्यमंत्री बना था और 11 अक्टूबर, 2001 जयप्रकाश नारायण जी का जन्म दिन था, तो मैंने चार दिन बाद जयप्रकाश जी के जन्म दिन पर इस योजना को घोषित किया था। क्योंकि मैं आया उसके दो या तीन दिन बाद दस हजार गाँव में चुनाव होने वाले थे। तो मैंने सेाचा कि भई इस पर सोचना चाहिए, तो मैंने ‘समरस गाँव’ योजना रखी। मित्रों, आपको जानकर के खुशी होगी कि मेरे यहाँ वॉर्ड, नगर सब मिलाकर मैं देखूं, तो टोटल इलेक्टोरेट में से 45% यूनेनिमस हुआ था, 45%..! आज के युग में ये होना अपने आप में बहुत बड़ी ताकत है। फिर हमने डेवलपमेंट के लिए उनको एक स्पेशल ग्रांट दिया। आगे बढ़ कर के क्या हुआ कि कुछ गाँव में सरपंच के रूप में महिला की बारी थी। उन गाँवों के लोगों ने तय किया कि भाई, इस बार महिला सरपंच है तो सारे मैम्बर भी महिलाओं को बनाएंगे..! और मेरे यहाँ 356 गाँव ऐसे हैं जहाँ एक भी पुरूष पंचायत का मैम्बर नहीं है, 100% वुमन मैंबर हैं और वो पंचायत अच्छे से अच्छे चलाती हैं..! वुमन एम्पावरमेंट कैसे होता है..! मित्रों, सारे निर्णय वो करती है। इसके लिए मैंने फिर क्या किया कि उन महिलाओं को सफल होने के लिए कुछ मेहनत करनी चाहिए थी, तो मैंने ऑफिशियल लेवल पर व्यवस्था की कि भाई, ये महिला पंचायतें जो हैं, इनको जरा स्पेशल अटेंशन दीजिए, स्पेशल ग्रांट भी देनी पड़े तो दीजिए। आज परिणाम ये आया कि पुरूषों के द्वारा चालाई जा रही और पंचायतों से ये महिलाएं सफलता पूर्वक आगे बढ़ रही हैं..!

मित्रों, ऐसा नहीं है कि सारे दरवाजे बंद हैं, अगर खुला मन रख के, सबको साथ लेकर के चलें... और मेरी सरकार का तो मंत्र है, ‘सबका साथ, सबका विकास’..! मित्रों, सरकार को डिस्क्रिमिनेशन करने का अधिकार नहीं है, सरकार के लिए सब समान होने चाहिए, ये हमारा कन्वीक्शन है। लेकिन अगर देश में गरीबी है तो उसका रिफ्लेक्शन सभी जगह होगा। इस पंथ में भी होगा, उस पंथ में भी होगा, इस इलाके में भी होगा, उस इलाके में भी होगा। अशिक्षा है तो अशिक्षा यहाँ भी होगी, अशिक्षा वहाँ भी होगी। लेकिन जानबूझ कर किसी को अशिक्षित रखा जाए, ये भारत का संविधान किसी को अनुमति नहीं देता है और ना ही हिन्दुस्तान के संस्कार हमें अनुमति देते हैं..! इन मूलभूत बातों को ध्यान में रख कर के आगे बढ़ने का प्रयास करने से परिणाम आ सकता है।

हुत अच्छे विषय मुझे आपसे जानने को मिले हैं..! एक विषय आया है एग्रीकल्चर का..! हमारे कश्मीर के मित्र ने भी अच्छे शब्दों का प्रयोग किया कि देश में बहुत प्रकार के कल्चर हैं, लेकिन कॉमन कल्चर एग्रीकल्चर है..! नाइसली प्रेज़न्टेड..! ये बात सही है मित्रों, एग्रीकल्चर में हम पुराने ढर्रे से चल रहे हैं, थोड़ा मॉर्डन, साइंटिफिक अप्रोच एग्रीकल्चर में बहुत जरूरी है। बहुत जल्दी हमें एग्रोटैक की आवश्कता होगी। और नेक्स्ट सितंबर, मोस्ट प्रॉबेबली, 10, 11 और 12 को हम एशिया का सबसे बड़ा एग्रोटैक फेयर यहाँ आयोजित कर रहे हैं। क्योंकि मेरे किसान एग्रो-टैक्नोलॉजी को कैसे उपयोग में लाए, एग्रीकल्चर सैक्टर में कैसे वो प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं, इस पर हम ज्यादा बल दे रहे हैं। और अल्टीमेटली देश की जो माँग है, देश का जो पेट है उस पेट को भरना है और जमीन कम होती जा रही है, लोगों की खेती में संख्या कम होती जा रही है, जैसे अभी हमारे कलाम साहब ने भी बताया। तो उसका मतलब हुआ कि हमको एग्रोटैक पर जाना पड़ेगा, प्रोडक्टिविटी बढ़ानी पड़ेगी। मैं कभी-कभी कहता हूँ कि ‘फाइव-एफ’ फॉर्मूला तथा ‘ई-फोर’ फॉर्मूला..! एग्रीकल्चर सैक्टर में मैं कहता हूँ कि जैसे मेरे यहाँ कॉटन ग्रोइंग है, तो मैंने कहा कि भाई, आज हम कॉटन एक्सपोर्ट करते हैं। कभी भारत सरकार कॉटन एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध लगा देती है, पिछली बार मेरे किसानों को 7000 करोड़ का नुकसान हो गया। हमने कहा नाउ वी हैच टू चेंज आवर पॉलिसी..! हम क्यों डिपेन्डेंट रहें..? इसलिए वी ब्रोट अ ‘फाइव-एफ’ फॉर्मूला, और ‘फाइव-एफ’ फॉर्मूला में फार्म टू फाइबर, फाइबर टू फैब्रिक, फैब्रिक टू फैशन और फैशन टू फॉरेन... वही कपास, कपास का धागा, धागे का कपड़ा, कपड़े से रेडिमेड गारमेंट, रेडिमेड गारमेंट से एक्सपॉर्ट..! देखिए, वैल्यू एडिशन की दिशा में हमको जाना पड़ेगा..! मित्रों, हम पोटेटो बेचते हैं, बाजार में 10 रूपया दाम होगा तो महिला सोचती है कि एक किलो की बजाए पाँच सौ ग्राम ले जाँऊगी..! लेकिन अगर हम पोटेटो चिप्स बना कर के बेचते हैं, तो मेरे किसान की आय ज्यादा होती है। हमें वैल्यू एडीशन की ओर बल देना होगा, तभी हमारे किसानों को वो खेती वायेबल होगी। हम उस पर बल देने के पक्ष में रहे हैं और उस दिशा में वैज्ञानिक ढंग से काम भी कर रहे हैं।

मित्रों, आपको जानकर के हैरानी होगी और मैं हैरान हूँ कि हमारे देश की मीडिया का ध्यान इस बात पर क्यों नहीं गया है। एक बहुत बड़ा सीरियस डेवलपमेंट हो रहा है। भारत सरकार यूरोपियन देशों के साथ वार्ता कर रही है, एक एम.ओ.यू. साइन होने की दिशा में जा रहे हैं। और वो क्या है..? ये देश कैसा है, कि हिन्दुस्तान से मटन एक्पोर्ट करने के लिए सब्सीडि दी जा रही है, प्रमोशन एक्टीविटी हो रही है, इनकम टैक्स एक्ज़मशन हो रहा है और देश के लिए मिल्क एंड मिल्क प्रोडक्ट यूरोप से इम्पोर्ट करने के लिए एम.ओ.यू. हो रहा है..! मैं हैरान हूँ कि ये देश कैसे चलेगा..! जैसे हमारे यहाँ पर गुजरात में मिल्क प्रोडक्ट के साथ में अमूल जैसी इतनी बड़ी इंस्टीट्यूशन खत्म हो जाएगी..! लेकिन फिर भी वो उस दिशा में जा रहे हैं, यानि उनके निर्णय में कौन सा प्रेशर है, किसका प्रेशर है ये खोज का विषय है। लेकिन लॉजिक नहीं है..! हमारे हिन्दुस्तान के कैटल की प्रोडक्टिविटि कैसे बढ़े, हमारी रिक्वायर्मेंट की पूर्ति कैसे हो, आपको इन बातों पर बल देना चाहिए, लेकिन अगर मीट पर ज्यादा इनकम होती है तो अच्छे-अच्छे दूध देने वाले पशु भी काट कर विदेश भेजे जाएंगे और विदेश वालों का फायदा ऐसे होगा कि वहाँ से मिल्क यहाँ एक्सपोर्ट करेंगे, उनको बहुत बड़ी पैदावार होगी..! मित्रों, ऐसी मिस मैच पॉलिसी लेकर के आते हैं जिसके कारण देश तबाह हो रहा है..! हम आगे चल कर देखेंगे कि इसको कैसे सही रूप में समझा जाए..! अभी तो मेरे पास बहुत प्राइमरी नॉलेज है, मैं पूरी जानकारी इकट्ठी कर रहा हूँ। मैं अभी किसी पर ब्लेम नहीं कर रहा हूँ, लेकिन मैंने जितना सुना है, जाना है, अगर ये सही है तो चिंता का विषय है..! और इसलिए मैं मानता हूँ कि हमें एक कन्सीस्टेंट पॉलिसी के साथ एग्रीकल्चर क्षेत्र में काम करने की आवश्यकता है और हम उस काम को कर सकते हैं। हमें उस दिशा में प्रयास करना चाहिए।

स्मॉल स्केल इन्डस्ट्री की बहुत बड़ी ताकत होती है..! मित्रों, नौजवान को रोजी-रोटी कमाने के लिए भगवान ने दो हाथ दिए हैं, हमें उन हाथों को हुनर देना चाहिए, स्किल डेवलपमेंट..! और मैं तीन बातों पर बल देने के पक्ष में हूँ। अगर भारत को चाइना के साथ कम्पीटीशन करना है, और भारत का हमेशा चाइना के साथ कम्पीटीशन होना चाहिए..! भारत को पाकिस्तान के साथ स्पर्धा का मन छोड़ देना चाहिए। मित्रों, ये एक ऐसा दुर्भाग्य है कि आए दिन सुबह-शाम पाकिस्तान-इंडिया, पाकिस्तान-इंडिया चलता रहता है। अमेरिका से भी कोई विदेशी मेहमान आते हैं तो वो भी क्लब करके आते हैं, दो दिन हिन्दुस्तान में और एक दिन पाकिस्तान में..! मैं तो कहता हूँ कि प्रतिबंध लगाओ कि भाई, हिन्दुस्तान आना है तो सीधे-सीधे यहाँ आओ और यहाँ से सीधे-सीधे अपने घर वापिस जाओ..! हिन्दुस्तान को अगर कम्पीटिशन करनी है तो एशियन कन्ट्रीज में हम चाइना के साथ तुलना में कहाँ खड़े हैं, जापान के साथ आज तुलना में कहाँ खड़े हैं, अर्बन डेवलपमेंट में हम सिंगापुर के सामने आज कहाँ खड़े हैं..! हमारी सोच बदलनी होगी, मित्रों..! मूलभूत रूप में हम इस दायरे से बाहर नहीं आएंगे तो हम लंबे विज़न के साथ काम नहीं कर सकते। ये बात सही है कि एक्सटर्नल अफेयर्स मिनिस्ट्री का रोल बदल चुका है, लेकिन वो समझने को तैयार नहीं हैं..! वो कभी जमाना रहा होगा जब यू.एन.ओ. का जन्म हुआ होगा, लेकिन सारी चीजें अब इररिलेवेंट हो रही हैं..! आज एक्सटर्नल अफेयर्स मिनिस्ट्री का काम ट्रेड एंड कॉमर्स हो गया है। डिप्लोमेसी वाले दिन चले गए हैं, मित्रों। डिप्लोमेसी नेबरिंग कंट्री के साथ होती है, बाकी तो ट्रेड एंड कॉमर्स होता है। और इसलिए हमारी जो एक्सटर्नल अफेयर्स मिनिस्ट्री का पूरा मिशन है, उस मिशन के अंदर जो लोग रखे जाएं वो इस कैलीबर के रखने पड़ेंगे। उसका पूरी तरह रिइंजीनियरिंग करना पड़ेगा। अभी तो जो लोग बैठे हैं उनसे ये अपेक्षा तो नहीं कर सकते..! मित्रों, सारे विषयों पर एक नई सोच के साथ बहुत कुछ किया जा सकता है।

मय की सीमा है लेकिन आप सबसे सुनने का मुझे अवसर मिला। बहुत सी बातें हैं जिसमें अभी भी कुछ करना बाकी होगा, मेरे राज्य में भी बहुत सी बातें होंगी जिसमें अभी भी कुछ करना बाकी होगा। लेकिन जब लोगों से मिलते हैं, सुनते हैं तो ध्यान आता है कि हाँ भाई, इस बात की ओर ध्यान देना होगा, उस बात की ओर ध्यान देना होगा..! मुझे खुशी हुई, और खास तौर पर मैं सी.ए.जी. के मित्रों का आभारी हूँ। वैसे मेरे लिए कार्यक्रम था सुबह कलाम साहब के साथ आना, कलाम साहब का स्वागत करना, शुरू में मुझे कुछ बोलना, बाद में कलाम साहब का बोलना और उसके बाद मुझे जाना..! मैंने सामने से कहा था कि भाई, इतने लोग आ रहे हैं तो क्या मैं बैठ सकता हूँ..? तो सी.ए.जी. के मित्रों ने मुझे अनुमति दी की हाँ, आप बैठ सकते हैं, तो मैं उनका आभारी हूँ और मुझे कई प्रकार के कई विषयों को सुनने को मिला। और मित्रों, जैसे कलाम साहब कहते थे, राजनेताओं के लिए चाइना में एक अलग पद्घति है। वहाँ एक निश्चित पॉलिटिकल फिलॉसोफी है और उसको लेकर के चलते हैं। लेकिन हमने हमारे सिस्टम में ट्रेनिंग को बड़ा महत्व दिया है। आपको शायद पता होगा, जब पहली बार मेरी सरकार बनी तो पूरी सरकार को लेकर मैं तीन दिन आई.आई.एम. में पढ़ने के लिए गया था..! और आई.आई.एम. के लोगों को हमने कहा कि भई, बताइए हमको, सारी दुनिया को आप पढ़ाते हो, सारी दुनिया की कंपनीओं को आप चलाते हो, तो हमें भी तो चलाओ ना... और उन्होंने काफी मेहनत की थी। बहुत नए-नए विषयों को हमें पढ़ाया था। हमारे मंत्रियों के लिए भी उपयोगी हुआ था। मैं हमारे कुछ अफसरों को भी लेकर गया था। मैं मानता हूँ कि लर्निंग एक कन्टीन्यूअस होना चाहिए..! मेरे यहाँ सरकार के अफसरों के लिए एक वाइब्रेंट लेक्चर सीरीज चलता है। उस वाइब्रेंट लेक्चर सीरीज में मैं दुनिया के एक्सपर्ट लोगों को बुलाता हूँ और उनसे हम सुनने के लिए बैठते हैं। मैं भी जैसे यहाँ सुनने के लिए बैठा था, वहाँ बैठता हूँ। अभी जैसे पिछले हफ्ते मिस्टर जिम ओ’नील करके दुनिया के एक बहुत ही बड़े इकोनोमिस्ट हैं, वो आए थे। दो घंटे हमारे साथ बैठे, काफी बातें हुई..! तो मित्रों, कई विषय हैं जिस पर हम प्रयास कर रहे हैं। आपके मन में और भी कई सुझाव होंगे। मित्रों, मैं सोशल मीडिया में बहुत एक्टिव हूँ। सोशल मीडिया में आप जो भी सुझाव भेजोगे, मैं उसको पढ़ता हूँ, मेरे तक वो पहुंचते हैं..! जरूरी हुआ तो मैं सरकार में फॉलो करता हूँ। आप बिना संकोच आपके मन में जो बातें आएं, मुझे डायरेक्ट पोस्ट कर सकते हैं और मैं आपको विश्वास देता हूँ कि वो कहीं ना कहीं मेरे दिमाग के एक कोने में पड़ी होगी, कभी ना कभी तो वो पौधा बन के निकलेगी और हो सकता है वो पौधा वट वृक्ष बने, हो सकता है वही पौधा फल भी दे और हो सकता है कि वो फल को खाने वालों में आप स्वयं भी हो सकते हैं..! ऐसे पूरे विश्वास के साथ बहुत-बहुत धन्यवाद, बहुत-बहुत शुभकामनाएं, थैंक्यू..!

