PM Modi pays tribute to former President Dr. APJ Abdul Kalam
Dr. APJ Abdul Kalam was a "Rashtra-Ratna" before a "Rashtrapati": PM Modi
GoI to build a memorial for Dr. Kalam at Rameswaram, Tamil Nadu: PM
Dr. Kalam always sought fresh challenges to overcome in life, says PM Modi
Dr. Kalam always wanted to be remembered as a teacher: PM Narendra Modi
Dr. Kalam worked for the welfare of poor & farmers: PM Modi
On the birth anniversary of Dr. Kalam, we must explore how we can encourage innovation in India: PM
Dr. Kalam's life continues to be an inspiration for all of us: PM
PM Narendra Modi unveils a statue of Dr. APJ Abdul Kalam at DRDO Bhavan in New Delhi
Prime Minister Modi releases commemorative postal stamp on Dr. Kalam

 

आज 15 अक्‍तूबर, श्रीमान अब्‍दुल कलाम जी की जन्‍म जयंती पर आप सब इकट्ठे हुए है। आज DRDO के परिसर में उनकी एक प्रतिमा का अनावरण करने का मुझे सौभाग्‍य मिला। यह बात सही है कि कलाम साहब का जीवन इतना व्‍यापक, विशाल और गहरा रहा है कि उनको याद करने का गर्व होता है, लेकिन साथ में एक कसक भी रहती है कि काश! वो हमारे साथ होते तो। तो ये जो कमी महसूस होती है, इसको कैसे भरना है, ये हम सब के लिए एक चुनौती है और मुझे विश्‍वास है कि अब्‍दुल कलाम जी के आशीर्वाद से उन्‍होंने हम देशवासियों को जो शिक्षा-दीक्षा दी है, उससे हम अवश्‍य उसको पूरा करने का भरपूर प्रयास करेंगे और वही उनको सबसे बड़ी अंजलि होगी।

वे राष्‍ट्रपति बने, मैं समझता हूं कि उससे पहले वे राष्‍ट्र रत्‍न थे। ऐसा बहुत कम होता है कि एक व्‍यक्‍ति पहले राष्‍ट्र रत्‍न बने और बाद में राष्‍ट्रपति पद को स्‍वीकार करे और वह उनके जीवन की ऊंचाइयों से जुड़ा हुआ था। भारत सरकार ने तय किया है कि जहां पर उनका जन्‍म हुआ और जहां पर उनकी अंत्‍येष्‍टि हुई, उस गांव में एक आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा दे, ऐसा स्‍मारक बनाया जाएगा। सरकार ने already वो जमीन acquire कर ली है। मैंने मंत्रियों की एक कमेटी भी बनाई है जो आने वाले दिनों में इसका आखिरी रूप तय करके, ऐसा कैसा स्‍मारक हो जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहे और कलाम साहब का जीवन हमेशा-हमेशा हम सबके लिए मार्गदर्शक बनता रहे।



दो बातें जो कलाम साहब की स्‍वाभाविक नजर आती हैं – एक तो उनके बाल। दूर से भी किसी को पता चलता है कि अब्‍दुल कलाम जी जा रहे हैं। और कुछ न बनाया हो, सिर्फ उनके बालों को किसी ने पेंट किया तो कह देगा कि हां, बाकी चेहरा कलाम साहब का होगा। लेकिन साथ-साथ एक और भी बात थी। जैसे उनके बाल थे, वैसा उनके भीतर एक बालक था। तो उनके बाल और उनके भीतर का बालक, ये दोनों, मैं समझता हूं हमेशा-हमेशा जो उनके निकट गए हैं उनको याद रहता है। इतनी सहजता, इतनी सरलता।

आमतौर पर वैज्ञानिकों के विषय में एक सोच ऐसी रहती है कि वो बड़े गंभीर चेहरा, उदासीन, Lab में ही डूबे रहने वाले, साल में कितनी बार मुस्‍कुराए वो भी शायद हिसाब लगाना पड़े। लेकिन कलाम साहब, हर पल एक बड़े जीवंत व्‍यक्‍तिव नज़र आता था। मुस्‍कुराते रहना, दौड़ते रहना और। दो प्रकार के लोग होते हैं, एक वो होते हैं जो Opportunity खोजते हैं, एक वो होते हैं जो Challenge खोजते हैं। कलाम साहब Challenges की तलाश में रहते थे। कौन-से नए Challenge है? उस Challenge को कैसे उठा ले और उस Challenge को पार कैसे करे और यही उनके हर पल जीवन में रहता था। आखिर तक!

जब भी मेरा बहुत निकट संबंध रहा क्‍योंकि जब मैं मुख्‍यमंत्री था तब भी उनका गुजरात बार-बार आना होता था। अहमदाबाद से उनका विशेष लगाव था क्‍योंकि उनके career की पहली शुरूआत उन्‍होंने अहमदाबाद में शुरू की थी और विक्रम साराभाई के साथ उन्‍होंने काम किया। तो उसके कारण उनका लगाव भी गुजरात के साथ बहुत था। तो मेरा भी उस समय उनसे संबंध बहुत रहता था। कच्‍छ का भूकंप हो या आपत्‍ति की इतनी बड़ी घटना हो, वो आना, छोटी-छोटी चीजों में guide करना और उस समय भूकंप की परिस्‍थिति के पुनरनिर्माण के काम में विज्ञान और technology का सहारा कैसे लिया जाए ताकि relief तेज गति से हो, rehabilitation तेज गति से हो, reconstruction तेज गति से हो, ऐसी हर बारीक चीज में वो मार्गदर्शन करते थे वो सहायता करते थे।

जीवन भर उनकी एक विशेषता रही है और किसी ने उनको पूछा था कि आपको कैसे याद रखा जाए और उन्‍होंने जवाब में कहा था कि मुझे शिक्षक के रूप में याद रखा जाए। ये शिक्षक का तो सम्‍मान है लेकिन साथ-साथ उनके जीवन का conviction क्‍या था, commitment क्‍या था, उसका भी परिचायक था। उनको लगता है कि भई 5-50 व्‍यक्‍तियों का समूह जरूर कुछ कर दिखा सकता है। लेकिन भारत जैसे देश ने पीढ़ियों तक आगे बढ़ने के लिए, प्रभाव पैदा करने के लिए तेज गति से चलना है तो आने वाली पीढ़ियों को तैयार करना होगा और वो एक टीचर तैयार कर सकता है और ये उनके सिर्फ शब्‍द नहीं थे, उनके पूरे जीवन में ही नजर आता है।

