The growing number of women entrepreneurs is a blessing for our society: PM Modi

Published By : Admin | September 7, 2019 | 15:31 IST
Our government is working tirelessly to ensure no family remains without a LPG connection: PM Modi
The growing number of women entrepreneurs is a blessing for our society: PM Modi in Aurangabad
Our government is committed to further encourage more women to become entrepreneurs and provide them all the support they need: PM Modi

भारत माता की – जय

भारत माता की – जय

मंच पर उपस्थित सभी महानुभाव और दूर-दूर से बड़ी संख्‍या में पधारे माताएं, बहने और साथियो। मैं वहाँ देख रहा हूँ, दूर-दूर तक बहनें खड़ी हैं, शायद उनको तो कुछ दिखता भी नहीं होगा। लेकिन उसके बावजूद भी इतनी बड़ी तादाद में आपका आना, हम सबको आशीर्वाद देना, मैं हृदय से आपका बहुत-बहुत आभारी हूँ।

आप सभी देश के विकास में हमारे गांव, देहात को, अपने परिवार को आर्थिक रूप से सशक्‍त करने में बहुत बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। स्‍वयं सहायता समूहों के माध्‍यम से देश को सशक्‍त करने वाली नए भारत के निर्माण में जुटी आप सभी बहनों को मैं नमन करता हूँ और बहन पंकजा को विशेष रूप से बधाई देता हूँ।

साथियो, आज औरंगाबाद के विकास से जुड़ी एक अहम इमारत का उद्घाटन थोड़ी देर पहले किया गया है। औरंगाबाद इं‍डस्ट्रियल सिटी की सिग्‍नेचर बिल्डिंग अब सेवा के लिए तैयार है। नए औरंगाबाद शहर की ये महत्‍वपूर्ण इमारत होगी। इस इमारत से पूरे औद्योगिक शहर की अनेक व्‍यवस्‍थाओं का संचालन होगा।

साथियो, औरंगाबाद नया smart city तो बन ही रहा है, देश की औद्योगिक गतिविधियों का भी बड़ा सेंटर होने वाला है। दिल्‍ली–मुम्‍बई इं‍डस्ट्रियल कॉरिडोर का भी ये एक अहम हिस्‍सा है। अनेक बड़ी कंपनियाँ यहाँ काम करना शुरू कर चुकी हैं। आने वाले समय में और कंपनियाँ भी यहाँ आएंगी। ये कंपनियाँ यहाँ के लाखों युवाओं को रोजगार के नए अवसर देने वाली हैं।

साथियो, औरंगाबाद आज एक और बहुत बड़ी सिद्धि का साक्षी बन रहा है। ये सिद्धि आपकी है, देश की करोड़ों बहनों की है।

उज्जवला योजना के तहत 8 करोड़ मुफ्त गैस कनेक्शन देने का जो संकल्प हमने लिया था, वो आज इस मंच पर इन लाखों बहनों की हाजिरी में सिद्ध हुआ है। सिर्फ सिद्ध ही नहीं हुआ बल्कि तय समय से 7 महीने पहले ही लक्ष्य को हमने पा लिया है।

इन 8 करोड़ कनेक्शन में से करीब 44 लाख, अकेले महाराष्ट्र में दिए गए हैं।इस उपलब्धि के लिए मैं आप सभी को, देश की हर उस बहन को, जिसको धुएं से मुक्ति मिली है, बहुत-बहुत बधाई देता हूं, शुभकामनाएं देता हूं। मैं देशभर के उन साथियों को भी नमन करता हूँ जिन्‍होंने इस योजना को सफल बनाने में बहुत मेहनत की है, मदद की है।

साथियो, धुएं में घुटती अपनी गरीब बहनों की सहायता करने के लिए पहले पाँच करोड़ गैस कनेक्‍शन मुफ्त देने का लक्ष्‍य रखा गया था। पिछले साल मार्च में इस लक्ष्‍य को विस्‍तार देते हुए आठ करोड़ कर दिया गया। चुनाव के दरम्‍यान जब भी मैं आपके बीच आया था, तो इस लक्ष्‍य को हासिल करने की बात कही थी। मुझे संतोष है कि सरकार बनने के 100 दिन के भीतर ही ये काम पूरा हो गया।

साथियो, ये काम सिर्फ कनेक्शन देनेभर तक सीमित नहीं था। इसके लिए और भी व्यापक प्रबंध किए गए, holistic तरीके से काम किया गया।एक बहुत बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर इसके लिए जरूरी था, जिसको बहुत ही कम समय में तैयार किया गया। इसके लिए जो 10 हज़ार नए LPG Distributers तैयार किए उनमें से अधिकतर को गांवों में नियुक्त किया गया।इतना ही नहीं, देशभर में नए LPG Bottling plant लगाए गए ताकि गैस सिलिंडरों का अभाव न हो। सरकार ने बंदरगाहों के आसपास terminal capacity बढ़ाने के साथ ही गैस पाइप लाइन के नेटवर्क का विस्‍तार भी किया।

