প্রধানমন্ত্রী শ্রী নরেন্দ্র মোদী আজ জাতির উদ্দেশে ভাষণ দিয়েছেন।
মহামারীর এই সময়ে যাঁরা প্রাণ হারিয়েছেন প্রধানমন্ত্রী তাঁদের মৃত্যুতে শোকপ্রকাশ করেছেন। গত ১০০ বছরে এই মহামারীকে সবথেকে ভয়াবহ বিপর্যয় বলে উল্লেখ করে শ্রী মোদী বলেছেন আধুনিক বিশ্ব এ ধরণের অভিজ্ঞতার সম্মুখীন এর আগে হয়নি। দেশকে বিভিন্ন ক্ষেত্রে এই মহামারীর বিরুদ্ধে লড়াই করতে হচ্ছে। তিনি আজ বেশ কিছু গুরুত্বপূর্ণ ঘোষণা করেছেন।
এতদিন বিভিন্ন রাজ্য টিকাকরণের নীতি সম্পর্কে পুর্নবিবেচনার দাবি জানিয়ে এসেছে। পয়লা মে-র আগের নীতিটি আবারও শুরু করার প্রস্তাব আসায় প্রধানমন্ত্রী ঘোষণা করেছেন টিকাকরণের যে ২৫ শতাংশ দায়িত্ব রাজ্যগুলি পালন করছিল তা এরপর থেকে কেন্দ্র বাস্তবায়িত করবে। আগামী ২ সপ্তাহের মধ্যে এ সংক্রান্ত পরিবর্তন ঘটানো হবে। এই সময় নতুন নীতি-নির্দেশিকা অনুযায়ী কেন্দ্র ও রাজ্যগুলি প্রয়োজনীয় প্রস্তুতি নেবে। শ্রী মোদী আরও জানিয়েছেন ২১ জুন থেকে কেন্দ্র ১৮ বছরের ঊর্দ্ধে সব ভারতীয়কে বিনামূল্যে টিকা দেবে। কেন্দ্রীয় সরকার টিকা প্রস্তুতকারক সংস্থাগুলির কাছ থেকে মোট উৎপাদিত টিকার ৭৫ শতাংশ সংগ্রহ করবে এবং রাজ্যগুলিকে তা বিনামূল্যে দেবে। কোনো রাজ্য সরকারকেই টিকার জন্য আর অর্থ ব্যয় করতে হবে না। এ পর্যন্ত কোটি কোটি মানুষ বিনামূল্যে টিকা পেয়েছেন। আর এখন কেন্দ্রীয় সরকার ১৮ বছরের ঊর্দ্ধে সকলকেই এই ব্যবস্থার আওতায় নিয়ে এল, অর্থাৎ ১৮ বছরের ঊর্দ্ধে সকল নাগরিকই বিনামূল্যে টিকা পাবেন।
প্রধানমন্ত্রী জানিয়েছেন, বেসরকারী হাসপাতালগুলি টিকা প্রস্তুতকারক সংস্থাগুলির থেকে যে ২৫ শতাংশ টিকা সংগ্রহ করছিল তা অব্যাহত থাকবে। টিকার মূল্য হিসেবে তারা যাতে শুধুমাত্র দেড়শো টাকা সার্ভিস চার্জ নেয় রাজ্যগুলিকে তা নিশ্চিত করতে হবে।

প্রধানমন্ত্রী আর একটি গুরুত্বপূর্ণ ঘোষণায় বলেছেন, দীপাবলি পর্যন্ত প্রধানমন্ত্রী গরিব কল্যাণ অন্ন যোজনার মেয়াদ বাড়ানো হল। এর ফলে আগামী নভেম্বর পর্যন্ত ৮০ কোটি মানুষ প্রতি মাসে বিনামূল্যে খাদ্যশস্য পাবেন। মহামারীর এই সময়ে দরিদ্র মানুষদের সব চাহিদা সরকার বন্ধুর মতো পূরণ করবে।
দ্বিতীয় ঢেউয়ের সময় এপ্রিল ও মে মাসে দেশ জুড়ে চিকিৎসার জন্য যে অভূতপূর্ব তরল অক্সিজেনের চাহিদা দেখা দিয়েছিল প্রধানমন্ত্রী সেই প্রসঙ্গ উল্লেখ করে বলেছেন যুদ্ধকালীন তৎপরতায় সরকার পরিস্থিতি মোকাবিলায় সব ধরণের ব্যবস্থা নিয়েছে। ভারতের ইতিহাসে চিকিৎসার কাজে ব্যবহৃত অক্সিজেনের চাহিদা এর আগে এতো বেশি দেখা যায়নি। এই সমস্যা সমাধানে সরকার সব ধরণের উদ্যোগ নিয়েছিল।
