PM Modi chairs high level meeting on drought & water scarcity situation in parts of Karnataka
Karnataka CM Siddaramaiah thanks PM Modi for Centre's assistance for drought hit areas
Centre and the State should work together to tackle the problem of drought: PM
Time has come when there should be healthy competition among States to speak of efforts in water conservation: PM Modi

The Prime Minister Shri Narendra Modi, today chaired a high level meeting on the drought and water scarcity situation in parts of Karnataka. The Chief Minister of Karnataka, Shri Siddaramaiah, was present in the meeting. Senior officials from the Government of India, and the State of Karnataka, were also present.

Initiating the discussion, the Prime Minister said he is holding separate meetings with Chief Ministers of 11 drought-affected States, to see what can be done to mitigate the problems posed by drought, and also to focus attention on medium to long term measures.

The Chief Minister of Karnataka thanked the Government of India for the assistance of Rs. 1540.20 crore against the Kharif memorandum, and said that this has been fully utilized to assist the farmers. He said that this amount was transferred to farmers through Real-Time Gross Settlement (RTGS). He further said that Rs. 723.23 crore had recently been approved for the Rabi memorandum, which should be released expeditiously.


It was informed that this was in addition to the Rs. 207 crore released as central share of SDRF for 2015-16. Further, Rs. 108.75 crore has already been released as first instalment of SDRF for 2016-17.

It was further informed that Rs 603 crore would be made available with Karnataka during 2016-17 for water conservation and drought proofing under various schemes of Government of India. Similarly, Rs 830 crore would be available under various agriculture schemes.

The Chief Minister described the problems being faced by people owing to the severe drought. He said that major rivers and reservoirs in the State are facing acute water shortage. He explained the various measures undertaken by the State Government, including desilting, construction of farm ponds, steps towards drip irrigation, and ensuring adequate drinking water supply.

The Prime Minister discussed various measures for desilting, water conservation and recharging of ground water, with the Chief Minister. He urged the State Government to give maximum attention to desilting, farm tanks and check dams over the next 30 to 40 days, before the onset of the monsoon.


The Chief Minister apprised the Prime Minister about the steps taken by Karnataka, for waste water management. Appreciating these efforts, the Prime Minister emphasized that this should be taken up in a big way in the towns and cities.

Shri Siddaramaiah apprised the Prime Minister about the preparatory steps taken towards implementation of the Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana. The State Government also made some suggestions regarding crop insurance.

The Chief Minister presented a memorandum to the Prime Minister, and the Prime Minister assured him of all possible support.

The Prime Minister said that the Centre and the State should work together to tackle the problem of drought, which he described as “our” problem. He said that solutions to the problem would have to be found together.

The Prime Minister said that the time has come when there should be healthy competition among States to speak of efforts in water conservation and management, the way efforts to increase GSDP and investment are spoken about. The Prime Minister also asked NITI Aayog to develop an index to measure water conservation and management.

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PM Modi's interview to Dainik Jagran
April 18, 2024

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प में विकसित उत्तराखंड की महत्वपूर्ण भागीदारी रहेगी। इसी के दृष्टिगत वहां के युवाओं के लिए अधिक से अधिक अवसरों का निर्माण किया जाएगा। साथ ही उद्योग, निवेश और इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया जाएगा। उत्तराखंड को पर्यटन व तीर्थाटन का हब बनाने की दिशा में प्रयासों को और अधिक गति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के लिए ये मोदी की गारंटी है।

