শেয়ার
 
Comments
PM Modi pays tribute to former President Dr. APJ Abdul Kalam
Dr. APJ Abdul Kalam was a "Rashtra-Ratna" before a "Rashtrapati": PM Modi
GoI to build a memorial for Dr. Kalam at Rameswaram, Tamil Nadu: PM
Dr. Kalam always sought fresh challenges to overcome in life, says PM Modi
Dr. Kalam always wanted to be remembered as a teacher: PM Narendra Modi
Dr. Kalam worked for the welfare of poor & farmers: PM Modi
On the birth anniversary of Dr. Kalam, we must explore how we can encourage innovation in India: PM
Dr. Kalam's life continues to be an inspiration for all of us: PM
PM Narendra Modi unveils a statue of Dr. APJ Abdul Kalam at DRDO Bhavan in New Delhi
Prime Minister Modi releases commemorative postal stamp on Dr. Kalam

 

आज 15 अक्‍तूबर, श्रीमान अब्‍दुल कलाम जी की जन्‍म जयंती पर आप सब इकट्ठे हुए है। आज DRDO के परिसर में उनकी एक प्रतिमा का अनावरण करने का मुझे सौभाग्‍य मिला। यह बात सही है कि कलाम साहब का जीवन इतना व्‍यापक, विशाल और गहरा रहा है कि उनको याद करने का गर्व होता है, लेकिन साथ में एक कसक भी रहती है कि काश! वो हमारे साथ होते तो। तो ये जो कमी महसूस होती है, इसको कैसे भरना है, ये हम सब के लिए एक चुनौती है और मुझे विश्‍वास है कि अब्‍दुल कलाम जी के आशीर्वाद से उन्‍होंने हम देशवासियों को जो शिक्षा-दीक्षा दी है, उससे हम अवश्‍य उसको पूरा करने का भरपूर प्रयास करेंगे और वही उनको सबसे बड़ी अंजलि होगी।

वे राष्‍ट्रपति बने, मैं समझता हूं कि उससे पहले वे राष्‍ट्र रत्‍न थे। ऐसा बहुत कम होता है कि एक व्‍यक्‍ति पहले राष्‍ट्र रत्‍न बने और बाद में राष्‍ट्रपति पद को स्‍वीकार करे और वह उनके जीवन की ऊंचाइयों से जुड़ा हुआ था। भारत सरकार ने तय किया है कि जहां पर उनका जन्‍म हुआ और जहां पर उनकी अंत्‍येष्‍टि हुई, उस गांव में एक आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा दे, ऐसा स्‍मारक बनाया जाएगा। सरकार ने already वो जमीन acquire कर ली है। मैंने मंत्रियों की एक कमेटी भी बनाई है जो आने वाले दिनों में इसका आखिरी रूप तय करके, ऐसा कैसा स्‍मारक हो जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहे और कलाम साहब का जीवन हमेशा-हमेशा हम सबके लिए मार्गदर्शक बनता रहे।



दो बातें जो कलाम साहब की स्‍वाभाविक नजर आती हैं – एक तो उनके बाल। दूर से भी किसी को पता चलता है कि अब्‍दुल कलाम जी जा रहे हैं। और कुछ न बनाया हो, सिर्फ उनके बालों को किसी ने पेंट किया तो कह देगा कि हां, बाकी चेहरा कलाम साहब का होगा। लेकिन साथ-साथ एक और भी बात थी। जैसे उनके बाल थे, वैसा उनके भीतर एक बालक था। तो उनके बाल और उनके भीतर का बालक, ये दोनों, मैं समझता हूं हमेशा-हमेशा जो उनके निकट गए हैं उनको याद रहता है। इतनी सहजता, इतनी सरलता।

आमतौर पर वैज्ञानिकों के विषय में एक सोच ऐसी रहती है कि वो बड़े गंभीर चेहरा, उदासीन, Lab में ही डूबे रहने वाले, साल में कितनी बार मुस्‍कुराए वो भी शायद हिसाब लगाना पड़े। लेकिन कलाम साहब, हर पल एक बड़े जीवंत व्‍यक्‍तिव नज़र आता था। मुस्‍कुराते रहना, दौड़ते रहना और। दो प्रकार के लोग होते हैं, एक वो होते हैं जो Opportunity खोजते हैं, एक वो होते हैं जो Challenge खोजते हैं। कलाम साहब Challenges की तलाश में रहते थे। कौन-से नए Challenge है? उस Challenge को कैसे उठा ले और उस Challenge को पार कैसे करे और यही उनके हर पल जीवन में रहता था। आखिर तक!

