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PM Modi pays tribute to former President Dr. APJ Abdul Kalam
Dr. APJ Abdul Kalam was a "Rashtra-Ratna" before a "Rashtrapati": PM Modi
GoI to build a memorial for Dr. Kalam at Rameswaram, Tamil Nadu: PM
Dr. Kalam always sought fresh challenges to overcome in life, says PM Modi
Dr. Kalam always wanted to be remembered as a teacher: PM Narendra Modi
Dr. Kalam worked for the welfare of poor & farmers: PM Modi
On the birth anniversary of Dr. Kalam, we must explore how we can encourage innovation in India: PM
Dr. Kalam's life continues to be an inspiration for all of us: PM
PM Narendra Modi unveils a statue of Dr. APJ Abdul Kalam at DRDO Bhavan in New Delhi
Prime Minister Modi releases commemorative postal stamp on Dr. Kalam

 

आज 15 अक्‍तूबर, श्रीमान अब्‍दुल कलाम जी की जन्‍म जयंती पर आप सब इकट्ठे हुए है। आज DRDO के परिसर में उनकी एक प्रतिमा का अनावरण करने का मुझे सौभाग्‍य मिला। यह बात सही है कि कलाम साहब का जीवन इतना व्‍यापक, विशाल और गहरा रहा है कि उनको याद करने का गर्व होता है, लेकिन साथ में एक कसक भी रहती है कि काश! वो हमारे साथ होते तो। तो ये जो कमी महसूस होती है, इसको कैसे भरना है, ये हम सब के लिए एक चुनौती है और मुझे विश्‍वास है कि अब्‍दुल कलाम जी के आशीर्वाद से उन्‍होंने हम देशवासियों को जो शिक्षा-दीक्षा दी है, उससे हम अवश्‍य उसको पूरा करने का भरपूर प्रयास करेंगे और वही उनको सबसे बड़ी अंजलि होगी।

वे राष्‍ट्रपति बने, मैं समझता हूं कि उससे पहले वे राष्‍ट्र रत्‍न थे। ऐसा बहुत कम होता है कि एक व्‍यक्‍ति पहले राष्‍ट्र रत्‍न बने और बाद में राष्‍ट्रपति पद को स्‍वीकार करे और वह उनके जीवन की ऊंचाइयों से जुड़ा हुआ था। भारत सरकार ने तय किया है कि जहां पर उनका जन्‍म हुआ और जहां पर उनकी अंत्‍येष्‍टि हुई, उस गांव में एक आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा दे, ऐसा स्‍मारक बनाया जाएगा। सरकार ने already वो जमीन acquire कर ली है। मैंने मंत्रियों की एक कमेटी भी बनाई है जो आने वाले दिनों में इसका आखिरी रूप तय करके, ऐसा कैसा स्‍मारक हो जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहे और कलाम साहब का जीवन हमेशा-हमेशा हम सबके लिए मार्गदर्शक बनता रहे।



दो बातें जो कलाम साहब की स्‍वाभाविक नजर आती हैं – एक तो उनके बाल। दूर से भी किसी को पता चलता है कि अब्‍दुल कलाम जी जा रहे हैं। और कुछ न बनाया हो, सिर्फ उनके बालों को किसी ने पेंट किया तो कह देगा कि हां, बाकी चेहरा कलाम साहब का होगा। लेकिन साथ-साथ एक और भी बात थी। जैसे उनके बाल थे, वैसा उनके भीतर एक बालक था। तो उनके बाल और उनके भीतर का बालक, ये दोनों, मैं समझता हूं हमेशा-हमेशा जो उनके निकट गए हैं उनको याद रहता है। इतनी सहजता, इतनी सरलता।

आमतौर पर वैज्ञानिकों के विषय में एक सोच ऐसी रहती है कि वो बड़े गंभीर चेहरा, उदासीन, Lab में ही डूबे रहने वाले, साल में कितनी बार मुस्‍कुराए वो भी शायद हिसाब लगाना पड़े। लेकिन कलाम साहब, हर पल एक बड़े जीवंत व्‍यक्‍तिव नज़र आता था। मुस्‍कुराते रहना, दौड़ते रहना और। दो प्रकार के लोग होते हैं, एक वो होते हैं जो Opportunity खोजते हैं, एक वो होते हैं जो Challenge खोजते हैं। कलाम साहब Challenges की तलाश में रहते थे। कौन-से नए Challenge है? उस Challenge को कैसे उठा ले और उस Challenge को पार कैसे करे और यही उनके हर पल जीवन में रहता था। आखिर तक!