देवभूमि उत्तराखंड से विशेष लगाव रखने वाले प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तराखंड से जुड़े विषयों पर दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में उक्त बातें कहीं। प्रधानमंत्री ने देवभूमि से अपने लगाव को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय वहां बिताया है। इस दौरान उन्होंने राज्यवासियों की आकांक्षाओं को करीब से जाना और समझा। हमारा प्रयास यही है कि देवभूमिवासियों की जो भी अपेक्षाएं हैं, उनसे एक कदम आगे बढ़कर दिखाएं। पिछले 10 वर्ष में इस दृष्टि से किए गए कार्यों से वहां के निवासियों के जीवन में परिवर्तन आया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दशक को उत्तराखंड का दशक बनाने के विजन को धरातल पर उतारने के लिए राज्य के प्रत्येक व्यक्ति का सामथ्र्य बढ़ाने में हम जुटे हुए हैं। उत्तराखंड में ढांचागत विकास की योजनाओं के दृष्टिगत आर्थिकी व पारिस्थितिकी में समन्वय के साथ काम किया जा रहा है। राज्य में संवेदनशील और संतुलित विकास का मार्ग अपनाया गया है। पहाड़ के कठिन क्षेत्र में रहने वाले लोगों के जीवन में बदलाव जरूरी है, साथ ही पर्यावरण का संरक्षण भी।

समान नागरिक संहिता की उत्तराखंड की पहल पर उन्होंने कहा कि इस विषय पर हमारा दृष्टिकोण स्पष्ट है। आज पूरे देश में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता महसूस हो रही है। खुशी की बात है कि उत्तराखंड ने इसकी पहल की। प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सैन्य बहुल प्रदेश है। यहां के प्रत्येक परिवार से कोई न कोई सदस्य सेना का हिस्सा है। देवभूमि में सेना के प्रति श्रद्धा, त्याग व समर्पण है और ये बात पूरा देश जानता है। इसी धरती के सपूत देश के प्रथम सीडीएस जनरल बिपिन रावत के प्रति कांग्रेस की भद्दी टिप्पणी को देवभूमि के लोग हमेशा याद रखेंगे।

हमने अपने संकल्प पत्र में जल, जंगल, वायु और पर्यावरण को बचाने की गारंटी दी है। उत्तराखंड के विकास में हम अपनी इस गारंटी को लागू करेंगे। मुझे बहुत खुशी है कि उत्तराखंड ने पहल की और यूसीसी को लागू कर दिया। मुझे आशा है कि राष्ट्रीय स्तर पर भी विपक्ष समान नागरिक संहिता का विरोध नहीं करेगा।

उत्तराखंड की गरिमा को चोट पहुंचाने वाली कांग्रेस की भद्दी टिप्पणी को देवभूमि के लोग हमेशा याद रखेंगे। लोगों को ये भी याद है कि ये वही कांग्रेस है जो बार-बार सेना के मनोबल पर सवाल उठाती है।

लगातार तीसरी बार केंद्र की सत्ता में आने के लिए भाजपा ने इस बार राजग के लिए 400 पार का नारा दिया है। पांच संसदीय सीट वाले उत्तराखंड की भूमिका इसलिए अहम है क्योंकि इस लक्ष्य को साधने की असली शुरूआत यहीं से होनी है। यहां भाजपा लगातार दो बार से पांच की पांच सीट जीत रही है और यहां पहले चरण में ही मतदान खत्म हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उत्तराखंड से बड़ी आस लगाए बैठे हैं। उन्होंने उत्तराखंड से संबंधित विषयों पर दैनिक जागरण के सवालों का जवाब दिया।

 

Following is the transcript of PM's interview:

 

प्रश्न - प्रधानमंत्री महोदय, उत्तराखंड में पांचों सीटों पर लगातार तीसरी बार विजय के दावे का क्या आधार है?

