উত্তর প্রদেশে ৬০ হাজার কোটি টাকার ৮১টি প্রকল্পের শিলান্যাস অনুষ্ঠানে যোগ দিলেন প্রধানমন্ত্রী মোদী

একটি দরদী সরকার হিসাবে আমাদের উদ্দেশ্যই হল সাধারণ মানুষের জীবনের দুঃখ-দুর্দশাকে লাঘব করে তাঁদের জীবনযাত্রাকে আরও সহজ করে তোলা: প্রধানমন্ত্রী মোদী

বর্তমান সরকারের অধীনে উত্তর প্রদেশে প্রকল্পগুলি মাত্র পাঁচ মাসের মধ্যেই যে গতিতে এগিয়ে গেছেতা এক কথায় অভূতপূর্ব: প্রধানমন্ত্রী মোদী

এই সমস্ত প্রকল্প থেকে একদিকে যেমন বহু নতুন নতুন কর্মসংস্থানের সুযোগ সৃষ্টি হবে অন্যদিকে তেমনই সমাজের বিভিন্ন স্তরের মানুষ নানাভাবে উপকৃতও হবেন: প্রধানমন্ত্রী মোদী

প্রধানমন্ত্রী শ্রী নরেন্দ্র মোদী রবিবার (২৯ জুলাই, ২০১৮) লক্ষ্ণৌ সফরকালে উত্তরপ্রদেশে ৬০ হাজার কোটি টাকার ৮১টি প্রকল্পের শিলান্যাস অনুষ্ঠানে যোগ দেন।

 

এ বছর ফেব্রুয়ারি মাসে উত্তরপ্রদেশ বিনিয়োগ বৈঠকের কয়েক মাসের মধ্যেই এই প্রকল্পগুলিকে বাস্তবায়িত করার উদ্যোগ নেওয়া হয়েছে। রাজ্যে বিনিয়োগ আকর্ষণ এবং শিল্পায়নের প্রসারে ঐ বৈঠকের আয়োজন করা হয়।

অনুষ্ঠানে প্রধানমন্ত্রী দেশের কয়েকটি প্রান্তে প্রবল বর্ষণের উল্লেখ করে বলেন, পরিস্থিতির ওপর নজর রাখার পাশাপাশি ক্ষতিগ্রস্ত জনসাধারণের কাছে সহায়তা পৌঁছে দেওয়ার জন্য কেন্দ্র রাজ্যগুলির সঙ্গে একযোগে কাজ করে চলেছে।

 

শ্রী মোদী বলেন, একটি দরদী সরকার হিসাবে কেন্দ্রীয় সরকারের উদ্দেশ্যই হল সাধারণ মানুষের জীবনের দুঃখ-দুর্দশাকে লাঘব করে তাঁদের জীবনযাত্রাকে আরও সহজ করে তোলা। রবিবারের এই সমাবেশকে উত্তরপ্রদেশের রূপান্তর প্রচেষ্টারই একটি অঙ্গ বলে তিনি বর্ণনা করেন। প্রধানমন্ত্রী বলেন, প্রস্তাব পেশ থেকে শুরু করে শিলান্যাস অনুষ্ঠান – এই কাজগুলি মাত্র পাঁচ মাসের মধ্যেই যে গতিতে এগিয়ে গেছে, তা এক কথায় অভূতপূর্ব। এই সাফল্যের জন্য রাজ্য সরকারকে অভিনন্দন জানান তিনি। প্রধানমন্ত্রী বলেন, এই প্রকল্পগুলি রাজ্যের মাত্র কয়েকটি অংশের মধ্যেই সীমাবদ্ধ থাকবে না, বরং এক সুষম উন্নয়নের কাজে তা বিশেষভাবে সাহায্য করবে।

উত্তরপ্রদেশ সরকারের নতুন কর্মসংস্কৃতির সপ্রশংস উল্লেখ করেন প্রধানমন্ত্রী। তিনি বলেন, রাজ্যের পরিবর্তিত বিনিয়োগ পরিস্থিতি কর্মসংস্থান, ব্যবসা-বাণিজ্য, পর্যাপ্ত বিদ্যুৎ সরবরাহ, ভালো রাস্তাঘাট নির্মাণ এবং সর্বোপরি এক উজ্জ্বল ভবিষ্যৎ গড়ে তোলার পথ প্রশস্ত করে তুলেছে। কারণ এই সমস্ত প্রকল্প থেকে একদিকে যেমন বহু নতুন নতুন কর্মসংস্থানের সুযোগ সৃষ্টি হবে, অন্যদিকে তেমনই সমাজের বিভিন্ন স্তরের মানুষ প্রকল্পগুলি থেকে নানাভাবে উপকৃতও হবেন। ‘ডিজিটাল ইন্ডিয়া’ এবং ‘মেক ইন ইন্ডিয়া’র মতো প্রধান প্রধান কর্মসূচিগুলি এই সমস্ত প্রকল্প রূপায়ণের ফলে বিশেষভাবে উৎসাহিত হবে বলে মনে করেন তিনি।