Pariksha Pe Charcha with PM Modi
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ನನ್ನ ಪ್ರಿಯ ದೇಶವಾಸಿಗಳೇ, ನಮಸ್ಕಾರ. ಇಂದು ಕೊರೊನಾ, ನಮ್ಮೆಲ್ಲರ ಧೈರ್ಯ ದುಖಃವನ್ನು ಭರಿಸುವ ಶಕ್ತಿಯನ್ನು ಪರೀಕ್ಷಿಸುತ್ತಿರುವ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ನಿಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಮನದ ಮಾತನ್ನಾಡುತ್ತಿದ್ದೇನೆ. ನಮ್ಮ ಬಹಳಷ್ಟು ಪ್ರಿಯರು ಸಮಯಕ್ಕೂ ಮುನ್ನವೇ ನಮ್ಮಿಂದ ಅಗಲಿದ್ದಾರೆ. ಕೊರೊನಾದ ಮೊದಲ ಅಲೆಯ ವಿರುದ್ಧ ಯಶಸ್ವಿಯಾಗಿ ಹೋರಾಡಿ ಗೆದ್ದ ನಂತರ ದೇಶದ ವಿಶ್ವಾಸ ಹೆಚ್ಚಿತ್ತು. ಆತ್ಮ ವಿಶ್ವಾಸದಿಂದ ಕೂಡಿತ್ತು. ಆದರೆ ಈ ಬಿರುಗಾಳಿ ದೇಶವನ್ನು ತಲ್ಲಣಗೊಳಿಸಿದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ, ಕಳೆದ ದಿನಗಳಲ್ಲಿ ಈ ಸಂಕಷ್ಟದಿಂದ ಹೊರಬರಲು ಬೇರೆ ಬೇರೆ ವಿಭಾಗದ ಪರಿಣಿತರೊಂದಿಗೆ, ತಜ್ಞರೊಂದಿಗೆ ನಾನು ಸುದೀರ್ಘ ಚರ್ಚೆ ನಡೆಸಿದ್ದೇನೆ. ನಮ್ಮ ಔಷಧೀಯ ಕ್ಷೇತ್ರದವರಾಗಲಿ, ಲಸಿಕೆ ತಯಾರಕರಾಗಲಿ, ಆಮ್ಲಜನಕ ಉತ್ಪಾದನಾ ಸಂಬಂಧಿ ಜನರಾಗಲಿ ಅಥವಾ ವೈದ್ಯಕೀಯ ಕ್ಷೇತ್ರದ ಪರಿಣಿತರಾಗಲಿ ಎಲ್ಲರೂ ಮಹತ್ವಪೂರ್ಣ ಸಲಹೆಗಳನ್ನು ಸರ್ಕಾರಕ್ಕೆ ನೀಡಿದ್ದಾರೆ. ಪ್ರಸ್ತುತ ನಾವು ಈ ಹೋರಾಟದಲ್ಲಿ ಜಯಗಳಿಸಲು ತಜ್ಞರ ಮತ್ತು ವಿಜ್ಞಾನಿಗಳ ಸಲಹೆಗಳಿಗೆ ಆದ್ಯತೆ ನೀಡಬೇಕಿದೆ. ರಾಜ್ಯ ಸರ್ಕಾರದ ಪ್ರಯತ್ನಗಳನ್ನು ಮುಂದುವರಿಸಲು ಭಾರತ ಸರ್ಕಾರ ಸಂಪೂರ್ಣ ಶಕ್ತಿಯೊಂದಿಗೆ ಸಿದ್ಧವಾಗಿದೆ. ರಾಜ್ಯ ಸರ್ಕಾರಗಳೂ ತಮ್ಮ ಕರ್ತವ್ಯ ನಿಭಾಯಿಸುವ ಸಂಪೂರ್ಣ ಪ್ರಯತ್ನ ಮಾಡುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ, ಈ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ಕೊರೊನಾ ವಿರುದ್ಧ ವೈದ್ಯರು ಮತ್ತು ಆರೋಗ್ಯ ಕಾರ್ಯಕರ್ತರು ಬಹುದೊಡ್ಡ ಹೋರಾಟವನ್ನೇ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಕಳೆದ ಒಂದು ವರ್ಷದಲ್ಲಿ ಅವರಿಗೆ ಈ ರೋಗದ ಬಗ್ಗೆ ಎಲ್ಲ ರೀತಿಯ ಅನುಭವಗಳಾಗಿವೆ. ನಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಈಗ ಮುಂಬೈಯಿಂದ ಪ್ರಸಿದ್ಧ ವೈದ್ಯರಾದ ಶಶಾಂಕ್ ಜೋಷಿ ಸಂಪರ್ಕದಲ್ಲಿದ್ದಾರೆ.

ಡಾಕ್ಟರ್ ಶಶಾಂಕ್ ಅವರಿಗೆ ಕೊರೊನಾ ಚಿಕಿತ್ಸೆ ಮತ್ತು ಇದಕ್ಕೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ಸಂಶೋಧನೆ ಕುರಿತು ಬಹಳ ಆಳವಾದ ಅನುಭವವಿದೆ. ಅವರು ‘ಇಂಡಿಯನ್ ಕಾಲೇಜ್ ಆಫ್ ಫಿಸಿಶಿಯನ್ಸ್’ ನ ಡೀನ್ ಆಗಿ ಕಾರ್ಯನಿರ್ವಹಿಸಿದ್ದಾರೆ. ಬನ್ನಿ ಡಾಕ್ಟರ್ ಶಶಾಂಕ್ ಅವರೊಂದಿಗೆ ಮಾತನಾಡೋಣ

ಮೋದಿಯವರು: ಡಾಕ್ಟರ್ ಶಶಾಂಕ್ ಅವರೇ ನಮಸ್ಕಾರ

ಡಾ.ಶಶಾಂಕ್ : ನಮಸ್ಕಾರ ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ಈಗ ಕೆಲ ದಿನಗಳ ಹಿಂದೆಯಷ್ಟೇ ನಿಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಮಾತನಾಡುವ ಅವಕಾಶ ಲಭಿಸಿತ್ತು. ನಿಮ್ಮ ವಿಚಾರಗಳಲ್ಲಿನ ಸ್ಪಷ್ಟತೆ ನನಗೆ ಬಹಳ ಇಷ್ಟವಾಯಿತು. ದೇಶದ ಸಮಸ್ತ ನಾಗರಿಕರು ನಿಮ್ಮ ವಿಚಾರಗಳನ್ನು ಅರಿಯಲಿ ಎಂದು ನನಗೆ ಅನ್ನಿಸಿತು. ಯಾವ ವಿಚಾರಗಳು ಕೇಳಿ ಬರುತ್ತಿವೆಯೋ ಅವನ್ನೇ ಒಂದು ಪ್ರಶ್ನೆಯ ರೂಪದಲ್ಲಿ ನಿಮ್ಮ ಮುಂದಿಡುತ್ತಿದ್ದೇನೆ. ಡಾ.ಶಶಾಂಕ್ ಅವರೇ ನೀವು ಹಗಲಿರುಳು ಜೀವನ ರಕ್ಷಣೆಯ ಕೆಲಸದಲ್ಲಿ ತೊಡಗಿದ್ದೀರಿ. ಎಲ್ಲಕ್ಕಿಂತ ಮೊದಲು 2 ನೇ ಅಲೆಯ ಬಗ್ಗೆ ನೀವು ಜನರಿಗೆ ಮಾಹಿತಿ ನೀಡಿ ಎಂದು ನಾನು ಬಯಸುತ್ತೇನೆ. ವೈದ್ಯಕೀಯವಾಗಿ ಇದು ಹೇಗೆ ಭಿನ್ನವಾಗಿದೆ ಮತ್ತು ಏನೇನು ಮುಂಜಾಗೃತೆಗಳನ್ನು ಕೈಗೊಳ್ಳಬೇಕು?

ಡಾ.ಶಶಾಂಕ್ : ಧನ್ಯವಾದಗಳು ಸರ್, ಈ 2 ನೇ ಅಲೆ ಬಹಳ ತೀವ್ರವಾಗಿ ಹರಡುತ್ತಿದೆ. ಮೊದಲನೇ ಅಲೆಗಿಂತಲೂ ವೇಗವಾಗಿ ವೈರಾಣು ಹರಡುತ್ತಿದೆ, ಆದರೆ ಅದಕ್ಕಿಂತ ಹೆಚ್ಚಿನ ವೇಗದಲ್ಲಿ ಚೇತರಿಕೆ ಇದೆ ಮತ್ತು ಮೃತ್ಯು ದರ ಬಹಳ ಕಡಿಮೆ ಇದೆ ಎಂಬುದು ಒಳ್ಳೆಯ ವಿಷಯ. ಇದರಲ್ಲಿ 2-3 ವ್ಯತ್ಯಾಸಗಳಿವೆ, ಮೊದಲನೇಯದ್ದು ಯುವಜನತೆ ಮತ್ತು ಮಕ್ಕಳಲ್ಲಿ ಇದು ಕಾಣಿಸಿಕೊಳ್ಳುತ್ತಿದೆ. ಅದರ ಲಕ್ಷಣಗಳು ಹಿಂದಿನಂತೆಯೇ ಉಸಿರಾಟದ ತೊಂದರೆ, ಒಣ ಕೆಮ್ಮು, ಜ್ವರ, ಎಲ್ಲವೂ ಇವೆ. ಆದರೆ ಅದರೊಂದಿಗೆ ರುಚಿ ಕಳೆದುಕೊಳ್ಳುತ್ತಾರೆ ಮತ್ತು ವಾಸನೆ ಗ್ರಹಿಸುವ ಶಕ್ತಿಯನ್ನು ಕಳೆದುಕೊಳ್ಳುತ್ತಾರೆ. ಜನರು ಸ್ವಲ್ಪ ಭಯಭೀತರಾಗಿದ್ದಾರೆ. ಭೀತಿಗೊಳಗಾಗುವ ಅವಶ್ಯಕತೆ ಖಂಡಿತ ಇಲ್ಲ. ಶೇ 80-90 ಜನರಲಲಿ ಈ ಯಾವ ಲಕ್ಷಣಗಳು ಕಂಡುಬರುವುದಿಲ್ಲ. ಮ್ಯುಟೇಶನ್ ಎಂದು ಹೇಳುತ್ತಾರಲ್ಲವೇ ಅದಕ್ಕೆ ಹೆದರುವ ಅವಶ್ಯಕತೆಯಿಲ್ಲ. ಮ್ಯುಟೇಶನ್ ಆಗುತ್ತಲೇ ಇರುತ್ತದೆ, ನಾವು ಬಟ್ಟೆ ಬದಲಿಸಿದಂತೆ ವೈರಾಣು ತನ್ನ ಸ್ವರೂಪವನ್ನು ಬದಲಿಸುತ್ತಲೇ ಇರುತ್ತದೆ. ಆದ್ದರಿಂದ ಹೆದರುವ ಅವಶ್ಯಕತೆಯಿಲ್ಲ. ಈ ಅಲೆಯನ್ನೂ ನಾವು ದಾಟಿ ಬರಲಿದ್ದೇವೆ. ಅಲೆಗಳು ಬರುತ್ತಲೇ ಇರುತ್ತವೆ, ವೈರಾಣು ಕೂಡಾ ಬಂದು ಹೋಗುತ್ತಿರುತ್ತದೆ. ಇವೇ ಬೇರೆ ಬೇರೆ ಲಕ್ಷಣಗಳಾಗಿವೆ. ವೈದ್ಯಕೀಯವಾಗಿ ನಾವು ಸನ್ನದ್ಧರಾಗಿರಬೇಕು. 14 ರಿಂದ 21 ದಿನಗಳ ಕೋವಿಡ್ ಇರುತ್ತದೆ. ಈ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ವೈದ್ಯರ ಸಲಹೆಯನ್ನು ಪಡೆದುಕೊಳ್ಳಬೇಕು

ಮೋದಿಯವರು: ಡಾ.ಶಶಾಂಕ್ ಅವರೇ ನಿಮ್ಮ ವಿಶ್ಲೇಷಣೆ ನನಗೂ ಬಹಳ ಆಸಕ್ತಿಕರವಾಗಿದೆ. ನನಗೆ ಬಹಳಷ್ಟು ಪತ್ರಗಳು ಬಂದಿವೆ. ಚಿಕಿತ್ಸೆ ಕುರಿತು ಜನರಲ್ಲಿ ಬಹಳ ಸಂದೇಹಗಳಿವೆ. ಕೆಲ ಔಷಧಿಗಳ ಬೇಡಿಕೆ ಹೆಚ್ಚಿದೆ. ಆದ್ದರಿಂದ ಕೋವಿಡ್ ಚಿಕಿತ್ಸೆ ಬಗ್ಗೆಯೂ ಸಹ ಖಂಡಿತ ನೀವು ತಿಳಿಸಬೇಕೆಂದು ನಾನು ಬಯಸುತ್ತೇನೆ