जब भी मेरा बहुत निकट संबंध रहा क्‍योंकि जब मैं मुख्‍यमंत्री था तब भी उनका गुजरात बार-बार आना होता था। अहमदाबाद से उनका विशेष लगाव था क्‍योंकि उनके career की पहली शुरूआत उन्‍होंने अहमदाबाद में शुरू की थी और विक्रम साराभाई के साथ उन्‍होंने काम किया। तो उसके कारण उनका लगाव भी गुजरात के साथ बहुत था। तो मेरा भी उस समय उनसे संबंध बहुत रहता था। कच्‍छ का भूकंप हो या आपत्‍ति की इतनी बड़ी घटना हो, वो आना, छोटी-छोटी चीजों में guide करना और उस समय भूकंप की परिस्‍थिति के पुनरनिर्माण के काम में विज्ञान और technology का सहारा कैसे लिया जाए ताकि relief तेज गति से हो, rehabilitation तेज गति से हो, reconstruction तेज गति से हो, ऐसी हर बारीक चीज में वो मार्गदर्शन करते थे वो सहायता करते थे।

जीवन भर उनकी एक विशेषता रही है और किसी ने उनको पूछा था कि आपको कैसे याद रखा जाए और उन्‍होंने जवाब में कहा था कि मुझे शिक्षक के रूप में याद रखा जाए। ये शिक्षक का तो सम्‍मान है लेकिन साथ-साथ उनके जीवन का conviction क्‍या था, commitment क्‍या था, उसका भी परिचायक था। उनको लगता है कि भई 5-50 व्‍यक्‍तियों का समूह जरूर कुछ कर दिखा सकता है। लेकिन भारत जैसे देश ने पीढ़ियों तक आगे बढ़ने के लिए, प्रभाव पैदा करने के लिए तेज गति से चलना है तो आने वाली पीढ़ियों को तैयार करना होगा और वो एक टीचर तैयार कर सकता है और ये उनके सिर्फ शब्‍द नहीं थे, उनके पूरे जीवन में ही नजर आता है।

राष्‍ट्रपति पद से मुक्‍ति के दूसरे दिन... ये छोटी बात नहीं है। इतने बड़े पद पर रहने के बाद कल क्‍या करूं, कल कैसा जाएगा, कल से कैसा होगा? आप सब को मालूम है जब अफसर retired होता है तो क्‍या हो जाता है। यानी आज कहां खड़ा है और दूसरे दिन वो अपने आपको कहां महसूस करता है, वो अपने आपको एक खालीपन महसूस करता है। एकदम से वो लगता है बस, अब जीवन का अंत शुरू हो गया है, ऐसा ही मान लेता है। दिमाग में retirement भर जाता है। कलाम साहब की विशेषता देखिए कि राष्‍ट्रपति पद, इतनी बड़ी ऊंचाई और निवृत्‍ति भी आदर्श और गौरव के साथ। दूसरे ही दिन जहाज पकड़ के चैन्‍नई जाना, चैन्‍नई में क्‍लासरूम में पढ़ाना शुरू करना। ये भीतर के commitment के बिना संभव नहीं होता है। एक व्‍यक्‍ति ने अपने जीवन में उसको inherent कर दिया होता है, तब होता है और जीवन का अंत भी देखिए। कहां रामेश्‍वरम्, कहां दिल्‍ली, कहां दुनिया में जय-जयकार और कहां नॉर्थ ईस्‍ट। किसी को कहा जाए कि नॉर्थ ईस्‍ट जाओ तो कहे अरे साहब, किसी और का भेज दो। ऐसा करो अगली बार मैं जाऊंगा इस बार जरा कोई और को। वहां पर इस उम्र में जाना और student के साथ अपने आखिरी पल बिताना। ये उनके भीतर का एक जो एक सातत्‍य था, एक commitment था, उसको प्रतिबिंबित करता है।

भारत शक्‍तिशाली हो, लेकिन सिर्फ शस्‍त्रों से शक्‍तिशाली हो ये कलाम साहब की सोच नहीं थी। शस्‍त्रों का सामर्थ्‍य आवश्‍यक है और उसमें कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए और उसमें उन्‍होंने जितना योगदान दे सकते थे, दिया। लेकिन वो इसे मानकर के चलते थे कि देश सरहदों से नहीं, देश कोटि-कोटि लोगों से पहचाना जाता है। देश की पहचान सीमाओं के आधार पर तय नहीं होती है। देश की ताकत उसके जन कैसे सामर्थ्‍यवान है, उस पर होती है और इसलिए कलाम साहब उन दोनों धाराओं को साथ लेकर के चलते थे कि एक तरफ innovation हो, research हो, रक्षा के क्षेत्र में भारत अपने पैरों पर खड़ा हो और Third World Countries, गरीब देशों का भी उपकारक हो, उस दिशा में भारत अपनी जगह बनाए और दूसरी तरफ भारत का मानव समुदाय संपन्‍न हो।