जब भी मेरा बहुत निकट संबंध रहा क्‍योंकि जब मैं मुख्‍यमंत्री था तब भी उनका गुजरात बार-बार आना होता था। अहमदाबाद से उनका विशेष लगाव था क्‍योंकि उनके career की पहली शुरूआत उन्‍होंने अहमदाबाद में शुरू की थी और विक्रम साराभाई के साथ उन्‍होंने काम किया। तो उसके कारण उनका लगाव भी गुजरात के साथ बहुत था। तो मेरा भी उस समय उनसे संबंध बहुत रहता था। कच्‍छ का भूकंप हो या आपत्‍ति की इतनी बड़ी घटना हो, वो आना, छोटी-छोटी चीजों में guide करना और उस समय भूकंप की परिस्‍थिति के पुनरनिर्माण के काम में विज्ञान और technology का सहारा कैसे लिया जाए ताकि relief तेज गति से हो, rehabilitation तेज गति से हो, reconstruction तेज गति से हो, ऐसी हर बारीक चीज में वो मार्गदर्शन करते थे वो सहायता करते थे।

जीवन भर उनकी एक विशेषता रही है और किसी ने उनको पूछा था कि आपको कैसे याद रखा जाए और उन्‍होंने जवाब में कहा था कि मुझे शिक्षक के रूप में याद रखा जाए। ये शिक्षक का तो सम्‍मान है लेकिन साथ-साथ उनके जीवन का conviction क्‍या था, commitment क्‍या था, उसका भी परिचायक था। उनको लगता है कि भई 5-50 व्‍यक्‍तियों का समूह जरूर कुछ कर दिखा सकता है। लेकिन भारत जैसे देश ने पीढ़ियों तक आगे बढ़ने के लिए, प्रभाव पैदा करने के लिए तेज गति से चलना है तो आने वाली पीढ़ियों को तैयार करना होगा और वो एक टीचर तैयार कर सकता है और ये उनके सिर्फ शब्‍द नहीं थे, उनके पूरे जीवन में ही नजर आता है।

राष्‍ट्रपति पद से मुक्‍ति के दूसरे दिन... ये छोटी बात नहीं है। इतने बड़े पद पर रहने के बाद कल क्‍या करूं, कल कैसा जाएगा, कल से कैसा होगा? आप सब को मालूम है जब अफसर retired होता है तो क्‍या हो जाता है। यानी आज कहां खड़ा है और दूसरे दिन वो अपने आपको कहां महसूस करता है, वो अपने आपको एक खालीपन महसूस करता है। एकदम से वो लगता है बस, अब जीवन का अंत शुरू हो गया है, ऐसा ही मान लेता है। दिमाग में retirement भर जाता है। कलाम साहब की विशेषता देखिए कि राष्‍ट्रपति पद, इतनी बड़ी ऊंचाई और निवृत्‍ति भी आदर्श और गौरव के साथ। दूसरे ही दिन जहाज पकड़ के चैन्‍नई जाना, चैन्‍नई में क्‍लासरूम में पढ़ाना शुरू करना। ये भीतर के commitment के बिना संभव नहीं होता है। एक व्‍यक्‍ति ने अपने जीवन में उसको inherent कर दिया होता है, तब होता है और जीवन का अंत भी देखिए। कहां रामेश्‍वरम्, कहां दिल्‍ली, कहां दुनिया में जय-जयकार और कहां नॉर्थ ईस्‍ट। किसी को कहा जाए कि नॉर्थ ईस्‍ट जाओ तो कहे अरे साहब, किसी और का भेज दो। ऐसा करो अगली बार मैं जाऊंगा इस बार जरा कोई और को। वहां पर इस उम्र में जाना और student के साथ अपने आखिरी पल बिताना। ये उनके भीतर का एक जो एक सातत्‍य था, एक commitment था, उसको प्रतिबिंबित करता है।