ಡಾ.ಶಶಾಂಕ್ : ಹಾಂ ಸರ್, ಕ್ಲಿನಿಕಲ್ ಚಿಕಿತ್ಸೆಯನ್ನು ಜನರು ಬಹಳ ತಡವಾಗಿ ಆರಂಭಿಸುತ್ತಾರೆ. ಹಾಗಾಗಿ ರೋಗ ತಂತಾನೇ ಹೊರಟುಹೋಗುತ್ತದೆ ಎಂಬ ಭರವಸೆಯಲ್ಲಿರುತ್ತಾರೆ ಮತ್ತು ಮೊಬೈಲ್ ನಲ್ಲಿ ಹರಿದಾಡುವ ಸುದ್ದಿಗಳನ್ನು ನಂಬುತ್ತಾರೆ. ಸರ್ಕಾರ ನೀಡಿದ ಸೂಚನೆಗಳನ್ನು ಪಾಲಿಸಿದರೆ ಇಂಥ ಸಂಕಷ್ಟಗಳು ಎದುರಾಗುವುದಿಲ್ಲ. ಹಾಗಾಗಿ ಕೋವಿಡ್ ಚಿಕಿತ್ಸೆ ವಿಧಾನದಲ್ಲಿ 3 ಬಗೆಯ ಹಂತಗಳಿವೆ. ಅಲ್ಪ ಅಥವಾ ಮೈಲ್ಡ್ ಕೋವಿಡ್, ಮಧ್ಯಮ ಅಥವಾ ಮಾಡರೇಟ್ ಕೋವಿಡ್ ಅಥವಾ ತೀವ್ರತರವಾದ ಕೋವಿಡ್ ಇದನ್ನು ಸಿವಿಯರ್ ಕೋವಿಡ್ ಎನ್ನುತ್ತಾರೆ. ಅಲ್ಪ ಕೋವಿಡ್ ರೋಗಿಗಳಿಗೆ ಆಕ್ಸಿಜೆನ್ ಮಾನಿಟರಿಂಗ್ ಮಾಡುತ್ತೇವೆ. ನಾಡಿ ಮಿಡಿತ, ಜ್ವರದ ಮೇಲೆ ನಿಗಾವಹಿಸುತ್ತೇವೆ. ಜ್ವರ ಹೆಚ್ಚಾಗುವಂತಿದ್ದರೆ ಕೆಲವೊಮ್ಮೆ ಪ್ಯಾರಾಸಿಟಮಾಲ್ ಔಷಧಿ ಬಳಸುತ್ತೇವೆ. ಮಾಡರೇಟ್ ಕೋವಿಡ್ ಇದ್ದಲ್ಲಿ ಅಥವಾ ತೀವ್ರತರವಾದ ಕೋವಿಡ್ ಇದ್ದಲ್ಲಿ ತಮ್ಮ ವೈದ್ಯರನ್ನು ಸಂಪರ್ಕಿಸುವುದು ಅತ್ಯಂತ ಅವಶ್ಯಕ. ಸೂಕ್ತ ಮತ್ತು ಕಡಿಮೆ ದರದ ಔಷಧಿಗಳು ಲಭ್ಯವಿವೆ. ಇಂಥದ್ದರಲ್ಲಿ ಸ್ಟೆರಾಯ್ಡ್ ಗಳು ಜೀವರಕ್ಷಣೆ ಮಾಡಬಲ್ಲವು. ಇನ್ ಹೇಲರ್ಸ್ ನೀಡುತ್ತೇವೆ, ಮಾತ್ರೆಗಳನ್ನು ನೀಡಬಹುದು, ಇದರೊಟ್ಟಿಗೆ ಆಕ್ಸಿಜೆನ್ ಕೂಡ ಕೊಡಬೇಕಾಗುತ್ತದೆ. ಇದಕ್ಕೆ ಸಣ್ಣ ಪುಟ್ಟ ಚಿಕಿತ್ಸೆಗಳಿವೆ. ಆದರೆ ಒಂದು ಹೊಸ ಪ್ರಯೋಗಾತ್ಮಕ ಔಷಧಿಯೂ ಲಭ್ಯವಿದೆ. ಅದರ ಹೆಸರು ರೆಮ್ ಡೆಸಿವಿರ್. ಇದರಿಂದ ಆಸ್ಪತ್ರೆಯಲ್ಲಿ ಉಳಿಯಬೇಕಾಗುವ ಅವಧಿ 2-3 ದಿನ ಕಡಿಮೆ ಆಗುವ ಉಪಯೋಗವಿದೆ. ಉಪಯುಕ್ತತೆ ಇದೆ. ವೈದ್ಯಕೀಯ ಚಿಕಿತ್ಸೆಯಲ್ಲಿ ಸಹಾಯಕಾರಿಯಾಗಿದೆ. ಮೊದಲ 9-10 ದಿನಗಳೊಳಗೆ ನೀಡಿದಾಗ ಮಾತ್ರ ಈ ಔಷಧಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತದೆ ಮತ್ತು ಇದನ್ನು 5 ದಿನ ಮಾತ್ರ ನೀಡಬೇಕಾಗುತ್ತದೆ. ರೆಮ್ ಡೆಸಿವಿರ್ ಹಿಂದೆ ಜನರು ಮುಗಿಬೀಳುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಇದರ ಅವಶ್ಯಕತೆಯಿಲ್ಲ. ಈ ಔಷಧಿ ಸ್ವಲ್ಪ ಪರಿಣಾಮಕಾರಿಯಾಗಿದೆ. ಯಾರಿಗೆ ಪ್ರಾಣವಾಯು ಆಕ್ಸಿಜೆನ್ ನೀಡಲಾಗುತ್ತದೆಯೋ, ಆಸ್ಪತ್ರೆಯಲ್ಲಿ ಯಾರು ಭರ್ತಿಯಾಗುತ್ತಾರೋ ಅವರು ವೈದ್ಯರ ಸಲಹೆ ಮೇರೆಗೆ ಇದನ್ನು ತೆಗೆದುಕೊಳ್ಳಬೇಕು. ಇದನ್ನು ಎಲ್ಲರೂ ಅರಿತುಕೊಳ್ಳುವುದು ಬಹಳ ಅವಶ್ಯಕವಾಗಿದೆ. ನಾವು ಪ್ರಾಣಾಯಾಮ ಮಾಡೋಣ. ನಮ್ಮ ದೇಹದಲ್ಲಿರುವ ಶ್ವಾಸಕೋಶಗಳನ್ನು ಸ್ವಲ್ಪ ಹಿಗ್ಗಿಸೋಣ. ಹೆಪಾರಿನ್ ಎಂದು ಕರೆಯಲ್ಪಡುವ ರಕ್ತವನ್ನು ತೆಳುವಾಗಿಸುವ ಔಷಧಿಯಂಥ ಸಣ್ಣ ಪುಟ್ಟ ಔಷಧಿಗಳನ್ನು ನೀಡುವುದರಿಂದ ಶೇ 98 ರಷ್ಟು ಜನರು ಚೇತರಿಸಿಕೊಳ್ಳುತ್ತಾರೆ. ವೈದ್ಯಕೀಯ ಚಿಕಿತ್ಸೆಯನ್ನು ವೈದ್ಯರ ಸಲಹೆ ಮೇರೆಗೆ ತೆಗೆದುಕೊಳ್ಳುವುದು ಅವಶ್ಯಕ. ದುಬಾರಿ ಔಷಧಿಗಳ ಹಿಂದೆ ಬೀಳುವ ಅವಶ್ಯಕತೆಯಿಲ್ಲ ಸರ್. ನಮ್ಮ ಬಳಿ ಉತ್ತಮ ಚಿಕಿತ್ಸೆ ಲಭ್ಯವಿದೆ. ಪ್ರಾಣವಾಯು ಆಕ್ಸಿಜೆನ್ ಲಭ್ಯವಿದೆ, ವೆಂಟಿಲೇಟರ್ ಸೌಲಭ್ಯವಿದೆ. ಎಲ್ಲವೂ ಇದೆ ಸರ್. ಈ ಔಷಧಿ ದೊರೆತಾಗ ಅದನ್ನು ಅವಶ್ಯಕತೆಯಿದ್ದವರಿಗೆ ಮಾತ್ರ ನೀಡಬೇಕು. ಇದರ ಬಗ್ಗೆ ಬಹಳಷ್ಟು ಭ್ರಮೆ ಆವರಿಸಿದೆ. ಆದ್ದರಿಂದಲೇ ನಮ್ಮ ಬಳಿ ವಿಶ್ವದ ಅತ್ಯುತ್ತಮ ಚಿಕಿತ್ಸಾ ಸೌಲಭ್ಯವಿದೆ ಎಂದು ಸ್ಪಷ್ಟೀಕರಣೆ ನೀಡಬಯಸುತ್ತೇನೆ ಸರ್. ಭಾರತದಲ್ಲಿ ಚೇತರಿಕೆ ಪ್ರಮಾಣ ಅತ್ಯಂತ ಹೆಚ್ಚಾಗಿದೆ ಎಂಬುದನ್ನು ನೀವು ನೋಡಬಹುದು. ನೀವು ಯುರೋಪ್, ಅಮೇರಿಕಕ್ಕೆ ಹೋಲಿಸಿದಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಚಿಕಿತ್ಸಾ ಶಿಷ್ಠಾಚಾರದಿಂದ ರೋಗಿಗಳು ಗುಣಮುಖರಾಗುತ್ತಿದ್ದಾರೆ.

ಮೋದಿಯವರು: ಡಾ.ಶಶಾಂಕ್ ಅವರೇ ಅನಂತ ಧನ್ಯವಾದಗಳು. ನಮಗೆ ಡಾ.ಶಶಾಂಕ್ ಅವರು ನೀಡಿದ ಮಾಹಿತಿ ಬಹಳ ಅವಶ್ಯಕವಾಗಿದೆ ಮತ್ತು ಲಾಭದಾಯಕವಾಗಿದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ, ನಿಮಗೆ ಯಾವುದೇ ಮಾಹಿತಿ ಬೇಕೆಂದಲ್ಲಿ, ಯಾವುದೇ ಅನುಮಾನಗಳಿದ್ದಲ್ಲಿ ವಿಶ್ವಾಸಾರ್ಹ ಮೂಲದಿಂದಲೇ ಮಾಹಿತಿ ಪಡೆಯಿರಿ ಎಂದು ನಿಮ್ಮೆಲ್ಲರನ್ನು ಕೇಳಿಕೊಳ್ಳುತ್ತೇನೆ. ನಿಮ್ಮ ಕುಟುಂಬ ವೈದ್ಯರಾಗಲಿ, ಸಮೀಪದ ವೈದ್ಯರಿಂದಾಗಲಿ ಫೋನ್ ಮೂಲಕ ಸಂಪರ್ಕಿಸಿ ಸಲಹೆಗಳನ್ನು ಪಡೆಯಿರಿ. ನಮ್ಮ ವೈದ್ಯರು ಸ್ವತಃ ತಾವೇ ಜವಾಬ್ದಾರಿ ಹೊತ್ತು ಮುಂದೆ ಬರುತ್ತಿರುವುದನ್ನು ನಾವು ನೋಡುತ್ತಿದ್ದೇವೆ. ಅದೆಷ್ಟೋ ವೈದ್ಯರು ಸಾಮಾಜಿಕ ಜಾಲತಾಣಗಳ ಮೂಲಕ ಜನರಿಗೆ ಮಾಹಿತಿ ಒದಗಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಫೋನ್ ಮೂಲಕ, ವಾಟ್ಸಾಪ್ ಮೂಲಕ ಸಮಾಲೋಚನೆ ನಡೆಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಹಲವಾರು ಆಸ್ಪತ್ರೆಗಳ ವೆಬ್ ಸೈಟ್ ಗಳಿವೆ ಅಲ್ಲಿ ಮಾಹಿತಿಯೂ ಲಭ್ಯ ಮತ್ತು ವೈದ್ಯರೊಂದಿಗೆ ಸಮಾಲೋಚನೆಗೂ ಅವಕಾಶವಿದೆ. ಇದು ತುಂಬಾ ಮೆಚ್ಚುಗೆಯ ವಿಷಯವಾಗಿದೆ

ನನ್ನೊಂದಿಗೆ ಶ್ರೀನಗರದಿಂದ ಡಾಕ್ಟರ್ ನಾವೀದ್ ನಜೀರ್ ಶಾ ಸಂಪರ್ಕದಲ್ಲಿದ್ದಾರೆ. ಡಾಕ್ಟರ್ ನಾವೀದ್ ಶ್ರೀನಗರದ ಒಂದು ಸರ್ಕಾರಿ ವೈದ್ಯಕೀಯ ಕಾಲೇಜಿನಲ್ಲಿ ಪ್ರಾಧ್ಯಾಪಕರಾಗಿದ್ದಾರೆ. ನಾವೀದ್ ತಮ್ಮ ಉಸ್ತುವಾರಿಯಲ್ಲಿ ಅನೇಕ ಕೊರೋನಾ ರೋಗಿಗಳನ್ನು ಗುಣಪಡಿಸಿದ್ದಾರೆ. ರಮ್ ಜಾನ್ ನ ಈ ಪವಿತ್ರ ಮಾಸದಲ್ಲಿ ಡಾ. ನಾವೀದ್ ತಮ್ಮ ಕಾರ್ಯವನ್ನೂ ನಿಭಾಯಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ ಹಾಗೂ ಅವರು ನಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಮಾತುಕತೆಗೆ ಸಮಯವನ್ನೂ ಮೀಸಲಿಟ್ಟಿದ್ದಾರೆ. ಬನ್ನಿ, ಅವರೊಂದಿಗೇ ಮಾತನಾಡೋಣ.

ಮೋದಿ: ಡಾ. ನಾವೀದ್ ಅವರೇ, ನಮಸ್ಕಾರ

ಡಾ.ನಾವೀದ್: ನಮಸ್ಕಾರ ಸರ್

ಮೋದಿ: ಡಾಕ್ಟರ್ ನಾವೀದ್, “ಮನದ ಮಾತು’ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮದಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಶ್ರೋತೃಗಳು ಈ ಕಠಿಣ ಕಾಲದಲ್ಲಿ ಭಯ ನಿರ್ವಹಣೆಯ ಪ್ರಶ್ನೆಯನ್ನು ಎತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ತಾವು ತಮ್ಮ ಅನುಭವದಿಂದ ಅವರಿಗೆ ಏನು ಉತ್ತರ ನೀಡುತ್ತೀರಿ?