उत्तर - देवभूमि उत्तराखंड से मेरा आत्मीय लगाव है, मैंने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण समय यहां पर बिताया है। यहां रहने के दौरान मुझे उत्तराखंड निवासियों की आकांक्षाओं को जानने-समझने का अवसर मिला। पिछले 10 वर्षों में, हमने उत्तराखंड में जो काम किए हैं, उससे यहां के लोगों के जीवन में ऐसे बदलाव हुए हैं, जिनकी प्रतीक्षा वो पिछले कई वर्षों से कर रहे थे। जो लोग आज यहां विकास को जमीन पर उतरते हुए देख रहे हैं, या जिन्हें हमारी योजनाओं का लाभ मिला है, वही उत्तरांखड में भाजपा की जीत का दावा कर रहे हैं। पूरा उत्तराखंड फिर एक बार, मोदी सरकार के नारे लगा रहा है। पिछले 10 वर्षों में हमारा यही प्रयास रहा है कि देवभूमि के लोगों की हमसे जो भी अपेक्षाएं हैं, हम उससे एक कदम आगे बढ़कर दिखाएं। उत्तराखंड गंगा यमुना जैसी अनेक नदियों का उद्गम स्थल है, इसलिए हमने इन नदियों को स्वच्छ रखने पर बल दिया है। हमारी सरकार ने नमामि गंगे योजना के तहत घाट निर्माण, एसटीपी निर्माण और नदी की सफाई से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण कार्यों को गति दी। यहां के तीर्थस्थलों के विकास को हमने अपनी प्राथमिकता बनाई है। आल वेदर चार धाम रोड प्रोजेक्ट, सड़कों के चौड़ीकरण, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन और हेलीकाप्टर सुविधाओं के माध्यम से हमने लोगों के लिए उत्तराखंड पहुंचना सुविधाजनक बनाया। केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण और बद्रीनाथ धाम के विकास प्रोजेक्ट से श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है। हेमकुंड साहिब, यमुनोत्री, पूर्णागिरी मंदिर के लिए रोप वे की सुविधा पर तेजी से काम हो रहा है। यात्रियों की बढ़ती हुई संख्या ने पर्यटन के क्षेत्र में नए अवसर तैयार किए हैं। हल्द्वानी और नैनीताल के लिए सिटी डेवलपमेंट योजना, जमरानी बांध, सौंग बांध, ऊधम सिंह नगर में एम्स के सैटेलाइट सेंटर की स्थापना, जैसे विकास के कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं। मैंने कई अवसरों पर कहा है कि ये दशक उत्तराखंड का दशक है। इस विजन को जमीन पर उतारने के लिए हम उत्तराखंड के हर व्यक्ति का सामर्थ्य बढ़ाने में जुटे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंदर यहां लगभग 85 लाख घर बनकर तैयार हुए हैं। जल जीवन मिशन का कवरेज नौ फीसद से बढ़कर 92 फीसद पहुंच चुका है। उत्तराखंड के सभी गांव और शहर खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं। उज्ज्वला योजना के अंतर्गत पांच लाख से अधिक एलपीजी गैस कनेक्शन दिए गए हैं। सौभाग्य योजना के तहत उत्तराखंड के 21 लाख घरों को बिजली कनेक्शन दिया गया है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत उत्तराखंड के साढ़े 9 लाख किसानों को 2000 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी गई है। यहां की 3 लाख से ज्यादा बहनों को पीएम मातृ वंदना योजना का लाभ मिला है। विकास की इस गति ने उत्तराखंड के लोगों को एक नए विश्वास से भर दिया है। इसी विश्वास की वजह से हमने विधानसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार जीतने का रिकार्ड बनाया था, और 2024 में हम तीसरी बार सभी सीटें जीतने का रिकार्ड बनाएंगे।

प्रश्न- आपने राज्य में कई ढांचागत विकास की बड़ी योजनाएं शुरू की हैं, इससे मतदाता प्रभावित भी दिख रहा है, लेकिन एक वर्ग में इसे पर्यावरण विरोधी कार्य भी करार दिया जा रहा है और इसे चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश भी हो रही है। इस पर आपकी सरकार की क्या सोच है?