भारत शक्‍तिशाली हो, लेकिन सिर्फ शस्‍त्रों से शक्‍तिशाली हो ये कलाम साहब की सोच नहीं थी। शस्‍त्रों का सामर्थ्‍य आवश्‍यक है और उसमें कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए और उसमें उन्‍होंने जितना योगदान दे सकते थे, दिया। लेकिन वो इसे मानकर के चलते थे कि देश सरहदों से नहीं, देश कोटि-कोटि लोगों से पहचाना जाता है। देश की पहचान सीमाओं के आधार पर तय नहीं होती है। देश की ताकत उसके जन कैसे सामर्थ्‍यवान है, उस पर होती है और इसलिए कलाम साहब उन दोनों धाराओं को साथ लेकर के चलते थे कि एक तरफ innovation हो, research हो, रक्षा के क्षेत्र में भारत अपने पैरों पर खड़ा हो और Third World Countries, गरीब देशों का भी उपकारक हो, उस दिशा में भारत अपनी जगह बनाए और दूसरी तरफ भारत का मानव समुदाय संपन्‍न हो।

वे शिक्षा के बड़े आग्रही थे। वे हमेशा कहते थे, योग का महत्‍व समझाते थे और उसके साथ वो commitment भी था उनका। religion को spiritualism में convert करना चाहिए। spiritualism को प्राधान्‍य देना चाहिए। ये उनका conviction था। यानी, एक प्रकार से समाज जीवन में किन मूल्‍यों की आवश्‍यकता है, उन मूल्‍यों पर वो बल देते थे। शायद ये बड़ी हिम्‍मत का काम है, लेकिन वो करते थे। किसी भी समारोह में जाते थे और वहां student मिल गए तो फिर वो खिलते थे। उनका लगता था कि हां, एक ऐसे में बगीचे में आया हूं जहां ये फूल खिलने वाले हैं। उनको तुरंत feel होता था, एकदम से उनका natural connect होता था और ऐसे समारोह में वो बाद में संकल्‍प करवाते थे। एक-एक वाक्‍य बच्‍चों से बुलवाते थे। ये कठिन इसलिए है आज के जमाने में क्‍योंकि इस प्रकार की बात करो तो दूसरे दिन पता नहीं कितने-कितने विवाद खड़े हो जाते हो। लेकिन वे कभी इन चिंताओं में नहीं रहे। हर बार उस संकल्‍प को दोहराते रहे। क्‍या हम जब भी कलाम साहब को याद करेंगे, जहां भी कलाम साहब की चर्चा होगी, उन संकल्‍प के संबंध में, उसको लोगों में सार्वजनिक रूप से बार-बार कैसे लाए? उनका संकल्‍प था, जो हमें बताया जाता था, उसको चरितार्थ करना, ये हमारा दायित्‍व बनता है। उस दायित्‍व को पूरा करने के लिए हमारी नई पीढ़ी को हम कैसे तैयार करें? उस संकल्‍प को बार-बार दोहराते जाए कि ये परंपरा चलती रहे और चेतना जगाने का प्रयास निरंतर चलता रहे, उस दिशा में हम कैसे प्रयास करे।

आज विश्‍व में भारत अपना एक विशेष स्‍थान बनाता जा रहा है। दुनिया किसी जमाने में भारत को एक बड़े market के रूप में देखती थी। आज विश्‍व ने भारत को एक सहयात्री के रूप में देखना शुरू किया है। भारत की तरफ देखने का दुनिया का नजरिया बदला है। लेकिन आर्थिक संपन्‍नता ही या सिर्फ market ही हमें drive करेगा क्‍या?