ಡಾ.ನಾವೀದ್: ನೋಡಿ, ಕೊರೋನಾ ಆರಂಭವಾದಾಗ ನಮ್ಮ ಸಿಟಿ ಆಸ್ಪತ್ರೆಯೇ ಕಾಶ್ಮೀರದ ಮೊಟ್ಟಮೊದಲ ಕೋವಿಡ್ ಆಸ್ಪತ್ರೆಯೆಂದು ಗುರುತಿಸಲ್ಪಟ್ಟಿತು. ವೈದ್ಯಕೀಯ ಕಾಲೇಜಿನಲ್ಲಿ ಆ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ಒಂದು ಭಯದ ವಾತಾವರಣವಿತ್ತು. ಜನರಲ್ಲಂತೂ ಕೋವಿಡ್ ಸೋಂಕು ಯಾರಿಗಾದರೂ ಬಂದರೆ ಮರಣಶಿಕ್ಷೆಯೆಂದೇ ಪರಿಗಣಿಸುವ ಭಾವನೆಯಿತ್ತು. ಇಂಥದ್ದರಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಆಸ್ಪತ್ರೆಯ ವೈದ್ಯವೃಂದ ಹಾಗೂ ಪ್ಯಾರಾ ಮೆಡಿಕಲ್ ಸಿಬ್ಬಂದಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದೆವು. ನಾವು ಈ ರೋಗಿಗಳನ್ನು ಹೇಗೆ ಎದುರಿಸಬೇಕು ಎಂದು ಅವರಲ್ಲೂ ಒಂದು ರೀತಿಯ ಆತಂಕದ ವಾತಾವರಣವಿತ್ತು. ನಮಗೆ ಸೋಂಕು ಉಂಟಾಗಬಹುದೆನ್ನುವ ಭಯ ಇರಲಿಲ್ಲ ಎಂದೇನಲ್ಲ. ಆದರೆ, ಆ ಸಮಯ ಕಳೆದಂತೆ . ಸಮರ್ಪಕವಾಗಿ ರಕ್ಷಣಾ ಸಲಕರಣೆ ಧರಿಸಿದರೆ, ನಿಯಮಗಳು, ನಿಖರವಾದ ಯೋಜನೆಯನ್ನು ಪರಿಪಾಲಿಸಿದರೆ ನಾವೂ ಸುರಕ್ಷಿತವಾಗಿ ಇರಬಹುದು. ಹಾಗೂ ಇತರ ಸಿಬ್ಬಂದಿಯೂ ಸುರಕ್ಷಿತವಾಗಿರಬಹುದು ಎಂಬುದನ್ನು ನಾವು ಮನಗಂಡೆವು. ರೋಗಿಗಳ ಕೆಲವು ಸಂಬಂಧಿಗಳು ಅನಾರೋಗ್ಯಕ್ಕೀಡಾದರು, ಅವರಿಗೆ ರೋಗದ ಯಾವ ಲಕ್ಷಣಗಳು ಇರಲಿಲ್ಲ. ಸರಿಸುಮಾರು ಶೇಕಡ 90-95ಕ್ಕೂ ಹೆಚ್ಚು ರೋಗಿಗಳು ಔಷಧಗಳಿಲ್ಲದೆಯೂ ಗುಣಮುಖರಾಗುತ್ತಿದ್ದುದನ್ನೂ ನಾವು ನೋಡಿದೆವು. ಸಮಯ ಕಳೆದಂತೆ ಜನರಲ್ಲಿ ಕೊರೋನಾ ಬಗ್ಗೆ ಇದ್ದ ಭಯ ಕಡಿಮೆಯಾಯಿತು. ಈಗ ಎರಡನೇ ಅಲೆ ನಮಗೆ ಬಂದೆರಗಿದೆ. ಈ ಸಮಯದಲ್ಲಿಯೂ ನಾವು ಭಯಪಡುವ ಅಗತ್ಯವಿಲ್ಲ. ಈ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲೂ ರಕ್ಷಣಾತ್ಮಕ ಮಾರ್ಗಗಳನ್ನು ಪಾಲನೆ ಮಾಡಬೇಕು. ಏನೇನು ಕೊರೋನಾ ಮಾರ್ಗಸೂಚಿಗಳಿವೆಯೋ ಅವುಗಳನ್ನು ಪಾಲಿಸಬೇಕು. ಮಾಸ್ಕ್ ಧರಿಸುವುದು, ಕೈಗಳಿಗೆ ಸ್ಯಾನಿಟೈಸರ್ ಬಳಕೆ ಮಾಡುವುದು, ಅಷ್ಟೇ ಅಲ್ಲದೆ, ವ್ಯಕ್ತಿಗತ ಅಂತರ ಕಾಪಾಡಿಕೊಳ್ಳುವುದು, ಗುಂಪು ಸೇರುವುದನ್ನು ತಡೆಯಬೇಕು. ಇವುಗಳನ್ನು ಅನುಸರಿಸಿದರೆ ನಾವು ನಮ್ಮ ದಿನನಿತ್ಯದ ಕೆಲಸ ಕಾರ್ಯಗಳನ್ನು ಚೆನ್ನಾಗಿಯೇ ನಿಭಾಯಿಸಿಕೊಂಡು ಹೋಗಬಹುದು ಹಾಗೂ ಸೋಂಕಿನಿಂದ ರಕ್ಷಿಸಿಕೊಳ್ಳಲೂಬಹುದು.

ಮೋದಿ ಜಿ: ಡಾ.ನಾವೀದ್, ಲಸಿಕೆಯ ಕುರಿತಾಗಿಯೂ ಜನರಲ್ಲಿ ಹಲವಾರು ಪ್ರಶ್ನೆಗಳಿವೆ. ಲಸಿಕೆಯಿಂದ ಎಷ್ಟು ರಕ್ಷಣೆ ಸಿಗುತ್ತದೆ, ಲಸಿಕೆ ತೆಗೆದುಕೊಂಡ ಬಳಿಕ ಎಷ್ಟು ಅಸ್ವಸ್ಥರಾಗುತ್ತೇವೆ? ಈ ಬಗ್ಗೆ ಸ್ವಲ್ಪ ಹೇಳಿ, ಇದರಿಂದ ನಮ್ಮ ಕೇಳುಗರಿಗೂ ಸಾಕಷ್ಟು ಲಾಭವಾಗುತ್ತದೆ.

ಡಾ.ನಾವೀದ್: ಯಾವಾಗ ಕೊರೋನಾ ಸೋಂಕು ನಮಗೆ ಎದುರಾಯಿತೋ, ಅಂದಿನಿಂದ ಇಂದಿನವರೆಗೂ ನಮ್ಮಲ್ಲಿ ಕೋವಿಡ್-19 ಗೆ ಯಾವುದೇ ಪರಿಣಾಮಕಾರಿ ಚಿಕಿತ್ಸೆ ಲಭ್ಯವಿಲ್ಲ. ಅಂದರೆ, ನಾವು ಈ ರೋಗದ ವಿರುದ್ಧ ಎರಡು ಮಾರ್ಗಗಳ ಮೂಲಕ ಮಾತ್ರ ಹೋರಾಟ ಮಾಡಬಹುದು. ಮೊದಲನೆಯದಾಗಿ, ರಕ್ಷಣಾ ವಿಧಾನಗಳನ್ನು ಪರಿಪಾಲಿಸುವುದು. ಯಾವುದೇ ಪರಿಣಾಮಕಾರಿ ಲಸಿಕೆ ನಮಗೆ ಸಿಕ್ಕರೂ ಈ ರೋಗದಿಂದ ನಮಗೆ ಮುಕ್ತಿ ದೊರೆಯುತ್ತದೆ ಎಂದು ನಾವು ಮೊದಲಿನಿಂದಲೂ ಹೇಳುತ್ತ ಬಂದಿದ್ದೇವೆ. ನಮ್ಮ ದೇಶದಲ್ಲಿ ಎರಡು ಲಸಿಕೆಗಳು ಈ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ಲಭ್ಯ ಇವೆ. ಅವು ಕೋವ್ಯಾಕ್ಸೀನ್ ಮತ್ತು ಕೋವಿಶೀಲ್ಡ್. ಇವು ನಮ್ಮಲ್ಲಿಯೇ ತಯಾರಿಸುತ್ತಿರುವ ಲಸಿಕೆಗಳು. ಇತರ ಸಂಸ್ಥೆಗಳು ಸಹ ತಮ್ಮ ಪ್ರಯೋಗಗಳನ್ನು ಮಾಡಿವೆ. ಅದರಲ್ಲಿ ಶೇ.60ಕ್ಕಿಂತ ಹೆಚ್ಚು ಪರಿಣಾಮಕಾರಿ ಎಂಬುದು ದೃಢಪಟ್ಟಿದೆ. ನಾವು ಜಮ್ಮು ಕಾಶ್ಮೀರದ ಬಗ್ಗೆಯೇ ಹೇಳಿದರೆ, ನಮ್ಮ ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶದಲ್ಲಿ ಈವರೆಗೆ 15ರಿಂದ 16 ಲಕ್ಷ ಜನ ಈ ಲಸಿಕೆ ಪಡೆದಿದ್ದಾರೆ. ಹೌದು, ಸಾಮಾಜಿಕ ಜಾಲತಾಣಗಳಲ್ಲಿ ಇವುಗಳ ಬಗ್ಗೆ ಸಾಕಷ್ಟು ತಪ್ಪು ತಿಳಿವಳಿಕೆ ಅಥವಾ ಮಿಥ್ಯಗಳು ಪ್ರಚಲಿತದಲ್ಲಿವೆ. ಇಂತಿಂಥ ಅಡ್ಡ ಪರಿಣಾಮಗಳು ಇವೆ ಎಂದು ಹೇಳಲಾಗುತ್ತಿದ್ದರೂ ಇಲ್ಲಿಯವರೆಗೆ ಲಸಿಕೆ ಪಡೆದುಕೊಂಡವರಲ್ಲಿ ಯಾವುದೇ ಅಡ್ಡ ಪರಿಣಾಮಗಳು ಕಂಡುಬಂದಿಲ್ಲ. ಯಾವುದೇ ಇನ್ನಿತರ ಲಸಿಕೆ ಪಡೆದುಕೊಂಡಾಗಲೂ ಆಗುವ ಕೆಲವು ಅಡ್ಡಪರಿಣಾಮಗಳು ಮಾತ್ರ ಕಂಡುಬಂದಿವೆ. ಕೆಲವರಿಗೆ ಜ್ವರ ಬಂದಿರಬಹುದು, ಇಡೀ ದೇಹದಲ್ಲಿ ನೋವು, ಲಸಿಕೆ ಹಾಕಿಸಿಕೊಂಡ ಜಾಗದಲ್ಲಿ ನೋವು ಇವು ಸಾಮಾನ್ಯ. ಇವುಗಳನ್ನು ನಾವು ಪ್ರತಿಯೊಬ್ಬರಲ್ಲಿ ನೋಡಿದ್ದೇವೆ. ಆದರೆ, ಯಾವುದೇ ಅತಿಯಾದ ತೊಂದರೆ, ಕೆಟ್ಟ ಪರಿಣಾಮಗಳನ್ನು ನಾವು ನೋಡಿಲ್ಲ. ಜನರಲ್ಲಿ ಇನ್ನೊಂದು ಶಂಕೆಯಿದೆ. ಎರಡನೆಯದಾಗಿ ಲಸಿಕೆ ಪಡೆದುಕೊಂಡ ಬಳಿಕವೂ ಸೋಂಕು ಉಂಟಾಗುತ್ತಿದೆಯಲ್ಲ ಎನ್ನುವುದು. ಲಸಿಕೆ ಪಡೆದುಕೊಂಡ ಬಳಿಕವೂ ಸೋಂಕು ಉಂಟಾಗಬಹುದು ಎಂದು ಕಂಪೆನಿಗಳೇ ಸೂಚನೆ ನೀಡಿವೆ. ಅವರಲ್ಲೂ ಸೋಂಕು ದೃಢಪಡಬಹುದು. ಆದರೆ, ರೋಗದ ತೀವ್ರತೆ ಲಸಿಕೆ ಪಡೆದವರಲ್ಲಿ ಹೆಚ್ಚಾಗಿರುವುದಿಲ್ಲ. ಅಂದರೆ, ಸೋಂಕು ಬರಬಹುದು ಆದರೆ, ಜೀವಕ್ಕೆ ಎರವಾಗುವಷ್ಟರ ಮಟ್ಟಿಗೆ ಅನಾರೋಗ್ಯ ಉಂಟಾಗುವುದಿಲ್ಲ. ಹೀಗಾಗಿ, ಲಸಿಕೆಯ ಕುರಿತು ಇಂಥ ಯಾವುದೇ ತಪ್ಪು ತಿಳಿವಳಿಕೆಗಳಿದ್ದರೆ ಅವುಗಳನ್ನು ತಲೆಯಿಂದ ತೆಗೆದುಹಾಕುವುದು ಉತ್ತಮ. ಯಾರ್ಯಾರ ಪಾಳಿ ಬಂದಿದೆಯೋ ಅವರು ಲಸಿಕೆ ಹಾಕಿಸಿಕೊಳ್ಳಬೇಕು. ಮೇ 1ರಿಂದ ಇಡೀ ದೇಶದಲ್ಲಿ 18 ವರ್ಷ ಮೇಲ್ಪಟ್ಟವರಿಗೆ ಲಸಿಕೆ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮ ಆರಂಭವಾಗುತ್ತಿದೆ. ಜನರಲ್ಲಿ ನಾನು ಮನವಿ ಮಾಡುವುದೇನೆಂದರೆ, ಎಲ್ಲರೂ ಬಂದು ಲಸಿಕೆ ಹಾಕಿಸಿಕೊಳ್ಳಿ. ಈ ಮೂಲಕ ತಮ್ಮನ್ನು ತಾವು ರಕ್ಷಿಸಿಕೊಳ್ಳಿ. ಆಗ ಒಟ್ಟಾರೆ ನಮ್ಮ ಸಮಾಜ, ಸಮುದಾಯವೂ ಕೋವಿಡ್-19 ಸೋಂಕಿನಿಂದ ರಕ್ಷಣೆ ಪಡೆಯುತ್ತದೆ.

ಮೋದಿ ಜಿ: ಡಾ.ನಾವೀದ್ ತುಂಬು ಹೃದಯದ ಧನ್ಯವಾದಗಳು. ತಮಗೆ ರಂಜಾನ್ ಪವಿತ್ರ ಮಾಸದ ಅನೇಕಾನೇಕ ಶುಭಕಾಮನೆಗಳು.

ಡಾ.ನಾವೀದ್: ಅನೇಕಾನೇಕ ಧನ್ಯವಾದಗಳು.