वे शिक्षा के बड़े आग्रही थे। वे हमेशा कहते थे, योग का महत्‍व समझाते थे और उसके साथ वो commitment भी था उनका। religion को spiritualism में convert करना चाहिए। spiritualism को प्राधान्‍य देना चाहिए। ये उनका conviction था। यानी, एक प्रकार से समाज जीवन में किन मूल्‍यों की आवश्‍यकता है, उन मूल्‍यों पर वो बल देते थे। शायद ये बड़ी हिम्‍मत का काम है, लेकिन वो करते थे। किसी भी समारोह में जाते थे और वहां student मिल गए तो फिर वो खिलते थे। उनका लगता था कि हां, एक ऐसे में बगीचे में आया हूं जहां ये फूल खिलने वाले हैं। उनको तुरंत feel होता था, एकदम से उनका natural connect होता था और ऐसे समारोह में वो बाद में संकल्‍प करवाते थे। एक-एक वाक्‍य बच्‍चों से बुलवाते थे। ये कठिन इसलिए है आज के जमाने में क्‍योंकि इस प्रकार की बात करो तो दूसरे दिन पता नहीं कितने-कितने विवाद खड़े हो जाते हो। लेकिन वे कभी इन चिंताओं में नहीं रहे। हर बार उस संकल्‍प को दोहराते रहे। क्‍या हम जब भी कलाम साहब को याद करेंगे, जहां भी कलाम साहब की चर्चा होगी, उन संकल्‍प के संबंध में, उसको लोगों में सार्वजनिक रूप से बार-बार कैसे लाए? उनका संकल्‍प था, जो हमें बताया जाता था, उसको चरितार्थ करना, ये हमारा दायित्‍व बनता है। उस दायित्‍व को पूरा करने के लिए हमारी नई पीढ़ी को हम कैसे तैयार करें? उस संकल्‍प को बार-बार दोहराते जाए कि ये परंपरा चलती रहे और चेतना जगाने का प्रयास निरंतर चलता रहे, उस दिशा में हम कैसे प्रयास करे।

आज विश्‍व में भारत अपना एक विशेष स्‍थान बनाता जा रहा है। दुनिया किसी जमाने में भारत को एक बड़े market के रूप में देखती थी। आज विश्‍व ने भारत को एक सहयात्री के रूप में देखना शुरू किया है। भारत की तरफ देखने का दुनिया का नजरिया बदला है। लेकिन आर्थिक संपन्‍नता ही या सिर्फ market ही हमें drive करेगा क्‍या?

आने वाले दिनों में हमारे पास innovation के लिए बहुत संभावनाएं हैं। Eight hundred million, Thirty Five से नीचे जनसंख्‍या जहां हो, 65 प्रतिशत जनसंख्‍या 35 से नीचे हो। आज IT के कारण दुनिया में हमने अपनी जगह बना दी उसका कारण innovation था। हम innovation को बल कैसे दें। हम कलाम साहब की हर जन्‍म जयंती पर DRDO में एक ऐसा seminar organize कर सकते हैं क्या? एक दिन, दो दिन, तीन दिन जो भी हो इसमें young scientist हो, innovation करने वाले लोग हो या जिनका scientific temper का spark जिसके अंदर हो, ऐसे बच्‍चे हो। कभी स्‍कूल के बच्‍चों का एक-आध दिन कार्यकाल हो, कभी innovation में लगे हुए 35 से नीचे young scientist. इनको बुला करके इन्‍हीं विषयों पर सेमीनार हमेशा-हमेशा, कलाम साहब को याद करना मतलब innovation को promote करना। यह हमें परंपरा बना सकती है। तो उनकी जन्‍म जयंती को बनाने में हम एक नई जिम्‍मेदारी की ओर भी समाज को लेते चले जाएंगे और वह उनके लिए सबसे बड़ा संतोष का विषय बन सकता है, ऐसा मुझे लगता है।

दुनिया में अब भारत को उस विषय पर सोचने की आवश्‍यकता है कि हम विश्‍व को क्‍या दे सकते हैं। हम क्‍या बन सकते हैं? क्‍या हो सकते हैं? या कोई हमारे लिए क्‍या कर सकता है? उससे थोड़ा ऊपर जा करके थोड़ा हट करके हमारी वो ऐसी कौन सी विरासत है, जो हम विश्‍व को दे सकते हैं। और जो विश्‍व सहज रूप से स्‍वीकार करेगा और जो विश्‍व के कल्‍याण के लिए काम आयेगा। हमने उन पहलुओं पर धीरे-धीरे अपने आप को तैयार करना चाहिए।

आज पूरा विश्‍व cyber crime को ले करके बड़ा परेशान है। क्‍या हमारे नौजवान वो innovation करे, जिसमें cyber security की गारंटी के लिए भारत की पहल हो। भारत एक ऐसी जगह हो जहां cyber security के लिए पूरी संभावनाएं है। जितनी सीमा सुरक्षा महत्‍व की बनी है, उतनी ही cyber की security महत्‍व पर बनी है। तभी भी विश्‍व बदलता चला जाता है, उसमें हम किस प्रकार से contribute कर सकते हैं? हमारी खोज, हमारे विज्ञान, हमारे संसाधन, common man की जिंदगी में बदलाव ला सकते हैं। quality of life में कोई change ला सकते हैं। भारत गरीब देश रहा है। हमारे यह सारे संसाधन, संशोधन यह सब कुछ गरीब की quality of life में बदलाव लाने के लिए हो सकता है। अब हमने 2022 तक हर गरीब को घर देने का सोचा है। अब उसमें हमें नई टेक्‍नोलॉजी, नई चीजें लानी पडेंगी। वो कौन से material से अच्‍छे मकान बन सकते हैं, वो नई खोज करनी पड़ेगी। वो कौन सी technique होगी कि जिसके कारण fastest मकान बना सकते हैं। वो कौन सी technique होगी जिससे हम low cost मकान बना सकते हैं। क्‍यों न हो? कलाम साहब चाहते थे देश के किसान का कल्‍याण करना है। देश के गरीब का कल्‍याण है, तो हमारी नदियों को जोड़ना। यह नदियों को जोड़ना सिर्फ परपरागत engineering work से होने वाला नहीं है। हमें innovation चाहिए, expertise चाहिए, space science की मदद चाहिए। इन सारी बातों को करके हम क्‍या लोगों की जिंदगी में बदलाव ला सकते हैं? यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी है, जिसमें हमें बदलाव लाना है।