आने वाले दिनों में हमारे पास innovation के लिए बहुत संभावनाएं हैं। Eight hundred million, Thirty Five से नीचे जनसंख्‍या जहां हो, 65 प्रतिशत जनसंख्‍या 35 से नीचे हो। आज IT के कारण दुनिया में हमने अपनी जगह बना दी उसका कारण innovation था। हम innovation को बल कैसे दें। हम कलाम साहब की हर जन्‍म जयंती पर DRDO में एक ऐसा seminar organize कर सकते हैं क्या? एक दिन, दो दिन, तीन दिन जो भी हो इसमें young scientist हो, innovation करने वाले लोग हो या जिनका scientific temper का spark जिसके अंदर हो, ऐसे बच्‍चे हो। कभी स्‍कूल के बच्‍चों का एक-आध दिन कार्यकाल हो, कभी innovation में लगे हुए 35 से नीचे young scientist. इनको बुला करके इन्‍हीं विषयों पर सेमीनार हमेशा-हमेशा, कलाम साहब को याद करना मतलब innovation को promote करना। यह हमें परंपरा बना सकती है। तो उनकी जन्‍म जयंती को बनाने में हम एक नई जिम्‍मेदारी की ओर भी समाज को लेते चले जाएंगे और वह उनके लिए सबसे बड़ा संतोष का विषय बन सकता है, ऐसा मुझे लगता है।

दुनिया में अब भारत को उस विषय पर सोचने की आवश्‍यकता है कि हम विश्‍व को क्‍या दे सकते हैं। हम क्‍या बन सकते हैं? क्‍या हो सकते हैं? या कोई हमारे लिए क्‍या कर सकता है? उससे थोड़ा ऊपर जा करके थोड़ा हट करके हमारी वो ऐसी कौन सी विरासत है, जो हम विश्‍व को दे सकते हैं। और जो विश्‍व सहज रूप से स्‍वीकार करेगा और जो विश्‍व के कल्‍याण के लिए काम आयेगा। हमने उन पहलुओं पर धीरे-धीरे अपने आप को तैयार करना चाहिए।

आज पूरा विश्‍व cyber crime को ले करके बड़ा परेशान है। क्‍या हमारे नौजवान वो innovation करे, जिसमें cyber security की गारंटी के लिए भारत की पहल हो। भारत एक ऐसी जगह हो जहां cyber security के लिए पूरी संभावनाएं है। जितनी सीमा सुरक्षा महत्‍व की बनी है, उतनी ही cyber की security महत्‍व पर बनी है। तभी भी विश्‍व बदलता चला जाता है, उसमें हम किस प्रकार से contribute कर सकते हैं? हमारी खोज, हमारे विज्ञान, हमारे संसाधन, common man की जिंदगी में बदलाव ला सकते हैं। quality of life में कोई change ला सकते हैं। भारत गरीब देश रहा है। हमारे यह सारे संसाधन, संशोधन यह सब कुछ गरीब की quality of life में बदलाव लाने के लिए हो सकता है। अब हमने 2022 तक हर गरीब को घर देने का सोचा है। अब उसमें हमें नई टेक्‍नोलॉजी, नई चीजें लानी पडेंगी। वो कौन से material से अच्‍छे मकान बन सकते हैं, वो नई खोज करनी पड़ेगी। वो कौन सी technique होगी कि जिसके कारण fastest मकान बना सकते हैं। वो कौन सी technique होगी जिससे हम low cost मकान बना सकते हैं। क्‍यों न हो? कलाम साहब चाहते थे देश के किसान का कल्‍याण करना है। देश के गरीब का कल्‍याण है, तो हमारी नदियों को जोड़ना। यह नदियों को जोड़ना सिर्फ परपरागत engineering work से होने वाला नहीं है। हमें innovation चाहिए, expertise चाहिए, space science की मदद चाहिए। इन सारी बातों को करके हम क्‍या लोगों की जिंदगी में बदलाव ला सकते हैं? यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी है, जिसमें हमें बदलाव लाना है।