শ্রী মোদী বলেন, দেশের পল্লী অঞ্চলে যে ৩ লক্ষ সাধারণ পরিষেবা কেন্দ্র গড়ে উঠেছে তা গ্রামের জীবনযাত্রার ক্ষেত্রে আমূল পরিবর্তন এনে দিয়েছে। এর মূলে রয়েছে এই পরিষেবা কেন্দ্রগুলির স্বচ্ছ ও দক্ষ পরিষেবা।

 

প্রধানমন্ত্রী বলেন, সমস্ত রকম দ্বিধা-দ্বন্দ্ব দূর করে কেন্দ্রীয় সরকার এখন বিশেষভাবে জোর দিয়েছে সমাধান ও সমন্বয় প্রচেষ্টার ওপর। বিশ্বের দ্বিতীয় বৃহত্তম মোবাইল ফোন উৎপাদনকারী দেশ হল ভারত। অন্যদিকে, এই নির্মাণ তথা উৎপাদন শিল্পে এক অগ্রণী ভূমিকা পালন করছে উত্তরপ্রদেশ।

প্রধানমন্ত্রীর মতে, পরিকাঠামো প্রকল্পগুলির কাজ সম্পূর্ণ হওয়ার সাথে সাথে ভারতে বাণিজ্যিক কাজকর্ম ক্রমান্বয়ে সহজতর হয়ে উঠবে এবং সার্বিকভাবে ব্যয়ের বোঝা বা মাত্রাও অনেকাংশেই হ্রাস পাবে। ডিজিটাল পদ্ধতিতে লেনদেনে উদ্যোগী হতে তিনি আহ্বান জানান ব্যবসায়ী ও শিল্পোদ্যোগীদের উদ্দেশে।

 

দেশে বিদ্যুতের যোগান ব্যবস্থাকে আরও উন্নত করে তোলার লক্ষ্যে প্রয়োজনীয় পদক্ষেপ গ্রহণের কথা বলেন শ্রী নরেন্দ্র মোদী। দেশ যে ক্রমশঃ চিরাচরিত জ্বালানি থেকে পরিবেশ-বান্ধব জ্বালানি ব্যবহারের দিকে এগিয়ে চলেছে, একথা স্মরণ করিয়ে দিয়ে তিনি বলেন যে সৌরশক্তি তথা সৌর জ্বালানির একটি বিশেষ কেন্দ্র হয়ে উঠবে উত্তরপ্রদেশ। ভারতে জ্বালানি শক্তির ঘাটতি ২০১৩-১৪ আর্থিক বছরের ৪.২ শতাংশ থেকে বর্তমানে ১ শতাংশেরও নিচে নেমে এসেছে বলে জানান তিনি।

প্রধানমন্ত্রী বলেন, নতুন ভারত গঠনের মূল দিশাই হল জন-অংশীদারিত্বের মাধ্যমে সাধারণ মানুষের আশা-আকাঙ্ক্ষার সঠিক ও বাস্তব রূপায়ণ। 

 

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Text of PM’s remarks during inauguration of Swaminarayan Hindu Temple in Paris
September 06, 2026

पूज्य महंत स्वामी, फ्रांस सरकार के सम्मानित प्रतिनिधिगण, उपस्थित अतिथिगण, इंडियन कम्युनिटी के मेरे साथी, देश दुनिया से जुड़े सभी हरि भक्त, देवियों और सज्जनों, जय स्वामीनारायण!

आज फ्रांस की राजधानी पेरिस में भव्य स्वामीनारायण मंदिर का लोकार्पण हो रहा है। यह लोकार्पण भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ है। पूज्य संत जनों और सनातन परंपरा के श्रेष्ठ जनों के आशीर्वाद के साथ आज इस लोकार्पण का मंच ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के भाव का मंच बन गया है। भगवान स्वामीनारायण की कृपा और हमारे संतों का स्नेह, संतों का आशीर्वाद, मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसे पुण्य अवसरों से जुड़ने का अवसर हमेशा मिलता रहता है। आज भी मैं भले ही पेरिस में आप सबके बीच उपस्थित नहीं हूं, लेकिन मन से और हृदय से, मैं स्वयं को आपके बीच ही अनुभव कर रहा हूं।

साथियों,

आज इस अवसर पर मैं परम पूज्य प्रमुख स्वामी जी महाराज का भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करता हूं। प्राचीन काल में भारत का जो सांस्कृतिक आध्यात्मिक वैभव था, उन्होंने उसके पुनर्जागरण का एक अभियान शुरू किया था। आज उसका प्रकाश यूरोप समेत पूरी दुनिया में फैल रहा है। 2024 में अबू धाबी में भव्य मंदिर का लोकार्पण हुआ था। आज वहां हजारों लोग दर्शन करने जाते हैं और अब यहां पेरिस में स्वामीनारायण मंदिर का निर्माण सृजन की यह निरंतरता, यह संतों की संकल्प शक्ति का ही प्रमाण है। मैं पुनीत कार्य के लिए पूज्य महंत स्वामी का आभार प्रकट करता हूं, मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं। मैं BAPS स्वामीनारायण संस्था को और करोड़ों हरि भक्तों को इस अवसर पर हृदय की गहराई से बधाई देता हूं।