सा‍थियो, हमारा प्रयास है कि अब देश में एक भी ऐसा परिवार ना रहे जिसके घर पर LPG कनेक्शन ना पहुंचा हो। इसके साथ-साथ इस योजना को और सुविधाजनक बनाने के लिए 5 किलो के सिलेंडर को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। देश के अनेक इलाकों में पाइप से गैस पहुंचाने का काम भी तेज़ी से चल रहा है।

भाइयो और बहनों, अब एक बहुत बड़ा मिशन लेकर हम चले हैं,जिसका सीधा सरोकार भी आप सभी से है, देश की करोड़ों-करोड़ों बहनों से है। आप सभी बहनों को पानी के लिए कितनी परेशानी उठानी पड़ती है, इसका मुझे भलीभांति एहसास है। देश की हर बहन को इस परेशानी से निजात दिलाने के लिए ही जल जीवन मिशन की शुरुआत की गई है।इस मिशन के तहत, पानी बचाने के लिए, घर-घर पानी पहुंचाने के लिए पूरा देश संकल्पबद्ध हुआ है। ये तय किया गया है कि आने वाले 5 वर्ष में लगभग साढ़े 3 लाख करोड़ रुपए इस पानी के अभियान पर खर्च किए जाएंगे।

आपने शायद सुना होगा समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया जी 60-70 के दशक में उन्‍होंने पार्लियामेंट में एक भाषण दिया था। उन्‍होंने कहा था कि हिन्‍दुस्‍तान की महिलाओं की दो प्रमुख समस्‍याएँ हैं। उसका तत्‍काल हमें समाधान करना चाहिए। ये 60-70 के कालखंड में कही गई बातें, लोहिया जी के द्वारा कही गई बातें हैं। कौन सी दो समस्‍याएँ बताईं- उन्‍होंने कहा हिन्‍दुस्‍तान की महिलाओं की दो प्रमुख समस्‍याएँ हैं, एक पैखाना और दूसरा पानी। यानी महिलाओं के लिए शौचालय नहीं है, और महिलाओं को घर चलाने के लिए पानी उपलब्‍ध नहीं है। अगर इन दो समस्‍याओं का समाधान करें तो इस देश की महिलाएं देश की समस्‍याओं का समाधान करने की ताकत बन जाएंगी। लोहिया जी तो चले गए, सरकारें भी आईं और चली गईं, नेता भी आए और चले गए, एक हमीं हैं जिसने ठान ली है कि हर घर में शौचालय भी होगा और हर घर में पानी भी होगा।

मराठवाड़ा का ये क्षेत्र तो, वैसे भी इसका बड़ा लाभार्थी भी होने वाला है और आप सभी देवेन्‍द्र जी की सरकार के साथ मिलकर सराहनयी प्रयास भी कर रहे हैं। अभी देवेन्‍द्र जी ने विस्‍तार से, उनके मन में क्‍या सपना है इस क्षेत्र में पानी पहुँचाने के लिए, इसका गहरा वर्णन किया है आपके सामने। मराठवाड़ा में जो पहला water grid बनाया जा रहा है, वो प्रशंसनीय कोशिश है। ये grid जब तैयार हो जाएगा तो इस क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बढ़ जाएगी। हर गांव तक पीने का पानी पहुंचाने, हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाने में इससे मदद मिलेगी।

साथियो, किसानों को सिंचाई की सुविधा देने से लेकर अनेक कदम केंद्र और राज्य की सरकारें उठा रही हैं। हर किसान परिवार के बैंक अकाउंट में सीधी मदद, 60 वर्ष की आयु के बाद किसानों को पेंशन की सुविधा, पशुधन को स्वस्थ रखने के लिए टीकाकरण अभियान, ऐसे अनेक प्रयास किए जाए रहे हैं।

भाइयो और बहनों, गांव की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में आप सभी का योगदान बहुत अहम है। Self Help Group, महिला बचत घटों के रूप में आप जो काम कर रहे हैं, उससे आपका सशक्तिकरण, आर्थिक सशक्तिकरण तो हो ही रहा है, परिवार की स्थिति भी सुधर रही है। जब परिवार आर्थिक रूप से सशक्‍त होता है तो देश की ताकत अपने-आप बढ़ती है।

सा‍थियो, देश के विकास में आपकी इसी भूमिका को देखते हुए बीते पाँच वर्षों में इस आंदोलन को विस्‍तार, और अधिक विस्‍तार देने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं। दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं के लिए उद्यमशीलता के नए अवसर बनाए जा रहे हैं। नए भारत में हम महिला कल्याण से आगे निकलकर महिलाओं की अगुवाई में राष्ट्र कल्याण की सोच लेकरके आगे बढ़ रहे हैं।