आज भी दुनिया में प्रति हेक्‍टर जो crop है उसकी तुलना में हमारा बहुत कम है। आज दुनिया में प्रति cattle जितना milk मिलता है, उसकी तुलना में हमारा कम है। वो कौन से वैज्ञानिक तरीके हों, वो कौन सा वैज्ञानिक temper हो जो किसान के घर तक पहुंचे, पशुपालक के घर तक पहुंचे? ताकि उसकी जिंदगी में बदलाव आए। और इसलिए विज्ञान को हमने सामान्‍य मानव की जिंदगी में बदलाव लाने के लिए उस applicable science को कैसे लाया जाए? उस technology को कैसे हम innovate करें। यह ठीक है DRDO में जो लोग बैठे हैं उनका क्षेत्र अलग है। लेकिन उसके बावजूद भी, यह वो बिरादरी है, जिसका innovation, विज्ञान, खोज यह उसके सहज प्रकृति के हिस्‍से हैं। हम धीरे-धीरे उसको expand करते हुए, अब्‍दुल कलाम जी को याद करते हुए, हम देश को क्‍या दे सकते है? और यही ताकत दुनिया को देने की ताकत बन सक‍ती है।

और कभी-कभार हम पढ़ते है जब सुनते हैं कि भई, हमारे यहां किसान अन्‍न पैदा करता है, लेकिन काफी मात्रा में बर्बाद हो जाता है। क्‍या उपाय हो सकते हैं? हर प्रकार के उपाय हो सकते हैं। temporary भी क्‍यों न हो उसके रख-रखाव की व्‍यवस्‍था क्‍या हो सकती हैं? ऐसी बहुत सी चीजें हैं, जिसमें हमने हमारी परंपरा की पुरानी पद्धतियों में से प्रेरणा लेना, नई innovation करना और उसमें से नए equipment तैयार करना, व्‍यवस्‍थाएं खड़ी करना, जो विज्ञान के द्वारा समाज जीवन में परिवर्तन का एक कारण बन सकते हैं, सहारा बन सकते हैं।

विश्‍व जिस प्रकार से बदल रहा है, उसमें सामूहिक सुरक्षा एक बहुत बड़ा विषय बनता जा रहा है। Blue Economy की तरफ दुनिया बढ़ रही है। अब जब Blue Economy की तरफ बढ़ रही है, तब समुद्रिक जीवन में उसके साथ जुड़े हुए व्‍यापार से भी संबंध है, सामुद्रिक खोज एक बहुत बड़ा क्षेत्र अधूरा पड़ा है। संपदाओं का अपरंपार भंडार सामुद्रिक संपत्ति में पड़ा हुआ है। लेकिन at the same time मानव जात के सामने चुनौती है Blue Sky, Environment, Climate दुनिया में आज चिंता और चर्चा के विषय है। और इसलिए Blue Economy जो सामुद्रिक शक्ति की चिंता भी करें और Blue Sky बचा रहे हैं उसकी भी चिंता करे। उस प्रकार की technology का हमारा innovation कैसा है? हमारा manufacturing जब हम कहते हैं कि zero defect-zero effect. हम ग्‍लोबली जाना चाहते हैं कि हमारे innovation की स्थिति कैसे बने कि हमारे manufacture में कोई defect भी न हो और उसके कारण environment पर कोई effect भी न हो। जब हम इन चीजों को ले करके चलेंगे, मैं समझता हूं कि हमारे युवा वैज्ञानिकों के सामने चुनौतियां हैं। और देश के युवा वैज्ञानिक अब्‍दुल कलाम साहब ने जो हमें रास्‍ता दिखाया, अब्‍दुल कलाम साहब के जीवन की स्‍वयं की यात्रा तो सामान्‍य गरीब परिवार से निकले यहां तक पहुंचे, लेकिन वो जिस क्षेत्र में गए वहां भी वैसे ही हाल था। अभी हमने देखा रॉकेट का एक Part साइकिल पर ले जा रहे थे। यानी institute भी इतनी गरीब थी, इस गरीबी वाले institute से जुड़ करके इतनी बड़ी विशाल संस्‍था का निर्माण कर दिया। सिर्फ पूरा अपनी व्‍यक्ति का जीवन गरीब झोपड़ी से ले करके राष्‍ट्रपति भवन तक आए ऐसा नहीं, जहां गए वहां, जहां था उसको उत्‍तम और बड़ा बनाने का भरपूर सफल प्रयास किया। यह अपने आप में बहुत बड़ा योगदान है। और उस अर्थ में हम भी जहां हो वहां, नई ऊंचाईयों को पार करने वाली अवस्‍था कैसे पैदा कर सकते हैं। उसके लिए हम और योगदान क्‍या दे सकते हैं?