ಮೋದಿ ಜಿ: ಸ್ನೇಹಿತರೆ, ಕೊರೋನಾದ ಈ ಸಂಕಟ ಕಾಲದಲ್ಲಿ ಲಸಿಕೆಯ ಪ್ರಾಮುಖ್ಯತೆ ಬಗೆಗೆ ಎಲ್ಲರಿಗೂ ತಿಳಿಯುತ್ತಿದೆ. ಹೀಗಾಗಿ, ಲಸಿಕೆಯ ಕುರಿತು ಯಾವುದೇ ರೀತಿಯ ವದಂತಿಗೆ ಕಿವಿಗೊಡಬೇಡಿ ಎನ್ನುವುದು ನನ್ನ ಒತ್ತಾಯ. ಭಾರತ ಸರ್ಕಾರದ ವತಿಯಿಂದ ಎಲ್ಲ ರಾಜ್ಯಗಳಿಗೆ ಉಚಿತವಾಗಿ ಲಸಿಕೆ ಕಳುಹಿಸಲಾಗಿದೆ. ಅದರ ಲಾಭವನ್ನು 45 ವರ್ಷ ಮೇಲ್ಪಟ್ಟವರು ಪಡೆದುಕೊಳ್ಳಬಹುದೆಂದು ತಮಗೆಲ್ಲರಿಗೂ ತಿಳಿದಿದೆ. ಇನ್ನು, ಮೇ 1ರಿಂದ ದೇಶದಲ್ಲಿ 18 ವರ್ಷ ಮೇಲ್ಪಟ್ಟ ಪ್ರತಿ ವ್ಯಕ್ತಿಗೆ ಲಸಿಕೆ ಲಭ್ಯವಾಗುತ್ತದೆ. ಈಗ ದೇಶದ ಕಾರ್ಪೋರೇಟ್ ವಲಯ, ಕಂಪೆನಿಗಳು ಸಹ ತಮ್ಮ ಉದ್ಯೋಗಿಗಳಿಗೆ ಲಸಿಕೆ ಹಾಕಿಸುವ ಅಭಿಯಾನದಲ್ಲಿ ಭಾಗಿಯಾಗಲು ಸಾಧ್ಯವಿದೆ. ಪ್ರಸ್ತುತ ನಡೆಯುತ್ತಿರುವ ಭಾರತ ಸರ್ಕಾರದಿಂದ ಉಚಿತವಾಗಿ ಲಸಿಕೆ ನೀಡುವ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮ ಮುಂದೆಯೂ ಚಾಲ್ತಿಯಲ್ಲಿರುತ್ತದೆ ಎಂದು ಹೇಳಲು ನಾನು ಇಚ್ಛಿಸುತ್ತೇನೆ. ಕೇಂದ್ರದಿಂದ ದೊರೆಯುತ್ತಿರುವ ಈ ಉಚಿತ ಲಸಿಕೆಯ ಲಾಭವನ್ನು ತಮ್ಮ ರಾಜ್ಯಗಳಲ್ಲಿ ಹೆಚ್ಚು ಹೆಚ್ಚು ಜನರಿಗೆ ತಲುಪುವಂತೆ ನೋಡಿಕೊಳ್ಳಬೇಕೆಂದು ನಾನು ರಾಜ್ಯಗಳಿಗೆ ಒತ್ತಾಯಿಸುತ್ತೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ, ರೋಗವಿದ್ದಾಗ ನಮ್ಮ ಹಾಗೂ ನಮ್ಮ ಪರಿವಾರದ ಕಾಳಜಿ ವಹಿಸುವುದು ಮಾನಸಿಕವಾಗಿ ಎಷ್ಟು ಕಷ್ಟದ್ದೆಂದು ನಮಗೆ ತಿಳಿದಿದೆ. ಆದರೆ, ನಮ್ಮ ಆಸ್ಪತ್ರೆಗಳ ಶುಶ್ರೂಷಾ ಸಿಬ್ಬಂದಿ ಇದೇ ಕೆಲಸವನ್ನು ಏಕಕಾಲದಲ್ಲಿ ಅನೇಕ ಮಂದಿಗೆ ನಿರಂತರವಾಗಿ ಮಾಡಬೇಕಿರುತ್ತದೆ. ಈ ಸೇವಾ ಭಾವನೆ ನಮ್ಮ ಸಮಾಜದ ಅತ್ಯಂತ ದೊಡ್ಡ ಶಕ್ತಿಯಾಗಿದೆ. ಶುಶ್ರೂಷಾ ಸಿಬ್ಬಂದಿ ಮೂಲಕ ನಡೆಯುತ್ತಿರುವ ಈ ಸೇವೆ ಮತ್ತು ಪರಿಶ್ರಮದ ಬಗ್ಗೆ ಎಲ್ಲರಿಗಿಂತ ಚೆನ್ನಾಗಿ ಓರ್ವ ಸಿಬ್ಬಂದಿಯೇ ಚೆನ್ನಾಗಿ ಹೇಳಬಲ್ಲರು. ಹೀಗಾಗಿ, ನಾನು ರಾಯ್ ಪುರದ ಡಾ.ಬಿ.ಆರ್. ಅಂಬೇಡ್ಕರ್ ವೈದ್ಯಕೀಯ ಕಾಲೇಜಿನ ಆಸ್ಪತ್ರೆಯಲ್ಲಿ ಸೇವೆ ಸಲ್ಲಿಸುತ್ತಿರುವ ಸಿಸ್ಟರ್ ಭಾವನಾ ಧ್ರುವ ಅವರೊಂದಿಗೆ “ಮನದ ಮಾತು’ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮಕ್ಕೆ ಆಹ್ವಾನವಿತ್ತಿದ್ದೆ. ಅವರು ಅನೇಕ ಕೊರೋನಾ ರೋಗಿಗಳನ್ನು ಕಾಳಜಿಯಿಂದ ನೋಡಿಕೊಳ್ಳುತ್ತಿದ್ದಾರೆ, ಬನ್ನಿ, ಅವರೊಂದಿಗೆ ಮಾತನಾಡೋಣ.

ಮೋದಿ ಜಿ: ನಮಸ್ಕಾರ ಭಾವನಾ ಜೀ.

ಭಾವನಾ: ಆದರಣೀಯ ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿಯವರೇ, ನಮಸ್ಕಾರ

ಮೋದಿ : ಭಾವನಾ ಅವರೇ

ಭಾವನಾ: ಹಾ ಸರ್

ಮೋದಿ: ತಾವು ಪರಿವಾರದಲ್ಲಿ ಎಷ್ಟೆಲ್ಲ ಜವಾಬ್ದಾರಿ ನಿಭಾಯಿಸುತ್ತೀರಿ, ಎಷ್ಟು ವಿಧವಿಧವಾದ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತೀರಿ, ಅದರೊಂದಿಗೇ ಕೊರೋನಾ ರೋಗಿಗಳ ಜತೆಗೂ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತೀರಿ ಎನ್ನುವುದನ್ನು “ಮನದ ಮಾತು’ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮದ ಕೇಳುಗರಿಗೆ ಹೇಳಿ. ಕೊರೋನಾ ರೋಗಿಗಳಿಗಾಗಿ ಮಾಡಿದ ಕೆಲಸದ ಅನುಭವವನ್ನು ದೇಶವಾಸಿಗಳು ಖಂಡಿತವಾಗಿ ಕೇಳಲು ಇಚ್ಛಿಸುತ್ತಾರೆ. ಏಕೆಂದರೆ, ಸಿಸ್ಟರ್ , ನರ್ಸ್ ಗಳು ರೋಗಿಗಳ ನಿಕಟ ಸಂಪರ್ಕದಲ್ಲಿರುವವರಾಗಿದ್ದಾರೆ. ಈ ಸಂಪರ್ಕ ದೀರ್ಘಕಾಲದವರೆಗೂ ಇರುತ್ತದೆ. ಅವರು ಪ್ರತಿಯೊಂದನ್ನೂ ಅತ್ಯಂತ ನಿಕಟವಾಗಿ ಅರ್ಥ ಮಾಡಿಕೊಳ್ಳುತ್ತಾರೆ. ಈಗ ಹೇಳಿ.

ಭಾವನಾ: ಹೌದು, ಸರ್. ಕೋವಿಡ್ ಸೋಂಕು ಚಿಕಿತ್ಸೆಯಲ್ಲಿ ನನ್ನ ಒಟ್ಟಾರೆ ಅನುಭವ 2 ತಿಂಗಳದ್ದು ಸರ್. ನಾವು 14 ದಿನಗಳ ಕಾಲ ಕರ್ತವ್ಯ ನಿಭಾಯಿಸುತ್ತೇವೆ, ಬಳಿಕ ನಮಗೆ 14 ದಿನಗಳ ಕಾಲ ವಿರಾಮ ನೀಡಲಾಗುತ್ತದೆ. ಪುನಃ ಎರಡು ತಿಂಗಳ ಬಳಿಕ ಕೋವಿಡ್ ಕರ್ತವ್ಯಪಾಳಿ ಪುನರಾವರ್ತನೆಯಾಗುತ್ತದೆ ಸರ್. ಯಾವಾಗ ನನ್ನನ್ನು ಮೊದಲ ಬಾರಿ ಕೋವಿಡ್ ಕರ್ತವ್ಯಕ್ಕೆ ನಿಯೋಜಿಸಲಾಯಿತೊ ಆಗ ಇದರ ಬಗ್ಗೆ ನನ್ನ ಕುಟುಂಬದ ಸದಸ್ಯರಿಗೆ ಮಾಹಿತಿ ನೀಡಿದೆ, ಇದು ಮೇ ತಿಂಗಳ ಮಾತು. ನಾನು ಈ ಮಾಹಿತಿ ನೀಡುತ್ತಿದ್ದಂತೆಯೇ ಎಲ್ಲರೂ ಹೆದರಿಕೊಂಡರು. ಗಾಬರಿಯಾದರು. “ಮಗಳೇ, ಜಾಗರೂಕತೆವಹಿಸಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡು’ ಎಂದರು. ಅದೊಂದು ಭಾವನಾತ್ಮಕ ಸನ್ನಿವೇಶವಾಗಿತ್ತು ಸರ್. ಮಧ್ಯದಲ್ಲಿ ನನ್ನ ಮಗಳು ನನ್ನನ್ನು ಕೇಳಿದಳು, “ಅಮ್ಮಾ, ನೀವು ಕೋವಿಡ್ ಕರ್ತವ್ಯಕ್ಕೆ ಹೋಗುತ್ತಿದ್ದೀರಾ?’ ಎಂದು. ಆ ಸಮಯ ನನಗೆ ಅತ್ಯಂತ ಭಾವನಾತ್ಮಕ ಕ್ಷಣವಾಗಿತ್ತು.

ಆದರೆ, ಕೋವಿಡ್ ರೋಗಿಗಳ ಬಳಿಗೆ ಹೋದಾಗ ಮನೆಯ ಜವಾಬ್ದಾರಿಯನ್ನು ಮನೆಯಲ್ಲೇ ಬಿಟ್ಟು ನಡೆದೆ. ನಾನು ಕೋವಿಡ್ ರೋಗಿಗಳೊಂದಿಗೆ ಬೆರೆತಾಗ ಅವರು ತೀವ್ರವಾಗಿ ಭಯಗೊಂಡಿದ್ದರು, ಆತಂಕಿತರಾಗಿದ್ದರು. ಕೋವಿಡ್ ಹೆಸರಿನಿಂದಲೇ ರೋಗಿಗಳು ಎಷ್ಟು ಕಂಗಾಲಾಗುತ್ತಿದ್ದರೆಂದರೆ, ತಮಗೇನು ಆಗುತ್ತಿದೆ ಎನ್ನುವುದು ಅವರಿಗೆ ತಿಳಿಯುತ್ತಿರಲಿಲ್ಲ. ಹಾಗೂ ಮುಂದೇನು ಮಾಡಬೇಕೆಂಬುದೇ ತೋಚುತ್ತಿರಲಿಲ್ಲ. ನಾವು ಅವರ ಭಯವನ್ನು ದೂರವಿಡಲು ಅವರೊಂದಿಗೆ ಆತ್ಮೀಯವಾಗಿ ಬೆರೆತು, ಅವರಿಗೆ ಆರೋಗ್ಯಪೂರ್ಣ ವಾತಾವರಣ ನೀಡಿದೆವು ಸರ್. ನಮಗೆ ಯಾವಾಗ ಕೋವಿಡ್ ಕರ್ತವ್ಯ ಆರಂಭವಾಯಿತೋ ಆಗ ಎಲ್ಲಕ್ಕಿಂತ ಮೊದಲು ಪಿಪಿಇ ಕಿಟ್ ಧರಿಸಲು ಸೂಚಿಸಲಾಯಿತು. ಪಿಪಿಇ ಕಿಟ್ ಧರಿಸಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡುವುದು ಬಹಳ ಕಠಿಣ. ಸರ್, ನಮಗೆ ಅದು ನಮಗೆ ಬಹಳ ಕಷ್ಟವಾಗಿತ್ತು. ನಾನು 2 ತಿಂಗಳ ಕೆಲಸದಲ್ಲಿ ಪ್ರತಿ ಸ್ಥಳದಲ್ಲೂ 14-14 ದಿನಗಳ ಕಾಲ ಕರ್ತವ್ಯ ನಿಭಾಯಿಸಿದ್ದೇನೆ. ವಾರ್ಡಲ್ಲಿ, ತೀವ್ರ ನಿಗಾ ಘಟಕದಲ್ಲಿ, ಐಸೋಲೇಷನ್ ನಲ್ಲಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡಿದ್ದೇನೆ ಸರ್.

ಮೋದಿ: ಅಂದರೆ, ಒಟ್ಟಾರೆಯಾಗಿ, ತಾವು ಒಂದು ವರ್ಷದಿಂದ ಇದೇ ಕೆಲಸವನ್ನು ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದೀರಿ.

ಭಾವನಾ: ಹೌದು ಸರ್, ಅಲ್ಲಿಗೆ ಹೋಗುವ ಮುನ್ನ ನನ್ನ ಸಹೋದ್ಯೋಗಿಗಳು ಯಾರೆಂದು ತಿಳಿದಿರಲಿಲ್ಲ. ನಾವು ಒಂದು ತಂಡದ ಸದಸ್ಯರಂತೆ ಕೆಲಸ ಮಾಡಿದ್ದೇವೆ ಸರ್. ಏನೇ ಸಮಸ್ಯೆಗಳಿದ್ದರೂ ಅವರೊಂದಿಗೆ ಹಂಚಿಕೊಂಡೆವು. ನಾವು ರೋಗಿಗಳ ಭಯ ದೂರ ಮಾಡುವಲ್ಲಿ ನಿರತರಾದೆವು ಸರ್. ಕೆಲವು ಜನರು ಕೋವಿಡ್ ಹೆಸರು ಕೇಳಿದರೇ ಹೆದರುತ್ತಿದ್ದರು. ಅವರ ರೋಗ ಲಕ್ಷಣ ಪಟ್ಟಿ ಮಾಡುವಾಗಲೇ ಅವರಿಗೆ ಲಕ್ಷಣಗಳಿದ್ದವು ಎಂಬುದು ನಮಗೆ ತಿಳಿಯುತ್ತಿತ್ತು. ಆದರೆ, ಅವರು ಪರೀಕ್ಷೆ ಮಾಡಿಸಿಕೊಳ್ಳಲು ಹಿಂದೇಟು ಹಾಕುತ್ತಿದ್ದರು, ಮಾಡಿಸಿಕೊಳ್ಳುತ್ತಿರಲಿಲ್ಲ. ನಾವು ಅವರಿಗೆ ಸಮಾಧಾನ, ತಿಳಿವಳಿಕೆ ಹೇಳುತ್ತಿದ್ದೆವು, ಮತ್ತು ಸರ್ ರೋಗದ ತೀವ್ರತೆ ಹೆಚ್ಚಾದಾಗ ಅವರ ಶ್ವಾಸಕೋಶಕ್ಕೂ ಸೋಂಕು ತಾಗಿರುತ್ತಿತ್ತು. ಆಗ ಅವರಿಗೆ ತೀವ್ರ ನಿಗಾ ಘಟಕದ ಅಗತ್ಯವುಂಟಾಗುತ್ತಿತ್ತು. ಜತೆಗೆ, ಸೋಂಕಿನಿಂದ ಅವರ ಪೂರ್ತಿ ಕುಟುಂಬ ಚಿಕಿತ್ಸೆಗಾಗಿ ಬರುತ್ತಿತ್ತು. ಇಂಥ 1-2 ಪ್ರಕರಣಗಳನ್ನು ನೋಡಿದ್ದೇವೆ ಸರ್. ಮತ್ತು ಎಲ್ಲ ವಯೋಮಾನದವರೊಂದಿಗೂ ನಾನು ಕೆಲಸ ಮಾಡಿದ್ದೇನೆ. ಅವರಲ್ಲಿ ಚಿಕ್ಕ ಮಕ್ಕಳಿದ್ದರು. ಮಹಿಳೆಯರು, ಪುರುಷರು, ಹಿರಿಯರು ಎಲ್ಲ ರೀತಿಯ ರೋಗಿಗಳೂ ಇರುತ್ತಿದ್ದರು. ಅವರಲ್ಲಿ ನಾವು ವಿಚಾರಿಸಿದಾಗ ಎಲ್ಲರೂ ಹೇಳುತ್ತಿದ್ದುದು ಒಂದೇ, ನಾವು ಭಯದಿಂದ ಮೊದಲೇ ಬರಲಿಲ್ಲ ಎಂದು. ಎಲ್ಲರಿಂದಲೂ ಇದೇ ಉತ್ತರ ದೊರೆತಿತ್ತು. ಭಯಪಡುವುದ ಏನೂ ಇಲ್ಲ, ನೀವು ನನಗೆ ಸಹಕಾರ ನೀಡಿ ನಾನು ನಿಮ್ಮ ಜತೆ ಇರುತ್ತೇನೆ, ನೀವು ಕೋವಿಡ್ ಮಾರ್ಗಸೂಚಿ ಪಾಲನೆ ಮಾಡಿ ಎಂದು ನಾನು ಅವರಿಗೆ ತಿಳಿಹೇಳಿದೆ ಸರ್. ನಾವು ಅವರಿಂದ ಇಷ್ಟನ್ನು ಮಾಡಿಸಿದೆವು ಸರ್.