आज भी दुनिया में प्रति हेक्‍टर जो crop है उसकी तुलना में हमारा बहुत कम है। आज दुनिया में प्रति cattle जितना milk मिलता है, उसकी तुलना में हमारा कम है। वो कौन से वैज्ञानिक तरीके हों, वो कौन सा वैज्ञानिक temper हो जो किसान के घर तक पहुंचे, पशुपालक के घर तक पहुंचे? ताकि उसकी जिंदगी में बदलाव आए। और इसलिए विज्ञान को हमने सामान्‍य मानव की जिंदगी में बदलाव लाने के लिए उस applicable science को कैसे लाया जाए? उस technology को कैसे हम innovate करें। यह ठीक है DRDO में जो लोग बैठे हैं उनका क्षेत्र अलग है। लेकिन उसके बावजूद भी, यह वो बिरादरी है, जिसका innovation, विज्ञान, खोज यह उसके सहज प्रकृति के हिस्‍से हैं। हम धीरे-धीरे उसको expand करते हुए, अब्‍दुल कलाम जी को याद करते हुए, हम देश को क्‍या दे सकते है? और यही ताकत दुनिया को देने की ताकत बन सक‍ती है।

और कभी-कभार हम पढ़ते है जब सुनते हैं कि भई, हमारे यहां किसान अन्‍न पैदा करता है, लेकिन काफी मात्रा में बर्बाद हो जाता है। क्‍या उपाय हो सकते हैं? हर प्रकार के उपाय हो सकते हैं। temporary भी क्‍यों न हो उसके रख-रखाव की व्‍यवस्‍था क्‍या हो सकती हैं? ऐसी बहुत सी चीजें हैं, जिसमें हमने हमारी परंपरा की पुरानी पद्धतियों में से प्रेरणा लेना, नई innovation करना और उसमें से नए equipment तैयार करना, व्‍यवस्‍थाएं खड़ी करना, जो विज्ञान के द्वारा समाज जीवन में परिवर्तन का एक कारण बन सकते हैं, सहारा बन सकते हैं।

विश्‍व जिस प्रकार से बदल रहा है, उसमें सामूहिक सुरक्षा एक बहुत बड़ा विषय बनता जा रहा है। Blue Economy की तरफ दुनिया बढ़ रही है। अब जब Blue Economy की तरफ बढ़ रही है, तब समुद्रिक जीवन में उसके साथ जुड़े हुए व्‍यापार से भी संबंध है, सामुद्रिक खोज एक बहुत बड़ा क्षेत्र अधूरा पड़ा है। संपदाओं का अपरंपार भंडार सामुद्रिक संपत्ति में पड़ा हुआ है। लेकिन at the same time मानव जात के सामने चुनौती है Blue Sky, Environment, Climate दुनिया में आज चिंता और चर्चा के विषय है। और इसलिए Blue Economy जो सामुद्रिक शक्ति की चिंता भी करें और Blue Sky बचा रहे हैं उसकी भी चिंता करे। उस प्रकार की technology का हमारा innovation कैसा है? हमारा manufacturing जब हम कहते हैं कि zero defect-zero effect. हम ग्‍लोबली जाना चाहते हैं कि हमारे innovation की स्थिति कैसे बने कि हमारे manufacture में कोई defect भी न हो और उसके कारण environment पर कोई effect भी न हो। जब हम इन चीजों को ले करके चलेंगे, मैं समझता हूं कि हमारे युवा वैज्ञानिकों के सामने चुनौतियां हैं। और देश के युवा वैज्ञानिक अब्‍दुल कलाम साहब ने जो हमें रास्‍ता दिखाया, अब्‍दुल कलाम साहब के जीवन की स्‍वयं की यात्रा तो सामान्‍य गरीब परिवार से निकले यहां तक पहुंचे, लेकिन वो जिस क्षेत्र में गए वहां भी वैसे ही हाल था। अभी हमने देखा रॉकेट का एक Part साइकिल पर ले जा रहे थे। यानी institute भी इतनी गरीब थी, इस गरीबी वाले institute से जुड़ करके इतनी बड़ी विशाल संस्‍था का निर्माण कर दिया। सिर्फ पूरा अपनी व्‍यक्ति का जीवन गरीब झोपड़ी से ले करके राष्‍ट्रपति भवन तक आए ऐसा नहीं, जहां गए वहां, जहां था उसको उत्‍तम और बड़ा बनाने का भरपूर सफल प्रयास किया। यह अपने आप में बहुत बड़ा योगदान है। और उस अर्थ में हम भी जहां हो वहां, नई ऊंचाईयों को पार करने वाली अवस्‍था कैसे पैदा कर सकते हैं। उसके लिए हम और योगदान क्‍या दे सकते हैं?