राष्‍ट्रपति पद से मुक्‍ति के दूसरे दिन... ये छोटी बात नहीं है। इतने बड़े पद पर रहने के बाद कल क्‍या करूं, कल कैसा जाएगा, कल से कैसा होगा? आप सब को मालूम है जब अफसर retired होता है तो क्‍या हो जाता है। यानी आज कहां खड़ा है और दूसरे दिन वो अपने आपको कहां महसूस करता है, वो अपने आपको एक खालीपन महसूस करता है। एकदम से वो लगता है बस, अब जीवन का अंत शुरू हो गया है, ऐसा ही मान लेता है। दिमाग में retirement भर जाता है। कलाम साहब की विशेषता देखिए कि राष्‍ट्रपति पद, इतनी बड़ी ऊंचाई और निवृत्‍ति भी आदर्श और गौरव के साथ। दूसरे ही दिन जहाज पकड़ के चैन्‍नई जाना, चैन्‍नई में क्‍लासरूम में पढ़ाना शुरू करना। ये भीतर के commitment के बिना संभव नहीं होता है। एक व्‍यक्‍ति ने अपने जीवन में उसको inherent कर दिया होता है, तब होता है और जीवन का अंत भी देखिए। कहां रामेश्‍वरम्, कहां दिल्‍ली, कहां दुनिया में जय-जयकार और कहां नॉर्थ ईस्‍ट। किसी को कहा जाए कि नॉर्थ ईस्‍ट जाओ तो कहे अरे साहब, किसी और का भेज दो। ऐसा करो अगली बार मैं जाऊंगा इस बार जरा कोई और को। वहां पर इस उम्र में जाना और student के साथ अपने आखिरी पल बिताना। ये उनके भीतर का एक जो एक सातत्‍य था, एक commitment था, उसको प्रतिबिंबित करता है।

भारत शक्‍तिशाली हो, लेकिन सिर्फ शस्‍त्रों से शक्‍तिशाली हो ये कलाम साहब की सोच नहीं थी। शस्‍त्रों का सामर्थ्‍य आवश्‍यक है और उसमें कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए और उसमें उन्‍होंने जितना योगदान दे सकते थे, दिया। लेकिन वो इसे मानकर के चलते थे कि देश सरहदों से नहीं, देश कोटि-कोटि लोगों से पहचाना जाता है। देश की पहचान सीमाओं के आधार पर तय नहीं होती है। देश की ताकत उसके जन कैसे सामर्थ्‍यवान है, उस पर होती है और इसलिए कलाम साहब उन दोनों धाराओं को साथ लेकर के चलते थे कि एक तरफ innovation हो, research हो, रक्षा के क्षेत्र में भारत अपने पैरों पर खड़ा हो और Third World Countries, गरीब देशों का भी उपकारक हो, उस दिशा में भारत अपनी जगह बनाए और दूसरी तरफ भारत का मानव समुदाय संपन्‍न हो।

वे शिक्षा के बड़े आग्रही थे। वे हमेशा कहते थे, योग का महत्‍व समझाते थे और उसके साथ वो commitment भी था उनका। religion को spiritualism में convert करना चाहिए। spiritualism को प्राधान्‍य देना चाहिए। ये उनका conviction था। यानी, एक प्रकार से समाज जीवन में किन मूल्‍यों की आवश्‍यकता है, उन मूल्‍यों पर वो बल देते थे। शायद ये बड़ी हिम्‍मत का काम है, लेकिन वो करते थे। किसी भी समारोह में जाते थे और वहां student मिल गए तो फिर वो खिलते थे। उनका लगता था कि हां, एक ऐसे में बगीचे में आया हूं जहां ये फूल खिलने वाले हैं। उनको तुरंत feel होता था, एकदम से उनका natural connect होता था और ऐसे समारोह में वो बाद में संकल्‍प करवाते थे। एक-एक वाक्‍य बच्‍चों से बुलवाते थे। ये कठिन इसलिए है आज के जमाने में क्‍योंकि इस प्रकार की बात करो तो दूसरे दिन पता नहीं कितने-कितने विवाद खड़े हो जाते हो। लेकिन वे कभी इन चिंताओं में नहीं रहे। हर बार उस संकल्‍प को दोहराते रहे। क्‍या हम जब भी कलाम साहब को याद करेंगे, जहां भी कलाम साहब की चर्चा होगी, उन संकल्‍प के संबंध में, उसको लोगों में सार्वजनिक रूप से बार-बार कैसे लाए? उनका संकल्‍प था, जो हमें बताया जाता था, उसको चरितार्थ करना, ये हमारा दायित्‍व बनता है। उस दायित्‍व को पूरा करने के लिए हमारी नई पीढ़ी को हम कैसे तैयार करें? उस संकल्‍प को बार-बार दोहराते जाए कि ये परंपरा चलती रहे और चेतना जगाने का प्रयास निरंतर चलता रहे, उस दिशा में हम कैसे प्रयास करे।

आज विश्‍व में भारत अपना एक विशेष स्‍थान बनाता जा रहा है। दुनिया किसी जमाने में भारत को एक बड़े market के रूप में देखती थी। आज विश्‍व ने भारत को एक सहयात्री के रूप में देखना शुरू किया है। भारत की तरफ देखने का दुनिया का नजरिया बदला है। लेकिन आर्थिक संपन्‍नता ही या सिर्फ market ही हमें drive करेगा क्‍या?