यही कारण है कि इस वर्ष के बजट में स्वयं-सहायता समूहों के लिए महत्वपूर्ण घोषणा की गई है। महिला स्व-सहायता समूहों के लिए ब्याज पर जो सब्सिडी मिलती थी, इसको अब पूरे देश में लागू किया जा रहा है।इसी तरह समूह की जिन सदस्यों के पास जन-धन बैंक खाता है, उनको 5 हज़ार रुपए तक के ओवर ड्राफ्ट की अतिरिक्त सुविधा मिलेगी। अब किसी साहूकार से ज्‍यादा ब्‍याज से पैसा नहीं लेना पड़ेगा। मतलब ये कि अगर आपके खाते में एक भी पैसा जमा नहीं है, तब भी आप 5 हजार रुपये अपनी जरूरत के लिए उससे निकाल सकेंगी। ये एक प्रकार से आसान ऋण है, जिसकी सुविधा जन-धन खाते पर आपको मिलेगी।

इसी तरह मुद्रा योजना के तहत भी हर स्व-सहायता समूह की एक महिला सदस्य को 1 लाख रुपये तक का कर्ज मिलेगा। इससे आपको अपना कारोबार शुरू करने या फिर उसे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

साथियो, मुद्रा योजना बहनों को उद्यमी बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। योजना के तहत अभी तक देशभर में करीब 20 करोड़ ऋण बांटे गए हैं। इनमें से लगभग 14 करोड़ ऋण हमारी बहनों और बेटियों के हाथ में गए हैं। महाराष्ट्र में भी मुद्रा योजना के डेढ़ करोड़ लाभार्थियों में से सवा करोड़ लाभार्थी हमारी माताएं-बहने हैं। महिला उद्यमशीलता के क्षेत्र में आ रहे इस बदलाव को हमें और तेज करना है, और मजबूत करना है। इसके लिए सरकार के स्‍तर पर जो भी कदम उठाने होंगे वो जरूर उठाए जाएंगे।

साथियो, स्वयं सहायता समूह के रूप में आप आर्थिक सशक्तिकरण के मजबूत माध्यम तो हैं ही, आप सामाजिक परिवर्तन की भी अहम प्रहरी हैं। बेटियों का जीवन बचाने से लेकर, उनकी पढ़ाई और उनके लिए सुरक्षित माहौल बनाने के लिए सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। यहां देवेन्‍द्र जी की सरकार ने इस दिशा में सराहनीय काम किया है। लेकिन सिर्फ सरकारी योजना और कानून ही काफी नहीं है। हमें बेटियों के प्रति समाज की सोच में व्यापक परिवर्तन लाने की जरूरत है। इसमें आप बहनों-बेटियों की भूमिका भी अहम है।

हाल में आपने देखा है कि मुस्लिम बहनों को तीन तलाक की कुरीति से निजा दिलाने के लिए एक कड़ा कानून बनाया गया है। अब आपको समाज के भीतर इस कानून को लेकर जागरूकता फैलानी होगी।

साथियो, समय से पहले जब लक्ष्‍य हम हासिल करते हैं तो बड़े संकल्‍पों को सिद्ध करने का हौसला अपने-आप बढ़ जाता है।जब ईमानदारी से काम किया जाता है, जब साफ नीयत से काम किया जाता है, तो प्रयासों में भी कोई कमी नहीं रहती।आप सभी चंद्रयान को लेकर जो हुआ, उससे परिचित होंगे।

आप सभी चंद्रयान को लेकर जो हुआ, उससे भलीभांति परिचित होंगे। हमारे वैज्ञानिकों ने एक बड़ा लक्ष्य हासिल करने का प्रयास किया था, लेकिन उसमें एक बाधा आ गई। इस मिशन के लिए वैज्ञानिक काफी समय से मेहनत कर रहे थे।

भाइयो और बहनों, कल रात और आज सुबह मैं उनके बीच था। वो भावुक थे, लेकिन साथ-साथ ही बुलंद हौसले से भरे हुए थे कि अब और तेजी से काम करना है;जो हुआ उससे सबक लेकर, सीखकरके आगे बढ़ना है।इसरो जैसी प्रतिबद्धता के साथ ही देश को आगे बढ़ाया जा सकता है, लोगों के जीवन को आसान बनाया जा सकता है।

साथियो, अलग-अलग क्षेत्रों में ऐसे ही लगनशील लोगों की प्रतिबद्धता के चलते देश के हर गांव तक बिजली पहुंचाना, 8 करोड़ परिवारों को गैस कनेक्शन देना, ऐसे अनेक काम समय से पहले पूरे हो चुके हैं। अब बहुत जल्द पूरा देश खुद को खुले में शौच से मुक्त घोषित करने की तरफ बढ़ रहा है।

मुझे विश्वास है कि 2022 में, जब हम आजादी के 75 वर्ष का पर्व मनाएंगे, तब के लिए हमने जो संकल्प हमने लिए हैं, वो जरूर पूरे होंगे।

भाइयो और बहनों, 2022 तक हर गरीब को पक्की छत देने के लक्ष्य की तरफ हम तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। अब तक देश के गांवों और शहरों में लगभग 1 करोड़ 80 लाख घर बन चुके हैं। लाभार्थी उसमें रहने के लिए चले गए हैं। कई लोग हमसे पूछते हैं कि गरीबों के घर की योजना तो पहले भी चलती थी, फंड पहले भी थे, लेकिन आपने इसमें अलग क्‍या किया?