कलाम साहब का जीवन सदा-सर्वदा हमें प्रेरणा देता रहेगा। और हम सब अपने संकल्‍पों को पूरा करने के लिए जी जान से जुटेंगे। इसी एक अपेक्षा के साथ कलाम साहब को शत-शत वंदन करता हूं और उनका जीवन सदा-सर्वदा हमें प्रेरणा देता रहे इसी एक आशा-अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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As humanity faces a crisis in form of COVID, Lord Buddha's teachings have become even more relevant: PM
July 24, 2021
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Lord Buddha have us eight mantras for life: PM
As humanity faces a crisis in form of COVID, Lord Buddha's teachings have become even more relevant: PM
India has shown how we can face greatest of challenges by walking on Lord Buddha's path: PM
Countries are joining hands with each other and becoming each other's strength, taking the values of Buddha: PM

NamoBuddhaya!

NamoGurubhyo!

Hon’ble President, other guests, ladies and gentlemen!

Wishing you all a very Happy Dhamma Chakra Day and Ashadha Purnima! Today we also celebrate GuruPurnima. On this day, Lord Buddha gave his first sermon to the world after attaining enlightenment. It is said in our country that where there is knowledge there is perfection. And when the preacher is the Buddha himself, it is natural that this philosophy becomes synonymous with the welfare of the world. When Buddha, who is forged by renunciation and forbearance, speaks, then these are not mere words, but the entire cycle of Dhamma begins. He gave the sermon to only five disciples then, but today there are followers of that philosophy all over the world, people who believe in Buddha.

Friends,

Lord Buddha gave us the formula of whole life and complete knowledge in Sarnath. He explained the cause of suffering and how it can be conquered. Lord Buddha gave us the noble eightfold sutras (path) or eight mantras for life. These are ‘SammaDitthi’ (right understanding), ‘SammaSankappa’ (right resolve), ‘SammaVacha’ (right speech), ‘SammaKammanta” (right conduct), ‘Samma Ajiva’ (right livelihood), ‘SammaVayama’ (right effort), ‘Samma Sati’ (right mindfulness), and ‘Samma Samadhi’ (right meditative absorption or union).If there is harmony between our mind, speech and resolve and between our action and effort then we can come out of pain and attain happiness. This inspires us to work for general welfare during good times and gives us strength to face difficult times.

Friends,

Lord Buddha is all the more relevant in today’s times of Corona pandemic. India has shown how we can face even the most difficult challenges by following the path of the Buddha. Today all the countries are moving in solidarity and becoming each other’s strength by following the teachings of the Buddha. In this direction, the ‘Care with Prayer’ initiative of the International Buddhist Confederation is very commendable.

Friends,

The Dhammapada says:

न ही वेरेन वेरानि,

सम्मन्तीध कुदाचनम्।

अवेरेन च सम्मन्ति,

एस धम्मो सनन्ततो॥

That is, enmity does not quell enmity. Rather, enmity is calmed with love and by a big heart. In times of tragedy, the world has experienced this power of love and harmony. As this knowledge of Buddha, this experience of humanity gets enriched, the world will touch new heights of success and prosperity.

With this wish, many congratulations to all of you once again! Stay healthy and keep serving humanity!

Thanks!