आने वाले दिनों में हमारे पास innovation के लिए बहुत संभावनाएं हैं। Eight hundred million, Thirty Five से नीचे जनसंख्‍या जहां हो, 65 प्रतिशत जनसंख्‍या 35 से नीचे हो। आज IT के कारण दुनिया में हमने अपनी जगह बना दी उसका कारण innovation था। हम innovation को बल कैसे दें। हम कलाम साहब की हर जन्‍म जयंती पर DRDO में एक ऐसा seminar organize कर सकते हैं क्या? एक दिन, दो दिन, तीन दिन जो भी हो इसमें young scientist हो, innovation करने वाले लोग हो या जिनका scientific temper का spark जिसके अंदर हो, ऐसे बच्‍चे हो। कभी स्‍कूल के बच्‍चों का एक-आध दिन कार्यकाल हो, कभी innovation में लगे हुए 35 से नीचे young scientist. इनको बुला करके इन्‍हीं विषयों पर सेमीनार हमेशा-हमेशा, कलाम साहब को याद करना मतलब innovation को promote करना। यह हमें परंपरा बना सकती है। तो उनकी जन्‍म जयंती को बनाने में हम एक नई जिम्‍मेदारी की ओर भी समाज को लेते चले जाएंगे और वह उनके लिए सबसे बड़ा संतोष का विषय बन सकता है, ऐसा मुझे लगता है।

दुनिया में अब भारत को उस विषय पर सोचने की आवश्‍यकता है कि हम विश्‍व को क्‍या दे सकते हैं। हम क्‍या बन सकते हैं? क्‍या हो सकते हैं? या कोई हमारे लिए क्‍या कर सकता है? उससे थोड़ा ऊपर जा करके थोड़ा हट करके हमारी वो ऐसी कौन सी विरासत है, जो हम विश्‍व को दे सकते हैं। और जो विश्‍व सहज रूप से स्‍वीकार करेगा और जो विश्‍व के कल्‍याण के लिए काम आयेगा। हमने उन पहलुओं पर धीरे-धीरे अपने आप को तैयार करना चाहिए।

आज पूरा विश्‍व cyber crime को ले करके बड़ा परेशान है। क्‍या हमारे नौजवान वो innovation करे, जिसमें cyber security की गारंटी के लिए भारत की पहल हो। भारत एक ऐसी जगह हो जहां cyber security के लिए पूरी संभावनाएं है। जितनी सीमा सुरक्षा महत्‍व की बनी है, उतनी ही cyber की security महत्‍व पर बनी है। तभी भी विश्‍व बदलता चला जाता है, उसमें हम किस प्रकार से contribute कर सकते हैं? हमारी खोज, हमारे विज्ञान, हमारे संसाधन, common man की जिंदगी में बदलाव ला सकते हैं। quality of life में कोई change ला सकते हैं। भारत गरीब देश रहा है। हमारे यह सारे संसाधन, संशोधन यह सब कुछ गरीब की quality of life में बदलाव लाने के लिए हो सकता है। अब हमने 2022 तक हर गरीब को घर देने का सोचा है। अब उसमें हमें नई टेक्‍नोलॉजी, नई चीजें लानी पडेंगी। वो कौन से material से अच्‍छे मकान बन सकते हैं, वो नई खोज करनी पड़ेगी। वो कौन सी technique होगी कि जिसके कारण fastest मकान बना सकते हैं। वो कौन सी technique होगी जिससे हम low cost मकान बना सकते हैं। क्‍यों न हो? कलाम साहब चाहते थे देश के किसान का कल्‍याण करना है। देश के गरीब का कल्‍याण है, तो हमारी नदियों को जोड़ना। यह नदियों को जोड़ना सिर्फ परपरागत engineering work से होने वाला नहीं है। हमें innovation चाहिए, expertise चाहिए, space science की मदद चाहिए। इन सारी बातों को करके हम क्‍या लोगों की जिंदगी में बदलाव ला सकते हैं? यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी है, जिसमें हमें बदलाव लाना है।

आज भी दुनिया में प्रति हेक्‍टर जो crop है उसकी तुलना में हमारा बहुत कम है। आज दुनिया में प्रति cattle जितना milk मिलता है, उसकी तुलना में हमारा कम है। वो कौन से वैज्ञानिक तरीके हों, वो कौन सा वैज्ञानिक temper हो जो किसान के घर तक पहुंचे, पशुपालक के घर तक पहुंचे? ताकि उसकी जिंदगी में बदलाव आए। और इसलिए विज्ञान को हमने सामान्‍य मानव की जिंदगी में बदलाव लाने के लिए उस applicable science को कैसे लाया जाए? उस technology को कैसे हम innovate करें। यह ठीक है DRDO में जो लोग बैठे हैं उनका क्षेत्र अलग है। लेकिन उसके बावजूद भी, यह वो बिरादरी है, जिसका innovation, विज्ञान, खोज यह उसके सहज प्रकृति के हिस्‍से हैं। हम धीरे-धीरे उसको expand करते हुए, अब्‍दुल कलाम जी को याद करते हुए, हम देश को क्‍या दे सकते है? और यही ताकत दुनिया को देने की ताकत बन सक‍ती है।

और कभी-कभार हम पढ़ते है जब सुनते हैं कि भई, हमारे यहां किसान अन्‍न पैदा करता है, लेकिन काफी मात्रा में बर्बाद हो जाता है। क्‍या उपाय हो सकते हैं? हर प्रकार के उपाय हो सकते हैं। temporary भी क्‍यों न हो उसके रख-रखाव की व्‍यवस्‍था क्‍या हो सकती हैं? ऐसी बहुत सी चीजें हैं, जिसमें हमने हमारी परंपरा की पुरानी पद्धतियों में से प्रेरणा लेना, नई innovation करना और उसमें से नए equipment तैयार करना, व्‍यवस्‍थाएं खड़ी करना, जो विज्ञान के द्वारा समाज जीवन में परिवर्तन का एक कारण बन सकते हैं, सहारा बन सकते हैं।

विश्‍व जिस प्रकार से बदल रहा है, उसमें सामूहिक सुरक्षा एक बहुत बड़ा विषय बनता जा रहा है। Blue Economy की तरफ दुनिया बढ़ रही है। अब जब Blue Economy की तरफ बढ़ रही है, तब समुद्रिक जीवन में उसके साथ जुड़े हुए व्‍यापार से भी संबंध है, सामुद्रिक खोज एक बहुत बड़ा क्षेत्र अधूरा पड़ा है। संपदाओं का अपरंपार भंडार सामुद्रिक संपत्ति में पड़ा हुआ है। लेकिन at the same time मानव जात के सामने चुनौती है Blue Sky, Environment, Climate दुनिया में आज चिंता और चर्चा के विषय है। और इसलिए Blue Economy जो सामुद्रिक शक्ति की चिंता भी करें और Blue Sky बचा रहे हैं उसकी भी चिंता करे। उस प्रकार की technology का हमारा innovation कैसा है? हमारा manufacturing जब हम कहते हैं कि zero defect-zero effect. हम ग्‍लोबली जाना चाहते हैं कि हमारे innovation की स्थिति कैसे बने कि हमारे manufacture में कोई defect भी न हो और उसके कारण environment पर कोई effect भी न हो। जब हम इन चीजों को ले करके चलेंगे, मैं समझता हूं कि हमारे युवा वैज्ञानिकों के सामने चुनौतियां हैं। और देश के युवा वैज्ञानिक अब्‍दुल कलाम साहब ने जो हमें रास्‍ता दिखाया, अब्‍दुल कलाम साहब के जीवन की स्‍वयं की यात्रा तो सामान्‍य गरीब परिवार से निकले यहां तक पहुंचे, लेकिन वो जिस क्षेत्र में गए वहां भी वैसे ही हाल था। अभी हमने देखा रॉकेट का एक Part साइकिल पर ले जा रहे थे। यानी institute भी इतनी गरीब थी, इस गरीबी वाले institute से जुड़ करके इतनी बड़ी विशाल संस्‍था का निर्माण कर दिया। सिर्फ पूरा अपनी व्‍यक्ति का जीवन गरीब झोपड़ी से ले करके राष्‍ट्रपति भवन तक आए ऐसा नहीं, जहां गए वहां, जहां था उसको उत्‍तम और बड़ा बनाने का भरपूर सफल प्रयास किया। यह अपने आप में बहुत बड़ा योगदान है। और उस अर्थ में हम भी जहां हो वहां, नई ऊंचाईयों को पार करने वाली अवस्‍था कैसे पैदा कर सकते हैं। उसके लिए हम और योगदान क्‍या दे सकते हैं?