ಮೋದಿ: ಭಾವನಾ ಅವರೇ, ನಿಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಮಾತನಾಡಿದ್ದು ನನಗೆ ಸಂತಸ ನೀಡಿದೆ. ತಾವು ಬಹಳಷ್ಟು ಉತ್ತಮ ಮಾಹಿತಿ ನೀಡಿದ್ದೀರಿ. ತಾವು ಸ್ವಂತ ಅನುಭವ ಹಂಚಿಕೊಂಡಿದ್ದೀರಿ. ಇದರಿಂದ ದೇಶವಾಸಿಗಳಿಗೆ ಒಂದು ಸಕಾರಾತ್ಮಕ ಸಂದೇಶ ಹೋಗುತ್ತದೆ. ತಮಗೆ ಅತ್ಯಂತ ಧನ್ಯವಾದಗಳು ಭಾವನಾ.

ಭಾವನಾ: ತುಂಬ ಧನ್ಯವಾದಗಳು ಸರ್. ತುಂಬ ಧನ್ಯವಾದಗಳು, ಜೈ ಹಿಂದ್ ಸರ್

ಮೋದಿ: ಜೈ ಹಿಂದ್

ಭಾವನಾ ಅವರೇ ಮತ್ತು ಶುಶ್ರೂಷೆ ಸಿಬ್ಬಂದಿ, ತಮ್ಮಂಥಹ ಸಾವಿರಾರು-ಲಕ್ಷಾಂತರ ಸಹೋದರ-ಸಹೋದರಿಯರು ಸರಿಯಾಗಿ ತಮ್ಮ ಕರ್ತವ್ಯ ನಿಭಾಯಿಸುತ್ತಿದ್ದೀರಿ. ಇದು ನಮಗೆಲ್ಲರಿಗೂ ಪ್ರೇರಣೆಯಾಗಿದೆ. ತಾವು ತಮ್ಮ ಆರೋಗ್ಯದ ಬಗೆಗೂ ಹೆಚ್ಚಿನ ಗಮನ ನೀಡಿ. ತಮ್ಮ ಕುಟುಂಬದ ಕುರಿತೂ ಕಾಳಜಿವಹಿಸಿ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ, ಈಗ ನಮ್ಮ ಜೊತೆಗೆ ಬೆಂಗಳೂರಿನಿಂದ ಸೋದರಿ ಸುರೇಖಾ ಸಂಪರ್ಕಕ್ಕೆ ಬರಲಿದ್ದಾರೆ. ಸುರೇಖಾ ಅವರು ಕೆ ಸಿ ಜನರಲ್ ಆಸ್ಪತ್ರೆಯಲ್ಲಿ ಹಿರಿಯ ಶುಶ್ರೂಷಕಿಯಾಗಿ ಕಾರ್ಯನಿರ್ವಹಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಬನ್ನಿ ಅವರ ಅನುಭವಗಳನ್ನು ಕೇಳೋಣ.

ಮೋದಿಯವರು: ಸುರೇಖಾ ಅವರೇ ನಮಸ್ಕಾರ

ಸುರೇಖಾ: ನಮ್ಮ ದೇಶದ ಪ್ರಧಾನಿಯವರೊಂದಿಗೆ ಮಾತನಾಡುತ್ತಿರುವುದು ನಿಜಕ್ಕೂ ಬಹಳ ಹೆಮ್ಮೆಯ ಮತ್ತು ಗೌರವದ ವಿಷಯ ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ಸುರೇಖಾ ಅವರೇ ಎಲ್ಲ ಸುಶ್ರೂಷಕ ಸಿಬ್ಬಂದಿ ಮತ್ತು ಆಸ್ಪತ್ರೆಯ ಸಿಬ್ಬಂದಿ ಜೊತೆಗೆ ನೀವು ತುಂಬಾ ಅದ್ಭುತವಾದ ಕೆಲಸವನ್ನು ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದೀರಿ. ಇಡೀ ದೇಶ ತಮಗೆ ಆಭಾರಿಯಾಗಿದೆ. ಕೋವಿಡ್ – 19 ರ ವಿರುದ್ಧದ ಹೋರಾಟದಲ್ಲಿ ಜನರಿಗೆ ನಿಮ್ಮ ಸಂದೇಶವೇನು?

ಸುರೇಖಾ: ಹೌದು ಸರ್…. ಒಬ್ಬ ಜವಾಬ್ದಾರಿಯುತ ನಾಗರಿಕಳಾಗಿ ನಾನು ಖಂಡಿತ ಕೆಲ ವಿಷಯ ಹೇಳಬಯಸುತ್ತೇನೆ. ನಿಮ್ಮ ನೆರೆಹೊರೆಯವರೊಂದಿಗೆ ಮಾನವೀಯತೆಯಿಂದ ವರ್ತಿಸಿ ಮತ್ತು ಬೇಗ ಪರೀಕ್ಷೆ ಮಾಡಿಸಿಕೊಳ್ಳುವುದು ಮತ್ತು ಸೂಕ್ತ ಅನುಸರಣೆ ನಮಗೆ ಸಾವಿನ ಪ್ರಮಾಣವನ್ನು ಕಡಿಮೆ ಮಾಡಲು ಸಹಾಯ ಮಾಡುತ್ತದೆ. ಇಷ್ಟೇ ಅಲ್ಲ ನಿಮಗೆ ಯಾವುದೇ ಲಕ್ಷಣಗಳು ಕಂಡು ಬಂದಲ್ಲಿ ದಯವಿಟ್ಟು ನೀವು ಉಳಿದವರಿಂದ ದೂರ ಉಳಿಯಿರಿ. ಹತ್ತಿರದ ವೈದ್ಯರನ್ನು ಸಂಪರ್ಕಿಸಿ. ಎಷ್ಟು ಬೇಗ ಸಾಧ್ಯವೋ ಚಿಕಿತ್ಸೆ ಪಡೆಯಿರಿ.

ಸಮುದಾಯಕ್ಕೆ ಈ ರೋಗದ ಬಗ್ಗೆ ಜಾಗೃತಿ ಅವಶ್ಯಕವಾಗಿದೆ. ಸಕಾರಾತ್ಮಕ ಚಿಂತನೆ ಇರಲಿ, ಆತಂಕಕ್ಕೊಳಗಾಗಬೇಡಿ ಹಾಗೂ ಒತ್ತಡಕ್ಕೊಳಗಾಗಬೇಡಿ. ಇದು ರೋಗಿಯ ಸ್ಥಿತಿಯನ್ನು ಮತ್ತಷ್ಟು ಬಿಗಡಾಯಿಸುತ್ತದೆ. ಲಸಿಕೆ ದೊರಕಿರುವುದಕ್ಕೆ ಹೆಮ್ಮೆ ಪಡುತ್ತೇವೆ ಮತ್ತು ಸರ್ಕಾರಕ್ಕೆ ಕೃತಜ್ಞರಾಗಿದ್ದೇವೆ. ನಾನು ಈಗಾಗಲೇ ಲಸಿಕೆ ಪಡೆದಿದ್ದೇನೆ. ನನ್ನ ಸ್ವಂತ ಅನುಭವವನ್ನು ಜನತೆಯೊಂದಿಗೆ ಹಂಚಿಕೊಳ್ಳಬಯಸುತ್ತೇನೆ. ಯಾವುದೇ ಲಸಿಕೆ ತಕ್ಷಣ ಶೇ 100 ರಷ್ಟು ಸುರಕ್ಷತೆಯನ್ನು ನೀಡಲಾರದು. ರೋಗನಿರೋಧಕ ಶಕ್ತಿ ಬೆಳೆಯಲು ಸಮಯ ಬೇಕಾಗುತ್ತದೆ. ಲಸಿಕೆ ಪಡೆಯಲು ಭಯಬೇಡ. ಎಲ್ಲರೂ ಲಸಿಕೆ ಪಡೆದುಕೊಳ್ಳಿ; ಸ್ವಲ್ಪ ಅಡ್ಡಪರಿಣಾಮ ಆಗಬಹುದು ಮನೆಯಲ್ಲೇ ಇರಿ, ಆರೋಗ್ಯವಾಗಿರಿ, ರೋಗಲಕ್ಷಣಗಳಿರುವವರಿಂದ ದೂರವಿರಿ ಮತ್ತು ಅನವಶ್ಯಕವಾಗಿ ಮೂಗು, ಕಣ್ಣುಗಳನ್ನು ಮತ್ತು ಬಾಯನ್ನು ಮುಟ್ಟಬೇಡಿ ಎಂಬ ಸಂದೇಶವನ್ನು ನಾನು ನೀಡಬಯಸುತ್ತೇನೆ. ದಯಮಾಡಿ ವೈಯಕ್ತಿಕ ಅಂತರ ಕಾಯ್ದುಕೊಳ್ಳಿ, ಸರಿಯಾಗಿ ಮುಖಗವಸು ಧರಿಸಿ, ನಿಯಮಿತವಾಗಿ ಕೈತೊಳೆಯಿರಿ ಮತ್ತು ಮನೆಯಲ್ಲಿಯೇ ಮನೆಮದ್ದುಗಳನ್ನು ಬಳಸಬಹುದಾಗಿದೆ. ದಯಮಾಡಿ ಆಯುರ್ವೇದ ಕಷಾಯ ಕುಡಿಯಿರಿ, ಆವಿ ತೆಗೆದುಕೊಳ್ಳಿ ಮತ್ತು ಪ್ರತಿದಿನ ಪದೇ ಪದೇ ಬಾಯಿ ಮುಕ್ಕಳಿಸಿ ಜೊತೆಗೆ ಉಸಿರಾಟದ ವ್ಯಾಯಾವನ್ನೂ ಮಾಡಿರಿ. ಕೊನೆಯದಾಗಿ ಮುಂಚೂಣಿ ಕಾರ್ಯಕರ್ತರು ಮತ್ತು ವೃತ್ತಿಪರರ ಬಗ್ಗೆ ಸಹಾನುಭೂತಿ ಇರಲಿ. ನಿಮ್ಮ ಸಹಕಾರ ಮತ್ತು ಬೆಂಬಲ ನಮಗೆ ಬೇಕು. ನಾವು ಒಗ್ಗೂಡಿ ಹೋರಾಡೋಣ. ನಾವು ಖಂಡಿತ ಕೊರೊನಾವನ್ನು ಹಿಮ್ಮೆಟ್ಟಿಸಬಲ್ಲೆವು. ಇದೇ ನಾನು ಜನರಿಗೆ ನೀಡುವ ಸಂದೇಶ ಸರ್.

ಮೋದಿಯವರು: ಧನ್ಯವಾದ ಸುರೇಖಾ ಅವರೇ

ಸುರೇಖಾ: ಧನ್ಯವಾದ ಸರ್

ಸುರೇಖಾ ಅವರೇ ಖಂಡಿತ ನೀವು ಸಂಕಷ್ಟದ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ಚುಕ್ಕಾಣಿ ಹಿಡಿದಿದ್ದೀರಿ. ನಿಮ್ಮ ಬಗ್ಗೆ ಕಾಳಜಿ ಇರಲಿ. ನಿಮ್ಮ ಕುಟುಂಬದವರಿಗೂ ನನ್ನ ಅನಂತ ಶುಭಹಾರೈಕೆಗಳು. ಭಾವನಾ ಅವರು ಮತ್ತು ಸುರೇಖಾ ಅವರು ಹೇಳಿದಂತೆ ಕೊರೊನಾ ವಿರುದ್ಧ ಹೋರಾಟಕ್ಕೆ ಸಕಾರಾತ್ಮಕ ಭಾವನೆ ಬಹಳ ಅವಶ್ಯಕವಾದದ್ದು ಮತ್ತು ದೇಶಬಾಂಧವರು ಇದನ್ನು ಕಾಪಾಡಿಕೊಳ್ಳಬೇಕು ಎಂದು ದೇಶದ ಜನತೆಗೂ ನಾನು ಆಗ್ರಹಿಸುತ್ತೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ, ವೈದ್ಯರು, ಶುಶ್ರೂಷಕ ಸಿಬ್ಬಂದಿ ಜೊತೆ ಜೊತೆಗೆ ಈ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ಆಂಬುಲೆನ್ಸ್ ಚಾಲಕರು ಮತ್ತು ಪ್ರಯೋಗಾಲಯದ ತಂತ್ರಜ್ಞರಂತಹ ಮುಂಚೂಣಿ ಕಾರ್ಯಕರ್ತರು ಇದನ್ನು ದೇವರಂತೆ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಒಬ್ಬ ರೋಗಿಯ ಬಳಿ ಒಂದು ಆಂಬುಲೆನ್ಸ್ ತಲುಪಿದರೆ ಅವನಿಗೆ ಆ ಚಾಲಕ ದೇವದೂತನಂತೆಯೇ ಕಾಣುತ್ತಾನೆ. ಈಎಲ್ಲ ಸೇವೆಗಳ ಬಗ್ಗೆ, ಅವರ ಅನುಭವದ ಬಗ್ಗೆ ದೇಶ ಖಂಡಿತ ತಿಳಿದುಕೊಳ್ಳಬೇಕು. ನಮ್ಮ ಜೊತೆ ಈಗ ಇಂಥ ಒಬ್ಬ ಸಜ್ಜನರಾದ ಶ್ರೀಯುತ ಪ್ರೇಮ್ ವರ್ಮಾ ಅವರಿದ್ದಾರೆ. ಅವರ ಹೆಸರಿಂದಲೇ ಅದರ ಅರಿವಾಗುತ್ತದೆ. ಅವರು ಆಂಬುಲೆನ್ಸ್ ಚಾಲಕರಾಗಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಪ್ರೇಮ್ ವರ್ಮಾ ಅವರು ತಮ್ಮ ಕೆಲಸವನ್ನು ಸಂಪೂರ್ಣ ಶ್ರದ್ಧೆ ಮತ್ತು ಪ್ರೀತಿಯಿಂದ ನಿರ್ವಹಿಸುತ್ತಾರೆ, ಬನ್ನಿ ಅವರೊಂದಿಗೆ ಮಾತಾಡೋಣ

ಮೋದಿಯವರು: ನಮಸ್ತೆ ಪ್ರೇಮ್ ಅವರೇ..