कलाम साहब का जीवन सदा-सर्वदा हमें प्रेरणा देता रहेगा। और हम सब अपने संकल्‍पों को पूरा करने के लिए जी जान से जुटेंगे। इसी एक अपेक्षा के साथ कलाम साहब को शत-शत वंदन करता हूं और उनका जीवन सदा-सर्वदा हमें प्रेरणा देता रहे इसी एक आशा-अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

ভারতীয় অলিম্পিয়ানদের উদ্বুদ্ধ করুন! #Cheers4India
Modi Govt's #7YearsOfSeva
Explore More
আমাদের ‘চলতা হ্যায়’ মানসিকতা ছেড়ে ‘বদল সাকতা হ্যায়’ চিন্তায় উদ্বুদ্ধ হতে হবে: প্রধানমন্ত্রী

জনপ্রিয় ভাষণ

আমাদের ‘চলতা হ্যায়’ মানসিকতা ছেড়ে ‘বদল সাকতা হ্যায়’ চিন্তায় উদ্বুদ্ধ হতে হবে: প্রধানমন্ত্রী
India's crude steel output up 21.4% at 9.4 MT in June: Worldsteel

Media Coverage

India's crude steel output up 21.4% at 9.4 MT in June: Worldsteel
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
সর্দার বল্লভভাই প্যাটেল জাতীয় পুলিশ অ্যাকাডেমিতে প্রবেশনরত আইপিএস আধিকারিকদের উদ্দেশে প্রধানমন্ত্রীর ভাষণ
July 31, 2021
শেয়ার
 
Comments
স্বাধীনতার ৭৫তম বর্ষে এই পেশায় প্রবেশ করতে পেরে আপনারা অত্যন্ত সৌভাগ্যবান, দেশ ও আপনার কাছে আগামী ২৫ বছর অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ : প্রধানমন্ত্রী
তাঁরা স্বারাজের জন্য লড়েছিলেন; আপনাদের সুরাজ্যের লক্ষ্যে অগ্রসর হতে হবে : প্রধানমন্ত্রী
প্রযুক্তিগত চ্যালেঞ্জের সময় পুলিশ কর্মীদের সর্বদাই প্রস্তুত থাকতে হবে : প্রধানমন্ত্রী
আপনারা এক ভারত – শ্রেষ্ঠ ভারতের পতাকাবাহক; ‘দেশ সর্বাগ্রে’ – এই মন্ত্র সর্বদাই স্মরণে রাখতে হবে : প্রধানমন্ত্রী
বন্ধু মনোভাবাপন্ন মানসিকতা রাখতে হবে এবং পুলিশ পোশাকের মার্যাদা সবার ওপরে রাখতে হবে : প্রধানমন্ত্রী
আমি নতুন প্রজন্মের মহিলা পুলিশ আধিকারিকদের এক উজ্জ্বল ভবিষ্যৎ দেখতে পাচ্ছি, পুলিশ বাহিনীতে মহিলাদের প্রতিনিধিত্ব বাড়াতে আমরা সচেষ্ট থেকেছি : প্রধানমন্ত্রী
মহামারীর সময় কর্তব্যরত অবস্থায় যাঁরা প্রাণ হারিয়েছেন, সেই সমস্ত পুলিশ বাহিনীর সদস্যদের প্রতি শ্রদ্ধা
প্রতিবেশী দেশগুলির শিক্ষানবিশ আধিকারিকদের প্রশিক্ষণের বিষয়টি আমাদের দেশের সঙ্গে সেই দেশের নিবিড়তা ও গভীর সম্পর্কের প্রতিফলন ঘটায় : প্রধানমন্ত্রী

আপনাদের সকলের সঙ্গে কথা বলে খুব ভালো লেগেছে। আমি প্রত্যেক বছর আপনাদের মতো যুব বন্ধুদের সঙ্গে কথা বলার চেষ্টা করি। এভাবে আপনাদের ভাবনা-চিন্তাগুলি জানতে থাকি, আপনাদের বক্তব্য, আপনাদের প্রশ্ন, আপনাদের উৎসাহ আমাকেও ভবিষ্যতের সমস্যাগুলির সমাধানে সাহায্য করে।
বন্ধুগণ,
এবার এই আলোচনা এমন সময়ে হচ্ছে যখন ভারত, দেশের স্বাধীনতার ৭৫ বছরের অমৃত মহোৎসব পালন করছে। এ বছরের ১৫ আগস্ট তারিখটি নিজের সঙ্গে স্বাধীনতার ৭৫তম বর্ষপূর্তি নিয়ে আসছে। বিগত ৭৫ বছরে ভারত একটি উন্নত পুলিশ সেবা গঠনের চেষ্টা করেছে। পুলিশ প্রশিক্ষণের সঙ্গে যুক্ত পরিকাঠামোতেও বিগত বছরগুলিতে অনেক সংস্কার হয়েছে। আজ যখন আমি আপনাদের সঙ্গে কথা বলছি, তখন সেই যুবক-যুবতীদের দেখতে পাচ্ছি যাঁরা আগামী ২৫ বছর ধরে ভারতে আইন ব্যবস্থা সুনিশ্চিত করতে সাহায্য করবেন। এটা অনেক বড় দায়িত্ব। সেজন্য এখন একটি নতুন সূত্রপাত, একটি নতুন সঙ্কল্পের ভাবনা নিয়ে এগিয়ে যেতে হবে।
বন্ধুগণ,
আমি খুব বেশি জানি না যে আপনাদের মধ্যে কতজন ডান্ডি গিয়েছেন অথবা কতজন সাবরমতী আশ্রম দেখেছেন। কিন্তু আমি আপনাদের ১৯৩০-এর ডান্ডি অভিযানের কথা মনে করাতে চাই। গান্ধীজি লবণ সত্যাগ্রহের জোরে ব্রিটিশ সাম্রাজ্যের ভিত নাড়িয়ে দেওয়ার কথা বলেছিলেন। তিনি একথাও বলেছিলেন যে, “যখন উদ্যোগ ন্যায়সঙ্গত এবং সঠিক হয় তখন ভগবানও সঙ্গ দেওয়ার জন্য উপস্থিত হয়ে যান।”