उत्तर- हम इकोनामी और इकोलाजी को साथ लेकर काम करते हैं। उत्तराखंड में हमने संवेदनशील और संतुलित विकास का रास्ता पकड़ा है। पिछली सरकारों के समय यहां निर्माण कार्यों में पर्यावरण से जुड़ी सावधानियां नहीं रखी गईं। जिसके घातक परिणाम हम सबने देखे हैं। देखिए, भारत सरकार के किसी भी प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले वन एवं पर्यावरण संबंधी सारी अनुमति ली जाती है। विभिन्न स्तरों पर प्रोजेक्ट का मूल्यांकन होता है, और वो किस प्रकार पर्यावरण को प्रभावित करेगा इसका विस्तृत अध्ययन किया जाता है। इन प्रोजेक्ट्स में स्थानीय लोगों की भी भागीदारी सुनिश्चित की जाती है और उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों को भी सुलझाया जाता है। पहाड़ी क्षेत्रों में हमारी सरकार का हमेशा से ये प्रयास रहा है कि जो भी विकास कार्य हो वो पर्यावरण को ध्यान में रखकर किए जाएं। पहाड़ के मुश्किल क्षेत्र में रहने वाले लोगों के जीवन में बदलाव जरूरी है, साथ ही पर्यावरण का संरक्षण भी जरूरी हैI उत्तराखंड की भाजपा सरकार यहां की प्राकृतिक सुंदरता और संवेदनशीलता से छेड़छाड़ किए बगैर इज आफ लिविंग को बढ़ावा दे रही है। देवभूमि में लोगों के लिए सड़कें और अस्पताल बनें, शिक्षा के लिए अच्छे कालेज हों, युवाओं के लिए नए अवसर हों, ये सब बहुत जरूरी है। एक समय में इन सुविधाओं की कमी उत्तराखंड से पलायन की बड़ी वजह रही है। अब हमारी सरकार का इन सब पर निरंतर फोकस है, जिससे बहुत हद तक पलायन रुका है।

प्रश्न- यूसीसी देने के बावजूद उत्तराखंड में यह चुनावी मुद्दा नहीं बना, विपक्ष भी कहीं इसे मुद्दा नहीं बनाता नहीं दिख रहा। क्या माना जाए की आम जन ने इसे स्वीकार कर लिया है और इसलिए विपक्ष भी मजबूर है?

उत्तर - हम बहुत पहले से यूनिफार्म सिविल कोड के बारे में बात करते आए हैं। चुनाव हों या ना हों, यूसीसी को लेकर हमारा दृष्टिकोण स्पष्ट है। समान नागरिक संहिता की आवश्यकता आज पूरे देश में महसूस की जा रही है। मुझे बहुत खुशी है कि उत्तराखंड ने पहल की और यूसीसी को लागू कर दिया। इस मुद्दे पर आजादी के पहले से विचार विमर्श चल रहा है। देश की आजादी के बाद हमारे पास ये अवसर था कि हम समान नागरिक संहिता की तरफ कदम बढ़ाते, लेकिन उस वक्त की कुछ राजनीतिक ताकतों ने अपने स्वार्थ के लिए अलग-अलग वर्गों के लिए अलग-अलग कानून की पैरवी की। मैं पूरे देश को एक परिवार मानता हूं और मैं समझता हूं कि एक परिवार में सभी लोगों पर एक जैसा कानून लागू होना चाहिए। आप ही बताइए परिवार के अलग-अलग सदस्यों के लिए अलग-अलग कानून कहां तक उचित है? बाबा साहेब आंबेडकर ने कहा था कि हमें स्वतंत्रता इसलिए मिली है ताकि हमारी सामाजिक व्यवस्था में जहां हमारे मौलिक अधिकारों के साथ विरोध है, वहां सुधार कर सकें। हमने अपने संकल्प पत्र में भी कहा है कि भाजपा देशभर में यूसीसी लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। आम जनता हमेशा से ही ये चाहती थी कि देश में प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक समान कानून बने। कानूनी प्रावधानों के आधार पर लोगों में भेदभाव ना हो। आज विपक्ष के नेता भी ये जानते हैं कि उत्तराखंड समेत पूरे भारत में लोग यूसीसी का समर्थन कर रहे हैं, इसलिए विपक्ष इसका विरोध नहीं कर पा रहा। मुझे आशा है कि राष्ट्रीय स्तर पर भी विपक्ष समान नागरिक संहिता का विरोध नहीं करेगा।

प्रश्न- काफी पहले कांग्रेस के एक नेता ने तत्कालीन सीडीएस जनरल विपिन रावत के बारे में अपशब्द कहे थे। उसे आज भी मुद्दा बनाना उचित है क्या?