শ্রী মোদী বলেছেন, সারা বিশ্বজুড়ে যে পরিমাণ টিকার চাহিদা রয়েছে তার থেকে অনেক কম টিকা উৎপাদনকারী সংস্থা ও দেশ আছে। এই পরিস্থিতিতে ভারতের তৈরি টিকা দেশের জন্য অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ। অতীতে বিদেশে টিকা উদ্ভাবন করা হোত। তারপর সেই টিকা ভারতে কয়েক দশক পর এসে পৌঁছাতো। এর ফলে পরিস্থিতি এমন দাঁড়াত যে বিভিন্ন দেশে যখন টিকাকরণের কাজ শেষ হয়ে যেত ভারতে তখন তা শুরুই করা যেত না। টিকাকরণের বিষয়টিকে অগ্রাধিকার দেওয়ায় বিগত ৫-৬ বছরে দেশে টিকাকরণ ৬০ শতাংশের বদলে ৯০ শতাংশ মানুষকে করা যাচ্ছে। এর ফলে টিকাকরণের প্রক্রিয়া যেমন গতি পেয়েছে একই সঙ্গে আরও বেশি মানুষকে টিকাকরণের আওতায় নিয়ে আসা সম্ভব হয়েছে।
শ্রী মোদী বলেছেন, ভারত এবার সবদিক বিবেচনা করে, স্পষ্ট ধারণা নিয়ে স্বচ্ছ নীতি অনুসরণ করে নিরলস কঠোর পরিশ্রম করছে। এর ফলে দেশে একটি নয়, কোভিড প্রতিহত করার জন্য দুটি টিকা তৈরি হচ্ছে। আমাদের বিজ্ঞানীরা তাঁদের ক্ষমতা দেখিয়েছেন। আজ পর্যন্ত ২৩ কোটির বেশি টিকার ডোজ দেওয়া হয়েছে।
প্রধানমন্ত্রী এই প্রসঙ্গে টিকা সংক্রান্ত কর্মীগোষ্ঠী গঠনের কথা উল্লেখ করেছেন। যখন দেশে মাত্র কয়েক হাজার মানুষ কোভিড-১৯এ সংক্রমিত হয়েছিলেন সেইসময় কেন্দ্র বিভিন্ন সংস্থাকে টিকা নিয়ে গবেষণা, উদ্ভাবন ও পরীক্ষা-নিরীক্ষার কাজে সব ধরণের সহযোগিতা করা শুরু করেছে। প্রধানমন্ত্রী জানিয়েছেন, কঠোর পরিশ্রমের জন্যই আগামীদিনে টিকার সরবরাহ বৃদ্ধি পাবে। তিনি বলেছেন, আজ ৭টি সংস্থা বিভিন্ন ধরণের টিকা উৎপাদন করছে। আরও ৩টি টিকা পরীক্ষা-নিরীক্ষার চূড়ান্ত স্তরে রয়েছে। এছাড়াও শিশুদের জন্য দুটি টিকার পরীক্ষা-নিরীক্ষা চলছে। আর নাসারন্ধ্র দিয়ে টিকা প্রয়োগের বিষয়টিও বিজ্ঞানীরা দেখছেন।
শ্রী মোদী টিকাকরণ সম্পর্কে বিভিন্ন মহলের নানান দৃষ্টিভঙ্গীর কথা উল্লেখ করেছেন। করোনার সংক্রমণ যখন নিম্নমুখী তখন রাজ্যগুলির জন্য বাছাইয়ের সুযোগ কেন কম সেই প্রশ্ন যেমন উঠেছে আবার কেউ কেউ জানতে চাইছেন কেন কেন্দ্রীয় সরকার সব সিদ্ধান্ত গ্রহণ করছে। লকডাউনের বিষয়ে নমনীয়তার পাশাপাশি ‘একই নিয়ম সর্বত্র প্রযোজ্য নয়’ এই নীতিও গ্রহণ করা হয়েছে। প্রধানমন্ত্রী বলেছেন ১৬ জানুয়ারি থেকে এপ্রিল পর্যন্ত ভারতে কেন্দ্রীয় সরকারই টিকাকরণ অভিযান পরিচালনা করেছে। যাঁরা সামনের সারিতে থেকে লড়াই করেছেন তাঁদের জন্য টিকার ব্যবস্থা করা হয়েছে এবং সকলে নিজের সময় আসা পর্যন্ত অপেক্ষা করে শৃঙ্খলাবদ্ধভাবে টিকা সংগ্রহ করেছেন। সেইসময় টিকাকরণ অভিযানের বিকেন্দ্রীকরণের দাবি তোলা হয়। একইসঙ্গে নির্দিষ্ট বয়েসের মানুষদের টিকাকরণের বিষয়ে অগ্রাধিকার কেন দেওয়া হচ্ছে সেই প্রশ্নও তোলা হয়। বিভিন্ন মহল থেকে নানান চাপ আসে এবং একশ্রেণীর সংবাদ মাধ্যম সেটি নিয়ে প্রচার চালিয়ে গেছে।