 

 

বন্ধুগণ,
একটি ছোট দলকে সঙ্গে নিয়ে তিনি সাবরমতী আশ্রম থেকে বেরিয়ে পড়েছিলেন। এক একটি দিন পেরিয়ে গেছে, পথে যেখানে যত মানুষ ছিলেন তাঁরা লবণ সত্যাগ্রহের সঙ্গে যুক্ত হতে থাকেন। ২৪ দিন পর যখন গান্ধীজি ডান্ডিতে তাঁর যাত্রা সম্পূর্ণ করেন, তখন গোটা দেশ যেন উঠে দাঁড়িয়ে পড়েছিল। কাশ্মীর থেকে কন্যাকুমারী, অটক থেকে কটক – গোটা ভারত উদ্বুদ্ধ হয়ে উঠেছিল। সেই মনোভাবের কথা ভাবুন! সেই ইচ্ছাশক্তির কথা ভাবুন! সেই তীব্র স্পৃহা, সেই ঐক্যবদ্ধতা, ভারতের স্বাধীনতার যুদ্ধকে সামগ্রিকতার শক্তি দিয়ে ভরিয়ে দিয়েছিল। পরিবর্তনের সেই স্পৃহা, সঙ্কল্পের সেই ইচ্ছাশক্তি আজ দেশ আপনাদের মতো নবীনদের থেকে প্রত্যাশা করছে। ১৯৩০ থেকে ১৯৪৭-এর মাঝে দেশে যে জোয়ার এসেছিল, যেভাবে দেশের নবীনরা এগিয়ে এসেছিলেন, একটি লক্ষ্যের জন্য একজোট হয়ে সম্পূর্ণ যুব প্রজন্ম লেগে পড়েছিল, আজ সেই মনোভাব আপনাদের মনে জাগাতে হবে। তখন দেশের মানুষ স্বরাজ-এর জন্য লড়েছিলেন আর আজ আপনাদের সুশাসনের জন্য এগিয়ে যেতে হবে। সেই সময় মানুষ দেশের স্বাধীনতার জন্য আত্মোৎসর্গ করতে তৈরি ছিলেন। আজ আপনাদের দেশের জন্য বাঁচার মনোভাব নিয়ে এগোতে হবে। ২৫ বছর পর যখন ভারতের স্বাধীনতার ১০০ বছর পূর্ণ হবে তখন আমাদের পুলিশ সেবা কেমন হবে, কতটা মজবুত হবে, তা আপনাদের আজকের কাজে ওপর নির্ভর করবে। আপনাদের সেই ভিত্তি গড়ে তুলতে হবে যার ওপর ২০৪৭-এর সুন্দর, অনুশাসিত ভারতের ইমারত নির্মিত হবে। সময়ই এই সঙ্কল্পের সিদ্ধির জন্য আপনাদের মতো নবীনদের বেছে নিয়েছে আর আমি একে আপনাদের সকলের খুব বড় সৌভাগ্য বলে মনে করি। আপনারা একটি এমন সময়ে কেরিয়ার শুরু করছেন যখন ভারত প্রত্যেক ক্ষেত্র, প্রত্যেক স্তরে ট্রান্সফরমেশনের প্রক্রিয়ার মধ্যে দিয়ে যাচ্ছে। আপনাদের কেরিয়ারের আগামী ২৫ বছর ভারতের বিকাশের ক্ষেত্রেও সবচাইতে গুরুত্বপূর্ণ ২৫ বছর হতে চলেছে। সেজন্য আপনাদের প্রস্তুতি, আপনাদের মনোভাব এই বড় লক্ষ্যের অনুকূল হতে হবে। আগামী ২৫ বছর আপনারা দেশের ভিন্ন ভিন্ন অংশে বিভিন্ন পদে কাজ করবেন, ভিন্ন ভিন্ন ভূমিকা পালন করবেন। আপনাদের সবার ওপরে আধুনিক, কার্যকর এবং সংবেদনশীল পুলিশ সেবা গড়ে তোলার অনেক বড় দায়িত্ব বর্তেছে। আর সেজন্য আপনাদের সর্বদা একথা মনে রাখতে হবে যে, আপনারা ২৫ বছরের একটি বিশেষ মিশনে রয়েছেন আর ভারত এজন্য আপনাদের বিশেষভাবে বেছে নিয়েছে।
বন্ধুগণ,
গোটা বিশ্বের অভিজ্ঞতা বলে যে,যখন কোনও দেশ উন্নয়নের পথে এগিয়ে যায়, তখন দেশের বাইরে আর ভেতরে সমস্যাও ততটাই বৃদ্ধি পায়। এই প্রেক্ষিতে আপনাদের চ্যালেঞ্জ, টেকনলজিক্যাল ডিসরাপশন এই প্রক্রিয়ায় পুলিশি ব্যবস্থাকে নিরন্তর গড়ে তোলার। আপনাদের চ্যালেঞ্জ, অপরাধের নতুন সব পদ্ধতিকে অপরাধীদের থেকেও বেশি উদ্ভাবক পদ্ধতিকে থামানো। বিশেষরূপে সাইবার সিকিউরিটি নিয়ে নতুন পরীক্ষা-নিরীক্ষা, নতুন গবেষণা আর নতুন সব পদ্ধতি আপনাদের ডেভেলপও করতে হবে আর সেগুলিকে প্রয়োগও করতে হবে।