सबसे पहले तो मैं ये बताना चाहता हूं कि हम इस बात को समझते थे कि हमें house नहीं, बल्कि homes का निर्माण करना है, चारदीवारी से घिरे मकान नहीं, आपके सपनों का घर बनाना है। हम ऐसे घर बनाना चाहते थे जहाँ सभी सुविधाएँ भी मौजूद हों। यानी घर के नाम पर चार दीवारें खड़ी करने के तौर-तरीकों से अलग हमें कुछ बेहतर करने की जरूरत थी। हमारी कोशिश कम से कम समय में, बगैर किसी ज्‍यादा लागत के अधिक से अधिक सुविधाएँ देना, ये हमारा इरादा था।

साथियो, हमारी सरकार ने जो घर बनवाए, उसके लिए कोई फिक्स्ड फॉर्मूला नहीं अपनाया कि जो कागज पर ढाल दिया, वैसे ही घर पूरे देश में बनने चाहिए। जी नहीं, बल्कि इसके विपरीत हमने घरों के निर्माण में स्थानीय लोगों की जरूरतों और वहां के लोगों की इच्छा को भी केन्‍द्र में रखा, उसी को ध्‍यान में रखते हुए मकान बनाने की योजना बनाई। घर में सभी प्रकार की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों, इसके लिए हमने विभिन्न सरकारी योजनाओं को एक साथ जोड़ दिया। ताकि उन घरों में बिजली, गैस कनेक्शन, शौचालय और ऐसी तमाम सुविधाएं भी साथ के साथ मिल सकें।

ये घर लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप बन सकें इसके लिए हमने आप लोगों की जरूरतों को सुना। इसके बाद ना सिर्फ घर का एरिया बढ़ाया गया बल्कि निर्माण राशि में भी बढ़ोत्‍तरी की गई। हमने इस प्रक्रिया में स्‍थानीय कारीगरों और श्रमिकों को भी शामिल किया, जैसे- अनेक महिलाएं भी आज अगर झारखंड जाएंगे तो रानी मिस्‍त्री शब्‍द सुनाई देगा आपको। बिना किसी अतिरिक्‍त लागत के, कम से कम समय में घरों की डिलीवरी हो, इस पर भी हमने फोकस किया। इसके लिए इसके लिए टैक्‍नोलॉजी को एक महत्‍वपूर्ण हिस्‍से के रूप में अपनाया गया।

भाइयो और बहनों, हमने उन लोगों के सपनों को भी बल देने की कोशिश की, जो अपना घर खुद खरीदने की इच्छा रखते हैं। सस्ते मकानों को और बढ़ावा देने के लिए सरकार ने होम लोन पर डेढ़ लाख रुपये के ब्याज पर आयकर में अतिरिक्त छूट का प्रावधान किया ताकि मध्‍यम वर्ग का परिवार अपना घर बसा सके।

साथियो, हमारा जोर पारदर्शिता पर भी रहा। घ्ररों के निर्माण के अलग-अलग चरण की तस्‍वीरों को ऑनलाइन अपलोड किया गया। पारदर्शी तरीके से प्रशासन को सही जानकारी उपलब्‍ध कराई गई। यही नहीं, रियल एस्टेट के क्षेत्र में पारदर्शिता की बहुत कमी थी। इससे घर खरीदने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। सरकार ने रेरा कानून लाकर घर खरीदने वालों के मन में विश्वास भरने का काम किया है। आज अधिकतर राज्‍यों में रेरा कानून notify किया जा चुका है। Tribunal भी काम कर रहा है। इस प्रोजेक्‍ट के तहत लाखों नए flats का निर्माण किया जा रहा है।

कुल मिलाकर देखें तो घर को लेकर हमनेholistic approach से काम किया है। अगर हम अलग-अलग] एक-एक योजना के साथ सामने आते, तो इतनी बड़ी सफलता मिलना मुश्किल था। बड़े पैमाने पर समाधान तभी संभव है जब सारे विभाग, सारे फैसले, एक बड़े लक्ष्य को सोचकर किए जाएं।सारे मंत्रालय और सारी योजनाएं मिलकर एक ट्रैक पर काम करें। यही हमारी सरकार के कामकाज की पहचान रही है- टुकड़ों में नहीं समग्रता में सोचो और सबको इकट्ठा करके काम करो।

साथियो, पिछले 5 वर्षों में स्वच्छता से लेकर बैंक से लेनदेन तक, समाज के व्यवहार में परिवर्तन के जितने भी जन-आंदोलन हुए हैं, उसमें आप सभी ने बढ़-चढ़करके योगदान दिया है।यही कारण है कि आने वाले 5 वर्षों के लिए भी जो संकल्प लिए गए हैं, उनकी सिद्धि के लिए आप पर मुझे बहुत भरोसा है।ये विश्वास निरंतर मजबूत होगा, इसी कामना के साथ आपका बहुत बहुत आभार।