টিকাকরণের বিরুদ্ধে যারা গুজব রটাচ্ছে প্রধানমন্ত্রী তাদের সতর্ক করে দিয়েছেন। এইসব মানুষরা অন্যের জীবন নিয়ে খেলা করছেন। আর তাই তাদের বিরুদ্ধে প্রধানমন্ত্রী কঠোর নজরদারি চালানোর প্রয়োজনীয়তার কথা বলেছেন।
बीते सौ वर्षों में आई ये सबसे बड़ी महामारी है, त्रासदी है।
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इस तरह की महामारी आधुनिक विश्व ने न देखी थी, न अनुभव की थी।
इतनी बड़ी वैश्विक महामारी से हमारा देश कई मोर्चों पर एक साथ लड़ा है: PM @narendramodi
सेकेंड वेव के दौरान अप्रैल और मई के महीने में भारत में मेडिकल ऑक्सीजन की डिमांड अकल्पनीय रूप से बढ़ गई थी।
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भारत के इतिहास में कभी भी इतनी मात्रा में मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत महसूस नहीं की गई।
इस जरूरत को पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया गया। सरकार के सभी तंत्र लगे: PM
आप पिछले 50-60 साल का इतिहास देखेंगे तो पता चलेगा कि भारत को विदेशों से वैक्सीन प्राप्त करने में दशकों लग जाते थे।
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विदेशों में वैक्सीन का काम पूरा हो जाता था तब भी हमारे देश में वैक्सीनेशन का काम शुरू नहीं हो पाता था: PM @narendramodi
हर आशंका को दरकिनार करके भारत ने 1 साल के भीतर ही एक नहीं बल्कि दो मेड इन इंडिया वैक्सीन्स लॉन्च कर दी।
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हमारे देश ने, वैज्ञानिकों ने ये दिखा दिया कि भारत बड़े-बड़े देशों से पीछे नही है। आज जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो देश में 23 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन की डोज़ दी जा चुकी है: PM
पिछले काफी समय से देश लगातार जो प्रयास और परिश्रम कर रहा है, उससे आने वाले दिनों में वैक्सीन की सप्लाई और भी ज्यादा बढ़ने वाली है।
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आज देश में 7 कंपनियाँ, विभिन्न प्रकार की वैक्सीन्स का प्रॉडक्शन कर रही हैं।
तीन और वैक्सीन्स का ट्रायल भी एडवांस स्टेज में चल रहा है: PM
राज्य सरकारों को लॉकडाउन की छूट क्यों नहीं मिल रही?