साथियों,

BAPS के माध्यम से जब अलग-अलग देश में मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा होती है, तो वहां भारत के प्राचीन विचार और मानवीय मूल्य भी साथ-साथ ही जाते हैं और भारत का विचार कहता है ‘समानं मनः सह चित्तमेषाम्’ अर्थात हमारे मन समान हो, हमारे हृदय साथ जुड़े। इसलिए आज जब फ्रांस में इतना भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है, यह फ्रांस की विविधता को तो समृद्ध करेगा ही, इससे भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों को भी ऊर्जा मिलेगी।

साथियों,

बीते वर्षों में भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। मेरे मित्र, प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मिलकर दोनों देश एक Special Global Strategic Partnership बना रहे हैं। Technology, AI और Defence से लेकर Space और Climate Action तक हम एक नई गति और नई ऊर्जा के साथ मिलकर के आगे बढ़ रहे हैं। हम 2026 को India-France Year of Innovation के रूप में भी सेलिब्रेट कर रहे हैं। भारत-फ्रांस की ये Strategic Partnership इसलिए भी खास है, क्योंकि ये हमारे पुराने सांस्कृतिक-राजनैतिक सम्बन्धों की मजबूत बुनियाद पर टिकी है। इतिहास गवाह है, फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदान का इतिहास आज भी मन-मंदिर में जीवित है। भाषा से जुड़े विषयों में रुचि रखने वाले लोग यह भी जानते हैं कि फ्रेंच स्कॉलर्स ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में कितनी अहम भूमिका निभाई है। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद पर रोमाँ रोलाँ की की लेखनी हमारी सोसाइटीज़ को और करीब लाई है। पेरिस से पुडुचेरी के अरबिंदो आश्रम तक 'The mother' की spiritual journey, उसने कितने ही भारतीय और फ्रेंच साधकों को inspire किया है।

साथियों,

दशकों पहले श्रील प्रभुपाद स्वामी भी फ्रांस आए थे। इस्कॉन के जरिए भारत फ्रांस के बीच आध्यात्मिक सम्बन्धों का नया अध्याय उन्होंने शुरू किया था। आज योग भी भारत-फ्रांस के people to people कनेक्ट का एक माध्यम बन चुका है। 'इंटरनेशनल योगा डे' पर एफिल टॉवर के सामने से आने वाली तस्वीरें फ्रांस में योग की लोकप्रियता का उदाहरण बनती हैं और अब BAPS के इस भव्य मंदिर के जरिए, हमारे उन सांस्कृतिक सम्बन्धों में एक नया अध्याय जुड़ रहा है।

साथियों,

इन दिनों, भारत फ्रांस Joint Ventures की संभावनाओं पर बातें होती हैं। स्वामीनारायण मंदिर ने इस संभावना में भी एक नया आयाम जोड़ा है। यह मंदिर 'मेड इन इंडिया' है और 'बिल्ट इन फ्रांस' है। इसके काफी पत्थरों को भारत में तराशा गया है। भारत की प्राचीन प्रतिभा यहाँ फ्रांस में आधुनिक इंजीनियरिंग से आकर जुड़ चुकी है। पेरिस में इस भव्य मंदिर ने आकार लिया है। इसलिए, मैं आशा करता हूँ, यह मंदिर सदियों तक भारत और फ्रांस के बीच सहयोग और संभावनाओं का भी प्रतीक बनकर उभरेगा।

साथियों,

स्वामीनारायण मंदिर हमेशा से भक्ति के साथ-साथ सेवा का माध्यम भी रहे हैं। मुझे बताया गया है, यह मंदिर भी सेवा प्रकल्पों का वैसा ही केंद्र बनेगा। मुझे विश्वास है कि यहाँ से भारतीय संस्कृति के जो स्वर निकलेंगे, उनका लाभ पूरे यूरोप में लोगों को मिलेगा। भविष्य में मुझे जब भी समय मिलेगा, मैं इस मंदिर में दर्शन करने का प्रयास अवश्य करूंगा। इन्हीं शब्दों के साथ, एक बार फिर आज के इस लोकार्पण समारोह में सम्मिलित सभी अतिथिगणों को, सभी परिवारों को, सभी हरि भक्तों को और पूरी Indian Diaspora को मेरी ओर से इस शुभारंभ पर्व की ढेरों शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

मर्सी बोकू!

जय स्वामीनारायण!