कलाम साहब का जीवन सदा-सर्वदा हमें प्रेरणा देता रहेगा। और हम सब अपने संकल्‍पों को पूरा करने के लिए जी जान से जुटेंगे। इसी एक अपेक्षा के साथ कलाम साहब को शत-शत वंदन करता हूं और उनका जीवन सदा-सर्वदा हमें प्रेरणा देता रहे इसी एक आशा-अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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भारत माता की... भारत माता की.. भारत माता की...

भारतीय जनता पार्टी के नवीन अध्यक्ष माननीय नितिन नबीन जी,
पूर्व अध्यक्ष जे पी नड्डा जी, भाजपा परिवार के अन्य सभी वरिष्ठजन, देशभर से आए कार्यकर्ता साथी, देवियों और सज्जनों...
सर्वप्रथम माननीय नितिन नबीन जी को दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल का अध्यक्ष चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई देता हूं। बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

बीते कई महीनों से संगठन पर्व यानि कि पार्टी की छोटी सी इकाई से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने की एक व्यापक प्रक्रिया शतप्रतिशत लोकतांत्रिक तरीके से भारतीय जनता पार्टी के संविधान के स्पिरिट को और उसमें बताई गई हर बात को ध्यान में ऱखकर के लगातार चल रही थी। आज उसका विधि-पूर्वक समापन हुआ है। संगठन पर्व का ये विशाल आयोजन, भारतीय जनता पार्टी की लोकतांत्रिक आस्था, संगठनात्मक अनुशासन और कार्यकर्ता-केन्द्रित सोच का प्रतीक है। मैं देशभर के कार्यकर्ताओं का इस प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

बीते एक-डेढ़ वर्षों में डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की एक सौ पच्चीसवीं जयंती का पर्व, अटल जी की सौवीं जन्म-जयंती, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष… ऐसे महापर्व हम मनाते रहे है...ये वो प्रेरणाएं हैं, जो देश के लिए जीने के हमारे संकल्प को और मजबूत करती हैं। हमारा नेतृत्व परंपरा से चलता है...अनुभव से समृद्ध होता है...और जनसेवा, राष्ट्र-सेवा के भाव से संगठन को आगे बढ़ाता है।

साथियों,

अटल जी, आडवाणी जी और मुरली मनोहर जोशी जी के नेतृत्व में बीजेपी ने शून्य से लेकर शिखर तक का सफर देखा है। इस सदी में वेंकैया नायडू जी और नितिन गडकरी जी सहित, हमारे कई वरिष्ठ साथियों ने संगठन को विस्तार दिया है। राजनाथ जी के नेतृत्व में पहली बार...बीजेपी ने अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल किया है। फिर अमित भाई के नेतृत्व में...देश के अनेक राज्यों में भाजपा की सरकारें बनीं, लगातार दूसरी बार केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी। फिर जेपी नड्डा जी के नेतृत्व में भाजपा पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक और सशक्त हुई है। केंद्र में लगातार तीसरी बार, भाजपा-NDA की सरकार बनी। मैं पूर्व के सभी अध्यक्षों का उनके अमूल्य योगदान के लिए देश के कोटि-कोटि कार्यकर्ताओं की तरफ से और मेरी तरफ से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

आप जानते हैं...आज भाजपा का जितना फोकस संगठन के विस्तार पर है उतनी ही बड़ी प्राथमिकता कार्यकर्ता के निर्माण की भी है। भाजपा एक ऐसी पार्टी है, जहां लोगों को लगता होगा की नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं, तीसरी बार प्रधानमंत्री बने, पचास साल की छोटी आयु में मुख्यमंत्री बन गए, 25 साल से लगातार हेड ऑफ द गवर्नमेंट रहे हैं.. ये सब अपनी जगह पर है, लेकिन इन सबसे भी बड़ी चीज मेरे जीवन में है मैं भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता हूं ये सबसे बड़ा गर्व है। और जब बात पार्टी के विषयों की आती है...तब माननीय नितिन नबीन जी, मैं एक कार्यकर्ता हूं और वे मेरे बॉस हैं। अब माननीय नितिन नबीन जी, हम सभी के अध्यक्ष हैं। और उनका दायित्व सिर्फ भाजपा को ही संभालना, इतना नहीं है, एनडीए के सभी साथियों के बीच भी उन्हें तालमेल का बहुत बड़ा दायित्व को भी देखना होता है।

साथियों,

माननीय नितिन जी के संपर्क में जो भी आया है, वो उनकी सरलता और सहजता की चर्चा ज़रूर करता है। बीजेपी युवा मोर्चा का दायित्व हो, अलग-अलग राज्यों में प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी हो या फिर बिहार सरकार में काम करने का अनुभव हो नितिन जी ने हमेशा जब-जब, जो-जो, जहां-जहां जो-जो जिम्मेवारी मिली, अपनेआप को उन्होंने साबित किया है। जिम्मेवारी देने वालों को भी उनके कार्य ने गर्व से भर दिया है।