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One Size Does Not Fit All जैसी बातें भी कही गईं: PM @narendramodi
दूसरी तरफ किसी ने कहा कि उम्र की सीमा आखिर केंद्र सरकार ही क्यों तय करे?
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कुछ आवाजें तो ऐसी भी उठीं कि बुजुर्गों का वैक्सीनेशन पहले क्यों हो रहा है?
भांति-भांति के दबाव भी बनाए गए, देश के मीडिया के एक वर्ग ने इसे कैंपेन के रूप में भी चलाया: PM @narendramodi
इस साल 16 जनवरी से शुरू होकर अप्रैल महीने के अंत तक, भारत का वैक्सीनेशन कार्यक्रम मुख्यत: केंद्र सरकार की देखरेख में ही चला।
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सभी को मुफ्त वैक्सीन लगाने के मार्ग पर देश आगे बढ़ रहा था।
देश के नागरिक भी, अनुशासन का पालन करते हुए, अपनी बारी आने पर वैक्सीन लगवा रहे थे: PM
आज ये निर्णय़ लिया गया है कि राज्यों के पास वैक्सीनेशन से जुड़ा जो 25 प्रतिशत काम था, उसकी जिम्मेदारी भी भारत सरकार उठाएगी।
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ये व्यवस्था आने वाले 2 सप्ताह में लागू की जाएगी।
इन दो सप्ताह में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर नई गाइडलाइंस के अनुसार आवश्यक तैयारी कर लेंगी: PM
21 जून, सोमवार से देश के हर राज्य में, 18 वर्ष से ऊपर की उम्र के सभी नागरिकों के लिए, भारत सरकार राज्यों को मुफ्त वैक्सीन मुहैया कराएगी।
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वैक्सीन निर्माताओं से कुल वैक्सीन उत्पादन का 75 प्रतिशत हिस्सा भारत सरकार खुद ही खरीदकर राज्य सरकारों को मुफ्त देगी: PM @narendramodi
देश की किसी भी राज्य सरकार को वैक्सीन पर कुछ भी खर्च नहीं करना होगा।
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अब तक देश के करोड़ों लोगों को मुफ्त वैक्सीन मिली है। अब 18 वर्ष की आयु के लोग भी इसमें जुड़ जाएंगे।
सभी देशवासियों के लिए भारत सरकार ही मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध करवाएगी: PM @narendramodi
देश में बन रही वैक्सीन में से 25 प्रतिशत, प्राइवेट सेक्टर के अस्पताल सीधे ले पाएं, ये व्यवस्था जारी रहेगी।
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प्राइवेट अस्पताल, वैक्सीन की निर्धारित कीमत के उपरांत एक डोज पर अधिकतम 150 रुपए ही सर्विस चार्ज ले सकेंगे।
इसकी निगरानी करने का काम राज्य सरकारों के ही पास रहेगा: PM
आज सरकार ने फैसला लिया है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को अब दीपावली तक आगे बढ़ाया जाएगा।
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महामारी के इस समय में, सरकार गरीब की हर जरूरत के साथ, उसका साथी बनकर खड़ी है।
यानि नवंबर तक 80 करोड़ से अधिक देशवासियों को, हर महीने तय मात्रा में मुफ्त अनाज उपलब्ध होगा: PM
जो लोग भी वैक्सीन को लेकर आशंका पैदा कर रहे हैं, अफवाहें फैला रहे हैं, वो भोले-भाले भाई-बहनों के जीवन के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ कर रहे हैं।
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ऐसी अफवाहों से सतर्क रहने की जरूरत है: PM @narendramodi