 

বন্ধুগণ,
দেশের সংবিধান, দেশের গণতন্ত্র যেসব অধিকার দেশবাসীকে দিয়েছে, যে কর্তব্যগুলি পালনের প্রত্যাশা করেছে, সেগুলি সুনিশ্চিত করতে আপনাদের ভূমিকা গুরুত্বপূর্ণ। সেজন্য আপনাদের থেকে অনেক প্রত্যাশা থাকে, আপনাদের আচার-আচরণের দিকে সবসময় লক্ষ্য থাকে। আপনাদের ওপর চাপও অনেক আসবে। আপনাদের শুধু পুলিশ থানা নিয়ে, পুলিশ হেডকোর্য়ার্টারের সীমার মধ্যেই ভাবলে চলবে না। আপনাদের সমাজে প্রত্যেক ভূমিকার সঙ্গে পরিচিতও থাকতে হবে, ফ্রেন্ডলিও থাকতে হবে আর ইউনিফর্মের মর্যাদাকে সবসময় সবার ওপরে রাখতে হবে। ফিল্ডে থেকে আপনারা যে সিদ্ধান্তই নেবেন তাতে দেশহিত থাকতে হবে, জাতীয় প্রেক্ষাপট থাকতে হবে। আপনাদের কাজের পরিধি আর সমস্যাগুলি অধিকাংশই স্থানীয় হবে। সেগুলি সমাধানের ক্ষেত্রে এই মন্ত্র অনেক কাজে লাগবে। আপনাদের সর্বদাই এটা মনে রাখতে হবে যে, আপনারা ‘এক ভারত শ্রেষ্ঠ ভারত’-এরই পতাকাবাহক। সেজন্য, আপনাদের প্রতিটি পদক্ষেপ, আপনাদের প্রত্যেক গতিবিধিতে ‘নেশন ফার্স্ট, অলওয়েজ ফার্স্ট’, দেশ আগে, সবার আগে – এই ভাবনার প্রতিফলন থাকতে হবে।
বন্ধুগণ,
আমার সামনে তেজস্বী মহিলা অফিসারদের নতুন প্রজন্মকেও দেখছি। বিগত বছরগুলিতে পুলিশবাহিনীতে মহিলাদের অংশীদারিত্ব বৃদ্ধির নিরন্তর প্রচেষ্টা করা হচ্ছে। আমাদের মেয়েরা পুলিশ সেবায় এফিশিয়েন্সি এবং অ্যাকাউন্টেবিলিটির পাশাপাশি বিনম্রতা, সারল্য এবং সংবেদনশীলতার মূল্যগুলিকেও মজবুত করবেন। এভাবে ১০ লক্ষেরও বেশি জনসংখ্যা-সম্পন্ন শহরগুলিতে কমিশনার ব্যবস্থা বাস্তবায়ন নিয়েও রাজ্যগুলি কাজ করছে। এখন পর্যন্ত ১৬টি রাজ্যের অনেক শহরে এই ব্যবস্থা বাস্তবায়িত করা হয়েছে। আমার বিশ্বাস, বাকি রাজ্যগুলিতে এই বিষয়ে ইতিবাচক পদক্ষেপ নেওয়া হবে।
বন্ধুগণ,
পুলিশি ব্যবস্থাকে ভবিষ্যতমুখী এবং কার্যকর করার ক্ষেত্রে সামগ্রিকতা আর সংবেদনশীলতার সঙ্গে কাজ করতে হবে। এই করোনার সঙ্কটকালেও আমরা দেখেছি, পুলিশ-বন্ধুরা কিভাবে পরিস্থিতি সামলাতে অনেক বড় ভূমিকা পালন করেছেন। করোনার বিরুদ্ধে লড়াইয়ে আমাদের পুলিশকর্মীরা দেশবাসীর সঙ্গে কাঁধে কাঁধ মিলিয়ে কাজ করেছেন। এই প্রচেষ্টায় অনেক পুলিশকর্মীকে আত্মাহুতি দিতে হয়েছে। আমি তাঁদের শ্রদ্ধাঞ্জলি জানাই আর দেশের পক্ষ থেকে তাঁদের পরিবারের প্রতি সমবেদনা জানাই।

 