उत्तर- देखिए, ये सिर्फ एक घटना या एक बयान नहीं था। इसमें कांग्रेस की सोच और नीयत दिखती है। देश के पहले चीफ आफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत के लिए कांग्रेस द्वारा जिन अपशब्दों का प्रयोग किया गया, उसे एक छोटा मुद्दा मान लेना ठीक नहीं है। जनरल बिपिन रावत ने पूरे उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए देश के पहले सीडीएस का कार्यभार ग्रहण किया था। उन्होंने देश की सशस्त्र सेनाओं में काफी रिफार्म्स किए और उनकी सोच डिफेंस सेक्टर को आत्मनिर्भर बनाने की थी। उत्तराखंड जैसा राज्य जहां के प्रत्येक परिवार से कोई न कोई बच्चा सशस्त्र सेना का हिस्सा है, उस राज्य के सपूत जनरल बिपिन रावत के बारे में ऐसी बातें करना हमारी तो सोच से परे है। उत्तराखंड राज्य में हमारी सेनाओं के लिए कितनी श्रद्धा है, कितना त्याग और समर्पण है, ये बात पूरा देश जानता है। उनके बारे में जो अपशब्द कांग्रेस ने इस्तेमाल किये हैं, वो पूरे उत्तराखंड की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। उत्तराखंड की गरिमा को चोट पहुंचाने वाली कांग्रेस की भद्दी टिप्पणी को देवभूमि के लोग हमेशा याद रखेंगे। लोगों को ये भी याद है कि ये वही कांग्रेस है जो बार-बार सेना के मनोबल पर सवाल उठाती है। सेना की कार्रवाई का सबूत मांगती है। कांग्रेस ने अपने समय में हमारी सेनाओं को आवश्यक उपकरण, हथियार, सैनिकों के लिए यूनिफार्म, ठंडे क्षेत्रों में ड्यूटी करने के लिए आवश्यक कपड़े भी उपलब्ध नहीं कराए थे, और उसका खामियाजा पूरे देश को भुगतना पड़ा। आज भारत डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। हम अपनी सेना को हर प्रकार की सुविधा मुहैया करवा रहे हैं। जनरल बिपिन रावत भी इसी सोच के पक्षधर थे। जनरल बिपिन रावत के बारे में जो टिप्पणी कांग्रेस ने की है, उसके लिए उत्तराखंड कभी भी ऐसी पार्टी को माफ नहीं करेगा।

प्रश्न- आपका मेनिफेस्टो हाल में आया है। इसमें उत्तराखंड के लिए क्या है?