धन्‍यवाद और इतनी बड़ी संख्‍या में त्‍योहार के दिन माताओं-बहनों का हमें आशीर्वाद देने के लिए आना, ये हमारे लिए अपने-आप में एक शक्ति की अनुभूति है। इस मातृ शक्ति को नमन करते हुए मैं मेरी वाणी को विराम देता हूँ। मेरे साथ दोनों हाथ ऊपर करके पूरी ताकत से बोलिए-

भारत माता की – जय

भारत माता की – जय

भारत माता की – जय

बहुत-बहुत धन्‍यवाद

 

Explore More
শ্রী রাম জন্মভূমি মন্দিরের ধ্বজারোহণ উৎসবে প্রধানমন্ত্রীর বক্তব্যের বাংলা অনুবাদ

জনপ্রিয় ভাষণ

শ্রী রাম জন্মভূমি মন্দিরের ধ্বজারোহণ উৎসবে প্রধানমন্ত্রীর বক্তব্যের বাংলা অনুবাদ
India stands tall in shaky world economy as Fitch lifts FY26 growth view to 7.5%

Media Coverage

India stands tall in shaky world economy as Fitch lifts FY26 growth view to 7.5%
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Barak Valley will become a major logistics and trade hub for the North East: PM Modi in Silchar, Assam
March 14, 2026
Today, North-East India is the center of India’s Act East Policy; It is becoming a bridge that connects India with South-East Asia: PM
The farmers of Barak Valley and tea garden workers have made a significant contribution to Assam’s development; the Government is continuously working for farmers’ welfare: PM
We consider border villages as the nation’s first villages; the next phase of the Vibrant Village Programme was launched from Cachar district to boost development in several Barak Valley villages as well: PM

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

प्रानोप्रिय बोराक उपत्यकार, सम्मानित नागरिकवृंद, आपनादेर शोबाई के आमार प्रोणाम जानाई।

राज्य के लोकप्रिय मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे साथी सर्बानंद सोनोवाल जी, उपस्थित राज्य सरकार के मंत्रीगण, जनप्रतिनिधिगण और मेरे प्यारे भाईयों और बहनों।

संस्कृति, साहस और जीवंतता से भरपूर बराक वैली के आप सभी परिवारजनों के बीच आना बहुत विशेष अनुभव रहता है। सिलचर को तो बराक घाटी का गेटवे कहा जाता है। ये वो जगह है जहां इतिहास, भाषा, संस्कृति और उद्यम ने मिलकर अपनी एक विशेष पहचान बनाई है। यहां बांग्ला बोली जाती है, असमिया की गूँज सुनाई देती है और अन्य जनजातीय परंपराएं भी फुलती-फलती हैं। यहां इतनी विविधता को अपनी ताकत बनाकर आप सभी भाईचारे के साथ, सद्भाव के साथ, इस पूरे क्षेत्र का विकास कर रहे हैं। ये बराक वैली का बहुत बड़ा सामर्थ्य है

साथियों,

बराक नदी के उपजाऊ मैंदानों ने, यहां के चाय बागानों ने, यहां के किसानों को, यहां के ट्रेड रूट्स को, एजुकेशन सेंटर्स को हमेशा प्रोत्साहित किया है। ये क्षेत्र असम ही नहीं, पूरे नॉर्थ ईस्ट और पश्चिम बंगाल को भी कनेक्ट करता है। बराक घाटी के इसी महत्व को 21वीं सदी में और अधिक सशक्त करने के लिए मैं आज आपके बीच आया हूं, आपके आशीर्वाद लेने आया हूं। थोड़ी देर पहले यहां बराक वैली की कनेक्टिविटी से जुड़े, नॉर्थ ईस्ट की कनेक्टिविटी से जुड़े, हजारों करोड़ रूपये के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। रोड़ हो, रेल हो, एग्रीकल्चर कॉलेज हो, ऐसे हर प्रोजेक्ट्स से बराक वैली नॉर्थ ईस्ट का एक बड़ा लॉजिस्टिक और ट्रेड हब बनने जा रहा है। इससे यहां के नौजवानों के लिए रोजगार के, स्वरोजगार के अनगिनत, अनगिनत अवसर बनने जा रहे हैं। मैं आप सभी को इन सभी विकास परियोजाओं के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आजादी के अनेक दशकों तक कांग्रेस की सरकारों ने नॉर्थ ईस्ट को दिल्ली से और दिल से, दोनों से ही दूर रखा। कांग्रेस ने नॉर्थ ईस्ट को एक प्रकार से भुला दिया था। लेकिन बीजेपी की डबल इंजन सरकार ने नॉर्थ ईस्ट को ऐसे कनेक्ट किया है कि आज हर तरफ इसकी चर्चा है। आज नॉर्थ ईस्ट भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का केंद्र है, दक्षिण पूर्व एशिया के साथ भारत को जोड़ने वाला सेतु बन रहा है।