साथियों,

ये इक्कीसवीं सदी है और देखते ही देखते इक्कीसवीं सदी के पहले 25 वर्ष पूरे भी हो चुके हैं। आने वाले 25 वर्ष बहुत महत्वपूर्ण हैं। ये वो कालखंड है, जब विकसित भारत का निर्माण होना है, और होना तय है। इस महत्वपूर्ण कालखंड की शुरुआत में...हमारे माननीय नितिन नबीन जी...बीजेपी की विरासत को आगे बढ़ाएंगे। मैं आजकल के युवाओं की भाषा में कहूं...तो नितिन जी खुद भी एक प्रकार से मिलेनियल हैं...वो उस जेनरेशन से हैं,...जिसने भारत में बड़े आर्थिक, सामाजिक और टेक्नोलॉजिकल परिवर्तन होते देखे हैं। वो उस जनरेशन से हैं...जिसने बचपन में रेडियो से सूचनाएं पाईं...और आज AI के भी एक्टिव यूज़र हैं। नितिन जी के पास युवा ऊर्जा भी है...और संगठन में कार्य का लंबा अनुभव भी है। ये हमारे दल के हर कार्यकर्ता के लिए बहुत उपयोगी होगा।

साथियों,

इस वर्ष जनसंघ की स्थापना को 75 वर्ष हो रहे हैं। और मैं आज इन 75 वर्ष लगातार लक्ष्यावधि कार्यकर्ताओं ने अनेक परिवारों ने, अनेक पीढ़ियों ने जो त्याग, तपस्या और बलिदान दिए हैं मैं उनको आदरपूर्वक नमन करता हूं। जनसंघ रूपी वटवृक्ष से ही भाजपा का जन्म हुआ...और भाजपा दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बन चुकी है। और यह सिर्फ भाजपा के कार्यकर्ताओं के लिए गर्व का विषय है, इतना नहीं है, एक-एक राजनीतिक समीक्षकों को दुनिया को ये बात बतानी चाहिए कि भारत एक ऐसा देश है जिसकी रगों में इतनी मजबूती से लोकतंत्र चल रहा है कि जहां दुनिया की सबसे बड़ी पोलिटिकल पार्टी है। साथियों, बीजेपी एक संस्कार है। बीजेपी एक परिवार है, हमारे यहां मेंबरशिप से भी ज्यादा रिलेशनशिप होती है। बीजेपी एक ऐसी परंपरा है...जो पद से नहीं, प्रक्रिया से चलती है।
हमारे यहां पदभार एक व्यवस्था है...और कार्यभार एक जीवन भर की ज़िम्मेदारी है। हमारे यहां अध्यक्ष बदलते हैं... लेकिन आदर्श नहीं बदलते। नेतृत्व बदलता है...लेकिन दिशा नहीं बदलती।

साथियों,

भाजपा का स्वरूप नेशनल है, भाजपा का स्पिरिट नेशनल है। क्योंकि हमारा जुड़ाव लोकल है, हमारी जड़ें ज़मीन के नीचे गहरी हैं। इसलिए, भाजपा रीजनल एस्पिरेशन्स को प्लेटफॉर्म देती है, उन्हें नेशनल एंबिशन्स का आधार बनाती है। और इसलिए आज देश के कोने-कोने के लोग भाजपा के साथ हैं। भाजपा के साथ जुड़ रहे हैं। और इतना ही नहीं और जो भी अपनी राजनीति का प्रारंभ करना चाहते है उसको भी भाजपा का प्रवेश द्वार सबसे उत्तम और सबसे सुरक्षित लगता है।

साथियों,

जनता-जनार्दन की सेवा... हमारे लिए हमेशा सर्वोपरि रही है। हमने सत्ता को सुख का नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम बनाया है। इसलिए, भाजपा पर जनता का विश्वास निरंतर मज़बूत होता गया है। अगर बीते 11 वर्षों की ही बात करें...तो भाजपा की यात्रा जन विश्वास अर्जित करने की अद्भुत यात्रा रही है। बीते 11 वर्षों में बीजेपी ने...हरियाणा, असम, त्रिपुरा और ओडिशा में...पहली बार अपने सामर्थ्य से सरकारें बनाईं। पश्चिम बंगाल और तेलंगाना में भाजपा...जनता की एक बड़ी आवाज बनकर उभरी है। अक्सर होता ये है...कि लंबे कार्यकाल के बाद सरकारों के लिए टिके रहना मुश्किल होता है। लेकिन बीजेपी ने इस ट्रेंड को भी तोड़ दिया है। गुजरात हो, मध्य प्रदेश हो, महाराष्ट्र हो, बिहार हो...इन सभी राज्यों में, कई-कई कार्यकाल के बावजूद बीजेपी पहले से भी बड़े जनादेश के साथ सरकार में लौटी है।

साथियों,

बीते डेढ़-दो वर्षों में तो, भाजपा पर जनता का भरोसा और मज़बूत हुआ है। विधानसभा हो या स्थानीय निकाय...बीजेपी की स्ट्राइक रेट अभूतपूर्व रही है। इस दौरान, देश में 6 राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं। इनमें से चार चुनाव बीजेपी-NDA ने जीते हैं।

साथियों,

आज भाजपा, सिर्फ संसद और विधानसभा की ही नहीं...बल्कि नगर-पालिकाओं और नगर-निगमों में भी पहली पसंद है। और इसका ताज़ा उदाहरण महाराष्ट्र है। हाल में जो मेयर और पार्षदों के चुनाव परिणाम सामने आए हैं...वो अभूतपूर्व हैं। बीजेपी, महाराष्ट्र के स्थानीय निकायों में नंबर वन पार्टी बनी है। कुल 29 में से 25 बड़े शहरों की जनता ने बीजेपी-एनडीए को चुना है। कुल जितने पार्षद जीते हैं, उनमें से 50 परसेंट बीजेपी के हैं। ऐसे ही केरला में भी आज बीजेपी के करीब सौ पार्षद हैं। केरला की राजधानी तिरुवनंतपुरम की जनता ने मेयर चुनाव में 45 साल बाद लेफ्ट से सत्ता छीनी और भाजपा पर भरोसा किया। मुझे पूरा विश्वास है... कि आने वाले विधानसभा चुनावों में भी लोग, केरला में बीजेपी को अवसर ज़रूर देंगे।