ಪ್ರೇಮ್ ವರ್ಮಾ: ನಮಸ್ತೆ ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ಸೋದರ ಪ್ರೇಮ್

ಪ್ರೇಮ್ ವರ್ಮಾ: ಹೇಳಿ ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ನೀವು ನಿಮ್ಮ ಕೆಲಸದ ಬಗ್ಗೆ

ಪ್ರೇಮ್ ವರ್ಮಾ: ಹಾಂ ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ಸ್ವಲ್ಪ ವಿಸ್ತಾರವಾಗಿ ಹೇಳುತ್ತೀರಾ, ನಿಮ್ಮ ಅನುಭವದ ಬಗ್ಗೆಯೂ ಹೇಳಿ ಪ್ರೇಮ್: ನಾನು CATS ಆಂಬುಲೆನ್ಸ್ ನಲ್ಲಿ ಚಾಲಕನಾಗಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದೇನೆ ಮತ್ತು ನಮಗೆ ಕಂಟ್ರೋಲ್ ರೂಮಿನಿಂದ ಟ್ಯಾಬ್ ಗೆ ಕರೆ ಬರುತ್ತದೆ. 102 ರಿಂದ ಕರೆ ಬಂದ ಕೂಡಲೇ ನಾವು ರೋಗಿಯ ಬಳಿಗೆ ಹೋಗುತ್ತೇವೆ. 2 ವರ್ಷಗಳಿಂದ ನಿರಂತರವಾಗಿ ಈ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದೇನೆ. ನನ್ನ ಕಿಟ್ ಧರಿಸಿ, ಕೈಗವಸು, ಮುಖಗವಸು ಧರಿಸಿ, ರೋಗಿ ಎಲ್ಲಿಗೆ, ಯಾವ ಆಸ್ಪತ್ರೆಗೆ ಡ್ರಾಪ್ ಮಾಡು ಎಂದು ಹೇಳುತ್ತಾರೋ ಅಲ್ಲಿಗೆ ಆದಷ್ಟೂ ಬೇಗ ಡ್ರಾಪ್ ಮಾಡುತ್ತೇವೆ.

ಮೋದಿಯವರು: ನಿಮಗೆ ಎರಡೂ ಡೋಸ್ ಲಸಿಕೆ ನೀಡಲಾಗಿದೆಯೇ?

ಪ್ರೇಮ್: ಖಂಡಿತ ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ಹಾಗಾದರೆ ಬೇರೆಯವರು ಲಸಿಕೆ ಹಾಕಿಸಿಕೊಳ್ಳುವ ಬಗ್ಗೆ ನಿಮ್ಮ ಅನಿಸಿಕೆಯೇನು? ಈ ಕುರಿತು ನಿಮ್ಮ ಸಂದೇಶವೇನು?

ಪ್ರೇಮ್: ಖಂಡಿತ ಸರ್. ಎಲ್ಲರೂ ಈ ಡೋಸ್ ಗಳನ್ನುಹಾಕಿಸಿಕೊಳ್ಳಲೇಬೇಕು. ಇದು ಅವರ ಕುಟುಂಬಕ್ಕೂ ಒಳ್ಳೆಯದು. ನನ್ನ ತಾಯಿಯೇ ನನಗೆ ಈ ಉದ್ಯೋಗವನ್ನು ಬಿಟ್ಟುಬಿಡು ಎಂದು ಹೇಳುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಅದಕ್ಕೆ ನಾನು ಕೂಡ ಈ ಉದ್ಯೋಗ ಬಿಟ್ಟುಬಿಟ್ಟರೆ ರೋಗಿಗಳನ್ನು ಆಸ್ಪತ್ರೆಗೆ ಸೇರಿಸಲು ಯಾರು ಹೋಗುತ್ತಾರೆ? ಎಂದು ಕೇಳಿದೆ. ಏಕೆಂದರೆ ಈ ಕೊರೊನಾ ಕಾಲಘಟ್ಟದಲ್ಲಿ ಎಲ್ಲರೂ ಪಲಾಯನಗೈಯ್ಯುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಎಲ್ಲರೂ ಉದ್ಯೋಗ ತೊರೆಯುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ನಾನು ಉದ್ಯೋಗ ತೊರೆಯಲಾರೆ ಎಂದು ನನ್ನ ತಾಯಿಗೆ ಹೇಳಿದೆ.

ಮೋದಿಯವರು: ಪ್ರೇಮ್ ಅವರೆ ತಾಯಿಯನ್ನು ದುಖಿಃತಳಾಗಿಸಬೇಡಿ. ಅವರಿಗೆ ತಿಳಿಹೇಳಿ.

ಪ್ರೇಮ್: ಆಯ್ತು ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ಆದರೆ ನೀವು ತಾಯಿಯ ಬಗ್ಗೆ ಹೇಳಿದಿರಲ್ಲ

ಪ್ರೇಮ್: ಹಾಂ ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ಇದು ಮನಸ್ಸಿಗೆ ತಾಗುವ ವಿಷಯ

ಪ್ರೇಮ್: ಹಾಂ ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ನಿಮ್ಮ ತಾಯಿಯವರಿಗೂ ನನ್ನ ನಮಸ್ಕಾರ ತಿಳಿಸಿ

ಪ್ರೇಮ್: ಖಂಡಿತ

ಮೋದಿಯವರು: ಹಾಂ

ಪ್ರೇಮ್: ಆಯ್ತು ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ಪ್ರೇಮ್ ಅವರೆ ನಿಮ್ಮ ಮೂಲಕ

ಪ್ರೇಮ್: ಹಾಂ ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ನಮ್ಮ ಆಂಬುಲೆನ್ಸ್ ಚಾಲಕರು

ಪ್ರೇಮ್: ಹಾಂ ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ಎಷ್ಟೊಂದು ಅಪಾಯದ ಮಧ್ಯೆಯೇ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದಾರೆ

ಪ್ರೇಮ್: ಹೌದು ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ಇವರೆಲ್ಲರ ತಾಯಿ ಏನು ಯೋಚಿಸುತ್ತಿರಬೇಕು?

ಪ್ರೇಮ್: ಖಂಡಿತ ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ಈ ವಿಚಾರ ಶ್ರೋತೃಗಳಿಗೆ ತಲುಪಿದಾಗ

ಪ್ರೇಮ್: ಹಾಂ ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ಖಂಡಿತ ಅವರ ಮನಸ್ಸಿಗೂ ಅದು ನಾಟುತ್ತದೆ.

ಪ್ರೇಮ್: ಹೌದು ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು : ಪ್ರೇಮ್ ಅವರೆ ಅನಂತ ಧನ್ಯವಾದಗಳು ನೀವು ಒಂದು ರೀತಿಯಲ್ಲಿ ಪ್ರೀತಿಯ ಹೊಳೆಯನ್ನೇ ಹರಿಸುತ್ತಿದ್ದೀರಿ

ಪ್ರೇಮ್: ಧನ್ಯವಾದಗಳು ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು : ಧನ್ಯವಾದಗಳು ಸೋದರ

ಪ್ರೇಮ್: ಧನ್ಯವಾದಗಳು

ಸ್ನೇಹಿತರೆ, ಪ್ರೇಮ್ ವರ್ಮಾ ಅವರು ಮತ್ತು ಇಂಥ ಸಾವಿರಾರು ಜನರು ಇಂದು ತಮ್ಮ ಜೀವವನ್ನು ಪಣಕ್ಕೊಡ್ಡಿ ಜನರ ಸೇವೆಗೈಯ್ಯುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಕೊರೊನಾ ವಿರುದ್ಧದ ಈ ಹೋರಾಟದಲ್ಲಿ ಬದುಕುಳಿಯುತ್ತಿರುವ ಎಲ್ಲ ಜೀವಗಳ ರಕ್ಷಣೆಯಲ್ಲಿ ಆಂಬುಲೆನ್ಸ್ ಚಾಲಕರ ಪಾತ್ರವೂ ಹಿರಿದಾದುದು. ಪ್ರೇಮ್ ಅವರೇ ನಿಮಗೆ ಮತ್ತು ದೇಶಾದ್ಯಂತದ ನಿಮ್ಮ ಸಹೋದ್ಯೋಗಿಗಳಿಗೆ ನಾನು ಮನಃಪೂರ್ವಕ ಪ್ರೇಮ್: ಧನ್ಯವಾದಗಳು ತಿಳಿಸುತ್ತೇನೆ. ಸಕಾಲಕ್ಕೆ ತಲುಪುತ್ತಿರಿ ಜೀವಗಳನ್ನು ಉಳಿಸುತ್ತಿರಿ ಎಂದು ಹಾರೈಸುತ್ತೇನೆ

ನಮ್ಮ ಪ್ರೀತಿಯ ದೇಶವಾಸಿಗಳೇ, ಈಗ ಬಹಳಷ್ಟು ಜನರು ಕೊರೋನಾ ಸೋಂಕಿತರಾಗುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಆದರೆ, ಕೊರೋನಾದಿಂದ ಗುಣಮುಖರಾಗಿ ಚೇತರಿಸಿಕೊಳ್ಳುತ್ತಿರುವವರ ಸಂಖ್ಯೆಯೂ ಅದಕ್ಕಿಂತ ಹೆಚ್ಚಿದೆ ಎನ್ನುವುದು ಸತ್ಯವಾದ ವಿಚಾರ. ಗುರುಗ್ರಾಮದ ಪ್ರೀತಿ ಚತುರ್ವೇದಿ ಅವರೂ ಕೊರೋನಾವನ್ನು ಸೋಲಿಸಿದ್ದಾರೆ. ಪ್ರೀತಿ ಅವರು, “ಮನದ ಮಾತು’ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮದಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಜೊತೆಯಾಗಿದ್ದಾರೆ. ಅವರ ಅನುಭವ ಎಲ್ಲರಿಗೂ ಪ್ರಯೋಜನ ನೀಡಬಲ್ಲದು.

ಮೋದಿ: ಪ್ರೀತಿ ಅವರೇ, ನಮಸ್ತೆ

ಪ್ರೀತಿ: ನಮಸ್ತೆ ಸರ್, ತಾವು ಹೇಗಿದ್ದೀರಿ?

ಮೋದಿ: ನಾನು ಚೆನ್ನಾಗಿದ್ದೇನೆ. ಎಲ್ಲಕ್ಕಿಂತ ಮೊದಲು ನಾನು ತಮ್ಮ ಕೋವಿಡ್ -19 ಸೋಂಕಿನ

ಪ್ರೀತಿ: ಸರ್

ಮೋದಿ: ಪರಿಣಾಮಕಾರಿ ಹೋರಾಟ ನಡೆಸುತ್ತಿರುವ ಬಗ್ಗೆ

ಪ್ರೀತಿ: ಜೀ

ಮೋದಿ: ಮೆಚ್ಚುಗೆ ಸೂಸುತ್ತೇನೆ.

ಪ್ರೀತಿ: ತುಂಬ ಧನ್ಯವಾದಗಳು ಸರ್

ಮೋದಿ: ತಮ್ಮ ಆರೋಗ್ಯ ಇನ್ನಷ್ಟು ಶೀಘ್ರವಾಗಿ ಉತ್ತಮಗೊಳ್ಳಲಿ ಎಂದು ನಾನು ಆಶಿಸುತ್ತೇನೆ.

ಪ್ರೀತಿ: ಧನ್ಯವಾದಗಳು ಸರ್

ಮೋದಿ: ಪ್ರೀತಿ ಅವರೇ

ಪ್ರೀತಿ: ಹಾ ಸರ್

ಮೋದಿ: ತಮ್ಮ ಅಲೆಯಲ್ಲಿ ತಮ್ಮದೇ ಸಂಖ್ಯೆ ಭರ್ತಿಯಾಗಿದೆ, ತಮ್ಮ ಕುಟುಂಬದ ಎಲ್ಲ ಸದಸ್ಯರಿಗೂ ಇದಕ್ಕೆ ತುತ್ತಾಗಿದ್ದಾರೆ ಎನಿಸುತ್ತದೆ.

ಪ್ರೀತಿ: ಇಲ್ಲ..ಇಲ್ಲ ಸರ್. ನನಗೊಬ್ಬಳಿಗೇ ಬಂದಿತ್ತು.

ಮೋದಿ: ದೇವರ ಕೃಪೆ ಆಯಿತು. ಒಳ್ಳೆಯದಾಯಿತು.

ಪ್ರೀತಿ; ಹೌದು ಸರ್

ಮೋದಿ: ತಾವು ತಮ್ಮ ಸೋಂಕಿನ ಸ್ಥಿತಿ, ಅನುಭವದ ಬಗ್ಗೆ ಹೇಳಿದರೆ ಇಂಥ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ಹೇಗೆ ತಮ್ಮನ್ನು ತಾವು ನಿಭಾಯಿಸಿಕೊಳ್ಳಬೇಕೆಂದು ನಮ್ಮ ಕೇಳುಗರಿಗೆ ಬಹುಶಃ ಮಾರ್ಗದರ್ಶನ ಸಿಗುತ್ತದೆ.

ಪ್ರೀತಿ: ಆಯಿತು ಸರ್. ನನಗೆ ಆರಂಭಿಕ ಹಂತದಲ್ಲಿ ಅತೀವ ಸುಸ್ತಾಯಿತು. ಅದಾದ ಬಳಿಕ, ಗಂಟಲಿನಲ್ಲಿ ಸ್ವಲ್ಪ ಕಿರಿಕಿರಿ ಆಗಲು ಆರಂಭವಾಯಿತು. ಆಗ ನನಗೆ ಇದು ಕೊರೋನಾ ಲಕ್ಷಣ ಎಂದೆನಿಸಿ ನಾನು ಪರೀಕ್ಷೆ ಮಾಡಿಸಿಕೊಂಡೆ. ಎರಡನೇ ದಿನ ಬಂದ ವರದಿಯಲ್ಲಿ ಸೋಂಕು ದೃಢಪಟ್ಟಿತ್ತು. ನಾಣು ಸ್ವಯಂ ಕ್ವಾರಂಟೈನ್ ಮಾಡಿಕೊಂಡೆ. ಒಂದು ಕೋಣೆಯಲ್ಲಿ ಪ್ರತ್ಯೇಕವಾಗಿದ್ದು, ವೈದ್ಯರೊಂದಿಗೆ ಸಮಾಲೋಚನೆ ಮಾಡಿದೆ. ಅವರು ಸೂಚಿಸಿದ ಚಿಕಿತ್ಸೆ ಆರಂಭಿಸಿದೆ.

ಮೋದಿ: ಹಾಗಾದರೆ, ತಾವು ಶೀಘ್ರವಾಗಿ ಕಾರ್ಯತ್ಪರವಾಗಿದ್ದರಿಂದ ತಮ್ಮ ಕುಟುಂಬ ಬಚಾವಾಯಿತು.