लेकिन साथियों,

जैसे कांग्रेस ने नॉर्थ ईस्ट को अपने हाल पर छोड़ दिया था, ठीक वैसे ही बराक वैली को भी बेहाल करने में कांग्रेस की बहुत बड़ी भूमिका रही है। जब देश आज़ाद हुआ, तो कांग्रेस ने ऐसी बाउंड्री खींचने दी, जिससे बराक घाटी का समंदर से संपर्क ही कट गया। जो बराक वैली कभी ट्रेड रूट के रूप में, एक औद्योगिक केंद्र के रूप में जानी जाती थी, उस बराक वैली से उसकी ताकत ही छीन ली गई। आज़ादी के बाद भी दशकों तक कांग्रेस की सरकारें रहीं, लेकिन बराक घाटी के विकास के लिए कुछ खास नहीं हुआ।

साथियों,

बीजेपी की डबल इंजन सरकार, इस स्थिति को बदल रही है। हम बराक घाटी को फिर से व्यापार कारोबार का बड़ा हब बनाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं। आज इस दिशा में एक बहुत बड़ा और अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। आज करीब 24 हजार करोड़ रुपए के शिलांग-सिलचर हाई-स्पीड कॉरिडोर का भूमि पूजन हुआ है, 24 हजार करोड़ रुपए, कितने? कितने? 24 हजार करोड़ रुपए। कितने? कितने? कितने? ये जरा कांग्रेस वालों को पूछना, जरा कागज पेन देना और उनको कहना कि जरा कागज पर 24 हजार करोड़ लिखो तो, कितने, कितने जीरो लगते हैं, आएगा नहीं उनको। ये कांग्रेस वालों के दिमाग का ताला जहां बंद हो जाता है ना, वहां हमारा काम शुरू हो जाता है। यह नॉर्थ-ईस्ट का पहला Access Controlled High-Speed Corridor होगा।

साथियों,

ये सिर्फ एक हाईवे प्रोजेक्ट नहीं है, ये नॉर्थ ईस्ट के लोगों के दशकों पुराने इंतजार का अंत हो रहा है। इस कॉरिडोर से सिलचर, मिजोरम, मणिपुर और त्रिपुरा, ये सब राज्य कनेक्ट होने वाले हैं। इन तीनों राज्यों से आगे बांग्लादेश और म्यांमार हैं और फिर आगे दक्षिण-पूर्व एशिया का विशाल बाजार है। यानी बराक घाटी, एक बहुत उज्जवल भविष्य की तरफ जुड़ने का आज शिलान्यास कर रही है। इसका फायदा असम सहित पूरे नॉर्थ ईस्ट के किसानों को होगा, यहां के नौजवानों को होगा। इतनी अच्छी कनेक्टिविटी वाले ये सारा क्षेत्र बनने से, इस पूरे क्षेत्र में इंडस्ट्री को बल मिलेगा, टूरिज्म को फायदा होगा और सबसे बड़ी बात, हिन्दुस्तान का कोना-कोना आसानी से आप लोगों से जुड़ जाने वाला है।

साथियों,

आप सभी यहां सिलचर में ट्रैफिक को लेकर भी काफी परेशान रहे हैं। अब सिलचर फ्लाईओवर से ये समस्या भी कम हो जाएगी। सिल्चर मेडिकल कॉलेज, NIT सिल्चर और असम यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे युवा साथियों के लिए, ये बहुत अच्छी सुविधा हो गई है। इससे आने-जाने में उनका बहुत ही कीमती समय बचने वाला है।

साथियों,

डबल इंजन की बीजेपी सरकार, असम की रेल कनेक्टिविटी पर भी बहुत अधिक काम कर रही है। खासतौर पर रेलवे का बिजलीकरण हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता रहा है। अब असम का ढाई हजार किलोमीटर से अधिक का रेल नेटवर्क, अब इलेक्ट्रिफाई हो चुका है। अब यहां भी तेज़ गति से ट्रेनें चल पाएंगी, इससे बराक वैली के स्वच्छ वातावरण को भी फायदा मिलेगा।

साथियों,

बराक वैली के किसानों और यहां के चाय-बागानों में काम करने वाले श्रमिकों का असम के विकास में बहुत बड़ा योगदान है। डबल इंजन सरकार किसानों के कल्याण के लिए निरंतर कदम उठा रही है। कल ही, गुवाहाटी से मैंने पीएम किसान सम्मान निधि की अगली किश्त जारी की है। अब तक पीएम किसान सम्मान निधि का देश के किसानों को लाखों करोड़ रूपया, और अकेले हमारे असम के किसानों को 20 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा पैसा असम के किसानों को मिल चुका है। अब आप सोचिये, हमने 10 साल में यहां के किसानों की जेब में, 20 हजार करोड़ रुपया उनकी जेब में दिया है। ये कांग्रेस वालों ने 10 साल राज किया, प्रधानमंत्री तो असम से चुनकर के गए थे, उसके बावजूद भी एक फूटी कौड़ी नहीं दी, एक फूटी कौड़ी किसानों को नहीं दी, हमने 20 हजार करोड़ रूपया दिया है। कल बराक वैली के हज़ारों किसानों के खाते में भी, ये आखिरी किस्त भी पहुंची है, ये वाली किस्त पहुंची है और फिर जब चुनाव के बाद आएगा समय, तब भी पहुंचेगी। ये पैसा खेती से जुड़ी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने में, मेरे गांव के छोटे-छोटे किसान भाई-बहनों को बहुत बड़ी मदद कर रहा है।