साथियों,

बीजेपी निरंतर जीत रही है...उसका विस्तार हो रहा है...ये निश्चित तौर पर हम सभी के लिए गर्व का विषय है। लेकिन ये हम सभी के लिए बहुत बड़े दायित्व बोध भी है और दायित्व बोध का समय भी है। कभी भाजपा ने पार्टी विद ए डिफरेंस के रूप में अपनी यात्रा शुरु की थी...आज बीजेपी, पार्टी ऑफ गवर्नेंस भी है। देश की आजादी के बाद शासन के अलग-अलग मॉडल देखे हैं। कांग्रेस के परिवारवाद का मॉडल...लेफ्ट का मॉडल... क्षेत्रीय दलों का मॉडल...अस्थिर सरकारों का दौर...ये सब मॉडल देश देख चुका है.. लेकिन आज देश, स्थिरता, सुशासन और संवेदनशीलता वाला भाजपा का विकास मॉडल देख रहा है।

साथियों,

ये भाजपा ही है जिसने सामाजिक न्याय के नारे को...सच्चे स्वरूप में ज़मीन पर उतारा है। हमने गरीब कल्याण की योजनाओं को सरकारी फाइलों से निकालकर...गरीब के घर तक पहुंचाया है। साथियो., मैं आपको कुछ उदाहरण देता हूं... आज़ादी के 70 वर्ष बाद, सिर्फ तीन करोड़ ग्रामीण परिवारों तक ही पाइप से पानी पहुंच पाया था। माताओं-बहनों की पीड़ा, पानी के लिए उनके संघर्ष की सुध लेने वाला कोई नहीं था। और मुझे याद है जब मैं गुजरात में राजनीतिक क्षेत्र में नहीं आया था, सामाजिक जीवन में काम करता था। हमारे यहां एक धंधुका करके स्थान है वहां मैं जाता था तो वहां के लोग मुझे कहते थे कि आप यहां रात को मत रुकिए और जब भी आपका दौरा हो तो सुबह 10:00 बजे के बाद आइए, नॉर्मली मेरा नेचर रहता था कि हर नए स्थान पर जाकर रात में रुकूं कार्यकर्ताओं से मिलूं लेकिन धंधुका वाले मना करते थे, क्यों… वह कहते थे पानी नहीं है शुवह आपको स्नान करने के लिए पानी नहीं दे पाएंगे, वहां तो कहावत चलती थी कि बेटी को बंदूकें दो लेकिन धंधुके मत दो यानी उसको बंदूक से मार दो लेकिन उसकी धंधुके में शादी मत करो पानी नहीं था। यह दर्द मैंने देखा है। मैं धरती की सच्चाई से जुड़ा था, माताओं- बहनों के पीड़ा अपनी आंखों के सामने देखी थी, और तब हम जल जीवन मिशन लेकर आए...और सिर्फ 5-6 साल में 12 करोड़ से ज्यादा परिवारों को नल से जल की सुविधा से जोड़ा।

साथियों,

ये हमारी सरकार है...जिसने धुएं से बीमार होती, बहनों की पीड़ा समझी। वरना पहले तो एलपीजी गैस को भी अमीरों का ही सौभाग्य मान लिया गया था। भाजपा ने पूरी संवेदनशीलता के साथ हर घर को एलपीजी गैस कनेक्शन से जोड़ने का अभियान चलाया। और वर्ष 2014 तक जहां सिर्फ 14 करोड़ एलपीजी कनेक्शन थे...आज देश में तैंतीस करोड़ से अधिक गैस कनेक्शन हैं। ऐसे ही, गांव की बहनों को लखपति दीदी बनाने का अभियान है। ये भी इसलिए संभव हो पाया...क्योंकि भाजपा बहनों-बेटियों के सपनों के प्रति संवेदनशील है।

साथियों,

एक जमाना था जब हम भी सुनते थे कि फलाना परिवार तो लखपति परिवार है ढिकना परिवार तो लखपति परिवार है। यानी लखपति होना बहुत बड़ी बात मानी जाती थी.. ये मोदी है जो सपने देखता है कि मेरे गांव की गरीब मां भी लखपति दीदी बनेगी।

साथियो,

दशकों तक आदिवासी समाज को सिर्फ वोट बैंक से जोड़कर देखा गया। लेकिन संवेदनशील भाजपा ने...भाजपा के हमारे संस्कारों ने समाज के प्रति समान भाव की हमारी परंपरा के कारण भाजपा ने आदिवासियों में भी सबसे पिछड़ी जनजातियों की पीड़ा को समझा। उनके विकास के लिए पीएम जन-मन योजना बनाई। और पीएम जन-मन योजना के लाभार्थी इतने बिखरे हुए हैं, और एक दो एक दो दूर के जंगलों में पड़े हैं। उनसे म्युनिसिपलटी की सीट भी जीती नहीं जा सकती है। वोट के हिसाब से कोई उनकी तरफ देखेगा नहीं। लेकिन जब बोट से उठकर संवेदनाएं होती हैं, समाज का कल्याण हमारे संस्कार होते हैं तो पीएम जनमन योजना जन्म लेती है। आदिवासियों में भी अति पिछड़े...संख्या में भले ही कम है...लेकिन उनके प्रति हमारी संवेदना में कोई कमी नहीं है।

साथियों,

हमारा नॉर्थ ईस्ट...वहां वोटर उतने नहीं है, सीटें भी उतनी नहीं हैं... इसलिए कांग्रेस की सरकारों में उन्हें बरसों तक उपेक्षित रखा गया। लेकिन संवेदनशील भाजपा ने, नॉर्थ ईस्ट को दिल से भी जोड़ा और दिल्ली से भी जोड़ा। एक और उदाहरण आकांक्षी जिलों का है। हमारे देश में सौ से अधिक जिले ऐसे थे..जिनको कांग्रेस सरकारें पिछड़ा घोषित करके भूल गई थीं। इन जिलों को पनिशमेंट पोस्टिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था। यानि जिन अधिकारियों को सज़ा देनी होती थी, तो उन्हें वहां भेजा जाता था। हमारी भाजपा सरकार ने इन जिलों को आकांक्षी जिले घोषित किया। और प्राथमिकता के आधार पर इनके विकास के लिए काम किया। आज ये आकांक्षी जिले, विकास के कई पैरामीटर्स पर अन्य जिलों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। राज्य के एवरेज के बराबर आकर खड़े हो गए हैं।