उत्तर- भाजपा के संकल्प-पत्र से उत्तराखंड के भविष्य के रोडमैप को लेकर बहुत कुछ स्पष्ट हो जाता है। हमने ऐसे सभी उपायों पर फोकस किया है, जिससे पहाड़ का पानी और जवानी दोनों पहाड़ के काम आए। हमने अपने संकल्प पत्र में गरीब, किसान, नारीशक्ति और युवाशक्ति को प्राथमिकता दी है। हमने अगले 5 वर्षों तक जरूरतमंदों को मुफ्त राशन जारी रखने की गारंटी दी है। आयुष्मान कार्ड धारकों को 5 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज मिलता रहेगा। उत्तराखंड में 55 लाख लाभार्थियों के आयुष्मान कार्ड बने हैं और यहां के 270 अस्पताल पैनल में शामिल हैं। सोचिए, ये उत्तराखंड के लोगों के लिए कितनी बड़ी राहत की बात है। भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में एक और बड़ी घोषणा की है। हमने 70 वर्ष से ऊपर के हर बुजुर्ग को आयुष्मान भारत योजना का लाभ पहुंचाने का संकल्प लिया है। इसका फायदा पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले उन सभी बुजुर्गों को होगा, जो अस्वस्थ रहते हैं। भाजपा का संकल्प है कि गरीबों के लिए और 3 करोड़ पक्के मकान बनाए जाएंगे। पानी, बिजली, गैस कनेक्शन जैसी सुविधाएं देश के हर गरीब तक पहुंचाई जाएंगी। उत्तराखंड में महिलाओं को आर्थिक मजबूती देने वाली मुद्रा योजना का विस्तार किया जा रहा है। भाजपा ने इस योजना के तहत लोन की सीमा को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने का संकल्प लिया है। मैंने 3 करोड़ बहनों को लखपति दीदी बनाने की गारंटी दी है। स्वनिधि योजना का विस्तार छोटे कस्बों और गांव-देहात तक करने की तैयारी है। इन योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में उत्तराखंड के लोगों को भी मिलेगा। हम अपने धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों को संवारने का अभियान और तेज करेंगे। हमने अपने संकल्प पत्र में सीमावर्ती गांवों से जुड़े थीम आधारित सर्किट के विकास का लक्ष्य रखा है। इसी तरह नदियों से जुड़े पर्यटन को विकसित करने की योजना बनाई गई है। दवा निर्माण के क्षेत्र में हम भारत को ‘विश्व की फार्मेसी’ के रूप में विकसित करने की योजना बना रहे हैं। इसमें बड़ा योगदान उत्तराखंड का होगा। यहां मैं ये भी बता दूं कि हमने संकल्प पत्र में जो बातें रखी हैं, उनके मुताबिक पहाड़ी क्षेत्रों के संतुलित विकास के लिए हम एक विशेष मास्टर प्लान तैयार करने वाले हैं। इस कदम का भी उत्तराखंड को विशेष लाभ मिलने वाला है।

प्रश्न- आपकी उत्तराखंड के लिए क्या गारंटी है?

उत्तर- हमने भाजपा के संकल्प पत्र को मोदी की गारंटी के रूप में देश के समक्ष रखा है। पिछले 10 वर्षों में सरकार ने कई बड़े फैसले करके करोड़ों लोगों के जीवन को बेहतर बनाया है। हमने उन मुद्दों का भी समाधान किया है, जिन्हें दशकों से लटकाया जा रहा था। अयोध्या में राम मंदिर, आर्टिकल 370, तीन तलाक जैसे विषयों पर हमने देशहित को महत्व दिया और कड़े फैसले लिए। यही वजह है कि आज भाजपा के हर संकल्प को लोग गारंटी के रूप में देखते हैं। देवभूमि के लिए मोदी की गारंटी है कि यहां के युवाओं के लिए अधिक से अधिक अवसरों का निर्माण होगा, ताकि विकसित भारत के संकल्प में विकसित उत्तराखंड की महत्वपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित हो। हमने अपने संकल्प पत्र में भंडारण के लिए नए कलस्टर बनाने का एलान किया है। हमने किसानों के हित के लिए कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन शुरू करने की गारंटी दी है। इसमें सिंचाई, स्टोरेज से लेकर फूड प्रोसेसिंग तक की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसका बहुत बड़ा फायदा उत्तराखंड के किसानों को मिलेगा। हमारी गारंटी है कि राज्य में उद्योग, निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर का और विस्तार होगा। हम हर उस योजना को प्राथमिकता देंगे, जिससे यहां के लोगों को पलायन कर कहीं और ना जाना पड़े। उत्तराखंड को पर्यटन और तीर्थाटन का हब बनाने की दिशा में हम अपने प्रयासों को और गति देंगे। हमने अपने संकल्प पत्र में जल, जंगल, वायु और पर्यावरण को बचाने की गारंटी दी है। उत्तराखंड के विकास में हम अपनी इस गारंटी को लागू करेंगे।