साथियों,

बराक वैली अब अपनी फसलों के लिए ही नहीं, बल्कि कृषि से जुड़ी पढ़ाई और रिसर्च के लिए भी जानी जाएगी। पत्थरकांडी में बराक घाटी के पहले एग्रीकल्चर कॉलेज का निर्माण कार्य आज से शुरु हो रहा है। इससे किसानों को तो फायदा होगा ही, यहां के नौजवानों को कृषि स्टार्टअप्स के लिए सहयोग, समर्थन और प्रोत्साहन मिलेगा।

साथियों,

भाजपा का मंत्र है- जो विकास की दौड़ में पीछे रह गया, उसे प्राथमिकता देना। कांग्रेस की सरकारें बॉर्डर एरिया को, देश के अंतिम गांव मानती थीं। हम बॉर्डर के गांवों को देश के पहले गांव मानते हैं। और इसलिए, बॉर्डर एरिया के विकास के लिए, कछार जिले से ही वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का अगला चरण शुरु किया था। इससे बराक वैली के अनेक गांवों में भी सुधार होना तय हो गया है।

साथियों,

यहां बड़ी संख्या में चाय-बागानों में कार्य करने वाले साथी भी हैं। असम सरकार ने, चाय-बगानों से जुड़े हजारों परिवारों को, उनकी जमीन का अधिकार देने का ऐतिहासिक काम किया है, वो इन परिवारों के भविष्य को बदलने की एक बड़ी शुरुआत है। जमीन के पट्टे मिलने से, इन परिवारों को सुरक्षा मिली है, उन्हें सम्मान का जीवन मिलना सुनिश्चित हुआ है।

साथियों,

आप जरा वहां से दूर रहिए, अब जगह नहीं है, आगे नहीं आ सकते हैं। देखिए वहां से जरा दूर रखिये उनको, अब आगे नहीं आ सकते भईया, अरे हमारे असम के भाई-बहन तो बड़े समझदार हैं। आपका से प्यार, आपका आशीर्वाद, ये इतनी बड़ी ताकत है, कृपा करके आप।

साथियों,

मैं हेमंता जी की सरकार को बधाई देता हूं, चाय-बागानों में करीब 200 सालों से सेवा दे रही अनेक पीढ़ियों के संघर्ष को आपने आज सम्मान दिया है। देखिए मेरी इस बात पर बादल भी गरजने लग गए। मुझे खुशी है कि जिनको पहले की सरकारों ने अपने हाल पर छोड़ दिया था, उनकी सुध बीजेपी सरकार ने ली है।

साथियों,

ये सिर्फ भूमि पर कानूनी अधिकार का ही मामला नहीं है। इससे ये लाखों परिवार, केंद्र और राज्य सरकार की अनेक कल्याणकारी योजनाओं से भी तेज़ी से जुड़ेंगे। पक्के घर की योजना हो, बिजली, पानी और गैस की योजनाएं हों, इन सब स्कीम्स का पूरा फायदा अब इन परिवारों को मिलना संभव होगा।

साथियों,

बीते सालों में बीजेपी सरकार ने चाय-बागानों में अनेक स्कूल खोले हैं, बच्चों को स्कॉलरशिप्स दिए हैं। सरकारी नौकरियों के लिए भी रास्ते खोले गए हैं। ऐसे प्रयासों से चाय-बागानों के युवाओं के लिए सुनहरे भविष्य के द्वार खुल रहे हैं।

साथियों,

बीजेपी की डबल इंजन सरकार के लिए शिक्षा, कौशल विकास और स्वास्थ्य सुविधाएं बहुत बड़ी प्राथमिकताएं रही हैं। असम ने तो शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर कांग्रेस की उपेक्षा को बहुत लंबे समय तक भुगता है। आज असम शिक्षा और स्वास्थ्य का बहुत बड़ा हब बनकर सामने आ रहा है। इसका बहुत अधिक फायदा बराक वैली को मिला है। आज यहां शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े अनेक बड़े संस्थान बन चुके हैं।

साथियों,

कांग्रेस ने असम के युवाओं को सिर्फ हिंसा और आतंकवाद के कुचक्र में ही उलझाए रखा था। कांग्रेस ने असम को फूट डालो और राज करो की नीति की प्रयोगशाला बनाया। आज असम के युवाओं के सामने अवसरों का खुला आसमान है। आज असम भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर का अहम हिस्सा बन रहा है। यहां नेक्स्ट जेनरेशन टेक्नॉलॉजी से जुड़ा इकोसिस्टम और टैलेंट तैयार हो रहा है। यहां IIT और IIM जैसे संस्थान बन रहे हैं। मेडिकल कॉलेज, एम्स और कैंसर अस्पतालों का सशक्त नेटवर्क बन रहा है। शांति और प्रगति का ये नया दौर, अनेक बलिदानों और अनेक प्रयासों से आया है। अब ऐसी हर ताकत को मुंहतोड़ जवाब देना है, जो असम को पुराने दौर में धकेलने की कोशिश करती है।