साथियों,

भाजपा का मंत्र है- पिछड़ों को प्राथमिकता...पिछड़ों को प्राथमिकता, जिनकी किसी ने सुध नहीं ली, हमने उनकी साधना की है। जिनको किसी ने पूछा नहीं...मोदी ने उन्हें पूजा है। हमारी कार्य-संस्कृति...सर्व-समावेशी है...सर्वांगीण है...सर्व-स्पर्शी है...सर्व-हितकारी है...सर्व-कल्याणकारी है। और ये कार्य-संस्कृति गरीब को समान अवसर देने वाली है, गरीब को सशक्त करने वाली है। इसी वजह से सिर्फ एक दशक में 25 करोड़ लोगों ने गरीबी को पराजित किया है। और ये 25 करोड़ लोग कौन हैं? इनमें सबसे अधिक दलित, पिछड़े और आदिवासी परिवार हैं।

साथियों,

बीते वर्षों में जन-विश्वास की जो पूंजी हमने अर्जित की है. उस भरोसे को कायम रखना बहुत बड़ी ज़रूरत है। देश की जनता...2047 तक विकिसत भारत बनाने के लिए संकल्पित है। इसलिए, बीते 11 वर्षों में रिफॉर्म्स की जो यात्रा हमने शुरू की है...वो अब रिफॉर्म एक्सप्रेस बन चुकी है। हमें राज्यों के स्तर पर, शहरों के स्तर पर...जहां भी भाजपा-NDA सरकारें हैं, वहां रिफॉर्म्स की गति तेज़ करनी है। भाजपा, सिटी गवर्नेंस का भी एक नया मॉडल देश के सामने प्रस्तुत करे, इस लक्ष्य के साथ हमें आगे बढ़ना चाहते हैं।

साथियों,

जब हम सत्ता में नहीं भी थे...तब भी हम अपने मूल आदर्शों से कभी नहीं भटके। हम राष्ट्र प्रथम के भाव से...नेशन फर्स्ट के भाव से डटे रहे। जूझते रहे, संकटों को झेलते रहे, जज्बा बढ़ाते रहे और जीतते भी रहे। हम वो लोग हैं, हमारा वो चरित्र है, हमारे वो संस्कार है खुद से बड़ा दल और दल से बड़ा देश...ये भाजपा के हर कार्यकर्ता का संस्कार है …भाजपा के हर कार्यकर्ता का जीवन मंत्र है। इसी भाव के साथ...बीते 11 वर्षों में हमने अनेक चुनौतियों पर विजय पाई है। जम्मू कश्मीर से आर्टिकल-370 की दीवार गिराना हो...तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाना हो...इनको कभी असंभव माना जाता था। आज ये हकीकत बन चुके हैं। आज देश में माओवादी आतंक भी अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।

साथियों,

आगे भी हमें...हर चुनौती का पूरे सामर्थ्य से सामना करना है। आज देश के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती...घुसपैठियों की है, आबादी के असंतुलन की है। दुनिया के धनवान देश, समर्थ देश वे भी अपने देश में जो घुसपैठियों हैं उनकी जांच पड़ताल कर रहे हैं, और उनको पकड़-पकड़ कर निकाल रहे हैं, और दुनिया उनको पूछती नहीं है कि तुम घुसपैठियों को क्यों निकाल रहे हो तुम तो लोकतंत्र का झंडा लेकर घूम रहे थे। तुम तो पूरी दुनिया के नवाब बनके बैठे थे क्यों निकाल रहे हो। दुनिया में कोई अपने देश में घुसपैठियों को स्वीकार नहीं करता।

भारत भी घुसपैठियों को अपने गरीबों, हमारे नौजवानों के हक कभी भी लूटने नहीं दे सकता। घुसपैठिए, देश की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं। उनकी पहचान करके, उन्हें वापस उनके देश भेजना बहुत आवश्यक है। इसके अलावा...ऐसे राजनीतिक दल, जो वोट बैंक की राजनीति में घुसपैठियों को बचा रहे हैं...या उन्हें कवर दे रहे हैं...उन्हें हमें पूरी शक्ति से जनता के सामने बेनकाब करना ही होगा उनको एक्सपोज़ करना ही होगा।

साथियों,

एक और बड़ी चुनौती अर्बन नक्सल की भी है। अर्बन नक्सल का दायरा, इंटरनेशनल हो रहा है। और यहां अर्बन नक्सल की बहुत चतुराई होती है ये मीडिया वाले इतने बैठे हैं ना अगर साल में एक-आध बार भी एक-आध बार भी अगर मोदी की किसी अच्छी चीज को ट्वीट कर दिया क्या टीवी पर बोल दिया या अखबार में लिख दिया तो उस पत्रकार की तो ऐसी फजीहत कर देते है उसके पीछे ऐसे पड़ जाते हैं, उसे अछूत बना देते हैं। भविष्य में वो कभी बोल ना सके ऐसा कर देते हैं। ये अर्बन-नक्सल की स्टाइल है। हमको भी सालों तक ऐसा अछूत बनाकर रख दिया पूरे देश में भाजपा को, अब देश समझ गया है अर्बन-नक्सल के कारनामे… भारत को नुकसान पहुंचाने के लिए अर्बन नक्सली लगातार कोशिशें कर रहे हैं...साजिशें कर रहे हैं। अर्बन नक्सलियों के इस गठजोड़ को हमें संगठन की ताकत से, वैचारिक ताकत से और हमारी परिणामकारी इतिहास को बुलंदी देकर के उनको परास्त करना है, उनको तोड़ना है।

साथियों,

देश के लिए परिवारवाद बहुत बड़ा अभिशाप है। और जब मैं परिवारवाद की बात करता हूं तो अर्बन नक्सल मैदान में आ जाते हैं, वो मुझे कहते हैं कि फलाने का बेटा ढिकना का बेटा। वो बात को डायवर्ट करते हैं। किसी के बेटे की प्रतिभा का हम विरोधी नहीं है. किसी की बेटी की प्रतिभा का हम विरोध नहीं है, लेकिन दुर्भाग्य से...कांग्रेस और देश के अनेक क्षेत्रीय राजनीतिक दलों पर...आज अलग-अलग परिवारों का कब्जा हो गया है। पार्टी का जन्म किसी और ने किया, पार्टी मेंं लगातार एक के बाद एक उनके परिवार के लोग ही अध्यक्ष होते हैं, पार्टी की पूरी निर्णय प्रक्रिया उन परिवार के हाथ में होती है। पार्टी का कोई भी कार्यकर्ता हो उसे विचार से कोई लेना-देना नहीं उनको उस परिवार के प्रति समर्पित रहना पड़ता है। ये परिवारवाद खतरनाक है। ये लोकतंत्र का दुश्मन है। और इस परिवारवादी राजनीति ने देश के नौजवानों के लिए दरवाजे बंद कर दिए हैं। उनके आगे आने के सारे मौके खत्म कर दिए हैं। और इसलिए देश के उन युवाओं को अवसर मिलने ही चाहिए...जो राजनीति के माध्यम से नए समाधान देने के लिए आगे आना चाहते हैं। और इसलिए मैंने कहा है कि मैं एक लाख ऐसे नौजवानों को राजनीति में लाना चाहता हूं जिनके परिवार में वे पहली बार वो राजनीति में आए हैं।