ಪ್ರೀತಿ: ಹೌದು ಸರ್. ಕುಟುಂಬದ ಎಲ್ಲರಿಗೂ ಪರೀಕ್ಷೆ ಮಾಡಿಸಲಾಗಿತ್ತು. ಎಲ್ಲರದ್ದೂ ನೆಗೆಟಿವ್ ಬಂತು, ನಾನೊಬ್ಬಳೇ ಪಾಸಿಟಿವ್ ಆಗಿದ್ದುದು. ಅದಕ್ಕೂ ಮುನ್ನವೇ ನಾನೇ ಮುಂದಾಗಿ ಒಂದು ಕೋಣೆಯೊಳಗೆ ಪ್ರತ್ಯೇಕವಾಗಿದ್ದೆ. ನನಗೆ ಅಗತ್ಯವಾಗಿದ್ದ ಎಲ್ಲ ಸಾಮಗ್ರಿಗಳನ್ನು ಇರಿಸಿಕೊಂಡು ಸ್ವಯಂ ಬಂಧನ ವಿಧಿಸಿಕೊಂಡಿದ್ದೆ. ಅದರೊಂದಿಗೆ ನಾನು ವೈದ್ಯರೊಂದಿಗೆ ಸಮಾಲೋಚಿಸಿ ಚಿಕಿತ್ಸೆಯನ್ನೂ ಆರಂಭಿಸಿದೆ. ಸರ್. ನಾನು ಔಷಧದ ಜತೆ ಜತೆಗೇ ಯೋಗ, ಪ್ರಾಣಾಯಾಮ, ಆಯುರ್ವೇದವನ್ನೂ ಶುರು ಮಾಡಿದೆ. ರೋಗ ನಿರೋಧಕ ಶಕ್ತಿ ಹೆಚ್ಚಲು ಕಾಡಾವನ್ನೂ ತೆಗೆದುಕೊಳ್ಳಲು ಆರಂಭಿಸಿದೆ. ಅತ್ಯಂತ ಆರೋಗ್ಯಕರ ಆಹಾರವನ್ನೇ ಸೇವನೆ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದೆ. ಪ್ರೊಟೀನ್ ಭರಿತವಾಗಿರುವ ಆಹಾರ ಪದ್ಧತಿ ಅನುಸರಿಸಿದೆ. ಸಾಕಷ್ಟು ದ್ರವಾಹಾರ ಸೇವನೆ ಮಾಡಿದೆ. ಬಿಸಿನೀರಿನ ಆವಿ ತೆಗೆದುಕೊಂಡೆ. ಗಂಟಲಿನ ಗಾರ್ಗಲ್ ಮಾಡಿದೆ ಮತ್ತು ಬಿಸಿನೀರನ್ನೇ ಕುಡಿಯುತ್ತಿದ್ದೆ. ಪ್ರತಿದಿನ ಈ ಎಲ್ಲ ಕ್ರಮಗಳನ್ನು ಅನುಸರಿಸಿದೆ. ಮಾನಸಿಕ ದೃಢತೆ ಹೆಚ್ಚಿಸಿಕೊಳ್ಳಲು ಯೋಗದ ಮೊರೆ ಹೋಗಿದ್ದೆ. ಉಸಿರಾಟದ ವ್ಯಾಯಾಮಗಳನ್ನು ಹೆಚ್ಚು ಹೆಚ್ಚು ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದೆ. ಇದರಿಂದ ನನಗೆ ಆರಾಮವೆನಿಸುತ್ತಿತ್ತು.

ಮೋದಿ: ಹಾಂ, ಒಳ್ಳೆಯದು ಪ್ರೀತಿ, ತಮ್ಮ ಹಂತಹಂತದ ಪ್ರಕ್ರಿಯೆ ಮುಗಿದ ಬಳಿಕ ತಾವು ಈ ಸಂಕಟದಿಂದ ಹೊರಬಂದಿರಿ.

ಪ್ರೀತಿ: ಹೌದು ಸರ್

ಮೋದಿ: ಈಗ ತಮ್ಮ ನೆಗೆಟಿವ್ ವರದಿಯೂ ಬಂದಿದೆ

ಪ್ರೀತಿ: ಹೌದು ಸರ್

ಮೋದಿ: ಹಾಗಿದ್ದರೆ ತಾವು ತಮ್ಮ ಆರೋಗ್ಯಕ್ಕಾಗಿ ಹಾಗೂ ಅದರ ಕಾಳಜಿಗಾಗಿ ಈಗ ಏನು ಮಾಡುತ್ತಿರುವಿರಿ?

ಪ್ರೀತಿ: ಸರ್, ನಾನು ಯೋಗವನ್ನು ನಿಲ್ಲಿಸಿಯೇ ಇಲ್ಲ.

ಮೋದಿ: ಹಾಂ.

ಪ್ರೀತಿ: ಈ ಮೊದಲು ನನ್ನನ್ನು ನಾನು ಸಾಕಷ್ಟು ನಿರ್ಲಕ್ಷ್ಯ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದೆ. ಈಗ ಬಹಳಷ್ಟು ಗಮನ ನೀಡುತ್ತಿದ್ದೇನೆ.

ಮೋದಿ: ಧನ್ಯವಾದ ಪ್ರೀತಿ ಅವರೇ

ಪ್ರೀತಿ: ತುಂಬ ಧನ್ಯವಾದಗಳು ಸರ್

ಮೋದಿ: ತಾವು ಯಾವ ಮಾಹಿತಿ ನೀಡಿದ್ದೀರೋ ಅದು ಬಹಳಷ್ಟು ಜನರಿಗೆ ಉಪಯೋಗವಾಗುತ್ತದೆ. ತಾವು ಆರೋಗ್ಯದಿಂದಿರಿ, ತಮ್ಮ ಕುಟುಂಬದ ಜನರು ಆರೋಗ್ಯದಿಂದಿರಲಿ. ತಮಗೆ ಅತ್ಯಂತ ಶುಭಕಾಮನೆಗಳು.

ನನ್ನ ಪ್ರೀತಿಯ ದೇಶವಾಸಿಗಳೇ, ನಮ್ಮ ವೈದ್ಯಕೀಯ ವಲಯದ ಜನರು, ಮುಂಚೂಣಿ ಕಾರ್ಯಕರ್ತರು ಹೇಗೆ ಹಗಲು –ರಾತ್ರಿ ಸೇವೆಯಲ್ಲಿ ನಿರತರಾಗಿದ್ದಾರೋ ಹಾಗೆಯೇ, ಸಮಾಜದ ಇತರ ಜನರು ಸಹ ಈ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ಹಿಂದುಳಿದಿಲ್ಲ. ದೇಶ ಮತ್ತೊಂದು ಬಾರಿ ಒಂದಾಗಿ ಕೊರೋನಾ ವಿರುದ್ಧ ಹೋರಾಟ ನಡೆಸುತ್ತಿದೆ. ಈ ದಿನಗಳಲ್ಲಿ ಕ್ವಾರಂಟೈನ್ ನಲ್ಲಿರುವ ಕುಟುಂಬಗಳಿಗೆ ಔಷಧ ತಲುಪುತ್ತಿರುವುದನ್ನು ನಾನು ನೋಡುತ್ತಿದ್ದೇನೆ. ಯಾರೋ ತರಕಾರಿ, ಹಾಲು, ಹಣ್ಣುಗಳನ್ನು ಪೂರೈಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಕೆಲವರು ಆಂಬುಲೆನ್ಸ್ ಅನ್ನು ಉಚಿತವಾಗಿ ರೋಗಿಗಳಿಗೆ ಒದಗಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಈ ಸವಾಲಿನ ಸಮಯದಲ್ಲೂ ಸ್ವಯಂ ಸೇವಾ ಸಂಘಟನೆಗಳು ಮುಂದೆ ಬಂದು ದೇಶದ ಬೇರೆ ಬೇರೆ ಭಾಗಗಳಲ್ಲಿ ಇನ್ನೊಬ್ಬರಿಗೆ ಎಷ್ಟು ಸಾಧ್ಯವೋ ಅಷ್ಟು ಸೇವೆ ಸಲ್ಲಿಸಲು ಪ್ರಯತ್ನಿಸುತ್ತಿವೆ. ಈ ಬಾರಿ, ಗ್ರಾಮಗಳಲ್ಲಿ ಹೊಸ ರೀತಿಯ ಜಾಗೃತಿ ಕಂಡುಬರುತ್ತಿದೆ. ಕೋವಿಡ್ ನಿಯಮಗಳನ್ನು ಶಿಸ್ತಾಗಿ ಪಾಲನೆ ಮಾಡುತ್ತಿರುವ ಜನರು ತಮ್ಮ ಗ್ರಾಮವನ್ನು ಕೊರೋನಾದಿಂದ ರಕ್ಷಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಈ ಜನರು ಹೊರಗಡೆಯಿಂದ ಬರುತ್ತಿರುವ ಜನರಿಗೆ ಸರಿಯಾದ ವ್ಯವಸ್ಥೆಯನ್ನೂ ಕಲ್ಪಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ನಗರಗಳಲ್ಲೂ ಸಾಕಷ್ಟು ಸಂಖ್ಯೆಯ ಯುವಕರು ಮುಂದೆ ಬಂದು, ತಮ್ಮ ಭಾಗದಲ್ಲಿ ಕೊರೋನಾ ಪ್ರಕರಣಗಳು ಹೆಚ್ಚದಂತೆ ಸ್ಥಳೀಯ ನಿವಾಸಿಗಳ ಜತೆಗೂಡಿ ಪ್ರಯತ್ನಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಅಂದರೆ, ಒಂದೆಡೆ ದೇಶವು ಹಗಲು-ರಾತ್ರಿ ಆಸ್ಪತ್ರೆ, ವೆಂಟಿಲೇಟರ್ ಹಾಗೂ ಔಷಧಗಳಿಗಾಗಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದರೆ, ಇನ್ನೊಂದೆಡೆ ದೇಶವಾಸಿಗಳು ಸಹ ಮನಃಪೂರ್ವಕವಾಗಿ ಕೊರೋನಾ ಸವಾಲನ್ನು ಎದುರಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಈ ಭಾವನೆ ನಮಗೆ ಎಷ್ಟು ಚೈತನ್ಯ ನೀಡುತ್ತದೆ, ವಿಶ್ವಾಸ ನೀಡುತ್ತದೆ. ಈಗ ನಡೆಯುತ್ತಿರುವ ಈ ಎಲ್ಲ ಪ್ರಯತ್ನಗಳು ಸಮಾಜದ ಅತಿ ದೊಡ್ಡ ಸೇವೆಯಾಗಿದೆ. ಇದು ಸಮಾಜದ ಶಕ್ತಿಯನ್ನು ಹೆಚ್ಚಿಸುತ್ತದೆ.

ನನ್ನ ಪ್ರೀತಿಯ ದೇಶವಾಸಿಗಳೇ, ಇಂದು “ಮನದ ಮಾತು’ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮದ ಸಂಪೂರ್ಣ ಚರ್ಚೆಯನ್ನು ನಾವು ಕೊರೋನಾ ಮಹಾಮಾರಿ ಮೇಲೆಯೇ ಮಾಡಿದ್ದೇವೆ. ಏಕೆಂದರೆ, ಈ ರೋಗವನ್ನು ನಿರ್ಮೂಲನೆ ಮಾಡುವುದು ಇಂದು ನಮ್ಮ ಪ್ರಾಥಮಿಕ ಆದ್ಯತೆಯಾಗಿದೆ. ಇಂದು ಭಗವಾನ್ ಮಹಾವೀರ ಜಯಂತಿಯನ್ನು ಆಚರಿಸುತ್ತಿದ್ದೇವೆ. ಈ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ನಾನು ಎಲ್ಲ ದೇಶವಾಸಿಗಳಿಗೆ ಶುಭಾಶಯ ಕೋರುತ್ತೇನೆ. ಭಗವಾನ್ ಮಹಾವೀರರ ಸಂದೇಶ ನಮಗೆ ಸ್ಥಿರತೆ ಮತ್ತು ಆತ್ಮಸಂಯಮದ ಪ್ರೇರಣೆ ನೀಡುತ್ತದೆ. ಇದು ರಮ್ ಜಾನ್ ಪವಿತ್ರ ಮಾಸದ ಆಚರಣೆಯೂ ನಡೆಯುತ್ತಿದೆ, ಮುಂದೆ ಬುದ್ಧ ಪೂರ್ಣಿಮೆಯೂ ಇದೆ. ಗುರು ತೇಗ್ ಬಹಾದ್ದೂರ್ ಅವರ 400ನೇ ಜನ್ಮ ಶತಮಾನೋತ್ಸವದ ಪ್ರಕಾಶ ಪರ್ವವೂ ಇದೆ. ಇನ್ನೊಂದು ಮಹತ್ವಪೂರ್ಣ ದಿನ-ಪೋಚಿಶೆ ಬೋಯಿಶಾಕ್-ಅಂದರೆ, ಟ್ಯಾಗೋರ್ ಜಯಂತಿಯೂ ಇದೆ. ಇವರೆಲ್ಲರೂ ನಮಗೆ ನಮ್ಮ ಕರ್ತವ್ಯ ನಿಭಾಯಿಸಲು ಪ್ರೇರಣೆ ನೀಡುತ್ತಾರೆ. ಓರ್ವ ನಾಗರಿಕರಾಗಿ ನಾವು ನಮ್ಮ ಜೀವನದಲ್ಲಿ ಎಷ್ಟು ಕುಶಲತೆಯಿಂದ ನಮ್ಮ ಕರ್ತವ್ಯ ನಿಭಾಯಿಸುತ್ತೇವೋ ಅಷ್ಟು ಶೀಘ್ರ ನಾವು ಸಂಕಟದಿಂದ ಮುಕ್ತರಾಗಿ ಭವಿಷ್ಯದ ಪಥದಲ್ಲಿ ಮುಂದೆ ಹೆಜ್ಜೆ ಇಡಬಲ್ಲೆವು. ಈ ಆಶಯಗಳೊಂದಿಗೆ ನಾನು ತಮ್ಮೆಲ್ಲರಲ್ಲಿ ಮತ್ತೊಮ್ಮೆ ಒತ್ತಾಯಿಸುತ್ತೇನೆ, ಏನೆಂದರೆ, ಲಸಿಕೆಯನ್ನು ನಮಗೆಲ್ಲರಿಗೂ ಹಾಕಲಾಗುತ್ತದೆ. ಆದರೂ ಎಚ್ಚರಿಕೆಯಿಂದಿರಬೇಕು. ಔಷಧವೂ…ನಿಯಮವೂ. ಈ ಮಂತ್ರವನ್ನು ಎಂದಿಗೂ ಮರೆಯಬಾರದು. ನಾವೆಲ್ಲರೂ ಸೇರಿ ಬಹುಬೇಗ ಈ ಆಪತ್ತಿನಿಂದ ಹೊರಬರುತ್ತೇವೆ. ಈ ವಿಶ್ವಾಸದೊಂದಿಗೆ, ತಮಗೆಲ್ಲರಿಗೂ ಅತ್ಯಂತ ಧನ್ಯವಾದಗಳು, ನಮಸ್ಕಾರ.