বন্ধুগণ,
আজ আপনাদের সঙ্গে কথা বলতে গিয়ে আমি আরেকটি বিষয় আপনাদের সঙ্গে রাখতে চাই। আজকাল আমরা দেখছি, যেখানে যেখানে প্রাকৃতিক বিপর্যয় আসে, কোথাও বন্যা, কোথাও ঘূর্ণিঝড়, কোথাও ধ্বস, তো আমাদের এনডিআরএফ-এর বন্ধুদের সম্পূর্ণ প্রস্তুতি নিয়ে সেখানে থাকতে দেখা যায়। বিপর্যয়ের সময়ে এনডিআরএফ-এর নাম শুনলেই মানুষের মনে একটি আস্থা জাগে। এই আস্থা এনডিআরএফ তাঁদের অসাধারণ সেবার মাধ্যমে গড়ে তুলেছে। আজ মানুষের মনে এই ভরসা রয়েছে যে বিপর্যয়ের সময়ে এনডিআরএফ-এর জওয়ানরা নিজেদের জীবন বাজি রেখেও আমাদের বাঁচাবেন। এই এনডিআরএফ-এও তো অধিকাংশ পুলিশকর্মীরাই থাকেন। কিন্তু একই ধরনের ভাবনা, এই সম্মান কি সমাজে পুলিশের জন্য আছে?
কেন নেই?
এর উত্তর আপনারাও জানেন। জনমানসে এই যে পুলিশের নেতিবাচক ভাবমূর্তি গড়ে উঠেছে, এটা অনেক বড় চ্যালেঞ্জ। করোনাকালের গোড়ার দিকে অনুভব করা গিয়েছিল যে এই ভাবমূর্তি সামান্য বদলেছে। কিন্তু এখন আবার যে কে সেই পুরনো অবস্থায় পৌঁছে গেছে। আসলে জনগণের বিশ্বাস কেন বাড়ে না, আস্থা কেন বাড়ছে না?
বন্ধুগণ,
দেশের নিরাপত্তার জন্য, আইন ব্যবস্থা বজায় রাখার জন্য সন্ত্রাস মেটাতে আমাদের পুলিশ-বন্ধুরা তাঁদের জীবন উৎসর্গ করে দেন। অনেকদিন আপনারা বাড়িতে ফিরতে পারেন না, উৎসবেও প্রায়ই আপনাদের পরিবার থেকে দূরে থাকতে হয়। কিন্তু যখন পুলিশের ভাবমূর্তির প্রসঙ্গ আসে, তখন মানুষের মনোভাব বদলে যায়। পুলিশে যোগদান করা নতুন প্রজন্মের মানুষদের এটা দায়িত্ব; এই ভাবমূর্তি বদলানো। পুলিশের এই নেতিবাচক ভাবমূর্তির অবসান করা। এটা আপনাদেরকেই করতে হবে। আপনাদের প্রশিক্ষণ, আপনাদের ভাবনার মাঝে অনেক বছর ধরে চলতে থাকা পুলিশ বিভাগের যে প্রচলিত পরম্পরা রয়েছে, সেগুলির সঙ্গে আপনারা প্রতিদিন মুখোমুখি হবেন। ব্যবস্থা আপনাদের বদলে দেবে নাকি আপনারা ব্যবস্থাকে বদলাবেন, সেটা আপনাদের প্রশিক্ষণ, আপনাদের ইচ্ছাশক্তি আর আপনাদের মনোবলের ওপর নির্ভর করবে। এটা একভাবে আপনাদের আরেকটি পরীক্ষার মতো হবে আর আমার ভরসা আছে আপনারা এতেও সফল হবেন, অবশ্যই সফল হবেন।
বন্ধুগণ,
এখানে যে আমাদের প্রতিবেশী দেশগুলির নবীন অফিসাররা রয়েছেন, তাঁদেরকেও আমি অনেক শুভকামনা জানাতে চাইব। ভুটান হোক, নেপাল হোক, মালদ্বীপ হোক, মরিশাস হোক – আমরা সবাই নিছকই প্রতিবেশী নই, বরং আমাদের ভাবনা আর সামাজিক আচার-ব্যবহারেও সামঞ্জস্য রয়েছে। আমরা সবাই সুখ-দুঃখের সঙ্গী। যখনই কোনও বিপর্যয় আসে, বিপত্তি আসে, তখন সবার আগে আমরাই পরস্পরকে সাহায্য করি। করোনাকালেও আমরা এটা অনুভব করেছি। সেজন্য আগামী বছরগুলিতে সম্ভাব্য উন্নয়নের ক্ষেত্রেও আমাদের বোঝাপড়া নিশ্চিতভাবেই বাড়বে। বিশেষ করে আজ যখন ক্রাইম এবং ক্রিমিনাল সীমার বাঁধন মানে না, এক্ষেত্রে পারস্পরিক বোঝাপড়ার আরও বেশি প্রয়োজন। আমার বিশ্বাস, এই সর্দার প্যাটেল অ্যাকাডেমিতে কাটানো আপনাদের এই দিনগুলি আপনাদের কেরিয়ার, আপনাদের জাতীয় এবং সামাজিক দায়বদ্ধতা আর ভারতের সঙ্গে বন্ধুত্ব প্রগাঢ় করতে সহায়ক হবে।
আরেকবার আপনাদের সবাইকে অনেক অনেক শুভকামনা! ধন্যবাদ!