साथियों,

अपने इन प्रयासों के बीच, हमें हर उस बुराई से दूर रहना है…और ये बात जरा मैं गंभीरता से बताना चाहता हूं। जनता हमें आशीर्वाद दे रही है और निरंतर आशीर्वाद दे रही है। हम जो कुछ भी हैं जनता-जनार्दन के आशीर्वाद के कारण हैं। जो कुछ भी है मेहनतकश, समर्पित कार्यकर्ताओं के परिश्रम के कारण हैं। और इसलिए जब इतने बढ़ रहे हैं। इतना सम्मान मिल रहा है, इतनी स्वीकृति मिल रही है तब हमारा दायित्व अनेक गुना बढ़ जता है। और पल-पल हमें सोचना चाहिए कि वो कौन से कारण हैं जिसने कांग्रेस पार्टी को बर्बाद कर दिया। वो कौन सी बुराइयां कांग्रेस में घुस गई जो आज कांग्रेस को तबाही के कगार पर लाकर के खड़ा कर दिया। हमें उन सारी बुराइयों से बचना है। ये बुराइयां किसी भी सूरत में हमारे भीतर नहीं आनी चाहिए। हमें इससे बच के रहना है। और जहां-जहां हम बच के रहते हैं, हमें कोई मुकाबला नहीं कर पाता है।

साथियों

आज देश को याद भी नहीं होगा...कि 1984 में कांग्रेस को चार सौ से अधिक सीटें मिली थीं…नेहरू जी के जमाने से भी ज्यादा... और देश ने करीब-करीब 50 प्रतिशत वोट दिया था कांग्रेस को। लेकिन आज कांग्रेस सौ सीटों के लिए तरस गई है। कांग्रेस अपने इस घनघोर पतन की कभी समीक्षा नहीं करती...क्योंकि अगर समीक्षा करेंगे, ये पतन के कारणों की ओर जाएंगे तो फिर उसी परिवार पर सवाल उठेंगे, जिस परिवार ने कांग्रेस पर कब्जा करके रखा है। और इसलिए बहाने ढूंढ़ते रहते हैं। पतन की तरफ सही कारण ढूंढ़ने की हिम्मत तक खो चुके हैं वो लोग

साथियों,

वहीं दूसरी तरफ भाजपा है। हम हार और जीत के बाद समीक्षा करते हैं। मैं आपको फिर महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों का उदाहरण दूंगा। महाराष्ट्र में हम निकाय चुनाव जीतने के बाद जश्न में डूबे नहीं... बल्कि मैं तो अभी पढ़ रहा था...कि उसी दिन से, हमारे माहराष्ट्र के कार्यकर्ता आने वाले पंचायत के चुनावों की तैयारियों के लिए बैठक शुरू कर दी थी। मुझे याद है 2002 हमने भव्य विजय प्राप्त की थी गुजरात में। चारों तरफ आनंद-उत्सव का माहौल था, देश भर का मीडिया भी वहां मौजूद था, अर्बन-नक्सल तो बड़ी संख्या में आए थे। वो बेचारे हमारी पराजय का जश्न मनाना चाहते थे। तो वे ढूंढ रहे थे सारी चीजें। और मैं एक मीटिंग में बैठा था, तो उनको बड़ा आश्चर्य हुआ कि यहां पर इतना जलसा चल रहा है और ये कैसा मुख्यमंत्री है कि आज ही चुनाव नतीजा आया है और ये बैठा है। और मैं क्या कर रहा था... मैं कार्यालय में मीटिंग ले रहा था। और मैंने पूछा कि अच्छा बताओ भाई कि इतने हार क्यों गए... ये भाजपा है... जो जीत का जश्न मनाते समय भी अपनी कमियों की लगातार समीक्षा करता है। और कमियों से ऊपर उठने के लिए हर समय का उपयोग करता है। लोकतंत्र में इसी स्वस्थ परंपरा को, इसी डेडिकेशन को हम सब कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है हमें आगे बढ़ाना है। हमें ध्यान रखना है, कि जो कांग्रेस की बुराइयों से बचेगा, वही देश में आगे बढ़ेगा।

साथियों,

आज भाजपा परिवार को अपना नया मुखिया मिला है। ऊर्जावान मुखिया मिला है। अनुभवी मुखिया मिला है। औऱ भाजपा परिवार की हमारी ताकत...हर कार्यकर्ता का परिश्रम है...उसकी सामूहिक चेतना है। बूथ पर जो हमारा कार्यकर्ता पूरे सालभर जुटा रहता है...वही हमारी सच्ची ताकत है। हमें याद रखना है...हम सबसे जुड़ें, हम सबको जोड़ें...कल्याणकारी योजनाओं से हर लाभार्थी को लाभ पहुंचाएं। ये हमारा ध्येय होना चाहिए। इसी आग्रह के साथ, माननीय नितिन नबीन जी को...बीजेपी के कोटि-कोटि कार्यकर्ताओं की तरफ से पुन: बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। और साथियों आज का पल हम सबके लिए बहुत विशेष पल है। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष जी अब हमारा मार्गदर्शन करने वाले हैं। उनका एक-एक शब्द हमारे लिए आगे की दिशा होगी, हमारे आगे की कार्यरचना के लिए उनका मार्गदर्शन हमारी अमूल्य पूंजी होगी। मैं भी एक कार्यकर्ता के तौर पर, मैं पहले नए अध्यक्ष जी को मेरे काम का हिसाब दे रहा था, मैंने हिसाब दिया, अब वो मेरा सीआर लिखेंगे, लेकिन अब मेरे आगे के कार्य के लिए मैं उनके मार्गदर्शन की प्रतीक्षा कर रहा हूं, मैं उनको सुनने के लिए बहुत ही उत्सुक हूं, आतुर हूं। फिर एक बार बहुत-बहुत धन्यवाद।