साथियों,

आज मैं सिलचर से असम को सावधान-सतर्क भी करना चाहता हूं। आपने कांग्रेस को असम से बाहर किया। आज देश का हर राज्य कांग्रेस को सबक सिखा रहा है। कांग्रेस एक के बाद एक चुनाव हार रही है। अब निकट भविष्य में, कांग्रेस खुद के पराजय के इतिहास की सेंचूरी मारने वाला है। हार की हताशा से भरी कांग्रेस ने देश के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस के नेता देश को बदनाम करने में जुट गए हैं, आपने देखा है, दिल्ली में इतनी बड़ी AI समिट हुई। आज पूरी दुनिया जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, AI को लेकर बहुत ही उत्सुक है। दिल्ली में सफलतापूर्वक विश्व की एक नई आशा पैदा करने वाला AI समिट हुआ। दुनियाभर के नेता, दुनियाभर की टेक्नॉलॉजी कंपनियां, टेक्नॉलॉजी के बड़े-बड़े लीडर दिल्ली आए थे। कांग्रेस ने इस समिट को बदनाम करने के लिए कपड़ा फाड़ प्रदर्शन किया। अब कांग्रेस के पास खुद के कपड़े फाड़ने के सिवा कुछ नहीं बचा है। पूरे देश ने कांग्रेस के इस भौंडे और भद्दे प्रदर्शन की आलोचना की। लेकिन दिल्ली में जो कांग्रेस का शाही परिवार है, वो इस कांड को भी अपना मेडल बता रहा है, देश को बदनाम करने वालों की वाहवाही कर रहा है। ऐसी कांग्रेस, जो देश की विरोधी हो, वो किसी राज्य का भला नहीं कर सकती, वो असम के युवाओं का कभी भला नहीं सोच सकती।

साथियों,

आजकल दुनिया में चारों तरफ और हमारे तो अड़ोस पड़ोस में ही युद्ध के हालात और आप सब भलिभांति युद्ध कि क्या भयानकता है, वो रोजमर्रा देख रहे हो। युद्ध से जो स्थितियां बनी हैं, हमारी सरकार उनसे निपटने के लिए, हमारे देश के नागरिकों को कम से कम मुसीबत आए इसलिए हो सके उतने सारे प्रयास कर रही है। हमारा प्रयास है कि देश के नागरिकों पर युद्ध का कम से कम प्रभाव पड़े। इस समय कांग्रेस से उम्मीद थी कि वो एक जिम्मेदार राजनीतिक दल की भूमिका निभाए, लेकिन कांग्रेस देश हित के इस महत्वपूर्ण काम में भी फिर एक बार फेल हो गई। कांग्रेस पूरी कोशिश कर रही है कि देश में पैनिक क्रिएट हो, देश मुश्किल में फंस जाए। और उसके बाद कांग्रेस भर-भर कर मोदी को गाली दे।

साथियों,

कांग्रेस के लिए और कांग्रेस असम के लिए, देश के लिए कांग्रेस का कोई विजन ही नहीं है, इसलिए, इन्होंने अफवाहों को, झूठ-प्रपंच को ही, और जैसे झूठे रील बनाने की इंडस्ट्री खोलकर रखी है, उसी को हथियार बना दिया है। दुनिया में जो ताकतें भारत के तेज़ विकास को नहीं पचा पा रहीं हैं, जिन विदेशी ताकतों को देश की प्रगति रास नहीं आ रही, कांग्रेस देश का दुर्भाग्य देखिए, कांग्रेस उनके हाथ की कठपुतली बनती जा रही है। इसलिए, असम के हर नागरिक को, हर नौजवान को कांग्रेस से सावधान रहना है।

साथियों,

असम हो, बराक वैली हो, अब ये विकास के पथ पर बढ़ चुका है। बराक वैली, अपनी भाषा, अपने साहित्य, अपनी संस्कृति के लिए जानी जाती है। वो दिन दूर नहीं, जब बराक वैली को विकास के नए सेंटर के रूप में पहचान मिलेगी।

साथियों,

आप इतनी बड़ी तादाद में हमें आशीर्वाद देने आए हैं। जो राजनीति के भविष्य की रेखाएं अंकित करने वाले लोग हैं, वो भांति-भांति की जो संभावनाएं तलाशते रहते हैं, वे आज बराक वैली का ये दृश्य, कल बोड़ो समुदाय का वो दृश्य, टी गार्डन वालों के समूह का दृश्य, ये साफ-साफ बता रहा है कि, इस चुनाव का नतीजा भी क्या होने वाला है। और आप इतनी बड़ी तादाद में आशीर्वाद देने के लिए आए हैं, मैं आपका हृदय से आभारत व्यक्त करता हूं और आप सभी को फिर से विकास परियोजनाओं की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मेरे साथ बोलिये-

भारत माता की जय!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!